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ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के कई खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर ओलंपियनों और टैलेंट स्काउट्स का ध्यान खींचा

रायपुर ओडिशा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में हॉकी का स्वर्ण पदक जीतकर अपने दबदबे को साबित किया। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में पुरुष टीम ने झारखंड को 4-1 से हराया, जबकि महिला टीम ने रोमांचक मुकाबले में मिजोरम को 1-0 से मात दी। पुरुष वर्ग में झारखंड को रजत और छत्तीसगढ़ को कांस्य मिला, जबकि महिला वर्ग में झारखंड ने कांस्य पदक हासिल कर पोडियम पूरा किया।                 रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में ओडिशा की यह दोहरी स्वर्णिम सफलता केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि यह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे हॉकी ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में जीवन को नई दिशा दे रही है। खेल प्रतिभा के भंडार माने जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जहां मिजोरम की टीम ने फाइनल तक जगह बनाई।                ओडिशा की पुरुष टीम ने फाइनल में झारखंड को 4-1 से हराया, जबकि महिला टीम ने कड़े मुकाबले में मिजोरम को 1-0  से पराजित किया। झारखंड और छत्तीसगढ़ की टीमें भी पोडियम तक पहुंचीं, जो इन क्षेत्रों से उभरती प्रतिभा की गहराई को दर्शाता है। लेकिन पदकों से आगे बढ़कर असली कहानी उन गांवों, जंगलों और समुदायों में छिपी है, जहां हॉकी पहचान और अवसर दोनों बन चुकी है। दशकों से हॉकी जनजातीय संस्कृति का हिस्सा रही है। बच्चे पेड़ की टहनियों से स्टिक बनाकर ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर नंगे पांव खेलते हैं। प्रतिभा हमेशा मौजूद थी, लेकिन उसे आगे बढ़ाने का रास्ता नहीं था—जो अब बदल रहा है।              केंद्रीय खेल मंत्रालय और राज्यों द्वारा संचालित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेहतर बुनियादी ढांचे और संगठित जमीनी कार्यक्रमों के चलते अब एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है। 1992 बार्सिलोना ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व ओलंपियन अजीत लकड़ा, जो वर्तमान में बिलासपुर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मुख्य कोच हैं, इस बदलाव को करीब से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, “ग्रासरूट से लेकर जूनियर और फिर सीनियर स्तर तक पूरी प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। खासकर जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ी इससे काफी लाभान्वित हो रहे हैं। उनकी प्राकृतिक प्रतिभा को अब सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के जरिए निखारा जा रहा है।”                 लकड़ा का मानना है कि यह संरचित सहयोग एक सकारात्मक श्रृंखला बना रहा है। उन्होंने कहा, “जब बच्चे यहां आकर सीखते हैं और अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वे दूसरों को प्रेरित करते हैं। इससे लगातार नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं।” जो क्षेत्र कभी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां अब खेल के माध्यम से एक शांत बदलाव देखने को मिल रहा है। हॉकी एक सेतु बनकर इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ रही है। खेल मंत्रालय का ‘अस्मिता’ कार्यक्रम अधिक से अधिक महिला खिलाड़ियों को जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में ला रहा है।                 1984 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे पूर्व ओलंपियन मनोहर टोपनो, जिन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की पुरुष टीमों को कोचिंग दी है, ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहल के जमीनी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “मैं इस ग्रासरूट टूर्नामेंट के आयोजन के लिए साई का धन्यवाद करना चाहता हूं। हमारे समुदायों के लड़के और लड़कियां आगे बढ़ रहे हैं और खुद को नई पहचान दे रहे हैं। अगर हम ऐसे ही आगे बढ़ते रहे, तो एक दिन ये खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।”                 टोपनो ने प्रतिभा के पीछे की एक अहम सच्चाई पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे जनजातीय समुदायों में हॉकी स्वाभाविक रूप से खेली जाती है। अगर हम इन क्षेत्रों पर ध्यान दें, तो हमारे खिलाड़ी आगे बढ़ेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।” एक और महत्वपूर्ण बदलाव खेल विज्ञान, फिजियोथेरेपी और वीडियो विश्लेषण जैसी सुविधाओं का पहुंचना है, जो पहले केवल शीर्ष स्तर तक सीमित थीं। अब दूरदराज के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी पेशेवर प्रशिक्षण वातावरण का लाभ उठा रहे हैं। पारंपरिक स्वाभाविक खेल और आधुनिक कोचिंग का यह मेल प्रदर्शन के नए स्तर खोल रहा है।                झारखंड की पूर्व खिलाड़ी और हॉकी इंडिया की सदस्य असृता लकड़ा ने कहा, “इन क्षेत्रों के बच्चों के खून में हॉकी बसती है, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से इस खेल की ओर आकर्षित होते हैं। खेलो इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म ने उन्हें दिशा दी है।” उन्होंने आगे कहा, “बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षण और एक्सपोजर के कारण अब खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। उनका मनोबल बढ़ा है और प्रदर्शन में स्पष्ट सुधार दिख रहा है।” अब इसका प्रभाव केवल कहानियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नतीजों, प्रतिनिधित्व और बढ़ती महत्वाकांक्षा में साफ दिखाई दे रहा है। जनजातीय खिलाड़ी अब सिर्फ भाग लेने वाले नहीं, बल्कि दावेदार, चैंपियन और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारे बन रहे हैं। रायपुर में ओडिशा का यह स्वर्णिम प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन का प्रतीक है—जहां गांव उत्कृष्टता के केंद्र बन रहे हैं और हॉकी एक पूरी पीढ़ी के सपनों को नई दिशा दे रही है। बस्तर के धूल भरे मैदानों से लेकर रायपुर के भरे स्टेडियम तक, इन खिलाड़ियों की यात्रा न केवल भारतीय हॉकी, बल्कि जनजातीय भारत के सामाजिक ताने-बाने को भी बदल रही है।

