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रतलाम मंडल से होकर चलेंगी तीन नई स्पेशल ट्रेनें, रेलयात्रियों को मिलेगी राहत

 रतलाम  यात्रियों की सुविधाओं तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये ट्रेनें बांद्रा टर्मिनस से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, सूबेदारगंज और आगरा कैंट के बीच विशेष किराये पर संचालित होंगी।  रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें रतलाम मंडल के विभिन्न स्टेशनों के साथ ही आसपास के अनेक रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। इससे यात्रियों को ग्रीष्मकालीन अवधि में यात्रा के दौरान आवागमन में सुविधा मिलेगी। बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्पेशल ट्रेन प्रत्येक शनिवार को 4 अप्रैल से 11 जुलाई 2026 तक चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 5:10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 5:00 बजे झांसी पहुंचेगी। यह ट्रेन रतलाम मंडल के दाहोद (12:43/12:45), रतलाम (14:30/14:40), नागदा (15:43/15:45), उज्जैन (16:55/17:10) और मक्सी (18:00/18:02) स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 02199 झांसी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 2 अप्रैल से 9 जुलाई 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को झांसी से शाम 16:50 बजे प्रस्थान कर अगले दिन शाम 16:10 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, ब्यावरा, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 04126 बांद्रा टर्मिनस-सूबेदारगंज स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से सुबह 11:15 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन शाम 17:00 बजे सूबेदारगंज पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04125 सूबेदारगंज-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल 04 अप्रैल से 13 जुलाई 2026 तक प्रत्येक सोमवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन सूबेदारगंज से सुबह 5:20 बजे प्रस्थान कर रतलाम (21:45/21:55) होते हुए अगले दिन सुबह 9:30 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, आगरा क्षेत्र सहित कई स्टेशनों पर रुकेगी। इसमें एसी 3-टियर, एसी 3-टियर (इकोनॉमी), स्लीपर और जनरल कोच होंगे। उधना-आगरा कैंट स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 01908 उधना-आगरा कैंट स्पेशल 8 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक प्रत्येक बुधवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन उधना से दोपहर 15:25 बजे प्रस्थान कर रतलाम (22:25/22:30) होते हुए अगले दिन सुबह 8:30 बजे आगरा कैंट पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 01907 आगरा कैंट-उधना स्पेशल 7 अप्रैल से 14 जुलाई 2026 तक प्रत्येक मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन आगरा कैंट से शाम 18:45 बजे प्रस्थान कर रतलाम (06:15/06:20) होते हुए अगले दिन दोपहर 13:25 बजे उधना पहुंचेगी। यह ट्रेन सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, बयाना, फतेहपुर सीकरी आदि स्टेशनों पर ठहरेगी। इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच उपलब्ध रहेंगे। 

