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स्टेट बार काउंसिल मतगणना अपडेट, चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने शिकायतों को बताया निराधार

रांची झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव की मतगणना 20 मार्च से लगातार जारी है. शुक्रवार यानी 3 अप्रैल को लगभग सभी जिला बार संघों में हुए मतदान के प्रथम प्राथमिकता के वोटों की गिनती पूरी कर ली गई है. हालांकि इन वोटों की जांच में दो दिन का समय लगेगा, जिसके बाद द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाएगी. गड़बड़ी के आरोपों को किया गया खारिज चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. गजेंद्र कुमार, अजय कुमार, नेहा ठाकुर और अनामिका शर्मा द्वारा उठाए गए आरोपों को निराधार बताया गया. उन्होंने कहा कि शिकायतें चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली थीं और इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए मामला स्टेट बार काउंसिल को भेज दिया गया है. जांच में नहीं मिली कोई अनियमितता इस मामले की जांच सहायक रिटर्निंग ऑफिसर व सेवानिवृत्त जिला जज शिवनारायण सिंह को सौंपी गई थी. उन्होंने मतदान केंद्र के रजिस्टर, कुल मतदान और बैलेट पेपर लेने के समय किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया. जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके आधार पर सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया. अजय कुमार के दावे पर भी नहीं मिला प्रमाण अजय कुमार ने एक भी वोट नहीं मिलने का मामला उठाते हुए कहा था कि उनके भतीजे ने उन्हें एक वोट दिया था, लेकिन जब इसकी जांच के लिए भतीजा का नाम मांगा गया, तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया.

घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक, अब तक ₹6.76 करोड़ कमाए

भोपाल मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है। प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं। होम-स्टे योजना पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है। सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है। बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं। "बाचा'' के  गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष  अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए  धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे  रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे,  अंकित का गुलमोहन होम-स्टे,  राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे,  सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सु मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां  कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए  कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा। छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया … Read more

ही-मैन की वापसी, निकोलस गैलिट्जिन और जेरेड लेटो स्टारर फिल्म का धमाकेदार ट्रेलर आउट

 आने वाला गर्मियों का सीजन और भी जबरदस्त होने वाला है, क्योंकि 'मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स' 5 जून, 2026 को भारत में सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। मेकर्स ने हाल ही में इसका ऑफिशियल ट्रेलर रिलीज किया है। यह फिल्म 80 के दशक में आए कार्टून ही- मैन (He-Man) की यादें ताजा करता है। वापस लौट रहा ही-मैन ट्रेलर की शुरुआत एक जानी-पहचानी और दमदार लाइन से होती है, 'मेरे पास पावर है' (I have the power!), जो पॉप कल्चर के सबसे मशहूर हीरो में से एक, He-Man की वापसी का संकेत देती है। यह कहानी प्रिंस एडम के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका किरदार निकोलस गैलिट्जिन ने निभाया है। पंद्रह साल बाहर बिताने के बाद उन्हें अपने ग्रह, एटरनिया वापस बुलाया जाता है। अपनी वापसी पर, उन्हें पता चलता है कि पूरा राज्य बेरहम स्केलेटोर के कब्जे में है, जिसका किरदार जेरेड लेटो ने निभाया है। जैसे ही एटरनिया पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं, एडम को अपने साथियों के साथ फिर से मिलकर, संतुलन बहाल करने और अंधेरी ताकतों को हराने के लिए 'ही-मैन' के रूप में अपनी नियति को अपनाना पड़ता है।   बेहतरीन विजुअल इफेक्ट्स और वही पुराने किरदार कैमिला मेंडेस टीला का किरदार निभा रही हैं, जबकि इदरीस एल्बा डंकन का रोल कर रहे हैं, जिन्हें मैन-एट-आर्म्स के नाम से भी जाना जाता है। ट्रेलर में एडम की यात्रा में उनके अहम साथियों के तौर पर उनके किरदारों को दिखाया गया है। यह फिल्म बड़े पैमाने पर एक्शन सीन, बेहतरीन विज़ुअल इफेक्ट और इसके मुख्य किरदारों की गहरी पड़ताल का वादा करती है। कब रिलीज होगी फिल्म? IMAX और दूसरे प्रीमियम फॉर्मेट में रिलीज होने की योजना के साथ, Masters of the Universe को एक बड़े बजट वाले थिएट्रिकल अनुभव के तौर पर पेश किया जा रहा है। यह फिल्म कई भाषाओं में रिलीज होगी, जिनमें अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगु शामिल हैं, जिसका मकसद पूरे भारत में ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचना है। यह लाइव-एक्शन रीबूट एक्शन भारत में 5 जून, 2026 को रिलीज होगा। बचपन की यादें होंगी ताजा वैसे तो हॉलीवुड की कई सुपरहीरो फिल्मों को भारत में पसंद किया जाता है। चाहे वह स्पाईडरमैन हो या एवेंजर्स, लेकिन इन फ्रेंचाइजी की फिल्में लगातार आती रही हैं इसलिए दर्शकों के बीच इनका क्रेज बना हुआ है। लेकिन मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स का ही मैन 80 के दशक के बाद लगभग 46 साल बाद लौट रहा है। ऐसे फिल्म को कैसा रिस्पॉन्स मिलता है यह तो रिलीज होने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन हां 80 के दशक के लोगों के लिए ये एक शानदार अनुभव और बचपन की यादें ताजा करने का एक अच्छा मौका हो सकता है।  

