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मच्छरदानी, बिछावन और गैस की लाइन: यूपी के बस्ती में रसोई गैस की भारी किल्लत, महिलाओं और बुजुर्गों की फजीहत

बस्ती उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में गैस की भारी किल्लत ने लोगों को सड़कों पर सोने को मजबूर कर दिया है. सिलेंडर पाने की जद्दोजहद में ग्राहक रात 10 बजे से ही गैस एजेंसी के बाहर मच्छरदानी लगाकर अपना नंबर सुरक्षित कर रहे हैं. प्रशासन की अनदेखी और सप्लाई में कमी के कारण यह अजीबोगरीब वीडियो वायरल हो रहा है. बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्टेशन रोड पर स्थित रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर ग्राहकों ने गैस किल्लत के कारण डेरा डाल दिया है. लोग सिलेंडर प्राप्त करने हेतु रात 10 बजे से ही कतारों में लगकर अपना नंबर सुरक्षित कर रहे हैं. भीषण किल्लत की वजह से एक युवक ने एजेंसी के सामने ही मच्छरदानी लगा ली ताकि वह रात भर सो सके और सुबह सबसे पहले गैस पा सके. नियमित आपूर्ति न होने के कारण स्थानीय निवासियों, बुजुर्गों और महिलाओं को पूरी रात फुटपाथ पर पहरा देना पड़ रहा है. प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग के बीच लोग रात भर जागने को मजबूर हैं. मच्छरदानी लगाकर रात भर पहरा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने गैस वितरण व्यवस्था की पोल खोल दी है. रत्नाकर गैस एजेंसी के सामने लोग बिछावन और मच्छरदानी लेकर पहुंच रहे हैं. गैस सिलेंडर न मिलने के डर से उपभोक्ता घर जाने के बजाय फुटपाथ को ही अपना बसेरा बना चुके हैं. भीषण मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए लोग मच्छरदानी लगाकर वहीं सोने को मजबूर हैं ताकि सुबह एजेंसी खुलते ही उन्हें खाली हाथ न लौटना पड़े. बुजुर्ग और महिलाएं भी बेहाल इस किल्लत की सबसे ज्यादा मार बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की सप्लाई नियमित न होने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है. घंटों लाइन में लगने के बाद भी गैस न मिलने की हताशा अब नाराजगी में बदल रही है. नाराज ग्राहकों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि आमजन को इस अमानवीय स्थिति और असुरक्षित रातों से निजात मिल सके.

