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सीधी जिले में 1641 करोड़ रूपये की समूह जल प्रदाय योजना से 9.67 लाख से अधिक आबादी को मिलेगा लाभ

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पेयजल उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने का आधार स्वच्छ और पर्याप्त जल आपूर्ति है, इसी सोच के साथ ऐसी योजनाओं को गति दी जा रही है। सीधी जिले में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से एक व्यापक और दीर्घकालिक पहल के रूप में सीधी बाणसागर समूह जल प्रदाय योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सीधी के ग्रामीण क्षेत्रों में 1641.52 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत यह परियोजना क्षेत्रों में पेयजल संकट को स्थायी रूप से दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने बताया कि यह परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक-आर्थिक सुधार का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी गांव में पेयजल की समस्या न रहे और हर घर में नल से जल उपलब्ध हो। योजना के माध्यम से जिले की 9 लाख 67 हजार 119 की आबादी को लाभ मिलेगा, जिसमें 97 हजार 763 परिवार शामिल हैं। योजना के अंतर्गत रामपुर नैकिन विकासखण्ड के 185 ग्राम, सीधी विकासखण्ड के 193 ग्राम और सिहावल विकासखण्ड के 299 ग्राम को जोड़ा गया है, इस प्रकार कुल 677 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। योजना में बाणसागर जलाशय से जल लेकर 125 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल तथा 3500 मीटर लंबी रॉ वॉटर पंपिंग मेन के माध्यम से जल संग्रह किया जाएगा। इसके बाद 100 एमएलडी क्षमता के आधुनिक जल शोधन संयंत्र में जल का शुद्धिकरण कर 25 हजार 340 मीटर लंबी क्लीयर वॉटर पंपिंग मेन के जरिए विभिन्न जल संरचनाओं तक पहुंचाया जाएगा। इसके अंतर्गत एक पी.एम.बी.आर. और 12 एम.बी.आर. का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही 1356.233 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी मेन और 3172.350 किलोमीटर लंबी जल वितरण नलिकाओं का विस्तृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा। योजना में 208 उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण भी शामिल है, जो जल भंडारण और वितरण को सुचारू बनाएंगी। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि योजना के अंतर्गत 97 हजार 763 घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे प्रत्येक परिवार तक सीधे नल से जल पहुंच सकेगा। इससे ग्रामीणों को दूरस्थ स्रोतों से पानी लाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी और ग्रामीणों के समय एवं श्रम की बचत होगी। योजना लगभग एक वर्ष में पूर्ण हो जाएगी। यह योजना न केवल पेयजल आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह राज्य सरकार के उस संकल्प को भी दर्शाती है, जिसमें हर नागरिक को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सीधी जिले के लिए यह योजना विकास की नई धारा लेकर आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और स्वस्थ बनाएगी।  

गोड्डा में 1363 एकड़ भूमि अधिग्रहण को चुनौती, हाईकोर्ट ने मामले पर लिया संज्ञान

रांची  झारखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अडानी पावर लिमिटेड के गोड्डा स्थित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। याचिका गोड्डा जिले के करीब 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना में उत्पादित पूरी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है। ऐसे में अधिग्रहण को सार्वजनिक उद्देश्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रार्थियों का तर्क है कि जब परियोजना का लाभ देश के आम नागरिकों को नहीं मिलना है तो कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं माना जा सकता। संताल परगना टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) प्रक्रिया में भी लगभग 4,000 प्रभावित लोगों जिनमें किरायेदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं को शामिल नहीं किया गया।

गांव में ही मिला न्याय—अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट से राजस्व मामलों का त्वरित समाधान

