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IPL रिकॉर्ड्स में MI सबसे आगे, टॉप-5 में तीन बार मुंबई इंडियंस का नाम

नई दिल्ली  मुंबई इंडियंस ने आईपीएल में पिछले 13 सालों से चले आ रहे अपने पहले मैच को हारने के तिलिस्म को तोड़ दिया है। आईपीएल 2026 के अपने पहले मैच में MI ने रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स को 6 विकेट से शिकस्त दी। यह आईपीएल इतिहास में मुंबई इंडियंस का अब तक का सबसे बड़ा सफल रन चेज भी रहा। इसके अलावा MI ने किसी एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत के अपने ही रिकॉर्ड को और बेहतर किया। ये केकेआर के खिलाफ मुंबई इंडियंस की 25वीं जीत थी जो आईपीएल इतिहास में किसी एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ किसी भी टीम का सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड है। इतना ही नहीं, टॉप 5 में मुंबई इंडियंस ही 3 बार है। MI ने आखिरकार तोड़ा पहले मैच में हार का तिलिस्म रविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट के नुकसान पर 220 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। हालांकि मुंबई इंडियंस ने जीत के लिए 221 रनों के लक्ष्य को 5 गेंद और 6 विकेट बाकी रहते ही हासिल कर लिया। मुंबई के ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर को प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजा गया जिन्होंने 4 ओवर में 39 रन देकर 3 विकेट झटके। KKR के खिलाफ MI का दबदबा आईपीएल के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मुंबई इंडियंस का दबदबा साफ-साफ नजर आता है। दोनों टीमें आईपीएल में अब तक 36 बार आमने-सामने हो चुकी हैं और इनमें 25 बार मुंबई इंडियंस ने जीत हासिल की है। ये आईपीएल इतिहास में किसी भी एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत का रिकॉर्ड है। अपने होमग्राउंड वानखेड़े में मुंबई इंडियंस का केकेआर के खिलाफ रिकॉर्ड जबरदस्त रहा है। दोनों टीमों के बीच इस मैदान में ये 13वां मुकाबला था और मुंबई इंडियंस ने 11वीं बार जीत हासिल की। मुंबई इंडियंस यूं ही नहीं है सबसे खतरनाक टीमों में शुमार आईपीएल में किसी एक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत के टॉप 5 रिकॉर्ड को देखें तो शीर्ष पर मुंबई इंडियंस है। उसने केकेआर के खिलाफ अब तक 36 मैचों में 25 जीत हासिल की है। इसके बाद चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स का नंबर आता है। सीएसके ने आरसीबी के खिलाफ अब तक 35 मैचों में 21 जीत हासिल की है। वहीं केकेआर ने ने भी पंजाब किंग्स के खिलाफ 35 मैचों में ही 21 जीत हासिल की है। इतना ही नहीं, मुंबई इंडियंस ने भी दो अलग-अलग टीमों के खिलाफ अब तक ठीक 21 जीत हासिल की है। एमआई ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ अब तक 37 मैचों में 21 और चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ अब तक 39 मैचों मं 21 जीत हासिल की है। यानी किसी एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत के टॉप 5 में मुंबई इंडियंस का नाम 3 बार है। IPL में किसी एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत वालीं टॉप 5 टीमें 1- मुंबई इंडियंस, 36 मैचों में 25 जीत (बनाम केकेआर) 2- चेन्नई सुपर किंग्स, 35 मैचों में 21 जीत (बनाम आरसीबी) 3- केकेआर, 35 मैचों में 21 जीत (बनाम पंजाब किंग्स) 4- मुंबई इंडियंस, 37 मैचों में 21 जीत (बनाम दिल्ली कैपिटल्स) 5- मुंबई इंडियंस, 39 मैचों में 21 जीत (बनाम CSK)

पल्लवी की बेटी महज छह महीने की थी जब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया

