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नक्सलियों की पुरानी ‘जन-अदालत’ वाली जगह का मंत्री ने किया निरीक्षण, बोले- विकास से ही खत्म होगा उग्रवाद

बूढ़ा पहाड़  झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शुक्रवार को उग्रवादियों का बहुचर्चित शरणस्थली बूढ़ा पहाड़ पहुंच गए. उनका यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. वित्त मंत्री दुर्गम रास्तों से होते हुए सड़क मार्ग, पैदल और बाइक के सहारे दोपहर करीब दो बजे बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित रहे इस इलाके में उनका दौरा सरकार की जमीनी सक्रियता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वित्त मंत्री ने बूढ़ा पहाड़ का लिया जायजा बूढ़ा पहाड़ पहुंचने के बाद वित्त मंत्री ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने पिकेट पर तैनात अधिकारियों और जवानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को जाना. साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया दौरे के बाद क्षेत्र में आए बदलावों की समीक्षा की. मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही क्षेत्र में उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो पाया है. इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बीडीओ, सीओ और संबंधित पंचायत के मुखिया बिंको उरांव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अब तक हुए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और ग्रामीणों की जरूरतों के बारे में विस्तृत जानकारी ली. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाय, ताकि आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके. नक्सलियों के जन-अदालत वाले स्थान का किया निरीक्षण दौरे के क्रम में वित्त मंत्री ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां कभी नक्सली नेता जन-अदालत लगाया करते थे. यह निरीक्षण क्षेत्र में बदलते हालात और शांति स्थापना की दिशा में उठाए गये कदमों का प्रतीक माना जा रहा है. स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी. सड़क, अस्पताल और स्कूल बनवाने का आश्वासन वित्त मंत्री ने कुल्ही से बूढ़ा पहाड़ तक सड़क निर्माण, हेसातु में हाई स्कूल की स्थापना और कुल्ही में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने गढ़वा के उपायुक्त को निर्देश दिया कि अगले 10 दिनों के अंदर एक विशेष बैठक आयोजित कर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की जाए और आगे की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए. नियंत्रण में है उग्रवाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि उग्रवाद अभी नियंत्रित स्थिति में है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.ऐसे में बुढ़ा पहाड़ क्षेत्र से सीआरपीएफ कैंप हटाना जल्दबाजी होगा. जब तक ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है. कुल मिलाकर, यह दौरा सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. विकास के बदौलत उग्रवाद होगा खत्म: वित्त मंत्री वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर शुक्रवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. इस दौरान उन्होंने न केवल विकास योजनाओं का जायजा लिया, बल्कि मुख्य धारा से भटके हुए उग्रवादियों को परोक्ष रूप से संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि उग्रवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया गया है. विकास के बदौलत ही उग्रवाद को समूल खत्म किया जा सकता है. इसलिए बूढ़ा पहाड़ के लोगों का विकास हो सके, इसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. केंद्र और राज्य की पुलिस ने उग्रवाद पर नियंत्रण करने में कामयाबी हासिल की है. इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. मानवीय है बूढ़ा पहाड़ का दौरा उन्होंने कहा कि बूढ़ा पहाड़ का यह दौरा राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय है. यहां आने पर उन्हें धरातल पहुंचने वाली योजनाओं के बारे में वास्तविक जानकारी मिली है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बूढ़ा पहाड़ के कुछ समय पहले दौरा करने के बाद ही यहां आने की इच्छा थी. हालांकि, 21 वर्ष पहले वह यहां आ चुके थे. उन्होंने कहा कि यहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तो पहुंचाया गया है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ अभी नहीं मिल सका है. यहां के लोग अभी भी सड़क ,बिजली, शौचालय, हाई स्कूल आदि की आस लगाए बैठे हैं. इसके लिए प्रयास किया जाएगा कि यहां समुचित विकास हो सके. इसके गढ़वा और पलामू डीसी को स्थिति से अवगत कराया जाएगा. मंईयां सम्मान योजना का मिल रहा लाभ उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही पेयजल और स्वच्छता विभाग, आपूर्ति विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के साथ बैठकर बूढ़ा पहाड़ के लिए योजनाओं के पैकेज के लिए समीक्षा करेंगे. यहां एक किलोमीटर तक आरसीसी सड़क बनाया जाना बेहद जरूरी है. यहां विकास की गति को तेज किया जाएगा. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मंईयां सम्मान योजना का लाभ यहां के लोगों को मिला है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके क्रय शक्ति को बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उग्रवाद कभी स्वीकार्य नहीं उन्होंने कहा कि मैं पलामू के छतरपुर इलाके से रहा हूं. इसलिए मैंने उग्रवाद को करीब से देखा है. मैं बूढ़ा पहाड़ से उग्रवादियों को को संदेश देना चाहता हूं कि जो गलत निर्णय लिया है, उसे भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देकर कुछ पैसे की वसूली से आत्मनिर्भर नहीं बना जा सकता है. इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था जरूरी है. इसलिए उग्रवादी विचारधारा को खत्म कर भारतीय लोकतंत्र के मुख्य धारा से जुड़ें.

