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सलमान खान, पान मसाला विज्ञापन मामले में हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

 बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को पान मसाला विज्ञापन से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है. राजस्थान हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी जमानती वारंट पर रोक लगा दी है, जिससे फिलहाल उनकी कानूनी मुश्किलें कम हो गई हैं. इस फैसले के बाद अब उन्हें 13 अप्रैल को जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग-II के सामने पेश होने की जरूरत नहीं होगी. क्या है पूरा मामला? यह मामला एक उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है, जिसमें सलमान खान और पान मसाला ब्रांड पर भ्रामक विज्ञापन करने का आरोप लगाया गया था. शिकायतकर्ता योगेंद्र सिंह बडियाल ने आरोप लगाया कि उत्पादों को ‘केसर युक्त’ बताकर प्रचारित किया गया, जिससे लोगों के बीच उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गलत संदेश गया. शिकायत के मुताबिक, पान मसाला जैसे उत्पादों के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां भी शामिल हैं. ऐसे में ‘केसर युक्त’ जैसे दावों के जरिए उत्पाद को बेहतर और सुरक्षित बताना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है. इसी आधार पर उपभोक्ता आयोग में यह मामला दर्ज किया गया था. विज्ञापन पर लगी थी रोक इस मामले में 6 जनवरी 2026 को आयोग ने इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया था. बावजूद इसके, कुछ दिनों बाद भी जयपुर, कोटा समेत कई शहरों में इनके विज्ञापन और होर्डिंग्स नजर आए. आयोग ने इसे अपने आदेश का उल्लंघन माना और इस पर कड़ी नाराजगी जताई. जमानती वारंट और फिर राहत आदेश का पालन न होने पर आयोग ने सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया था और चेतावनी दी थी कि अगली सुनवाई में पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया जा सकता है. हालांकि, अब राजस्थान हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाकर अभिनेता को बड़ी राहत दी है. फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है. हाई कोर्ट के इस फैसले से सलमान खान को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी.

गाजियाबाद, छोटे सिलिंडरों की भारी कमी और एजेंसियों पर ताला लगने से उपभोक्ता परेशान

 गाजियाबाद गैस किल्लत दूर करने के लिए प्रशासन एजेंसियों में छोटे सिलिंडर पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है। इस कारण जिले में रह रहे चार लाख से ज्यादा श्रमिकों, छात्र-छात्राओं और किरायेदारों के सामने इन दिनों घरेलू गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि लोगों को बाहर से 400 रुपये प्रति किलो तक गैस खरीदकर खाना पकाना पड़ रहा है। 700 रुपये दिहाड़ी कमाने वाले मजदूरों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना संभव नहीं है। इसके चलते उनके सामने पलायन की नौबत आ गई है। कुटी रोड स्थित गंगा विहार कॉलोनी में साथी छोटेलाल के साथ रहने वाले कुशीनगर के बाबूलाल बताते हैं कि एक माह से हालात बेहद खराब हैं। दोनों घरों में रंगाई-पुताई करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।  बाबूलाल के मुताबिक, पहले पांच किलो वाला घरेलू गैस सिलिंडर 110 रुपये प्रति किलो में भर जाता था। अब गैस का भाव 400 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने बताया कि एक किलो गैस दो दिन भी नहीं चलती, जबकि एक दिन की दिहाड़ी 700 रुपये मिलती है।   एजेंसियों पर पांच किलो वाला सिलिंडर मिल नहीं रहा है। ऐसे में गांव लौटने का ही विकल्प बचा है। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि एजेंसी संचालकों से इस संबंध में वार्ता की गई है। कालाबाजारी के लिए कैसे मिल रही गैस जिले में छोटे-बड़े डेढ़ लाख से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 हजार के करीब छात्र, किरायेदार भी हैं। इनके पास गैस कनेक्शन नहीं है। बीते दिनों अधिकारियों ने पांच किलो का सिलिंडर आसानी से उपलब्ध होने का दावा किया तो इन लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन जमीनी स्थिति विपरीत है। नंदग्राम में किराये पर रहने वाले कपिल ने बताया कि एजेंसियों पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कालाबाजारी करने वालों को गैस कैसे मिल रही है।  गोदाम पर लटका ताला सिलिंडर के लिए कतार सिलिंडर के लिए लोग घंटों लाइन में लगकर बैरंग लौट रहे हैं। हैप्पी होम गैस एजेंसी के गोदाम पर मंगलवार सुबह से ताला लगा रहा। लोग सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में लगे रहे और बाद में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।   आदर्शनगर कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए सुबह छह बजे ही गोदाम पर पहुंच गए थे। चौकीदार ने बताया कि दो दिन से गैस सिलिंडर का ट्रक नहीं आया है। लगभग तीन घंटे इंतजार करने के बाद घर लौट गए। अन्य उपभोक्ता भी इसी तरह परेशान हुए।   पांच किलो में कॉमर्शियल सिलिंडर है, घरेलू नहीं नेहरूनगर स्थित कमला गैस एजेंसी में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे तीन श्रमिक रोजी, मोहन व सुनील पांच किलो का घरेलू सिलिंडर लेने गए तो निराशा हाथ लगी। उनको बताया गया कि पांच किलो का कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध है, लेकिन पांच किलो में घरेलू सिलिंडर नहीं पहुंचा है।  पांच किलो का घरेलू सिलिंडर 344 रुपये, जबकि कॉमर्शियल की कीमत 649 रुपये है। ऐसे में कॉमर्शियल सिलिंडर ले पाना सबके बस की बात नहीं है। इसी तरह मसूरी स्थित चौधरी इंडेन गैस एजेंसी में भी पांच किलो का सिलिंडर लेने पहुंचे 8-10 श्रमिकों को कर्मचारियों ने खाली हाथ लौटा दिया। डासना स्थित इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि उनके यहां बेहद कम संख्या में पांच किलो के सिलिंडर आए हैं, इसलिए अधिकांश लोगों को बैरंग लौटाना पड़ रहा है। एजेंसी संचालकों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि मुरादनगर के महाजनान मोहल्ला स्थित नमन गैस एजेंसी और मेन रोड स्थित भारत गैस एजेंसी में कालाबाजारी की जा रही है। इस मौके मनोज नागर, प्रमोद त्यागी, शील कुमार त्यागी, रिंकू प्रधान, सलीम अली, जान मोहम्मद, बाली त्यागी आदि अनेक लोग मौजूद रहे।    

