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योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति: 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत

योगी सरकार में औद्योगिक क्रांति, 9 साल में 17 हजार से अधिक कारखाने पंजीकृत पिछले 70 वर्षों में प्रदेश में पंजीकृत हुए थे केवल 14 हजार कारखाने 16 लाख से अधिक लोगों को रोजगार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से सामाजिक-आर्थिक बदलाव के संकेत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शी नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का ही असर है कि प्रदेश में अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के स्वतंत्र होने के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक लगभग 70 वर्षों में प्रदेश में कुल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हो पाए थे। वर्तमान समय में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से प्रदेश में बना निवेश अनुकूल माहौल प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से सुधार, निवेश अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं विकसित कीं। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 17,841 कारखाने अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं। सिर्फ सितंबर 2023 से अब तक ही 10,194 कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत इन कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोग नौकरी कर रहे हैं। इनमें 15,29,907 पुरुष व 1,23,272 महिलाएं कार्यरत हैं। सबसे अधिक 10,895 कारखाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंजीकृत प्रमुख सचिव ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10,895, मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने पंजीकृत किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार ने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए हर क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए। इन कारखानों से प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन भी तेजी से हुआ है। खास बात यह है कि कारखानों में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है। कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा योगदान प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी तरह 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह संख्या दर्शाती है कि योगी सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई)के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी समान रूप से प्रोत्साहन दिया है। इससे प्रदेश की औद्योगिक संरचना मजबूत हुई है। बता दें कि औद्योगिक विकास में कानून-व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को नई गति दी। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न केवल रोजगार दिया, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।

ईरान युद्ध का असर: शोरूम में धूल खा रही रोल्स-रॉयस से लेकर फेरारी तक लग्जरी कारें

