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पर्यावरणीय मंजूरी नियमों में बदलाव, 45 दिन में ‘सिया’ ने नहीं दी प्रतिक्रिया तो मुख्य सचिव करेंगे निर्णय

भोपाल  खदान, सड़क निर्माण या अन्य परियोजनाएं हों, इनकी पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके प्रभावी होने पर यदि किसी परियोजना को राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) 45 दिन तक स्वीकृति नहीं देती है तो राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस पर निर्णय करेगी। इसमें प्रमुख सचिव, पर्यावरण और प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास सदस्य होंगे। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप की अधिसूचना जारी कर सुझाव मांगे हैं। अभी ऐसी व्यवस्था है कि यदि 45 दिन तक सिया की स्वीकृति नहीं मिलती तो परियोजना अपने आप स्वीकृत मानी जाती है। मध्य प्रदेश में भी वर्ष 2025 में ऐसा मामला सामने आ चुका है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सभी राज्यों में सिया है। वहां भी ऐसे मामले हो सकते हैं। इसी कारण केंद्र सरकार नियम बदलने जा रही है। अपने आप अनुमति मिलने की व्यवस्था में कमी यह है कि बिना मूल्यांकन के परियोजनाएं स्वीकृत होने पर उन्हें भी अनुमति मिल जाती है, जिन्हें पात्रता नहीं होती। यानी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शर्तों के अनुरूप नहीं होतीं। सामान्यत: 45 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने का बड़ा कारण सिया की बैठक नहीं होना है। नई व्यवस्था में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति मिल पाएगी। इससे विवाद या पक्षपात की स्थिति भी नहीं बनेगी। अभी कई बार यह आरोप लगता है कि 45 दिन तक जानबूझकर बैठकें नहीं की जातीं, जिससे बिना मूल्यांकन अनुमति मिल सके।  

आयुष मंत्रालय की सलाह: पीरियड्स के दर्द और तनाव से राहत के लिए करें ये योगासन

नई दिल्ली   पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और अनियमित चक्र जैसी परेशानियां कई महिलाओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट कुछ विशेष योगासन को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीके से कम करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। नियमित योग अभ्यास से मासिक धर्म चक्र सही रहता है, दर्द कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। साथ ही मंत्रालय ने मासिक धर्म के दौरान सेहत सुधारने के लिए कुछ आसान और प्रभावी योगासनों को अपनाने की सलाह महिलाओं को दी है। ये आसान आसन घर पर भी किए जा सकते हैं और पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधाओं को काफी हद तक कम करने में प्रभावी भी हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, इन आसनों को नियमित रूप से करने से न सिर्फ मासिक धर्म संबंधी शारीरिक समस्याएं कम होती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। योग अभ्यास के साथ माइंडफुलनेस रखना भी जरूरी है। हालांकि पीरियड्स के दौरान अगर दर्द बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद के साथ योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। बेहतर मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए सुप्त बद्ध कोणासन करें, यह आसन पेल्विक क्षेत्र को खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है और पेट व कमर के दर्द को कम करता है। पश्चिमोत्तानासन यह आसन पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मासिक धर्म संबंधी ऐंठन और दर्द में राहत मिलती है। यह तनाव भी कम करता है। वहीं, वक्रासन रीढ़ की हड्डी को मोड़ने वाला यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने में मदद करता है। बालासन या बच्चे की मुद्रा कहलाने वाला यह आसन शरीर को गहरी छूट देता है। पीरियड्स के दौरान होने वाली थकान और मूड स्विंग्स को शांत करता है। सेतु बंधासन, जिसे पुल मुद्रा भी कहते हैं, आसन कमर और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है व हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में सहायक है। साथ ही विपरीत करणी भी राहत देता है। दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटने वाला यह आसन रक्त प्रवाह को सुधारता है और पैरों में सूजन तथा थकान को कम करता है।