MG की नई पावरफुल SUV, Tata और Mahindra को देगी कड़ी टक्कर

 नई दिल्ली जेएसडब्लू-एमजी मोटर साल 2026 में कई लॉन्चिंग करने वाले हैं. कंपनी भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंटरनल कंबस्चन इंजन और प्लग-इन हाइब्रिड कार्स को लॉन्च कर सकती है. इसमें से एक वूलिंग स्टारलाइट 560 (Wuling Starlight 560) हो सकती है. इस कार का भारत में पेटेंट फाइल हुआ है।  हाल के दिनों में इसे भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है. ये कार एमजी की ब्रांडिंग के साथ आएगी. पेटेंट फाइल होने से पहले ही इसे कई बार टेस्ट करते हुए पाया गया है. ये दोनों ही पॉइंट्स इसकी भारत में एंट्री का साफ संकेत दे रहे हैं. ध्यान रखें कि एमजी और वूलिंग दोनों की ब्रांड का मालिकाना अधिकार चीन की SAIC मोटर के पास है।  एक्सटीरियर और इंटीरियर  Starlight 560 चार मीटर से लंबी कार है. इसकी लंबाई 4745 एमएम, चौड़ाई 1850 एमएम और हाइट 1750 एमएम है. कार का व्हीलबेस 2810 एमएम का है. एक्सटीरियर की बात करें, तो इसमें फुल एलईडी लाइटिंग का सेटअप मिलता है. स्टारलाइट 560 में रूफ रेल, स्किड प्लेट्स, 18-इंच के डुअल टोन एलॉय और स्प्लिट टेल लैम्प मिलता है।  वहीं इंटीरियर की बात करें, तो इसमें टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, 3.5 इंच का इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले और 12.8 इंच का टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ आता है. कैबिन में लेदर अपहोल्स्ट्री मिलेगी. भारतीय बाजार में कंपनी इसे कुछ बदलाव के साथ लॉन्च कर सकती है।  इंजन और पावर  इस SUV में मल्टीपल पावरट्रेन का विकल्प मिलता है. इसमें 1.5 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन आता है, जो 174 बीएचपी की पावर ऑफर करता है, जो मैन्युअल या सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आएगा. मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ ये इंजन 260 एनएम का और ऑटोमेटिक के साथ 290 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  इसके अलावा ये एसयूवी 1.5 लीटर के इंजन के साथ हाइब्रिड में भी आती है. कार में प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम मिलता है, जो 194 बीएचपी की पावर और 230 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसका ऑल इलेक्ट्रिक वर्जन भी आता है, जो 134 बीएचपी की पावर और 200 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है।  भारत में इस कार का सीधा मुकाबला टाटा हैरियर और महिंद्रा एक्सयूवी 7एक्स0 से होगा. हालांकि, इसका कंपटीशन पूरी तरह से निर्भर करता है कि ये कार किस पावरट्रेन के साथ आती है. ज्यादा संभावना है कि कंपनी इसे प्लगइन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वर्जन में लॉन्च कर सकती है। 

नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार, BJP के इशारे का इंतजार! कब होगा बिहार में सरकार का बदलाव?

पटना  बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी।  इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में? यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा।  अगला सीएम नीतीश की पसंद का? सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया।  बिहार की राजनीति में सम्राट फिट बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे।  भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके।  नीतीश कर रहे BJP का इंतजार जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

एम्स भोपाल और ग्वालियर आयुर्वेद संस्थान मिलकर खोजेंगे घुटनों के दर्द का परमानेंट इलाज

ग्वालियर  घुटनों के दर्द (आस्टियोआर्थराइटिस) से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एम्स भोपाल और क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर मिलकर इस बीमारी का समाधान खोज रहे हैं। जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच आधिकारिक समझौता होने वाला है, जो जोड़ों के दर्द के इलाज की दिशा बदल सकता है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय से इस रिसर्च प्रोजेक्ट की अनुमति मिल गई है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि घुटने के आस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियां, आधुनिक एलोपैथी की तुलना में कितनी सुरक्षित और असरदार हैं। शोध का मुख्य कार्यक्षेत्र एम्स भोपाल रहेगा, जहां की आधुनिक लैब और डाक्टरों की देखरेख में मरीजों पर आयुर्वेदिक उपचार के प्रभावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। यह रिसर्च आधुनिक मानकों पर आधारित होगी, ताकि इसके परिणामों पर भरोसा किया जा सके। एम्स भोपाल के अस्थिरोग विभाग के प्रोफेसर डा. रेहान उल हक प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे। वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर के विशेषज्ञ डा. अनिल मंगल इसके सह-अन्वेषक और कोआर्डिनेटर होंगे। मरीजों को क्या होगा फायदा?     इस शोध से मरीजों को पता चलेगा कि आयुर्वेद की कौन-सी दवाएं विज्ञानी रूप से सुरक्षित हैं।     अगर आयुर्वेदिक औषधियां प्रभावी साबित होती हैं, तो मरीजों को पेन-किलर (दर्द निवारक दवाओं) के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।     यह रिसर्च गठिया और जोड़ों के दर्द के उपचार का तरीका बदल सकती है।

आज है हनुमान जन्मोत्सव, संकटमोचन की इन 5 शक्तियों में छिपा है सफलता का मंत्र, आत्मविश्वास से होगा बेड़ा पार