 नई दिल्ली ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बीच पश्चिमी एशिया इस समय बारूद की गंध के साये में सांस ले रहा है. आसमान तक उठती आग की लपटें और धुएं के गुबार सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं हैं, उनका असर सीधे बाजारों और लोगों के भरोसे पर दिख रहा है. जिन सड़कों पर कभी दौलत का रौब और लग्जरी कारों की चमक नजर आती थी, वहां अब ठहराव और खामोशी है. करोड़ों की गाड़ियां बेचने वाले शोरूमों में आज वीरानी छाई हुई है. कारोबारी हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती चिंता गिन रहे हैं. यह जंग सिर्फ सरहदों की नहीं है, यह उस चमक-दमक पर भी वार है जिसने मिडिल ईस्ट को दुनिया का सबसे मुनाफे वाला बाजार बना दिया था।  दुनिया की सबसे महंगी और शाही कार बनाने वाली कंपनियों के लिए पश्चिमी एशिया हमेशा से सोने की खान रहा है. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. जंग के चलते यहां का लग्जरी कार बाजार हिल गया है और करोड़ों रुपये की कारें भी शोरूम में खड़ी रह जा रही हैं. हाल ही में रोल्स-रॉयस ने दुबई के एक ग्राहक के लिए बेहद शानदार स्पेशल “फैंटम अरबेस्क” मॉडल पेश किया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद हालात ऐसे बदले कि पूरी इंडस्ट्री चिंता में आ गई है।  शाही कारों में खास डिजाइन का जलवा रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोल्स-रॉयस के इस स्पेशल मॉडल में अरब आर्किटेक्चर से इंस्पायर्ड लेजर-एंग्रेव्ड बोनट और ख़ास वुडेन मेड (लकड़ी से बना हुआ) इंटीरियर दिया गया था. यह कार खास तौर पर अमीर ग्राहकों के लिए बनाई गई थी. आम तौर पर रोल्स-रॉयस फैंटम की कीमत करीब 5.7 लाख डॉलर (लगभग 5.36 करोड़ रुपये) से शुरू होती है, लेकिन खास कस्टमाइजेशन के बाद इसकी कीमत दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।  मिडिल ईस्ट का बाजार कुल बिक्री का 10% से भी कम होता है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह मार्केट बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है. ऐसे में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बाद बाजार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. जंग शुरू होने के बाद कई लग्जरी कार शोरूम अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. फेरारी और मासेराती जैसी कंपनियों ने कुछ समय के लिए डिलीवरी भी रोक दी है।  30% तक गिरा कारोबार रिपोर्ट के अनुसार, दुबई की मशहूर लग्जरी कार डीलरशिप फर्स्ट मोटर्स का कहना है कि, जंग के बाद कारोबार में करीब 30% की गिरावट आई है. ये डीलरशिप दुबई में फेरारी और बुगाटी की लग्ज़री स्पोर्ट कारें बेचता है. जब युद्ध शुरू हुआ तो शोरूम को बंद करना पड़ा था. हालांकि कुछ दिनों के बाद शोरूम को फिर से खोला गया लेकिन लोगों की आवाजाही बेहद कम है और बमुश्किल कारोबार करने की कोशिश की जा रही है. डीलरशिप के डायरेक्टर क्रीस बुल ने मीडिया को बताया कि, कुछ ग्राहक तो 70 लाख डॉलर की कार को दूसरे देश भेजने के लिए 30 हजार यूरो तक खर्च करने को तैयार हैं।  लैंबॉर्गिनी, बेंटले, फेरारी, जगुआर लैंड रोवर और पोर्श जैसी कंपनियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट में स्पेशल एडिशन और कस्टम कारों पर कंपनियां काफी ज्यादा कमाई करती हैं, जो अब लगभग रुक गई है।  कंपनियों के लिए क्यों जरूरी ये बाजार पश्चिमी एशिया की खास बात यह रही है कि यहां ग्राहक लिमिटेड एडिशन और खास डिजाइन वाली कारों पर भारी रकम खर्च करते हैं. इसके अलावा ग्राहक गाड़ियों में स्पेसिफिक कस्टमाइजेशन भी कराते हैं, जिनके बाद कारों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि, 2024 में रेंज रोवर स्पोर्ट के “Sadaf” एडिशन की सिर्फ एक एसयूवी 3.3 लाख पाउंड (लगभग 4.09 करोड़ रुपये) में बेची गई थी. इस दौरान कंपनी ने इसके कुल 20 यूनिट बेचे थे. जो इसकी रेगुलर प्राइसिंग से तकरीबन 3 गुना ज्यादा थी. लेकिन अब ऐसे ऑर्डर लगभग बंद हो चुके हैं।  पहले ही अमेरिका में टैरिफ और चीन-यूरोप में गिरती मांग से जूझ रही लग्जरी कार कंपनियों के लिए मिडिल ईस्ट आखिरी बाजार था. अब वहां भी हालात खराब हो रहे हैं. कुछ कंपनियां तो प्रोडक्शन घटाने तक पर विचार कर रही हैं. ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक, खासकर प्रीमियम और लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है. अगर जल्द शांति नहीं बनी, तो आने वाले समय में इसका असर और गहरा हो सकता है। 

न्यायिक सेवा में बड़ा बदलाव: अनुभवी वकीलों को ही मिलेगा जज बनने का मौका

चंडीगढ़.  हरियाणा सरकार ने न्यायिक सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा संशोधन करते हुए हरियाणा उच्च न्यायिक सेवा (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। ये नियम 27 मार्च 2026 से प्रभावी हो गए हैं। संशोधित नियमों के तहत अव न्यायिक सेवा में पदों को भरने के लिए प्रमोशन, सीमित प्रतियोगी परीक्षा और सीधी भर्ती का स्पष्ट ढांचा तय किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार 50 प्रतिशत पद मेरिट-कम-सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन से भरे जाएंगे जबकि 25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा और 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे। सीमित प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति के लिए न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव और 35 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है।  सीधी भर्ती के लिए वकीलों के लिए भी कड़े मानदंड तय किए गए हैं। अभ्यर्थी को कम से कम तीन वर्षों तक आयकर दाता होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही वार्षिक न्यूनतम आय पांच लाख रुपये और प्रत्येक वर्ष कम से कम 50 मामलों की पैरवी का प्रमाण देना होगा। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इन शर्तों में आंशिक छूट दी गई है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए रोस्टर सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत हर चार पदों पर क्रमशः प्रमोशन, प्रमोशन, परीक्षा और सीधी भर्ती का पैटर्न अपनाया जाएगा। सरकार ने वरिष्ठता निर्धारण के नियम भी स्पष्ट किए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया में देरी होने पर किसी प्रकार का विवाद न हो।