रूस के तेल पर भारत का बड़ा खेल, जंग के दौरान चीन को मिला तगड़ा झटका

नई दिल्‍ली ईरान और अमेरिका के बीच जंग से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल-गैस की सप्‍लाई बाधित हुई तो भारत ने रूसी तेल के आयात में जबरदस्‍त इजाफा किया है. भारत ने मार्च में रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी दर्ज की. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने फरवरी की तुलना में मार्च में 90 फीसदी ज्‍यादा तेल का आयात किया है।  वहीं वेस्‍ट एशिया में चल रहे वॉर के कारण देश के कुल कच्चे तेल की खपत में लगभग 15% की गिरावट आई. ब्‍लूबर्ग की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जंग के कारण होमुर्ज बंद होने से भारत पर तेल-गैस की सप्‍लाई प्रभावित हुई है, जिस कारण पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के आयात में 40% की गिरावट आई. साथ ही नेचुरल गैस की सप्‍लाई भी बाधित हुई है।  इस कारण भारत को दूसरे विकल्‍प की तलाश करनी पड़ी और यही कारण रहा कि भारत ने रूसी तेल की जबरदस्‍त खरीद की. रिपोर्ट यह भी कहती है कि यह उछाल अमेरिका के 30 दिनों की छूट के बाद आई है. हालांकि रूस के अलावा भारत ने कुछ और देशों से तेल का आयात बढ़ाया है।  रूस के साथ इन देशों से भी तेल का आयात  इसमें अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देश शामिल हैं, जहां से भातर की ओर कच्‍चे तेल की खेप भरकर आ रही है, लेकिन यह रूसी तेल की तुलना में कम है. केप्‍लर के अनुसार, मिडिल ईस्‍ट सप्‍लायर द्वारा होर्मुज को बाईपास करने वाली पाइपलाइनों के माध्यम से आपूर्ति को फिर से शुरू करने से कुछ राहत मिली, जिसमें सऊदी और यूएई की पाइपलाइन शामिल हैं.  इन वैकल्पिक मार्गों ने समुद्री बाधाओं के बावजूद आंशिक आपूर्ति बनाए रखने में मदद की।  ईरान और वेनेजुएला से भी तेल सप्‍लाई  छूट के कारण अप्रैल तक भारत रूसी तेल की खरीद तो कर सकता है, जिससे भारत के पास पर्याप्‍त स्‍टॉक हो सकता है. हालांकि इसके साथ ही भारत के पास वेनेजुएला और ईरान के तेल का ऑप्‍शन भी खुला हुआ है. ईरान से भारत ने कुछ तेल का आयात किया है, जो आगे भी जारी रह सकता है।  कहां से पूरी हो रही गैस की सप्‍लाई  रूस के साथ ही भारत की गैस सप्‍लाई अमेरिका, ओमान, अंगोला और नाइजीरिया से हो रही है, क्‍योंकि कतर से एलएनज आयात में 92 फीसदी की गिरावट आई है. भारत कतर से सबसे ज्‍यादा गैस का आयात करता था, लेकिन अब सप्‍लाई बाधित होने से भारत ने अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाया है।  चीन को झटका इधर, भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में इजाफा किए जाने के कारण चीन को झटका लगा है. कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन द्वारा रूसी तेल आयात में कमी देखी गई है, लेकिन यह बहुत बड़ी गिरावट नहीं है. जनवरी फरवरी में चीन ने रूस से ज्‍यादा तेल आयात किया था, लेकिन मार्च में इसमें 5 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट आई है। 

