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इंदौर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अव्वल, 21% राजस्व का योगदान अकेले इंदौर का

इंदौर  पंजीयन विभाग के 2025-26 के राजस्व आंकड़ों के अनुसार इंदौर जिले ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कमाई कर अपना दबदबा कायम रखा है। इंदौर ने पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित किया है। यहां कुल 2673.44 करोड़ की आय हुई है। वहीं भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे, जबलपुर चौथे और उज्जैन पांचवें स्थान पर रहा। भोपाल 1903.67, ग्वालियर 852.92 करोड़, जबलपुर 772.25 करोड़, उज्जैन 440.50 करोड़ की आय दे पाए हैं, जबकि इंदौर के महू नाका कार्यालय ने प्रदेश में चौथे नंबर पर कमाई दर्ज कराई है। इंदौर जिले के चारों कार्यालय इस बार भी प्रदेश में शीर्ष पर रहे। मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय ने 614.69 करोड़, ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने 674.06 करोड़, विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने 756.98 करोड़, जबकि महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने 627.71 करोड़ रुपए की कमाई की। कुल मिलाकर इंदौर जिले का संयुक्त राजस्व 2673.44 करोड़ रुपए रहा, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उधर, भोपाल-1 कार्यालय की 481.37 करोड़ रुपए, भोपाल-2 की 997.22 करोड़ रुपए, भोपाल-3 कार्यालय की कमाई 425.08 करोड़ रुपए दर्ज की गई। जबकि ग्वालियर जिले के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 396.58 करोड़ और 456.34 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। जबलपुर जिले में जबलपुर के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 371.36 करोड़ और 400.89 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जबकि सिंहस्थ के कारण उज्जैन से जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष उज्जैन जिले ने मात्र 440.50 करोड़ रुपए की कमाई की। इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया दरअसल, इंदौर ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 215.7 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। वर्ष 2024-25 में जहां यह आंकड़ा 2528 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 2743.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वृद्धि शहर में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। दस्तावेज पंजीयन के मामले में भी इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025-26 में जिले में एक लाख 91 हजार 400 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5124 अधिक हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार इंदौर में संपत्ति बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में यह आंकड़े और भी ऊंचाई छू सकते हैं। प्रदेश के प्रमुख चार शहरों का राजस्व     इंदौर – 2743.7 करोड     भोपाल – 1943.64 करोड़     ग्वालियर – 870.9 करोड़     जबलपुर – 789.7 करोड़ मार्च में सर्वाधिक राजस्व इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक राजस्व मार्च माह में 537.09 करोड़ रुपये जुटाया गया। इसी माह में सर्वाधिक 29086 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। दिसंबर माह में भी पंजीयन कार्यालय द्वारा 17441 दस्तावेज पंजीकृत किए गए और 238.28 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया गया। सबसे कम राजस्व अप्रैल माह में 114.48 करोड़ रुपये राजस्व जमा हुआ और 7944 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। विजयनगर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंदौर जिले में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र ने लक्ष्य के विरुद्ध 90.83 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल जिले के भीतर सर्वोच्च रहा, बल्कि प्रदेशभर के कई बड़े कार्यालयों से भी बेहतर साबित हुआ। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में भी इस कार्यालय की वृद्धि दर 11.63 प्रतिशत रही। यह आकड़े दर्शाते हैं कि जिले में संपत्ति पंजीयन की गतिविधियां तेज हुई हैं और बाजार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में कार्यालय ने 677.75 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 756.