स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: रांची नगर निगम बनाएगा इंडोर स्टेडियम

रांची. सिर्फ राजधानी रांची की साफ सफाई ही नहीं खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए रांची नगर निगम पहली बार इंडोर स्टेडियम बनाने जा रहा है। वार्ड-3 एदलहातू मोरहाबादी में बनने वाले इस अत्याधुनिक इंडोर के निर्माण पर निगम करीब पांच करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक साल में स्टेडियम बनाने का लक्ष्य निगम ने रखा है। जारी टेंडर के अनुसार इंडोर स्टेडियम में चार बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाएंगे। बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। जहां वार्मअप से लेकर चेजिंग रूम, शौचालय, पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इंडोर स्टेडियम के साथ लैंडस्केपिंग कार्य भी कराया जाएगा। वर्तमान में रांची में बैडमिंटन खेलने के लिए इंडोर स्टेडियम की संख्या गिनी चुनी है। खिलाड़ी के अलावा आम लोग में खेल सकेंगे इस परियोजना की अनुमानित लागत 4 करोड़ 9 लाख 52 हजार 68 रुपये तय की गई है। इच्छुक एजेंसियां 2 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी बोली जमा कर सकेंगी। वहीं, टेंडर खोलने की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस इंडोर स्टेडियम के बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ी के अलावा शहरवासी भी बैडमिंटन खेल सकेंगे। इसके एवज निगम कितना शुल्क लेगा इसकी घोषणा स्टेडियम का निर्माण पूरा होने के बाद होगा। इंडोर स्टेडियम की देखरेख का जिम्मा निगम निजी कंपनी को देगा। खिलाड़ियों के लिए कोचिंग की सुविधा मिलेगी। नगर आयुक्त ने उठाए बड़े कदम व्यापक डोर टू डोर सर्वे सत्यापन शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर अज्ञात और छूटे हुए होल्डिंग्स की पहचान संपत्तियों के भौतिक सत्यापन के माध्यम से टैक्स बेस को मजबूत किया वार्ड स्तरीय लक्ष्य और दैनिक मानिटरिंग प्रत्येक वार्ड के लिए स्पष्ट राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किए दैनिक और साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निरंतर निगरानी कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में विशेष फोकस कर अभियान चलाया गया डिजिटल प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन प्रोपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से रीयल टाइम डेटा ट्रैकिंग की गई डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और सुविधा में वृद्धि की गई बड़े बकायेदारों पर विशेष कार्रवाई उच्च बकाया वाले मामलों की पहचान कर विशेष वसूली अभियान चलाया गया आवश्यकतानुसार नोटिस, दंडात्मक कार्रवाई एवं प्रवर्तन उपाय अपनाए गए नागरिक सहभागिता और जागरूकता अभियान विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को कर भुगतान के लिए प्रेरित किया गया समय पर भुगतान करने वाले करदाताओं को प्रोत्साहित किया गया फील्ड में टीमों की सक्रियता और समन्वय पर विशेष ध्यान टैक्स कलेक्टरों और फील्ड स्टाफ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की टीम-आधारित कार्यप्रणाली से कार्य में गति एवं परिणाम दोनों प्राप्त हुए

