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मेधा शंकर ने यामी गौतम से तुलना पर किया खुलासा- मुझे फर्क नहीं पड़ता, मैं उनकी फैन हूं

मुंबई  अभिनेत्री मेधा शंकर इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में लीड रोल निभाने के कारण उनकी तुलना पहली फिल्म की हीरोइन यामी गौतम से हो रही है, लेकिन मेधा ने इन तुलनाओं पर साफ कहा है कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आईएएनएस से खास बातचीत में मेधा शंकर ने बताया, “ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं यामी गौतम और आदित्य धर दोनों को बहुत पसंद करती हूं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि मैं उनकी कितनी बड़ी फैन हूं। यामी हमेशा से ही एक बेहतरीन अभिनेत्री रही हैं। कभी-कभी सम्मान मिलने में थोड़ा समय लग जाता है लेकिन उनका समय जरूर आएगा।” मेधा ने आगे जोड़ा, “यह तुलना की बात नहीं है। मैं उन सभी लोगों से प्रेरित होती हूं जिन्होंने मुझसे पहले, बाद या साथ में बेहतरीन काम किया है। मैंने कभी किसी से अपनी तुलना नहीं की और अगर कोई दूसरा करता भी है तो मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।” मेकर्स ने फिल्म का नया गाना 'तुमपे ही प्यार आ गया' हाल ही में जारी किया है। इस गाने का संगीत सुशांत-शंकर की जोड़ी ने मिलकर तैयार किया जबकि इसके बोल कुमार ने लिखे हैं। गाने को लेकर मेधा शंकर ने भी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, "जब मैंने पहली बार यह गाना सुना, तो मैं लिरिक्स में कहीं खो सी गई थी। यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि प्यार के अलग-अलग रंगों को दिखाने वाला एक अनुभव है।" ‘गिन्नी वेड्स सनी’ का पहला भाग साल 2020 में रिलीज हुआ था। इस हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी में यामी गौतम और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था। अब इसके सीक्वल ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ में नई जोड़ी नजर आएगी। फिल्म में मेधा शंकर के साथ अविनाश तिवारी लीड रोल में हैं। यह फिल्म 24 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ में मेधा शंकर पहली बार रोमांटिक कॉमेडी जॉनर में लीड रोल निभा रही हैं। दर्शक इस नई जोड़ी को लेकर काफी उत्सुक हैं।

सुकमा की बेटी लावण्या को मिली नई मुस्कान, मुख्यमंत्री ने दिया आशीर्वाद

रायपुर.  कहते हैं कि सही समय पर मिला इलाज किसी की पूरी ज़िंदगी बदल सकता है। सुकमा जिले की 13 वर्षीय बालिका टुंकी लावण्या की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है, जिसने कठिन परिस्थितियों और वर्षों की पीड़ा के बाद आखिरकार एक नई मुस्कान और नया आत्मविश्वास पाया है। लावण्या, जो कन्या आश्रम, गोल्लापल्ली (पालाचेलमा) की निवासी है, जन्म से ही क्लैफ्ट लिप (कटे होंठ) जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। यह बीमारी सिर्फ शारीरिक दर्द तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके बचपन पर सामाजिक झिझक और आत्मविश्वास की कमी का भी गहरा असर डाल रही थी। परिवार में जागरूकता की कमी और इलाज को लेकर भय के कारण लंबे समय तक उसका उपचार नहीं हो पाया। लेकिन किस्मत ने तब करवट ली जब लावण्या मेगा सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य शिविर में पहुंची। शिविर में कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण से मिली। उन्होंने लावण्या को स्वास्थ्य शिविर में जांच कराके बेहतर इलाज का प्रबंध किया।  स्वास्थ्य शिविर बना जीवन बदलने का मोड़ शिविर में मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न सिर्फ लावण्या की जांच की, बल्कि उसके परिवार को समझाकर इलाज के लिए तैयार किया। इसी शिविर में आयुष्मान कार्ड बनाया गया। जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए लावण्या को कालाडा अस्पताल, रायपुर भेजा गया। इस दौरान आरबीएसके चिरायु टीम ने उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई। 10 अप्रैल 2026: जब दर्द की जगह उम्मीद ने ले ली सभी प्रक्रियाओं और समन्वय के बाद आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को लावण्या का सफल ऑपरेशन किया गया। यह सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उसके जीवन के अंधेरे में उम्मीद की रोशनी थी। ऑपरेशन के बाद लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों का दर्द और ताने जैसे उसी दिन समाप्त हो गए। मुख्यमंत्री ने की मुलाकात, दिया आशीर्वाद इस कहानी का सबसे भावुक पल तब आया जब 13 अप्रैल 2026 को सुकमा दौरे के दौरान माननीय मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने लावण्या से मुलाकात की। उन्होंने लावण्या के स्वास्थ्य की जानकारी ली, उसे फल भेंट किए और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। सरकारी योजनाओं की सफलता की मिसाल बनी लावण्या आज लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान केवल उसकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य विभाग का समर्पण और समय पर उपचार दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में भी चमत्कार कर सकते हैं। लावण्या अब न सिर्फ स्वस्थ है, बल्कि उसके भीतर एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी लौट आया है। उसकी मुस्कान आज पूरे सुकमा के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