500 की गैस हुई 1500 के पार, महंगाई और किल्लत से बेहाल हुए प्रवासी

चंदौली ईरान युद्ध को शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है. एक तरफ जहां युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है वहीं दूसरी तरफ इस जंग की वजह से भारत में एलपीजी संकट का दौर भी शुरू हो गया है. आलम यह है कि अब दिल्ली, मुंबई सहित गुजरात के शहरों में काम करने वाले यूपी-बिहार के लोग एलपीजी संकट के चलते अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. 'आजतक' रिपोर्टर ने उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर दिल्ली, मुंबई और गुजरात से बिहार की तरफ वापस जा रहे लोगों से बातचीत की. इस दौरान लोगों ने अपनी-अपनी कहानी बयां की… आपको बता दें कि यह तस्वीर दिल्ली-हावड़ा रेल रूट के सर्वाधिक व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की है. नई दिल्ली से चलकर गुवाहाटी होते हुए सिलचर को जाने वाली पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जब यहां पहुंची तो हमने इस ट्रेन में सवार कुछ ऐसे लोगों से बातचीत की जो एलपीजी संकट की वजह से वापस अपने गांव जा रहे थे. यहां पर हमारी मुलाकात बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले मिथुन कुमार से हुई. मिथुन कुमार गुजरात के हजीरा में एक प्लांट में सरिया शटरिंग का काम करते हैं. मिथुन ने बताया कि मैं गुजरात से आ रहा हूं और यहां पर मैंनें इस ट्रेन को पकड़ा है. गुजरात में भी एलपीजी संकट है. जो गैस हम लोगों को 500 में मिल जाती थी अब वह सीधा ₹1500 में मिल रही है. वहां पर लगभग सभी लोग चूल्हे पर खाना पका रहे हैं. गैस की तंगी की वजह से हम लोग घर वापस जा रहे हैं. क्योंकि गैस की प्रॉब्लम हो रही है और खाना बनाने में दिक्कत हो रही है. जब हमने मिथुन कुमार से पूछा कि वापस कब जाएंगे तो उन्होंने बताया कि जब स्थिति सामान्य हो जाएगी और गैस उपलब्ध होने लगेगी तब वह अपने काम पर वापस जाएंगे. मिथुन ने बताया कि होटल में जो खाना मिल रहा था वह अभी काफी महंगा हो गया है. जो खाना ₹60 में मिलता था वह 100 से 150 रुपए में मिल रहा था. होटल भी बंद पड़ गया था. इसी ट्रेन में हमारी मुलाकात शाहिद आलम नाम के छात्र से हुई. शाहिद मोतिहारी के रहने वाले हैं और दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रहकर पढ़ाई करते हैं. शाहिद ने बताया कि गैस न मिलने की वजह से काफी दिक्कत हो रही थी. हम लोग खाना बना नहीं पा रहे थे और होटल में खाना खाना पड़ता था. गैस संकट से होटल भी बंद हो गए. जो खाना हम लोगों को ₹100 मिलता था उसकी कीमत ₹200 और उससे भी ज्यादा हो गई. जहां हम रहते हैं वहां 1 किलो गैस की कीमत ₹450 हो गई है. इस प्रॉब्लम की वजह से हमारे बहुत से साथी हैं जो वापस अपने गांव जा रहे हैं. गैस को लेकर स्थिति काफी खराब है. सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है. गैस की जबरदस्त ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. वहीं, पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति से ही यात्रा कर रहे बिहार के सुपौल जिला के रहने वाले सत्यनारायण ने बताया कि वह दिल्ली के नरेला में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. गैस नहीं मिल रही थी. 