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बड़ी खबर: पंजाब में शुक्रवार को अवकाश घोषित, सभी शिक्षण संस्थान बंद

जालंधर. आज से अप्रैल का महीना शुरू हो गया है। इसके साथ ही इस महीने भी कई छुट्टियां आ रही हैं, जिसकी वजह से पंजाब में स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे। बच्चों की मस्ती के साथ-साथ कर्मचारियों की भी मौज लगेंगी। इस दौरान स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थान बंद रहने वाले हैं। इस महीने की पहली सरकारी छुट्टी 3 अप्रैल को आ रही है। 3 अप्रैल यानी शुक्रवार को गुड फ्राइडे की छुट्टी रहेगी। इसके बाद बुधवार यानी 8 अप्रैल को श्री गुरु नाभा दास जी की जयंती आ रही है, जिसकी वजह से स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। 14 अप्रैल, मंगलवार को बैसाखी है और डॉ. बी. आर. अंबेडकर की जयंती आ रही है। इसके बाद 19 अप्रैल को भगवान परशु राम की जयंती आ रही है, जो रविवार को आ रही है। आपको यह भी बता दें कि इन सरकारी छुट्टियों के अलावा 4 रविवार भी आ रहे हैं। प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल भारत के उत्तरी भाग में स्थित पंजाब में स्वर्ण मंदिर जैसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं और 1900 ईसा पूर्व तक सिंधु घाटी सभ्यता के केंद्र के रूप में इसका ऐतिहासिक महत्व है। आप अवकाश प्राप्त कर त्योहारों में दर्शनीय स्थल में भाग ले सकते हैं। राज्य में हवाई, रेल और सड़क नेटवर्क के माध्यम से उत्कृष्ट संपर्क है, जिससे यह देश के विभिन्न हिस्सों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। पर्यटकों को ऐतिहासिक महलों, युद्धक्षेत्रों और राज्य की शोभा बढ़ाने वाली शानदार सिख स्थापत्य कला का अवलोकन करने का अवसर मिलता है। 2026 के लिए पंजाबी में बैंक अवकाश पंजाब में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय छुट्टियों के अलावा बैंक अवकाश भी होते हैं। इन छुट्टियों के दौरान बैंक कर्मचारी अवकाश पर रहते हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन के बीच हुए समझौते के अनुसार, हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को पंजाब और भारत के अन्य राज्यों के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बंद रहते हैं।

खेला हो गया: बीजेपी जुटा रही बहुमत का जादुई आंकड़ा, जेडीयू के बिना सरकार बनाने का प्लान तैयार, कांग्रेस में बड़ी टूट की आहट

