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नाराज कर्मचारियों की हड़ताल, कुरुक्षेत्र अस्पताल में कर्चमारी के चलते इलाज प्रभावित

कुरुक्षेत्र. लोक नायक जय प्रकाश जिला नागरिक अस्पताल (एलएनजेपी) के पुरुष वार्ड में बीती रात बड़ा विवाद खड़ा हो गया। अलसुबह करीब 3 बजे कौशल रोजगार निगम के माध्यम से तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामेश्वर पर कुछ युवकों ने हमला कर दिया। घटना के बाद अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में रोष फैल गया और उन्होंने सुबह हड़ताल का एलान कर दिया। हड़ताल के कारण अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हैं। सुबह 10 बजे तक ओपीडी शुरू नहीं हो सकी और न ही मरीजों की पर्ची काटी गई। स्थिति यह है कि सुबह 8 बजे से लाइन में खड़े मरीज परेशान हो रहे हैं। पर्ची काउंटर बंद रहने के कारण इलाज ठप है। इस दौरान एक महिला कर्मचारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पीएमओ ने तीन बार लिखकर भेजा कि यहां चौकी बनाओ, तो क्यों नहीं बनाते। सिक्योरिटी के लिए दो-तीन बार पुलिस को लिखा गया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई है। घटना की सूचना मिलते ही प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. सारा अग्रवाल मौके पर पहुंचीं और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। वहीं, केयूके थाना प्रभारी विशाल कुमार भी अस्पताल पहुंचे और आरोपितों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। फिलहाल कर्मचारी आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

पावरकॉम की नई योजना: पंजाब के परिवारों को डायरेक्ट बिजली कनेक्शन की सुविधा

जीरकपुर/चंडीगढ़. अधूरी कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित जीवन जी रहे हजारों परिवारों के लिए राहत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पावरकॉम ने राज्य स्तर पर सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। 30 मार्च 2026 को जारी इन आदेशों में पूरे पंजाब के बिजली अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, उन मामलों की पहचान करके संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटीज को आधिकारिक नोटिस भेजे जाएं और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल हो जाता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। यह आदेश पावरकॉम के चीफ इंजीनियर (कमर्शियल) कार्यालय द्वारा जारी कर पूरे राज्य के इंजीनियर-इन-चीफ और चीफ इंजीनियर (डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) तक भेजे गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह कदम किसी एक शहर तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में लागू होगा। इस कार्रवाई का आधार पीएसईआरसी (PSERC) द्वारा हाल ही में किए गए संशोधन हैं, जिनके तहत सप्लाई कोड-2024 के अनुसार अधूरी कॉलोनियों और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के मामलों में सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, यदि कोई बिल्डर या प्रमोटर आवश्यक एनओसी प्राप्त नहीं करता, बैंक गारंटी जमा नहीं करता या कॉलोनी में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचा जैसे ट्रांसफॉर्मर, केबल और वितरण प्रणाली पूरी नहीं करता, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। पावरकॉम ने आदेश दिए हैं कि ऐसे मामलों को दस्तावेज़ी रूप से चिन्हित कर पुड्डा, गमाडा, पीडीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग जैसे विभागों को नोटिस भेजे जाएं। यह प्रक्रिया कॉलोनी को खाली घोषित करने के लिए जरूरी शर्त होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित सरकारी प्राधिकरण तीन महीनों के भीतर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो पावरकॉम खुद अदालत का रुख करेगा और आवश्यक आदेश लेकर आगे कार्रवाई करेगा। इससे पहली बार बिजली विभाग सिर्फ सप्लाई एजेंसी से आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाता नजर आएगा। सीधे बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे – सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल होता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे, भले ही बिल्डर ने प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया हो। हालांकि, इसके लिए कॉलोनी का ऑफिशियली खाली घोषित होना ज़रूरी होगा और इस बारे में नॉर्म्स तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद लागू किया जाएगा। अब बिल्डर की लापरवाही की वजह से लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में अधूरे बिजली सिस्टम को पूरा करने का अनुमानित खर्च पावरकॉम तैयार करके संबंधित डिपार्टमेंट्स के सामने रखेगा। सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी कुछ खर्च वसूल यह भी इशारा किया गया है कि इस प्रोसेस में कुछ खर्च ऐसे प्रोजेक्ट्स में रहने वालों से सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी वसूला जा सकता है, जिससे यह साफ है कि राहत के साथ-साथ लोगों पर कुछ फाइनेंशियल जिम्मेदारी भी आ सकती है। हाल के बिजली संकट और ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में अधूरी कॉलोनियों के मामले में इस ऑर्डर को काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही साफ है कि डायरेक्ट बिजली कनेक्शन का रास्ता तभी खुलेगा जब नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस प्रोसेस करने और छोड़ने की घोषणा करने तक का पूरा प्रोसेस कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से पूरा हो जाएगा। इस पूरे ऑर्डर का मैसेज यह है कि अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो बिजली सप्लाई की स्थिति स्थिर नहीं रहेगी। तय प्रोसेस के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को एक्टिवेट करके, आखिरकार निवासियों को बिजली देने का रास्ता तैयार किया जा रहा है, हालांकि सब प्रोसीजरली और नियमों के दायरे में ही लागू किया जाएगा। विभाग को ऐसे आदेश क्यों जारी करने पड़े पंजाब में कई कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने बिजली का बुनियादी ढांचा पूरा किए बिना ही लोगों को बसाया, जिससे निवासी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह गए। कई बड़े प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने सिंगल पॉइंट मीटर लेकर निवासियों से प्रीपेड मीटर के जरिए पैसे वसूले, लेकिन वह राशि पावरकॉम को जमा नहीं करवाई। इसके कारण जब बिल्डरों पर लाखों रुपये बकाया हो गए तो बिजली काट दी गई, और पूरा भुगतान करने के बावजूद निवासी अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के निर्देशों और नियमों के तहत यह सख्त आदेश जारी किए गए हैं।