स्कूटर में 150 या 200 सीसी नहीं, अब मिलेगा 400 सीसी का इंजन – मुंबई में पेश हुआ नया मॉडल

मुंबई  भारतीय दोपहिया बाजार में जहां अब तक 100 से 200 सीसी क्षमता वाले स्कूटरों का दबदबा रहा है, वहीं अब इस सेगमेंट में एक बड़ा बदलाव आने की आहट सुनाई दे रही है। सुजुकी मोटरसाइकिल ने मुंबई में आयोजित एक विशेष उत्सव के दौरान अपने प्रीमियम श्रेणी के बड़े स्कूटर को पेश कर यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारतीय ग्राहकों को ज्यादा ताकतवर और लंबी दूरी के लिए उपयुक्त स्कूटर का विकल्प भी मिल सकता है। कंपनी ने अपने नए बर्गमैन 400 मॉडल को प्रदर्शित किया है, जिसने दोपहिया प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस स्कूटर के आधिकारिक लॉन्च को लेकर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन इसे देश में पेश करने से यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी भारतीय बाजार की प्रतिक्रिया को समझना चाहती है। अगर ग्राहकों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो भविष्य में इसे भारतीय सड़कों पर उतारा जा सकता है। प्रीमियम श्रेणी में नया अनुभव बर्गमैन 400 को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम मैक्सी शैली के टूरिंग स्कूटर के रूप में जाना जाता है। यह पारंपरिक स्कूटरों की तुलना में काफी बड़ा, आकर्षक और सुविधाजनक है। इसका डिजाइन ऐसा है, जो इसे रोजमर्रा के उपयोग के साथ-साथ लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी उपयुक्त बनाता है। चौड़ी और आरामदायक सीट, ऊंची वायुरोधी स्क्रीन और संतुलित ढांचा इसे लंबी यात्राओं के दौरान भी थकान कम करने में मदद करता है। दमदार इंजन और शानदार प्रदर्शन इस स्कूटर की सबसे बड़ी खासियत इसका 400 सीसी क्षमता वाला इंजन है, जो इसे सामान्य स्कूटरों से अलग बनाता है। यह तरल शीतलन प्रणाली से लैस एकल सिलेंडर इंजन है, जिसे स्वचालित गियर प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। यह इंजन लगभग 28.5 अश्वशक्ति की ताकत और 35 न्यूटन मीटर का बल उत्पन्न करता है, जो इसे तेज रफ्तार और बेहतर प्रदर्शन देने में सक्षम बनाता है। आधुनिक सुविधाओं से लैस बर्गमैन 400 केवल ताकत के मामले में ही नहीं, बल्कि सुविधाओं के मामले में भी काफी उन्नत है। इसमें पूरी तरह से प्रकाश उत्सर्जक डायोड आधारित लाइटिंग प्रणाली दी गई है, जो बेहतर रोशनी प्रदान करती है। साथ ही, इसमें अर्ध-डिजिटल सूचना पटल, ट्रैक्शन नियंत्रण प्रणाली और दोहरे चैनल वाला एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम भी दिया गया है, जिससे सुरक्षा और नियंत्रण दोनों बेहतर होते हैं। इसके अलावा, इस स्कूटर में सीट के नीचे लगभग 42 लीटर का बड़ा स्टोरेज स्पेस दिया गया है, जिसमें हेलमेट समेत कई जरूरी सामान आसानी से रखा जा सकता है। आगे की तरफ भी अतिरिक्त स्टोरेज की सुविधा मिलती है, जिससे यह रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होता है। भारत में लॉन्च को लेकर क्या संकेत हालांकि अभी तक कंपनी ने इसके लॉन्च की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसे भारतीय मंच पर पेश करना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। भारतीय बाजार में अब धीरे-धीरे प्रीमियम और लाइफस्टाइल आधारित दोपहिया वाहनों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में यह स्कूटर एक नए सेगमेंट की शुरुआत कर सकता है, जहां ग्राहक केवल माइलेज ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन और आराम को भी प्राथमिकता देंगे। कीमत होगी सबसे बड़ा फैक्टर अगर इस स्कूटर को भारत में लॉन्च किया जाता है, तो इसकी कीमत सबसे अहम भूमिका निभाएगी। प्रीमियम फीचर्स और बड़े इंजन के चलते इसकी कीमत सामान्य स्कूटरों से काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में कंपनी को कीमत तय करते समय भारतीय ग्राहकों की जरूरत और बजट दोनों का संतुलन बनाए रखना होगा। कुल मिलाकर, बर्गमैन 400 की पेशकश ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में भारतीय स्कूटर बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह स्कूटर न केवल तकनीक और ताकत का नया उदाहरण पेश करता है, बल्कि ग्राहकों की बदलती पसंद का भी संकेत देता है।

