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सरकारी स्कूलों के लिए पंजाब सरकार का नया नियम शिक्षक और छात्र की गैरहाजिरी पर सीधा एक्शन

 चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। 1 अप्रैल से पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुपस्थिति को लेकर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब यदि कोई छात्र या शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर रहता है, तो इसकी तुरंत जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी। छात्रों की अनुपस्थिति पर सीधा संपर्क नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है, तो उसकी डिटेल माता-पिता को भेजी जाएगी। यदि कोई छात्र लगातार 2 से 3 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल प्रशासन सीधे अभिभावकों से फोन पर संपर्क करेगा और अनुपस्थिति का कारण पूछेगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना और ड्रॉप-आउट रेट को कम करना है। शिक्षकों पर भी रहेगी नज़र मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगी यदि कोई शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर होता है, तो इसकी सूचना उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के माता-पिता को भी दी जाएगी। शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति की स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को सूचित किया जाएगा और उनकी जगह तुरंत दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि बच्चों का सिलेबस पीछे न रहे। भारत की पढ़ाई बनाम इंडिया की पढ़ाई चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने शिक्षा के दोहरे स्तर पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दो तरह की शिक्षा है-एक ‘इंडिया’ की शिक्षा (महंगे प्राइवेट स्कूल) और दूसरी भारत की शिक्षा (सरकारी स्कूल)। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि पहले सरकारी स्कूलों को केवल दलिया खाने वाले स्कूल बना दिया गया था, जहाँ शिक्षा से ज्यादा अन्य चीजों पर ध्यान था। मान सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा करना है, ताकि गरीब का बच्चा भी वही क्वालिटी एजुकेशन पा सके जो अमीर के बच्चों को मिलती है।

जल संसाधन मंत्री सिलावट का बयान: प्रदेश में जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ाएं

प्रदेश में अधिक से अधिक हों जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी ली बैठक भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के गांव-गांव, नगर-नगर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी समाज के सभी वर्गों एवं आमजन के सहयोग से अपने-अपने क्षेत्र में वृहत रूप से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य कराएं और इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से चलाया जा रहा है जो तीन माह तक चलेगा। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी बैठक लेकर अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अधीक्षण यंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, श्रीमती हर्षा जैनवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में कराए जाने वाले कार्यों की कछारवार विस्तृत रूप रेखा तैयार कर आगामी 3 दिवस में प्रस्तुत की जाए। अभियान के सम्बन्ध में समय-समय पर विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक मैं बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य रूप से जल संग्रहण स्रोतों के रख-रखाव एवं मरम्मत के अनुरूप अपूर्ण कार्यां को पूर्ण करना, निर्मित तालाब की पाल पर मिट्टी के कटाव अथवा अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्माण किये जाने, तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि के मरम्मत का कार्य, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकना, संपूर्ण नहर प्रणाली में घास, झाडी, छोटे पेड पोधे आदि की सफाई का कार्य एवं वृक्षारोपण, शहरी आबादी क्षेत्रों में प्रमुख नहरों का चिन्हाकंन व सीमांकन का कार्य, स्टाप डेम बैराज-वीयर के गेट इत्यादि की मरम्मत, बांध के फ्लस बार स्लूज बेल की मरम्मत तथा सफाई का कार्य, केचमेंट एरिया में अवरोध का चिन्हांकन कर उसे हटाना तथा अन्य आवश्यक तकनीकी कार्य आदि कराए जा रहे हैं। अधिकारियों को सभी कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए।  

बुंदेलखंड की 90 हजार ग्रामीण महिलाओं ने किया दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार

लखनऊ. एक वक्त था जब बुंदेलखंड की पहचान सूखे, पलायन और गरीबी से थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसी बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं देश के सामने आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं हैं। बुंदेलखंड की करीब 90 हजार महिलाओं ने दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कारोबार खड़ा कर इतिहास रच दिया है। झांसी जिले से शुरू हुई यह यात्रा आज बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, ललितपुर और महोबा में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह 1143 गांवों में फैले इस नेटवर्क में महिलाएं प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहीं हैं। बलिनी एमपीसीएल से जुड़ी महिलाएं अब तक दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार कर चुकीं हैं। पहले जहां बिचौलियों के कारण दूध का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता था, वहीं अब सीधे बैंक खातों में भुगतान होता है। प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं, वित्तीय सहायता और उपलब्ध बाजार ने इन महिलाओं को सच्चे अर्थों में उद्यमी बना दिया है। महिलाओं का यह समूह अब ग्रामीण डेयरी व्यवसाय का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।  परिवार और समाज में आया बदलाव घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं। जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं। प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचेगी योजना  योगी सरकार ने इस मॉडल को प्रदेश के 31 जिलों तक पहुंचा दिया है, जिसके तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले दुग्ध उत्पादन का कुल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया है। जल्द ही इसे प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। यह महज एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं का जीवंत प्रमाण है, जहां बुंदेलखंड की बेटियां अब पूरे देश को दिशा दिखा रहीं हैं।  