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है, लेकिन सीएम की कुर्सी अभी तक नहीं छोड़ी है. ऐसे में नीतीश ने पूरी तर खामोशी अख्तियार कर रखी है, जिसके चलते मुख्यमंत्री को लेकर कशमकश बनी हुई है. ऐसे में बीजेपी सीएम चेहरे पर पत्ते खोलने के बजाय बिहार की सियासत में खुद को 'आत्म निर्भर' बनाने से आगे की दिशा में जुट गई है. बीजेपी पहली बार बिहार की राजनीति में अपना मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में खड़ी नजर आ रही है. अभी तक नीतीश कुमार की बैसाखी के सहारे ही सत्ता में भागीदार बनती रही है, लेकिन पहली बार सत्ता की स्टैरिंग उसके हाथ में होगी. नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने और विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद यह तय है कि बीजेपी जल्द ही अपना मुख्यमंत्री बना लेगी. इससे पहले बीजेपी अपने सीटों के समीकरण को दुरुस्त करने की स्टैटेजी पर काम कर रही है ताकि आगे की राह में किसी तरह की कोई मुश्किल न आ सके, ऐसे में बीजेपी की नजर कांग्रेस के बागी विधायकों पर है, जिन्हें अपने पाले करने की है. बिहार में बना रहा नया दिलचस्प समीकरण बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव के दौरान एक नया सियासी समीकरण बनाकर उभरा है. पांच राज्यसभा सीटों में से विपक्ष एक सीटें जीत सकता था, लेकिन बीजेपी ने ऐसी रणनीति चली कि आरजेडी चारो खाने चित हो गई. नंबर गेम के बाद भी विपक्ष नहीं जीत सका और एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने में कामयाब रहा. बीजेपी ने कांग्रेस के बागी विधायकों को अपने साथ मिलाने की स्टैटेजी पर इन दिनों काम कर रही है. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायक और आरजेडी के एक विधायक ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था. इसके चलते ही एनडीए सूबे की पांचों राज्यसभा सीटे जीतने में सफल रही थी. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पार्टी चाहकर भी उनके खिलाफ एक्शन नहीं ले पा रही है. हालांकि, इसके पीछे कुछ तकनीकी पहलू ऐसे हैं कि कांग्रेस के लिए इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई करना आसान नहीं है, जिसने बीजेपी को एक नई उम्मीद जगा दी है. ऐसे में कांग्रेस के विधायक अगर पाला बदल कर बीजेपी के साथ भी चले जाते हैं तो भी पार्टी कुछ नहीं कर पाएगी. इसके चलते बिहार में सीटों का नया समीकरण बन सकता है? कांग्रेस MLA पाला बदलते ही बदलेगा गेम बिहार में पिछले साल नवंबर में हुएविधानसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायक जीते थे. चुने गए विधायकों का एक नेता चुना जाता है, जिसको विधायक दल का नेता कहा जाता है. चार महीने बीत जाने के बाद भी आजतक बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है. विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने के चलते यह हुआ कि आजतक बिहार में पार्टी विधायक दल का कोई सचेतक या व्हिप भी नियुक्त नहीं हो सका है. विधायक दल के नेता और व्हिप की नियुक्ति की औपचारिक और विधिवत जानकारी विधानसभा स्पीकर को देनी होती है. व्हिप का काम ही होता है तमाम मौकों पर अपने विधायकों को वोट देने के लिए आदेश या व्हिप जारी करना. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वालों तीनों विधायक अगर बीजेपी में शामिल हो जाएं तो सदस्यता नहीं जाएगी. इसके अलावा बीजेपी की नजर एक और भी विधायक पर है. बिहार में कांग्रेस के छह में से चार विधायक अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो वे दलबदल क़ानून के दायरे में नहीं आएंगे. इस तरह बीजेपी के विधायकों की संख्या भी बढ़ जाएगी और कांग्रेस से बगावत करने वाले विधायकों की सदस्यता भी बची रह सकती है.   बीजेपी का आत्म निर्भर बनने से आगे का प्लान बीजेपी बिहार की राजनीति में लंबे समय से आत्म निर्भर बनने की कवायद में है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो सकी है. नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जाने के बाद ये तो साफ है कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बना लेगी, लेकिन जेडीयू पर उसकी निर्भरता बनी रहेगी, क्योंकि नंबर गेम अभी उसके पक्ष में नहीं है. 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थी. इस तरह दोनों के बीच में सिर्फ चार सीटों का अंतर है, लेकिन एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के पास 28 विधायक हैं. जेडीयू के अलावा एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान की पार्टी के पास 19, जीतनराम मांझी के पास 5 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास 4 विधायक हैं. दिलचस्प बात ये है कि चिराग, मांझी और कुशवाहा की वफादारी बीजेपी के पक्ष में है, क्योंकि एनडीए में उन्हें जेडीयू नहीं बल्कि बीजेपी लेकर आई है. ऐसे में बीजेपी के ही करीबी माने जाते हैं, इस तरह 28 विधायकों को बीजेपी के 89 विधायकों के साथ जोड़ लिया जाता है तो यह संख्या 117 हो जाती है. बीजेपी कैसे जुटा रही बहुमत का नंबर गेम चिराग-मांझी-कुशवाहा के विधायकों को मिलने के बाद बहुमत के आंकड़े से बीजेपी सिर्फ पांच सीटें पीछे है. ऐसे में कांग्रेस के चार विधायकों को बीजेपी अपने साथ जोड़ती है तो फिर जेडीयू के बिना एनडीए बहुमत के आंकड़े से केवल एक दूर रह जाएगी. ऐसे में अगर ज़रूरत पड़ने पर बीजेपी की जेडीयू पर निर्भरता नहीं रहेगी, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार की जेडीयू पर निर्भरता है. सके बारह सांसदों के समर्थन की बीजेपी को ज़रूरत रहेगी, लेकिन बीजेपी ने बिहार में आत्म निर्भर बनने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है.