समीक्षा बैठक में चेतावनी: लंबित प्रकरणों पर कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए सख्त आदेश

बलौदाबाजार. कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने मंगलवार को साप्ताहिक समय -सीमा की बैठक में  राज्य और केंद्र शासन की.विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने भूमिगत जल के रिचार्ज हेतु सभी शासकीय भवनों  में सोखता गढ्ढा और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की संरचनाएँ निर्मित करने और जन भागीदारी से जल संचयन के कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया कलेक्टर ने  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि नहरों के आसपास भी ऐसी संरचनाएं निर्मित करें जो पानी रोककर भूमिगत जल रिचार्ज में सहायक हों।उन्होंने खेतों के सबसे निचले क्षेत्र में भी जल संरक्षण की संरचना बनाने के निर्देश दिए हैं। श्री शर्मा ने आंगनवाड़ी,शासकीय और निजी स्कूलों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता पिट निर्माण के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में जन जागरूकता हेतु अधिक से अधिक प्रचार प्रस्ताव के साथ  आम नागरिकों से इस कार्य में सहयोग की अपील भी की है । जल संचयन की संरचनाओं के गुणवत्ता पूर्ण निर्माण में बाद उसकी फोटो और अनिवार्य जियो टैगिंग के भी निर्देश उन्होंने दिए। बैठक में उन्होंने लोक सेवा गारंटी के तहत विभिन्न प्रकरणों के समय सीमा में निराकरण और पोर्टल में तत्काल एंट्री के निर्देश भी दिए हैं,ऐसा  न करने पर संबंधित अधिकारी -कर्मचारी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी । उन्होंने राजस्व पखवाड़े में पटवारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश देते हुए मामलों का ऑन द स्पॉट निराकरण करने को कहा है। शर्मा ने जनगणना के कार्यों को संवेदनशीलता और कर्मठता से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कहा जनगणना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासकीय ज़मीन पर अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने भूराजस्व संहिता के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिए हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूमिहीन नागरिकों को भी लाभान्वित किया जाना है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को पंचायत स्तर पर आबादी भूमि का चिन्हांकन कर भूमिहीनों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना के तहत 15 वैज्ञानिकों को किया सम्मानित

