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विवाह कार्ड दिखाने पर तुरंत मिलेंगे कमर्शियल गैस सिलिंडर, रसद विभाग ने प्रवासियों के लिए भी शुरू की 5 किलो वाले छोटे सिलिंडर की सुविधा

सिरोही अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव के चलते उत्पन्न गैस संकट के बीच सिरोही जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। रसद विभाग ने प्रवासी श्रमिकों और शादी वाले परिवारों को ध्यान में रखते हुए सिलिंडर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। प्रवासी श्रमिकों को मिलेगा 5 किलो एफटीएल सिलिंडर प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन सचिव (खाद्य) अंबरीष कुमार ने निर्देश जारी किए हैं कि प्रवासी श्रमिकों को 5 किलोग्राम एफटीएल सिलिंडर उपलब्ध कराया जाए। इसमें साफ कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां केवल प्रवासी श्रमिकों को ही यह 5 किलो एफटीएल सिलेंडर उपलब्ध कराएं और इसकी जानकारी नियमित रूप से विभाग को भेजें। शादी वाले परिवारों को मिलेंगे अतिरिक्त कामर्शियल सिलिंडर आगामी दिनों में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में आयोजक परिवारों को सिलिंडर की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए रसद विभाग ने विशेष योजना बनाई है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में आयोजक परिवारों को 3 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 वाणिज्यिक (कमर्शियल) सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। विवाह कार्ड दिखाना होगा जरूरी सिलिंडर प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं को विवाह का कार्ड जिला रसद अधिकारी को दिखाना होगा। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए जिला रसद अधिकारी संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जिला नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय कर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में एक बार बुकिंग के बाद दूसरी बुकिंग के लिए 21 दिन का इंतजार करना पड़ता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 35 दिन है। इसके बावजूद भी लोगों को सिलिंडर मिलने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच यह फैसला लोगों के लिए राहत लेकर आया है। खासकर प्रवासी श्रमिकों और शादी वाले परिवारों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।  

अंधविश्वास के जाल में फंसा कैथल का परिवार, तांत्रिक महिला ने दो साल में ऐंठे एक करोड़ से ज्यादा रुपये और पुलिस ने दर्ज किया केस

 कैथल कहावत है कि भ्रम का कोई इलाज नहीं। हरियाणा के कैथल में एक ऐसा ही मामला समाने आया है जहां एक परिवार जादू-टोनों के चक्र में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठा बुढ़ा खेड़ा गांव में जादू-टोना का प्रकोप बताकर एक परिवार से 1.07 करोड़ रुपये की ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला तांत्रिक ने अपने पति, बेटे और एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर परिवार को करीब दो वर्षों तक तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर उलझाए रखा और उनसे बड़ी रकम ऐंठ ली। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें बलि के नाम पर चामुंडा देवी धाम भी ले जाया गया जहां इंजेक्शन के माध्यम से उनके शरीर से खून निकालकर मंदिर में चढ़ाया गया। इतना ही नहीं आरोपियों ने 32 तोले चांदी और 6 तोले सोने के जेवरात भी हड़प लिए। जब परिवार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और लगातार पैसों की मांग बढ़ती गई, तब पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दी। गांव बुढ़ा खेड़ा निवासी अमनदीप ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय सुखबीर सिंह पिछले दो-तीन वर्षों से सिरदर्द और चक्कर की समस्या से जूझ रहे थे। कई प्रकार के उपचार करवाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। इसके साथ ही परिवार में आपसी कलह भी बनी रहती थी। इसी बीच किसी व्यक्ति ने उन्हें गांव की सुमन नामक महिला के बारे में बताया, जो झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाएं करने का दावा करती थी। अमनदीप के मुताबिक, सुमन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके घर पर किसी ने जादू-टोना करवा रखा है और इससे मुक्ति पाने के लिए काली माता की बलि देनी होगी तथा बाबा भैरों नाथ का मंदिर बनवाना पड़ेगा। परिवार पहले से ही मानसिक रूप से परेशान था, इसलिए वे उसके झांसे में आ गए। जमीन बेचकर और एफडी तुड़वाकर दिए रुपये पीड़ित ने बताया कि सुमन के कहने पर उन्होंने अपनी जमीन बेच दी और बैंक की एफडी तुड़वाकर करीब 76 लाख रुपये नकद तथा लगभग 7 लाख रुपये ऑनलाइन उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए। आरोप है कि सुमन उन्हें चामुंडा देवी धाम भी ले गई, जहां उसने इंजेक्शन के जरिए उनका खून निकालकर मंदिर में चढ़ाया। आरोपी ने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीदी जा चुकी है और जब मंदिर बनकर तैयार होगा तो उन्हें सोने का छत्र चढ़ाना होगा। जब परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए और पैसे देने में असमर्थता जताई और कहा कि वे पहले ही 80-90 लाख रुपये दे चुके हैं, तब भी आरोपियों ने पैसे की मांग जारी रखी। पीड़ित का कहना है कि उन्हें गुमराह कर सम्मोहन जैसी विधियों के माध्यम से उनसे 32 तोले चांदी और 6 तोले सोने के जेवरात तथा भारी रकम हड़प ली गई। जादू-टोना के नाम पर लोगों को बनाते हैं शिकार आरोप है कि सुमन, उसका पति बलराज, बेटा वंश और उचाना निवासी संजीव मिलकर लोगों को जादू-टोना के नाम पर झांसे में लेते हैं। ये लोग काली माता, भैरों बाबा और सबल सिंह बावरी के नाम का हवाला देकर लोगों से जेवर और पैसे ऐंठते हैं तथा बलि के नाम पर शरीर से खून निकालते हैं। इसके अलावा, ये आरोपित लोगों को हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, पटियाला और बागड़ सहित विभिन्न स्थानों पर ले जाकर तांत्रिक क्रियाएं करवाते हैं। पीड़ितों का आरोप है कि यह गिरोह 100 से 150 लोगों से करीब 3-4 करोड़ रुपये तक की ठगी कर चुका है। सदर थाना के जांच अधिकारी मनु ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