पटना समेत इन शहरों के यात्रियों के लिए खुशखबरी, ऑनलाइन टिकट और मंथली पास के साथ मिलेंगी हाई-टेक बसें

पटना बिहार में लोगों की यात्रा आसान, तेज और सुरक्षित हो, इसके लिए परिवहन विभाग ने एक और निर्णय लिया है. राज्य में नई 340 एसी यात्री बसें चलाई जायेंगी. इसको लेकर परिवहन विभाग ने योजना बनाई है. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, बसों में सभी सुविधाएं रहेंगी और यह सभी बस इलेक्ट्रिक या सीएनजी की होंगी. जून से पीपीपी मोड में इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस जिले में चलेंगी सबसे ज्यादा बसें परिवहन विभाग ने पटना में सबसे ज्यादा 31 बसों को चलाने का निर्णय लिया है. जबकि बाकी शहरों में वहां की आबादी और एरिया को देखते हुए बसों का परिचालन होगा, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को योजना का लाभ मिल सकें. पीपीपी मोड में बसों का परिचालन फेज वाइज किया जाएगा. पहले फेज में पटना, गया, भागलपुर, राजगीर, नालंदा में परिचालन होगा. उसके बाद धीरे-धीरे बाकी जिलों में परिचालन होगा. दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व पटना नगर निगम की ओर से बसों का परिचालन पहले से हो रहा है, लेकिन उन बसों में भीड़ अधिक होने से यात्रियों को परेशानी होती है. इन बसों को भी दुरुस्त किया जाएगा, ताकि बसों में सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत नहीं हो. खास बात यह भी होगी कि बसों के परिचालन शुरू होते ही इन बसों में दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व की जायेंगी. ऑनलाइन टिकट के साथ मंथली पास की भी सुविधा शहरी इलाकों में परिचालन के लिए मंथली पास बनाने की सुविधा दी जायेगी और ऑनलाइन टिकट काटने की भी लोगों को सुविधा मिलेगी. साथ ही बसों के रूट के हिसाब से नंबर का निर्धारण किया जाएगा, जिसका डिस्पले ठहराव के पास होगा, ताकि यात्रियों को बस पकड़ने में दिक्कत नहीं हो और वह उसी स्टॉप पर रूकें. जहां उस बस का ठहराव होगा.

नियद नेल्लानार योजना का असर: पालनार के ग्रामीणों को अब गांव में ही मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

रायपुर नियद नेल्लानार योजना: बीजापुर के पालनार में स्वास्थ्य क्रांति, 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' से सुदूर वनांचल के ग्रामीणों को मिल रही नई सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए संचालित 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गाँव) योजना अब धरातल पर सार्थक परिणाम दे रही है। जिला बीजापुर के दुर्गम क्षेत्र ग्राम पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के खुलने से 28 जनवरी 2026 से अब तक सैकड़ों ग्रामीणों को उनके घर के समीप ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। रिकॉर्ड ओपीडी और इनडोर सुविधाएं पालनार और आस-पास के गांवों में स्वास्थ्य के प्रति आई इस जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अल्प अवधि में ही कुल 747 मरीजों ने ओपीडी (OPD) सेवाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार 16 मरीजों को भर्ती कर उनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। पहले जिन ग्रामीणों को छोटी बीमारियों के लिए भी मीलों पैदल चलना पड़ता था, उन्हें अब विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क दवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं। मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षित प्रसव और त्वरित सेवाएं संवेदनशील क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस केंद्र में अब तक 5 सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप, नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। साथ ही, क्षेत्र की 15 गर्भवती महिलाओं (ANC) और 18 धात्री माताओं (PNC) की नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया गया है। गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान (NCD स्क्रीनिंग) योजना के तहत गैर-संचारी रोगों (NCD) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पालनार केंद्र में अब तक 250 ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जिसमे 25 मरीज उच्च रक्तचाप (Hypertension) से ग्रसित पाए गए। बारह मरीज मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित मिले। एक ग्रामीण में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण मिलने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र हेतु रेफर किया गया।  पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