रायपुर.  धमतरी जिला प्रशासन द्वारा दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व सेवाओं को सरल एवं सुलभ बनाने की दिशा में किया जा रहा नवाचार अब प्रभावी परिणाम देने लगा है। जीप।प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत भवन अकलाडोंगरी में आयोजित लिंक कोर्ट के माध्यम से आज कई राजस्व प्रकरणों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली। लिंक कोर्ट की कार्यवाही में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने आवेदन लेकर पहुंचे। पीठासीन अधिकारी ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ सुनवाई करते हुए त्रुटि सुधार के 3 मामलों का तत्काल निराकरण किया। इसके अलावा फौती नामांतरण के 2, क्रय-विक्रय आधारित नामांतरण के 2, भूमि सीमांकन का 1 तथा खाता विभाजन का 1 नया आवेदन प्राप्त हुआ। आज की कार्यवाही की खास उपलब्धि एक जटिल और विवादित नामांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान रहा। इस मामले में सभी 12 हितबद्ध पक्षकारों के बयान मौके पर ही दर्ज किए गए, जिससे लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति मिली और अनावश्यक विलंब समाप्त हुआ। लिंक कोर्ट के आयोजन से ग्रामीणों को अब तहसील मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। गांव में ही सुनवाई होने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है, साथ ही पारदर्शी प्रक्रिया से प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। जिला प्रशासन ने राजस्व सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था सुनिश्चित की है कि प्रत्येक गुरुवार को अकलाडोंगरी और प्रत्येक शुक्रवार को बोरई में नियमित रूप से लिंक कोर्ट आयोजित किया जाए। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अपने ही क्षेत्र में शासन की सेवाओं का लाभ मिल रहा है। गांव में त्वरित न्याय और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से संतुष्ट ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। यह पहल सुशासन और जनसेवा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है।

राजस्थान,लापरवाही पर शिक्षकों को चार्जशीट, कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड

 चित्तौड़गढ़ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुरा निम्बाहेड़ा के पूरे स्टाफ को जांच के दायरे में लिया. शिकायतें मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय ने विशेष जांच दल बनाया था. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. दो शिक्षकों को थमाए गए गंभीर आरोप पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार नीलम मीणा और शैलेन्द्र कुमार को राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत गंभीर आरोप पत्र जारी किए गए हैं. इन पर लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रधानाध्यापक समेत चार को नोटिस लापरवाही के मामले में प्रधानाध्यापक वीरमदेव मीना सहित चार अन्य शिक्षकों सीमा जाट रमेश चन्द्र मीणा और विश्व ज्योति को सीसीए नियम 17 के तहत नोटिस दिए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. पोक्सो मामले में कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड दूसरे मामले में विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सामरिया खुर्द बेंगू में तैनात कंप्यूटर अनुदेशक राजेश कुमावत को निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है. न्यायिक हिरासत में आरोपी, जांच शुरू पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है. इसी को देखते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंशन लागू किया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बड़ी सादड़ी रखा गया है और उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.

सुशासन तिहार-2026 के लिए राज्य सरकार की व्यापक तैयारी, मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टरों को दिए विस्तृत निर्देश

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में सुशासन को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार वर्ष 2025 की तर्ज पर इस वर्ष “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन व्यापक स्तर पर करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गत वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस वर्ष इसे और अधिक व्यापक स्वरूप में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 30 अप्रैल 2026 तक जिलों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसके अंतर्गत भूमि संबंधी प्रकरण जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही मनरेगा अंतर्गत लंबित मजदूरी भुगतान, हितग्राही मूलक योजनाओं के लंबित प्रकरण, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, बिजली एवं ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याएं तथा हैंडपंप सुधार जैसे मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया है।  सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी। पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद एवं विधायक, साथ ही मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आमजन से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।  अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे। वे हितग्राहियों से सीधे संवाद कर फीडबैक भी प्राप्त करेंगे। इसके अतिरिक्त जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित कर शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। निरीक्षण एवं समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री प्रेसवार्ता को संबोधित करेंगे तथा सामाजिक संगठनों और नागरिकों से सुझाव भी प्राप्त करेंगे। सुशासन तिहार 2026 को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से जनसंपर्क विभाग एवं जिला प्रशासन को व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक नागरिकों को अभियान से जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।  मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जनभागीदारी का सशक्त माध्यम बनाएं, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के संबंध में जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है। उससे भारत की आधी आवादी को देश हित के निर्णय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। शुक्ल ने नारी शक्ति पथ संचलन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के उपरांत अब संसद में भी प्रतिनिधित्व देने का जो संकल्प लिया है वह अभिनंदनीय है जिसके माध्यम से नारी शक्ति को समुचित सम्मान मिलेगा। शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में अनेक योजनाएँ व कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं जिसके माध्यम से महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ नारी की पूजा व सम्मान होता है वहां देवता भी वास करते हैं अत: नारी शक्ति का सम्मान करते हुए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ उनके हक के लिये कार्य किये जा रहे हैं। शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य की महिलाएँ किसी से पीछे नहीं हैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट हमारे यहाँ की हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हम महिलाओं के हित में हमेशा ही कार्य किया है। उनका संकल्प है कि हर घर की महिला जागरूक हो, आगे आये और बराबरी के साथ चले। लखपती दीदी, स्वसहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी के साथ ही स्थानीय निकायों में हमें प्रतिनिधित्व मिला और अब नई राह खुल रही है। कार्यक्रम में महिला विदुषी ज्ञानवती अवस्थी ने कहा कि हमारी संस्कृति में मातृ वंदना होती है। मातृ शक्ति को ही सृष्टि की रचना का श्रेय दिया गया है इसलिए वह वंदनीय है। नारी अपने चरित्र से पुरूषों को प्रेरणा देती है इस लिए उसका स्थान सर्वोपरी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा में 10 से 25 अप्रैल तक महिलाओं के सम्मान में अनेक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में संभाग स्तर का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने मोबाइल फोन से मिस्डकाल कर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। अवसर पर मातृ शक्तियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक पन्नाबाई प्रजापति, जिला पंचायत सदस्य पूर्णिमा तिवारी, गीता माझी, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र कुमार प्रजापति, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास शशिश्याम उइके, दर्शना वाकड़े, आशीष द्विवेदी, जीवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी व मातृ शक्तियाँ उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती तिवारी ने किया।