पद्मश्री एच.एस. फुल्का की नई पारी, अब थामेंगे भाजपा का दामन

  चंडीगढ़ दाखा के पूर्व विधायक एचएस फुलका आज भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने उन्हें पार्टी में शामिल करवाया।   2014 में सांसद का चुनाव हारे थे फुलका ने 2014 में लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से 19,709 वोटों से हार गए थे। 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव में, उन्होंने दाखा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की और अकाली नेता मनप्रीत सिंह अयाली को हराया था। जनवरी 2019 में उन्होंने औपचारिक रूप से आप छोड़ दी थी। सिख दंगा पीड़ितों के लिए लगातार लड़ी लड़ाई दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील फुलका एक मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और राजनेता भी हैं। वे 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपनी लगातार लड़ाई के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उन सबसे लंबी और मुश्किल कानूनी लड़ाइयों में से एक का नेतृत्व किया। उनके इन प्रयासों के लिए, उन्हें 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। दंगों के बाद, फुलका ने 1985 में 'सिटिजन्स जस्टिस कमेटी' बनाने में मदद की। इस कमेटी ने कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को एकजुट किया था ताकि वे न्यायिक आयोगों के सामने पीड़ितों का पक्ष रख सकें। 2001 में उन्होंने एक वेबसाइट शुरू की ताकि दंगों से जुड़े दस्तावेज और जांच के नतीजे आम लोगों तक पहुंच सकें। सीएम मान ने दी शुभकामनाएं एडवोकेट एचएस फुलका के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्हें मेरी शुभकामनाएं। तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो नेता अपनी राजनीतिक आस्था बदलते हैं जनता उन्हें दोबारा नहीं जितवाती। फिलहाल तो मैं सिर्फ फुलका साहब को शुभकामनाएं ही दे सकता हूं।  

गेहूं और सरसों की फसल पर बेमौसम मार, यूपी सरकार अलर्ट मोड पर, किसानों के खातों में सीधे पहुंचेगा राहत का पैसा

लखनऊ यूपी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. मार्च महीने का अंत और अप्रैल की शुरुआत में ही हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान चिंता में हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात का संज्ञान लेते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया है और सभी जिलों के जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं. जिन खेतों में फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, वहां पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है. खासतौर पर गेहूं, सरसों और दलहन जैसी फसलों पर इसका असर देखा जा रहा है. गांवों से आ रही शुरुआती जानकारी में बताया जा रहा है कि कई जगहों पर फसलें गिर गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ने मांगी जमीनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अधिकारी फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और प्रभावित क्षेत्रों की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजें. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट केवल कागजी न हो, बल्कि जमीनी सच्चाई को दर्शाने वाली हो, ताकि राहत कार्य सही तरीके से संचालित किए जा सकें. सरकार ने फसल नुकसान के आकलन के लिए एक संयुक्त सर्वे कराने का फैसला लिया है. इसके तहत राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की टीम मिलकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी. मुआवजा देने की तैयारी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही नुकसान का आंकलन पूरा होगा, मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो और समयबद्ध तरीके से किसानों के खातों में पैसा पहुंचाया जाए. सरकार का कहना है कि किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. अधिकारियों को संवेदनशील रहने के निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खासतौर पर संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े. जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे खुद फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लें और यह सुनिश्चित करें कि राहत कार्य तेजी से और पारदर्शिता के साथ पूरे हों. सीएम ने प्रमुख सचिव (कृषि) और राहत आयुक्त को भी निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें. सभी सूचनाओं का सही समय पर संकलन कर शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि निर्णय लेने में देरी न हो. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रशासनिक मशीनरी एक टीम की तरह काम करे और किसानों को जल्द से जल्द राहत मिले.