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय काल-गणना के प्रणेता और न्यायप्रियता के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य की गाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की गलियों में प्रतिध्वनित होगी। धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आगामी 3 से 5 अप्रैल, 2026 (विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष) तक भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में यह आयोजन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को जीवंत करेगा। इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा। इस वृहद आयोजन का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जन-मानस को परिचित कराना है। बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित प्राचीन भारतीय कालगणना के ऐतिहासिक केंद्र उज्जैन में पिछले वर्ष विश्व की पहली 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' की सफल स्थापना के बाद, अब इसे देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास अन्तर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को यह वैदिक घड़ी समर्पित की जा रही है। इस घड़ी की विशेषता न केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है। इसके लिए एक विशेष ऐप भी लॉन्च किया गया है जो विश्व की 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उज्जैन से शुरू होकर काशी के गलियारों तक पहुँचने वाली यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध कर रही है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने का कार्य भी कर रही है। महानाट्य के सांस्कृतिक गौरव की निरंतर यात्रा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की यात्रा वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई थी। सफलता के सोपान चढ़ते हुए इस नाटक का मंचन अब तक उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है, जहाँ हज़ारों दर्शकों ने इसे सराहा है। अप्रैल 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित इसके मंचन को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भी विशेष रूप से सराहा था। उन्होंने इस प्रस्तुति को सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और भारतीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनुकरणीय प्रयास बताया। महानाट्य विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय का संगम सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उज्जैनी के महान सम्राट के जीवन, उनके अदम्य साहस और न्यायप्रियता को जीवंत करता है। नाटक के माध्यम से 57 ईसा पूर्व प्रारंभ हुए 'विक्रम संवत्' के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्त्व को सशक्त संवादों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों को इसमें जहाँ 'सिंहासन बत्तीसी' और 'बेताल पच्चीसी' के रोचक प्रसंग देखने को मिलेंगे, वहीं भविष्य पुराण के गंभीर संदर्भों से भी परिचय होगा। महानाट्य प्रस्तुति का एक मार्मिक पक्ष विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को पहुँचाई गई क्षति को भी दर्शाना है। इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के 'नवरत्नों'—महाकवि कालिदास और महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर—की विद्वता को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया है। अत्याधुनिक तकनीक और भव्यता का मेल सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की लगभग 1 घंटे 45 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। नाटक को सजीव बनाने के लिए मंच पर रथ, अश्व (घोड़े), पालकी और ऊँटों का प्रयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग मंचों और अत्याधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किये जाएंगे। विविध प्रदर्शनियाँ और सामाजिक संकल्प महानाट्य के साथ-साथ आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जा रही हैं। इनमें सम्राट विक्रमादित्य व अयोध्या, भारतीय ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा पर केंद्रित 'आर्ष भारत', शिव पुराण, चौरासी महादेव,  हनुमान और मध्यप्रदेश के पवित्र स्थानों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि 'स्वच्छ और समृद्ध मध्यप्रदेश' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करता है, ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकें। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: एक गौरवशाली प्रस्तुति उज्जैन की पावन धरा और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करने के लिए 'महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन एक ऐतिहासिक पहल है। इस भव्य नाटक की परिकल्पना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई है, जो भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस कालजयी कृति का लेखन पद्म डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, जिनकी लेखनी ने इतिहास के पन्नों को सजीव कर दिया है। नाटक का कुशल निर्देशन संजीव मालवीय द्वारा किया गया है, जबकि प्रस्तुति संयोजक के रूप में राजेश सिंह कुशवाहा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली कलाकृति की प्रस्तुति ' विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन' द्वारा की जा रही है। यह महानाट्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के साहस, न्याय और सुशासन के आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हमारी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण रखने में सहायक सिद्ध होती हैं। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण: दिग्गज कलाकारों का सशक्त अभिनय सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, त्याग और उनके नवरत्नों की विद्वता अब रंगमंच पर अपने अभिनव से रंग बिखेरने को तैयार है। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण दिग्गज कलाकारों का अभिनय है।नाटक के केंद्रीय पात्र सम्राट विक्रमादित्य की गरिमामयी भूमिका में विक्रम सिंह चौहान और डॉ. राहत पटेल नज़र आएंगे। वहीं, उनके बचपन के संघर्षों को कृष्णा राठौर (बाल विक्रमादित्य) जीवंत करेंगे। कथा को सूत्र में पिरोने का कार्य प्रख्यात सूत्रधार दुर्गेश बाली करेंगे। राजा गर्दभिल्ल की चुनौतीपूर्ण भूमिका में चेतन शाह और शंकर राव साठे अपने अभियान का प्रदर्शन करेंगे। महारानी वीरमति के रूप में रेणुका देशपांडे और भर्तृहरि के किरदार में सूरज चौधरी दर्शकों को उस कालखंड … Read more

5 अप्रैल को होगी शो की आखिरी शूटिंग, जानिए क्यों अचानक बंद हो रहा है आपका पसंदीदा कॉमेडी शो