डबरी, मछली पालन और बहुफसली खेती से बदली तकदीर—सगनू बने गांव के प्रेरणास्रोत

रायपुर. ग्रामीण विकास की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक प्रभावी माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया है। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहकर स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। इसका जीवंत उदाहरण अरौद डुबान क्षेत्र के ग्राम कलारबाहरा निवासी सगनू राम की प्रेरक सफलता कहानी है। सगनू राम एक छोटे कृषक परिवार से हैं। सीमित भूमि और वर्षा आधारित खेती के कारण उनकी आय अस्थिर रहती थी। सिंचाई की सुविधा न होने से वे वर्ष में केवल एक ही फसल ले पाते थे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी। परिस्थितियों में बदलाव तब आया जब उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मनरेगा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने वर्ष 2023-24 में अपने खेत में 25×25 मीटर की डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकृति मिली। लगभग 2.98 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस डबरी ने उनके खेत में स्थायी जल स्रोत उपलब्ध करा दिया। डबरी बनने के बाद उनकी खेती में उल्लेखनीय परिवर्तन आया। अब वे नियमित सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे 2 एकड़ में धान की खेती का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने 1.5 एकड़ में माड़िया (रागी) की खेती शुरू की, जिससे उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। सगनू राम ने डबरी का उपयोग मछली पालन के लिए भी किया, जिससे उन्हें करीब 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इस तरह जल संरक्षण, बहुफसली खेती और मछली पालन को जोड़कर उन्होंने एक सशक्त और टिकाऊ आजीविका मॉडल विकसित किया है। उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों—जैसे फसल चक्र, जैविक खाद का उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन तकनीकों—को भी अपनाया है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ लागत में कमी आई है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने की योजना बना रहे हैं। आज सगनू राम न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर अन्य ग्रामीण भी मनरेगा के तहत डबरी निर्माण और उन्नत कृषि गतिविधियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस सफलता के पीछे ग्राम पंचायत, मनरेगा योजना और कृषि विभाग का समन्वित प्रयास रहा है। समय पर मार्गदर्शन और सहायता ने सगनू राम के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। सगनू राम की यह कहानी साबित करती है कि योजनाओं का सही उपयोग और नवाचार के साथ किया गया परिश्रम सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की राह खोल सकता है। यह ग्रामीण भारत के लिए आशा, प्रेरणा और विकास का सशक्त संदेश है।

मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सुपर 100 प्रवेश परीक्षा का परिणाम किया घोषित

भोपाल.  मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सुपर-100 प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। विद्यार्थी परीक्षा परिणाम ओपन स्कूल की बेवसाइड mpsos.nic.in पर देख सकते हैं। बोर्ड द्वारा यह परिणाम बीते 15 अप्रैल को घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही है। विभाग की यह एक महत्वपूर्ण योजना हैं। मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए सुपर-1०० प्रवेश परीक्षा का 22 मार्च 2026 को आयोजन किया गया था। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर हुई थी। अब 15 अप्रैल को बोर्ड द्वारा इसका रिजल्ट भी जारी कर दिया गया हैं। परीक्षा में प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थी ही हिस्सा ले सकते हैं। परीक्षा के आधार पर चयनित बच्चों को प्रदेश के दो विद्यालयों शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भोपाल एवं शासकीय मल्हार आश्रम उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इंदौर में कक्षा 11वीं में प्रवेश दिया जाता है। जहां पर विद्यार्थी अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ JEE एवं NEET की कोचिंग करते हैं, जो ख्याती प्राप्त चयनित संस्थानों के द्वारा दी जाती है। दोनों संस्थाओं में JEE एवं NEET के लिए 76-76 सीटें उपलब्ध होती है। इस वर्ष JEE में 5152 एवं NEET परीक्षा के लिए 5011 विद्यार्थियों ने अपने आवेदन फार्म जमा किये थे।  