गिरते जलस्तर को रोकने के लिए बिलासपुर में नलकूप निर्माण पर रोक

बिलासपुर. जिले में गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नए नलकूप एवं ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में नए नलकूप/ट्यूबवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जिसमें बताया गया है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने तथा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। आदेश के तहत बिलासपुर जिले के विकासखंड बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था नए नलकूप खनन नहीं कर सकेगी। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम एवं नगर पंचायतों जैसी शासकीय एजेंसियों को केवल पेयजल आपूर्ति हेतु आवश्यकता अनुसार नलकूप खनन की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन संबंधित कार्यों की जानकारी अधिकृत अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को अधिकृत किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अनुमति देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

बड़े तालाब के पास रसूखदारों के 347 अवैध बंगलों पर शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई

 भोपाल भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील शहर की पहचान है लेकिन भीड़ भाड़ और अवैध निर्माण ने यहां घूमने आने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. क्योंकि बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है. 6 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 21 अप्रैल तक चलेगा. कुल 15 दिनों तक चलने वाली इस कार्रवाई में जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं।  पहले दिन भदभदा में चला ‘पीला पंजा’अभियान के पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. यहां 9 दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और पीछे नहीं हटेगी।  भोज वेटलैंड रूल्स के बाद सख्ती प्रशासन का कहना है कि 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसी नियम के तहत सभी निर्माण हटाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई तालाब की पारिस्थितिकी, जलस्तर और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।  राजा भोज ने कराया था झील का निर्माण भोपाल की बड़ी झील को भोजताल या अपर लेक भी कहा जाता है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा निर्मित भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है. यह आज भोपाल शहर की पहचान भी है. यह शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और 2002 में इसे 'रामसर साइट' का दर्जा मिला. यहां बोट क्लब, खूबसूरत व्यू और वॉटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।  ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा  

जिंदल स्टील ने कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से रचा इतिहास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की दिशा दिखाई

जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई  रायपुर  जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से 'स्वदेशी' कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।  जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।  स्टील जगत को नई दिशा दिखाते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस से ब्लास्ट फर्नेस संचालित कर आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता घटाई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा उल्लेखनीय स्तर तक कम करने में भी कामयाबी हासिल की है। स्टील उत्पादन की वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग निश्चित रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।  गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों और प्रोत्साहनों में राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन शामिल है, इसलिए उम्मीद है कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने में तेजी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए देश में हो रहे इस प्रयास को समर्थन मिलेगा।  इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर ने कहा: "स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस (सिनगैस) विदेशों से आने वाले महंगे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकती है। भारत को अपनी तरक्की और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अपने पास मौजूद कोयले के विशाल भंडार का सही उपयोग करना चाहिए। अगर हम कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन नियंत्रण की तकनीक (CCUS) का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर खरा उतरकर हमारा स्टील, विदेशी बाजारों में और भी मजबूत बनेगा।" स्वदेशी कोयले का उपयोग और उन्नत स्वच्छ कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील, सस्टेनेबल और सस्ता स्टील उपलब्ध कराते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है।  जिन्दल स्टील के बारे में  जिन्दल स्टील भारत के शीर्ष स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी कार्यक्षमता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कंपनी का 'माइन-टू-मेटल' मॉडल इसे खास बनाता है, जहां खदानों से लेकर तैयार स्टील तक, सारा काम अपने संसाधनों और आधुनिक तकनीक से होता है। 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश के साथ कंपनी के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट हैं। जिन्दल स्टील आज  न केवल भारत में, बल्कि अफ्रीका तक अपने मजबूत नेटवर्क के जरिये देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  

जल्द खत्म होगा खरमास, अप्रैल में शुरू होगा विवाह मुहूर्त का सीजन – जानें तारीखें

हिंदू पंचांग के मुताबिक अप्रैल 2026 का महीना शुभ कार्यों के लिहाज से खास रहने वाला है. महीने की शुरुआत में भले ही मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी, लेकिन जैसे ही यह समय खत्म होगा, शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों की रौनक बढ़ने लगेगी. जो लोग विवाह की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय अच्छे अवसर लेकर आएगा. दरअसल, अप्रैल के मध्य तक सूर्य मीन राशि में रहते हैं, जिसे खरमास कहा जाता है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. लेकिन 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही यह अवधि समाप्त हो जाती है. इसके बाद 15 अप्रैल से सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. तो आइए जानते हैं कि अप्रैल को कब से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे।  अप्रैल 2026 विवाह मुहूर्त की पूरी लिस्ट अप्रैल 2026 में शादी के लिए कई अच्छे मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें अलग-अलग तारीखों पर शुभ नक्षत्र और समय का खास संयोग देखने को मिलेगा. अगर आप इस महीने विवाह की योजना बना रहे हैं, तो ये तारीखें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।  15 अप्रैल, बुधवार को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में दोपहर 3:22 बजे से रात 10:31 बजे तक का समय बेहद शुभ और सफल वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए अच्छा माना जा रहा है।  20 अप्रैल, सोमवार को रोहिणी नक्षत्र में सुबह 4:35 बजे से 7:28 बजे तक विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त है।  21 अप्रैल, मंगलवार को मृगशिरा नक्षत्र में सुबह 4:15 बजे से 5:52 बजे तक का समय अच्छा माना गया है।  25 अप्रैल, शनिवार की बात करें तो इस दिन भी विवाह करना शुभ रहेगा, क्योंकि उस समय संधि काल का प्रभाव कम रहेगा।  26 अप्रैल, रविवार को मघा नक्षत्र में सुबह 5:47 बजे से रात 8:27 बजे तक लंबा और अनुकूल समय है।  27 अप्रैल, सोमवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रात 9:18 बजे से 9:35 बजे तक का छोटा लेकिन शुभ मुहूर्त बन रहा है, जो दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।  28 अप्रैल, मंगलवार को भी पूरे दिन विवाह के लिए अच्छा समय उपलब्ध रहेगा और नक्षत्र का प्रभाव सकारात्मक रहेगा।  महीने के अंत में 29 अप्रैल, बुधवार को हस्त नक्षत्र के दौरान सुबह 5:59 बजे से शाम 7:52 बजे तक का समय शादी के लिए काफी शुभ माना गया है।  अबूझ मुहूर्त अक्षय तृतीया इस महीने का सबसे खास दिन अक्षय तृतीया का माना जा रहा है, जो 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसा दिन है, जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. यानी इस दिन बिना ज्यादा गणना किए भी शादी या कोई भी शुभ काम किया जा सकता है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल कभी समाप्त नहीं होता और इससे जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि बनी रहती है, ग्रहों का गोचर और वैवाहिक सुख अप्रैल 2026 में शादी-ब्याह के लिए ग्रहों की चाल भी काफी अनुकूल मानी जा रही है. इस दौरान गुरु और शुक्र दोनों ही अच्छी स्थिति में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, गुरु रिश्तों में समझ और स्थिरता लाते हैं, जबकि शुक्र प्रेम, आकर्षण और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. इन ग्रहों का शुभ होना वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत देता है. खास बात यह है कि इस महीने के अधिकतर मुहूर्तों में भद्रा और पंचक जैसे अशुभ योग नहीं बन रहे, जिससे शादी के लिए समय और भी बेहतर हो जाता है। 

