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मंत्री टेटवाल ने “स्कूल चलें हम” के तहत प्रवेशोत्सव में पुस्तक और मिठाई वितरण कर विद्यार्थियों का किया उत्साहवर्धन

भोपाल राजगढ़ के सारंगपुर के पीएम  ग्रुप शाला स्कूल में प्रवेशोत्सव में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल बच्चों के बीच पहुंचे और उन्हें अपने हाथों से मिठाई और पुस्तकें वितरित कीं। नए सत्र के पहले दिन बच्चों के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दिया। मंत्री  टेटवाल ने औपचारिकता से हटकर विद्यार्थियों के साथ सहज संवाद किया। उन्होंने बच्चों से किताब पढ़वाई और बीच-बीच में सवाल पूछकर उनकी समझ को परखा। कई बच्चों ने आत्म-विश्वास के साथ जवाब दिए, जिस पर उन्होंने उनकी सराहना की। मंत्री  टेटवाल ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि इसी तरह के विद्यालय से उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई थी, इसलिए वे भली-भांति समझते हैं कि शुरुआती कक्षाओं में मजबूत आधार कितना महत्वपूर्ण होता है। प्रवेशोत्सव के इस आयोजन में बच्चों को पुस्तकों के साथ मिठाई भी बांटी गई, जिससे विद्यालय का वातावरण उत्साह और अपनत्व से भरा नजर आया। नवप्रवेशी विद्यार्थियों को सहज तरीके से विद्यालय से जोड़ने का यह प्रयास प्रभावी रूप में दिखाई दिया। प्रदेश में शुरू हुए प्रवेशोत्सव के तहत शासकीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें प्रारंभ से ही शिक्षा के प्रति सकारात्मक रूप से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  

मां की गलती, कबाड़ी की ईमानदारी: 1.5 लाख रुपये लौटाकर पेश की मिसाल

जलालाबाद/चंडीगढ़. जलालाबाद में एक युवक की मां ने उसके डेढ़ लाख रुपयों को कबाड़ समझ कर कबाड़ी को बेच दिए। यह रकम युवक ने डेढ़ साल की मेहनत से जमा की थी। हालांकि, तीन अलग-अलग हाथों से गुजरने के बाद यह पैसे युवक को वापस मिल गए। यह घटना जलालाबाद के गांव फलियावाला से सामने आई है। गांव कमरेवाला का रहने वाला युवक सोनू एक शेलर में काम करता है। उसने चोरी के डर से अपनी डेढ़ साल की कमाई, कुल डेढ़ लाख रुपए, सूखी रोटियों के एक थैले में छिपाकर रखे थे। आज जब युवक काम पर गया हुआ था, तो उसकी मां ने एक फेरीवाले राजकुमार को कबाड़ के साथ वह थैला भी बेच दिया, जिसमें डेढ़ लाख रुपए रखे थे। फेरीवाले ने आगे यह सामान तीर्थ नामक बड़े कबाड़ी को बेचा, जिसने फिर सूखी रोटियों वाले थैले को दूध डेरी वाले पप्पू बैटरी वाले को बेच दिया। जब नौजवान घर लौटा और उसने अपनी मां से सूखी रोटियों के थैले के बारे में पूछा, तो मां ने बताया कि उन्होंने फेरीवाले को बेच दिया है। यह सुनकर सोनू हैरान रह गया और उसने तुरंत कबाड़ी की तलाश शुरू कर दी। युवक की तलाश के बाद वह कबाड़ी तक पहुंचा और अपनी पूरी बात बताई। कबाड़ी ने पप्पू बैटरी वाले से रोटियों वाला थैला वापस लाकर ईमानदारी दिखाते हुए डेढ़ लाख रुपए युवक को वापस लौटा दिए। बड़ी बात ये रही कि तीन जगह बाइक कैश वाले थैले को किसी ने भी खोलकर नहीं देखा । गांव मोहकम अराईया के सरपंच परमिंदर सिंह ने इस अनोखे मामले की पुष्टि की है। हालांकि इसके बाद नौजवान भावुक हुआ और कहता कि मैंने ईंटें उठा-उठा पैसे जोड़ थे। यह मेरी मेहनत की कमाई है जो वापस लौट आई है।