1 किलो गैस का साढ़े तीन सौ रुपए मांग रहे थे लेकिन बावजूद इसकी गैस नहीं मिल रही. सत्यनारायण ने आगे बताया कि हमारे साथ के तकरीबन 50-60 आदमी हैं जो काम छोड़कर वापस अपने गांव जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जब तक गैस मिलना शुरू नहीं हो जाएगा तब तक हम लोग काम पर वापस नहीं जा पाएंगे. जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिल रही है.  लकड़ी की कीमत भी काफी बढ़ गई है. हम लोगों को बहुत कठिनाई हो रही थी इसलिए हम सब वापस चल दिए कि जब तक गैस नहीं मिलेगा तब तक वापस नहीं आएंगे. इसी बीच बिहार के बेगूसराय के रहने वाले प्रवीण से मुलाकात हुई जो दिल्ली में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. प्रवीण बताते हैं की मजदूरी काम है और गैस नहीं मिलने की वजह से महंगाई भी बढ़ गई है. जिसकी वजह से हम लोग वापस जा रहे हैं. वहां पर खाना बनाने में दिक्कत आ रही थी. पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति में यात्रा कर रहे लोगों से बातचीत के बाद रिपोर्टर ने मुंबई से आसनसोल जाने वाली ट्रेन में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से बातचीत की. इस ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों ने भी वही कहानी दोहराई जो दिल्ली से बिहार वापस जा रहे हैं लोगों ने बताई थी. हमारी मुलाकात मुंबई आसनसोल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे मुन्ना मंडल नाम के एक कामगार से हुई. मुन्ना बिहार के भागलपुर जिला के रहने वाले हैं और मुंबई में रहकर मजदूरी का काम करते हैं. मुन्ना ने बताया कि हम लोग मुंबई में रहकर मजदूरी का काम करते हैं गैस नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से हम वापस जा रहे हैं. मुन्ना और उनके साथ ही किराए के मकान में रहते हैं और उनके मकान मालिक ने लकड़ी पर खाना बनाने से मना कर दिया. जिसकी वजह से मजबूर होकर इन लोगों को वापस अपने गांव जाना पड़ा. मुन्ना ने आगे बताया कि इस वजह से हम लोग वापस जा रहे हैं आखिर खाना बनाएंगे तो कैसे बनेंगे. हमारे साथ तकरीबन 20 आदमी हैं जो हम लोग वापस जा रहे हैं. मकान मालिक बोलता है कि मकान खराब हो जाएगा और लकड़ी पर खाना बनाने नहीं दे रहा है. मुन्ना ने बताया कि जब वहां पर सहूलियत से सब चीज मिलने लगेगा तो वापस जाएंगे. इसी ट्रेन से यात्रा कर रहे कटिहार के रहने वाले विकास कुमार मुंबई की एक कंपनी में बेलदार का काम करते हैं. विकास ने बताया कि विदेश में जंग की वजह से गैस नहीं मिल रहा है और हम लोगों को काफी दिक्कत हो रही थी. गैस हम लोगों को नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनाएंगे और ड्यूटी कैसे जाएंगे. हमारे साथ के बहुत लोग हैं जो अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. इसी ट्रेन से यात्रा कर रहे मुन्ना कुमार से हमारी मुलाकात हुई. मुन्ना कुमार बिहार … Read more