कनाडा: हिंदुओं को खालिस्तानी समर्थकों की धमकी, HCF ने कहा- हम झुकेंगे नहीं

लुधियाना  खालिस्तान समर्थकों ने कनाडा में फिर से हिंदुओं को धमकियां देनी शुरू कर दी। खालिस्तान चरमपंथी संगठनों(CBKE) ने 5 अप्रैल 2026 को 2 बड़े हिंदू मंदिरों के बाहर 'खालिस्तान जिंदाबाद' रैलियां और प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। खालिस्तान समर्थक ब्रैम्पटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को टारगेट कर रहे हैं। खालिस्तानियों ने बकायदा सोशल मीडिया पर इन मंदिरों के गेट पर प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। वहीं, हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (HCF) ने इस पर तुरंत सख्त बयान जारी किया है। उन्होंने साफ कहा है "हमारे मंदिर पूजा के पवित्र स्थान हैं, ये प्रदर्शन के मैदान नहीं हैं। हम धमकी के आगे नहीं झुकेंगे।" HCF ने पूरे कनाडा की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी देते हुए कहा कि इन चरमपंथियों को रोको, वरना हिंदू समुदाय का भरोसा कनाडा की पुलिस और सरकार से टूट जाएगा। खालिस्तान समर्थकों की धमकी पर हिंदुओं जवाब, जानिए..     खालिस्तानियों की धमकी: CBKE ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके साफ ऐलान किया कि 5 अप्रैल को ब्रैम्पटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर 'खालिस्तान जिंदाबाद रैली' निकाली जाएगी। ये रैलियां सीधे मंदिर के गेट पर होगी।     हिंदुओं को सुनने पड़ेंगे नारे: खालिस्तान समर्थकों ने धमकी देते हुए कहा है कि हिंदू जब पूजा करने आएंगे तो उन्हें नारे सुनने पड़ेंगे, धक्का-मुक्की हो सकती है। खालिस्तान समर्थक कनाडा में पहले भी मंदिरों के बाहर माहौल खराब करने की कोशिश कर चुके हैं।खालिस्तान समर्थक एसजेएफ की तरफ से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट।     हिंदुओं को उकसाने की साजिश: खालिस्तानियों की धमकी के बाद HCF का कहना है कि ये कोई शांतिपूर्ण विरोध नहीं, बल्कि जानबूझकर उकसावे की साजिश है। मंदिर को राजनीतिक स्टेज बनाने की कोशिश की जा रही है।     2024 में हिंदुओं पर लाठियां चलाई थी: HCF का कहना है कि 3 नवंबर 2024 को ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर पर खालिस्तान समर्थकों ने दिन-दहाड़े हमला बोल दिया था। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्गों पर लाठियां चलाई थी। सिर्फ इसलिए क्योंकि वे शांतिपूर्वक पूजा कर रहे थे। HCF कहता है कि वो हमला अकेला नहीं था, लगातार मंदिरों को टारगेट किया जा रहा है, भक्तों को डराया जा रहा है। महिलाओं-बच्चों को धमकाया जा रहा है।     अब की बार पीछे नहीं हटेंगे: HCF ने अपने बयान में बहुत साफ-साफ शब्दों में जवाब दिया है और कहा है कि हमारे मंदिर पवित्र हैं। ये विरोध प्रदर्शन के स्थल नहीं, न ही राजनीतिक मंच हैं। अगर इस बार कोई हरकत हुई तो हम डरकर पीछे नहीं हटेंगे। HCF का कहना है कि हम चुप नहीं रहेंगे। हम डरेंगे नहीं। हम अपने मंदिरों से नहीं भागेंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय कनाडा का अभिन्न हिस्सा है। वे शांतिप्रिय हैं, लोकतंत्र और प्लूरलिज्म में विश्वास रखते हैं। लेकिन अब काफी हो चुका। सरकार हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।नवंबर 2024 में मंदिर के बाहर खालिस्तान समर्थकों का हंगामा और हिंदुओं पर हमला करते हुए।      मंदिरों के आसपास बने बबल जोन: HCF कहना है कि कनाडा की संसद ने पहले ही बिल C-9 पास किया है। इसमें पूजा स्थलों पर घृणा, धमकी और बाधा डालने को सख्त सजा का प्रावधान है। ब्रैम्पटन में पहले से ही मंदिरों के आसपास 'बबल जोन' बना दिए गए हैं, जहां प्रदर्शन करना मना है।     टारगेट करना प्रोस्टेस्ट नहीं, धमकी है: हिंदू संगठन ने साफ कहा किटारगेट करना कोई प्रोटेस्ट नहीं, ये धमकी है। पूजा में बाधा डालना कोई फ्री स्पीच नहीं, ये जबरदस्ती है। खालिस्तान समर्थक हिंदू समुदाय को चुप कराने की कोशिश कर रहा है। HCF ने चेतावनी दी कि ये सिर्फ हिंदुओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे कनाडा की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक भाईचारे के लिए खतरा है।     खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ करें कार्रवाई: HCF ने कनाडा के अलग-अलग शहरों की पुलिस को पोसट टैग करते हुए लिखा है कि खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।     हिंसा भड़काने वालों की जवाबदेही तय हो: HCF ने कहा है कि कनाडा की खुफिया एजेंसी ने कई बार चेतावनी दी है कि कनाडा-आधारित खालिस्तानी चरमपंथी घरेलू सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। HCF का कहना है कि जो लोग हिंसा को भड़काते हैं, उनकी पहचानकर जवाबदेही तय की जाए।

झारखंड में 103 प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए जेपीएससी ने जारी किया नोटिस जानें परीक्षा का नया शेड्यूल

 झारखंड झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) ने स्टेट पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा 2026 की नई तारीख घोषित कर दी है. इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले हजारों उम्मीदवार काफी समय से एग्जाम डेट (JPSC Pre Exam Date) का इंतजार कर रहे थे. अब उनका इंतजार खत्म हो गया है. आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक JPSC प्रीलिम्स परीक्षा अब 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी. इससे पहले परीक्षा की तारीख 12 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर नई तारीख घोषित कर दी गई. JPSC Pre Exam से 103 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 103 पदों को भरा जाएगा. इसमें कई अहम प्रशासनिक पद शामिल हैं. डिप्टी कलेक्टर के 28 पद, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी DSP के 42 पद और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के 2 पद शामिल हैं. इसके अलावा असिस्टेंट रजिस्ट्रार के 2 पद, असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 10 पद और जेल सुपरिटेंडेंट के 2 पद भी इस भर्ती में शामिल हैं. साथ ही असिस्टेंट डायरेक्टर-कम-डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के 10 पद, प्रोबेशन ऑफिसर के 4 पद और असिस्टेंट डायरेक्टर के 3 पद भी भरे जाएंगे. चयन प्रक्रिया JPSC PCS भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले उम्मीदवारों को प्रीलिम्स परीक्षा देनी होती है. जो उम्मीदवार इस चरण में सफल होते हैं, उन्हें मेन्स परीक्षा के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद मेन्स में सफल उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. इन तीनों चरणों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों का फाइनल सेलेक्शन किया जाता है. इसके बाद उन्हें झारखंड राज्य की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है.