भाभी जी घर पर हैं' 2015 में शुरू हुआ था. शो का फॉर्मेट सास-बहू शो से अलग था, जिस वजह से इसे खूब पसंद किया गया. लेकिन अब इसके बंद होने की खबर है. जानते हैं कि आखिर चैनल ने इतने बड़े शो को बंद करने का फैसला क्यों लिया. 'भाभी जी घर पर हैं' टेलीविजन का लोकप्रिय शो है. फेमस सिटकॉम की तगड़ी फैन फॉलोइंग है. अब इस शो के दर्शकों के लिए एक शॉकिंग खबर सामने आ रही है. कहा जा रहा है कि 11 साल बाद 'भाभी जी घर पर हैं' बंद होने जा रहा है. कुछ महीने पहले ही 'भाभी जी घर पर हैं 2.0' का  प्रीमियर हुआ था. इसमें शिल्पा शिंदे अंगूरी भाभी बनकर वापस लौटी थीं. उन्होंने शो में शुभांगी अत्रे को रिप्लेस किया था. टाइम्स ऑफ इंडिया में सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया कि 'भाभी जी घर पर हैं 2.0' बंद होने की संभावना है. मेकर्स ने ये फैसला अपनी मर्जी से नहीं लिया है. बताया गया कि चैनल &TV में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. इस वजह से शो को बंद किया जा रहा है. कब होगा आखिरी शूट दर्शकों के लिए ये खबर शॉकिंग हैं, लेकिन कलाकार और क्रू 5 अप्रैल को 'भाभी जी घर पर हैं 2.0' का आखिरी एपिसोड शूट करेंगे. उम्मीद है कि &TV मई 2026 से सशुल्क री-रन चैनल बनने जा रहा है. नया बदलाव नए मैनेजमेंट के कार्यभार संभालने के बाद लागू होगा. नए मैनेजमेंट के आने के बाद चैनल में बदलाव की रणनीति अपनाई जाएगी. आने वाले दिनों में चैनल नए शो पर ध्यान ना देकर, पुराने सीरियल्स के प्रसारण पर फोकस करेगा. इस बड़े बदलाव के बाद 'भाभीजी घर पर हैं 2.0' भी बंद हो जाएगा. शो का आखिरी एपिसोड 16 अप्रैल, 2026 को प्रसारित होने की उम्मीद जताई जा रही है. ये भी कहा जा रहा था कि 'भाभीजी घर पर हैं 2.0' ZEE5 पर शिफ्ट होगा. पर ऐसा नहीं है. ये किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट होने के बजाए बंद होने जा रहा है. 'भाभी जी घर पर हैं'  टेलीविजन का पुराना और लोकप्रिय शो है, जिसके बंद होने से चैनल पर असर पड़ने वाला है. हालांकि, अब तक मेकर्स या कलाकारों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 2015 में शुरू इस शो को बंद होते देखना दर्शकों के लिए भारी झटका है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ के राजापारा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज रायगढ़ प्रवास के दौरान राजापारा स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, रायगढ़ द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में शामिल होने के क्रम में मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने उत्कल समाज द्वारा निर्मित प्रभु जगन्नाथ मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक  टंकाधर त्रिपाठी, विधायक  पुरंदर मिश्रा, महापौर  जीवर्धन चौहान सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं उत्कल समाज के प्रमुखजन उपस्थित थे।