साल 2026 में 24 अप्रैल को मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती, शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली मां पीताम्बरा की पूजा का बन रहा शुभ संयोग

 हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का बहुत महत्व है, जिनमें से आठवीं शक्ति माँ बगलामुखी हैं. इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विरोधियों पर जीत मिलती है. साल 2026 में माँ बगलामुखी की जयंती बहुत ही शुभ संयोग में मनाई जाएगी. कब है बगलामुखी जयंती? साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 24 अप्रैल 2026 सुबह 07:18 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 25 अप्रैल 2026 सुबह 05:51 बजे तक होगा. पूजा के लिए शुक्रवार का पूरा दिन बहुत शुभ रहने वाला है. माँ बगलामुखी की महिमा माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है. कहते हैं कि इनकी कृपा से इंसान की वाणी और शत्रुओं की बुद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों या वाद-विवाद में सफलता पाने के लिए माँ बगलामुखी की साधना अचूक मानी जाती है. पूजा की आसान विधि माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा उपासना भी कहते हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा के लिए पीले रंग के आसन का इस्तेमाल करें. माँ की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ करें. उन्हें पीले फूल, पीला चंदन, पीला फल और पीला भोग (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाएं. पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और माँ के मंत्रों का जाप करें. शक्तिशाली मंत्र पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है. "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वान्कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।" मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे उत्तम माना जाता है. कहाँ है प्रमुख मंदिर? माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर शामिल हैं. जयंती के दिन इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.

पश्चिमी विक्षोभ से हरियाणा के कई जिलों में बदला मौसम, रात के तापमान में आई 5 डिग्री तक की कमी