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

सीएम योगी ने दी डिजिटल, सशक्त और आधुनिक आंगनवाड़ी व्यवस्था की सौगात

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था को डिजिटल, सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इस अवसर पर उन्होंने 69,804 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन, 18,440 कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने 450 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न बाल विकास एवं महिला कल्याण परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।  69 हजार से अधिक स्मार्टफोन वितरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को 69,804 स्मार्टफोन वितरित किए। यह पहल आंगनवाड़ी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्मार्टफोन के माध्यम से अब पोषण ट्रैकिंग, बच्चों का डेटा अपडेट, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सरकारी योजनाओं का रियल-टाइम क्रियान्वयन संभव होगा। नियुक्ति पत्र से जमीनी ढांचे को मिली नई मजबूती कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 18,440 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। यह भर्ती रिक्त पदों को भरने के साथ ही सेवा तंत्र को और मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने रायबरेली, अमेठी, सिधौली, गोसाईगंज समेत विभिन्न जिलों की चयनित अभ्यर्थियों को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे, जिससे पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का संदेश भी गया। कुपोषण से लड़ाई को मिलेगा बल मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर और वेइंग स्केल जैसे आधुनिक उपकरण वितरित किए। प्रदेशभर में 10,553 इन्फेंटोमीटर, 1,33,282 स्टेडियोमीटर और 58,237 मदर-चाइल्ड वेइंग स्केल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन उपकरणों से बच्चों की लंबाई, ऊंचाई और वजन की सटीक निगरानी होगी, जिससे कुपोषण की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। ‘सक्षम आंगनवाड़ी’, अब सेवा केंद्र से आगे बढ़कर विकास केंद्र बनेंगी प्रदेश में 23,697 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित किया गया है, जिन पर 236 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन केंद्रों को एलईडी स्क्रीन, आरओ मशीन, ईसीसीई (अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन) किट और आधुनिक फर्नीचर से सुसज्जित किया गया है। अब ये केंद्र केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। 75 जिलों में फैला विशाल नेटवर्क आज उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 897 बाल विकास परियोजनाएं लगभग 1.89 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से संचालित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट, डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, ताकि हर बच्चे और हर मां तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंच सकें। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ बचपन ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। प्रदेश में उत्तम पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और समुचित देखभाल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है। आज आंगनवाड़ी केंद्र सुरक्षित, प्रेरणादायक और खेल-आधारित वातावरण प्रदान कर रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। सीएम ने हाथों मिले नियुक्ति पत्र, स्मार्टफोन व डिवाइस नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों में मीरा देवी (रायबरेली), महिमा (अमेठी), शहरुनिशां (सिधौली), शैलू सिंह (गोसाईगंज), किरण तथा सुभाषिनी और बक्शी का तालाब की मेनका पाल को नियुक्ति पत्र वितरित किए। वहीं सहायिकाओं में सुभाषिनी, मेनका पाल, मंजू सिंह, मुस्कान सोनकर और रूमा देवी को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने 69,804 स्मार्टफोन के वितरण के क्रम में मंच पर लखनऊ की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों – आशा यादव, प्रीति सैनी, अमिता मिश्रा, अर्चना रावत, माया देवी, सुनीता रस्तोगी, निधि जायसवाल, मीना शुक्ला, प्रिया पाल और नेहा भारती को स्मार्टफोन प्रदान किए। वहीं मुख्य सेविकाओं में पूनम राय, अरुणा वाजपेई, मीनू देवी, रूमी रानी और उषा देवी को भी स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने मंच से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस (जिसमें स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर व वेइंग स्केल शामिल हैं) का वितरण किया। इनमें नाहिद परवीन, सावित्री, यूतिका सिंह, राधा पांडे, आस्था पाल, अनीता, नीलू रावत, राजरानी, बीना मिश्रा और रेखा मिश्रा सम्मिलित रहीं।  