रायपुर जब पल्लवी पायेंग की बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब असम की इस वेटलिफ्टर के सामने एक कठिन फैसला था। या तो वह अपने पसंदीदा खेल को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। ऐसे समय में उनके पति सुखावन थौमंग ने उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मां ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। पल्लवी ने इस त्याग को सार्थक करते हुए यहां आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने उनके खेल जीवन की रफ्तार को रोक दिया। इसी दौरान वह मां बनीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग मंच पर वापसी की इच्छा उनके भीतर हमेशा बनी रही। हालांकि, मां बनने के बाद खेल में लौटने का विचार जितना उत्साहजनक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। पल्लवी ने साई मीडिया से कहा, “यह आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने मां बनने के बाद शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन एक महिला ही समझ सकती है कि पूरी फिटनेस में लौटने के लिए उसे किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बेटी को तब छोड़ा जब वह सिर्फ छह महीने की थी, ताकि मैं दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर सकूं। यह भावनात्मक फैसला था, लेकिन मुझे लगा कि यही सही समय है।” अब चार साल की उनकी बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार स्थित नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह फैसला आसान नहीं था बेटी से दूर लंबे समय तक रहना और कई बार अपने निर्णय पर सवाल उठाना, पल्लवी के सफर का हिस्सा रहा। लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया है, जबकि मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि जब मैं प्रतियोगिताओं के लिए बाहर जाती हूं, तो मेरी बेटी का पूरा ख्याल रखा जाए।” पल्लवी के पति, जो राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाजी पदक विजेता रह चुके हैं, वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं और जम्मू में तैनात हैं। इसके बावजूद वापसी का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। मां बनने के बाद 2023 में गोलाघाट में हुए राज्य चैंपियनशिप में पल्लवी छठे स्थान पर रहीं। अगले साल डिब्रूगढ़ में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब प्रतियोगिता देर रात तक चली और वह अपनी लय नहीं बना सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाने लगी। तेजपुर में हुए राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और उसी साल अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस वर्ष भी अस्मिता लीग में एक और स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया। रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक उनके लिए खास रहा। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक मेरे करियर के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला है कि मैं इस स्तर की खिलाड़ी हूं।”

एयरपोर्ट में नौकरी पाने का मौका: 12वीं पास के लिए भी लाखों का पैकेज, जानें कौन सा कोर्स करें