राजस्थान के बाद अब MP में सक्रिय: ‘म्याऊं-म्याऊं’ नेटवर्क ने रतलाम और मंदसौर को अपना गढ़ बनाया

रतलाम राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के देवलदी, नौगांव और अखेपुर जैसे क्षेत्रों में कभी एमडी ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था, लेकिन पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों की सख्ती के बाद अब यह नेटवर्क धीरे-धीरे मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में शिफ्ट हो गया है। पिछले तीन-चार वर्षों में लगातार हुई कार्रवाई के बाद तस्करों ने अपना ठिकाना बदल लिया और अब रतलाम, मंदसौर व आसपास के क्षेत्रों में छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए सिंथेटिक ड्रग का निर्माण किया जा रहा है। ड्रग निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क एमडी ड्रग, जिसे महानगरों में ‘म्याऊं-म्याऊं’ के नाम से जाना जाता है, की सबसे ज्यादा खपत मुंबई, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में होने वाली हाई-प्रोफाइल पार्टियों में होती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक रतलाम में ढाई महीने के भीतर दूसरी एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि राजस्थान से फरार आरोपित अब मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में शरण लेकर यहीं से ड्रग निर्माण और सप्लाई का नेटवर्क चला रहे हैं। रतलाम अफीम तस्करी के लिए कुख्यात तस्कर अब भी अफीम तस्करी के पुराने बेल्ट और स्थापित रूट का ही उपयोग एमडी ड्रग के लिए कर रहे हैं। मंदसौर-नीमच-रतलाम क्षेत्र पहले से ही अफीम तस्करी के लिए कुख्यात रहा है, ऐसे में यहां पहले से मौजूद नेटवर्क और संपर्कों का इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग के कारोबार में किया जा रहा है। छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए होती है एमडी ड्रग तैयार हाल ही में भोपाल, रतलाम और मंदसौर में पकड़ी गई फैक्ट्रियों की कड़ियां प्रतापगढ़ के देवलदी क्षेत्र से जुड़ी मिली हैं। इससे साफ है कि नेटवर्क का संचालन अब भी राजस्थान से हो रहा है, जबकि निर्माण इकाइयां मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में अब छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए एमडी ड्रग तैयार की जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई कर रही हैं। भोपाल ड्रग फैक्ट्री से खुला राजस्थान का नेटवर्क 6 अक्टूबर 2024 को भोपाल के बगरोदा में एनसीबी व गुजरात एटीएस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। आरोपित सान्याल बाने और अमित चतुर्वेदी गिरफ्तार हुए। पूछताछ में मंदसौर निवासी हरीश आंजना का नाम सामने आया, जिसे बाद में पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि नेटवर्क का सरगना प्रतापगढ़ के देवलदी निवासी शोएब लाला है, जो राजस्थान से संचालन कर एमपी व गुजरात में सप्लाई कर रहा था। आरोपित के ससुराल में चल रही थी फैक्ट्री 16 जनवरी 2026 को रतलाम के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। 10 से अधिक आरोपित गिरफ्तार हुए। दिलावर खान पठान के मकान से 10.50 किलो एमडी ड्रग, 300 लीटर मेफेड्रोन कैमिकल, 2 बंदूकें व 91 कारतूस जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि देवलदी निवासी उसका दामाद याकूब खान, जो फरार है, ड्रग बनाने में माहिर था और उसी ने ससुराल को फैक्ट्री में बदला। ड्रग्स का डाक्टर जमशेद बना ट्रेनर 31 मार्च 2026 को रतलाम के बोरखेड़ा में पोल्ट्री फार्म पर चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई। देवलदी निवासी जमशेद लाला उर्फ डाक्टर सहित चार आरोपित गिरफ्तार हुए। मौके से 200 ग्राम एमडी ड्रग, भारी मात्रा में केमिकल व उपकरण जब्त हुए। जांच में सामने आया कि जमशेद को ड्रग बनाने के लिए हायर किया गया था। उसने 7-8 वर्षों में 250 किलो एमडी ड्रग बनाने और कई लोगों को ट्रेनिंग देने की बात कबूली। एमडी ड्रग फैक्ट्री और तस्करों पर रेंज में कार्रवाई जारी रहेगी। राजस्थान के प्रतापगढ़ और झालावाड़ पुलिस के साथ समन्वय बैठक कर सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई के बारे में विमर्श किया जाएगा।- निमिष अग्रवाल, डीआइजी, रतलाम रेंज।  

