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मुख्य दरवाजे पर भूलकर भी न लगाएं ये 4 तस्वीरें, घर में आएगी कंगाली और तनाव, वास्तु दोष से रहें सावधान

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता के लिए घर का हर एक कोना वास्तु के अनुरूप होना चाहिए। जिन घरों में वास्तु शास्त्र अच्छा होता है वहां पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है, वहीं जिन घरों में वास्तु संबंधित दोष होता है वहां पर कई तरह की रुकावटें आती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्य दरवाजा होता है क्योंकि यही वह स्थान है जो जहां से सबसे ज्यादा सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का वास्तु शास्त्र जितना साफ, सुंदर और वास्तु सम्मत होता है घर पर उतनी ही ज्यादा खुशियां, सुख, समृद्धि और शांति आती है। घर के मुख्य दरवाजे पर कई तरह की तस्वीरें लगाने का प्रचलन होता है। लेकिन कुछ ऐसी तस्वीरें भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं घर के मुख्य दरवाजे पर कौन-कौन सी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। घर के मुख्य दरवाजे पर न लगाएं ऐसी तस्वीरें – घर के मुख्य दरवाजे पर कभी मृत्यु, हिंसा, खून और संघर्षों से संबंधित कोई भी तस्वीर को नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे पारिवारिक जीवन में तनाव और समस्याओं में इजाफा हो सकता है। – घर के मुख्य दरवाजे पर कभी गहरे रंगों वाली तस्वीरों को नहीं लगाना चाहिए। इससे घर के अंदर नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है। ऐसे में हल्के रंगों वाली तस्वीरों को प्राथमिकता देनी चाहिए। – घर के मुख्य दरवाजे पर भूलकर भी नकारात्मक चीजों से संबंधित चित्र नहीं लगवाना चाहिए। इससे घर के वातावरण में अशांति और संघर्ष का वातावरण बनता है। – घर के मुख्य दरवाजे पर कभी भी कोई तस्वीर को उल्टी दिशा में नहीं लटकाना चाहिए। इसे वास्तु शास्त्र में अच्छा नहीं माना जाता है। घर के मुख्य दरवाजे पर लगाएं ऐसी तस्वीरें – शुभ प्रतीकों और देवी-देवताओं से जुड़ी हुई तस्वीरें -घर के मुख्य द्वार पर प्यार और खुशी की प्रतीक वाली तस्वीरों को लगाना शुभ माना जाता है। -घर के मुख्य दरवाजे पर ऊं, स्वास्तिक, दीपक और अन्य दूसरे मांगलिग प्रतीकों को लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। – घर के मुख्य दरवाजे पर हमेशा साफ-सफाई रखना होनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि और सपंन्नता आती है।  

सावधान! डायबिटीज में जहर बन सकते हैं ये 5 फल, अचानक बढ़ाते हैं शुगर लेवल, भूलकर भी न करें ये गलती

डायबिटीज में खान-पान का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. फल स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं लेकिन कुछ फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स इतना अधिक होता है कि वो अचानक ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं. इसलिए डायबिटीज के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इन फलों को नहीं खाना चाहिए. डायबिटीज में दवाई से ज्यादा डाइट जरूरी होती है. इस बीमारी में खानपान का खास ख्याल रखा जाता है क्योंकि जरा सी लापरवाही शुगर लेवल को बिगाड़ सकती है. फल स्वास्थ्य के लिए खजाना होते हैं और इनमें मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर शरीर के लिए जरूरी होते हैं. लेकिन शुगर के मरीजों के लिए हर फल अच्छा नहीं होता. फलों में प्राकृतिक रूप से फ्रुक्टोज शुगर पाई जाती है जो कुछ फलों में इतनी अधिक होती है कि वो खून में ग्लूकोज के स्तर को अचानक बढ़ा सकते हैं. ऐसे में एक डायबिटीज रोगी के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन से फल उनकी सेहत के लिए सुपरफूड हैं और कौन से नुकसानदायक. सही चुनाव और सीमित मात्रा में ही फल खाने से आपकी शुगर को नियंत्रित रखने और फलों का पोषण पाने में मदद मिल सकती है. फलों का राजा आम स्वाद में लाजवाब है, लेकिन इसमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है. एक मध्यम आम में लगभग 45-50 ग्राम शुगर हो सकती है जो अचानक स्पाइक पैदा करती है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए. चीकू: चीकू बहुत मीठा होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी हाई होता है. यह खून में ग्लूकोज के स्तर को बहुत तेजी से बढ़ाता है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे भी खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए. अंगूर: अंगूर के छोटे दानों में भारी मात्रा में नेचुरल शुगर होती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए अंगूर पर नियंत्रण रखना मुश्किल होता है, जिससे शुगर लेवल गड़बड़ा जाता है. लीची: लीची में कैलोरी और शुगर दोनों ही ज्यादा होते हैं. इसके सेवन से ग्लूकोज लेवल में तत्काल बढ़ोतरी देखी जा सकती है. केला: खासकर पूरी तरह पका हुआ केला. पके हुए केले में स्टार्च शुगर में बदल जाता है जिसका GI बढ़ जाता है. इसलिए शुगर के मरीजों को इसे खाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए.