चंडीगढ़ पश्चिमी विक्षोभ के कारण वीरवार को यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, करनाल और कुरुक्षेत्र में बिखराव वाली बारिश दर्ज की गई। हवाओं की दिशा और गति में बदलाव, विशेषकर रात के समय उत्तरी हवाओं के सक्रिय होने से प्रदेश में रात्रि तापमान में गिरावट देखने को मिली। रात का तापमान 13 से 16 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। प्रदेश के सभी जिलों में तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस कम रहा। मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि उत्तरी-पश्चिमी हवाओं के साथ मौसम साफ होने के कारण सूर्य की तपिश में बढ़ोतरी से दिन के तापमान में हल्की बढ़त दर्ज हुई। चंडीगढ़ में रात का तापमान 12.3, पानीपत 13.0, महेंद्रगढ़ 14.3 और हिसार में 14.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट रही। 15 अप्रैल के बाद मौसम होगा गर्म 11 अप्रैल से कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के साथ तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि शुरू होगी। सिरसा, फतेहाबाद, पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में छिटपुट बारिश की संभावना है। शेष हरियाणा में मौसम आमतौर पर शुष्क और आंशिक बादल वाला रहेगा। 15 अप्रैल के बाद पूरे प्रदेश में दिन के तापमान में और तेजी से बढ़ोतरी की संभावना है जबकि रात्रि तापमान धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौटेगा।  

ब्रिगेडियर बने कर्नल श्रीकांत पुरोहित, रिटायरमेंट पर रोक का आदेश

 नई दिल्ली, भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर रैंक पर प्रमोशन की मंजूरी दे दी है. कर्नल पुरोहित लंबे समय तक कानूनी लड़ाई और विवादों में रहे हैं. अब उनके याचिका की सुनवाई के बाद उन्हें प्रमोशन देने का फैसला लिया गया है।  कर्नल पुरोहित 31 मार्च, 2026 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) ने उनकी प्रमोशन की याचिका पर विचार किया और उनकी रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी।  17 साल के लंबे सफर के बाद कर्नल पुरोहित को ये प्रमोशन मिलना, उनकी जिंदगी के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है. उन्होंने एक हाई-प्रोफाइल विस्फोट मामले में आरोपी होने से लेकर एक सीनियर कमांडर के तौर पर अपनी जगह बनाई है।  2008 में मालेगांव विस्फोट मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका करियर पूरी तरह रुक गया था. हालांकि 2017 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वो सेवा में वापस तो आ गए, लेकिन उनकी सीनियरिटी और प्रमोशन सालों तक लटके रहे।  बरी होने के बाद मिली नई दिशा कर्नल पुरोहित को 31 जुलाई, 2025 को मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अदालत ने सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष के मामले में विरोधाभासों का हवाला दिया था. इसके बाद, सितंबर 2025 में उन्हें पूर्ण कर्नल के पद पर प्रमोट किया गया।  कर्नल पुरोहित 31 मार्च, 2026 को रिटायर होने वाले थे. हालांकि, 16 मार्च, 2026 को जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाया कि पुरोहित के पास अपने जूनियर्स के बराबर फायदे और प्रमोशन पाने का पुख्ता मामला है. ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि प्रमोशन से जुड़ी उनकी शिकायत का समाधान होने तक उनकी रिटायरमेंट को स्थगित रखा जाए।  इंडिया टुडे के सूत्रों के मुताबिक, सेना की ओर से ब्रिगेडियर रैंक की मंजूरी उनके जेल और ट्रायल के दौरान खोए गए सालों की एक तरह से भरपाई है. अगर उनका करियर बाधित नहीं होता, तो उनके बैच के साथी अब तक वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर पहुंच चुके होते.सामान्य परिस्थितियों में वो अब तक मेजर जनरल के पद तक पहुंच सकते थे। 

लखनऊ कोर्ट ने रोहिंग्या-बांग्लादेशी मानव तस्करी केस में 9 आरोपियों को दोषी करार, 7-8 साल की सजा