भीषण विस्फोट से दहला लुधियाना: पटाखा फैक्ट्री ढही, एक की जान गई

लुधियाना. लुधियाना देहाती के गांव जोधां इलाके में मंगलवार रात उस समय चीख-पुकार मच गई, जब रिहायशी इमारत में चल रही एक अवैध पटाखा फैक्ट्री भीषण धमाके के साथ ताश के पत्तों की तरह ढह गई। धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और आसपास के घरों की खिड़कियां तक हिल गईं। इस दर्दनाक हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतक मोहम्मद कैफ़ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड के अलावा सेना की टुकड़ी को भी मोर्चा संभालना पड़ा है। घटना की जानकारी देते हुए फायर ऑफिसर रजिंदर ने बताया कि रात करीब 8:20 बजे सूचना मिली थी कि जोधां सरकारी स्कूल के पास एक बिल्डिंग ब्लास्ट के बाद गिर गई है। मुल्लापुर और लुधियाना से पहुंची फायर ब्रिगेड की टीमों ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। मलबे से निकाले गए एक युवक को गंभीर हालत में लुधियाना के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, एक महिला और एक अन्य व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि इस 'बेहड़े' यानी रिहायशी परिसर में गुपचुप तरीके से पटाखे बनाने का काम चल रहा था और हादसे के वक्त वहां 17 से 18 लोग मौजूद थे। धमाके की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन, मृतक युवक के पिता जमील का कहना है कि शाम को अचानक तेज आंधी चली और आसमानी बिजली गिरने से शॉर्ट सर्किट हो गया, जिसके तुरंत बाद सिलेंडर फट गया। हालांकि, प्रशासनिक जांच और मौके के हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। तहसीलदार कर्मजीत सिंह ने बताया कि यह पूरी इमारत एक ठेकेदार ने किराए पर ली हुई थी और यहां भारी मात्रा में 'पोटाश' और अन्य विस्फोटक सामग्री भरी हुई थी। रिहायशी इलाके के बीचों-बीच मौत का यह सामान अवैध रूप से जमा किया गया था, जो इस बड़े हादसे का कारण बना। बिल्डिंग के मलबे में अभी भी विस्फोटक पदार्थ होने की आशंका के चलते सेना के अधिकारियों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। सेना के अधिकारी पुष्प राज ने बताया कि अंधेरा होने और इमारत के पूरी तरह धराशायी होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में सावधानी बरती जा रही है। मौके पर अभी भी भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री पड़ी है, जिसे बुधवार सुबह सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। फिलहाल थाना जोधा की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर घनी आबादी के बीच पटाखों का यह अवैध कारोबार किसकी शह पर फल-फूल रहा था।

महंगाई का डबल झटका, कमर्शियल गैस अब 2106 रुपये के पार, होटल और रेस्तरां का बिगड़ा बजट

जयपुर जयपुर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को महंगाई का बड़ा झटका दिया है। हाल ही में हुई नवीनतम बढ़ोतरी के बाद 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1911 रुपये से बढ़कर 2106 रुपये हो गई है जयपुर में कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा; 25 दिन में 309 रुपए तक बढ़ा दाम जयपुर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को महंगाई का बड़ा झटका दिया है। हाल ही में हुई नवीनतम बढ़ोतरी के बाद 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1911 रुपये से बढ़कर 2106 रुपये हो गई है, यानी 195 रुपये की ताजा वृद्धि दर्ज की गई है। 