योजनाएं जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की पहल- राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनजातीय वर्ग का समग्र विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन), धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह बात राज्यपाल  पटेल ने बुधवार को मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में जनसमूह को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि दूध का पहले बच्चों के पोषण में उसके बाद अतिरिक्त दूध को बेचकर आय बढ़ाने में उपयोग करें। पशुओं की देखभाल बच्चों की तरह ही करनी चाहिए। समय पर चारा, पानी और बीमारी होने पर दवाइयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर सिकलसेल जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक एक करोड़ 28 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।  उन्होंने जेनेटिक कार्ड को बीमारी की रोकथाम का तरीका बताया। कार्ड का मिलान कर विवाह करने का परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि गर्भस्थ और प्रसूति के 72 घंटे के भीतर नवजात शिशुओं की भी जांच संभव है। जांच के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इन प्रयासों से बच्चों का वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य सुरक्षित होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं से जनजातीय क्षेत्रों में जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण और जांच के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए कहा। राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के दौरान बैगा जनजातीय नृत्य प्रस्तुति की सराहना की। जनजातीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी बताई। प्रवास के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य शिविर, पशु मेले एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गो-पूजन किया। गो-माता को फूल माला पहनाई और गुड़-केला खिलाया। संबंधितों के साथ चर्चा में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पर्यावरण के समन्वित विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला आंगनवाडी हैं, जहां उनके समग्र विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने कहा कि हरित भविष्य के लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण के साथ बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए घर में उपयोग किए गए पानी से आंगनवाड़ी की पोषण वाटिका की सिंचाई करने के लिए कहा है। राज्यपाल के आंगनवाड़ी आगमन पर आत्मीयता, संस्कार और उत्सव का समन्वय देखने को मिला। राज्यपाल की आंगनवाड़ी में उपस्थिति पर नन्ही बच्ची प्रिया भारतीय और राज्यमंत्री  लखन पटेल ने जन्मदिवस की खुशियों को केक काटकर साझा किया। राज्यपाल ने परिसर में अशोक का पौधा रोपित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय समाज तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी की पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है। उन्होंने  किसानों को पशुपालन अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल  पटेल का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल सुनिश्चित कर रहे हैं कि शासन की योजनाएं धरातल पर सही तरीके से लागू हो। उन्होंने कहा कि पहले जनजातीय क्षेत्रों में सिकलसेल की जानकारी नहीं हो पाती थी, लेकिन अब लगातार जांच शिविर आयोजित होने से लोग जागरूक हुए है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य शिविरों में जाकर जांच कराने की अपील की है। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के विकास का मील का पत्थर और एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने राज्यपाल  पटेल द्वारा जनजातीय कल्याण के लिये किए जा रहे कार्यों की सराहना की। सरकार द्वारा पशुपालन से बैगा परिवारों को रोजगार द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास बताते हुए दुग्ध उत्पादन को आय और स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। राज्यपाल  पटेल ने किया हितलाभ वितरण कार्यक्रम में बैगा समाज के प्रतिनिधि द्वारा राज्यपाल  पटेल का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। राज्यपाल  पटेल ने मंडला जिले के 50, डिंडौरी जिले के 24 एवं बालाघाट जिले के 20 बैगा जनजाति के कुल 94 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत पशु प्रदाय किए। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, टीबी फूड बास्केट,  एचवीपी प्रमाण पत्र, वन काष्ठ लाभांश भी प्रदान किए।  

नाइट शिफ्ट में महिलाओं की सुरक्षा पर सख्ती, 48 घंटे का वर्किंग वीक और आधे घंटे का ब्रेक अनिवार्य, श्रम विभाग ने जारी किए नए नियम

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के कार्य घंटे और सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। श्रम विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन 10 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान नए नियमों में महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक महिलाओं से काम लेने के लिए संस्थानों को अलग से अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति ऑनलाइन और सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर दी जाएगी। आराम के समय सहित किसी भी कर्मचारी की कुल कार्य अवधि 12 घंटे प्रतिदिन से अधिक नहीं होगी। साथ ही, हर 6 घंटे के काम के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य किया गया है। ओवरटाइम का करना होगा दोगुना भुगतान यदि किसी कर्मचारी से ओवरटाइम करवाया जाता है तो उसे सामान्य वेतन के मुकाबले दोगुना भुगतान करना होगा। इसके अलावा सभी श्रम कानूनों का पालन करना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों को खोलने और बंद करने के तय समय तथा साप्ताहिक अवकाश (क्लोज डे) की अनिवार्यता से छूट दे दी है। अब ऑनलाइन पंजीकरण और सेल्फ सर्टिफिकेशन वाले संस्थान अपनी सुविधा अनुसार कार्य समय निर्धारित कर सकेंगे। हालांकि कर्मचारियों के कार्य घंटे और अन्य श्रम कानून पहले की तरह लागू रहेंगे।  

भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट सख्त, प्लाटून कमांडर चयन निरस्त कर फिर से आवेदन का आदेश

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने होमगार्ड में प्लाटून कमांडर की चयन प्रक्रिया को दूषित पाते हुए उसे निरस्त कर दिया। कोर्ट ने नए सिरे से चयन प्रक्रिया के लिए दोबारा विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए हैं। आरोप था कि लिखित व शारीरिक परीक्षा के पहले ही नियमविरुद्ध तरीके से स्क्रीनिंग कमेटी ने अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी सविनय कुमार गर्ग की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मप्र नगर सेना वर्ग-तीन भर्ती नियम, 2000 के तहत प्लाटून कमांडर के कुल 199 स्वीकृत पद हैं। इनमें से छह प्रतिशत पद इन-सर्विस उम्मीदवारों से भरे जाते हैं। होमगार्ड डीजी ने 27 जनवरी, 2026 को चार पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस पद के लिए कुल 24 लोगों ने आवेदन किया था। नियमानुसार शारीरिक व लिखित परीक्षा के बाद स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों का एसीआर देखने के बाद चयन सूची जारी करती है। दलील दी गई कि नियमविरुद्ध तरीके से परीक्षा के पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी ने याचिकाकर्ता सहित छह उम्मीदवारों को अपात्र बताकर परीक्षा से वंचित कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि भोपाल में 16 मार्च शारीरिक परीक्षण और 17 को लिखित परीक्षा आयोजित थी, लेकिन विभाग ने 13 मार्च को ही 18 पात्र उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। दलील दी गई कि पूरी प्रक्रिया विधि-सम्मत नहीं है।  

नक्सलवाद पर बड़ा बयान: विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने अमित शाह की सराहना की

रायपुर. विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सलवाद से मुक्ति पर उनका आभार जताया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है। डॉ. रमन सिंह ने आगे लिखा है कि संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमने छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे। हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया, लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते, लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा। उन्होंने आगे लिखा, 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है, लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी। रमन सिंह ने आगे लिखा, आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले “लौह पुरुष” सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप “साध्य पुरुष” हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

पंजाब PCS मेन्स परीक्षा: 10 अप्रैल तक होगा आयोजन, 12 परीक्षा केंद्र स्थापित

पटियाला. पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा पी.सी.एस. (कार्यकारी शाखा) की मुख्य परीक्षा 1 अप्रैल से 10 अप्रैल तक करवाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। पी.पी.एस.सी. के सचिव चरणजीत सिंह ने बताया कि आयोग के चेयरमैन मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विनायक सैनी की अगुवाई में परीक्षा को सुचारू, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करवाने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। इस परीक्षा के लिए पटियाला शहर में कुल 12 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह परीक्षा सभी दिनों में दोपहर के सत्र में दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। सख्त निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर वरिष्ठ आईएएस और पी.सी.एस. अधिकारियों को ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। प्रबंधों के बारे में विस्तार से बताते हुए चरणजीत सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर बायोमेट्रिक वैरीफिकेशन सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, परीक्षा के दौरान किसी भी इलैक्ट्रॉनिक उपकरण के उपयोग को रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं। सचिव ने कहा कि परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए पटियाला पुलिस द्वारा व्यापक सुरक्षा और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पी.सी.एस. कार्यकारी शाखा सहित पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में एलाइड अधिकारियों की 331 रिक्तियों को भरने के लिए लगभग 4,200 उम्मीदवार, जिन्होंने प्रारम्भिक परीक्षा पास की है, मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे। 

बिहार में स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ी: JE रोकथाम के लिए पंचायत स्तर पर एंबुलेंस सेवा