 नई दिल्ली एविएशन सेक्टर आज के दौर में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले इंडस्ट्रीज में से एक बन चुका है, जहां करियर के कई नए रास्ते खुल रहे हैं. अगर आप भी ऐसी नौकरी चाहते हैं जिसमें अच्छी सैलरी के साथ ग्रोथ और प्रोफेशनल माहौल मिले, तो एयरपोर्ट से जुड़े कोर्स आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं. इन कोर्सेज के जरिए आपको एयरपोर्ट पर कई भूमिकाओं में काम करने का मौका मिल सकता है जिससे आप अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं. इन कोर्सेज के जरिए आप ग्राउंड स्टाफ, केबिन क्रू, कस्टमर सर्विस जैसे कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा सकते हैं।  एयरपोर्ट पर काम करना केवल अच्छी सैलरी नहीं देते बल्कि प्रोफेशनल माहौल, स्मार्ट लाइफस्टाइल और ग्रोथ का भी बेहतरीन मौके देते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से कोर्स एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाते हैं।  ग्राउंड स्टाफ  ग्राउंड स्टाफ को एयरपोर्ट पर यात्रियों की मदद करने के लिए तैनात की जाती है. इनका काम होता है यात्रियों का चेक-इन करवाना, बोर्डिंग पास देना और यात्रा से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी को बताना. किसी भी यात्री को फ्लाइट के टाइम, गेट नंबर समेत किसी भी चीज से जुड़ी जानकारी चाहिए होती है, तो वे ग्राउंड स्टाफ को संपर्क कर सकते हैं।  केबिन क्रू  केबिन क्रू फ्लाइट के अंदर काम करते हैं. वह यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर फोकस करते हैं. फ्लाइट उड़ने से पहले वह यात्रियों को सारी जानकारी शेयर करते हैं. इसके साथ ही वह यात्रा के दौरान खाना भी सर्व करते हैं।  एयरपोर्ट ऑपरेशन स्टाफ  एयरपोर्ट ऑपरेशन स्टाफ का काम एयरपोर्ट के संचालन को सही तरह से चलाना है. ये फ्लाइट के टेक ऑफ और लैंडिंग की प्लानिंग करते हैं. साथ ही वह यह सुनिश्चित करते हैं कि सब कुछ सुरक्षित तरीके से हो जाए।  सिक्योरिटी स्टाफ  एयरपोर्ट पर मौजूद सिक्योरिटी स्टाफ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते हैं. इनका मुख्य काम यात्रियों और उनके सामान की जांच करना होता है ताकि कोई भी ऐसा सामान फ्लाइट में न जाए जो और यात्रियों के लिए खतरा बन सके।  टेक्निकल जॉब्स  टेक्निकल जॉब्स में वे लोग आते हैं, जो तकनीक से जुड़ा काम संभालते हैं. यानी कि इंजीनियर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) अधिकारी. इंजीनियर फ्लाइट की मरम्मत का ध्यान रखता है ताकि एयरक्राफ्ट सुरक्षित रहे. वहीं ATC अधिकारी हवा में उड़ रहे विमानों को कंट्रोल करते हैं और सुरक्षित तरीके से टेक ऑफ और लैंडिंग करवाते हैं।  एयरपोर्ट इस तरह मिलती है नौकरी? एयरपोर्ट पर नौकरी पाने के कई तरीके होते हैं. एयरलाइन कंपनियां अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर वैकेंसी निकालती हैं, जहां से ऑनलाइन आवेदन कर आप इंटरव्यू और ट्रेनिंग के बाद नियुक्त होते हैं. सरकारी नौकरियों के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी के तहत एग्जाम और इंटरव्यू के जरिए हायरिंग होती है. इसके अलावा थर्ड पार्टी कंपनियां भी ग्राउंड स्टाफ जैसी पोस्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस पर हायर करती हैं, जबकि सिक्योरिटी जॉब के लिए SSC जैसी सरकारी परीक्षा पास करनी होती है।  करनी होती है ये पढ़ाई  एयरपोर्ट पर नौकरी के लिए छात्र किसी भी स्ट्रीम से 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद एविएशन से जुड़े कोर्स जैसे डिप्लोमा इन  एविएशन हॉस्पिटैलिटी, एयरपोर्ट मैनेजमेंट या ग्राउंड स्टाफ सर्विस कोर्स करना अच्छा होता है. साथ ही इस फील्ड में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, कॉन्फिडेंस और अच्छी पर्सनालिटी होना बहुत आवश्यक है. वहीं, ग्राउंड स्टाफ पोस्ट पर काम करने के लिए 12वीं पास या ग्रेजुएशन के साथ बेसिक कंप्यूटर नॉलेज जरूरी है. केबिन क्रू के लिए 12वीं या ग्रेजुएशन के साथ अच्छी इंग्लिश, कम्युनिकेशन स्किल और अच्छी पर्सनालिटी चाहिए. टेक्निकल जॉब्स के लिए इंजीनियरिंग करनी होती है, जबकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के लिए BSc या B.Tech के साथ इसे जुड़ी परीक्षा पास करना जरूरी होता है।  मिलती है आकर्षक सैलरी  एयरपोर्ट पर सैलरी एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है. ग्राउंड स्टाफ को करीब 20,000 से 40,000 तक, केबिन क्रू को 25,000 से 1,00,000 तक और ऑपरेशन स्टाफ को 30,000 से 60,000 तक सैलरी मिलती है. वहीं, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को 40,000 से 1.5 लाख रुपये तक सैलरी मिल सकती है। 

पाकिस्तान की बिना तैयारी वाली पंचायत, सऊदी अरब और मिस्र की उल्टे पांव वापसी, मिशन दलाली हुआ नाकाम