राजधानी रांची में पीएनजी सप्लाई की रफ्तार हुई धीमी 78 हजार घरों में ढांचा तैयार पर हजारों उपभोक्ता अब भी परेशान

रांची झारखंड की राजधानी रांची के कई इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन हजारों उपभोक्ता आज भी कनेक्शन के इंतजार में हैं. कहीं तकनीकी बाधाएं हैं, तो कहीं मैनपावर की कमी है. शहर में अब तक लगभग 78,000 घरों के लिए घरेलू पीएनजी (डीपीएनजी) का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है. इनमें से कुल 54,000 घरों में पीएनजी पहुंचाना अभी बाकी है. अलग-अलग विभागों से अनुमति नहीं मिलने के कारण गैस पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. कई घरों के किचन में पाइपलाइन लग चुकी है, लेकिन गैस सप्लाई नहीं होने से कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहा है. किचन तक पहुंची पाइपलाइन, पर गैस नहीं रांची के सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल के सामने हेरिटेज गार्डन निवासी कुमुद झा बताती हैं कि तीन साल से अधिक समय हो गए हैं. किचन तक पाइपलाइन लग चुकी है. मुख्य सड़कों तक भी पाइपलाइन बिछ गई है, लेकिन अब तक गैस सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है. 24,000 घरों में गैस आपूर्ति शुरू खबर यह भी है कि पेट्रोलियम कंपनी गेल ने रांची शहर में लगभग 24,000 घरों तक गैस आपूर्ति शुरू कर दी है. इनमें लगभग 18,000 उपभोक्ता ही पीएनजी का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, 6,000 घरों में उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी चालू नहीं कराया है. इनमें कई लोग किरायेदार हैं, तो कई लोग इन घरों में नहीं रह रहे हैं. रोजाना दिए जा रहे 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन इस समय रांची में रोजाना औसतन लगभग 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए जा रहे हैं. पिछले 15 दिनों में लगभग 900 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं. वहीं, हर दिन औसतन लगभग 100 नए उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कर रहे हैं. कनेक्शन देने के लिए 20 एजेंसियों को लगाया गया है, लेकिन काम की गति धीमी है. इनसे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो पा रहे हैं, जबकि लक्ष्य हर दिन 200-300 कनेक्शन देने का है. इसके लिए लगभग 150 लोगों की जरूरत है. सेल सिटी में 1808 फ्लैट, लेकिन पीएनजी कनेक्शन नहीं रांची की सेल सिटी में रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी है. यहां कुल 1808 फ्लैट हैं, लेकिन अब तक पीएनजी कनेक्शन की सुविधा नहीं है. इसी तरह बोड़ेया रोड स्थित बैंक कॉलोनी के एसोटेक हिल्स के कई फ्लैटों में भी यह सुविधा शुरू नहीं हुई है. इन इलाकों में अधूरा है पीएनजी कनेक्शन रांची में पुलिस लाइन कांके, लालपुर, टाटीसिल्वे, किशोरगंज, कांटाटोली से बूटी मोड़ रोड, बोड़ेया रोड सहित कई इलाकों में पीएनजी कनेक्शन अधूरा है. इन इलाकों में पीएनजी चालू होने से कनेक्शन की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज गेल अधिकारियों ने बताया कि रांची के कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज किया जा चुका है. इनमें बरियातू, हरमू, अशोक नगर, मेकन कॉलोनी, अरगोड़ा, पुंदाग, हटिया, धुर्वा, तुपुदाना, पटेल नगर, प्रेम नगर, दिनकर नगर, नामकुम, अमेठिया नगर, खेलगांव, टाटीसिल्वे, चायबागान, काली नगर, खरसीदाग और कांके शामिल हैं. लालपुर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है. बाकी क्षेत्रों में कार्य प्रगति पर है. कटहल मोड़ से अरगोड़ा तक, चेशायर होम रोड में कई अपार्टमेंट हैं. किरायेदार होने या अपार्टमेंट खाली होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पा रहा है, जबकि इन इलाकों में पीएनजी सप्लाई चालू है. रजिस्ट्रेशन के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जरूरी घरेलू पीएनजी कनेक्शन का रजिस्ट्रेशन कराते समय केवल 500 रुपये या 4500 रुपये (विभिन्न योजनाओं के अनुसार) का सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है. यह भुगतान ऑनलाइन, पीओएस मशीन या चेक से किया जा सकता है. गेल नकद भुगतान स्वीकार नहीं करता है. यदि कोई नकद मांग करता है, तो उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1800123121111 पर संपर्क कर सकते हैं. कई क्षेत्रों में पाइपलाइन के लिए अनुमति मिली गेल को फिरायालाल चौक, सुजाता चौक से सिरमटोली होते हुए स्टेशन रोड, जेल मोड़ से लालपुर चौक तक और करमटोली चौक से जेल मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने की पथ निर्माण विभाग से अनुमति मिली है. इस क्षेत्र में काम होने से 10 हजार से अधिक लोगों को कनेक्शन मिल सकेगा. रातू रोड तक पीएनजी पहुंच चुका है, लेकिन बजरा, पिस्का मोड़, पंडरा और कमड़े तक पाइपलाइन पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. गेल झिरी रिंग रोड के पीछे-पीछे पाइपलाइन बिछाने पर विचार कर रहा है.