सरकार का बड़ा कदम: 40 केमिकल-पॉलिमर पर आयात शुल्क शून्य, पेट्रोकेमिकल और रेजिन उद्योग को मिलेगी राहत

इंदौर  वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने 1 अप्रैल 2026 को गजट ऑफ इंडिया में दो असाधारण अधिसूचनाएं जारी कर पेट्रोकेमिकल उद्योग को बड़ी राहत दी है। अधिसूचना के तहत 40 महत्वपूर्ण रसायनों, मोनोमर्स और पॉलिमर पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। वहीं एक अन्य अधिसूचना के तहत अमोनियम नाइट्रेट पर कृषि अवसंरचना और विकास उपकर भी शून्य कर दिया गया है। यह छूट आज यानी 2 अप्रैल से लागू होगी और 30 जून तक प्रभावी रहेगी। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने लोकहित में यह फैसला लिया है। इससे मध्य प्रदेश के काफी उद्योगों को फायदा होगा। यह उद्योग को एक प्रकार से संजीवनी मिलने जैसा है। सरकार के इस फैसले से कच्चे माल की आयात लागत कम होगी। घरेलू विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और अंतिम उत्पादों के दाम नियंत्रण में रहेंगे। यह छूट मुख्य रूप से प्लास्टिक, पेंट, रेजिन, फार्मास्यूटिकल, उर्वरक, पॉलीमर और विशेष रसायन उद्योग को लाभ पहुंचाएगी। उद्योग जगत पर क्या असर पड़ेगा?     प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग को सीधा फायदा     पेंट, कोटिंग्स और रेजिन निर्माताओं की उत्पादन लागत घटेगी     उर्वरक और फार्मास्यूटिकल कंपनियों को कच्चे माल सस्ता मिलेगा     टेक्सटाइल, पैकेजिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर को अप्रत्यक्ष लाभ     छोटे-मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए विशेष राहत, क्योंकि ये ज्यादातर आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं।  40 से ज्यादा केमिकल्स पर जीरो ड्यूटी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक 40 से अधिक केमिकल प्रोडक्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को तीन महीने के लिए शून्य कर दिया गया है। इसमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, मेथनॉल और विनाइल क्लोराइड जैसे अहम केमिकल्स शामिल हैं, जो कई इंडस्ट्रीज की बैकबोन माने जाते हैं। प्रोडक्ट पहले BCD (%) कैटेगरी एनहाइड्रस अमोनिया 6.5% बेसिक केमिकल टोल्यून (Toluene) 6.5% एरोमैटिक केमिकल स्टाइरीन (Styrene) 6.5% मोनोमर डाइक्लोरोमीथेन 6.5% सॉल्वेंट विनाइल क्लोराइड मोनोमर (VCM) 6.5% मोनोमर मेथनॉल 6.5% फीडस्टॉक केमिकल आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (IPA) 6.5% इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) 6.5% इंटरमीडिएट प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) 6.5% पॉलिएस्टर रॉ मैटेरियल फिनॉल 6.5% इंडस्ट्रियल केमिकल एसीटिक एसिड 6.5% इंटरमीडिएट टोल्यून डायआइसोसाइनेट (TDI) 7.5% पॉलियूरीथेन फीडस्टॉक पॉलीओल्स 7.5% पॉलियूरीथेन इंटरमीडिएट ABS 7.5% पॉलिमर PVC 10% पॉलिमर PET 10% पॉलिमर पॉलीयूरीथेन 7.5% पॉलिमर एपॉक्सी रेजिन 7.5% स्पेशलिटी केमिकल किन सेक्टर्स को मिलेगा सीधा फायदा  इस फैसले का सबसे बड़ा असर कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर पड़ेगा। पॉलिमर्स और रेजिन जैसे ABS, PVC, PET और पॉलीयूरीथेन की लागत घटने से इन इंडस्ट्रीज के लिए इनपुट कॉस्ट कम होगी और मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। इंपोर्ट लागत घटेगी, लेकिन चुनौतियां बरकरार ड्यूटी हटने से इंपोर्ट की लैंडेड कॉस्ट कम होगी, खासकर उन केमिकल्स में जहां भारत आयात पर ज्यादा निर्भर है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि सप्लाई टाइटनेस और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं इस राहत के असर को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। एंटी-डंपिंग ड्यूटी जारी रहेगी सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से एंटी-डंपिंग और सेफगार्ड ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी जहां पहले से ये ड्यूटी लागू है, वहां वह जारी रहेगी।  FTA देशों का एडवांटेज घटेगा इस कदम से FTA और CEPA के तहत मिलने वाला टैरिफ एडवांटेज अस्थायी रूप से कम हो सकता है। क्योंकि अब सभी देशों के लिए बेसिक ड्यूटी समान रूप से शून्य हो गई है, जिससे कीमतों का अंतर कम हो जाएगा।