कराची   अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. इस्लामाबाद में आयोजित विदेश मंत्रियों की अहम बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समय से पहले ही समाप्त हो गई. यह बैठक 29–30 मार्च को दो दिनों तक चलने वाली थी, लेकिन यह एक ही दिन में खत्म हो गई. इस सम्मेलन में तु्र्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच संभावित बातचीत के लिए एक मध्यस्थता ढांचा तैयार करना था।  हालांकि कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में किसी ठोस रोडमैप या कार्ययोजना पर सहमति नहीं बन सकी. इसकी सबसे बड़ी बाधा ईरान की सख्त शर्तें रहीं, जिसमें उसने सुरक्षा की गारंटी और बातचीत के लिए भरोसेमंद आश्वासन की मांग की थी. इन मुद्दों पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई. सूत्रों का कहना है कि बैठक में शामिल किसी भी देश ने ईरान की मुख्य चिंताओं को दूर करने को लेकर ठोस भरोसा नहीं जताया. जिस बैठक का उद्देश्य इस युद्ध को खत्म कराने के लिए समझौता कराना था, वो वक्त से पहले खत्म हो गई।  बिना तैयारी पाकिस्तान ने बुला ली पंचायत इसका असर यह हुआ कि सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री 29 मार्च को ही बैठक छोड़कर रवाना हो गए, जिससे सम्मेलन तय समय से पहले ही खत्म हो गया. बैठक के दौरान देशों के बीच मतभेद भी साफ नजर आए. पाकिस्तान और तुर्की, जहां मध्यस्थता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे, वहीं सऊदी अरब और मिस्र ने ज्यादा सतर्क रुख अपनाया. इन देशों का मानना था कि किसी भी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले सीधे अमेरिका से चर्चा जरूरी है. खासतौर पर सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के इस दावे का पूरी तरह समर्थन करने में हिचक दिखाई कि वे अमेरिका और ईरान के बीच सफल मध्यस्थता कर सकते हैं. इससे बैठक में एकजुटता की कमी साफ नजर आई।  जिस काम के लिए आए, वो हुआ ही नहीं बैठक का एक अहम निष्कर्ष यह भी रहा कि पाकिस्तान और तुर्की अब ईरान से संपर्क कर उसे अपनी शर्तों में नरमी लाने के लिए राजी करने की कोशिश कर सकते हैं. ईरान अब तक अपने पिछले अनुभवों को देखते हुए ठोस गारंटी की मांग पर अड़ा हुआ है. हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बावजूद सभी देशों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है, ताकि क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सके. कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक अगर यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं, तो इस सप्ताह ही एक नई बैठक आयोजित की जा सकती है. फिलहाल तो क्षेत्रीय देशों के बीच भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं बन पा रहा है।   

नशा विरोधी अभियान में फरीदकोट ने गाड़े झंडे, पंजाब के टॉप जिलों में बनाई अपनी पहचान