यूरोप की आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अमेरिका को किनारे करते हुए ‘यूरोपियन NATO’ की योजना

पेरिस मिडिल-ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक तनाव के बीच यूरोप ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट संकट और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच, यूरोपीय देशों ने अब अमेरिका से अलग होकर अपनी स्वतंत्र सुरक्षा रणनीति बनाने का फैसला किया है। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर 'यूरोपियन NATO' कहा जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शिपिंग रूट को फिर से बहाल करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ​अमेरिका से किनारा: क्यों अलग राह पर चला यूरोप?  इस नई सुरक्षा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें अमेरिका को जानबूझकर अलग रखा गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध और नौसैनिक नाकाबंदी जैसी रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद उभरे हैं। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जर्मनी जैसे देश, जो पहले कभी अलग सैन्य गुट बनाने के खिलाफ थे, अब इस 'यूरोपियन NATO' की पहल का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। ​होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और मिशन के 3 मुख्य लक्ष्य  ​पूरी यूरोपियन रणनीति मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है, जहाँ से वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया युद्ध और समुद्री खतरों की वजह से यहाँ शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस नए गठबंधन के तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:     ​युद्ध के दौरान संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना।     ​समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना।     ​भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक स्थायी निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना। यूरोप का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद इस रूट को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस इस पहल की अगुवाई कर रहे हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं, जिसमें इस नई सुरक्षा योजना पर चर्चा होगी।  इस प्रस्ताव के तहत एक बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाया जाएगा, जो समुद्री जहाजों की सुरक्षा, माइन हटाने और निगरानी का काम करेगा. खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमांड के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में. यही बदलाव इस योजना को सबसे अलग बनाता है।  दरअसल, यह कदम सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है. हाल के दिनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद बढ़े हैं. कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियान या ब्लॉकेड जैसी रणनीतियों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।  यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है. जर्मनी जैसे देश, जो पहले अलग सैन्य रास्ते के खिलाफ थे, अब इस पहल का समर्थन कर रहे हैं. अगर जर्मनी इसमें शामिल होता है, तो इसकी माइन-क्लीयरिंग क्षमता इस मिशन को और मजबूत बना सकती है।  इस योजना के तीन मुख्य लक्ष्य बताए जा रहे हैं. पहला, युद्ध के दौरान फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना. दूसरा, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना और तीसरा, भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना।  यह पहल पहले भी कुछ हद तक देखी जा चुकी है. उदाहरण के लिए, यूरोप ने रेड सी में "ऑपरेशन एस्पाइड्स" के तहत अपने जहाजों को सुरक्षा दी थी, जो अमेरिका के अलग मिशन से स्वतंत्र था. अब उसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।  हालांकि, इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या ईरान इस तरह के किसी मिशन को मंजूरी देगा. इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान किसी तरह का नया टकराव न हो क्योंकि अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी नौसेना के जरिए दबाव बना रहा है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ब्लॉकेड लगा रखा है।  ​संसदीय और कूटनीतिक पहल: 40 देशों की महाबैठक  इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में नई सुरक्षा योजना और यूरोपीय कमांड के तहत बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाने पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमान के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में। यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है कि यूरोप अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। ​चुनौतियां और भविष्य: क्या ईरान इसको मंजूरी देगा?​  हालांकि यह योजना सुनने में जितनी प्रभावी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या ईरान इस तरह के किसी यूरोपीय मिशन को अपने क्षेत्र में मंजूरी देगा? इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान अमेरिका के साथ कोई नया टकराव न हो, क्योंकि अमेरिका पहले से ही अपनी नौसेना के जरिए इस क्षेत्र में दबाव बनाए हुए है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह 'यूरोपियन NATO' भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।  

MP का नमकीन हुआ महंगा, 20-40 रुपए किलो बढ़े दाम, युद्ध और सप्लाई ठप होने से 80 देशों पर पड़ा असर