अदालत ने चोरी के आरोप में फंसे जज को जमानत देने से किया मना, कानून की जीत

चंडीगढ़  पंजाब की एक अदालत में हाल ही में एक अनोखा मामला पहुंचा। यहां एक जज पर लगे चोरी के आरोप पर सुनवाई करते समय अदालत भी हैरान रह गई। जज पर अन्य लोगों के साथ मिलकर साथी जज के घर से चोरी के इल्जाम लगे हैं, वह भी तब जब जज की लाश अस्पताल में पड़ी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हुए पंजाब के पटियाला की एक अदालत ने बीते बुधवार को कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता और जज की अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरिंदर सिद्धू ने अपने आदेश में कहा कि एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और यह एक पब्लिक सर्वेंट, खासकर न्यायिक अधिकारी से अपेक्षित ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। यह मामला 1 अगस्त 2025 की रात से जुड़ा है, जब जज कंवलजीत सिंह का पटियाला के अमर अस्पताल में निधन हो गया था। आरोप हैं कि सिविल जज (जूनियर डिविजन) बिक्रमदीप सिंह ने मृतक के घर की घरेलू सहायक अमरजोत कौर उर्फ पिंकी, सरकारी अधिकारी गौरव गोयल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ मिलकर साजिश रची। कैसे हुई चोरी? जानकारी के मुताबिक जब जज का शव अस्पताल में था, तब यह लोग विकास कॉलोनी स्थित जज के घर में घुसे और सोना, जेवर और नकदी निकाल ली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी जज और उनके साथी घर में आते-जाते और बैग और डिब्बे ले जाते दिखे हैं। इसके बाद डॉ. भूपिंदर सिंह विर्क, जो पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में लॉ प्रोफेसर हैं, की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। क्या बोला कोर्ट? कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज पहली नजर में आरोपी की मौजूदगी और भूमिका को साबित करती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फुटेज में आरोपियों की बॉडी लैंग्वेज और सामान ले जाने का तरीका साफ दिखाता है कि यह काम गुपचुप तरीके से किया गया। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें व्हाट्सऐप चैट और कॉल के जरिए अनुमति मिलने की बात कही गई थी। अदालत ने पाया कि ये बातचीत कथित चोरी के बाद हुई थी। फुटेज रात करीब 9:50 बजे तक की है, जबकि पहला मैसेज 10:17 बजे का बताया गया। कोर्ट ने कहा कि इन संदेशों में सिर्फ शोक जताया गया है, किसी तरह की अनुमति का संकेत नहीं मिलता। कानून से ऊपर कोई नहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून से ऊपर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन बनाम गुजरात राज्य (1991) मामले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह दिशानिर्देश सिर्फ मनमानी गिरफ्तारी से बचाते हैं, पूरी छूट नहीं देते। अदालत ने कहा कि इस मामले में कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है, क्योंकि अभी भी काफी सामान बरामद नहीं हुआ है और पूरी साजिश का खुलासा होना बाकी है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत जांच में बाधा नहीं बननी चाहिए।

पीटीपीएस जमीन अधिग्रहण को लेकर झारखंड में तनाव, ग्रामीण तैयार नहीं घर छोड़ने के लिए