फर्जी शादी के तहत फंसी NRI महिला की हत्या, पंजाब में रची गई खौफनाक साजिश

अमृतसर  अमेरिका के सिएटल में रहने वाली 69 साल की रूपिंदर कौर लंबे समय से अकेली थीं और अपने जीवन में प्यार की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात इंटरनेट के जरिए चरणजीत सिंह ग्रेवाल नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसने उनसे शादी करने का वादा किया। चरणजीत ने खुद को अमीर और अच्छा इंसान बताया, जिससे रूपिंदर कौर उस पर भरोसा कर बैठीं और शादी के लिए भारत आ गईं, लेकिन भारत पहुंचने के बाद कहानी बदल गई। एयरपोर्ट पर चरणजीत नहीं आया। उसकी जगह उसके दो साथी सुखजीत सिंह ग्रेवाल और मनवीर सिंह ग्रेवाल उन्हें अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि दूल्हा बाद में आएगा और तब तक वे उनका ख्याल रखेंगे। उन्होंने रूपिंदर कौर को “मां” कहकर भरोसा दिलाया, लेकिन असल में वे उन्हें ठग रहे थे। उन्होंने डराया कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है और केस सुलझाने के नाम पर उनसे करीब 40 लाख रुपये और 40 तोला सोना ले लिया। कुछ दिनों बाद, 12-13 जुलाई की रात, इन लोगों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। फिर सबूत मिटाने के लिए उनके शव के टुकड़े किए, जलाया और नाले में फेंक दिया। इस पूरे मामले का खुलासा उनकी बड़ी बहन कमलजीत कौर ने किया। उन्हें शक हुआ जब उनकी बहन का फोन बंद हो गया। उन्होंने सारे चैट और सबूत इकट्ठा कर पुलिस को दिए। पुलिस ने जांच के बाद एक आरोपी सुखजीत को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी चरणजीत अभी फरार है। अब इस केस में डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साबित होगा कि जो अवशेष मिले हैं, वे रूपिंदर कौर के ही हैं। उनकी बहन आज भी न्याय का इंतजार कर रही हैं।

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में कुटीर एवं ग्रामोद्योग की उल्लेखनीय भूमिका : राज्य मंत्री जायसवाल

भोपाल.  कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के संकल्प को साकार करने में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की भूमिका अत्यंत उल्लेखनीय है। विभाग के प्रयासों से प्रदेश के लाखों कारीगर, बुनकर, शिल्पी और ग्रामीण उद्यमी स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, संत रविदास स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री कारीगर समृद्धि योजना और एक जिला-एक उत्पाद जैसे कार्यक्रमों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। पिछले तीन वर्षों में विभाग के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए। प्रमुख उपलब्धियां हथकरघा एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा : चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट और गोंड पेंटिंग जैसे पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला। ‘एमपी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम’ के माध्यम से 1800 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया गया। माटी कला एवं बांस शिल्प का पुनरुद्धार : कुम्हारों और बांस शिल्पियों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया गया। इससे 35 हजार से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिला। महिला सशक्तिकरण : स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 1.2 लाख महिलाओं को अगरबत्ती, मसाले, अचार, दोना-पत्तल और सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों से जोड़ा गया। डिजिटल मार्केटिंग : ‘मृगनयनी’ और ‘ओडीओपी’ उत्पादों को एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और जीईएम पोर्टल से जोड़कर कारीगरों को देशभर का बाजार उपलब्ध कराया गया। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विजन को कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग जमीन पर उतार रहा है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव का हुनर, हर हाथ को काम मिले। उन्होंने कहा कि विभाग जिला स्तरीय क्लस्टर विकास, कारीगरों के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और निर्यात प्रोत्साहन पर विशेष फोकस करेगा, जिससे मध्यप्रदेश के पारंपरिक हुनर को वैश्विक पहचान बनाए रखने में मदद मिलेगी।