ईरान के संकट के बीच भारत ने ब्रह्मोस का दम दिखाया, समंदर में अब आ रहा नया सिकंदर

विशाखापट्टनम ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत के लिए आज बड़ा दिन है. भारत  पूरी दुनिया को समंदर के नए सिकंदर से परिचय कराएगा. जी हां, भारत के इस नए सिकंदर का नाम है. ‘तारागिरी’. यह भारतीय नौसेना को मिलने जा रहा है. ‘तारागिरी’ एक लेटेस्ट स्टील्थ युद्धपोत है. इस खतरनाक युद्धपोत को आज यानी शुक्रवार 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम के समंदर में कमीशन किया जाएगा. भारत का यह लेटेस्ट वॉरशिप समंदर में दुश्मनों का काल है. यह ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. वही ब्रह्मोस मिसाइल, जिससे पाकिस्तान आज तक खौफजदा है।  दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में युद्धपोत, ‘तारागिरी’ को नौसेना में शामिल करेंगे. यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है. यानी इसमें ब्रह्मोस की ताकत दिखेगी. ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं. इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है।  ‘तारागिरी’ मतलब दुश्मन का काल अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के चलते युद्धपोत का चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है. इन युद्धक क्षमताओं के साथ साथ तारागिरी मानवीय संकटों के समय आपदा राहत में भी बड़ी मदद कर सकता है. इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर चीज के लिए आदर्श बनाती है. कितना शक्तिशाली है यह आईएनएस तारागिरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह युद्धपोत एक बेहद शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है. तारागिरी युद्धपोत 6,670 टन का है और इसमें स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है. मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. गौरतलब है कि सोमवार 30 मार्च को ही भारतीय नौसेना में युद्धपोत दूनागिरी शामिल किया गया है।  चलिए जानते हैं तारागिरी की खासयितें     प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल कर लिया गया. अब तारागिरी की बारी है।      गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. यह एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है. एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8’, एयर डिफेंस गन, तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं।      तारागिरी लंबी दूरी से आने वाले हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है. इस फ्रिगेट में हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं।      प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं. इसका डिजाइन और स्टील भी स्वदेशी है. इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।      प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं. इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं. वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है।      तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं. इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।      नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिज़ाइन नेवल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है. प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।   

सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच हुई चर्चा, एमपी में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होनेवाला है। कई जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक यानि एसपी बदले जाएंगे। इसकी कवायद तेज हो चुकी है। राज्य के आइएएस-आइपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल के लिए वरिष्ठ स्तर पर बातचीत चल रही है। राज्य के सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बाद प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल कर आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को नए दायित्व देने की अंदरखाने तैयारी की जा रही है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म हो चुका है और 2026-27 की शुरुआत हो गई है। प्रदेशभर के कलेक्टर-संभागायुक्तों को राजस्व संग्रहण के जो लक्ष्य मिले थे, उसके परिणाम भी सामने आ चुके हैं। एसआइआर की बंदिश तो काफी पहले ही खत्म हो चुकी हैं। प्रशासनिक दक्षता के साथ ही अधिकारियों के काम करने के तरीके व आम जनों से उनके व्यवहार को परखा जा रहा है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी है। सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन ने अच्छे व बुरे बर्ताव के कारण निशाने पर आए कई आइएएस के संबंध में बातचीत की है। निगेटिव रिपोर्ट वाले अधिकारियों को मौजूदा ओहदे से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी देने पर चार दौर की चर्चा पूरी की जा चुकी है।  पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी पुलिस महकमे में भी खासा बदलाव किया जाना है। कई जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी है। 15 जिलों के एसपी बदल सकते हैं, खंडवा, भिंड, धार, रीवा झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में चर्चा है कि 15 से ज्यादा जिलों के एसपी को इधर से उधर किया जाएगा। इसके अलावा खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में तैनात है। ऐसे में इन्हें नई जिम्मेदारी मिलना तय है। साथ ही परफॉर्मेंस पर एसपी को बड़े जिलों की कमान मिल सकती है।

एमपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट की घोषणा 15 अप्रैल से पहले, माध्यमिक शिक्षा मंडल अंतिम चरण में, 16 लाख छात्रों का इंतजार