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। क्षेत्र में संपत्ति के पंजीयन, क्रय-विक्रय और वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर-महूनाका ने भी दिखाया दम महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने लक्ष्य के 81.85 प्रतिशत के टारगेट को पूरा किया है। महू नाका क्षेत्र ने सबसे अधिक राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए इंदौर को पहले पायदान पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 22.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, जिसने जिले की रैंकिंग को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। मोती तबेला स्थित कार्यालय लक्ष्य का केवल 61.41 प्रतिशत ही हासिल कर पाया। इंदौर-2 कार्यालय मार्च में 79.85 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर पाया। पिछले वर्ष की तुलना में 2.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने धीमी, लेकिन संतुलित प्रगति हासिल की। किसने पिछले वर्ष के मुकाबले कम कमाई की आंकड़ों के अनुसार कुल 4 कार्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में गिरावट दर्ज हुई। इन कार्यालयों ने कम कमाई की- ग्वालियर-1 ने माइनस 1.96% ,ग्वालियर-2 ने माइनस 2.17% इंदौर-1 में माइनस 6.10% व उज्जैन भी 9.69 प्रतिशत कमी की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। यहां सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। उज्जैन ने 102 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 61.85त्न प्राप्त किया और सबसे अधिक 9.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

नारी वंदन को मिशन-2029 में सोशल क्रांति बनाने की रणनीति, MP भाजपा का बड़ा कदम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक  में जिसमें संगठनात्मक मजबूती, आगामी कार्यक्रमों और खास तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी इस कानून को वर्ष 2029 के चुनावों में बड़ा “गेम चेंजर” बनाने की दिशा में काम कर रही है। पहली बैठक को औपचारिक माना गया, लेकिन इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग पहले ही पूरे किए जा चुके हैं और अब जिला व प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा। ताकि संगठन को और मजबूत किया जा सके।  बैठक में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। नेताओं का मानना है कि सरकार की योजनाओं और पार्टी के कार्यक्रमों के बीच तालमेल मजबूत होगा, तो उसका सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा। इस दौरान यह रणनीति भी बनी कि विधायक और सांसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण के बड़े कदम के रूप में जनता के बीच प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करेंगे। पार्टी इसे केवल एक कानून के रूप में नहीं, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में मजबूत करने वाले ऐतिहासिक फैसले के रूप में प्रचारित करने की तैयारी में है। ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी को उसका लाभ मिले।   भाजपा का मानना है कि महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान गेम-चेंजर साबित होगा। इसे केवल एक कानूनी उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति के रूप में जनता के बीच ले जाया जाएगा। सरकार अपनी योजनाओं के जरिए और संगठन अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए हर घर तक यह संदेश पहुंचाएगा कि भाजपा ही महिलाओं की सच्ची हितैषी है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता के जरिए भेदभाव दूर करने का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा। कोर ग्रुप की यह पहली बैठक थी। इससे पहले आठ सदस्यीय छोटी टोली संगठन ने सत्ता-संगठन में समन्वय के लिए बनाई गई थी। इसके बाद 20 सदस्यों का कोर ग्रुप बनाया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, प्रदेश प्रभारी डा महेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री राकेश सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल एवं अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व लोकसभा सदस्य विष्णुदत्त शर्मा, मंत्री संपतिया उइके, लता वानखेड़े, डा नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया और फग्गन सिंह कुलस्ते उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार में भाजपा विधायक दल की बैठक के चलते इसमें शामिल नहीं हो सके। साझा अभियान के प्रमुख कार्यक्रम     जन-जागरण पखवाड़ा: मध्य प्रदेश में 25 अप्रैल 2026 तक एक विशेष पखवाड़ा मनाया जाएगा, जिसमें महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों जैसे 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।     