 आज 2 अप्रैल को  हनुमान जयंती का पर्व मनाया जा रह  . हर वर्ष यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है.आज के दिन हनुमान जी की पूजा-उपासना करना बहुत ही शुभ माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में हनुमान जी को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त और अपार शक्ति का प्रतीक बताया गया है. उन्हें साहस, समर्पण और अटूट विश्वास का रूप माना जाता है. मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने से डर, बीमारी और नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को जीवन में सही दिशा मिलती है. आज के समय में जब लोग किसी न किसी परेशानी से गुजर रहे हैं तो ऐसे में हनुमान जी से जुड़ी कथाएं हमें हिम्मत और सकारात्मक सोच देती हैं. ये सिर्फ पौराणिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि जीवन को समझने और आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाती हैं. हनुमान जयंती के मौके पर आइए उनकी कुछ खास शक्तियों और उनसे मिलने वाली सीख को समझते हैं. 1. भक्ति ही सबसे बड़ी ताकत हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति उनकी श्रीराम के प्रति भक्ति थी. वे हर काम करने से पहले प्रभु को याद करते थे. यही वजह थी कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी वे सफल हुए. इससे सीख मिलती है कि सच्चा विश्वास और समर्पण हमें मजबूत बनाता है. 2. साहस और समझदारी- पर्वत उठाने की कथा जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी लानी थी. हनुमान जी को जब सही जड़ी-बूटी पहचान में नहीं आई, तो वे पूरा पर्वत ही उठा लाए. यह दिखाता है कि मुश्किल समय में सही फैसला और हिम्मत कितनी जरूरी होती है. 3. आत्मविश्वास- समुद्र पार करना लंका जाने के लिए हनुमान जी ने एक ही छलांग में समुद्र पार कर लिया था. उन्होंने बिना डर के अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाया. यह कहानी सिखाती है कि अगर आत्मविश्वास मजबूत हो, तो बड़ी से बड़ी दूरी भी छोटी लगने लगती है. 4. बुद्धि और चालाकी- लंका में प्रवेश जब हनुमान जी लंका पहुंचे, तो उन्होंने सूक्ष्म रूप धारण कर माता सीता को खोजा था. उन्होंने अपनी समझदारी से हर चुनौती का सामना किया था और सही समय पर सही कदम उठाया था. इससे सीख मिलती है कि केवल ताकत ही नहीं, बल्कि बुद्धि भी उतनी ही जरूरी है. 5. अन्याय के खिलाफ खड़े होना- लंका दहन हनुमान जी ने रावण के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और पूरी लंका को जला दिया था. यह दिखाता है कि गलत के सामने चुप नहीं रहना चाहिए. सही के लिए खड़ा होना भी एक बड़ी ताकत है.

सर्वे 2025 में दावा: देश में बेरोजगारी घट रही है, 61.3 करोड़ लोग काम पर; महिलाओं का वेतन वृद्धि पुरुषों से ज्यादा