पतरातू/रांची. झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के हेसला पंचायत स्थित पीटीपीएस की अधिग्रहित जमीन पर बने आवासीय परिसर को खाली कराने की तैयारी को लेकर आज  सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया. प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करने लगे. पीटीपीएस पावर प्लांट बंद होने के बाद यह जमीन सरकार द्वारा झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई है. जियाडा ने इस भूमि को निजी कंपनियों को उद्योग स्थापना के लिए आवंटित कर दिया है, जिसके चलते आवास खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है. न्यायालय का दावा बनाम प्रशासन, पटेल चौक पर जुटे लोग कॉलोनी वासियों का कहना है कि कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जबकि प्रशासन को ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है. इसी को लेकर लोग पटेल चौक पर जुटे हैं और साफ कह रहे हैं कि वे किसी भी हालत में घर खाली नहीं करेंगे.  प्रशासन अलर्ट, स्थिति पर नजर क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है. समाचार भेजे जाने तक प्रशासन के लोग नहीं पहुंचे हैं.

प्रमोटेड छात्रों की जानकारी ई-पंजाब पोर्टल पर फीड करने के लिए स्कूलों को निर्देश

लुधियाना. डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा (डी.जी.एस.ई.) सह स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पंजाब की ओर से ई-पंजाब पोर्टल (एम.आई.एस. 2.0) पर प्रमोट किए गए विद्यार्थियों के डाटा को वैरिफाई करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करें। विभाग द्वारा पोर्टल पर विद्यार्थियों का डाटा अगली क्लास में प्रमोट कर दिया गया है। अब सभी स्कूलों को प्रमोट किए गए विद्यार्थियों की क्लास और सैक्शन की जांच करनी होगी और जरूरत के अनुसार सुधार (एडिट) करवाना होगा। यदि किसी विद्यार्थी को गलती से प्रमोट कर दिया गया है, तो उसे उसकी सही क्लास में दर्ज करना होगा। ट्रासफर सर्टीफिकेट और नए दाखिले विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि अकादमिक साल 2025-26 की सबसे बड़ी क्लास के विद्यार्थियों को 'स्टूडेंट पर्सनल डिटेल्स' शीट में 'इनएक्टिव' और 'पास आऊट' दिखाया जाए। इन विद्यार्थियों को 'टी.सी. जैनरेशन' स्क्रीन से ट्रांसफर सर्टीफिकेट (टी.सी.) जारी किया जाए। इसके अलावा, साल 2026-27 के लिए सभी छोटी क्लास (लोअर क्लास) के सैक्शन निर्धारित किए जाएं और जरूरत पड़ने पर नए सेक्शन भी बनाए जा सकते हैं। गाइडलाइन्स के अनुसार नए दाखिले नए दाखिले के लिए आने वाले विद्यार्थियों को विभाग की गाइडलाइन्स के अनुसार सही क्लास में दर्ज करने को कहा गया है। विभाग के ध्यान में आया है कि कई स्कूलों के यू-डाइस पोर्टल और ई-पंजाब पोर्टल पर लोअर और हायर क्लास की जानकारी में अंतर (डिस्क्रेपैंसी) है। उदाहरण के तौर पर, कुछ स्कूलों की लोअर क्लास नर्सरी है, जबकि ई-पंजाब पोर्टल पर एल.के.जी. दर्ज है। स्कूल ऐसी विसंगतियों को ध्यान से वैरिफाई करने के बाद ही दर्ज करना होगा। सभी स्कूल प्रमुखों को 6 अप्रैल तक सारा काम मुकम्मल करने को कहा गया है। 

फर्जीवाड़े में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सस्पेंड, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की जांच जारी

कांकेर. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए एक पहले से शादीशुदा जोड़े द्वारा दोबारा विवाह करने का मामला सामने आया है। यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ी है। मामले के उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच कर कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को पखांजूर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ग्राम पीवी-34 निवासी सुदीप विश्वास और पीवी-64 निवासी स्वर्ण मिस्त्री ने विवाह किया। जबकि इन दोनों की शादी इससे पहले ही 3 जून 2025 को हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि यह जोड़ा संगम सेक्टर का निवासी है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इनका पंजीयन 20 किलोमीटर दूर हरनगढ़ सेक्टर में कराया गया। जांच के बाद कार्रवाई मामले के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की। जांच में दोबारा विवाह की पुष्टि हुई। इसके बाद हरनगढ़ सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी शाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, पूरे मामले में निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली सुपरवाइजर पुष्पलता नायक के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया है।