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रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की बढ़ोतरी, 25-26 में ₹16,625 करोड़ की आय

रायपुर :खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि , 25–26 में ₹16,625 करोड़ की प्राप्ति  पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता  रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।  खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है। इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है। खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय  सुधार हुआ है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

उत्तर प्रदेश बनेगा विश्व की आध्यात्मिक राजधानी, पर्यटन विभाग ने पेश किया यूपी@2047 का रोडमैप

विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग ने पेश किया विकसित यूपी@2047 का रोडमैप पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन पर्यटन में वृद्धि के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” के विजन के तहत वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप जारी किया है। जिसके तहत विभाग ने वर्ष 2047 तक राज्य को विश्व की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में देश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान वर्तमान के लगभग 9.2 प्रतिशत में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी करते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के लिए कमरों की उपलब्धता को 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग सबसे जरूरी कार्य राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। हालांकि इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का वृहद पैमाने पर सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे का भी तेज गति से विकास किया गया है। इसी क्रम में राज्य के पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने के किए जाएंगे सभी संभव प्रयास पर्यटकों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें बढ़ोतरी करने के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार राज्य में आने वाला 1 पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों में 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग पर्यटकों की इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक बढ़ाकर 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासतों की संख्या 20 तक पहुंचाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश के पास  यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2029-30 तक 08,  2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी भी सुनिश्चित हो रही है।

नीतीश का इस्तीफा कब आएगा? नई सरकार के गठन की तारीख तय, बीजेपी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा?

पटना  बिहार में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ होती दिख रही है. नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद अब उनका दिल्ली जाना पक्का हो गया. सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा भी मिल जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है.बिहार में अब नई सरकार के गठन का फाइनल शेड्यूल भी तय हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी?  नीतीश कुमार मीडिया के साथ बातचीत का सिलसिला बंद कर चुके हैं. ऐसे में लोगों के मन सवाल है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्यता की कब शपथ लेंगे और सीएम पद कब छोड़ेंगे. इसके अलावा नई सरकार का गठन कब तब हो जाएगा, इन सभी सवाल से अब तस्वीर साफ होने जा रही है।  सीएम पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही सरकार गठन की औपचारिकता अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी. ऐसे में नई सरकार के गठन का शेड्यूल फाइनल हो गया है. कौन मुख्यमंत्री बनेगा और कौन कुर्सी पर होगा विराजमान, ये बीजेपी को तय करना?  नीतीश कुमार सीएम पद से कब देंगे इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. इसी बीच नीतीश कुमार के दिल्ली जान का शेड्यूल सामने आ गया है. सीएम नीतीश के आवास पर 6 अप्रैल को जेडीयू के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि 6 अप्रैल को नीतीश कुमार के साथ होने वाली बैठक में जेडीयू के दिग्गज नेता कोई अहम फैसला लेंगे।  पटना में जेडीयू नेताओं के साथ बैठक के बाद नीतीश कुमार दिल्ली आएंगे. नीतीश 9 अप्रैल को दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान कई अहम फैसले ले सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी नेताओं के साथ भी उनकी मुलाकात का कार्यक्रम में है।  मोदी-शाह के मुलाकात के बाद क्या छोड़ेंगे पद नीतीश कुमार दिल्ली प्रवास के दौरान पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं. 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण करेंगे. माना जा रहा है कि 10 अप्रैल की ही नीतीश कुमार दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. पीएम से नीतीश कुमार बिहार की नई सरकार के गठन पर चर्चा कर सकते हैं।  राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना फाइनल हो जाएगा. हालांकि, राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी नीतीश छह माह तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. खरमास खत्म होने के साथ ही राज्यपाल को नीतीश कुमार अपना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में नई सरकार गठन का शेड्यूल फाइनल नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया बीजेपी शुरू कर देगी. माना जा रहा है कि राजधानी पटना में 12 और 13 अप्रैल में से किसी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक में एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के चुनने में नीतीश कुमार के पसंद का भी ख्याल रखा जाना है. यह बात बीजेपी और जेडीयू दोनों ही तरफ से कही जा चुकी है. नीतीश के इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी नई सरकार के लिए अपनी एक्सरसाइज शुरू कर देगी।  मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते ही बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री के चेहरे को चुनाव करना होगा. नए मुख्यमंत्री को चुनने में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार का भी रोल होगा. ऐसे में मान जा रहा है कि खरमास के बाद नई सरकार के गठन की कवायद होगी, जिसके लिए एक्सरसाइज शुरू हो चुकी है. अब गेंद बीजेपी के पाले में है।  बीजेपी किसे बनाएगी बिहार का नया सीएम बिहार में यह तय है कि मुख्यमंत्री बीजेपी का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर पार्टी अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही है जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम बीजेपी से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा. बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाती है, ये बात सभी के लिए एक पहेली बनी हुई है. ऐसे में कई नामों पर चर्चा है, लेकिन किसी पर अभी तक फाइनल मुहर नहीं लगी है।  हालांकि, बिहार के नए सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपने संकेत दे चुके हैं. समृद्धि यात्रा में जनसंवाद के दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर सम्राट चौधरी के के कंधे पर हाथ रखकर सियासी संदेश देते रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है।  बीजेपी क्या बिहार में भी चौंकाएगी यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है.बीजेपी ने 2014 से अपने फैसले से चौंकाती रही है. देखा गया है कि जिसके नाम की चर्चा रहती है, उसे पार्टी सीएम नहीं बनती।  हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे.मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजन लाल शर्मा और दिल्ली में रेखा गुप्ता को बीजेपी ने सीएम बनाकर चौंका दिया था. ऐसे में अब देखना है कि बिहार में किसे सत्ता की कमान सौंपती है। 