इंदौर  देश की नमकीन राजधानी माने जाने वाले इंदौर का नमकीन उद्योग इस समय दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। एक ओर उत्पादन लागत में तेज़ बढ़ोतरी के कारण नमकीन के दाम 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर दिख रहा।  इंदौर से रोजाना करीब 100 टन नमकीन देश-विदेश में भेजा जाता है। यह सप्लाई भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ 80 से अधिक देशों तक पहुंचती है। हालांकि मौजूदा हालात में घरेलू बिक्री (डोमेस्टिक सेल) के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) कारोबार भी प्रभावित हुआ है। इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ के सचिव अनुराग बोथरा के मुताबिक, लागत बढ़ने के कारण नमकीन की कीमतों में औसतन 20 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है, जिससे ग्राहकी पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि पीएनजी गैस की सीमित उपलब्धता (करीब 60%) और मूंगफली तेल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ी है। इसके अलावा पैकिंग मटेरियल के दाम में भी बड़ा उछाल आया है- जो पहले 190–195 रुपए प्रति किलो मिलता था, वह अब करीब 300 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। नमकीन उद्योग में इस्तेमाल होने वाली हींग की कीमतों में भी 5% से 15% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे लागत और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में इंदौर के नमकीन उद्योग को और बड़े आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। दाम आगे भी बढ़ने के संकेत इंदौर के नमकीन बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ के सचिव अनुराग बोथरा ने बताया कि अभी जो दाम बढ़ाए गए हैं, वे सालभर स्थिर रहेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि अगले 10 दिनों में क्या स्थिति होगी, इसका भी अनुमान लगाना मुश्किल है। 40 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी नमकीन व्यापारी हीतेश जैन के मुताबिक, सामान्य नमकीन जो पहले 260 से 280 रुपए प्रति किलो मिलता था, अब 280 से 300 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं प्रीमियम नमकीन 280–300 रुपए से बढ़कर 300 से 340 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। एक्स्ट्रा प्रीमियम नमकीन, जिसमें ड्रायफ्रूट्स का उपयोग होता है, उसमें करीब 40 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मूंगफली तेल, मिर्च-मसाले और पैकिंग सामग्री महंगी होने के कारण लगभग 20 रुपए प्रति किलो तक कीमत बढ़ानी पड़ी है। विदेश पहुंचने का समय दोगुना हुआ इंदौर में सेंव की खपत भी काफी अधिक है। शहर में रोजाना करीब 45 टन सेंव की खपत होती है। संगठित क्षेत्र के कारखानों में प्रतिदिन 30 टन सेंव तैयार होती है, जिसमें से 15 टन शहर में खपती है, जबकि असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबारी करीब 30 टन सेंव का उत्पादन कर स्थानीय मांग पूरी करते हैं। वैश्विक हालात का असर निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले इंदौर से दुबई या ओमान तक नमकीन पहुंचने में करीब 30 दिन लगते थे, लेकिन अब सुरक्षित मार्गों से भेजने पर 60 दिन तक का समय लग रहा है, जिससे लॉजिस्टिक लागत दोगुनी हो गई है। इसी तरह यूएसए और कनाडा में पहले 40–45 दिन में पहुंचने वाला माल अब 90 दिन तक ले रहा है। खाड़ी देशों के लिए सप्लाई फिलहाल पूरी तरह से प्रभावित है। निर्यातकों के अनुसार 40 से 50 कंटेनर रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई समय 25–30 दिन से बढ़कर 50–60 दिन हो गया है और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