भोपाल  मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल इस साल 15 अप्रैल से पहले रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है, जबकि संभावित तारीख 7 से 12 अप्रैल के बीच तय हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और रिजल्ट पूरी तरह त्रुटिरहित जारी किया जाएगा। इस बार करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए हैं, ऐसे में समय पर परिणाम घोषित कर छात्रों को आगे की पढ़ाई में कोई देरी न हो, यह विभाग की प्राथमिकता है। 16 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। पूरे प्रदेश से बने 100 नकल प्रकरण परीक्षा को नकलमुक्त बनाने के लिए इस बार विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी निगरानी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके बावजूद मुरैना में सबसे ज्यादा 41 नकल के प्रकरण सामने आए, जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां 20 मामले दर्ज किए गए। वहीं, पूरे प्रदेश से करीब 100 नकल प्रकरण बने थे। अंतिम चरण में रिजल्ट की तैयारी स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। विभाग हर स्तर पर जांच कर रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती न रह जाए। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, जिससे छात्रों को कोई परेशानी न हो। संभावना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। एक्सपर्ट की सलाह: तनाव से बचें छात्र परीक्षा के दौरान छात्रों की सेहत को लेकर भी विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक रूप से सहयोग दें। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से बेहतर प्रदर्शन संभव है। रिजल्ट का ट्रेंड: उतार-चढ़ाव का पैटर्न     2017 में 10वीं का रिजल्ट 49.9% और 12वीं का 67.8% रहा।     2018 में 10वीं 66.54% और 12वीं 68.08% पहुंचा।     2019 में 12वीं का रिजल्ट 72.37% तक गया।     2021 में कोरोना के कारण दोनों कक्षाओं का रिजल्ट 100% रहा।     2023 में 12वीं का रिजल्ट गिरकर 55.28% पर आ गया।     2025 में सुधार दिखा, जहां 10वीं में 76.22% और 12वीं में 74.28% छात्र पास हुए। समय पर रिजल्ट, आगे की पढ़ाई में राहत शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य इस बार समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी के अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। यदि तय समयसीमा के भीतर परिणाम घोषित हो जाते हैं, तो यह छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए बड़ी राहत होगी।

इंदौर के ट्रिपल लेयर ब्रिज से तीन एनएच मार्गों को मिलेगा रास्ता, पचास हजार वाहन होंगे प्रभावित

इंदौर इंदौर के बायपास पर एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर फ्लायओवर का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि, दो साल में फ्लायओवर का निर्माण पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। अब यह ब्रिज अक्तूबर तक बनकर तैयार होगा। ब्रिज पर देश का सबसे बड़ा पियर कैप बनाया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई 27 मीटर रहेगी। इसी पियर कैप के ऊपर गर्डर रखे गए हैं।  इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि यहां तीन राष्ट्रीय राजमार्ग आकर मिलते हैं। एबी रोड के अलावा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर हाईवे इस जंक्शन से जुड़ते हैं। नागपुर को जोड़ने के लिए इंदौर-हरदा के लिए 25 किलोमीटर लंबा बायपास बनाया गया है। इसका ट्रैफिक अंडरपास से होकर गुजरेगा। वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी इस ब्रिज के निर्माण से हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन चालकों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी। अभी तक बोगदों के भीतर से वाहनों को आना पड़ता है और इस कारण कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, लेकिन अब इससे भी राहत मिलेगी। बेस्ट प्राइस की तरफ के मार्ग से वाहन इंदौर की ओर ब्रिज के नीचे से आ सकेंगे। फ्लायओवर का एक हिस्सा जंक्शन पर बंगाली चौराहे की तरफ बना है, जबकि दूसरे सिरे का निर्माण बेस्ट प्राइस के पास हुआ है। डेढ़ किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे एक और ब्रिज बन चुका है, जिस पर एबी रोड का ट्रैफिक गुजर रहा है। महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन इस ब्रिज का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अंडरपास को इंदौर-हरदा मार्ग से जोड़ा गया है। अंडरपास बनकर तैयार हो चुका है। अब सड़क निर्माण स्टार चौराहा तक किया जाएगा। इंदौर-हरदा मार्ग का निर्माण भी अंतिम दौर में है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के सी लिंक की तर्ज पर ब्रिज पर एस्थेटिक केबल से लाइटिंग की जाएगी, ताकि यह आकर्षक दिखे। यह फ्लायओवर इंदौर की एंट्री का मुख्य मार्ग भी बनेगा। यहां से ज्यादातर वाहन शहर में आ-जा सकेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह प्रदेश का पहला तीन स्तरीय ब्रिज है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ इंदौर की एंट्री को भी आसान बनाएगा।   

GMADA की स्कीम, बनेंगी चंडीगढ़ जैसी लग्जरी कोठियां, ₹60 हजार प्रति गज तक पहुंचेगी जमीन की कीमत