25 दिन में कुल 309 रुपये का इजाफा पिछले 25 दिनों में यह सिलेंडर कुल 309 रुपये महंगा हो चुका है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन की चुनौतियां और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बताए जा रहे हैं। जनवरी 2026 से अब तक सिलेंडर की कीमतों में लगातार छोटे-बड़े बदलाव आए हैं, जिससे व्यापारियों और छोटे खाद्य व्यवसायों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। होटल और रेस्तरां प्रभावित मार्च की शुरुआत से ही कई बार दामों में संशोधन किया गया। होटल, ढाबे, रेस्तरां और कैटरिंग कारोबार संचालकों ने बताया कि यह बढ़ी हुई लागत अब उन्हें अपने ग्राहकों पर डालनी पड़ रही है, जिससे खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हो रहा है। मार्च में हुई पिछली बढ़ोतरी विशेष रूप से 7 मार्च 2026 को तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114 रुपये की वृद्धि की थी। उस समय 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1796.50 रुपये से बढ़कर 1911 रुपये हो गई थी। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में तनाव और हार्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सप्लाई चिंताओं के बीच आई थी। घरेलू सिलेंडर पर फिलहाल राहत घरेलू सिलेंडर पर भी उसी दिन 60 रुपये का इजाफा हुआ था, लेकिन बाद में घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रही। फिलहाल 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 916 रुपये पर यथावत है, जो सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहत दे रही है। व्यापारी और हलवाई प्रभावित हालिया 195 रुपये की बढ़ोतरी के बाद व्यापारियों का कहना है कि प्लांट से खरीद मूल्य भी बढ़ गया है, जिससे उनका मार्जिन कम हो गया है। छोटे व्यापारियों और हलवाईयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खासकर त्योहारों या सीजन के समय में जब मांग बढ़ जाती है, स्थिति और जटिल हो जाती है। कुछ लोग अब कोयला या अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। उपलब्धता पर संकट जयपुर समेत राजस्थान के कई इलाकों में कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता भी संकटग्रस्त है। बाजार में सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहे हैं, और कुछ जगहों पर रिपोर्ट्स के अनुसार, आधिकारिक कीमत 1911 रुपये होने के बावजूद ब्लैक मार्केट में 2500 रुपये तक मांग की जा रही थी। भविष्य की चुनौतियां विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और तेल की कीमतों में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए यह बढ़ती लागत एक स्थायी चुनौती बन सकती है। जबकि घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए फिलहाल कुछ राहत है, लेकिन भविष्य में वैश्विक तेल बाजार में कोई बड़ा बदलाव घरेलू दामों पर भी असर डाल सकता है। महंगाई का सीधा असर व्यापारी और उपभोक्ता दोनों ही इस बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। होटल और रेस्तरां संचालकों ने कहा कि अब हर चीज की कीमत पर नजर रखनी पड़ रही है और ग्राहकों को सही दाम में सेवा देने के लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। छोटे व्यवसाय इस बढ़ी हुई लागत को अपने ग्राहकों पर डालने को मजबूर हैं, जिससे दैनिक जीवन में महंगाई का असर सीधे दिखाई दे रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं को मिली कुछ राहत विशेषज्ञों की राय है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन के स्थायित्व पर निर्भर करता है कि भविष्य में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें कितनी बढ़ेंगी। फिलहाल जयपुर और राजस्थान के व्यावसायिक उपभोक्ता पूरी तरह इस महंगाई की मार झेल रहे हैं, जबकि घरेलू उपभोक्ता केवल फिलहाल थोड़ी राहत में हैं।

