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चारधाम यात्रा की तैयार,19 अप्रैल को उखीमठ से रवाना होगी बाबा केदार की पंचमुखी डोली, 22 को होंगे प्रथम दर्शन

उत्तराखंड में स्थित चार धामों में से एक बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने जा रहे हैं. केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे. यह घोषणा महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) पर की गई थी, जिसके बाद बाबा केदार की डोली के साथ पूजा-अर्चना के साथ यात्रा शुरू होगी. पिछले साल (2025) केदारनाथ के कपाट 2 मई को खुले थे. तकरीबन छह महीने तक दर्शन-पूजन के बाद  23 अक्टूबर 2025 को शीतकाल के लिए बंद हो गए थे. शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की गद्दी ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में विराजमान होती है और यही उनका पूजा स्थल बन जाता है. कैसा है केदारनाथ का ज्योतिर्लिंग? केदारानाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां महादेव शिव का ज्योतिर्लिंग बैल पृष्ठ यानी बैल के कूबड़ के उभरे हुए हिस्से जैसा है. इसीलिए यहां का शिवलिंग पारंपरिक तौर पर गोलाई लिए हुए नहीं दिखता बल्कि पिरामिड जैसी आकृति में त्रिकोण त्रिभुज या कुछ-कुछ प्रिज्म जैसा नजर आता है. पांडवों से जुड़ी है कहानी कहते हैं कि पांडव जब युद्ध के बाद अपने पापों के प्रायश्चित के लिए तीर्थयात्रा पर निकले थे, तब वह भगवान शिव के दर्शन करना चाहते थे. लेकिन शिवजी उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे. इसलिए उन्हें खोजते हुए पांडव कई तीर्थों में गए लेकिन वहां महादेव नहीं मिले. जब पांडव काशी पहुंचे तब शिवजी पर्वत पर आ गए. पांडव यहां भी पहुंच गए. तब शिवजी को भीम ने देख लिया, लेकिन शिव जी ने बैल का स्वरूप बनाया और उनके झुंड से होकर भागने लगे. तब भीम ने उनके कूबड़ को पकड़ लिया. शिव धरती में समाने लगे, लेकिन भीम की निष्ठा देखकर उन्होंने पांडवों को दर्शन दिए. भीम के पकड़ने से बैल के कूबड़ का हिस्सा ही ऊपर रह गया और शिवजी पांडवों की प्रार्थना पर इसी रूप में यहां स्थापित हो गए. एक नहीं पांच हैं केदार पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि जब भगवान शिव बैल के रूप में आए तो उनके धड़ का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ, जहां अब पशुपतिनाथ मंदिर है. शिवजी की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मद्महेश्‍वर में और जटा कल्‍पेश्‍वर में प्रकट हुई. इन चार स्‍थानों के साथ केदारनाथ धाम को मिलाकर पंचकेदार के रूप में पूजा जाता है. सिर्फ 20 दिन में खुलेंगे कपाट यात्रा शुरू होने में अब केवल 20 दिन का समय शेष बचा है. धाम तक आवाजाही वाला मुख्य मार्ग बर्फ से ढका हुआ है. हालांकि रास्ते से बर्फ हटाने और ग्लेशियर तोड़ने का काम जारी है. रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन का मुख्य मकसद है की सबसे पहले पैदल यात्रा मार्ग को आवाजाही लायक बनाया जाय, जिससे धाम सहित पैदल यात्रा मार्ग पर अन्य सभी व्यवस्थाएं सुचारु की जा सके, लेकिन आये दिन मौसम खराब होने से परेशानियां भी बढ़ रही हैं. 18 अप्रैल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से रवाना होगी गद्दी इस साल बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली (गद्दी) 19 अप्रैल 2026 को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होगी. डोली यात्रा के विभिन्न पड़ावों से होते हुए 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी और 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे कपाट खुलेंगे. डोली यात्रा का संभावित शेड्यूल 18 अप्रैल से है. 18 अप्रैल को भैरवनाथ पूजा (उखीमठ) होगी. 19 अप्रैल को उखीमठ से प्रस्थान होगा और फाटा/गुप्तकाशी में रात्रि विश्राम होगा. इसके बाद 20 अप्रैल को यात्रा गौरीकुंड पहुंचकर रात्रि विश्राम करेगी. 21 अप्रैल को डोली का केदारनाथ धाम आगमन होगा और 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे केदारनाथ धाम के कपाट आम दर्शन के लिए खुलेंगे.  