समस्तीपुर. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण को राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने 12 जिलों को निर्देश जारी करते हुए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत संचालित एंबुलेंसों को प्रत्येक पंचायत से टैग करने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके लिए जिला परिवहन पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर एंबुलेंसों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें संचालकों के मोबाइल नंबर भी शामिल होंगे। यह सूची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर उपलब्ध रहेगी। स्वास्थ्य समिति ने एंबुलेंस संचालकों के साथ एकरारनामा करना अनिवार्य किया है, ताकि मरीज को परिवहन में किसी प्रकार की बाधा न हो। साथ ही, टैग वाहनों और उनके संचालकों की जानकारी सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे आमजन को आसानी से जानकारी मिल सके। इस सेवा के लिए 20 किलोमीटर तक 400 रुपये, 21 से 40 किलोमीटर तक 600 रुपये, 41 से 60 किलोमीटर तक 800 रुपये और 61 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इन जिलों के पंचायतों में होगी टैगिंग मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत परिचालित एंबुलेंस का प्रत्येक पंचायत के साथ टैगिंग करना है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, सारण, सीवान एवं गोपालगंज जिले को पत्र जारी किया है। निजी वाहन से लाने पर भी मिलेगा खर्च राज्य स्वास्थ्य समिति ने एईएस प्रभावित जिलों में मरीजों को अस्पताल तक लाने में होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था वर्ष 2026 में भी जारी रखने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है। समिति ने अपने पत्र में कहा है कि एईएस प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने निजी एंबुलेंस या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में मरीज के परिजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही मरीज के परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था कर दी है। इस व्यवस्था को वर्ष 2026 में भी जारी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 की तरह ही 2026 में भी निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। गर्मी और बारिश में बढ़ता है एईएस का खतरा एईएस का प्रकोप आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में अधिक होता है। ऐसे समय में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए परिवहन सुविधा को मजबूत करना प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से पत्र जारी किया गया है। इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी और विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प, बजट में महिला सशक्तिकरण और कृषि समृद्धि को मिली नई रफ़्तार

भोपल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि समृद्धि और बुनियादी अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी है। बजट में लाडली बहना जैसी सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिये पर्याप्त बजट का प्रावधान करते हुए किसानों को राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विस्तार और शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही आगामी सिंहस्थ:2028 की तैयारियों के लिये भी अभी से बड़े बजटीय प्रावधान कर प्रदेश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास किया गया है। महिला सशक्तिकरण पर फोकस प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए बजट में 23,883 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 1,801 करोड़ रुपये तथा सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत 3,863 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह प्रावधान महिला एवं बाल स्वास्थ्य और पोषण को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। किसानों के लिए राहत और सुविधाओं का विस्तार कृषि क्षेत्र को सशक्त करने के लिए भी बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अटल कृषि ज्योति योजना के लिए 13,914 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 5 हॉर्स पॉवर तक के कृषि पंपों और एक बत्ती कनेक्शन के लिए निःशुल्क बिजली सुविधा की प्रतिपूर्ति के लिये 5,276 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 5,501 करोड़ रुपये तथा प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना को नई गति ग्रामीण विकास और अधोसंरचना के विस्तार के लिए भी सरकार ने बड़े बजटीय प्रावधान किए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 6,850 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे हर गरीब परिवार को पक्की छत मिल सकेगी। ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए लगभग 2968 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं शहरी परिवहन को बेहतर बनाने के लिए मेट्रो परियोजनाओं के लिये 656 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4,454 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक शिक्षा के लिए 11,444 करोड़ रुपये तथा समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,649 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नेशनल हेल्थ मिशन के लिए 4,600 करोड़ रुपये तथा आयुष्मान भारत को मजबूत करने के लिए भी पर्याप्त बजट दिया गया है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिए 3,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ‘वेदान्त पीठ’ की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। रोजगार और निवेश को बढ़ावा प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 2,550 करोड़ रुपये का निवेश प्रोत्साहन पैकेज तथा एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार’ योजना के तहत 10,428 करोड़ रुपये का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत मध्यप्रदेश का बजट 2026-27 सामाजिक सुरक्षा, कृषि समृद्धि और अधोसंरचना विकास के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

सांदीपनी विद्यालय सागर में आयोजित प्रवेश उत्सव में हुए शामिल मेधावी छात्राओं को किया सम्मानित

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हर घर में शिक्षा का दीप जलना चाहिए और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। मंत्री  राजपूत सागर स्थित सांदीपनी विद्यालय (महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय) में आयोजित प्रवेश उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता, नए सपनों की शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम है। जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है, तो वह केवल स्कूल में प्रवेश नहीं करता बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दुनिया में प्रवेश करता है। मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा विद्यालय से जुड़े, शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन को सफल बनाए। आज भी कई बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हर घर का हर बच्चा स्कूल जाए और अपने सपनों को पूरा करे। मंत्री  राजपूत ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि आज की शिक्षा ही कल के सशक्त भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप सहित विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। मंत्री  राजपूत ने मेधावी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और छात्राएं उपस्थित रहीं।