रायगढ़ में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज रायगढ़ के बाबा प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री  साय द्वारा भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं ‘वंदे उत्कल जननी’ के मधुर गायन के साथ हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को आत्मीयतापूर्वक संबोधित करते हुए  कहा कि वे यहां अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच आए हैं। उन्होंने कहा कि रायगढ़ की जनता ने उन्हें 20 वर्षों तक सांसद के रूप में अपना भरपूर आशीर्वाद दिया है और वही स्नेह एवं अपनापन उन्हें आज भी प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच ‘रोटी-बेटी’ का अटूट रिश्ता है। उन्होंने कहा कि जशपुर के कुनकुरी से लेकर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में लोग उड़िया भाषा बोलते हैं। देवभोग-गरियाबंद क्षेत्र में आज भी महाप्रसाद के रूप में भात मिलता है और छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में रथ यात्रा का आयोजन होता है।   मुख्यमंत्री  साय ने समाज की  पत्रिका ‘सुविधा’ का विमोचन किया, जिसमें समाज के रीति-रिवाज, उपलब्धियां एवं संपर्क विवरण संकलित किए गए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जगन्नाथ रथ यात्रा के आयोजन हेतु 5 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।  मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 8 लाख आवास रिकॉर्ड समय में पूर्ण किए जा चुके हैं। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा लगभग 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रदेश खुशहाली की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा  रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 42 हजार श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन कर चुके हैं। इस योजना के माध्यम से आम नागरिकों को सुगम एवं व्यवस्थित रूप से तीर्थ दर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धर्मांतरण कराने वालों के विरुद्ध कठोर कानून पारित किया गया है, जिसमें कड़ी सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इससे अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह एवं जवानों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के प्रभाव को समाप्त करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि अब ‘नियद नेल्लानार’ के तहत बस्तर में सड़कों, बिजली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों में 20 से 25 हजार भर्तियां की गई हैं। चयन मंडल का गठन कर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएससी गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है तथा ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता लाते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए सभी समाजों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध है और वन उत्पादों के वैल्यू एडिशन के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत बकाया बिजली बिलों के भुगतान हेतु आसान किस्तों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है तथा सरचार्ज में राहत या छूट दी जा रही है।  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्कल समाज की 8 प्रतिभाओं को उनकी विशेष उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक  टंकाधर त्रिपाठी, रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, नगर निगम महापौर  जीवर्धन चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सजा सुनते ही टूटा बंदी, शहडोल जेल में गला काटकर आत्महत्या की कोशिश

शहडोल न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद एक बंदी ने जिला जेल में खौफनाक कदम उठा लिया। बुधवार सुबह बंदी ने किसी धारदार वस्तु से अपना गला काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिससे जेल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जेल प्रशासन ने बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार जारी है और हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार बंदी पंकज कटारे मंगलवार को न्यायालय से दुष्कर्म एवं पाक्सो एक्ट के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद से तनाव में था। बुधवार सुबह जब सुरक्षाकर्मी बैरक खोलने पहुंचे तो उन्हें बंदी की चादर पर खून के निशान दिखाई दिए। संदेह होने पर जब सुरक्षाकर्मी पास पहुंचे तो देखा कि पंकज कटारे के हाथ में टीन की चादर का छोटा नुकीला टुकड़ा था, जिससे वह अपने गले को काट रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे रोका और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां सर्जन डाॅ. अपूर्व पांडे ने उसका उपचार किया। डाॅक्टरों ने बताया कि बंदी के गले में गहरा घाव था, जिस पर चार टांके लगाए गए हैं। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है और संभवतः गुरुवार तक उसे अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। जेलर सुनील बैशवाड़े ने बताया कि पंकज कटारे पिछले एक वर्ष से जेल में बंद है और इस दौरान उससे मिलने उसके परिजन कभी नहीं आए और न ही किसी वकील की व्यवस्था की गई। शायद इसी कारण वह मानसिक तनाव में था और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद उसने यह कदम उठाया। जानकारी के अनुसार पंकज कटारे पहले भी दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट चुका है। करीब एक साल पहले ही वह जेल से छूटा था, जिसके बाद उसने पांडवगर क्षेत्र में एक सुनसान घर में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था, जिसके बाद से वह फिर जेल में बंद था।  