नारी शक्ति पदयात्रा: आगामी 15 और 16 अप्रैल को प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्रा' निकाली जाएगी। इसके साथ ही महिला कार्यकर्ताओं द्वारा बाइक रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा।     सम्मेलन और टाउन हाल: प्रदेश भर में टाउन हॉल कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं (जैसे लाड़ली बहना योजना) और आरक्षण कानून के लाभ बताए जाएंगे। संगठनात्मक तालमेल: सभी मंत्री और पार्टी पदाधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर महिलाओं से सीधा संवाद करेंगे। मिस्ड काल अभियान: अभियान के समर्थन में जनमत जुटाने के लिए एक मिस्ड काल नंबर भी जारी किया गया है, जिसके जरिए लोग इस कानून के प्रति अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की कोर ग्रुप की बैठक में भाजपा द्वारा चलाए गए पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की गई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग संपन्न हो चुके हैं, अब जिले और प्रदेश स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। कहां कितना काम हुआ इसकी रिपोर्ट कोर ग्रुप की बैठक में रखी गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

8th Pay Commission: 1.89x हो सकता है फिटमेंट फैक्टर, DA रीसेट होगा, कैलकुलेशन पर नजर डालें

नई दिल्ली DA का 60% पहुंचना सिर्फ एक डेटा पॉइंट नहीं है- यह 8वें वेतन आयोग की पूरी दिशा तय करने वाला संकेत है.अब तस्वीर साफ है न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 गुना होगा, लेकिन संभावनित वास्तविक स्तर 1.89 गुना हो सकता है. बाकी फैसला करेगा- समय, महंगाई और सरकार का संतुलन।  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th pay commission) की सबसे बड़ी पहेली- फिटमेंट फैक्टर कितना होगा? अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है।  महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंच गया, तो यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं रहा, बल्कि नई सैलरी स्ट्रक्चर का बेस बन गया है।  यानी अब सवाल ये नहीं है कि सैलरी बढ़ेगी या नहीं… बल्कि ये है कि कितनी बढ़ेगी और किस फॉर्मूले से बढ़ेगी।  DA का 60% होना बना नया आधार महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंचता है, तो यह केवल एक आंकड़ा नहीं होता, बल्कि अगले वेतन आयोग के लिए सैलरी स्ट्रक्चर का ‘बेस’ बन जाता है। पुराने नियमों के मुताबिक, जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो पिछले DA को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाता है। समझिए गणित:     चूंकि वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से DA 60% तक पहुंच चुका है, इसलिए न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 होना तय है।     यदि फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम रखा गया, तो कर्मचारियों की सैलरी महंगाई की तुलना में कम हो जाएगी। क्या होगा नया फिटमेंट फैक्टर? (1.89x की संभावना) जानकारों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने में यदि देरी होती है और DA 72% से 76% के करीब पहुंचता है, तो नया सैलरी इंडेक्स 1.72 से 1.76 के बीच होगा। ऐसे में सरकार संतुलन बनाने के लिए फिटमेंट फैक्टर को 1.89 गुना तक बढ़ा सकती है। हाइलाइट्स: क्या बदलेगा आपके लिए?     DA होगा जीरो: नया वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) फिर से 0 से शुरू होगा।     सैलरी इंडेक्स: न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 (फ्लोर) होगा, जबकि वास्तविक स्तर 1.89x तक जा सकता है।     पेंशनर्स को लाभ: कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स की पेंशन भी इसी आधार पर संशोधित होगी।     नया फॉर्मूला: नई बेसिक सैलरी = (पुरानी बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर)। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग? फिलहाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक इसकी सिफारिशें लागू हो सकती हैं। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उतना ही बड़ा उछाल आएगा। क्या संकेत मिल रहे हैं?     