राज्यपाल जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए जेनेटिक काउंसलिंग और व्यापक जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना होगा। राज्यपाल  पटेल शनिवार को खरगोन जिले के प्रवास के दौरान जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद को संबोधित कर रहे थे।   राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि विवाह से पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच से आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होने  विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी महामहिम राज्यपाल के सिकल सेल के क्षेत्र में किए जा रहे पुनीत कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इस बीमारी की वेदना को समझते हुए पूरे प्रदेश विशेषतः जनजातीय वर्ग मे इसके उन्मूलन और सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक  बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया अनुवांशिक रोग है, जिसका  प्रभाव शरीर  में अनेक गंभीर रोग उत्पन्न करता है। समाज के सेवाभावी लोगों और संस्थाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं। सिकल सेल यूनिट का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल ने रक्षा अस्पताल में नवनिर्मित सिकल सेल यूनिट का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने सिकेल सेल यूनिट के अंतर्गत निर्मित 2 वार्डों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जांच उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही निर्देशित किया कि सिकल सेल पीड़ितों को समय पर उपचार और उचित मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित किया जाए। सिकेल सेल पीड़ित बच्चों से की मुलाकात राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। सिकेल सेल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सिकल सेल पीड़ित बच्चों से उपचार के सम्बंध में भी जानकारी प्राप्त कर उन्हे नियमित दवाई, सुपाच्य भोजन, अधिक मात्रा में पानी पीने, व्यायाम एवं ठंडे पानी से नहीं नहाने की समझाइश दी।  

प्रशासनिक सुधार की ओर बढ़े कदम, कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन ट्रेनिंग लेंगे झारखंड के कर्मचारी

 रांची झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अनूठी पहल करते हुए ‘साधना सप्ताह’ की शुरुआत की है. यह कार्यक्रम 2 अप्रैल 2026 से 8 अप्रैल 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जा रहा है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के कौशल और कार्यक्षमता को बढ़ाना है. क्षमता विकास और निरंतर सीखने पर जोर साधना सप्ताह का मुख्य उद्देश्य सरकारी पदाधिकारियों और कर्मचारियों में निरंतर सीखने की आदत विकसित करना और उनकी कार्यक्षमता को मजबूत करना है. सरकार चाहती है कि कर्मचारी बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखें और आधुनिक तकनीकों व प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमता का विकास करें. इससे शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा. आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम इस कार्यक्रम के तहत सभी सरकारी कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है. यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है. कर्मचारियों को उनके कार्य क्षेत्र से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण लेकर अपनी दक्षता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है. पाठ्यक्रमों में आधुनिक विषय शामिल साधना सप्ताह के दौरान जिन विषयों पर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से आधुनिक और जरूरत आधारित हैं. इनमें इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का परिचय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल बातें, गवर्नेंस सस्टेनेबिलिटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड बिगिनर और कार्यस्थल पर योग जैसे विषय शामिल हैं. इन पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग तय की गई है, ताकि कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें पूरा कर सकें. विभागीय स्तर पर समिति का गठन कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक विभाग और कार्यालय में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है. यह समिति संयुक्त सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी, जिसमें 3 से 4 पदाधिकारी शामिल होंगे. समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह साधना सप्ताह के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित करे. वेबिनार और चर्चा सत्र होंगे आयोजित साधना सप्ताह के दौरान केवल ऑनलाइन पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि समूह चर्चा, वेबिनार और पैनल चर्चा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इन सत्रों में समकालीन प्रशासनिक चुनौतियों, नीतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों (बेरूट प्रैक्टिसेज) पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इससे कर्मचारियों को व्यावहारिक अनुभव और नई सोच विकसित करने का अवसर मिलेगा. विभागाध्यक्षों को दी गई विशेष जिम्मेदारी राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करें. साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि इस कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक कार्यवाही समय पर पूरी हो. इससे साधना सप्ताह का उद्देश्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके. प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम साधना सप्ताह को झारखंड सरकार के प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यदि इस कार्यक्रम का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है, तो इससे सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. साथ ही, इससे आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है.