बिना PR के टीम इंडिया में जगह नहीं? शमी का छलका दर्द, पर्पल कैप जीतने के बाद भी टी20 वर्ल्ड कप से बाहर

दिल्ली मोहम्मद शमी भारतीय टीम में वापसी की कोशिशों में लगे हुए हैं। एक पॉडकास्ट के दौरान टी20 विश्व कप में नहीं चुने जाने पर उनका दर्द छलक गया। उन्होंने कहा कि अच्छे प्रदर्शन के बाद भी उन्हें टी20 का गेंदबाज नहीं समझा जाता। 5-6 सालों में 130 विकेट, फिर भी टी20 गेंदबाज नहीं हूं! मोहम्मद शमी का छलका दर्द मोहम्मद शमी पिछले एक साल से भारत की टी20 और ओडीआई टीम से बाहर चल रहे हैं। वह ओडीआई में सबसे तेजी से 200 विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज हैं। टी20 फॉर्मेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार है, हालांकि टी20 इंटरनेशनल मैचों में वह कम दिखे हैं। आईपीएल के पिछले सीजन में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था लेकिन उससे पहले तक वह लगातार कुछ सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले चुनिंदा भारतीय गेंदबाजों में शामिल रहे। 2023 में पर्पल कैप तक जीता था। इसके बाद भी शायद उन्हें टी20 का गेंदबाज नहीं समझा जाता। इस पर शमी का दर्द छलका है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि पिछले 5-6 सालों में उन्होंने 130 के करीब विकेट लिए हैं, फिर भी उन्हें टी20 गेंदबाज नहीं समझा जाता तो वो क्या कर सकते हैं। शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में शमी ने कहा, ‘आईपीएल के बाद पिछला रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए कि अगर इंडियन बोलर आसपास भी हो मेरे, आईपीएल में भी, फिर भी मैं टी20 का बोलर नहीं हूं।’ इसके बाद होस्ट बोलते हैं कि आप आईपीएल में पर्पल कैप होल्डर हो फिर भी आपको टी20 का गेंदबाज नहीं मानते लोग, क्यों? इस पर शमी कहते हैं, 'लास्ट के 5-6 सालों में देख लीजिए कि 130 विकेटों के आसपास हैं। इससे ज्यादा आप क्या लोगे किसी बोलर से इस पर शुभांकर ने पूछा कि इसकी क्या वजह है? आपने पीआर वगैरह पर पैसा खर्च नहीं किया, इसलिए ये होता है क्या? इसके जवाब में शमी कहते हैं कि हो सकता है। मोहम्मद शमी टेस्ट में तो करीब दो-ढाई साल से बाहर हैं। वाइट बॉल इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका पिछला मैच 2025 के चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल था, जिसे रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम इंडिया ने जीता था। टूर्नामेंट में शमी भारत की तरफ से संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। उसके बाद से ही वह टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। इस बीच डोमेस्टिक क्रिकेट में भी वह लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे लेकिन उन्हें न तो पिछले साल एशिया कप के स्क्वाड में जगह मिली और न ही इस साल टी20 क्रिकेट विश्व कप में। चयनकर्ताओं के इस फैसले पर तब कुछ एक्सपर्ट ने सवाल भी उठाए थे। 35 साल के शमी के अब 2027 के वनडे वर्ल्ड कप में खेलने को लेकर भी संदेह के बादल छाए हुए हैं। मोहम्मद शमी आईपीएल में भी शानदार प्रदर्शन करते आए हैं लेकिन पिछला सीजन उनके लिए अच्छा नहीं गया था। आईपीएल 2025 में वह सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा थे लेकिन 9 मैच में सिर्फ 6 विकेट ही चटका पाए थे। इस बार वह लखनऊ सुपर जॉइंट्स का हिस्सा हैं। शमी 2019 से लेकर 2024 तक लगातार आईपीएल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाजों में से एक रहे हैं। उन्होंने पंजाब किंग्स की तरफ से 2019 में 19 विकेट, 2020 में 20 विकेट और 2021 में 19 झटके थे। 2022 में शमी गुजरात टाइटंस के साथ चले गए और उन्होंने 20 विकेट झटके। आईपीएल 2023 में उन्होंने 28 विकेट झटके और पर्पल कैप जीता। आईपीएल 2024 में वह नहीं खेले थे और पिछले साल यानी आईपीएल 2025 में वह सिर्फ 6 विकेट ही ले पाए थे।

मानसून पूर्व मेंटिनेंस कार्यों का एसई और सीई करें निरीक्षण : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल मानसून पूर्व वितरण ट्रांसफार्मर एवं विद्युत लाईनों के मेंटिनेंस कार्यों का निरीक्षण एसई और सीई नियमित रूप से करें। बेहतर मेंटिनेंस होने पर ट्रिपिंग की समस्या दूर होगी। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश बुधवार को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से विभागीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि मेंटिनेंस के दौरान गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग करें। सामग्री के उपयोग से पहले उसका लैब में परीक्षण भी होना चाहिए। मंत्री  तोमर ने कहा कि समाधान योजना की अवधि 15 मई तक बढ़ा दी गई है। सभी बड़े एवं छोटे बकायदारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर योजनांतर्गत वसूली की कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि पहले बड़े बकायदारों से वसूली की कार्यवाही करें। वसूली की कार्यवाही अप्रैल माह से ही प्रारंभ कर दें। इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी चर्चा करें। गलत बिजली बिलों में सुधार तुरंत होना चाहिए। जहां पर स्टाफ की ज्यादा कमी है, वहां पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने की कार्ययोजना बनाएं। मंत्री  तोमर ने कहा कि आगामी सीजन में मूंग की फसल को ध्यान में रखते हुए पॉवर ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग एवं विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। बैठक में सचिव ऊर्जा  विशेष गढ़पाले एवं ओएसडी  विजय गौर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

नए साइबर खतरों से निपटने में अत्यंत कारगर साबित होगा फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट : डॉ. अजय सिंह