सीमा हैदर ने बेटे का रखा अनोखा नाम, पाकिस्तान को होगा बड़ा झटका

नोएडा पाकिस्तान से भारत आईं सीमा हैदर फरवरी 2026 में छठी बार मां बनी थीं।  सीमा और उनके पति सचिन ने बेटे का नामकरण किया। कपल ने बेटे का नाम 'भारत' रखा है जिसे जानने के बाद हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को मिर्च जरूर लगेगी। नामकरण समारोह नोएडा के रबुपुरा स्थित उनके निवास पर आयोजित किया गया। इस दौरान सीमा ने कहा कि हिंदू धर्म बहुत सुंदर है और उन्हें हिंदू होने पर गर्व महसूस होता है। बेटे के नामकरण को लेकर सीमा हैदर ने कहा कि ‘हिंदू धर्म में जब घर में बेटा होता है तो नामकरण किया जाता है। यह दूसरा कुआं पूजन है, इससे पहले जब मीरा हुई थी, तब कराया था। बहुतअच्छा महसूस करती हूं और खुशी महसूस होती है। हमारा हिंदू धर्म बहुत खूबसूरत है और बहुत सारी खूबसूरत दिखाता है। छोटे-छोटे त्योहार प्यार बढ़ाते हैं। मैं बहुत खुश हूं और कभी पछतावा नहीं होता। मुझे गर्व होता है कि मैं हिंदू हूं।’ भारत नाम रखने के पीछे की वजह भी बताई बेटे का नाम भारत रखने के पीछे क्या वजह थी इसपर सीमा बताती हैं कि 'पंडित ने जब नाम निकाला तो वह 'भ' अक्षर से आया तो हमने सोचा कि भारत से सुंदर नाम कोई हो ही नहीं सकता तो हमने रख लिया।' 'वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहती' उन्होंने आगे कहा कि ‘भारत को सपोर्ट करना उन्हें अच्छा लगता है। हर मैच में वह भगवान से भारत की जीत की प्रार्थना करती हैं। जब भारत जीतता है, तो उन्हें गर्व और खुशी महसूस होती है। उनके अनुसार, जीत के बाद पूरा परिवार मिलकर जश्न मनाता है। वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहती। हर कास्ट के लोग रबूपुरा में रहते हैं। मुझे प्यार करते हैं, सम्मान देते हैं। मुझे अपनी बहू मानते हैं।’ साल 2023 में अपने चार बच्चों के साथ भारत आई थीं आपको बता दें कि सीमा के पहले पति से चार बच्चे हैं। जबकि, सचिन से मिलने के बाद वह दो और बच्चों की मां बनी हैं। पाकिस्तानी नागरिक सीमा साल 2023 में अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते भारत आई थीं। सचिन से सीमा की मुलाकात ऑनलाइन गेम PUBG खेलने के दौरान हुई थी। इसके बाद सीमा जब यूपी आई तो सचिन ने उन्हें किराए के मकान में अपने साथ रखा। कपल यह भी दावा करता है कि दोनों ने 2023 में काठमांडू के एक मंदिर में शादी की थी। सीमा कई मौकों पर कह चुकी हैं कि अब हिंदुस्तान ही उनके लिए सबकुछ है और वह यहां पर ही रहना चाहती हैं।

महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स का धमाल, 1 साल में बेचीं हजारों यूनिट्स, कंपनी ने हासिल किया नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स मार्केट में बेहतरीन परफॉर्म कर रही है. खासकर कंपनी की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स. यहां परफॉर्मेंस की बात सड़कों पर नहीं बल्कि नंबर्स के मामले में हो रही है. कंपनी ने अपने सभी इलेक्ट्रिक मॉडल्स की कुल 50 हजार यूनिट्स को बेच दिया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में मन में जो सवाल रहते हैं उसे देखते हुए ये नंबर बेहतरीन हैं।  सेल्स की ये संख्या महिंद्रा की बीई6, एक्सईवी 9ई और एक्सईवी 9एस की हैं. ये सभी गाड़ियां कंपनी की इलेक्ट्रिक कार्स के प्लेटफॉर्म INGLO पर बेस्ड हैं. इन गाड़ियों की ये संख्या एक अलग कहानी कह रही है. कंपनी को 30 हजार यूनिट्स बेचने में लगभग 7 महीनों का वक्त लगा था।  कैसा रहा इलेक्ट्रिक कार्स का सफर? नवंबर 2025 में महिंद्रा की बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स की सेल 30 हजार पार पहुंची थी. वहीं फरवरी 2026 तक कंपनी 41 हजार के सेल्स नंबर तक पहुंच गई थी, जबकि 41 हजार से 50 हजार का सफर तय करने में कंपनी को सिर्फ 6 हफ्तों का वक्त लगा है. साल 2025 में कंपनी औसतन हर महीने 5 हजार इलेक्ट्रिक कार्स बनाई हैं।  मार्च 2026 से उस लिमिट को बढ़ाकर 8000 यूनिट किया गया है. ये एक्सपेंशन बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो दिखाता है कि कंपनी कितनी जल्दी अपनी वेटिंग लिस्ट को क्लियर करेगी. जिन लोगों ने महिंद्रा की इलेक्ट्रिक कार्स को महीनों पहले ऑर्डर किया था, उन्हें अब इसकी डिलीवरी जल्दी मिलेगी।  कितनी है कीमतें? सिर्फ मार्च 2026 की बात करें, तो कंपनी ने 5,217 बॉर्न इलेक्ट्रिक कार्स को बेचा है, जो पिछले साल की मार्च के मुकाबले 141 परसेंट ज्यादा है. ब्रांड की सबसे सस्ती बॉर्न इलेक्ट्रिक कार बीई6 है, जिसकी कीमत 18.90 लाख रुपये से शुरू होती है. वहीं एक्सईवी 9एस की कीमत 19.95 लाख रुपये से शुरू होती है. जबकि एक्सईवी 9ई की कीमत 21.90 लाख रुपये से शुरू होती है।  ये तीनों ही गाड़ियां INGLO स्टेकबोर्ड आर्किटेक्चर पर बेस्ड हैं. इनमें 59 kWh या 79 kWh का बैटरी पैक मिलता है. 79 kWh वाले बैटरी पैक की रेंज 650 किलोमीटर से ज्यादा है. कंपनी की मानें, तो इन गाड़ियों में हायर बैटरी पैक की डिमांड ज्यादा है. कुल प्रीऑर्डर में से 73 परसेंट प्रीऑर्डर हायर बैटरी पैक का है।     