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को छठे उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26’ के अंतर्गत 15 वैज्ञानिकों का सम्मान भी किया। वहीं, वर्ष 2025 में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी के 30 वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक एवं नवाचार पर विचार-विमर्श भी हुआ। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कई पुस्तिकों का विमोचन भी किया। विभिन्न पुरस्कार वर्गों में चयनित वैज्ञानिक… लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार: डॉ. सत्य प्रकाश, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. लोकेश कुमार गंगवार, प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. अखिलेश चन्द्र मिश्रा, प्राध्यापक, सब्जी विज्ञान विभाग, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा पशुपालन, पशुचिकित्सा विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान: प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार गंगवार, अध्यक्ष, पशु शल्य चिकित्सा एवं विकिरण विज्ञान विभाग, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या जैव प्रौद्योगिकी: डॉ. वैशाली, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, कृषि सांख्यिकी): डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, प्रभारी एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ / सहायक प्राध्यापक (पादप प्रजनन), सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, नगीना, बिजनौर विशिष्ट महिला वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. श्वेता, सहायक प्राध्यापक, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन विभाग, वानिकी महाविद्यालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. मनीष पांडेय, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यान विज्ञान), आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर, वाराणसी पशुपालन, पशुचिकित्सा विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान: डॉ. प्रमिला उमराव, सहायक प्राध्यापक, पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ जैव प्रौद्योगिकी: डॉ. विशाल चुग, सहायक प्राध्यापक, मौलिक एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, उद्यान महाविद्यालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, सांख्यिकी): डॉ. रूपन रघुवंशी, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार), आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, बाराबंकी उत्कृष्ट पीएच.डी. थीसिस पुरस्कार कृषि विज्ञान: डॉ. उत्कर्ष सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या सब्जी एवं उद्यान विज्ञान: डॉ. निमित सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या  सामाजिक विज्ञान (कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, कृषि सांख्यिकी): डॉ. संदीप कुमार, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या  इन वैज्ञानिक, संस्थान एवं स्टार्टअप को भी मिला पुरस्कार लैंडस्केप रीस्टोरेशन लीडरशिप अवॉर्ड: डॉ रमेश सिंह, थीम लीडर, इक्रीसेट, हैदराबाद को झांसी जिले के टहरौली क्लस्टर में उपकार के साथ उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला पुरस्कार  उत्कृष्ट कृषि पुरस्कार विज्ञान संस्थान / कृषि विश्वविद्यालय पुरस्कार: रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी  यूपी एग्री स्टार्टअप पुरस्कार ड्रोनटेक लैब, नोएडा गरिमा डी-हाईड्रेटेड फूड एल.एल.पी., मेरठ ग्रीनॉक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा श्रीदेश आर्गेनिक फार्म, बागपत वेलविद इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा उत्कृष्टता प्रणामपत्रः सुरेश कुमार गुप्ता को मिला। इनकी हापुड़ में 121 वर्ष पुरानी गोशाला है। वहां यह उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

कृषि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था की जाए सुनिश्चित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था की जाए सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर रखी जाएगी नजर गेहूँ उपार्जन व्यवस्था में सामाजिक और सेवा भारती संस्थाएं भी करें सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं से किया वर्चुअल संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 9 अप्रैल से गेहूँ खरीदी आरंभ हो रही है। उन्होंने सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को दिए गए हैं। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की व्यवस्था की जा रही है। गेहूँ उपार्जन जैसी महत्वपूर्ण और व्यापक गतिविधि में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाएं भी सहयोग करें। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर फैसले लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार किसान और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल संवाद के दौरान व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है। गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना बड़ी चुनौती थी, हम इसे 2700 रूपये प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे। किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाना हमारी प्रतिबद्धता है। हम जनता की सेवा करना चाहते हैं, इसी उद्देश्य से उपार्जन केंद्रों पर गेहूँ खरीदी की बेहतर व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किये जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के द्वारा भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हित से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराया जाए।  

बिहार में बहार, मुख्यमंत्री ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दी नौकरी की सौगात और सेवा का मंत्र