फरीदकोट भगवंत मान सरकार के नशा विरोधी अभियान के तहत पंजाब का फरीदकोट जिला एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है. जिले में कुल अपराध में 37% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि लूटपाट के मामलों में 97% रिकवरी दर हासिल हुई है. यह "युद्ध नशेयां विरुद्ध" और ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत लगातार चल रही कार्रवाई का परिणाम है।  फरीदकोट में यह बदलाव सख्त कार्रवाई, तकनीक आधारित निगरानी और मजबूत जनभागीदारी के संयोजन से संभव हुआ है. इन प्रयासों ने स्थानीय स्तर पर नशा नेटवर्क को कमजोर किया है और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया है. भगवंत मान सरकार का नशे के तंत्र को खत्म करने का अभियान अब जिला स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।  पुलिस अधिकारियों के अनुसार ग्राम रक्षा समितियों (VDC), गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं के साथ नियमित बैठकों से जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी मजबूत हुई है. इसके चलते लोग अब नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों की जानकारी सक्रिय रूप से साझा कर रहे हैं, जिससे पुलिस को तेजी और सटीकता के साथ कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।  अभियान की निगरानी कर रहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रज्ञा जैन, आईपीएस ने कहा, “लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है क्योंकि सूचनादाताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और तुरंत कार्रवाई की जाती है. हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि यह विश्वास नशे और अपराध के खिलाफ कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण ताकत बनकर उभरा है।  इस बदलाव में तकनीक की भी अहम भूमिका रही है. फरीदकोट के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों ने निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया है. ढिलवां कलां गांव में एक व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित किया गया है, जो लिंक सड़कों और आसपास के राजमार्गों को कवर करता है. इस प्रणाली की रियल-टाइम निगरानी गांव प्रशासन और पुलिस दोनों के पास उपलब्ध है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।  स्थानीय लोगों ने भी इन प्रयासों के असर को स्वीकार किया है. गांव के सरपंच सुखजीत सिंह ने बताया कि सीसीटीवी निगरानी के जरिए नशा तस्करी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता चल रहा है, जिससे पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पा रही है और अपराध होने से पहले ही आरोपियों को पकड़ा जा रहा है।  सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने भी इस बदलाव को सकारात्मक बताया है. सहारा सेवा सोसाइटी के चेयरमैन प्रवीण काला ने कहा कि सख्त कार्रवाई से जिले में नशा तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और पुलिस के साथ लोगों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।  अधिकारियों ने बताया कि सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और पर्यावरण व पौधारोपण जैसी सामुदायिक पहल भी चलाई जा रही हैं, ताकि नशे के खिलाफ दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।  भगवंत मान सरकार के "युद्ध नशेयां विरुद्ध" अभियान के तहत सख्त पुलिसिंग, तकनीक का प्रभावी उपयोग और मजबूत जनभागीदारी के साथ फरीदकोट एक आदर्श जिले के रूप में उभर रहा है. यह दिखाता है कि समन्वित प्रयासों से नशा नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है और कानून-व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत किया जा सकता है। 