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानव तस्करी के एक बड़े मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है. NIA और यूपी एटीएस से जुड़े इस केस में विशेष न्यायाधीश जैनेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने नौ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें सजा सुनाई है।  अदालत ने जिन्हें सजा सुनाई है, उनमें मोहम्मद नूर समेत रहमतुल्ला, शबीउररहमान, इस्माइल, अब्दुल शकूर, आले मियां, मोहम्मद रफीक, बप्पन और मोहम्मद हुसैन शामिल हैं. इन सभी को मानव तस्करी का दोषी पाया गया है. इनमें से मोहम्मद नूर सहित कई को 8 साल की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को 7 साल की कैद हुई है. सभी दोषियों पर अलग-अलग राशि का जुर्माना भी लगाया गया है।  जांच एजेंसियों के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह था, जो भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में एंट्री दिलाता था. इस गैंग का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और यह लंबे समय से एक्टिव था।  गैंग का तरीका बेहद संगठित और सुनियोजित था. महिलाओं को शादी का झांसा देकर उन्हें बेच दिया जाता था, जबकि पुरुषों और बच्चों को फैक्ट्रियों में काम दिलाने के नाम पर शोषण का शिकार बनाया जाता था. इस तरह यह गिरोह मानव तस्करी कर रहा था।  इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब यूपी एटीएस ने मोहम्मद नूर को सर्विलांस पर लिया. इसके बाद 26 जुलाई 2021 को उसे गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया. उसकी गिरफ्तारी के बाद कई पीड़ितों को मुक्त कराया गया और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई गई।  जांच के दौरान दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई और गैंग के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में यह भी सामने आया कि त्रिपुरा बॉर्डर के जरिए पैसों लेकर अवैध तरीके से घुसपैठ कराई जाती थी, जिसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया जाता था. इस पूरे ऑपरेशन के जरिए सुरक्षा एजेंसियों ने एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। 

रिंग रेस्क्यू नाकाम, भागीरथ की मदद से रिंग फंसी; सुरंग की खुदाई जारी, बोरवेल पर नजरें

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के झलारिया गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। गुरुवार शाम करीब 7 बजे, 3 वर्षीय मासूम भागीरथ खेलते समय अचानक एक खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन मुस्तैद हो गया है और युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतियां भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। भोपाल से आई NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीम के साथ हरदा, इंदौर और उज्जैन की SDRF टीमें मिलकर जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। घटनास्थल पर पुलिस और रेस्क्यू एजेंसियों की टीमें तैनात हैं। पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ कर दिया गया है और ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे यहां भीड़ न लगाएं। अधिकारियों के अनुसार, भीड़ से रेस्क्यू कार्य में बाधा आ सकती है। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने पर है और ऑपरेशन लगातार जारी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भागीरथ को रिंग रेस्क्यू के जरिए बाहर निकालने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अब बोरवेल के पास समानांतर सुरंग खोदने का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। गौरतलब है कि बीती रात से ही रेस्क्यू टीम रोप रिंग और समानांतर सुरंग दोनों तरीकों से बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, रोप रिंग के जरिए बार-बार असफलता मिलने के बाद अब सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास में जुटी हुई है और हर संभव तरीके से भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।     समानांतर खुदाई: जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद से बोरवेल के बगल में एक गड्ढा खोदा जा रहा है।     मौजूदा स्थिति: बच्चा लगभग 70 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। राहत की बात यह है कि उसे लगातार ऑक्सीजन सप्लाई दी जा रही है।     कठिन राह: रेस्क्यू टीमें अब तक करीब 40 फीट की खुदाई कर चुकी हैं, लेकिन नीचे कठोर चट्टानें आने की वजह से अभियान की गति थोड़ी धीमी हुई है। कैमरे के जरिए बच्चे की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है। कैसे हुआ हादसा? भागीरथ का परिवार मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है। वे भेड़ चराने के सिलसिले में पिछले तीन दिनों से झलारिया इलाके में ठहरे हुए थे। पिता प्रवीण देवासी के अनुसार, भागीरथ दीवार के पास खेल रहा था। मासूम ने जिज्ञासावश बोरवेल का ढक्कन हटाया और उसे बाल्टी समझकर उसमें पैर डाल दिया। मां ने उसे बचाने के लिए हाथ भी बढ़ाया, लेकिन पलक झपकते ही बच्चा गहराई में ओझल हो गया। सुरक्षा के लिहाज से मौके पर दो एंबुलेंस और मेडिकल टीम को तैनात रखा गया है, ताकि रेस्क्यू होते ही बच्चे को तुरंत उपचार मिल सके। उज्जैन में राजस्थान में होने वाले विवाह समारोह को लेकर भागीरथ के घर में उत्साह का माहौल था। मासूम भागीरथ सबसे ज्यादा खुश था, क्योंकि उसे शादी में पहनने के लिए नए कपड़े दिलाए गए थे। कल तक वह उन नए कपड़ों को पहनकर पूरे घर में चहक रहा था और उसकी हंसी से आंगन गूंज रहा था। भागीरथ की मौसी ने भारी मन से बताया कि घर के अधिकांश लोग राजस्थान पहुंच चुके थे और भागीरथ का परिवार भी निकलने ही वाला था। शाम को नए कपड़ों में खेलते हुए वह अचानक 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। अब घर के एक कोने में वह नई पोशाक रखी है और दूसरी ओर उसकी मां की पथराई आंखें बस बोरवेल के मुहाने की ओर टिकी हैं।  उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बीती रात से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथ को बचाने के प्रयास लगातार जारी हैं। कैमरे के माध्यम से उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। घटनास्थल पर पहुंचे बड़नगर विधायक जितेंद्र पंड्या ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन और सरकार पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। विधायक पंड्या ने कहा कि सभी का यही प्रयास है कि मासूम भागीरथ को सकुशल बाहर निकाला जा सके।  एसडीआरएफ के कमांडेंट संतोष जाट ने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे के हाथों में रेस्क्यू रोप की रिंग पहनाकर उसे बाहर निकाल लिया जाए। उन्होंने बताया कि इस प्रयास में भोपाल से पहुंची एनडीआरएफ की टीम, हरदा, इंदौर और उज्जैन की एसडीआरएफ टीमों के साथ संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। बोरवेल में कैमरा डालकर बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा है। मौके पर दो एंबुलेंस भी तैनात हैं। रेस्क्यू के दौरान भागीरथ की शर्ट निकाली गई है।