ट्राइबल गेम्स में सिद्दी पहलवानों का दबदबा, कुश्ती में दिखाया दमखम

रायपुर. 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी   (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे।  सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते  हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं। उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है। रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।'' देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।'' उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।'' इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026,5 अप्रैल को रखा जाएगा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजन विधि

 हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि बड़ी विशेष मानी जाती है. इस दिन भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा और व्रत किया जाता है. भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में विकट रूप भी शामिल है. मान्यता है कि भगवान के इस रूप की पूजा करने से समस्त प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय से मुक्ति मिल जाती है. इतना ही नहीं विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के समय भगवान गणेश को उनकी प्रिय कुछ विशेष चीजें अर्पित की जाती हैं. माना जाता है कि अगर ये चीजें पूजा के समय बप्पा को अर्पित की जाती हैं, तो वो प्रसन्न होकर जीवन की सभी बाधाएं दूर करते हैं. आइए इन चीजों के बारे में जानते हैं. विकट संकष्टी चतुर्थी कब है     वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि कर 05 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है.     वहीं चतुर्थी तिथि का समापन 06 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि और चंद्रोदय के अनुसार, विकट संकष्टी का व्रत 05 अप्रैल यानी कल रखा जाएगा. जन्म कुंडली के गहन अध्ययन से करियर, विवाह, स्वास्थ्य की सटीक भविष्यवाणियां और मांगलिक, पितृ दोष आदि का ज्योतिषीय समाधान प्राप्त करें विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा शुभ मुहूर्त विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा का सबसे शुभ समय- शाम 06 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 06 मिनट (अमृत काल) तक है. विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय द्रिक पंचांग के अनुसार, विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात को 09 बजकर 58 मिनट पर होगा. गणेश जी को चढ़ाएं ये चीजें बप्पा को पूजा के दौरान ‘दूर्वा’ (हरी घास) और लाल सिंदूर जरूर अर्पित करें. पूजा के दौरान लाल या पीले रंग के वस्त्र और जनेऊ भी अर्पित किया जा सकता है. पूजा में 21 दूर्वा अर्पित करें. पूजा में नारियल, हल्दी की गांठ और सुपारी चढ़ाना भी शुभ रहता है. बप्पा को मीठा बहुत पसंद है. ऐसे में उन्हें उनके पसंदीदा भोग जैसे मोदक, बेसन के लड्डू और मीठी पूरन पोली अर्पित करें.

सीएम मोहन यादव ने काशी की कचौड़ी-पूरी का लिया लुत्फ, उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीता

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने वाराणसी दौरे के दौरान एक अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने यहां के मशहूर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। एयरपोर्ट जाते समय सीएम का काफिला अचानक मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर रुक गया। यहां उन्होंने बनारस की प्रसिद्ध कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का आनंद लिया। बता दें मुख्यमंत्री  मोहन यादव का काफिला जब वाराणसी में एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का स्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान संस्कृति होती है, जो वहां की पहचान को दर्शाती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।   लोगों के बीच सहज सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री के इस सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे संवाद भी किया। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।  मेरा सौभाग्य है कि बाबा ने 7 दिन में 2 बार बुलाया सीएम मोहन यादव ने कहा- बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें 7 दिन में 2 बार काशी आने का अवसर मिला। यह मेरा सौभाग्य है। शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा है। सीएम ने काशी में आयोजित विक्रमादित्य पर आधारित महानाट्य की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद अद्भुत है और जो भी काशी आए, वह इसे जरूर देखे। 3 अप्रैल को विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया 3 अप्रैल को सीएम योगी और मध्य प्रदेश सीएम मोहन यादव ने विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने योगी को वैदिक घड़ी भी भेंट की। मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा- मुख्यमंत्री योगीजी ने जो कहा, वह काफी महत्वपूर्ण है। 3 भाइयों की जोड़ी जगत में विख्यात है। भाइयों के बीच कैसा संबंध होना चाहिए, इसका उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी प्रकार भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है। विक्रमादित्य की परंपरा में महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में प्रतिष्ठित हुए। उनकी दीक्षा की भूमि उज्जैन थी। उनकी साधना की भूमि काशी के निकट चुनार का किला था। कहा जाता है कि चुनार किले का निर्माण भी महाराज भर्तृहरि के नाम से जुड़ा है। जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्यप्रदेश सरकार के समक्ष आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन काशी में किया जाए।