राज्य गठन के बाद पहली बार मिली इतनी बड़ी राशि, झारखंड के गांवों में आएगी विकास की क्रांति

रांची विकसित गांव और समृद्ध झारखंड का सपना अब साकार होने जा रहा है। झारखंड की 4345 पंचायतों पर वित्तीय वर्ष 2025 से 26 में छप्पर फाड़ पैसे की बारिश हुई है। राशि के अभाव में पिछड़ रहे गांव, अब विकास की रफ्तार भरने को तैयार हैं। झारखंड के हर पंचायत को मिली 52 लाख से ज्यादा की राशि, बांटे गए 2254 करोड़ रुपए विकसित गांव और समृद्ध झारखंड का सपना अब साकार होने जा रहा है। झारखंड की 4345 पंचायतों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में छप्पर फाड़ पैसे की बारिश हुई है। राशि के अभाव में पिछड़ रहे गांव, अब विकास की रफ्तार भरने को तैयार हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक झारखंड को 15वें वित्त आयोग के तहत करीब 2254 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि को राज्य के पंचायतों को मिलने वाली राशि के नजरिए से आंकें तो हर एक पंचायत के हिस्से में पिछले एक साल में करीब 51 लाख 80 हजार रुपए आएंगे। राज्य गठन के बाद पंचायतों को हिस्से में आई सबसे ज्यादा राशि 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड के हिस्से में मिलनी वाली राशि पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में 624.50 करोड़, वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1271 करोड़, वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1300 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 653.50 करोड़, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ये राशि सर्वाधिक 2254 करोड़ रुपए राज्य की पंचायतों को मिले हैं। राज्य वित्त आयोग से पहली बार अनुदान राशि ये राशि राज्य गठन के बाद से अब तक मिलने वाली सर्वाधिक राशि है। सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि राज्य वित्त आयोग से पहली बार पंचायतों को अनुदान राशि दी गई है। 15वें वित्त आयोग से झारखंड का हिस्सा लेने में लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ा। राज्य की ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रयास और केंद्र सरकार के साथ लगातार पत्राचार, केंद्रीय सचिव और केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक के बाद ये संभव हो पाया है।