चंडीगढ़   सिटी ब्यूटीफुल के नाम से देश- दुनिया में विख्यात चंडीगढ़ जैसा एक और नया शहर बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में 309.30 एकड़ जमीन पर लो डेंसिटी आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी जहां पुराने चंडीगढ़ के VIP सेक्टरों की तर्ज पर बड़ी- बड़ी लग्जरी कोठियां और बंगले बनाए जाएंगे. किसानों को जमीन के बदले प्रति एकड़ 6.24 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।  उन्हें 29 जून तक अपना सहमति पत्र ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी (GMADA) को देना होगा. इसके बाद, आगामी प्रकिया शुरू की जाएगी. मुल्लांपुर में गरीबदास गांव के पास विकसित होने वाला यह इलाका भीड़- भाड़ से दूर और हरियाली व पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।  यह रहेगी प्लॉट की कीमत इस योजना में 500 गज (1 कनाल) और 1,000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे. इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है. आवेदन करते समय कुल कीमत के 10% पैसे का भुगतान करना होगा।  न्यू चंडीगढ़ की खासियतें     हरियाली और पर्यावरण अनुकूल बसाएं जा रहे न्यू चंडीगढ़ शहर को ग्रिड पैटर्न में बसाया जाएगा जिससे ट्रैफिक और प्लानिंग बेहतर रहेगी।      60, 45 और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।      GMADA एक्सप्रेस-वे से बद्दी और आनंदपुर साहिब तक आसान कनेक्टिविटी मिलेगी।      करीब 33% एरिया को हरियाली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा जिसमें पार्क और ओपन स्पेस शामिल हैं।      900 हेक्टेयर में स्पोर्ट्स और मनोरंजन सुविधाएं जैसे स्टेडियम और गोल्फ कोर्स विकसित होंगे।      रिहायशी, मेडिसिटी, एजुकेशन सिटी, ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और प्रस्तावित मेट्रो के साथ रोजगार और आवागमन की बेहतर व्यवस्था होगी।  किसानों को मिलेगी सुविधा इस योजना के लिए जमीन देने वालों को लैंड पूलिंग की सुविधा का लाभ मिलेगा. इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट मिल सकता है. इस प्लॉट में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलेगी. यदि सरकार जमीन बेचती है या विकसित परियोजना से मुनाफा अर्जित करती है तो जमीन देने वाले किसानों को भी इसका फायदा पहुंचेगा।  मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ।  इको सिटी के पास बसेगी सोसाइटी यह स्कीम न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में मुल्लांपुर गरीबदास गांव के पास बनाई जा रही है। यहां बड़े-बड़े प्लॉट और फार्महाउस जैसे घर बनाए जाएंगे। यानी कम भीड़-भाड़ वाला इलाका होगा। इसका मकसद है कि हरियाली और पर्यावरण का संतुलन बना रहे। GMADA के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इसे लोग काफी पसंद करेंगे, क्योंकि पहले ही इस इलाके में GMADA की ओर से ईको सिटी-1, ईको सिटी-2 और मेडिसिटी बसाई गई हैं। एक से दो कनाल के होंगे प्लॉट इस स्कीम में 500 गज (1 कनाल) और 1000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे। इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है। यानी 500 गज का प्लॉट लगभग 3 करोड़ तक पड़ सकता है। आवेदन करते समय कुल कीमत का 10% पैसा (EMD) जमा करना होगा। स्कीम में कुल प्लॉटों की संख्या अभी तक क्लियर नहीं है, लेकिन योजना में लगभग 185 से 200 के बीच रहने की उम्मीद है। 6 शहरों की स्टडी की गई लो-डेंसिटी योजना दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम, गांधीनगर और लखनऊ में भी है। इन इलाकों की स्टडी भी GMADA की टीम ने की है, ताकि योजना को अच्छे तरीके से पूरा किया जा सके। इसके अलावा GMADA पहले ही न्यू चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर रहा है। यहां भी चंडीगढ़ की तरह 17 सेक्टर काटे गए हैं। किसानों को लैंड पूलिंग जमीन मालिकों के पास नकद मुआवजे के अलावा लैंड पूलिंग पॉलिसी का विकल्प भी है। इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट (SCO) मिल सकता है। इसके अलावा पूरा एरिया पहले ही बस चुका है, जिससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।  

चक्का जाम और DL रिन्यू में देरी पर अब नहीं होगी सजा! समझें जन विश्वास बिल के अहम पहलू