गोल्ड लोन की डिमांड बढ़ी, पिछले 3 वर्षों में 4 गुना बढ़कर टिकट साइज हुआ 2 लाख रुपए

नई दिल्ली   भारत में गोल्ड लोन पिछले तीन वर्षों में चार गुना तक बढ़ गए हैं, और औसत लोन राशि लगभग दोगुनी होकर लगभग 2 लाख रुपए हो गई है, जो उधारकर्ताओं की मांग में तीव्र वृद्धि और गोल्ड लोन की बढ़ती स्वीकृति को दर्शाती है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।  ट्रांसयूनियन सिबिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 से गोल्ड लोन बैलेंस में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। इससे भारत के रिटले लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 तक लगभग 11 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोल्ड लोन में यह वृद्धि उधारकर्ताओं द्वारा इसे अपनाने में वृद्धि, टिकट राशि में वृद्धि, उधारदाताओं की व्यापक भागीदारी और उधारकर्ताओं के प्रोफाइल में बदलाव के कारण हुई है। इस सेगमेंट में अधिक उपभोक्ता प्रवेश कर रहे हैं, जिनमें महिलाएं और बेहतर क्रेडिट इतिहास वाले व्यक्ति शामिल हैं। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) में वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही है, जिनकी गोल्ड लोन बैलेंस में हिस्सेदारी मार्च 2022 में 7 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 11 प्रतिशत हो गई। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है, जिनकी हिस्सेदारी इसी अवधि में 57 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई। प्रति खाता औसत गोल्ड लोन बैलेंस मार्च 2022 में 1.1 लाख रुपए से बढ़कर दिसंबर 2025 में 1.9 लाख रुपए हो गया है। लोन देने की मात्रा 2022 की पहली तिमाही से 2.3 गुना बढ़ गई, जबकि लोन मूल्य लगभग पांच गुना बढ़ गया। औसत लोन वैल्यू 2022 की पहली तिमाही में 90,000 रुपए से बढ़कर 2025 की चौथी तिमाही में 1.96 लाख रुपए हो गई। लोन लेने वालों की प्रोफाइल में भी बदलाव आया है, जिसमें प्राइम और प्राइम से अधिक लोन लेने वालों का हिस्सा 2022 में 43 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में लगभग 52 प्रतिशत हो गया है, जबकि नए लोन लेने वाले ग्राहकों का हिस्सा 12 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत हो गया है, जो अधिक परिपक्व और विविध लोन लेने वाले आधार को दर्शाता है। रिपोर्ट में बताया गया कि उधारकर्ताओं का लीवरेज भी बढ़ा है, प्रति उधारकर्ता औसत बकाया राशि दिसंबर 2022 में 1.9 लाख रुपए से बढ़कर दिसंबर 2025 में 3.1 लाख रुपए हो गई है। 2.5 लाख रुपए से अधिक के ऋण वाले उधारकर्ताओं का हिस्सा 2022 में 10 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गया है। ट्रांसयूनियन सीआईबीएल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा कि भारत में सोने का हमेशा से ही गहरा वित्तीय और सांस्कृतिक महत्व रहा है, लेकिन अब हम गोल्ड लोन के उपयोग में एक संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं। उन्होंने कहा, "गोल्ड लोन तेजी से मुख्यधारा, संगठित और सुलभ सुरक्षित लोन का रूप ले रहे हैं। इनकी तीव्र वृद्धि उधारदाताओं के आत्मविश्वास और उपभोक्ताओं की बढ़ती स्वीकृति दोनों को दर्शाती है।"