फीफा विश्व कप: ईरान के मैचों को मैक्सिको में आयोजित करने का मामला अमेरिका के खिलाफ अभी भी विवादित

नई दिल्ली  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच फीफा और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल राजनीति (डिप्लोमेसी) एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले ने हालात को मुश्किल और जटिल बनाया था। ईरान की फुटबॉल टीम और उसके विश्व कप अभियान पर इसका सीधा असर पड़ा था। इस बीच फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ईरानी फुटबॉल अधिकारियों के बीच तुर्की में हुई बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान की विश्व कप भागीदारी को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे। हालांकि इस मुलाकात में सकारात्मक संकेत मिले, लेकिन एक बड़ा मुद्दा—ईरान के मैचों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में कराने का—अब भी अनसुलझा है। मार्च 2025 के दौरान ईरान की स्थिति काफी अनिश्चित रही। सरकारी स्तर पर यह संकेत दिए गए कि टीम विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकती या उसे अमेरिका जाने में मुश्किल हो सकती है। यहां तक कि फीफा से यह भी मांग उठी कि ईरान के मैचों को किसी अन्य देश, खासकर मेक्सिको, में स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि फीफा ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा और ईरान को अमेरिका में ही अपने मैच खेलने होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने स्थिति को और उलझा दिया। ट्रंप ने पूर्व में ईरान को विश्व कप के लिए अहम न होने या फिर टीम के भाग लेने की स्थिति में खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी। हालांकि फीफा लगातार एक स्पष्ट रुख अपनाए हुए है और इन्फेंटिनो ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की टीम को सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी। ईरान की टीम ने भी मुश्किल हालातों के बीच तैयारी जारी रखी है। जॉर्डन में प्रस्तावित अभ्यास मैचों को सुरक्षा कारणों से तुर्की के अंताल्या में शिफ्ट किया गया, जहां टीम ने नाइजीरिया और कोस्टा रिका के खिलाफ मुकाबले खेले। इन मैचों के दौरान खिलाड़ियों ने युद्ध के विरोध में प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। विश्व कप की तैयारियों के तहत ईरान 10 जून तक एरिजोना के टक्सन स्थित ट्रेनिंग कैंप में पहुंचेगा। टीम अपना पहला मैच 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद उसे बेल्जियम और मिस्र जैसी मजबूत टीमों से भी भिड़ना है। हालांकि वीजा से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिससे टीम के कुछ अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिल पाया है। कुल मिलाकर, यह स्थिति केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीति, कूटनीति और वैश्विक संबंधों की जटिलताएं भी शामिल हैं। फीफा के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह खेल की निष्पक्षता बनाए रखते हुए सभी टीमों के लिए सुरक्षित और समान माहौल सुनिश्चित करे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की टीम इन चुनौतियों के बीच कैसा प्रदर्शन करती है और क्या फुटबॉल वाकई कूटनीतिक पुल का काम कर पाता है।

खेतों में खड़े बिजली के खंभे हटाए जाएंगे, अंडरग्राउंड तार और स्मार्ट ट्रांसफार्मर लगेंगे; सीएम मान करेंगे प्रोजेक्ट का शुभारंभ