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में 4954 एएनएम (विमेन हेल्थ वर्कस) को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस मौके पर राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद रहे. यह पहल राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले बिहार के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को एक नई ऊर्जा से भर दिया है. पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में सीएम ने 4954 नवनियुक्त एएनएम (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को नियुक्ति पत्र सौंपे. यह केवल सरकारी नौकरी का वितरण नहीं था, बल्कि सुदूर गांवों तक ‘इलाज और एहतियात’ का भरोसा पहुंचाने की एक मुहिम है. ‘ईमानदारी से करें सेवा’ पटना के शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से तब गूंज उठा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चयनित महिला अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाकर नियुक्ति पत्र प्रदान किए. इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त एएनएम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए एक मंत्र भी दिया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी एएनएम पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी. इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड समय में इन नियुक्तियों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता रही है. स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मौके पर शिरकत की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य सरकार अब स्वास्थ्य और रोजगार को विकास के केंद्र बिंदु में रखकर काम कर रही है. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती एक साथ 4954 एएनएम की तैनाती से बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उपकेंद्रों की तस्वीर बदलने वाली है. इस नियुक्ति से विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा. टीकाकरण अभियान से लेकर प्रसव पूर्व देखभाल तक, अब सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी नर्सों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे न केवल बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा, बल्कि मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी. यह कदम बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है. नियुक्ति पत्र पाकर इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों के चेहरे पर जो मुस्कान दिखी, वह राज्य के बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश की गवाही दे रही है.

आधार फ्रॉड से बचना है तो आज ही बनाएं वर्चुअल आईडी, सुरक्षित रहेगा आपका बैंक खाता और निजी डेटा

क्या आपको भी डर है कि तमाम जगहों पर आधार नंबर शेयर करने की वजह से आपके साथ आधार से जुड़ा किसी तरह का फ्रॉड हो सकता है? दरअसल इस तरह की खबरे आए दिन आती रहती हैं, जहां लोगों के आधार नंबर का गलत फायदा उठाते हुए उनके बैंक अकाउंट खाली कर दिए जाते हैं। हालांकि आप इस तरह के खतरे को लगभग खत्म कर सकते हैं, अगर आप अपने आधार नंबर के लिए VID बना लें। VID यानी कि वर्चुअल आईडी एक 16 नंबर की पहचान होती है, जिसे आप आधार नंबर शेयर करने की जगह पर साझा कर सकते हैं। इससे आपका आधार नंबर लीक होने और उसका गलत इस्तेमाल होने की संभावना न के बराबर रह जाती है। गौर करने वाली बात है कि आधार के लिए VID को जेनरेट करना भी काफी आसान है और आप इसे अपने फोन पर भी कर सकते हैं। अब सवाल यह है कि आखिर यह वर्चुअल आईडी काम कैसे करती है और आधार नंबर से यह कैसे और कितनी अलग है? क्या है VID? VID यानी कि वर्चुअल आईडी को आप आधार नंबर का एक डिजिटल सुरक्षा कवच मान सकते हैं। यह एक 16 नंबरों की अस्थायी संख्या होती है। इसका काम आपके असल आधार नंबर को सुरक्षित रखना होता है। इसे आप आधार वेरिफिकेशन के लिए जेनरेट कर सकते हैं और जितनी बार चाहें बदल सकते हैं। ऐसे में जिन जगहों पर आधार की जरूरत पड़ती है, वहां आपका आधार नंबर शेयर न होकर अलग-अलग 16 अंकों के अस्थायी नंबर शेयर होते हैं। इससे आपके साथ आधार के जरिए होने वाले किसी भी तरह के फ्रॉड का कोई चांस नहीं रहता। कैसे काम करता है VID? VID एक बार इस्तेमाल होने वाला मास्क नंबर होता है। इसका काम आपके असली आधार नंबर को छिपाकर, आधार से जुड़े आपके काम करवाना होता है। जब आप किसी संस्थान जैसे कि बैंक या सिम कार्ड स्टोर आदि को अपनी VID देते हैं, तो आपका आधार ऑथेंटिकेशन तो हो जाता है लेकिन संस्थान के पास आपका आधार नंबर नहीं पहुंचता। UIDAI का सर्वर आपके द्वारा शेयर की गई VID को आपके आधार नंबर से लिंक करके पहचानता है और एजेंसी को सिर्फ यह कन्फर्म करता है कि आपकी पहचान सही है। VID की खासियत क्या है? VID की सबसे बड़ी खासियत है कि यह अस्थायी होता है और आप जितने चाहें उतने VID जेनरेट कर सकते हैं। जैसे ही आप नया VID बनाएंगे, पुराना वाला अपने आप रद्द हो जाएगा। ऐसे में आपकी VID भले लीक हो जाए, लेकिन वह किसी काम की नहीं रहती। इसकी दूसरी खासियत है कि VID के जरिए वेरिफिकेशन करने पर सामने वाली संस्था को सिर्फ उतनी ही जानकारी मिलती है, जितनी सामने वाले के साथ शेयर करना जरूरी होती है। वहीं अगर आप आधार कार्ड को शेयर करते हैं, तो आपके कार्ड पर मौजूद सारी जानकारी सामने वाले के साथ शेयर होती है। कैसे जेनरेट करें VID?     VID जेनरेट करने के लिए आपको सबसे पहले https://myaadhaar.uidai.gov.in/ पर जाएं और अपने आधार नंबर की मदद से लॉग-इन करें।     इसके बाद Dashboard पर Generate Virtual ID पर क्लिक करें।     अब दो ऑप्शन में से Generate ID पर क्लिक करें     इसके बाद आपकी VID आपको दिखने लगेगी और साथ ही रजिस्टर्ड नंबर पर भी भेज दी जाएगी।

शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे लोग, महंगाई के कारण मेन्यू से हटे लाइव काउंटर

पटना    बिहार में शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण शादी-विवाह के आयोजन अब पहले से काफी महंगे हो गए हैं, इसका सीधा असर कैटरिंग, मेन्यू और पूरे आयोजन के खर्च पर दिख रहा है. लोग खर्च कम करने के लिए मेन्यू छोटा कर रहे हैं.  बिहार में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के कारण कैटरिंग के दामों में 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. अब लोग शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि किसी तरह व्यावसायिक सिलेंडरों का जुगाड़ हो सके. बढ़ती लागत के कारण अब शादियों का मेन्यू छोटा हो रहा है और ‘लाइव काउंटर’ बंद होने की कगार पर हैं. थाली की बढ़ी कीमत गैस की कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने प्रति प्लेट की दर 50 से 100 रुपये तक बढ़ा दी है. पहले जो शाकाहारी प्लेट 650 रुपये में मिल रही थी, अब उसकी कीमत 700 रुपये पार कर गई है. वहीं, मांसाहारी थाली 800 से बढ़कर 900 रुपये की हो गई है. पटना के पॉश इलाकों और बड़े होटलों में तो वेज थाली की दर 1000 से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गई है. इस खर्च को काबू करने के लिए अब लोग व्यंजनों की संख्या में कटौती कर रहे हैं. लाइव काउंटर और फंक्शन्स पर चली ‘कैंची’ गैस की खपत कम करने और लागत बचाने के लिए शादियों से डोसा, चाट, जलेबी और पाव-भाजी जैसे लाइव काउंटर हटाए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, लोग अब हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे प्री-वेडिंग कार्यक्रमों को या तो रद्द कर रहे हैं या उन्हें बेहद सादगी से मना रहे हैं. इन कार्यक्रमों में अब व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त की जगह ‘रेडिमेड नाश्ता’ परोसने की तैयारी है. शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसी पहुंच रहे लोग एलपीजी गैस वितरक संघ के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग शादी का कार्ड और आवेदन लेकर व्यावसायिक सिलेंडर के लिए गुहार लगा रहे हैं. तेल कंपनियों की ओर से शादियों के लिए अलग से सिलेंडर आवंटित करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि 15 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच शादी के 28 मुहूर्त हैं, जिसमें केवल पटना जिले में ही डेढ़ लाख से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत होगी. यदि किल्लत बरकरार रही, तो शादियों का रंग और भी फीका पड़ सकता है.

बलौदाबाजार : ग्राम पंचायत तेलासी में पहुंचा हर घर नल से जल,प्रमाणीकरण के साथ संचालन व्यवस्था हस्तांतरित

बलौदाबाजार  भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन,हर घर जल के अंतर्गत विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत तेलास में ग्राम के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। इसके साथ हर घर जल प्रमाणीकरण प्राप्त किया है। उपलब्धि के उपरांत जलापूर्ति योजना का विधिवत हस्तांतरण ग्राम पंचायत को कर दिया गया है। योजना के सफल क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्राम पंचायत स्तर पर पाइपलाइन विस्तार, घरेलू नल कनेक्शन एवं जल संरचनाओं का निर्माण गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया गया।योजना के दीर्घकालिक संचालन एवं रख-रखाव को सुनिश्चित करने हेतु ग्राम पंचायत में आवश्यक व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं।योजना के संचालन हेतु प्रति परिवार ₹80 प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया गया है।जल आपूर्ति के नियमित संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर पंप ऑपरेटर नियुक्त कोयन गया है। योजना के संचालन, रख-रखाव एवं निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को सौंपी गई है।जल वाहिनी टीम द्वारा समय-समय पर जल की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा रही है।