जमीन विवादों के लिए सरकार का महा-अभियान, 1700 न्यायालयों में पेंडिंग 7 लाख मामलों पर मुख्य सचिव की सख्ती

जयपुर राजस्थान सरकार ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए नए वित्तीय वर्ष से विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य वर्षों से लंबित विवादों को तेजी से निपटाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्यभर के राजस्व अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत तहसील से लेकर जिला और संभाग स्तर तक न्यायिक कार्यवाही को सुव्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है। निर्देशों के अनुसार सभी राजस्व न्यायालयों में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अनिवार्य रूप से चार घंटे की नियमित सुनवाई करनी होगी। साथ ही तीन साल से अधिक समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस की समय पर तामील सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर अखबारों में प्रकाशन का सहारा लेने को भी कहा गया है। उपखंड अधिकारियों और सहायक कलेक्टरों को 1 अप्रैल 2026 तक के 100 सबसे पुराने लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें चालू वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मासिक प्रगति समीक्षा भी अनिवार्य होगी। सरकार ने यह भी माना है कि नोटिस में देरी, रिकॉर्ड की अनुपलब्धता और प्रक्रियागत खामियां लंबित मामलों का मुख्य कारण हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए निस्तारण प्रक्रिया की सख्त निगरानी की जाएगी। संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को नियमित निरीक्षण करने तथा प्रगति में सुधार की रिपोर्ट राजस्व मंडल को भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पुराने मामलों में रिकॉर्ड प्रस्तुत न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। मुख्य सचिव ने इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि लंबित मामलों में कमी आए और आमजन को समय पर न्याय मिल सके। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की स्थिति राजस्थान के करीब 1700 से अधिक राजस्व न्यायालयों में 10 लाख लाख से ज्यादा मामले रजिस्टर्ड हैं करीब साढ़े 7 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं। इनमें  सबसे ज्यादा पेंडेंसी 5 लाख 77 हजार से ज्यादा एसडीओ कोर्ट में तथा इसके बाइद रेवेन्यू बोर्ड में दूसरे नंबर पर सर्वाधिक सवा लाख मामले पेंडिंग हैं। पेंडेंसी में 83 प्रतिशत(लगभग 4 लाख मामले) मामले 1 साल से अधिक पुराने एवं 10 प्रतिशत मामले करीब एक साल पुराने इनमें मुख्य रूप से नामांतरण (दाखिल – ख़ारिज ), जमीन पर मालिकाना हक की घोषणा से सम्बंधित मुक़दमे व बटवारा के वाद से जुड़े मुकदमें शामिल हैं। पेंडेंसी का मुख्य कारण -न्यायिक अधिकारियों की कमी और नियमित रूप से न्यायालय में न बैठना। – तकनीकी संसाधनों की कमी और प्रक्रियागत जटिलताएं। – अधिकारियों का स्थानांतरण होने से मामलों की सुनवाई में देरी। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम और नियमित मासिक समीक्षा के निर्देश दिए हैं ताकि पेंडेंसी कम हो सके।  