नई दिल्ली देश में बेरोजगारी दर 2025 में थोड़ी घटकर 3.1% हो गई है। यह आंकड़ा 2024 में 3.2% था, यानी मामूली सुधार जरूर हुआ है। यह जानकारी सरकार के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2025 में सामने आई है, जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने जारी किया है। रिपोर्ट बताती है कि रोजगार के मामले में देश में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और यह सुधार लगभग हर सेक्टर और पुरुष-महिला दोनों में देखने को मिला है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 3.3% से घटकर 3.1% हो गई, जबकि महिलाओं की बेरोजगारी दर 3.1% पर ही स्थिर रही।  गांवों में स्थिति ज्यादा बेहतर अगर ग्रामीण और शहरी इलाकों की बात करें तो गांवों में स्थिति ज्यादा बेहतर दिख रही है। ग्रामीण बेरोजगारी दर 2.5% से घटकर 2.4% हो गई, जो यह दिखाता है कि गांवों में लोगों को काम मिलने की स्थिति मजबूत हो रही है। खास बात यह है कि गांवों में महिलाओं की बेरोजगारी दर सिर्फ 2.1% रही, जो पुरुषों (2.6%) से भी कम है। वहीं शहरों में बेरोजगारी दर ज्यादा है, पुरुषों के लिए 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4%। लैंगिक और क्षेत्रीय विश्लेषण सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों की बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जो 2024 के 3.3% से घटकर 2025 में 3.1% पर आ गई है. वहीं, महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर 3.1% पर स्थिर बनी हुई है।  ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच श्रम अवशोषण की क्षमता में भी अंतर देखा गया. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 2.4% दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के 2.5% से कम है. विशेष रूप से, ग्रामीण भारत में महिलाओं की बेरोजगारी दर केवल 2.1% रही, जो इसी क्षेत्र के पुरुषों (2.6%) की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाती है. शहरी क्षेत्रों में, पुरुषों के लिए यह दर 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4% रही।  रोजगार की प्रकृति में बदलाव: स्वरोजगार से वेतनभोगी नौकरियों की ओर रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार की गुणवत्ता में आया सुधार है. आंकड़ों से पता चलता है कि देश में स्वरोजगार की हिस्सेदारी 57.5% से घटकर 56.2% रह गई है. इसके विपरीत, 'नियमित वेतनभोगी नौकरियों' में वृद्धि देखी गई है, जो 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई है. यह वृद्धि पुरुषों (25.4% से 26.5%) और महिलाओं (16.6% से 18.2%) दोनों के लिए समान रूप से दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण का संकेत है।  क्षेत्रीय बदलाव और आय में वृद्धि औद्योगिक भागीदारी के मामले में, कृषि क्षेत्र अभी भी सबसे बड़ा नियोक्ता बना हुआ है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी 44.8% से घटकर 43.0% रह गई है. निर्माण क्षेत्र में भी 12.3% से गिरकर 12% की मामूली गिरावट आई है. दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार हुआ है, जो 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गया है, और सेवा क्षेत्र भी 12.2% से बढ़कर 13.1% पर पहुँच गया है।  श्रमिकों की औसत आय में भी सम्मानजनक वृद्धि देखी गई है. नियमित वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत मासिक आय 5.8% की वृद्धि के साथ ₹24,217 हो गई है, जबकि महिलाओं की आय में 7.2% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब ₹18,353 है. स्वरोजगार श्रेणी में भी पुरुषों की आय में 6% और महिलाओं की आय में 8.8% का इजाफा हुआ है।  सर्वेक्षण का पैमाना यह व्यापक सर्वेक्षण देश भर के 2,70,472 घरों (1,48,718 ग्रामीण और 1,21,754 शहरी) में किया गया था, जिसमें कुल 11,48,634 व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) ग्रामीण क्षेत्रों में 80.5% (पुरुष) और 45.9% (महिला) के साथ मजबूत बनी हुई है, जो भारत की आर्थिक विकास यात्रा में श्रम शक्ति की सक्रिय भूमिका की पुष्टि करती है।  खेती अभी भी सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र रोजगार के प्रकार में भी बदलाव देखने को मिला है। खुद का काम करने वालों की हिस्सेदारी थोड़ी घटी है, 2024 में 57.5% से घटकर 2025 में 56.2% रह गई। लेकिन अच्छी बात यह है कि नियमित सैलरी वाली नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है, जो 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई। इसका मतलब है कि लोगों को ज्यादा स्थायी नौकरियां मिल रही हैं। वहीं दिहाड़ी मजदूरी लगभग 20% के आसपास ही बनी हुई है। सेक्टर के हिसाब से देखें तो खेती अभी भी सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, लेकिन इसमें थोड़ी गिरावट आई है, 44.8% से घटकर 43%। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग (कारखानों) में रोजगार बढ़ा है और सर्विस सेक्टर (जैसे होटल, ट्रांसपोर्ट, अन्य सेवाएं) में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में हल्की गिरावट देखी गई। पुरुषों और महिलाओं की कमाई भी बढ़ी कमाई के मामले में भी सुधार दिखा है। सैलरी वाले काम में पुरुषों की औसत कमाई करीब 5.8% बढ़कर ₹24,217 हो गई, जबकि महिलाओं की कमाई 7.2% बढ़कर ₹18,353 हो गई। खुद का काम करने वालों और महिलाओं की आमदनी में भी अच्छा इजाफा हुआ है। हालांकि दिहाड़ी मजदूरों में पुरुषों की कमाई लगभग स्थिर रही, जबकि महिलाओं की कमाई थोड़ी बढ़ी। शिक्षा और काम में भागीदारी की बात करें तो शहरों में लोगों की पढ़ाई का स्तर ज्यादा है, जबकि गांवों में थोड़ा कम है। गांवों में पुरुषों की काम में भागीदारी 80.5% और महिलाओं की 45.9% रही, जो पिछले साल के बराबर है। 

हनुमान जी और श्रीराम का भाई वाला नाता, क्या है दिव्य खीर का रहस्य?