ईमानदार है आम उपभोक्ता, बिना गलती किसी का बिजली कनेक्शन न काटा जाए: मुख्यमंत्री

विशेषज्ञ समिति बनाकर स्मार्ट मीटर शिकायतों की जांच कराएं:मुख्यमंत्री ईमानदार है आम उपभोक्ता, बिना गलती किसी का बिजली कनेक्शन न काटा जाए: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, ऊर्जा मंत्री और पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक फील्ड में दौरा कर उपभोक्ताओं की समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित कराएं हेल्पलाइन नम्बर एक्टिव रहे, सनस्याओं का करायें समुचित समाधान: मुख्यमंत्री निर्बाध और पारदर्शी बिजली हमारी प्राथमिकता, कृषि फीडरों का पृथक्करण का काम समय से पूरा कराएं: मुख्यमंत्री बेहतर हुई डिस्कॉम्स की राष्ट्रीय रेटिंग, मुख्यमंत्री योगी ने कहा रिफॉर्म जारी रखें  मुख्यमंत्री योगी का निर्देश, गर्मी में पीक डिमांड पूरी करने में कमी न हो, तैयारी पूरी रखें न्यूनतम 05 आवास वाले मजरों में भी विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाए, पीएम कुसुम योजनाओं से अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के निर्देश विजिलेंस को मुख्यमंत्री योगी का निर्देश, ऐसी कार्रवाई न करें कि आम आदमी परेशान हो मुख्यमंत्री का निर्देश, ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए आम आदमी को न होना पड़े परेशान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त उपभोक्ताओं की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए इसकी गहन जांच के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से ईमानदार होता है और यदि उसे समय पर सही बिल प्राप्त हो, तो वह भुगतान करने में कोई हिचक नहीं करता। मुख्यमंत्री ने ओवरबिलिंग की समस्या की वास्तविक स्थिति का पता लगाने हेतु विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है, तो उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का वास्तविक लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे, इसके लिए विश्वसनीय आपूर्ति, तकनीकी दक्षता और जवाबदेही को आधार बनाकर कार्य किया जाए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस में कमी, उपभोक्ता सेवाओं के डिजिटलीकरण तथा राजस्व संग्रह में सुधार को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बिलिंग और भुगतान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को समय पर और सटीक बिल उपलब्ध कराने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली को उपभोक्ता विश्वास के अनुरूप बनाने तथा शिकायतों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऊर्जा मंत्री एवं पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक स्वयं फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें और उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित व प्रभावी निराकरण सुनिश्चित कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर पूरी तरह सक्रिय रहें तथा प्राप्त शिकायतों का समुचित और समयबद्ध समाधान किया जाए, ताकि आम उपभोक्ता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या वर्ष 2017 के 1.65 करोड़ से बढ़कर 2026 में 3.71 करोड़ से अधिक हो गई है, जो लगभग 126 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में विद्युत भार में लगभग 80 प्रतिशत तथा ऊर्जा बिक्री में 63 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में कुल ऊर्जा बिक्री 1.27 लाख मिलियन यूनिट तथा कनेक्टेड लोड 84,000 मेगावाट से अधिक है। घरेलू उपभोक्ता कुल कनेक्शनों का 87 प्रतिशत हैं, जबकि राजस्व में वाणिज्यिक एवं औद्योगिक वर्ग का योगदान सर्वाधिक है। डिस्कॉम्स के प्रदर्शन में सुधार पर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि राष्ट्रीय रेटिंग में और सुधार सुनिश्चित किया जाए तथा वितरण अवसंरचना को और सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया को और तेज किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जहां नए विद्युत पोल लगाए जा रहे हैं, वहां उनकी गहराई, केबल की गुणवत्ता एवं अन्य तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बिजली लाइनों को चरणबद्ध रूप से भूमिगत किए जाने की प्रक्रिया को और व्यवस्थित एवं गति देने के निर्देश दिए। प्रिवेंटिव मेंटेनेंस को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फॉल्ट-फ्री सप्लाई के लिए नियमित रखरखाव अनिवार्य है। बैठक में बताया गया कि प्री एवं पोस्ट मानसून अभियानों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में पावर ट्रांसफॉर्मर क्षति में लगभग 80 प्रतिशत तथा बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति में लगभग 48 प्रतिशत की कमी आई है। स्मार्ट मीटरिंग एवं राजस्व सुधार की समीक्षा में बताया गया कि 84 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं तथा फीडर मीटरिंग में लगभग 95 प्रतिशत प्रगति हुई है।  ग्रामीण क्षेत्रों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि न्यूनतम 05 आवास वाले मजरों में भी विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही डबल ग्रुप सप्लाई एवं कृषि फीडर पृथक्करण के कार्यों को समयबद्ध पूर्ण किया जाए, ताकि ओवरलोडिंग की समस्या का समाधान हो सके। उपभोक्ता सेवाओं के अंतर्गत 1912 कॉल सेंटर, ऑनलाइन पोर्टल, सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत निस्तारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने तथा सिंगल विंडो मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए गए। उत्पादन क्षमता के संतुलित विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तापीय इकाइयों को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित रखा जाए तथा ग्रीष्मकालीन मांग के दृष्टिगत आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि उत्पादन से जुड़े सभी मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 12,247 मेगावाट तापीय तथा 526.4 मेगावाट जल विद्युत क्षमता उपलब्ध है तथा वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच ₹3,143 करोड़ का संचयी लाभ अर्जित किया गया है। घाटमपुर की 660 मेगावाट इकाई अप्रैल में संचालन प्रारंभ करेगी। मुख्यमंत्री ने 5,600 मेगावाट की नई परियोजनाओं; मेजा, ओबरा-डी एवं अनपरा-ई को शीघ्र स्वीकृति देकर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही 500 मेगावाट सौर एवं 50 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने तथा न्यूक्लियर पावर के लिए चल रहे सर्वेक्षण को शीघ्र पूर्ण करने को कहा। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत 4.60 लाख से अधिक रूफटॉप (1560 मेगावाट) स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने निर्देश … Read more

नीतीश कुमार के बाद अब बिहार में भाजपाई मुख्यमंत्री की तैयारी, 14 अप्रैल को दे सकते हैं इस्तीफा और सम्राट चौधरी का नाम रेस में सबसे आगे