इंदौर से खाटू श्याम की सीधी यात्रा, 2 अप्रैल से चलेगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर  इंदौर से खाटू श्याम जाने के लिए 2 अप्रैल से रेल विभाग ने स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया है। इसके लिए आरक्षण भी शुरू हो चुके हैं। यह ट्रेन लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से संचालित होगी। इंदौर और आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में भक्त खाटूश्याम जाते हैं और इस रूट पर ट्रेन चलाने की लंबे समय से मांग भी थी। रेलवे ने समर स्पेशल के रूप में इस ट्रेन को चलाने का फैसला लिया है, लेकिन यदि अच्छा प्रतिसाद मिलता है तो इसका संचालन नियमित भी किया जा सकता है। इंदौर से श्रीगंगानगर तक जाने के लिए पहली बार सीधी रेल सेवा शुरू होने जा रही है। श्रीगंगानगर से यह ट्रेन 2 अप्रैल से चलेगी और 3 अप्रैल को इंदौर पहुंचेगी। इस ट्रेन का अंतिम स्टॉप लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन होगा। रेलवे विशेषज्ञ नागेश नामजोशी ने बताया कि यह समर स्पेशल ट्रेन है। अभी तक यात्रियों को अलग-अलग ट्रेन बदलकर खाटूश्याम जाना पड़ता था, लेकिन इस रूट पर यह पहली सीधी रेल सेवा है, जिससे मालवा से राजस्थान तक यात्रा आसान हो जाएगी। रेल से खाटूश्याम तक जाने के लिए यात्रियों को भोपाल या कोटा से ट्रेन बदलनी पड़ती थी। लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से यह ट्रेन दोपहर 1:55 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 9:55 बजे श्रीगंगानगर पहुंचेगी। वहीं वापसी में श्रीगंगानगर से ट्रेन दोपहर 12:50 बजे चलेगी और अगले दिन दोपहर 1:55 बजे इंदौर पहुंचेगी।   यह ट्रेन इंदौर से निकलकर फतेहाबाद, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, चंदेरिया, भीलवाड़ा, अजमेर, मदनगंज किशनगढ़, किशनगढ़, फुलेरा, रिंगस, सीकर, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर शेखावाटी, चूरू, सादुलपुर, तारानगर रोड, नूरसर, एलनाबाद, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ होते हुए श्रीगंगानगर तक जाएगी। यह ट्रेन 2 अप्रैल से 10 जुलाई तक चलेगी।

तमिलनाडु ओपिनियन पोल: इंडिया ब्लॉक के किले पर संकट, BJP गठबंधन को मिल रही मजबूत बढ़त