लखनऊ बदलते साइबर अपराध के तौर-तरीकों पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में 500 से ज्यादा साइबर फॉरेंसिक वारियर तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य में सीमापार हैकिंग, एआई जनित फिशिंग, डीपफेक और उभरते डिजिटल खतरों से मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित मीट माई मेन्टोर कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीक के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में साइबर अपराध का स्वरूप और अधिक जटिल होगा, लेकिन यूपी की यह पहल इसे रोकने में निर्णायक साबित होगी। अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक की समस्या से निपटना होगा आसान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, भारत सरकार के सदस्य डॉ. अजय सिंह ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान विश्वस्तरीय बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और नए साइबर खतरों से निपटने में अत्यंत कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि आज साइबर खतरे केवल ईमेल या एसएमएस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब वॉइस क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो और फर्जी वीडियो कॉल के जरिए भी बड़े पैमाने पर अपराध किए जा रहे हैं। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के जरिए इन खतरों से निपटना आसान हो जाएगा। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण डॉ. अजय सिंह ने चेताया कि अब ऐसे मालवेयर सामने आ रहे हैं जो खुद सीख सकते हैं और अपने आप विकसित होकर सुरक्षा तंत्र को भी चकमा दे सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग की सीमाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डेटा पर हमला कई संगठनों को प्रभावित करता है। ऐसे में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली हैं और यही समय है जब युवाओं को इसके लिए तैयार किया जाए। उन्होंने छात्रों को कानूनी, फॉरेंसिक और तकनीकी ज्ञान को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक विषयों का भी समाधान मिलेगा। आज की तैयारी ही भविष्य के नेतृत्व को तय करेगी। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार डॉ. गोस्वामी ने यह भी कहा कि जटिल विषयों को समझने का तरीका ही उन्हें सरल बनाता है और यही संस्थान का उद्देश्य है। हम अपने छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं।  इस अवसर पर उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, फेकल्टी डॉ. सपना शर्मा, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. प्रीती, डॉ. कमलेश दुबे, डॉ. नेहा, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्नेहा, डॉ. स्नेहिल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

राणा सोढ़ी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन

फिरोजपुर पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता Rana Gurmit Singh Sodhi के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin भी मौजूद रहे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। नितिन नवीन ने जल्द ही पंजाब दौरे का भी आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में अनीश सिडाना (अरोड़ा खत्री समुदाय), हंसा सिंह कामरेड (राय सिख समुदाय), पूर्ण चंद (2022 विधानसभा चुनाव उम्मीदवार), बाबा बलविंदर सिंह (जिला परिषद चुनाव उम्मीदवार), दविंदर सिंह जंग (पूर्व जिला परिषद सदस्य) और पुरुषोत्तम कुमार (ओबीसी नेता) शामिल थे। राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने पंजाब की रणनीतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंजाब केवल एक सीमावर्ती राज्य ही नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा का भी अहम आधार है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ विषय है। ज्ञापन में खास तौर पर किसानों, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। किसानों के हित में मांग की गई कि डिफेंस वायर और जीरो लाइन के पार खेती कर रहे किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उन्हें सुरक्षा और स्थायित्व मिल सके। सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए फिरोजपुर–फाजिल्का मार्ग को 4 लेन कर राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग की गई। इसके अलावा हुसैनीवाला चेक पोस्ट को सुरक्षा मानकों के साथ पुनः खोलने की मांग भी रखी गई, ताकि व्यापार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या को देखते हुए मजबूत बांध और सुरक्षात्मक ढांचे के निर्माण पर भी जोर दिया गया। साथ ही खूंढर घाटी से फिरोजपुर शहर को जोड़ने के लिए पुल निर्माण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने हेतु सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही फाजिल्का से श्री मुक्तसर साहिब होते हुए बठिंडा और नई दिल्ली तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की मांग भी की गई। अंत में राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि पंजाब देश के अन्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से अपील की गई कि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई कर सीमावर्ती इलाकों में संतुलित विकास, सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और लोगों के जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जाए।