भोपाल में अधिकारी बने शिक्षक, 102 स्कूलों में अफसरों ने दी क्लास और बच्चों से किया संवाद

भोपाल/ इंदौर  इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेशभर में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इस दौरान बाल सभाओं का आयोजन हुआ। साथ ही छात्रों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी किया गया। अब ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत 4 अप्रैल को प्रदेशभर के स्कूलों में कलेक्टर समेत प्रशासनिक अधिकारी कक्षाएं लेने पहुंचे। इंदौर जिले में 162 प्रशासनिक अधिकारी सरकारी स्कूलों में पहुंचे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 में विद्यार्थियों से संवाद किया। इधर, राजधानी भोपाल में 102 स्कूलों में 102 अधिकारी छात्रों के साथ चर्चा की। वहीं, उज्जैन में 106 अधिकारी स्कूलों में पहुंचे। सत्र के पहले दिन स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई। शिक्षा विभाग द्वारा कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि सत्र की शुरुआत व्यवस्थित रूप से हो सके। इंदौर निगम कमिश्नर स्कूल पहुंचे इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल नेहरू पार्क स्थित बाल विनय मंदिर स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उनके प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स को समझा। इस दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी सीखने की प्रक्रिया को करीब से देखा। सिंघल ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। बच्चों का आत्मविश्वास देखकर उन्हें खुशी हुई और उनके द्वारा प्रोजेक्ट्स की प्रस्तुति ने उन्हें अपने स्कूल के दिनों की याद दिला दी। उन्होंने लैब में बच्चों के काम की सराहना करते हुए कहा कि यही बच्चे देश का भविष्य हैं। कलेक्टर बोले-कभी निराश न हों कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 पहुंचे। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कभी निराश ना हों। प्रतियोगिता में भाग लेना ही बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपने जीवन के बारे में बताया कि एक छोटे से गांव से उन्होंने पढ़ाई शुरू की। इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश को अपना लक्ष्य बनाया और इसे पूरा भी किया। बाद में एक ऑयल कंपनी में नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी की और सफल हुए। घर-घर संपर्क से बढ़ेगा नामांकन सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को प्रवेश के लिए प्रेरित करेगा। 85% से अधिक अंक वालों के अभिभावकों का सम्मान पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा। शिक्षा विभाग का लक्ष्य नर्सरी से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करना है। इसके लिए सत्र की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों की कार्ययोजना लागू की जा रही है। नए सत्र के साथ खास शुरुआत प्रदेशभर में 1 अप्रैल से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। भोपाल में भी पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। स्कूलों में बाल सभाएं आयोजित हुईं और बच्चों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया।  अभियान का उद्देश्य: बढ़े नामांकन इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और पढ़ाई के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाना है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। हर स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से मिलकर बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेगा। अभिभावकों का भी होगा सम्मान पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की तैयारी शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर सुविधाएं और गुणवत्ता दी जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्र की शुरुआत से ही अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों की योजना लागू की जा रही है। 