चुनावी रण में TMC का दांव: तृणमूल कांग्रेस ने उतारे दिग्गज स्टार प्रचारक

 बंगाल श्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने पहले चरण के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर चुनावी रण का औपचारिक आगाज कर दिया है. यह सिर्फ नामों की घोषणा नहीं, बल्कि पार्टी की रणनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है. चुनाव प्रचार की कमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हाथ में है. दोनों चेहरे न सिर्फ संगठन के केंद्र में हैं, बल्कि चुनावी नैरेटिव को तय करने में भी अहम भूमिका निभाने वाले हैं. TMC ने साफ कर दिया है कि चुनाव अभियान शीर्ष नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रहेगा. पहले चरण के लिए जारी सूची में सिर्फ शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि संगठन के अनुभवी और भरोसेमंद चेहरों को भी जगह दी गई है. वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम, पार्टी के अनुभवी नेता सुब्रत बख्शी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं. इन नेताओं की मौजूदगी यह बताती है कि पार्टी सिर्फ करिश्माई नेतृत्व पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं के जरिए हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है. स्टार प्रचारकों की यह सूची कई स्तरों पर संदेश देती है.  एक तरफ यह पार्टी के भीतर एकजुटता और सामूहिक नेतृत्व की तस्वीर पेश करती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष को संकेत भी है कि तृणमूल कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ सियासी समर में उतर चुकी है. यह भी साफ है कि पार्टी इस चुनाव को सिर्फ सत्ता बचाने की लड़ाई के रूप में नहीं लड़ रही. ​ बल्कि अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है. इसलिए प्रचार में ऐसे चेहरों को उतारा गया है जो आक्रामक और संगठनात्मक रूप से प्रभावी हैं. ये घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरम हो रहा है.  सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस का यह कदम शुरुआती बढ़त लेने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. पहले चरण के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर पार्टी ने अपने कैडर को सक्रिय होने का संकेत दे दिया है.  

लखीमपुर खीर,भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने जारी की पदाधिकारियों की सूची, महिलाओं और युवाओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

 लखीमपुर यूपी पंचायत चुनाव से पहले लखीमपुर खीरी जिले में भाजपा ने नई टीम की घोषणा कर दी है। भाजपा जिलाध्यक्ष अरविन्द गुप्ता ने 33 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी की लिस्ट जारी की है। इसमें कई नए चेहरों को भी मौका दिया गया है तो कुछ पुराने चेहरों को पदाधिकारी बनाया गया है। जिसमें जिला कार्यकारिणी में आठ उपाध्यक्ष, तीन जिला महामंत्री, आठ जिला मंत्री सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। जिला कार्यकारिणी में इस बार चार महिलाओं को भी शामिल किया गया है। हालांकि जिला कार्यकारिणी में कई विधानसभा क्षेत्र के लोगों को जगह नहीं मिली है। भाजपा की नई कार्यकारिणी में संतोष कुमारी, किरण अग्रवाल, रामजी मौर्य, आशू मिश्रा, संजय मिश्रा, जितेन्द्र साहनी और विनोद लोधी को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है जबकि एक पद रिक्त है। इसके अलावा अनुराग मिश्रा, राजेश सिंह, मनोज वर्मा को जिला महामंत्री बनाया गया है। जिला मंत्री राकेश अर्कवंशी, रश्मि गुप्ता, राम भरोसे वर्मा, संगीता पुरी, शरद मिश्रा, अमित सिंह, गणेश शंकर गौतम और एक पद रिक्त है। वही सुदीप निगम को जिला कोषाध्यक्ष, संजय गुप्ता व सुनील दीक्षित को जिला सह कोषाध्यक्ष बनाया गया। रमेश चंद मिश्रा को जिला मीडिया प्रभारी उनके सहयोगी के रूप में अंकित अवस्थी, राजीव मिश्रा व हर्ष गुप्ता को जिला मीडिया सहप्रभारी बनाया गया है। अभिजात मिश्रा को जिला कार्यालय मंत्री, सौरभ त्रिवेदी को जिला कार्यालय सहमंत्री, जिला सोशल मीडिया संयोजक निष्कर्ष मिश्रा बनाए गए हैं। ऋषभ पांडे और अभिनव रावड़ा को सहसंयोजक बनाया गया है। वहीं जिला आईटी संयोजक शौर्य सक्सेना और सहसंयोजक अमित मिश्रा बनाए गए हैं। भाजपा की नई कार्यकारिणी में कई नए चेहरों को तरजीह दी गई है वहीं कई पुराने चेहरे भी कार्यकारिणी में शामिल है।