DA 60%= सैलरी इंडेक्स 1.60     1.60= न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (फ्लोर)     देरी के साथ DA 72-76% तक जा सकता है     संभावित फिटमेंट फैक्टर रेंज= 1.80 से 1.89x     DA एडजस्ट होकर फिर 0 से शुरू होगा DA 60% होते ही चर्चा क्यों तेज हुई? हर वेतन आयोग का बेसिक नियम है: पुराने DA को बेसिक सैलरी में जोड़कर नया वेतन तय होता है।  अब समझिए: अगर DA 60% है, तो इसका मतलब है कि आपकी मौजूदा सैलरी पहले ही 60% महंगाई का असर झेल चुकी है।  इसलिए नया फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम हुआ तो महंगाई की भरपाई ही नहीं होगी।  यही वजह है कि 1.60 अब न्यूनतम सीमा बन चुका है. Q1: DA 60% कैसे पहुंचा और इसका मतलब क्या है? CPI-IW (Industrial Workers Index) के आधार पर DA तय होता है.     दिसंबर 2025 इंडेक्स: 148.2     DA गणना: 60.35%     लागू स्तर: 60% इसका मतलब: अगर आपकी बेसिक सैलरी 100 थी, तो अब प्रभावी सैलरी 160 के बराबर है. Q2: फिटमेंट फैक्टर का असली गणित क्या कहता है? फॉर्मूला बहुत सीधा है: नई सैलरी= पुरानी बेसिक × फिटमेंट फैक्टर DA 60%- इंडेक्स= 1.60 लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती. अगर वेतन आयोग लागू होने में देरी होती है: DA और बढ़ेगा, 72%-76% तक पहुंच सकता है. इससे नया इंडेक्स बनता है: 1.72-1.76 अब इसमें जुड़ता है: स्ट्रक्चरल बफर (10-13%) Final अनुमान: 1.80 से 1.89 (सबसे यथार्थ रेंज) Q3: क्या 1.89 फाइनल हो सकता है? सीधा जवाब- संभावना मजबूत है, लेकिन गारंटी नहीं. क्यों? क्योंकि सरकार इन चीजों को भी देखती है:     आर्थिक स्थिति     वेतन बढ़ोतरी का बोझ     कर्मचारियों की मांग     महंगाई का भविष्य यानी यह सिर्फ गणित नहीं, पॉलिसी डिसीजन भी है

भारत और रूस की साझेदारी ने पलट दिया गेम, ट्रंप के रोकने के बावजूद 3 साल में ऐसा नहीं हुआ

नई दिल्ली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच भारत ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. दुनिया जहां तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं भारत ने बिना देरी किए रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से तेज कर दी है. भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी ग्लोबल व्यवधान का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यही वजह है कि अब फोकस सस्ते तेल से ज्यादा लगातार सप्लाई पर है।  ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत ने रूस से करीब 1.98 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल खरीदा. यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर 1.57 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आया है, लेकिन इसकी वजह मांग में कमी नहीं बल्कि तकनीकी कारण हैं. नायरा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस शटडाउन के चलते अस्थायी गिरावट आई है. बाजार को उम्मीद है कि अगले महीने से फिर तेजी देखने को मिलेगी।  अब सप्लाई सिक्योरिटी है फोकस वेस्ट एशिया से आने वाली सप्लाई में अनिश्चितता ने भारतीय रिफाइनरियों की प्राथमिकता बदल दी है. अब सवाल यह नहीं है कि तेल कितना सस्ता है, बल्कि यह है कि वह लगातार मिल पा रहा है या नहीं. ऊर्जा बाजार की विशेषज्ञ वंदना हरि (Vandana Hari) का कहना है कि “भारत जितना रूसी कच्चा तेल हासिल कर सकता है, उतना खरीद रहा है. जब तक पर्शियन गल्फ से सप्लाई बाधित रहेगी, तब तक भारत रूसी तेल की अधिकतम खरीद जारी रखेगा।  वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा (Sujata Sharma) ने कहा, “हमारी प्राथमिकता घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना है. यह फैसला तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर लिया जाता है।  पुरानी रणनीति की वापसी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने डिस्काउंट के चलते रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई थी. उस समय भारत रूस का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था. हालांकि 2025 में अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के कारण खरीद में थोड़ी कमी आई, लेकिन मौजूदा संकट ने भारत को फिर उसी रणनीति की ओर लौटा दिया है।  घट रहा ग्लोबल स्टॉक, बढ़ रही टेंशन ग्लोबल मार्केट में एक और संकेत चिंता बढ़ाने वाला है. समुद्र में जमा रूसी तेल का स्टॉक तेजी से घट रहा है. पिछले साल के अंत में यह करीब 155 मिलियन बैरल था, जो अब घटकर करीब 100 मिलियन बैरल रह गया है. इसका मतलब है कि डिमांड बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव लगातार बना हुआ है।