चेन्नई  तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही रोमांचक और अनिश्चित रही है. 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वोटवाइब के वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य में सत्ता की लड़ाई बेहद करीबी होने वाली है. सहयोगी चैनल सीएनएन-न्यूज18 पर विशेष रूप से जारी इस सर्वे के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन यानी एनडीए को 115-125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सत्तारूढ़ डीएमे-कांग्रेस गठबंधन (कांग्रेस, भाकपा और माकपा सहित) यानी इंडिया गठबंधन को 104-114 सीटें मिलने का पूर्वानुमान है. ऐसे में देखा जाए तो तमिलनाडु इंडिया गठबंधन का एक तरह से अंतिम किला है. यह भी इस बार ढह जाने की संभावना है।  कुल 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है. ऐसे में साफ दिख रहा है कि राज्य में कांटे की टक्कर है. इससे पहले के वोट ट्रैकर पोल में डीएमके गठबंधन को 113-123 सीटों पर बढ़त दिखाई गई थी, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन को 106-116 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेटेस्ट पोल में थोड़ी सी शिफ्ट एआईएडीएमके की तरफ हुई है, जो दर्शाता है कि अंतिम दिनों में वोटर मूड में बदलाव संभव है. अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके युवा और शहरी वोटरों पर दांव लगा रही है और इसे 2-8 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि टीवीके का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, लेकिन यह वोट कटौती का खेल जरूर बदल सकती है।  मुख्यमंत्री की पसंद- स्टालिन बनाम ईपीएस ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री की पसंद के सवाल पर एमके स्टालिन 39.8 फीसदी के साथ थोड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि ई के पलानिस्वामी 38.8 फीसदी लोग अपनी पंसद बताते हैं. विजय को 13.6 फीसदी लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है. लिंग और जाति का फैक्टर यहां साफ नजर आता है. महिलाएं और एससी/दलित वोटर स्टालिन के पक्ष में ज्यादा झुके हुए हैं, जबकि पुरुष और अपर कास्ट हिंदू ईपीएस को अधिक पसंद करते दिख रहे हैं. युवा वोटरों में विजय के प्रति आकर्षण दिख रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की राजनीति अभी भी जाति, लिंग और उम्र के आधार पर बंटी हुई है।  डीएमके सरकार की परफॉर्मेंस पर राय बंटी हुई है. सिर्फ 35.5 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा या बहुत अच्छा बताया, जबकि 40.8 फीसदी ने खराब या बहुत खराब कहा. महिलाओं और बुजुर्ग वोटरों में संतोष ज्यादा है, वहीं युवा और अपर कास्ट हिंदू ज्यादा आलोचनात्मक हैं।  मुख्य मुद्दे क्या हैं? सर्वे में वोटरों ने जो मुद्दे सबसे ज्यादा उठाए उनमें कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (23.1 फीसदी), शराब और नशीले पदार्थ (20.8 फीसदी) और बेरोजगारी (17.3 फीसदी) प्रमुख हैं. भ्रष्टाचार, महंगाई और विकास संबंधी चिंताएं भी शामिल हैं. एससी/दलित वोटर बेरोजगारी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि अपर कास्ट वोटर कानून-व्यवस्था पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. ये मुद्दे चुनावी रणनीति तय करने में दोनों गठबंधनों के लिए अहम होंगे।  फ्रीबीज का असर सीमित तमिलनाडु में फ्रीबीज (मुफ्त योजनाएं) की राजनीति लंबे समय से चर्चा में रही है, लेकिन इस पोल में इसका प्रभाव काफी सीमित नजर आया. 44.2 फीसदी वोटरों ने कहा कि फ्रीबीज उनका वोट तय नहीं करते, जबकि 28.9 फीसदी ने फ्रीबीज देने वाली पार्टियों के खिलाफ वोट करने की बात कही. सिर्फ 8.6 फीसदी ही फ्रीबीज से सकारात्मक रूप से प्रभावित हैं. अपर कास्ट हिंदू (31.8 फीसदी) और OBC (30.6 फीसदी) फ्रीबीज के खिलाफ सबसे ज्यादा हैं, जबकि एससी/दलित वोटरों में वेलफेयर स्कीम्स अभी भी कुछ असर रखती हैं. यह इंगित करता है कि अब वोटर परफॉर्मेंस, मुद्दों और नेतृत्व पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।  ईरान युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक नजरिया पोल में एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भी सवाल पूछा गया. यह सवाल ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर था. 40.9 फीसदी वोटरों ने भारत के प्रदर्शन को बहुत अच्छा बताया, 15.3 फीसदी ने अच्छा, 20.6 फीसदी ने औसत और 17.8 फीसदी ने खराब राय दी. यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी तमिलनाडु के वोटर सकारात्मक सोच रखते हैं, हालांकि 5.5 फीसदी कुछ नहीं कह सकते रहे, जो जागरूकता की कमी या उदासीनता दर्शाता है।  नई सरकार या हंग असेंबली? वर्तमान पोल के अनुसार एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन 115-125 सीटों के साथ बहुमत (118) के काफी करीब है, लेकिन अभी भी अनिश्चितता बाकी है. डीएमके गठबंधन 104-114 सीटों पर सिमट सकता है, लेकिन छोटे बदलाव से नतीजे पलट सकते हैं. टीवीके अगर 4-5 सीटें भी जीत ले या वोट काटे तो गठबंधनों का गणित बिगड़ सकता है. पिछले पोल से तुलना करें तो पहले डीएमके को मामूली बढ़त दिख रही थी, अब एआईएडीएमके ने थोड़ी बढ़त हासिल कर ली है. यह दर्शाता है कि अंतिम चरण में कैंपेन, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन की मजबूती फैसला करेंगे. तमिलनाडु की राजनीति में ड्रामे की कमी नहीं रहती – पिछले चुनावों में भी अंतिम समय में कई सरप्राइज देखे गए हैं।  ऐसे में यह ओपिनियन पोल साफ संकेत देता है कि तमिलनाडु एक और कड़ी टक्कर देखने को तैयार है. एआईएडीएमके-बीजेपी को मामूली बढ़त है, लेकिन डीएमके की सत्ता में वापसी की संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती. विजय की टीवीके युवा वोटरों को आकर्षित कर कुछ हलचल जरूर पैदा कर सकती है। 