स्कूल में फोन पर बैन बढ़ा, बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास पर असर, दुनिया भर में गहरा प्रभाव

नई दिल्ली आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका असर अब चिंताजनक होता जा रहा है। लगातार बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के कारण बच्चों का पढ़ाई में ध्यान कम हो रहा है और उनकी मेंटल हेल्थ भी प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब दुनियाभर के स्कूलों में फोन पर पाबंदी लगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। 58% देशों में स्कूलों ने लगाया फोन बैन यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के करीब 58% देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर बैन लगाया जा चुका है। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है, 2023 में सिर्फ 24% देशों में बैन था, 2025 की शुरुआत में 40% और अब 2026 में 58% तक पहुंच गया यह साफ दिखाता है कि स्कूल अब बच्चों की पढ़ाई और व्यवहार को लेकर ज्यादा सख्त हो रहे हैं। स्कूलों में फोन बैन की बड़ी वजह Phone Ban करने की सबसे बड़ी वजह है बच्चों का ध्यान भटकना। क्लास के दौरान सोशल मीडिया, गेम्स और वीडियो देखने की आदत पढ़ाई में बाधा बन रही है। इसके अलावा साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और गलत कंटेंट से भी बच्चों को बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सेंट्रल और साउथ एशिया के देश इस मामले में सबसे आगे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में अभी कम सख्ती देखने को मिलती है। फोन बैन का बच्चों पर असर रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां फोन पर सख्ती लागू की गई, वहां स्कूल टाइम में मोबाइल इस्तेमाल 37% से घटकर सिर्फ 4% रह गया। टीचर्स ने भी बदलाव महसूस किया:     बच्चे आपस में ज्यादा बातचीत करने लगे     आउटडोर एक्टिविटी बढ़ी     किताबें पढ़ने में रुचि बढ़ी हालांकि, यह बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं है। करीब एक तिहाई टीचर्स ने इसे पॉजिटिव माना, जबकि 64% का कहना है कि ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सोशल मीडिया से बढ़ रहा खतरा बच्चों पर Phone Ban का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया का बढ़ता असर भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खासकर लड़कियों को ऑनलाइन हैरेसमेंट और सोशल प्रेशर का सामना करना पड़ता है। एक रिपोर्ट में सामने आया कि इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने के बाद 32% किशोर लड़कियों को अपने शरीर को लेकर खराब महसूस हुआ। वहीं, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म हर 39 सेकंड में बॉडी इमेज से जुड़ा कंटेंट और कुछ ही मिनटों में ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ी चीजें दिखाने लगते हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ध्यान दें स्कूलों में फोन बैन का फैसला सिर्फ अनुशासन के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लिया जा रहा है। अगर सही समय पर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर और भी गहरा पड़ सकता है।

किटू गिडवानी का टीवी इंडस्ट्री पर तीखा प्रहार,’अब सब धंधा बन गया है, सास-बहू के ड्रामे से मुझे नफरत है’