जालंधर  पंजाब के खेतों में लगे बिजली के खंभों को अब हटा दिया जाएगा। उनकी जगह अंडरग्राउंड तारें बिछाई जाएंगी। यहां लगे बड़े ट्रांसफार्मर भी हटेंगे और इनके बदले में छोटे आकार के स्मार्ट ट्रांसफार्मर इंस्टॉल किए जाएंगे। किसानों को राहत देने, कृषि कार्यों के लिए बिजली आपूर्ति को सुचारू व निर्बाध बनाने और खेतों में लगे खंभों व तारों की वजह से होने वाले विवादों को निपटाने के मकसद से पंजाब सरकार ने यह फैसला लिया है। इस परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव सतोज से बतौर पायलट प्रोजेक्ट की जाएगी।  पंजाब में 13236 ग्राम पंचायतें मौजूद हैं और यहां खेतिहर जमीनों पर तीन लाख से अधिक खंभे मौजूद हैं। दरअसल, सिंचाई के लिए किसानों द्वारा लगाई गई मोटरों तक बिजली पहुंचाने के लिए खंभों की मदद से ही तारों का जाल खेतों में फैला हुआ है। इसी बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए खेतों में काफी संख्या में ट्रांसफार्मर भी मौजूद हैं। इस योजना के तहत पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अफसरों ने गांव सतोज का दौरा कर लिया है। गांव में करीब दो हजार एकड़ खेतीहर जमीन हैं, जहां सिंचाई के लिए लगभग 400 मोटरें और 800 से अधिक खंभे लगे हैं। इस वजह से बनाई योजना इन तारों के ढीले होने के चलते स्पार्किंग की वजह से अक्सर खेतों में कई दुर्घटनाएं हो जाती हैं। कभी तारों की चिंगारियां पकी हुई फसलों को जलाकर रखा कर देती हैं, तो कहीं खेतों में काम कर रही कंबाइन मशीनें इन तारों से टकरा जाती हैं। इसके अतिरिक्त खेतों से गुजरती तारें और खंभों को खड़ा करने के लिए लगाई गई सपोर्ट (खिच) भी किसानों के बीच आपसी विवाद का बड़ा कारण बन जाती हैं। ऐसे भी कई विवाद सामने आए हैं। दूसरा, बड़े आकार के ट्रांसफार्मरों से खेतों में काफी जगह भी घिर जाती है, जहां किसान फसल नहीं लगा पाते। ढीली तारों की वजह से ट्रांसमिशन लॉस भी काफी रहता है। बिना खंभों के सुंदर लगेंगे खेत : मान पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि यह बहुत महत्वाकांक्षी योजना है। सभी गांवों से खंभे और तारें हटा दी जाएंगी। तारें अंडरग्राउंड होंगे और छोटे आकार वाले ट्रांसफार्मर लगेंगे। बिना खंभों के गांव सुंदर दिखेंगे। सीएम ने कहा, इसके अलावा इन खंभों, ट्रांसफार्मरों और तारों की वजह से होने वाले नुकसान व विवाद भी खत्म हो जाएंगे जबकि बिजली आपूर्ति और बेहतर होगी। इसी माह उनके गांव सतोज से इस योजना की शुरुआत होगी। इस बारे में जल्द बिजली अफसरों संग बैठक करेंगे।  

US में पंजाब-हरियाणा के ड्राइवरों पर असर, 1790 नौकरियों का नुकसान, वर्क वीजा के बिना नहीं मिलेगा DL, पूरे USA में हो सकता है लागू