वैशाख माह का आरंभ और 3 अप्रैल 2026 का संपूर्ण पंचांग और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें शुभ योग और नक्षत्र

 द्रिक पंचांग के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 के दिन की शुरुआत वैशाख यानी बैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी, जो सुबह 08:42 मिनट पर समाप्त होगी. इसके बाद दिन के अंत तक द्वितीया तिथि रहेगी. उदयातिथि की मानें तो कल 3 अप्रैल से ही विष्णु जी को समर्पित वैशाख माह का आरंभ होगा. चलिए अब जानते हैं 3 अप्रैल 2026, मां लक्ष्मी को समर्पित शुक्रवार के पंचांग के बारे में. नक्षत्र नक्षत्र की बात करें तो दिन की शुरुआत में चित्रा रहेगा, जिसका समापन शाम 07:24 मिनट पर होगा. इसके बाद दिन के अंत तक स्वाति नक्षत्र रहने वाला है. योग योग की बात करें तो दिन की शुरुआत में व्याघात रहेगा, जिसका समापन दोपहर 02:08 मिनट पर होगा. इसके बाद अगले दिन की सुबह तक हर्षण योग रहने वाला है. इस बीच शाम में 07:25 मिनट पर आडल योग का आरंभ हो जाएगा, जो अगले दिन (4 अप्रैल 2026) की सुबह 06:08 मिनट तक रहेगा. सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय और चन्द्रास्त     सूर्योदय- सुबह 06 बजकर 09 मिनट पर     सूर्यास्त- शाम 06 बजकर 40 मिनट पर     चन्द्रोदय- रात 08 बजकर 04 मिनट पर     चन्द्रास्त- सुबह 06 बजकर 27 मिनट पर करण करण की बात करें तो दिन की शुरुआत में कौलव रहेगा, जिसका समापन सुबह 08:42 मिनट पर होगा. हालांकि, इसके बाद तैतिल करण का आरंभ होगा, जो देर रात 09:23 मिनट तक रहेगा. वहीं, दिन के अंत में गर करण रहेगा. 9 ग्रहों की स्थिति     चंद्र ग्रह: तुला राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) गोचर करेंगे.     शुक्र ग्रह: मेष राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को रहेंगे.     केतु ग्रह: सिंह राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को रहेंगे.     शनि ग्रह और सूर्य ग्रह: मीन राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को रहेंगे.     देवगुरु बृहस्पति (गुरु) ग्रह: मिथुन राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को रहेंगे.     बुध ग्रह और राहु ग्रह: कुंभ राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को रहेंगे.     मंगल ग्रह: मीन राशि में 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को गोचर करेंगे.  