टीवी की बेहतरीन एक्ट्रेसेस में से एक किटू गिडवानी ने उस समय को याद किया जब टीवी को सिर्फ देखा ही नहीं जाता था, बल्कि उसे महसूस भी किया जाता था. उनकी यादें एक ऐसे दौर की झलक दिखाती हैं जब महिलाओं पर आधारित कहानियां न सिर्फ आम थीं, बल्कि कहानी कहने की रीढ़ थीं. किटू ने उस दौर के बारे में बात की जब टीवी पर महिलाएं असल समस्याओं को सुलझाती थीं. 'ओका बोका टीवी' के साथ बातचीत में किटू ने कहा, 'भारतीय महिला किरदारों की बात करें तो, हमें टीवी पर अब वैसी मजबूत महिलाएं देखने को नहीं मिलतीं जैसी पहले 'रजनी', 'शांति' या 'स्वाभिमान' में मेरा किरदार 'स्वेतलाना' थीं… मुझे अब वैसी महिलाएं नहीं दिखतीं. हमें अब वह मुख्य महिला किरदार नहीं दिखता, जो पूरे सीरियल को अपनी धुरी पर चलाए.' किटू ने कहा, और आज के दौर में महिला किरदारों को लिखने के तरीके में आए बदलाव की ओर इशारा किया.' किटू ने अपने शुरुआती दिनों को याद कर कहा कि उन दिनों, हम सब अपनी पहचान तलाश रहे थे, और महिलाएं भी अपनी पहचान ढूंढ़ रही थीं. काम, शादी, आजादी और परिवार में भूमिकाओं से जुड़े सवालों पर उसी समय चर्चा हो रही थी, और टेलीविजन ने उसी अनिश्चितता को दिखाया. यह बहुत अलग-अलग तरह की कहानियों का दौर भी था. अब सब धंधा बन गया है जब किटू से आज के टेलीविजन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपनी बात बेझिझक कही. 'आज यह एक बिल्कुल अलग दुनिया है, और मैं अब इसमें काम नहीं करती क्योंकि इसकी क्वालिटी बहुत खराब हो गई है. लेकिन हर कोई इसे पसंद करता है. भारतीय मानसिकता में कुछ ऐसा है जो सास और बहू के बीच की इस बहुत ही खराब स्थिति को पसंद करता है.. मुझे इससे नफरत है. अब टेलीविजन को क्या हो गया है… अब सब धंधा बन गया है. किसी ने मुझसे कहा था, बस आंखें बंद करके काम करो, यह सब बस धंधा है.' किटू गिडवानी का करियर बता दें कि एक्ट्रेस किटू गिडवानी को पहली बड़ी पहचान 'तृष्णा' (1985) से मिली, जिसे आम तौर पर उनकी पहली बड़ी टेलीविजन भूमिका माना जाता है, जिसमें उन्होंने एक लीड रोल निभाया था. टेलीविजन के अलावा, किटू ने प्रियंका चोपड़ा की 'फैशन', किरण राव की 'धोबी घाट', आलिया भट्ट की 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर', आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर की 'ओके जानू' जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं. हाल के कुछ सालों में, किटू गिडवानी ने टेलीविजन, फिल्मों और OTT पर बहुत सोच-समझकर काम किया है. उन्होंने ऐसे रोल चुने हैं, जिनमें सिर्फ शोहरत नहीं, बल्कि गहराई हो. टीवी पर उनकी मौजूदगी 'हम रहें न रहें हम' (2023) में देखने को मिली, जिसके जरिए लगभग दो दशकों के बाद उन्होंने टीवी पर वापसी की.   उन्हें आखिरी बार 2025 में आई फिल्म 'मैडम ड्राइवर' में देखा गया था.  

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल सफर होगा आसान, दानापुर-सोनपुर मंडल को बड़ी सौगात

 पटना मोकामा में गंगा नदी पर बन रहे नए रेल पुल का इंतजार अब खत्म होने वाला है. रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, यह पुल लगभग तैयार है और जून के महीने में इस पर ट्रेनें दौड़ने लगेंगी. शुक्रवार को पटना के पाटलिपुत्र रेल परिसर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मध्य रेल के जीएम छत्रसाल सिंह ने बताया कि यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क को एक नई मजबूती देगा. आना-जाना हो जाएगा बहुत आसान अभी तक पुराने राजेंद्र पुल पर ट्रेनों का बहुत ज्यादा लोड रहता था, जिससे गाड़ियां अक्सर लेट हो जाती थीं. नया पुल शुरू होने से दानापुर और सोनपुर रेल मंडलों के बीच ट्रेनों का आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि झाझा और पटना की तरफ रेल ओवर रेल (ROR) बनाया गया है. इसका फायदा यह होगा कि मेन लाइन की गाड़ियों को रोके बिना पैसेंजर और मालगाड़ियां आराम से गुजर सकेंगी. चौथी रेल लाइन बिछाने की भी तैयारी जीएम ने इसे भविष्य के लिए गेम चेंजर बताया है. इसके अलावा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन से झाझा के बीच 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की भी तैयारी है. इसी योजना के तहत कोइलवर में सोन नदी पर एक नया रेल पुल बनाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है. काम को तेजी से पूरा करने के लिए पूरे रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों जैसे दानापुर-फतुहा और बख्तियारपुर-किऊल में बांटा गया है. आने वाले समय में बिहार में रेल सफर न सिर्फ तेज होगा, बल्कि यात्रियों को जाम और वेटिंग से भी निजात मिलेगी.