हार्वेस्टर टोल टैक्स फ्री, खेती की लागत में आएगी कमी, मुख्यमंत्री ने सड़क विकास निगम को दिए सख्त निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष 2026 में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के विचार को सार्थक करते हुए किसान हित में अनेक निर्णय लिए जा रहे हैं। अब कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग किये जाने वाले कंबाइन हार्वेस्टरों को मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के टोल प्लाजा पर शुल्क संग्रहण से छूट रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसल कटाई में प्रयुक्त होने वाला कंबाइन हार्वेस्टर आवश्यक कृषि उपकरण है। टोल मार्गों पर टोल छूट दिए जाने से हार्वेस्टर की परिवहन लागत में कमी आएगी। जिसका सकारात्मक प्रभाव कृषि उपज के मूल्य पर होगा, यह निर्णय कृषकों के लिए हितकर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में दिए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई संचालक मंडल की बैठक में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के नॉन एक्सेस कंट्रोल परियोजना के रूप में निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया गया। संचालक मंडल ने पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को अनुमोदन प्रदान कर निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। बैठक में वार्षिक लेखों तथा अन्य प्रबंधकीय विषयों पर विचार-विमर्श हुआ तथा निर्णय लिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री सुखबीर सिंह, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम श्री भरत यादव उपस्थित थे।

नई सरकार पर बड़ा अपडेट: 10 अप्रैल के बाद बिहार में होगा गठन

मुजफ्फरपुर. दस अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार का गठन हो जाएगा। कुढ़नी के चढ़ुआ में मंगलवार को केंद्रीकृत रसोईघर का शुभारंभ करने आए राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने उक्त बात कही। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में विकास की रफ्तार लगातार जारी रहेगी। चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे जनता के सहयोग से पूरा किया जाएगा। मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके माता-पिता के शासनकाल में करीब 20 वर्षो तक विकास के बजाय लौंडा नाच और जंगलराज का दौर चला। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में विकास कार्य ठप थे और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी खराब थी। अब जब बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, तो विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीकृत रसोईघर मध्याह्न भोजन योजना को सुदृढ़ बनाएगी। इससे बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। 251 विद्यालयों के लिए एक ही स्थान पर भोजन पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत प्रखंड के 251 विद्यालयों के लिए एक ही स्थान पर भोजन तैयार किया जाएगा और उसे निर्धारित समय पर सभी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। यह सेवा एक अप्रैल से शुरू होगी। करीब 40 हजार बच्चों के लिए यहां भोजन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान, विधायक केदार प्रसाद गुप्ता, विधायक बेबी कुमारी, विधान पार्षद संजय सिंह, जदयू अध्यक्ष अनुपम कुमार, जिप अध्यक्ष रीना पासवान, जदयू नेता शिशिर कुमार नीरज, शंकर कुशवाहा, शिवशंकर यादव, श्यामनंदन यादव, बबलू कुशवाहा, उमाकांत यादव, रामबाबू कुशवाहा, पप्पू सिंह, बबन सिंह, उषा सिंह, राजाबाबू, प्रखंड अध्यक्ष सुमन सौरभ, अबोध साह, अली इरफान, एसडीपीओ पश्चिमी टू एसी ज्ञानी आदि मौजूद थे।

नक्सलवाद पर छत्तीसगढ़ में हुआ ऐतिहासिक प्रहार, शांति और विकास की रफ्तार तेज – CM साय

रायपुर   छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली बड़ी सफलता के बीच मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से आज उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री Vijay Sharma ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्षों तक नक्सलवाद प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा, खासकर बस्तर अंचल लंबे समय तक इसके प्रभाव में रहा। उन्होंने कहा कि अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति और सुरक्षा का वातावरण बन रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस और बलिदान को इस सफलता की नींव बताया। उन्होंने सुरक्षाबलों के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। 