जिले में पहली बार घुड़सवारी और कराते की नर्सरी, 25-25 खिलाड़ियों का हुआ चयन

अंबाला  खेल विभाग की ओर से जिले में अलॉट की गई 22 निजी खेल नर्सरियों के शुक्रवार को ट्रायल हुए। इसमें खिलाड़ियों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 25-25 खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें शामिल कर लिया गया। शनिवार को सभी निजी खेल नर्सरियां शुरू हो जाएंगी। चयनित खिलाड़ी अब आधुनिक सुविधाओं के बीच अपने खेल को निखार सकेंगे। सबसे ज्यादा खिलाड़ियों में पहली बार जिले में शुरू होने वाली घुड़सवारी, खो-खो व कराते की प्रतियोगिता को लेकर दिखाई दिया। अब जिले में 26 सरकारी के साथ-साथ 22 निजी खेल नर्सरियां भी चालू हो गई है। लाल स्टड फार्म में घुड़सवारी मिलने से खुशी जिले में पहली बार लाल स्टड फार्म को घुड़सवारी की खेल नर्सरी मिलने से खुशी है। इसके अलावा गांव लौटां पंचायत को तीरंदाजी, ग्राम पंचायत खानअहमदपुर बराड़ा में तलवारबाजी, डीसी माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कराते, सीबी सीनियर सेकेंडरी स्कूल आएचए परेड में योगा, फारुखा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्केटिंग, एंजल्स सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल में खो-खो, सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल साहा में क्रिकेट, आर्मी पब्लिक स्कूल में फुटबाल, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर तीन अंबाला कैंट में फुटबाल। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर दो में फुटबाल। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर दो में हैंडबाल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खानपुर ब्राह्मणा में कबड्डी, केंद्रीय विद्यालय नंबर चार अंबाला कैंट में फुटबाल। एसडी कालेज अंबाला कैंट में बाक्सिंग। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डेरा में कबड्डी। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर एक अंबाला कैंट में हैंडबाल। राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेक्टर -9 में बास्केटबाल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पंजोखरा साहिब में वेटलिफ्टिंग। राजकीय माध्यमिक विद्यालय मियांमाजरा में हाकी। आर्मी पब्लिक स्कूल अंबाला कैंट में ताइक्वांडो। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पुलिस लाइन अंबाला शहर में हैंडबाल के ट्रायल हुए।  

हिसार और सिरसा में बदला मौसम का मिजाज, ओले गिरने से फसलों को भारी नुकसान

 हिसार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया। प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी हुई है। सिरसा जिले में सबसे अधिक 21 एमएम बारिश होने से जनजीवन प्रभावित हो गया। हिसार जिले में वीरवार देर रात दो गांवों बालसमंद और डोभी में ओलावृष्टि होने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को भी कुछ स्थानों पर बारिश व तेज हवाएं चलने के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग ने आरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि नया पश्चिमी विक्षोभ दो अप्रैल को सक्रिय होने से वीरवार को पश्चिमी जिलों में बारिश और बूंदाबांदी हुई है। शुक्रवार को सिरसा ,फतेहाबाद ,हिसार ,जींद ,कैथल, भिवानी पानीपत, करनाल ,महेंद्रगढ़, रेवाड़ी ,गुरुग्राम, फरीदाबाद ,मेवात ,पलवल में हल्की बारिश बूंदाबांदी और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की गतिविधियों को दर्ज किया गया है। नया पश्चिमी विक्षोभ सात अप्रैल से सक्रिय होगा मौसम विभाग के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ सात अप्रैल से सक्रिय होगा। इस वजह से उत्तर-पश्चिम भारत विशेषकर हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम में बदलाव आएगा। हरियाणा एनसीआर दिल्ली में 7-8-9 अप्रैल आंधी चलने के साथ ही बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने के आसार है। उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर भारी बर्फबारी होने से तापमान में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट देखने को मिलेगी। किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें गेहूं की कटाई के समय लगातार बदल रहे मौसम ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। किसानों के लिए फसल निकालना चुनौती बन गया है। मौसम का मिजाज पल पल बदल रहा है। कभी धूप खिल रही है तो कभी बादल छा रहे हैं। गांव तरकांवाली में घर पर गिरी बिजली, युवती झुलसी सिरसा। जिले के चोपटा गांव तरकांवाली में वीरवार रात बिजली गिरने से एक घर क्षतिग्रस्त हो गया और युवती ज्योति (18) झुलस गई।  

सरयू राय का बड़ा दांव! हेमंत सोरेन को दिया बिना BJP-कांग्रेस सरकार बनाने का प्रस्ताव