हनुमान जी को श्रीराम का अद्भुद भक्त माना जाता है. वीरों के वीर फिर भी स्वभाव से सरल हनुमानजी के जन्म की कथा बहुत विचित्र और रहस्यों से भरी है. वह माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र थे. लेकिन कई ग्रंथों और कहानियों में उन्हें श्रीराम का ही एक भाई बताया जाता है. इसके पीछे कई तरह के तर्क आधार बनते हैं. श्रीराम ने खुद भी हनुमानजी से कहा था कि, 'तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई' यानी तुम मुझे भरत के समान भाई जैसे प्रिय हो. यानी श्रीराम भी खुद हनुमान जी को अपना एक भाई ही मानते थे. क्या है माता अंजना के शाप की कहानी लेकिन, आनंद रामायण में हनुमानजी के जन्म की कहानी ये बताती है कि कैसे हनुमानजी श्रीराम के भाई हुए. बात ऐसी है कि स्वर्ग की एक अप्सरा थी पुंजिकस्थला. वह वायुदेव से प्रेम करती थीं. एक बार दोनों एक सरोवर में खेल रहे थे. वहीं उसके तट पर एक ऋषि साधना में लीन थे. अप्सरा को ये बात पता नहीं थी. वह हथेली में जल कर बार-बार इधर-उधर उछाल रही थी. ठंडे पानी की बूंदे बार-बार पड़ने से ऋषि की साधना में बाधा आई तो उन्होंने अप्सरा को वानर हो जाने का शाप दे दिया. दशरथ जी के यज्ञ का हनुमानजी के जन्म से कनेक्शन वही अप्सरा अगले जन्म में अंजना नाम से वानरकुल में जन्मी. समय आने पर वानर राज केसरी से उनका विवाह हुआ. कई वर्षों तक जब उन्हें संतान नहीं हुई तब अंजना ने शिवजी की तपस्या की. ठीक इसी दौरान अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र की कामना के लिए यज्ञ करा रहे थे. यज्ञ से अग्निदेव ने उन्हें दिव्य चरु (खीर) प्रसाद में दी. जिसे राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानीयों में बांट दिया. कहते हैं कि जैसे ही रानी कैकेयी अपने हिस्से की खीर खाने वाली थीं कि उससे पहले ही एक चील ने थोड़ी सी खीर अपनी चोंच में दबा ली और उड़ चली. उधर अंजना माता की तपस्या से प्रसन्न शिवजी उन्हें वरदान देने आए थे. ठीक इसी वक्त चील के मुंह से खीर के अंश अंजना की हथेली में गिरे, शिवजी के आदेश से उन्होंने उसे ग्रहण किया. इसी से हनुमान जी का जन्म हुआ. कुछ जगहों पर ऐसा भी जिक्र आता है कि जब शिवजी अंजना माता को वरदान देने जा रहे थे, इससे पहले उन्होंने वायुदेव को आदेश दिया कि वह अयोध्या से खीर का कुछ अंश उड़ा कर ले आएं. वायुदेव ने रानी कैकेयी के हिस्से की खीर से ही कुछ अंश उड़ा लिए थे. कहानियों में एक तर्क ऐसा भी है कि अग्निदेव ने खीर के तीन कटोरे दिए थे. उस वक्त रानी सुमित्रा वहां नहीं थीं, इसलिए कैकेयी ने दो कटोरे उठाए थे कि एक वह सुमित्रा को दे देंगी, लेकिन इससे पहले ही एक चील खीर का एक कटोरा लेकर उड़ गई. तब बड़ी राना कौशल्या और कैकेयी ने अपने-अपने कटोरे से एक-एक कौर खीर सुमित्रा को खिलाई थी. इसलिए सुमित्रा दो पुत्रों की माता बनीं. राम कौशल्या के पुत्र हुए. कैकेयी के भरत हुए और कैकेयी के ही हाथ से उड़ी खीर से हनुमान जी का जन्म हुआ. इसलिए हनुमान जी भरत के समान ही श्रीराम के प्रिय भाई हुए. क्योंकि उनके जन्म का रहस्य भरत और उनकी मां कैकेयी से जुड़ा हुआ है. कहने को तो वह लक्ष्मण के समान प्रिय भाई भी हो सकते थे. क्योंकि लक्ष्मणजी ने तो श्रीराम को मिला वनवास भी सिर्फ साथ निभाने के लिए भोगा था, क्यों भरत जी के बराबर भाई जैसा है हनुमान जी का दर्जा हनुमान जी को भरत के समान भाई मानने का यही रहस्य है. लोक मान्यता में भी जब रामदरबार की बात होती है तो उसमें राम जी के भाइयों के साथ हनुमान जी भी शामिल होते हैं. दीपावली के अगले दिन कई जगहों पर जो गोवर्धन पूजा होती है, उसमें पांच भाई बनाए जाते हैं, जिन्हें रामजी और रामजी के भाई माना जाता है. इन पांचों भाइयों में एक हनुमान जी ही शामिल किए जाते हैं. भक्ति में भाई का भाव जोड़कर हनुमान जी केवल सेवक नहीं, बल्कि रामकथा के सबसे आत्मीय पात्र बन जाते हैं.