MPL Auction 2026: आशुतोष शर्मा बने सबसे महंगे खिलाड़ी, मालवा स्टेलियंस ने 15 लाख में किया शॉपिंग

भोपाल   मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग 2026 (MPL) के लिए खिलाड़ियों की नीलामी प्रक्रिया में आशुतोष शर्मा सबसे महंगे खिलाड़ी बने हैं। आशुतोष शर्मा को मालवा स्टेलियंस ने 15 लाख रुपये में खरीदकर टीम के साथ जोड़ा है। इसके साथ ही अक्षत रघुवंशी को रीवा जगुआर ने 13.80 लाख रुपये में खरीदा है जो कि एमपीएल के दूसरे सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। तीसरी सबसे बड़ी बोली अनिकेत वर्मा के लिए लगी जिन्हें 13.20 लाख रुपये में भोपाल लेपर्ड्स ने अपनी टीम में शामिल किया है। ग्रेड-ए के सभी खिलाड़ियों के लिए लगी बोली इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में MPL 2026 के लिए हुई नीलामी में 244 खिलाड़ियों के लिए बोली लगाई जा रही है। हर फ्रेंचाइजी को खिलाड़ियों की खरीद के लिए 50 लाख रुपए का पर्स दिया गया है। MPL जून 2026 में इंदौर और ग्वालियर में खेला जाएगा। ग्रुप-एक के सभी 10 खिलाड़ियों के लिए बोली लगाई जा चुकी है, इन सभी खिलाड़ियों का आधार मूल्य 3 लाख रुपये रखा गया था। ग्रुप-ए के किस खिलाड़ी को किस टीम ने कितने में खरीदा     आशुतोष शर्मा- 15 लाख रुपये में मालवा स्टेलियंस ने खरीदा।     अक्षत रघुवंशी- 13.80 लाख रुपये में रीवा जगुआर ने खरीदा।     आवेश खान- 8.20 लाख रुपये में चंबल घड़ियाल ने खरीदा।     शिवम शुक्ला- 6.60 लाख रुपये में पिंक पैंथर ने खरीदा।     शिवांग कुमार- 13 लाख रुपए में बुंदेलखंड बुल्स ने खरीदा।     माधव तिवारी- 10.60 लाख में उज्जैन फाल्कन ने खरीदा।     सारांश जैन- 9 लाख 60 हजार रुपये में निमाड़ ईगल ने खरीदा।     कुलदीप सेन- 7 लाख में बुंदेलखंड बुल्स ने खरीदा।     कुमार कार्तिकेय सिंह- 10.20 लाख रुपए कीमत में रॉयल निमाड़ ईगल्स ने खरीदा।     मंगेश यादव- 12 लाख रुपए में ग्वालियर चीताज ने खरीदा। सात टीमों ने एक-एक आईकॉन खिलाड़ी को किया रिटेन MPL ऑक्शन में पिछले संस्करण की सात टीमों ने अपने एक-एक आईकॉन खिलाड़ी को रिटेन किया है। जिन खिलाड़ियों को उनकी टीमों ने रिटेन किया है उनमें सबसे महंगे खिलाड़ी वेंकटेशन अय्यर हैं जिन्हें पिंक पैंथर्स ने 12 लाख 50 हजार रुपए में रिटेन किया है। इसके साथ ही रजत पाटीदार को लियर चीताज ने सात लाख रुपए में और अरशद खान को भोपाल लेपर्ड्स ने 8 लाख रुपए में रिटेन किया है। खिलाड़ियों को 4 श्रेणियों में बांटा MPL (एमपीएल) की नीलामी में जिन खिलाड़ियों को शामिल किया गया है उन्हें चार श्रेणियों में ए, बी, सी और डी में बांटा गया है।     A श्रेणी- ए श्रेणी में उन खिलाड़ियों को रखा गया है जो भारतीय टीम में खेल चुके हैं और पिछले दो सत्रों में आईपीएल में खरीदे गए हैं या फिर भारत-ए की क्रिकेट टीम में शामिल रहे हैं। इन सभी खिलाड़ियों का आधार मूल्य 3 लाख रुपये है।     B श्रेणी- बी श्रेणी में वो खिलाड़ी शामिल किए गए हैं जो कि पिछले दो सत्रों में रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए सीनियर टीम में चुने गए हों। इन खिलाड़ियों का आधार मूल्य 1.5 लाख रुपए है।     C श्रेणी- सी श्रेणी में वो खिलाड़ी हैं जो पिछले दो सत्रों में मध्य प्रदेश की जूनियर टीम में शामिल रहे हैं, इनका आधार मूल्य 75 हजार रुपए है।     D श्रेणी- डी श्रेणी में वो खिलाड़ी रखे गए हैं जो कि पिछले दो सत्रों में जेएन भाया ट्रॉफी या माधवराव सिंधिया ट्रॉफी में संभागीय टीम से अंतिम एकादश में खेले हों, इनका आधार मूल्य 50 हजार रुपये है।