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: अरुणाचल की नेडी न्गी, महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर ने 5000 मीटर में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर. अरुणाचल प्रदेश की मिडिल-डिस्टेंस धाविका नेडी न्गी ने महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, जबकि महाराष्ट्र ने पुरुष वर्ग में शानदार 1-2 स्थान हासिल किया। वहीं, बेमौसम बारिश के कारण सोमवार को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के छठे दिन एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के उद्घाटन दिन का शाम का सत्र रद्द करना पड़ा। नेडीन्गी ने अधिकांश दौड़ में खुद को संयमित रखा और अंतिम 200 मीटर में जोरदार स्प्रिंट लगाते हुए 18:24.66 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर (15:11.35 सेकंड) और सूरज माशी (15:11.64 सेकंड) ने बेहतरीन तालमेल के साथ दौड़ते हुए क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीते। नेडीन्गी ने दौड़ के बाद साई मीडिया से कहा, “मैं अकादमियों पर ध्यान देने के बाद वापसी कर रही हूं और यहां स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हूं। अब जब मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो गई है, तो मैं नेशनल कैंप में जगह बनाने और आगे चलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय टीम में चयनित होने पर ध्यान देना चाहती हूं।” अरुणाचल प्रदेश की नेडी न्गी के स्वर्ण पदक जीतने से राज्य ने पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया, जहां उसके खाते में अब छह स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक हो गए हैं। अंबिकापुर में कुश्ती से मिले दो स्वर्ण पदकों के साथ कर्नाटक ने तालिका में अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। रोहन डोड्डामनी ने स्विमिंग पूल के बाहर कर्नाटक का पहला स्वर्ण पदक दिलाया, जब उन्होंने 60 किग्रा ग्रीको-रोमन फाइनल में राजस्थान के दिनेश सोलंकी को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया। इसके बाद मनीषा ने दिन का समापन करते हुए हिमाचल प्रदेश की मुस्कान को कड़े मुकाबले में 12-8 से हराकर कर्नाटक के लिए एक और स्वर्ण पदक जीता। कर्नाटक के अब कुल 17 स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक हो गए हैं। ओडिशा नौ स्वर्ण, चार रजत और 10 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, मुलायम खरवार ने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में राजस्थान के राकेश मीणा को एकतरफा मुकाबले में हराकर बिहार को दिन का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। कर्नाटक के केवी केम्प्पन्नावर ने इस वर्ग में कांस्य पदक जीता। रायपुर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पसंदीदा टीम ओडिशा ने फाइनल में जगह बनाते हुए मिजोरम से मुकाबला तय किया। सेमीफाइनल में ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया, जबकि मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से मात दी। परिणाम एथलेटिक्स महिला 5000 मीटर: स्वर्ण – नेडी न्गी (अरुणाचल प्रदेश) 18:24.66 सेकंड; रजत – आरती दावर (मध्य प्रदेश) 18:29.28 सेकंड; कांस्य – त्सुचोई टी (नागालैंड) 18:35.60 सेकंड पुरुष 5000 मीटर: स्वर्ण – गोविंद पाडेकर (महाराष्ट्र) 15:11.35 सेकंड; रजत – सूरज माशी (महाराष्ट्र) 15:11.64 सेकंड; कांस्य – रंगलाल डोडियार (मध्य प्रदेश) 15:22.48 सेकंड हॉकी (सेमीफाइनल) महिला: मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से हराया; ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया कुश्ती महिला 53 किग्रा: स्वर्ण – नेहा उरांव (झारखंड); रजत – प्रीतीमा खाखलारी (असम); कांस्य – मैनारी खाखलारी (असम), लालवेनहिमी (मिजोरम) 76 किग्रा: स्वर्ण – मनीषा सिद्दी (कर्नाटक); रजत – मुस्कान (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – लालहमंगाईहसांगी (मिजोरम) पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – मुलायम खरवार (बिहार); रजत – राकेश मीणा (राजस्थान); कांस्य – केवी केम्प्पन्नावर (कर्नाटक) 97 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – हमाम हुसैन (जम्मू-कश्मीर); रजत – मोहित कुमार (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – मोहम्मद वसीम चौधरी (जम्मू-कश्मीर) 60 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – रोहन डोड्डामनी (कर्नाटक); रजत – दिनेश सोलंकी (राजस्थान); कांस्य – जुह पा यू जुह नोंगतडू (मेघालय) 87 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – पियूष गुज्जर (हिमाचल प्रदेश); रजत – रियाज हुसैन (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – टेक चंद (हिमाचल प्रदेश)