मध्यप्रदेश में 2 हजार से ज्यादा सैंपल फेल, 60% डेयरी प्रोडक्ट मिलावटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, घी, मिर्च, धनिया पाउडर समेत कई चीजों में मिलावट हो रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए है। करीब 30 जिलों में दो हजार सैंपल फेल हुए। इनमें ग्वालियर नंबर वन पर है। आइए जानते है कहां कौन से सैंपल फेल हुए है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल की तीन साल की रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब तक करीब एक लाख सैंपल लेने का दावा किया गया है। जिसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए है। मिठाइयों के साथ मसाले और तेल भी सुरक्षित नहीं है। जलेबी, लड्डू, बर्फी गजक और नमकीन में मिलावट मिली। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हो गए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हाल में एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मामले करीब 420 ग्वालियर से सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों तक का कारण बन रही है। FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनकी टेस्ट रिजल्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिसमें बीते तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब कर लिए गए एक लाख सैंपल की कंपाइल रिपोर्ट सामने आई है। ग्वालियर सबसे आगे, कई जिलों में फैला मिलावट का जाल राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं, जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल फैला हुआ है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। मिलावट से शरीर को कैसे हो रहा नुकसान गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी भोजन में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (जैसे माइक्रोप्लास्टिक, हेवी मेटल) शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है। बॉडी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। शरीर में पोषण की कमी होती है। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ती हैं। मसाले और तेल भी नहीं सुरक्षित सिर्फ डेयरी ही नहीं, मसाले और खाद्य तेल भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है। त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं। लगातार चल रही मॉनिटरिंग FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि फेल सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की लगातार की जा रही है। निगरानी सख्त की गई है। मिलावट का यह नेटवर्क खत्म करने के लिए नई योजना के तहत प्रदेश में काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन प्रदेशभर में घूमकर सैंपल एकत्र कर उनकी टेस्टिंग कर रही हैं। मिलावट में ग्वालियर नंबर वन     ग्वालियर जिला मिलावट में पहले स्थान पर है। यहां दो हजार में से लगभग 420 सैंपल फेल हुए है।     गुना – 110     उज्जैन – 95     भिंड – 90,     बुरहानपुर – 75,     जबलपुर – 75     शाजापुर – 70     खरगोन – 65     सीहोर – 55     धार – 40     राजगढ़ – 35     नीमच – 30     नरसिंहपुर – 28     रीवा – 25     दमोह – 20     हरदा – 20     अलीराजपुर – 20     विदिशा – 18     झाबुआ – 18     सागर – 15     मंडला – 15     दतिया – 15     शिवपुरी – 12     छिंदवाड़ा – 12     बालाघाट – 10     डिंडोरी – 08     पन्ना – 08     कटनी – 06     शहडोल – 06 कहां कौन से सैंपल फेल     ग्वालियर- दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल, आटा     इंदौर- लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली, सांभर     शाजापुर- दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर, कुकिंग ऑयल     दमोह- जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर, दही     भिंड- मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च     मुरैना- मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू     धार- मावा, पनीर, धनिया पाउडर, पताशे     सागर- मोतीचूर लड्डू में मिलावट     रीवा- तुअर दाल और मिठाई     सिवनी- गुजिया, सेव और पनीर     नरसिंहपुर- दूध में मिलावट     खंडवा- गुड़ चिक्की का सैंपल फेल     बैतूल- दही और काली मिर्च में मिलावट     सीहोर- खाने का तेल  