राजनीतिक हलचल तेज: नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नया मुख्यमंत्री संभालेगा पद

पटना. बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा। नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा। 13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे। 16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था। इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।

उज्जैन साइंस सेंटर का होगा लोकार्पण वैज्ञानिक, खगोलविद और शोधार्थी करेंगे संवाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का तारामंडल परिसर में शुभारंभ करेंगे। साथ ही उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण भी करेंगे। सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम परिसर में आयोजित किया गया है। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  गजेन्द्र सिंह शेखावत, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन और विचारक लेखक  सुरेश सोनी भी शामिल होंगे। बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की पावन नगरी उज्जैन प्राचीन काल से ही काल गणना और खगोल विज्ञान के अनुसंधान की वैश्विक धुरी रही है। एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और शोधकर्ता यहां बौद्धिक समागम के लिये एकत्रित हो रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को शोध और विचार प्रस्तुत करने का साझा मंच उपलब्ध कराएगा। उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित नव-निर्मित साइंस सेंटर में गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन एवं स्टूडेंट एक्टिविटी हॉल, हेरिटेज थीम आधारित गैलरी और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा। सम्मेलन में यूएवी (मानवरहित विमान), आरसी (रिमोट कंट्रोल) तकनीक और सैटेलाइट निर्माण जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही सूर्य के सन स्पॉट का सुरक्षित अवलोकन, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश का अध्ययन, विद्यार्थी-शिक्षक संवाद तथा अंतरिक्ष तकनीक आधारित प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित होंगे, जिनका उद्देश्य युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है। सम्मेलन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान शामिल हैं। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधिय सहभागिता करेंगे। उज्जैन-डोंगला को ग्लोबल मेरिडियन बनाने पर होगी चर्चा उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां से कर्क रेखा गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान्ह रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक ‘टाइम स्केल सेंटर’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इनमें विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स और कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इनमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रो. यासुहाइड होबारा, इसरो के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. निलेश देसाई, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, भारतीय खगोल विज्ञान संस्थान बेंगलुरु की निदेशक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम और अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल होंगे। व्याख्यान, टेक्नोलॉजी एक्सपो और स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस होंगे प्रमुख आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा, काल गणना और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी अवधारणाओं के साथ आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें इसरो, सीएसआईआर, टीआईएफआर, आईआईटी इंदौर, डीआरडीओ, ब्रह्मोस एयरोस्पेस तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थान अपनी तकनीकी उपलब्धियां प्रदर्शित करेंगे। वराहमिहिर से डॉ. विक्रम साराभाई तक के खगोल विज़न पर होगा चिंतन उज्जैन प्राचीन काल से काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के दूरदर्शी विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगी नई दिशा उज्जैन में आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी नई गति देगा। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सम्मेलन के समापन दिवस 5 अप्रैल को प्राप्त सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्य योजना पर भी चर्चा की जाएगी।  

देश की रियासतों का भारत में विलय करने वाले सरदार पटेल “लौह पुरुष” और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलाने वाले अमित शाह को लिखा “साध्य पुरुष”

रायपुर  आज विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सलवाद से मुक्ति पर जताया उनका आभार उन्होंने पत्र में लिखा कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है। संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमनें छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे  मनमोहन सिंह जी ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा। 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने इस घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था, तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी। आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले "लौह पुरुष" सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप "साध्य पुरुष" हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

अवैध निर्माण पर सख्ती: पानीपत में कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, बिल्डर भी रडार पर

पानीपत. नगर निगम पानीपत ने बुधवार को अवैध कॉलोनियों और कब्जाधारियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए कई स्थानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। यह कार्रवाई हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 के तहत पूर्व में जारी नोटिसों की अनदेखी के बाद की गई। जिलाधीश द्वारा नियुक्त ड्यूटी मजिस्ट्रेट सुमित नांदल की निगरानी में निगम टीम ने पुलिस बल के साथ मिलकर विभिन्न स्थानों पर अवैध निर्माण ध्वस्त किए। बरसत रोड स्थित भैंसवाल मोड़ पर निगम भूमि पर अवैध रूप से बने करीब 15 खोखे और एक डेयरी को तोड़ा गया। इसके अलावा सरदार के डेरा के पास करीब तीन एकड़ में विकसित अवैध कॉलोनी में सड़कों और नींव को ध्वस्त किया गया। विजय नगर क्षेत्र में करीब 2 एकड़ में विकसित हो रही कॉलोनी सहित आसपास की लगभग 16 एकड़ में फैली दो अवैध कॉलोनियों में भी सड़कों व नींव पर कार्रवाई की गई। उझा रोड स्थित बीबीएम एन्कलेव, उझा गेट के पास तथा इंडो फार्म के नजदीक भी अवैध निर्माणों को हटाया गया। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनी काटने वाले मालिकों और प्रॉपर्टी डीलरों के खिलाफ धारा 350-सी के तहत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी। दो से तीन बार नोटिस दिए – शहर में 32 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, जिन्हें पहले ही दो से तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्लाट खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। –डॉ. पंकज यादव, आयुक्त नगर निगम पानीपत