उमरिया खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने हेतु किसानों को विभिन्न आधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने ‘संकल्प से समाधान’ शिविर के दौरान ग्राम अमदरा निवासी किसान देवेंद्र महरा को ई-कृषि यंत्र सुपर सीडर की चाबी सौंपी। चाबी प्राप्त कर देवेंद्र महरा ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उन्होंने पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि सुपर सीडर सहित कुल 11 कृषि यंत्रों का पैकेज लगभग 22 लाख 90 हजार रुपये का है, जिस पर शासन द्वारा 9 लाख 12 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है। इस पैकेज में ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, सुपर सीडर, थ्रेसर, रोटावेटर, रिपर एवं पावर वीडर सहित अन्य उपकरण शामिल हैं। देवेंद्र महरा ने बताया कि उन्होंने गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर भी स्थापित किया है, जिसके माध्यम से अन्य किसानों को भी ये यंत्र किराये पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे किसानों को कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ मिल रहा है और उत्पादन में वृद्धि हो रही है। उन्होंने इस योजना के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

2 गोहाना धन्यवाद रैली में सीएम सैनी ने की करोड़ों की नई घोषणाएं और विकास कार्यों का आगाज

गोहाना (सोनीपत) नई सब्जी मंडी में आयोजित धन्यवाद एवं विकास रैली में पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने क्षेत्र के लिए कई बड़ी घोषणाएं करते हुए 113 करोड़ रुपये की 16 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोहाना की धरती पर आकर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है और सरकार क्षेत्र के विकास को नई गति देने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गोहाना क्षेत्र के लिए पहले की गई 97 घोषणाओं में से 87 पूरी हो चुकी हैं और बाकी पर काम जारी है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े 11 वर्षों में गोहाना हल्के में 1794 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए हैं। रैली में मुख्यमंत्री ने कई नई घोषणाएं की मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को बिना खर्ची और बिना पर्ची के रोजगार देने की नीति पर काम कर रही है। रैली में मुख्यमंत्री ने कई नई घोषणाएं भी कीं। सोनीपत चुंगी से पानीपत चुंगी तक भगवान परशुराम विरासत पार्क में जॉगिंग ट्रैक बनाया जाएगा। गोहाना में भूमि उपलब्ध होने पर मल्टी स्टोरी पार्किंग का निर्माण कराया जाएगा। नगर परिषद गोहाना की म्युनिसिपल लिमिट को बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भूमि उपलब्ध होने पर सोनीपत रोड पर शिव धाम बनाया जाएगा। महम रोड पावर हाउस में 33 केवी सब स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा और खानपुर कलां में भी 33केवी सब स्टेशन की क्षमता बढ़ाई जाएगी। गोहाना में भूमि मिलने पर टूरिज्म रिजॉर्ट भी बनाया जाएगा तथा एचएसवीपी की ओर ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाएगा।   सड़कों का निर्माण करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा मुख्यमंत्री ने कहा कि गोहाना में सिंचाई भवन, शक्ति भवन और रेस्ट हाउस का पुनर्निर्माण किया जाएगा। भगत फूल सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज में कार्डियो कैथ लैब स्थापित की जाएगी। गोहाना विधानसभा के गांवों के सरकारी स्कूलों के विकास कार्यों पर शिक्षा विभाग एक करोड़ रुपये खर्च करेगा। खानपुर कलां में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत की जाएगी और शेष सीवरेज लाइन भी बिछाई जाएगी। जिस पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा हरियाणा राज्य मार्केटिंग बोर्ड की कई सड़कों की मरम्मत और पीडब्ल्यूडी की सड़कों का निर्माण करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा।मुख्यमंत्री ने गोहाना क्षेत्र के गांवों के विकास के लिए अलग से 5 करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की।   गांव मोई माजरी के विद्यालय भवन का 3 करोड़ 77 लाख रुपये से उद्घाटन इस दौरान कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। गांव मोई माजरी के विद्यालय भवन का 3 करोड़ 77 लाख रुपये से उद्घाटन किया गया। बड़वासनी और तिहाड़ मलिक में 13 करोड़ 50 लाख रुपये से बने 33 केवी सब स्टेशनों का उद्घाटन हुआ। गोहाना नगर परिषद में 60 लाख रुपये से बने संत गुरु कबीर दास गेट का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा मार्केटिंग बोर्ड की चार सड़कों के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। भालौठ सब ब्रांच की 74 करोड़ रुपये की रिमॉडलिंग का शिलान्यास हुआ। गामड़ी और बिधल में करीब सवा 14 करोड़ रुपये की लागत से 33 केवी सब स्टेशन बनाने का शिलान्यास किया गया। खेड़ी दमकन, बड़वासनी, महलाना और जुआं में करीब सवा 2 करोड़ रुपये की लागत से स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्य का भी शिलान्यास किया गया। रैली की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने की और बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे।

ट्राइबल गेम्स 2026 का रोमांच: महिला हॉकी फाइनल में मिजोरम बनाम ओडिशा

रायपुर 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के अंतर्गत सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में महिला हॉकी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबले आज उत्साह और रोमांच के बीच खेले गए। पहले सेमीफाइनल मैच में मिजोरम की टीम ने झारखंड को कड़े मुकाबले में 3-2 से पराजित कर फाइनल में स्थान बनाया। दोनों टीमों के बीच मैच बेहद प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जिसमें मिजोरम ने अंत तक बढ़त बनाए रखी। दूसरे सेमीफाइनल मैच में उड़ीसा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश को 8-0 से हराया। उड़ीसा की टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। इन परिणामों के साथ मिजोरम और उड़ीसा की टीमें अब फाइनल में आमने-सामने होंगी, जहाँ खेल प्रेमियों खिताब के लिए रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: CG के जंगल से भारी मात्रा में हथियार बरामद