पटना    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण किया। सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों सदनों का सदस्य बनने रिकॉर्ड कायम कर लिया है। यह उपलब्धि सिर्फ राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने ही हासिल किया। चारों सदनों में बैठने वाले दूसरे सीएम नीतीश कुमार बने हैं। नीतीश कुमार गुरुवार को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के साथ शपथ ग्रहण करने के लिए पटना से दिल्ली गए थे। आज शाम वे पटना लौट सकते हैं नीतीश कुमार ने आज से अपने राजनीतिक जीवन की नई पारी की शुरुआत कर दी है। अब वे पटना लौटेंगे और अपनी इच्छा से मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र देंगे।बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को नीतीश कुमार अपने कैबिनेट की बैठक करेंगे और खरमास के बाद 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा सौंपेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी। नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप की आज शाम बैठक होने वाली है जिसमें सीएम चेहरा फाइनल किया जा सकता है। वैसे तो नित्यानंद राय, विजय कुमार, सिन्हा, संजीव चौरसिया, संजय जायसवाल, दिलीप जायसवाल, रेणू देवी समेत कई नामों की चर्चा सीएम पद की रेस में हो रही है लेकिन, सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है। माना जा रहा है कि सीएम फेस के चयन में नीतीश कुमार की इच्छा राय को प्रधानता दी जाएगी क्योंकि उनके बाद एनडीए के वोट बैंक को इनटैक्ट रखने के लिए नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरण को बरकरार रखा जाएगा। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप की आज शाम बैठक होने वाली है जिसमें सीएम चेहरा फाइनल किया जा सकता है। वैसे तो नित्यानंद राय, विजय कुमार, सिन्हा, संजीव चौरसिया, संजय जायसवाल, दिलीप जायसवाल, रेणू देवी समेत कई नामों की चर्चा सीएम पद की रेस में हो रही है लेकिन, सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है। माना जा रहा है कि सीएम फेस के चयन में नीतीश कुमार की इच्छा राय को प्रधानता दी जाएगी क्योंकि उनके बाद एनडीए के वोट बैंक को इनटैक्ट रखने के लिए नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरण को बरकरार रखा जाएगा। आज का शपथ ग्रहण नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में वापसी की शुरुआत है। 2005 में दिल्ली की राजनीति छोड़कर पटना गए और बिहार के सीएम बने। करीब 20 सालों की स्टेट पारी निभाने के बाद वे दिल्ली लौट रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह के समय उनके साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राज्यसभा सांसद संजय झा, बीजेपी सांसद जेपी, निर्मला सीतारमण, नड्डा, राजीव प्रताप रूडी, बिहार के मंत्री सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी, विजय चौधरी, मंत्री जमा खान, रामनाथ ठाकुर समेत बीजेपी और जदयू के कई नेता मौजूद रहे। नीतीश कुमार के शपथग्रहण के बाद दिल्ली से पटना तक सियासी तपिश और बढ़ गई है।

आयुष्मान योजना से हटेंगे हरियाणा के निजी अस्पताल, करोड़ों के बिल लंबित होने पर डॉक्टरों ने लिया कड़ा फैसला

चंडीगढ़ सात अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरेंडर लेटर आईएमए हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया। हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा संकट गहराता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने संकेत दिए हैं कि राज्य के अस्पताल अब इस योजना को जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं। आईएमए की ओर से आयुष्मान भारत हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के सीईओ को भेजे गए पत्र में कई गंभीर खामियों और लंबित मुद्दों को उठाया गया है। अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत 15 दिन में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन सितंबर 2025 से ही करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं। लगातार हो रही इस देरी से निजी अस्पतालों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो गया है। सात अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरेंडर लेटर आईएमए हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया। आईएमएने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो 20 अप्रैल 2026 से आयुष्मान भारत योजना के तहत सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।   कमेटियां ठप, फैसले अटके जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर आईएमए प्रतिनिधियों को एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटियों में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। इससे अस्पतालों से जुड़े कई अहम फैसले लंबित हैं। पांच महीने से नहीं हुई बैठक पिछले पांच महीनों से मासिक बैठकें भी नहीं हुई हैं। इसके चलते नए अस्पतालों का पैनल में जुड़ना और नई स्पेशलिटी की मंजूरी पूरी तरह ठप पड़ी है। लाखों मरीजों पर पड़ेगा असर अगर अस्पतालों ने सेवाएं बंद कर दीं, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा, जो इस योजना के तहत मुफ्त इलाज पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अस्पतालों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।