राज्यपाल रमेन डेका ने बेहराखार में पीएम जनमन अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया अवलोकन

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका ने बेहराखार में पीएम जनमन अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया अवलोकन राज्यपाल  रमेन डेका ने आज  जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम बेहराखार में पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने यूनिट में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मोबाइल मेडिकल यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर, सीवीसी मशीन, आवश्यक दवाइयों सहित विभिन्न उपचार उपकरण उपलब्ध हैं। साथ ही इसमें डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी तैनात रहती है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है।  अवलोकन के उपरांत राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया। साथ ही अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन समुदायों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। इस अवसर पर पद्म  जागेश्वर यादव, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

भवन हादसा अनूपपुर: दो मृत, कई फंसे, घायल को तुरंत अस्पताल भेजा गया

अनूपपुर कोतमा नगर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित बस स्टैंड के पास शनिवार शाम एक तीन मंजिला लाज इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, इस घटना में कई लोग मलबे में दब गए जबकि दो की जान चली गई है। इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मलबे में दस से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। शहर के नागरिकों और बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा भेजा गया। वहां उनका उपचार जारी है। घटनास्थल पर एक क्रेन और चार जेसीबी से मलबे को हटाने का कार्य किया जा रहा है। दो पुरुष व्यक्तियों की मौत की खबर सामने आई है। बताया गया संजय अग्रवाल की लाज थी जो भर भराकर गिर गई इसके पीछे की वजह यह थी कि बाजू में एक कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा था जहां 10 फीट गहरा नींव खोद दिया गया था जिसके कारण बड़े की भवन कमजोर पड़ गई और गिर गई।  

पंजाब में BJP कार्यालय धमाका: अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश, 5 आरोपी पकड़े गए

पंजाब पंजाब के चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित में भाजपा मुख्यालय में हुए ब्लास्ट केस को पुलिस ने सुलझा लिया है। पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस शाखा ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में इस घटना में शामिल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हमले में शामिल दो मुख्य हमलावरों की पहचान कर ली गई है। इनके कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड, .30 बोर जिगाना पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने शनिवार को चंडीगढ़ में बताया कि प्रारंभिक जांच में इस पूरे मॉड्यूल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। यह नेटवर्क विदेश में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में पाई गई है। पुलिस ने बताया कि इसमें कई अलग-अलग मॉड्यूल और उप-मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के नवांशहर के गांव माजरी निवासी बलविंदर लाल उर्फ शामी, गांव भरापुर का जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, गांव सुजावलपुर निवासी चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, शिमला के गांव थाना निवासी रूबल चौहान और धूरी निवासी मंदीप उर्फ अभिजोत शर्मा ( संगरूर) के रूप में हुई है। संगठित नेटवर्क ने अंजाम दिया धमाका डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले सब-मॉड्यूल और कटआउट शामिल थे। इनका काम हथियारों की सप्लाई, ट्रांसपोर्ट और हमले को अंजाम देने तक फैला हुआ था। उन्होंने बताया कि हमले में शामिल दो मुख्य आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। एसएसओसी (स्टेट स्पेशल ऑपरेशन्स सेल) के एआईजी दीपक पारेख ने बताया कि जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों ने हथियारों और ग्रेनेड की एक खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह खेप कई हाथों से गुजरते हुए आखिरकार हमले को अंजाम देने वाले आरोपितों तक पहुंचाई गई। इस कार्रवाई ने न केवल चंडीगढ़ हमले की गुत्थी सुलझाई है, बल्कि आने वाले समय में होने वाली कई संभावित आतंकी वारदातों को भी समय रहते नाकाम कर दिया है। पंजाब पुलिस ने दोहराया है कि वे राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली किसी भी विदेशी या स्थानीय ताकत से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाई बुधवार शाम हुए विस्फोट से चंडीगढ़ में अफरा-तफरी मच गई थी। बीजेपी दफ्तर के बाहर हुए धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान आतंकी ने ली थी। इस धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान समर्थक सुखजिंदर सिंह बब्बर ने ली थी। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर बब्बर ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। उसने यह भी धमकी दी है कि पंजाब की धरती खालसा की धरती है, पंजाब में खालिस्तान बनेगा। इस हमले के बाद राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंजाब भाजपा मुख्यालय, जहां ये ब्लास्ट हुआ था, वहां सीआरपीएफ तैनात कर दी गई है। वहीं, पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अन्य पदाधिकारियों व नेताओं की सुरक्षा भी रिव्यू की जा रही है।