पटियाला  अमेरिका के इंडियाना राज्य ने अवैध रूप से गए सभी पंजाबी ड्राइवरों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए हैं। इंडियाना के नए कानून से 1790 ड्राइवरों की नौकरी चली गई है। इसमें अधिकतर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं।  इंडियाना की लाइसेंसिंग अथारिटी ने बताया कि लगातार इंडियन ड्राइवरों से हो रहे हादसों के बाद ये फैसला लिया गया। हादसों के बाद पूछताछ में पता चला कि पंजाब-हरियाणा मूल के ड्राइवरों को न तो रोड साइन इंग्लिश में पढ़ना आते थे और न ही वे अंग्रेजी में बात कर सकते थे। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 में हाउस एनरोल्ड एक्ट 1200 पर साइन कर दिए हैं। इंडियाना बीएमवी ने 16 मार्च को 1790 ड्राइवरों को नोटिस भेजा था, जिसमें लाइलेंस रद्द करने की सूचना दी गई थी। कानून लागू होते ही 1 अप्रैल को सभी नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल (जिनके पास एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था) अपने आप एक्सपायर हो गए। इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा बोले- हमारा मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्टीयरिंग व्हील के पीछे बैठा व्यक्ति पूरी तरह ट्रेंड और कानूनी रूप से योग्य हो। तरनतारन के युवक ने बैन को मारी थी ट्रक से टक्कर: इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा ने बताया कि कानून बनाने का मुख्य कारण पिछले 4 महीनों में अवैध इमिग्रेंट ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए गए हादसे हैं। इनमें कुल 6 मौतें हुईं। पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर की अमेरिका के फ्लोरिडा टर्न पाइक में ड्राइविंग दौरान बड़ी लापरवाही का वीडियो सामने आया था। फ्लोरिडा की सड़क पर गलत यूटर्न लेने कारण एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। इसमें वैन में सवार 3 लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक ड्राइवर तरनतारन के गांव रटैला का रहने वाला था। पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने रेड लाइट जंप कर मारी थी टक्कर: दूसरा हादसा 18 फरवरी 2026 को पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने किया। 24 साल का सुखदेव 2018 में अवैध रूप से आया था और मई 2025 में लाइसेंस लिया था। उसने हैंड्रिक्स काउंटी में यूएस 36 पर रेड लाइट क्रॉस की। सेमी ट्रक ने पिकअप ट्रक को टक्कर मारी जिसमें 64 वर्षीय टेरी शुल्त्ज की मौत हो गई। सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह सिर्फ 3 महीने से ट्रक चला रहा था। इसी के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाब के ट्रक ड्राइवर ने करीब 10 वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी पहचान 21 साल के जशनप्रीत सिंह के रूप में हुई थी। हादसों के बाद कानून बनने पूरी कहानी     इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश:फरवरी 2026 में इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश किया गया। कई भयंकर एक्सीडेंट्स के बाद यह बिल पास हुआ। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 के मध्य में इसे साइन किया। लेफ्टिनेंट गवर्नर माइका बेकविथ और अटॉर्नी जनरल ने इसे सड़क सुरक्षा का बड़ा कदम बताया।     बीएमवी ने पहले नोटिस भेजा: इंडियाना ब्यूरो ऑफ मोटर व्हीकल्स (बीएमवी) ने 16 मार्च 2026 को लाइसेंस रद्द करने से पहले 1790 ड्राइवरों को मेल से नोटिस भेजा। इनमें वे सभी शामिल थे जिनके पास नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल था और लीगल स्टेटस यानी एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था।     1 अप्रैल 2026 को कानून लागू हुआ: 31 मार्च 2026 की मिडनाइट को सभी पुराने नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल एक्सपायर हो गए। अब अवैध इमिग्रेंट्स को नया सीडीएल नहीं मिलेगा। केवल एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा वाले ही अप्लाई कर सकेंगे।     नए कानून में अंग्रेजी आना जरूरी किया: नया लाइसेंस लेने के लिए एग्जाम अब केवल अंग्रेजी या अमेरिकन साइन लैंग्वेज में होगा। ड्राइवर को अंग्रेजी में बातचीत, ट्रैफिक साइन समझने और रिपोर्ट लिखना आना जरूरी कर दिया गया है। कंपनियां या ड्राइविंग लाइसेंस स्कूल अगर जानबूझकर अनएलिजिबल ड्राइवर को ट्रेनिंग या नौकरी देते हैं तो उन पर 50 हजार डॉलर (लगभग 42 लाख रुपए) जुर्माना होगा। फर्जी दस्तावेज देने पर भी 42 लाख की पेनल्टी लगेगी। लाइसेंस रद्द करने वाला इंडियाना पहला सूबा, बाकी जगह भी हो सकते अवैध रूप से ट्रक चला रहे प्रवासियों पर कार्रवाई करने वाला इंडिया अमेरिका का पहला सूबा है। गवर्नर माइक ब्रॉन ने बताया कि ये फैसला फरवरी 2026 में पंजाबी ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए 2 बड़े हादसों के बाद लिया गया है। खासकर फरवरी 2026 में सुखदीप सिंह के ट्रक से हुए एक्सीडेंट में 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। सरकार का कहना है कि इससे अनट्रेंड और अनक्वालिफाइड ड्राइवरों को रोका जाएगा, सड़कें सुरक्षित होंगी। नए नियम में अंग्रेजी आना अनिवार्य है। रद्द लाइसेंस वाले ट्रक ड्राइवरों को नौकरी देने वाले ट्रक मालिकों पर 50000 डॉलर जुर्माना लगेगा।