योगी सरकार की पहल को बताया तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, कहा- डिजिटल सुविधाओं से सशक्त होंगी कार्यकत्रियां

लखनऊ. योगी सरकार में अब आंगनवाड़ी सेवाएं डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनने जा रहीं हैं। आंगनवाड़ी व्यवस्था को और दुरुस्त बनाने के लिए लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम को दौरान स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी नई मजबूती प्रदान करती है। नवनियुक्त कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सराहना करते हुए खुशी जताई।   कार्यक्रम में पहुंचीं नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री अंजली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्टफोन से हमारा काम सुचारु रूप से चल पायेगा, साथ ही अब डाटा संरक्षण में आसानी होगी। तो वहीं नवनियुक्त आशा कार्यकत्री सुभाषिनी ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ जिसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्तियां मेरिट आधार पर पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुईं हैं।   नवनियुक्त आशा कार्यकत्री रितिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मुख्यमंत्री से आज जो ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस प्राप्त हुआ है उससे आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन अच्छे से नाप पाऊंगी। सुपरवाइजर अरुणा बाजपेयी ने बताया कि  मुझे आज स्मार्टफोन मिला है जिससे मैं अपना विभागीय कार्य को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।  लाभार्थियों ने कहा कि डिजिटल आंगनवाड़ी की यह पहल न केवल कार्यकत्रियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी। यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में बदलती व्यवस्था, पारदर्शी शासन और तकनीक के माध्यम से सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा संदेश बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश की आंगनवाड़ी सेवाएं अब डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनेंगी। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।