GST कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल! सरकार के खजाने से मिलने वाली सुविधाएं जानें

नई दिल्ली  जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर अच्छी खबर है। मार्च 2026 में देश की GST कलेक्शन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नेट GST कलेक्शन बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 8.2% ज्यादा है। इससे साफ है कि देश में कारोबार और खपत दोनों में मजबूती बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों के लगातार सुधरने का संकेत देती है। वहीं, अगर ग्रॉस GST कलेक्शन की बात करें तो मार्च में यह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 8.8% ज्यादा है। लगातार बढ़ती GST वसूली सरकार के राजस्व को मजबूत कर रही है और आने वाले समय में विकास योजनाओं को रफ्तार देने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।  इस पैसे से आपको मिलती हैं ये सुविधाएं पिछले कुछ महीनों से भारत सरकार के खजाने में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है. देश में जीएसटी कलेक्शन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. हर महीने सरकार के खजाने में लाखों करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकला यह टैक्स, घूम-फिरकर आपके जीवन को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने में कैसे इस्तेमाल होता है? आइए समझते हैं कि सरकार इस भारी-भरकम पैसे से आम जनता के लिए कौन सी सुविधाएं तैयार कर रही है. 1. हाई-वे और एक्सप्रेसवे का बिछेगा जाल GST से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाता है. सरकार का लक्ष्य भारत के सड़क नेटवर्क को अमेरिका और यूरोप के स्तर पर ले जाना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स इसी कमाई के दम पर पूरे हो रहे हैं. जब सड़कें अच्छी होती हैं, तो सामान की आवाजाही सस्ती होती है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है. 2. हेल्थकेयर: अब हर जिले में होंगे ‘सुपर स्पेशलिटी’ अस्पताल टैक्स के जरिए सरकार देश के हेल्थ बजट को बढ़ा रही है. इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलता है. देश के अलग-अलग राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसका फंड इसी टैक्स कलेक्शन से आता है. 3. रेल सफर बनेगा ‘हवाई’ सफर जैसा वंदे भारत ट्रेनों की सफलता और रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प (जैसे अमृत भारत स्टेशन योजना) GST कलेक्शन की मजबूती का ही परिणाम है. ट्रेनों में ‘कवच’ जैसी सुरक्षा तकनीक और हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने के लिए सरकार भारी निवेश कर रही है. रेलवे स्टेशनों पर अब आपको एयरपोर्ट जैसी लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग लाउंज देखने को मिल रहे हैं. 4. शिक्षा और डिजिटल इंडिया देश के गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना हो या सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में बदलना, जीएसटी का पैसा भविष्य की पीढ़ी को तैयार कर रहा है. डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ने से पारदर्शिता आई है, जिससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और योजनाओं का फायदा डीबीटी के जरिए सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है. 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए रिफंड्स की बात करें तो मार्च महीने में कुल 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो साल-दर-साल आधार पर 13.8% ज्यादा है। रिफंड बढ़ने के बावजूद सरकार की नेट कमाई मजबूत बनी हुई है, जो 1.78 लाख करोड़ रुपये रही। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एक्सपोर्ट और कारोबार से जुड़े सेक्टर्स में गतिविधि तेज हुई है। ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा रेवेन्यू के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डालें तो घरेलू लेनदेन से मिलने वाला ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 5.9% की बढ़त हुई। वहीं, इंपोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू 0.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 17.8% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका मतलब है कि देश में आयात गतिविधियां भी काफी मजबूत रही हैं। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो ग्रॉस GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। वहीं नेट GST रेवेन्यू 7.1% की बढ़त के साथ 19.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा योगदान दिया, जहां से करीब 0.13 लाख करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा। कैसे रहे राज्यों के प्रदर्शन राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई राज्यों में GST कलेक्शन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। वहीं कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई, जैसे जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।  