मध्यप्रदेश में 15 अप्रैल से शुरू होगी गर्मी, लू भी चलेगी; पहले हफ्ते आंधी-बारिश, अगले 4 दिन अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में अप्रैल की शुरुआत तो बारिश और ओले के साथ हुई है. राज्य में कई जिलों में मंगलवार की रात आंधी-बारिश के साथ हुई थी. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है और तापमान भी गिरा है, लेकिन जल्दी ही मौसम बदलने की संभावना है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 15 अप्रैल से राज्य में भीषण गर्मी पड़ने वाली है. सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल संभाग तपेगा, जबकि इंदौर, भोपाल, उज्जैन और सागर संभाग भी गर्मी की चपेट में रहेंगे. फिलहाल 4 अप्रैल तक कई जिलों में बारिश जैसा मौसम बने रहने की संभावना है।  4 अप्रैल तक रहेगा बारिश का मौसम अप्रैल माह की शुरुआत हालांकि तेज आंधी और बारिश के साथ हो रही है. मौसम विभाग ने भोपाल में 1 से 4 अप्रैल तक प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में मौसम अलर्ट जारी किया है. 29 जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।  ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा प्रभावित आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे ज्यादा गर्म रहेगा। इसके अलावा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और सागर संभाग के शहरों में भी तापमान तेजी से बढ़ेगा। महीने के आखिरी सप्ताह तक कई जिलों में पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यहां दिख रहा गर्मी का असर बदलते मौसम के बीच गर्मी ने भी दस्तक दे दी है। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। खजुराहो, दमोह, रतलाम और नौगांव में भी पारा 39 डिग्री के आसपास बना हुआ है। बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में तापमान 36 से 37 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम सिस्टम की वजह से बदलाव प्रदेश में इस समय चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ सक्रिय हैं, साथ ही पश्चिमी विक्षोभ का असर भी देखने को मिलेगा। इसी वजह से शुरुआती दिनों में मौसम बदलेगा, लेकिन सिस्टम हटते ही गर्मी तेजी से बढ़ेगी।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचता है और सामान्य से 5 डिग्री ज्यादा रहता है, तब हीट वेव की स्थिति बनती है। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के कई हिस्सों में यही हालात बनने की संभावना है। बार-बार बदलता रहा मौसम इस साल फरवरी और मार्च में मौसम ने कई बार करवट ली। कई जिलों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। मार्च के आखिर तक भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहा, जिससे गर्मी की शुरुआत टल गई थी। अब अप्रैल में मौसम का यह उतार-चढ़ाव खत्म होकर तेज गर्मी में बदलने वाला है।  इनमें इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, भोपाल समेत प्रमुख जिले शामिल हैं. 12 जिलों में ओले गिरने की संभावना है. 41 से ज्यादा जिलों में आंधी के साथ बारिश हो सकती है. धार जिले के कुक्षी और मनावर क्षेत्र में बुधवार तड़के ओले गिर चुके हैं. कई जिलों में रात के समय अचानक मौसम बदला और तेज हवाएं चलीं।  40 के पार पहुंचेगा पारा 4 अप्रैल के बाद मौसम साफ होने के साथ तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी. 15 अप्रैल के आसपास ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में दिन का तापमान 42-44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अन्य संभागों में भी तापमान 40 डिग्री के पार जाने की संभावना है. यह मौसम परिवर्तन अप्रैल के पहले सप्ताह में बारिश और आंधी के रूप में राहत देगा, लेकिन उसके बाद में लू (Heatwave) और भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा।  दिन में गर्मी का असर भी… नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री पार आंधी, बारिश और ओलों के बीच गर्मी का असर भी दिखा। मंगलवार को नर्मदापुरम में तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। खजुराहो में 39.2 डिग्री, रतलाम-नौगांव में 39 डिग्री, दमोह में 39.1 डिग्री और खरगोन, रायसेन-उमरिया में 38 डिग्री रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल और जबलपुर में 37 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर-ग्वालियर में 36.6 डिग्री और उज्जैन में 36 डिग्री रहा। अप्रैल में तेज गर्मी का ट्रेंड, हीट वेव भी चलेगी वर्तमान में प्रदेश में साइक्लोनिक सकुर्लेशन और ट्रफ सक्रिय हैं। 2 अप्रैल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी सक्रिय होगा। इससे 4 अप्रैल तक कहीं आंधी और कहीं बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम लौटेगा और गर्मी का दौर शुरू होगा। दूसरे सप्ताह में तेज गर्मी पड़ेगी। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी, नौगांव-खजुराहो में तापमान 44-45 डिग्री तक जा सकता है। दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार में भी बढ़ोतरी होगी। अप्रैल में दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलती हैं, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। अलग-अलग इलाकों में हीट वेव का आधार अलग मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान सामान्य से 5°C ज्यादा होने पर हीट वेव मानी जाती है। मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों के लिए इसका आधार अलग होता है।     मैदानी इलाका- अधिकतम तापमान 40°C से ऊपर हो। मध्यप्रदेश में ज्यादातर मैदानी इलाका है, इसलिए 40 डिग्री के ऊपर हीट वेव की स्थिति बनती है।     सीवियर हीट वेव में तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री अधिक रहता है। ग्वालियर-चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में ऐसी स्थिति बनती है।