रांची. जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया है। जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खियों के बीच सरयू राय का यह बयान राज्य की सियासत में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दे रहा है। सरयू राय ने दावा किया कि झारखंड में ऐसी राजनीतिक स्थिति बन सकती है, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा को न तो कांग्रेस के सहारे की जरूरत होगी और न ही भाजपा के समर्थन की। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीतिक साहस दिखाते हैं तो वे स्वयं बाहर से बिना किसी शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं। बहुमत का गणित भी बताया सरयू राय ने अपने दावे को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विधानसभा का पूरा गणित भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों का आंकड़ा जरूरी है। जेएमएम के पास 34 विधायक हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के चार विधायक, भाकपा माले के दो विधायक और जयराम महतो का एक वोट मिलाकर यह संख्या 41 तक पहुंचती है। राय ने जोर देकर कहा कि इस स्थिति में सरकार चलाने के लिए कांग्रेस या भाजपा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने इसे व्यवहारिक और संभव विकल्प बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। कांग्रेस-JMM रिश्तों पर उठाए सवाल सरयू राय ने मौजूदा राजनीतिक तनाव की जड़ में कांग्रेस और जेएमएम के रिश्तों को बताया। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में कांग्रेस ने जेएमएम को उचित भागीदारी नहीं दी और अब असम चुनाव में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। उनके मुताबिक कांग्रेस केवल अपने हितों के अनुसार गठबंधन करती है, जिससे सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और बाद में साथ आ जाना गठबंधन की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। राय के अनुसार, यह राजनीतिक अवसरवाद का संकेत है, जो दीर्घकाल में नुकसानदेह साबित हो सकता है। असम चुनाव के बाद बदल सकते हैं समीकरण सरयू राय ने संकेत दिया कि असम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में बड़े बदलाव संभव हैं। उनका मानना है कि इन परिणामों का असर राज्य के गठबंधन समीकरणों पर पड़ेगा और नए राजनीतिक विकल्पों के लिए रास्ता खुल सकता है।

मगरमच्छ ने 14 साल के किशोर पर किया हमला, पिता की बहादुरी ने बचाई जान, गांव में दहशत का माहौल

पीलीभीत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक पिता ने अपने 14 साल के बेटे को बचाने के लिए मगरमच्छ से मुकाबला कर लिया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसे मौत के मुंह से वापस खींच लाया. घटना जहानाबाद क्षेत्र के नगरिया सहगवां गांव की है. यहां रहने वाले प्रेम शंकर अपने बेटे मोहित कुमार के साथ गेहूं की फसल काटने के लिए नदी किनारे खेत पर गए थे. इसी दौरान अचानक ये घटना हो गई. मीडिआ रिपोर्ट  के अनुसार, मोहित नदी के किनारे के पास पहुंच गया था, तभी पानी में मौजूद मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, मगरमच्छ ने मोहित को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उसे पानी की ओर घसीटने लगा. बेटे की चीख सुनते ही पिता प्रेम शंकर बिना एक पल गंवाए उसकी ओर दौड़ पड़े और वे सीधे मगरमच्छ से भिड़ गए. बिना किसी हथियार के केवल हिम्मत और अपने बेटे को बचाने के लिए प्रेम शंकर ने मगरमच्छ से संघर्ष शुरू कर दिया. यह संघर्ष कुछ मिनटों तक चला, जो किसी के लिए भी सदमे से कम नहीं था. आखिरकार, पिता की हिम्मत ने बेटे को मगरमच्छ के जबड़े से खींच लिया. प्रेम शंकर ने तुरंत घायल बेटे को वहां से बाहर निकाला और उसे पीलीभीत जिला अस्पताल पहुंचाया. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. रेंजर कौशेंद्र के नेतृत्व में टीम ने गांववालों से जानकारी जुटाई और हालात का जायजा लिया. जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर गौरव गंगवार के मुताबिक, बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत अब खतरे से बाहर है. फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में मगरमच्छ का खतरा लगातार बढ़ रहा है और अब खेतों के पास जाना भी जोखिम भरा हो गया है. उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि मगरमच्छ को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उसे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए. वन विभाग ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. अधिकारियों ने कहा है कि नदी या तालाब के किनारे जाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें.

एक्साइज नीति में राहत: ठेकेदारों की फीस 15% तक घटी, कारोबार को मिलेगा सहारा

जालंधर/चंडीगढ़. पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।