गोरखपुर मंडल में 19 हजार परिवारों को मिली पक्की छत, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत खर्च हुए 219 करोड़

गोरखपुर पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है।  जिन्हें तकनीकी वजहों से PM आवास नहीं मिला, वे इस योजना से पूरा कर रहे घर का सपना  उत्तर प्रदेश में रहने वाले ऐसे जरूरतमंद लोग जिन्हें किसी तकनीकी कारण से पीएम आवास नहीं मिल पाया उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण, उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले निर्धन और वंचित परिवारों के लिए अपने पक्के घर का सपना साकार कर रही है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह योजना उन वर्गों के लिए बड़ा सहारा बनी है जो किन्हीं तकनीकी कारणों से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ नहीं ले पाए। गोरखपुर मंडल के ही चार जिलों में अब तक 19 हजार से अधिक जरूरतमंद इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इनमें से 17 हजार से अधिक खुद के पक्के मकान में रहने लगे हैं। इन आवासों के लिए सरकार करीब 219 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के हर निराश्रित और पात्र परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए कई प्रयास किए हैं। इस क्रम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर ठीक से लागू कराया गया है। गोरखपुर मंडल में ही 199984 जरूरतमंदों को पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्के आवास स्वीकृत हुए और इनमें से 199103 के आवास बनकर पूरे भी हो गए। पीएम आवास योजना ग्रामीण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के साथ ही प्रदेश में सीएम योगी के विजन से मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण भी संचालित हो रही है। ऐसे जरूरतमंद जिन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका, उन्हें सीएम आवास योजना में कवर किया जा रहा है। इसमें दैवीय आपदा से प्रभावित परिवारों और वनटांगिया, मुसहर जैसे विशेष पिछड़े समुदायों को प्राथमिकता पर रखा गया। योजना के तहत मिलती हैं ये सुविधाएं मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को न केवल आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, बल्कि उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। आवास निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी 1.20 लाख रुपये देने के अलावा उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। साथ ही सौभाग्य योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन और उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन भी दिया जाता है। क्या बोले अधिकारी गोरखपुर के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने इस योजना के बारे में बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में हर जरूरतमंद को पीएम आवास योजना (PM Awas Yojna) और सीएम आवास योजना (CM Awas Yojna) के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।