तेल-गैस की तलाश में मेगा गेम शुरू, कीमतों में गिरावट और निवेश का मौका

नई दिल्ली  भारत सरकार ने तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए देश के 2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. सरकार का मकसद साफ है कि आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाए।  क्या है पूरा फैसला और कितना बड़ा है इसका दायरा: सरकार ने कुल 2,62,817 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोला है, जिसमें जमीन के साथ साथ समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं. यह कोई छोटा कदम नहीं है, बल्कि भारत के कुल सेडिमेंटरी बेसिन का बड़ा हिस्सा अब कंपनियों के लिए उपलब्ध हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा इलाकों में तेल और गैस की तलाश की जा सकेगी।  OALP मॉडल क्या है और कंपनियों को कैसे फायदा मिलेगा: यह पूरा प्रोसेस ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम यानी OALP के तहत किया जा रहा है. इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें सरकार खुद ब्लॉक ऑफर करने के बजाय कंपनियों को यह आजादी देती है कि वे अपनी पसंद के इलाकों को पहचान कर वहां के लिए बोली लगा सकें. इससे कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ती है और एक्सप्लोरेशन ज्यादा टारगेटेड तरीके से हो पाता है।  किन इलाकों में होगा एक्सप्लोरेशन और क्या है संभावना: इस फैसले के तहत 26 सेडिमेंटरी बेसिन के ब्लॉक्स को शामिल किया गया है. ये वही इलाके होते हैं जहां भूगर्भीय संरचना ऐसी होती है कि तेल और गैस मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि संभावना होना और असल में रिजर्व मिलना दो अलग बातें हैं, इसलिए हर ब्लॉक में सफलता की गारंटी नहीं होती। समुद्र पर बढ़ता फोकस और समुद्र मंथन पहल: सरकार इस बार खासतौर पर डीप सी एक्सप्लोरेशन पर जोर दे रही है, जो प्रधानमंत्री के समुद्र मंथन इनिशिएटिव का हिस्सा है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर जैसे इलाकों में बड़ी संभावनाएं मानी जाती हैं, लेकिन यहां काम करना तकनीकी रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और महंगा होता है।  विदेशी और निजी कंपनियों के लिए बड़ा मौका: इस कदम के जरिए सरकार ने साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल और गैस कंपनियों को भारत में निवेश के लिए न्योता दिया है. रिलायंस, ओएनजीसी के अलावा बीपी, शेल, टोटल और एक्सॉन जैसी विदेशी कंपनियां भी इसमें दिलचस्पी दिखा सकती हैं. इससे न सिर्फ निवेश आएगा बल्कि नई तकनीक और विशेषज्ञता भी देश में आएगी।  भारत की आयात निर्भरता कम करने की कोशिश: भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालता है. अगर घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ता है, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी कम होगा. यही इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी रणनीतिक सोच है।  चुनौतियां भी कम नहीं हैं, समय और लागत दोनों भारी: तेल और गैस की खोज कोई आसान या जल्दी होने वाली प्रक्रिया नहीं है. इसमें कई साल लग जाते हैं और भारी निवेश करना पड़ता है. कई बार कंपनियों को सालों की मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता, इसलिए जोखिम भी काफी ज्यादा होता है।  कब दिखेगा असर और क्या है आगे की तस्वीर: इस फैसले का असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोडक्शन तक पहुंचने में 5 से 10 साल तक का समय लग सकता है. लेकिन अगर कुछ बड़े रिजर्व मिलते हैं, तो आने वाले समय में भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत हो सकती है और देश को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।