150 करोड़ का गबन और ACB की बड़ी कार्रवाई, कोटक महिंद्रा बैंक ने सरेंडर की मूल राशि, जांच में खुले कई राज

पंचकूला कोटक महिंद्रा बैंक के उप-उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह के 150 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े घोटाले में नाम आने के बाद बैंक ने पंचकुला नगर निगम को 127 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। यह राशि उसी फंड से संबंधित है, जिसे कथित धोखाधड़ी में गबन कर लिया गया था पंचकूला नगर निगम घोटाला: ACB की कार्रवाई के बाद कोटक बैंक ने लौटाए ₹127 करोड़ कोटक महिंद्रा बैंक के उप-उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह के 150 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े घोटाले में नाम आने के बाद बैंक ने पंचकुला नगर निगम को 127 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। यह राशि उसी फंड से संबंधित है, जिसे कथित धोखाधड़ी में गबन कर लिया गया था। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (SV & ACB) द्वारा पंचकुला की एक अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में बैंक के पुष्पेंद्र सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुष्पेंद्र सिंह वर्तमान में फरार चल रहे हैं। उन्होंने पंचकुला के सेक्टर-11 स्थित उसी शाखा में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे, जहां यह घोटाला हुआ था। बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव ने जांच एजेंसी को बताया कि वह पुष्पेंद्र सिंह की गिरफ्तारी में सहयोग कर सकता है, क्योंकि वह उनके विभिन्न ठिकानों की जानकारी रखता है। राघव ने यह भी दावा किया कि वह घोटाले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देने में सक्षम है। वहीं जांच एजेंसी के अनुसार, जब राघव को उनके कार्यालय ले जाया गया, तब पंचकुला नगर निगम के अधिकारियों ने उसे उसी व्यक्ति के रूप में पहचाना, जो उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खातों से संबंधित गलत जानकारी वाले ईमेल भेजा करता था। उनकी शिकायत पर राघव को 25 मार्च को गिरफ्तार कर लिया गया था।  बैंक द्वारा 127 करोड़ रुपये लौटाये  शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बैंक ने केवल मूलधन राशि ही वापस की है, जबकि नगर निगम को हुए वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक है। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि पंचकुला नगर निगम की सावधि जमा (FD) और संबंधित बैंक खातों के मिलान की प्रक्रिया के दौरान कुछ विसंगतियां पाई गई हैं, जो बैंक और नगर निगम दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। इनकी जांच वर्तमान में चल रही है। सरकारी संस्थानों के साथ बैंक के लंबे समय से चले आ रहे अच्छे संबंधों को देखते हुए, जांच पूरी होने तक बैंक ने नगर निगम के पास 127 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। एफआईआर के अनुसार, पंचकुला नगर निगम ने बैंक की सेक्टर-11 शाखा में 145.03 करोड़ रुपये की 16 सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) रखी हुई थीं, जिनकी परिपक्वता राशि 158.02 करोड़ रुपये बताई गई थी। इनमें से 11 फिक्स्ड डिपॉजिट 16 फरवरी को परिपक्व हुईं, जिनकी कुल राशि 59.58 करोड़ रुपये थी। जब नगर निगम ने बैंक से संपर्क किया, तो बैंक अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान न तो आपस में मेल खाते थे और न ही नगर निगम के रिकॉर्ड से। इसके अलावा, बैंक में नगर निगम के दो अतिरिक्त खाते भी पाए गए, जो स्थानीय निकाय के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। इस मामले में दिलीप कुमार राघव को आज अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस और जांच एजेंसी फरार आरोपी पुष्पेंद्र सिंह की तलाश में तेजी से छापेमारी कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

जमीन खरीदना हुआ सपना, करनाल के गांवों में 75 और शहरों में 60 प्रतिशत तक बढ़े दाम, रजिस्ट्री पोर्टल पर संशय