संजू सैमसन के बचाव में उतरे स्टीफन फ्लेमिंग, बोले- ‘दो पारियों से किसी खिलाड़ी को जज करना गलत’

बेंंगलुरु चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के हेड कोच स्टीफन फ्लेम‍िंग ने टीम के स्टार बल्लेबाज संजू सैमसन का खुलकर बचाव किया है. संजू ने आईपीएल (Indian Premier League) 2026 में अब तक उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया है. T20 वर्ल्ड कप 2026 में लगातार तीन अर्धशतक जड़ने वाले सैमसन आईपीएल में अपनी लय बरकरार नहीं रख पाए हैं. CSK के लिए डेब्यू सीजन खेल रहे सैमसन ने शुरुआती दो मैचों में सिर्फ 6 और 7 रन बनाए हैं, जिसके बाद उनकी फॉर्म पर सवाल उठने लगे थे. हालांकि, फ्लेमिंग ने इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा; वह हर मैच में रन नहीं बना सकता. यह T20 क्रिकेट है. पंजाब के ख‍िलाफ  वह एक एज देकर आउट हुआ. लेकिन वह अच्छी फॉर्म में है, अभ्यास भी शानदार कर रहा है. जब वह चल पड़ता है, तो मैच विनर साबित होता है. दो पारियों से किसी खिलाड़ी को जज नहीं किया जा सकता. सैमसन कैसे हुए आउट? सैमसन की शुरुआत अच्छी नहीं रही. अपने पूर्व टीम राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में वह बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नांद्रे बर्गर की गेंद पर बोल्ड हो गए. इसके बाद पंजाब के खिलाफ मैच में उन्होंने जेव‍ियर बार्टलेट की गेंद पर विकेटकीपर प्रभस‍िमरन को कैच थमा दिया. गायकवाड़ भी फ्लॉप सिर्फ सैमसन ही नहीं, चेन्नई के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़  भी रन बनाने के लिए जूझ रहे हैं. राजस्थान के खिलाफ वह जोफ्रा आर्चर की गेंद पर सिर्फ 6 रन बनाकर आउट हो गए. वहीं पंजाब के खिलाफ 22 गेंदों पर 28 रन बनाने के बाद युजवेंद्र का शिकार बने. आयुष म्हात्रे ने द‍िखाया दम जहां सीनियर बल्लेबाज संघर्ष कर रहे हैं, वहीं युवा आयुष म्हात्रे  ने अपनी छाप छोड़ी है. राजस्थान के खिलाफ गोल्डन डक के बाद उन्होंने पंजाब के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 43 गेंदों में 73 रन ठोके, जिसमें 6 चौके और 5 छक्के शामिल रहे. CSK का अगला मुकाबला RCB से CSK अब 5 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से भिड़ेगी, जिसकी कप्तानी रजत पाटीदार कर रहे हैं. यह मुकाबला बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा. सैमसन का RCB के खिलाफ रिकॉर्ड खास नहीं रहा है. उन्होंने 24 पारियों में 484 रन बनाए हैं, औसत 21.04 और स्ट्राइक रेट 136.33 है. हालांकि उनके नाम तीन अर्धशतक हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 2018 में नाबाद 92 रन रहा था. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सैमसन इस अहम मुकाबले में अपनी फॉर्म में वापसी कर पाते हैं या नहीं.

वार्ड क्र. 38 लालघाट चेकपोस्ट के नागरिकों को मिली सर्वसुविधायुक्त उद्यान की सौगात