भा.ज.पा. महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के जरिए मिशन 2029 की ओर बढ़ी, बड़ा दांव खेला

नई दिल्ली  संसद का वर्तमान बजट सत्र बढ़ा दिया गया है। इसके बाद अब 16 से 18 अप्रैल के बीच लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की 3 दिवसीय बैठक होगी। इस विस्तारित सत्र को लेकर केंद्र सरकार की बड़ी तैयारियां हैं। सरकार इस तीन दिनों की कार्यवाही के दौरान महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन से जुड़ा विधेयक ला सकती है। इसके अलावा केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी परिसीमन की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन कदमों के साथ ही बीजेपी ने अभी से ही मिशन 2029 की तैयारी शुरू कर दी है। जहां 2014 से पहले बीजेपी का फोकस राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दों पर था, वहीं अब पार्टी नए एजेंडे के साथ आगे बढ़ रही है। महिला आरक्षण के साथ साथ ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुद्दा भी तेजी पकड़ रहा है। बीजेपी इसे अपने बड़े सुधार के रूप में पेश करेगी और चुनाव में इसे वोट में बदलना चाहेगी। महिलाओं को मिलेगा 33 फीसदी आरक्षण इससे पहले केंद्र सरकार परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया शुरू करने और लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसे एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून को संसद के विस्तारित सत्र में पास कराया जा सकता है। गौरतलब है कि यह कानून सितंबर 2023 में पास हुआ था, लेकिन इसमें लागू करने की कोई तय समय सीमा नहीं थी। अब 2029 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इसे लागू करने के लिए तैयार है। 2027 तक पूरा होगा परिसीमन वहीं परिसीमन की प्रक्रिया भी 2027 तक पूरा होने की संभावना है। प्रस्ताव है कि लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या करीब 50 प्रतिशत बढ़ाई जाए। इससे लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 हो सकती हैं, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे पुरुष और महिला दोनों वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिलेगा। परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में जो चिंता थी, उसे दूर करने के लिए सरकार राज्यों के बीच सीटों का अनुपात बरकरार रखने पर भी विचार कर रही है। अगर यह योजनाएं 2029 तक लागू हो जाती है, तो भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बीजेपी इस बदलाव का श्रेय लेकर महिला वोटरों को और मजबूत तरीके से जोड़ सकती है।

राय लक्ष्मी ने धोनी संग अफेयर को किया खारिज, बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं

मुंबई  क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी (एमएस धोनी) अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी खबरों में रहे हैं. उनके साउथ एक्ट्रेस राय लक्ष्मी संग अफेयर के खूब चर्चे रहे थे. राय लक्ष्मी ने एमएस धोनी संग रिलेशनशिप को लेकर बात की थी।  बता दें कि 2008 से 2009 के बीच में राय लक्ष्मी और एमएस धोनी के रिलेशनशिप की खबरें काफी चर्चा में थीं. दोनों को 2009 में IPL आफ्टर पार्टीज में साथ देखा गया था. धोनी एक्ट्रेस के बर्थडे बैश में भी पहुंचे थे।  धोनी संग रिश्ते को बताया दाग राय लक्ष्मी ने 2014 में एमएस धोनी संग रिलेशनशिप को लेकर रिएक्ट किया था. उन्होंने कहा था, 'मैं ये मानने लगी हूं कि एमएस धोनी संग मेरा रिश्ता दाग और निशान की तरह है और ये लंबे समय तक नहीं मिटेगा।  रिपोर्ट्स थीं कि एमएस धोनी और राय लक्ष्मी के बीच में अपने करियर की वजह से दूरियां आ गई थीं. इस वजह से वो अलग-अलग हो गए थे. राय लक्ष्मी से ब्रेकअप के एक साल बाद एमएस धोनी ने साक्षी धोनी से शादी कर ली थी. कपल अब खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं. उन्होंने 4 जुलाई 2010 को शादी थी. उन्हें एक बेटी जीवा धोनी भी है. जीवा का जन्म 6 फरवरी 2015 को हुआ था।  राय लक्ष्मी से अलग होने के बाद धोनी ने कभी भी इसके बारे में पब्लिकली बात नहीं थी. वो अपनी लाइफ को प्राइवेट रखते हैं।  कौन है राय लक्ष्मी? राय लक्ष्मी की बात करें तो उन्होंने मॉडलिंग से शुरुआत की थी और फिर एक्टिंग में एंट्री ली. उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी मूवीज में काम किया. उन्होंने 2005 में एक्टिंग डेब्यू किया था. वो तमिल फिल्म Karka Kasadara में नजर आई थीं. उन्होंने अजय देवगन के साथ फिल्म भोला में भी काम किया है. वो फिल्म अकीरा में भी नजर आईं. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं।  कई बार टूटा एक्ट्रेस का दिल राय लक्ष्मी (Raai Laxmi ) प्यार के मामले में उतनी लकी नहीं है। इस बात खुलासा एक्ट्रेस ने ही किया था। बता दें उन्होंने कहा था कि बहुत बार उनका दिल टूट चुका है।   महेंद्र सिंह धोनी को किया था डेट राय लक्ष्मी का रिश्ता महेंद्र सिंह धोनी के साथ भी रहा था। बता दें एक्ट्रेस ने 2 सालों तक धोनी तो डेट किया था। दोनों का जब ब्रेकअप हुआ था तो एक्ट्रेस ने क्रिकेटर के साथ अपने रिश्ते को दाग जैसा बताया था।  श्रीसंत संग जुड़ा था नाम राय लक्ष्मी का नाम इंडियन क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज रह चुके शान्ताकुमारन श्रीसंत के साथ भी जुड़ चुका है। श्रीसंत के साथ एक्ट्रेस की तस्वीरें भी वायरल हुई, लेकिन एक्ट्रेस ने कहा था कि ये केवल अफवाह है। एक्टर विक्रम सिंह संग भी जुड़ा था नाम रिपोर्ट के अनुसार राय लक्ष्मी ने एक्टर विक्रम सिंह को भी डेट किया था, लेकिन एक्ट्रेस का रिश्ता लंबा चल नहीं सका और उनका ब्रेकअप हो गया। राय लक्ष्मी की बोल्डनेस लक्ष्मी अपनी बोल्डनेस के साथ-साथ पवन सिंह के साथ फेमस डांस के कारण भी चर्चा में रहती हैं। बता दें उनके गाने को फैंस ने बहुत पसंद किया था। रिश्ता दाग और निशान की तरह धोनी से अलग होने के बाद एक्ट्रेस ने कहा था कि मैं ये मानने लगी हूं कि एमएस धोनी संग मेरा रिश्ता दाग और निशान की तरह है और ये लंबे समय तक नहीं मिटेगा। 50 से भी ज्यादा फिल्मों में किया काम राय लक्ष्मी अपने लाइफ में 50 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं। फैंस उनकी एक्टिंग के अलावा उनकी स्टाइल को भी बहुत पसंद करते हैं।