HPSC में सुधार का असर: मुकेश आहूजा की सेवा अवधि बढ़ी 3 महीने

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने आई.ए.एस. अधिकारी मुकेश आहूजा को 31 मार्च को सेवानिवृत्ति के दिन 3 महीने का सेवा विस्तार दिया है। अब वह 30 जून तक सरकार में सेवाएं देंगे। आहूजा के पास हरियाणा मार्कीटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक और हरियाणा लोक सेवा आयोग में सचिव पद का कार्यभार है जो यथावत रहेगा। आहूजा की गिनती ईमानदार अधिकारियों में होती है और उनके समय में हरियाणा लोक सेवा आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में पारदर्शिता दिखाई दी। चर्चा है कि 3 महीने बाद भी सरकार उन्हें किसी अहम पद पर जिम्मेदारी दे सकती है। आईपीएस गंगाराम पूनिया हुए रिलीव आईपीएस अधिकारी गंगाराम पूनिया को हरियाणा सरकार ने रिलीव कर दिया है। अब वह इसी सप्ताह सी.बी. आई. में अपनी ज्वाइनिंग देंगे। गंगाराम पुनिया पिछले कई महीनों से ए.सी.बी. में एस.पी. पद पर तैनात थे। वरिष्ठ आईएएस आशिमा बरार को मिली नई जिम्मेदारी हरियाणा सरकार ने बिजली (ऊर्जा) विभाग में लंबे इंतजार के बाद स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व बहाल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आशिमा बरार को कमिश्नर एवं सचिव के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब विभाग पिछले करीब 37 दिनों से नियमित मुखिया के बिना कार्य कर रहा था। फरवरी माह में राज्य सरकार ने 1996 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्यामल मिश्रा को ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव पद से रिलीव कर उनकी सेवाएं केंद्र सरकार को सौंप दी थीं। केंद्र में उन्हें दूरसंचार विभाग के अंतर्गत डिजिटल भारत निधि में एडमिनिस्ट्रेटर के पद पर नियुक्ति मिली है। मिश्रा के जाने के बाद ऊर्जा विभाग का कामकाज लिंक ऑफिसर के भरोसे चल रहा था। लिंक ऑफिसर के पास पहले से ही अन्य विभागों का जिम्मा होने के कारण ऊर्जा विभाग के दैनिक कार्यों पर पूरा फोकस नहीं रह पाना स्वाभाविक था। ऐसे में फाइलों का लंबित होना और निर्णय प्रक्रिया में देरी होना भी चर्चा का विषय बना रहा। अब तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कई अहम फाइलें लंबित रहीं, जिन पर अब तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। नई नियुक्त कमिश्नर एवं सचिव आशिमा बरार को एक सक्षम और अनुभवी अधिकारी माना जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न अहम विभागों में उन्होंने काम किया है, जिससे उन्हें प्रशासनिक समन्वय और निर्णय क्षमता का व्यापक अनुभव है। बिजली विभाग जैसे संवेदनशील और जनहित से जुड़े क्षेत्र में यह अनुभव काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर: आखिरी वक्त पर टला समुद्री हमला, चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया। लगभग सालभर पहले पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थी, तभी पाकिस्तान ने हमले रोकने का अनुरोध किया। वह नौसेना के अलंकरण समारोह में बोल रहे थे, जहां उन्होंने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी विशिष्ट सेवा के लिए दो शीर्ष नौसेना अधिकारियों को 'युद्ध सेवा पदक' से सम्मानित किया। नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया।" बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया था, जिसमें कई भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। उनका धर्म पूछकर गोली मारी गई थी। इससे पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा था। भारत ने सात मई आधी रात पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की और पीओके व पाकिस्तान के कई इलाकों में एयर स्ट्राइक करके 100 से अधिक लश्कर व जैश के आतंकियों को ढेर कर दिया था। इससे दोनों देशों में तनाव बढ़ गया और पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, इन हमलों को भारत ने विफल कर दिया और फिर पाकिस्तान के कई एयरबेस को निशाना बनाया, जिसमें उसकी सेना को काफी नुकसान पहुंचा। चार दिन बाद पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से इस क्षेत्र में 20 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस शत्रुतापूर्ण माहौल के बीच लगभग 1,900 जहाज फंसे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला दैनिक यातायात तेजी से घटकर छह-सात जहाजों तक रह गया है, जबकि संघर्ष से पहले इसका औसत लगभग 130 जहाज था। एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आगे कहा, "साथ ही, विकसित होती तकनीक और रणनीतियों ने न केवल इस बात को नया रूप दिया है कि संघर्षों की योजना कैसे बनाई जाती है, उन्हें कैसे शुरू किया जाता है और कैसे जारी रखा जाता है, बल्कि उन्होंने गैर-पारंपरिक चुनौतियों को और भी अधिक जटिल बना दिया है, और उनका मुकाबला करना कम अनुमानित हो गया है। परिणामस्वरूप, मौजूदा समुद्री वातावरण में इन चीजों के सावधानीपूर्वक तालमेल की आवश्यकता है। संगठनात्मक स्तर पर फुर्ती और दूरदर्शिता, यूनिट स्तर पर युद्ध की तैयारी और परिचालन प्रभावशीलता और व्यक्तिगत स्तर पर साहस और सही निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित पेशेवर उत्कृष्टता। आज, मैं यहां अत्यंत गर्व और प्रसन्नता के साथ यह कहने के लिए खड़ा हूं कि भारतीय नौसेना ने इन सभी आयामों पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है।''  