रायपुर प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने रजत जयंती उद्यान को जनसेवा के लिए समर्पित किया। नगर पालिक निगम कोरबा के वार्ड क्र. 38 लालघाट चेकपास्ट बस्ती के रहवासियों को आज एक सर्वसुविधायुक्त उद्यान की सौगात प्राप्त हुई है। इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत, मेयर इन काउंसिल सदस्य हितानंद अग्रवाल, पार्षद नरेन्द्र देवांगन, पार्षद चेतन सिंह मैत्री, सत्येन्द्र दुबे, मुकुंद सिंह कंवर, मंगल बंदे सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण व काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बालको जोनांतर्गत वार्ड क्र. 38 लालघाट के चेकपोस्ट बस्ती मुख्य मार्ग में 21 लाख 50 हजार रूपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त उद्यान का निर्माण कार्य कराया गया है, छत्तीसगढ़ गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2025 से मनाये जा रहे रजत जयंती समारोह के तहत उक्त उद्यान का नामकरण रजत जयंती उद्यान किया गया है।  इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुये प्रदेश के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी जी ने 25 वर्ष पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था। राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस उद्यान का नाम भी रजत जयंती उद्यान रखा गया, मुझे खुशी है कि आज यह सर्वसुविधायुक्त उद्यान जनताजनार्दन की सेवा हेतु समर्पित किया गया है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ को हमारी सरकार ने ही बनाया था और अब हमारी सरकार ही छत्तीसगढ़ को संवार रही है। 15 वर्षाे तक डॉ. रमन सिंह जी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तथा प्रदेश का ऐतिहासिक रूप से विकास किया, अब उन्हीं की तर्ज पर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की अगुवाई में प्रदेश सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है, यह हमारा सौभाग्य है कि जनताजनार्दन के आशीर्वाद से देश-प्रदेश व कोरबा मे ट्रिपल इंजन की सरकार चल रही है तथा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार द्वारा दर्जनों जनकल्याणकारी योजनायें संचालित कर गरीब, मजदूर, किसान, युवा, महिला सहित समाज के सभी वर्गाे के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा रहा है।  इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बनाये गये रजत जयंती उद्यान की यह सौगात आज लालघाट चेकपोस्ट बस्ती के नागरिक बंधुओं को प्राप्त हुई है। जिसके लिये मैं उन्हें हृदय से  बधाई देती हूॅं। उन्होने कहा कि उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में कोरबा नगर निगम क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है, आमजनता की समस्याएं प्राथमिकता के साथ दूर की जा रही है, विगत 01 वर्ष के दौरान नगर निगम केारबा ने अनेक उपलब्धियॉं अर्जित की है, बर्षाे की समस्यायें दूर की गई है।   

सेवा ही साधना: नर्मदा तट पर जागृत हुआ जनचेतना का दीप”

भोपाल बुदनी की पावन धरा पर स्थित गुंजारी नर्मदा संगम घाट आज पुनः उस दिव्य अनुभूति का साक्षी बना, जहां श्रद्धा और सेवा एकाकार होकर जनचेतना का नया इतिहास रचती दिखाई दी। मां नर्मदा की शांत, कल-कल बहती धारा में जब जनप्रतिनिधि, संत और आमजन एक साथ श्रमदान में जुटे, तो वह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जागरण का सजीव प्रतीक बन गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रमदान कर यह स्पष्ट किया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपने आचरण से प्रेरणा देता है। नर्मदा परिक्रमा के तपस्वी, पूज्य दादागुरु जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। चार बार नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर चुके और केवल नर्मदा जल का सेवन करने वाले संत का संगम पर आगमन मानो स्वयं मां नर्मदा का आशीर्वाद प्रतीत हुआ। दादागुरु जी महाराज ने संगम के समग्र विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे केवल एक भौतिक स्थल नहीं, बल्कि साधना, आत्मशुद्धि और आंतरिक जागरण का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला हैं, जिनकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का धर्म है। उन्होंने “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार, मंत्री  पटेल एवं जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से इस प्राचीन धरोहर को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जो वर्षों से उपेक्षित रही थी। आज उसी प्राचीन घाट पर जिस प्रकार स्वच्छता और विकास के कार्य गति पकड़ रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है और अन्य स्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। मंत्री  पटेल ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का दर्पण है। उन्होंने स्वच्छता को अभियान से आगे बढ़ाकर जीवन का संस्कार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा, तभी स्थायी परिवर्तन संभव हो सकेगा। उन्होंने संगम स्थल पर चल रहे स्वच्छता एवं संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए, जिससे इस पावन स्थल का विकास निरंतर और सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ता रहे। गुंजारी नर्मदा संगम घाट पर आज का यह आयोजन प्रशासन, आध्यात्म और जनसहभागिता का अद्भुत संगम बन गया। श्रमदान करते हाथ, संतों का आशीर्वाद और जनसमूह की सक्रिय भागीदारी ने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि जब सेवा को साधना का रूप मिलता है, तब परिवर्तन अवश्यंभावी हो जाता है। माँ नर्मदा की पावन धारा के साक्ष्य में लिया गया यह संकल्प केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संस्कारित धरोहर का वचन है। यह आयोजन हमें यह भी स्मरण कराता है कि प्रकृति की सेवा ही सच्ची पूजा है और जन सहभागिता ही उसका सबसे प्रभावी मार्ग है।