वन विभाग की कामयाबी: रामपुर ग्रासलैंड में लौटी काले हिरणों की रौनक

रायपुर बारनवापारा का रामपुर ग्रासलैंड फिर हुआ काले हिरणों से आबाद छत्तीसगढ़ वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के रामपुर ग्रासलैंड में काले हिरण (ब्लैकबक) की संख्या बढ़ाने के लिए शुरू किया गया प्रयास सफल रहा है। अब यह क्षेत्र फिर से इन सुंदर और दुर्लभ वन्यजीवों की चहल-पहल से जीवंत हो गया है। बारनवापारा का रामपुर ग्रासलैंड फिर हुआ काले हिरणों से आबाद            वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में काले हिरणों के पुनर्स्थापन का लक्ष्य तय किया गया था। इसी के तहत फरवरी माह के पहले सप्ताह में 30 काले हिरणों को रामपुर ग्रासलैंड में छोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे स्वीकृति मिलते ही योजना पर तेजी से काम शुरू किया गया।         वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत "वैज्ञानिक प्रबंधन" के उद्देश्य से अनुमति प्राप्त होने के बाद, वन विभाग की टीम ने विशेषज्ञों की निगरानी में हिरणों को सुरक्षित रूप से उनके नए आवास में छोड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हिरणों को किसी भी प्रकार का तनाव न हो। मुक्त किए गए काले हिरण अब वहां पहले से मौजूद हिरणों के समूह के साथ सहज रूप से घुल-मिल गए हैं। एक समय प्रदेश से लगभग विलुप्त हो चुके ये हिरण अब फिर से अपने प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं, जो राज्य के लिए गर्व और खुशी की बात है। इस अभियान को मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रायपुर मती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार  धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसमें बारनवापारा अभयारण्य के अधिकारियों, फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।           वर्तमान में वन विभाग की टीम इन हिरणों की नियमित निगरानी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक सुधार होगा और जैव विविधता को और मजबूती मिलेगी। यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि योजनाबद्ध प्रयास, विशेषज्ञों की देखरेख और समर्पित टीमवर्क से विलुप्तप्राय वन्यजीवों को फिर से जीवन दिया जा सकता है।

बड़ी सौगात: रीवा संभाग के 1.29 लाख घरों तक पहुंचेगा साफ पानी, 2319 करोड़ की योजना शुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार ठोस कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रीवा संभाग में मध्यप्रदेश जल निगम की परियोजना क्रियान्वयन इकाई, रीवा द्वारा संचालित रीवा समूह जल प्रदाय योजना ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। लगभग 2319.43 करोड़ रु. की लागत से विकसित इस योजना में जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर पहुंचाया जा चुका है, जिससे परियोजना के आगामी चरणों में गति मिलने की स्थिति बनी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में क्रियान्वित इस योजना के माध्यम से रीवा जिले के 677 ग्रामों और मऊगंज जिले के 936 ग्रामों के कुल 1613 ग्रामों को जोड़ा जा रहा है। योजना के पूर्ण होने पर लगभग 1.29 लाख ग्रामीण परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में लंबे समय से बनी जल समस्या का समाधान संभव होगा। जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर की आपूर्ति सुनिश्चित होना परियोजना के क्रियान्वयन का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद जल शोधन और वितरण नेटवर्क के माध्यम से घर-घर पेयजल आपूर्ति की दिशा में कार्य को और गति दी जाएगी। योजना में गुणवत्ता, निरंतरता और दीर्घकालिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में हर-घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन होगा।