राजनांदगांव. राजनांदगांव रेंज के मोहला-मानपुर जिले के मदनवाड़ा के घने जंगलों में पुलिस को हथियारों का एक जखीरा मिला है। बताया जा रहा है कि पुलिस 31 मार्च की आखिरी तारीख  से पहले मिली यह कामयाबी नक्सल सफाए की आखिरी कील के रूप में देख रही है। आईजी बालाजी राव ने  जवानों को बधाई दी है। वहीं एसपी वाईपी सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षाबलों का हौसला बढ़ाया। मिली जानकारी के मुताबिक मदनवाड़ा इलाके में पुलिस को एके-47, इंसास रायफल व अन्य घातक हथियारों के अलावा जिंदा कारतूस डंप होने की सूचना मिली थी। सुरक्षाबलों की टीम ने मदनवाड़ा इलाके के कलवर, कोवाचीटोला और उईकाटोला के बीच स्थित बीहड़ जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया। सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कत के बाद हथियारों का एक बड़ा जखीरा  बरामद किया। पुलिस का कहना है कि नक्सलियों ने हथियारों को सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से जमीन में छिपाकर रखा था। हथियार जब्त होने से नक्सल संगठन को एक तरह से झटका लगा है। हालांकि राजनांदगांव रेंज का सर्वाधिक नक्सलग्रस्त माने जाने वाला मोहला-मानपुर जिले में अब एक भी सक्रिय नक्सली नहीं है। सूत्रों का कहना है कि कांकेर में आत्मसर्पण करने वाले नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों को जब्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटना की जांच कर रही है। इस सफलता में डीआरजी और आईटीबीपी की संयुक्त टुकड़ी की अहम भूमिका रही। मदनवाड़ा क्षेत्र में हथियार मिलने के बाद पुलिस  पूरे क्षेत्र में सघन नक्सल ऑपरेशन चला रही है।

हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मैरी बेथ हर्ट का 79 साल की उम्र में निधन

 फिल्म, टेलीविजन और थिएटर में अपने काम के लिए जानी जाने वाली दिग्गज हॉलीवुड अभिनेत्री मैरी बेथ हर्ट का निधन हो गया। उनका निधन अल्जाइमर रोग से जूझने के बाद हुआ। उन्होंने 79 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। 'इंटीरियर्स', 'द वर्ल्ड अकॉर्डिंग टू गार्प', 'द एज ऑफ इनोसेंस' और 'सिक्स डिग्रीज ऑफ सेपरेशन' जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुकीं हॉलीवुड अभिनेत्री मैरी बेथ हर्ट का 79 साल की उम्र में निधन हो गया। वह अल्जाइमर जैसे रोग से जूझ रही थीं। उनके निधन की पुष्टि उनके परिवार ने की है। कब हुआ मैरी बेथ हर्ट का निधन एएनआई के अनुसार, मैरी बेथ हर्ट ने बीते रविवार सुबह अमेरिका के जर्सी सिटी में आखिरी सांस ली। उनके परिवार के सदस्य उनके पास मौजूद थे। उनकी बेटी मौली श्रैडर और उनके पति, फिल्म निर्माता पॉल श्रैडर ने फेसबुक पर एक संयुक्त पोस्ट में उनकी मौत की पुष्टि की। मैरी बेथ हर्ट के परिवार में उनके पति पॉल श्रैडर, एक बेटी और एक बेटा हैं। परिवार ने की निधन की पुष्टि मैरी बेथ हर्ट के परिवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, 'वह एक अच्छी अभिनेत्री, पत्नी, बहन, मां और दोस्त थीं। उन्होंने इन सभी भूमिकाओं को बहुत सम्मान और मजबूती से निभाया। हम सब बहुत दुखी हैं, लेकिन यह जानकर थोड़ी तसल्ली है कि अब वे अपने कष्ट से मुक्त हो गई हैं और अपनी बहनों के साथ शांति से रह रही हैं।' मैरी बेथ हर्ट का करियर मैरी बेथ हर्ट ने अपने लंबे करियर में कई तरह की फिल्मों और सीरियल्स में काम किया। 'क्राइम्स ऑफ द हार्ट', 'ट्रेलावनी ऑफ द वेल्स' और 'बेनेफैक्टर्स' में उनके अभिनय के लिए उन्हें तीन बार टोनी पुरस्कार के लिए नॉमिनेशन मिला। उन्होंने 'द वर्ल्ड अकॉर्डिंग टू गार्प', 'यंग एडल्ट', 'द एक्सोरसिज्म ऑफ एमिली रोज', 'द लेडी इन द वाटर' जैसी फिल्मों में भी काम किया। अपने पति पॉल श्रैडर के साथ उन्होंने 'एफ्लिक्शन' और 'लाइट स्लीपर' जैसी फिल्मों में भी साथ काम किया। टेलीविजन में उन्होंने 'लॉ एंड ऑर्डर' जैसी सीरीज में छोटी भूमिकाएं कीं।