Pink Elephant शूट बना विवाद: जयपुर में रूसी फोटोग्राफर पर फूटा लोगों का गुस्सा

जयपुर. राजस्थान के जयपुर में हुए एक फोटोशूट को लेकर सोशल मीडिया पर हंगाम देखने को मिल रहा है। जहां एक विदेशी फोटोग्राफर ने एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंग दिया, जिसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी आलोचना की और इसे पशु क्रूरता बताया। दरअसल, रूस की फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने जयपुर में फोटोशूट किया। इसमें एक मॉडल के साथ एक गुलाबी रंग का हाथी नजर आ रहा है। यह तस्वीरें नवंबर 2025 की बताई जा रही हैं, जो सोशल मीडिया पर तीसरी बार वायरल होने के बाद वन्यजीव प्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने रचनात्मक कार्यों में जानवरों के वस्तुकरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई यूजर्स इसे पशु क्रूरता बता रहे हैं। जानिए पूरा मामला बुरुलेवा ने सबसे पहले 27 दिसंबर, 2025 को इंस्टाग्राम पर गुलाबी हाथी वाली पोस्ट शेयर की थी। बाद में 18 फरवरी को एक पोस्ट में उन्होंने सफाई देते हुए कहा, "जो कोई भी हाथी को लेकर चिंतित है- हमने ऑर्गेनिक, स्थानीय रूप से बना पेंट इस्तेमाल किया था, ठीक वैसा ही जैसा स्थानीय लोग त्योहारों के लिए इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह जानवर के लिए पूरी तरह से सुरक्षित था।” फोटोग्राफी के तुरंत बाद हटा दिए गए थे रंग सोमवार को, आमेर के हाथी गांव के सदस्यों ने कहा कि केवल हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया गया था और शूट के 30 मिनट के भीतर ही हाथी को साफ कर दिया गया था, ताकि उसे किसी भी तरह की परेशानी न हो। हालांकि, कई लोगों ने ऑनलाइन इस फोटोशूट की निंदा की। फिल्म निर्माता आकाश प्रभाकर ने टिप्पणी की- "… हाथी कोई कैनवस नहीं है… यह एक जंगली जानवर है जिसका इस्तेमाल सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।"

खडसे ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान जगदलपुर का दौरा किया और 2500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को ‘भविष्य का ओलंपियन’ बताया

रायपुर युवा मामले और खेल राज्य मंत्रीरक्षा खडसे ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के दौरान बुधवार को रायपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि एथलीटों, स्थानीय समुदाय और इस क्षेत्र के लोगों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।                   देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से ज्यादा एथलीट अलग-अलग खेलों में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे हैं।खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026, केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत आदिवासी युवाओं को अपना भविष्य बनाने के लिए एक मंच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह खेल एक नई उम्मीद हैं और यह संकेत कि उनकी काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उस पर सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया जा रहा है।                 युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री ने कहा, '' एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, और यहां के लोगों को एक पिछड़ा समुदाय माना जाता था। आज, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा खुल रही है। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेल के माध्यम से, इस धरती के युवा अब अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला सकते हैं और देश के लिए खेल सकते हैं।''                   खेल राज्य मंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 को एक ऐतिहासिक पहल बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री अमित शाह (जिन्होंने पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है), कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और पदक जीतेंगे।                   युवा मामले और खेल राज्य मंत्री,रक्षा खडसे ने 'अस्मिता लीग' के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। इस लीग को 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाना और उन्हें एक पहचान व अवसर प्रदान करना है।                युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री,रक्षा खडसे ने कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में, नतीजे ज़बरदस्त रहे हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में हिस्सा लेने वाली लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां ‘अस्मिता लीग’ खेल चुकी हैं और पदक जीत चुकी हैं। इनमें अंजली मुंडा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांचों स्वर्ण पदक भी ‘अस्मिता लीग’ की खिलाड़ियों ने ही हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, '' हमारा प्रयास जारी है कि हम ‘अस्मिता लीग’ को और भी निचले स्तर तक यानी के गांवों तक ले जाएं ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे।''

केंद्रीय खेल राज्य मंत्री ने खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन

रायपुर राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।                     खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया। इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।                      इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री  रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक  मयंक वास्तव एवं खेल विभाग के सचिव  यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।