 नई दिल्ली देश की संसद से जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल पारित हो गया है. गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा. इस बिल के कानून बन जाने के बाद मौजूदा कानून के कई अपराध, अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगे. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि इससे जनता की ईज ऑफ लिविंग बेहतर होगी, जीवनस्तर में बदलाव आएगा।  उन्होंने इसे 'राम राज्य' की अवधारणा से जोड़ते हुए उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. जन विश्वास बिल के जरिये 80 केंद्रीय कानून संशोधित किए गए हैं. इस संशोधन के जरिये करीब एक हजार अपराध, अपराध के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं. कुछ अपराध में सजा का प्रावधान हटाकर जुर्माना जोड़ा गया है।  वहीं, कुछ अपराध ऐसे भी हैं जिनमें अब केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा. बात करते हैं ऐसी कुछ 'छोटी गलतियों', जो इस बिल के कानून बन जाने के बाद अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगी।  ड्राइविंग लाइसेंस ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद इसके रिन्यू कराने में मामूली देरी अपराध के दायरे से बाहर होगी. अब ड्राइविंग लाइसेंस वैधता समाप्त होने के बाद 30 दिन तक वैलिड माना जाएगा. डीएल रिन्यू कराने पर उसकी वैधता अवधि की गणना रिन्यू कराने की तारीख से की जाएगी, वैधता समाप्त होने की तारीख से नहीं।  राजमार्ग जाम राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत राजमार्ग जाम करने या ऐसी स्थिति उत्पन्न करने, जिससे आवागमन असुरक्षित हो, पर पांच साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजा का प्रावधान है. जन विश्वास बिल में इसके लिए जेल का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है. राजमार्ग जाम करने के लिए नागरिक दंड, यानी जुर्माने का प्रावधान होगा।  आग का झूठा अलार्म आग का झूठा अलार्म देना अब अपराध नहीं होगा. जन विश्वास बिल में इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया है. मौजूदा कानून के तहत यह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सजा का प्रावधान है।  जन्म-मृत्यु की सूचना न देना जन्म-मृत्यु की सूचना न देना भी मौजूदा समय में कानून अपराध है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना अपराध है  और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है. जन विश्वास बिल के जरिये इसे भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है. कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत रजिस्टर में गलत प्रविष्टि भी अब अपराध के दायरे में नहीं आएगी।  आवारा मवेशियों से फसल को नुकसान आवारा मवेशियों से फसल को नुकसान पहुंचना दंडात्मक अपराध है. जन विश्वास बिल में कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1971 को अपडेट कर सजा के प्रावधान को नागरिक दंड यानी जुर्माने में बदलने की बात है. इस कानून के जरिये पशुओं को छोड़ने या आवारा छोड़ने पर भी केवल जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।  बिजली से जुड़े अपराध में जुर्माना बिजली अधिनियम, 2003 के मुताबिक विभाग के आदेश-निर्देश का पालन नहीं करने पर तीन महीने की जेल या जुर्माने का प्रावधान है. जन विश्वास बिल के कानून बन जाने के बाद इस अधिनियम से जुड़े अपराध पर जेल का प्रावधान खत्म हो जाएगा. ऐसे मामलों में केवल जुर्माने का प्रावधान रह जाएगा।  कॉस्मेटिक्स का निर्माण-बिक्री ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमों के खिलाफ कॉस्मेटिक्स का निर्माण करना, बिक्री करना दंडात्मक अपराध है. इसके लिए एक साल जेल, 20 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. जन विश्वास बिल में जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर केवल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  पहली बार अपराध पर सुधार का मौका जन विश्वास बिल में कुछ कानूनों के उल्लंघन पर सुधार का मौका देने की बात है. अप्रेंटिस अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार करना या प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे व्यक्ति से ओवरटाइम काम कराना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय अपराध है. ऐसे अपराध में पहली बार उल्लंघन पर सलाह, दूसरी बार उल्लंघन पर चेतावनी और उसके बाद भी यही अपराध किए जाने की स्थिति में जुर्माने का प्रावधान जन विश्वास बिल में किया गया है।  अपराध की गंभीरता के अनुपात में जुर्माना जन विश्वास बिल में यह प्रावधान किया गया है कि जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुपात में तय की जाएगी. इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि विधेयक में निर्धारित जुर्माने और दंड हर तीन साल में न्यूनतम राशि के 10 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ेंगे।