 करनाल  जिला प्रशासन ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े कलेक्टर रेट में न्यूनतम 10 से लेकर 75 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। पहली अप्रैल से इसे लागू किया जा रहा है लेकिन अव्यवस्था के कारण 31 मार्च को देर रात तक भी पूरी सूची रजिस्ट्री पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकी। ऐसे में बुधवार को रजिस्ट्री होने पर संशय है। यदि नए रेट पोर्टल पर चढ़ाने का काम पूरा नहीं हुआ तो रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। यदि किसी क्षेत्र का रेट चढ़ चुका है और उससे संबंधित रजिस्ट्री आई तो वह की जाएगी। प्रशासन की ओर से 66 पेजों की प्रस्तावित सूची तैयार की गई थी, जिस पर लोगों से आपत्तियां भी गुप्त तरीके से मांगी गई थी। इस पर कई लोगों ने आपत्ति भी दर्ज कराई है। जिसमें संशोधन के बाद नए रेटों को तय करके लागू करने का प्रशासन ने निर्णय लिया है। नई सूची में शहर से लेकर गांवों तक जमीन के रेट में बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि पुराने शहर के कॉमर्शियल क्षेत्रों में 60 प्रतिशत तक वृद्धि है जबकि आसपास के गांवों की कृषि योग्य भूमि के रेट में 75 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है। भले ही 75 प्रतिशत बढ़ा, फिर भी महंगे क्षेत्रों में नहीं शहर में कई क्षेत्रों में जमीन के दाम 50 से 75 प्रतिशत तक बढ़ाए गए हैं रोचक बात यह है कि फिर भी ऐसे क्षेत्र सबसे महंगे क्षेत्रों में नहीं होंगे। यहां सामान्य रेट काफी कम था। सूची के अनुसार जिले के कई गांवों में कृषि योग्य भूमि के रेट में 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। इसमें कैलाश, गांगर, चुरनी, बलड़ी, मरगैन, शेखपुरा और संगोहा जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों में खेती योग्य जमीन के नए रेट लागू होने पर जमीन की खरीद-फरोख्त काफी महंगी हो जाएगी। इसके अलावा कैलाश गांव में दो एकड़ से पीछे की भूमि के रेट में भी 75 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित की गई है। श्रद्धानंद कॉलोनी कुंजपुरा में आवासीय कॉलोनी के रेट में भी 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। वर्जन नए कलेक्टर रेट को फाइनल करने के लिए सूची गई हुई है। साथ ही इसे पोर्टल पर भी अपडेट किया जा रहा है। यह काम पूरा होने के बाद नए रेट पर रजिस्ट्री शुरू कर दी जाएगी। – मनीश यादव, जिला राजस्व अधिकारी

MSP सीजन की शुरुआत: पंजाब में गेहूं खरीद चालू, बाहरी राज्यों पर सख्ती

चंडीगढ़. गेहूं खरीद का सीजन पहली अप्रैल से शुरू हो रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग इस बार अन्य राज्यों से आने वाले गेहूं को रोकने के लिए सीमा पर नजर रखेगा। विभाग के मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को राज्य की मंडियों में बाहरी राज्यों से गेहूं की बिक्री पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग गेहूं खरीद के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं। उम्मीद है कि इस बार मंडियों में 122 लाख टन गेहूं आ सकता है। इसके लिए विभाग ने 1987 खरीद केंद्रों को अधिसूचित किया है। बता दें कि आरबीआई ने अप्रैल माह के लिए 20,973 करोड़ की सीसीएल जारी की है। दूसरे राज्यों से अनाज लाकर पंजाब में एमएसपी पर बेचने के मामले में विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर गेहूं के सीजन में ऐसा कम देखने को मिलता है। मुख्य समस्या धान के सीजन में आती है। पंजाब सरकार ने इस बार मंडियों में दूसरे राज्यों से आने वाले गेहूं पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया कि बाहरी गेहूं की खरीद किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रकों को सख्ती से निगरानी करने को कहा गया है। मंत्री ने बताया कि राज्य में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी और सभी मंडियों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। अधिकारियों को मंडियों में साफ-सफाई, बिजली और पेयजल जैसी मूल सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार ने इस सीजन के लिए 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है जबकि विभाग ने 132 एलएमटी तक खरीद के लिए इंतजाम किए हैं। इसके लिए 1897 खरीद केंद्र अधिसूचित किए गए हैं और 266 अतिरिक्त अस्थायी यार्डों के प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं। केंद्र सरकार से अप्रैल माह के लिए 30,973 करोड़ रुपये की नकद ऋण सीमा भी मिल चुकी है। भंडारण व्यवस्था पर जोर मंत्री ने बताया कि भंडारण को लेकर केंद्र से लगातार बातचीत की जा रही है ताकि नई फसल के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपायुक्तों के साथ तालमेल बनाए रखें और मंडियों में तिरपाल व अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।