छोटे लोन से बड़ा बदलाव: कालीन बिजनेस ने बदली जिंदगी, हर महीने अच्छी कमाई

मोहनियां. दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो इंसान परिस्थितियां विकास में बाधक नहीं बन सकतीं। कभी महिलाओं को अबला माना जाता था। आज ये अपनी मेहनत से समाज को दिशा दे रही हैं। जो अन्य महिलाओं के लिए मिसाल है। गरीबी को मात देकर परिवार का संबल बन रही हैं। मोहनियां प्रखंड के बेलौड़ी पंचायत के अमरपुरा गांव की सुमन देवी का परिवार कभी आर्थिक तंगी का शिकार था। आठ साल पहले पारिवारिक खर्च चलाना मुश्किल था। दोनों पैर से दिव्यांग पति मजदूरी करने में समर्थ नहीं थे। तब सुमन ने आत्मनिर्भर बनकर गरीबी को मात देने का संकल्प लिया। आज कालीन उद्योग से परिवार में समृद्धि आई है। अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही हैं। इस कार्य में दिव्यांग पति का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। शंकर जीविका स्वयं सहायता समूह बना आधार बेलौड़ी पंचायत के अमरपुरा गांव के ओम प्रकाश राम दिव्यांग हैं। दोनों पैर से लाचार होने के कारण वे कुछ करने में असमर्थ थे। दो बच्चों की परवरिश करना मुश्किल था। परिवार आर्थिक तंगी से परेशान था। इस विकट परिस्थिति में सुमन दीदी अबला जीवन से उबरकर सबला बनने की ठानी। अमरपुरा गांव में जीविका समूह चलता था। इन्होंने सीएम दीदी से संपर्क किया तो उन्होंने समूह से जुड़ने का फायदा बताया। 16 नवंबर 2017 को सुमन दीदी सहारा जीविका महिला ग्राम संगठन के शंकर जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। कहा जाता है बूंद बूंद से तालाब भरता है। इसी को चरितार्थ करते हुए ये सप्ताह में 10 रुपये बचत करने लगीं। समूह से जुड़ने के बाद 50 हजार रुपए का मिला ऋण समूह से जुड़ने के बाद सुमन दीदी ने 50 हजार रुपये का ऋण लिया। जिससे छोटी सी दुकान की। इसकी आमदनी से धीरे धीरे समूह को ऋण का पूरा पैसा लौटा दिया। इसके बाद इनका चयन सतत जीविकोपार्जन योजना (एसजेवाई) के लाभार्थी के रूप में हुई। इस योजना के तहत सुमन दीदी को 37 हजार रुपये मिले। जिससे दुकान का विस्तार किया। इसके बाद इनके हौसले को पंख लग गए। कालीन बुनाई का लिया निर्णय दुकान से अच्छी आमदनी होने के बाद सुमन दीदी ने कालीन बुनाई का निर्णय लिया। इनके पति ओम प्रकाश राम कालीन बुनाई करना जानते थे। इन्होंने इस उद्योग में भविष्य की तलाश की। पति पत्नी दोनों कालीन बुनाई करने लगे। आज इस उद्योग और दुकान से सुमन दीदी को 20 से 25 हजार रुपये महीने का लाभ हो रहा है। अन्य महिलाओं के लिए सुमन दीदी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। इनका कहना है कि जीविका ने जीवन को बदल दिया। अब ये आत्मनिर्भर बन गई हैं। पति दोनों पैर से दिव्यांग थे। परिवार में भोजन चलाना मुश्किल था। सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत चयन नहीं हुआ होता तो दर दर की ठोकरें खानी पड़ती। आज परिवार खुशहाल है। वे इस उद्योग को बहुत आगे बढ़ाना चाहती हैं। जिससे अन्य महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। कालीन उद्योग में कैमूर जिला का नाम हो। दृढ़ इच्छा शक्ति से गरीबी को मात दी  सुमन दीदी ने दृढ़ इच्छा शक्ति से गरीबी को मात दी है। ये अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सतत जीविकोपार्जन योजना से इनके परिवार में समृद्धि आई है। – उत्कर्ष शुक्ला, जीविका प्रबंधक