भोरमदेव अभयारण्य में बाघों के संरक्षण के लिए गांवों को खाली किया जाएगा, प्राकृतिक धरोहर को बचाने की योजना

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में एक बड़ा और दूरगामी फैसला आकार ले रहा है। भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस योजना का सबसे अहम हिस्सा है-अभयारण्य के भीतर बसे गांवों का पुनर्वास। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। वन विभाग द्वारा तैयार की गई योजना के तहत भोरमदेव अभ्यारण्य में लगभग 34 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग विकसित किया गया है। सफारी के दौरान पर्यटक गौर, चीतल, सांभर, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में नजदीक से देख सकेंगे। यह मार्ग मैकल पर्वतमाला के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जो प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। सकरी नदी मार्ग बनेगा विशेष आकर्षण इस जंगल सफारी की सबसे बड़ी खासियत सकरी नदी मार्ग है। सफारी के दौरान पर्यटकों को करीब 17 बार नदी पार करने का रोमांचक अनुभव मिलेगा। यह अनोखा सफर रोमांच और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए खास आकर्षण साबित होगा। इस परियोजना में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। सफारी वाहनों का संचालन वन प्रबंधन समिति थंवरझोल द्वारा किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोहरा आकर्षण जंगल सफारी शुरू होने के बाद भोरमदेव आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब ऐतिहासिक मंदिर दर्शन के साथ-साथ वन्यजीवन का रोमांच भी एक ही यात्रा में अनुभव कर सकेंगे। इससे भोरमदेव क्षेत्र को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वन विभाग के अनुसार सुरक्षा और संचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं और जल्द ही सफारी को औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।  रिजर्व फाॅरेस्ट न बनने से अभयारण्य क्षेत्र की 15 हजार से अधिक आबादी को फायदा कुल क्षेत्र में 160 किमी का घना जंगल एनटीसीए के कहने पर काम हुआ था शुरू भोरमदेव अभयारण्य 351.24 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसमें 160 किमी कोर एरिया यानि घने जंगल हैं। 152 वर्ग किमी बफर एरिया है। कुल 35 वन परिक्षेत्र में से भाेरमदेव और चिल्फी परिक्षेत्र मिलाकर अभयारण्य बनाते हैं। एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी) के कहने पर ही वन विभाग ने रेंगाखार, चिल्फी और कवर्धा को बांटकर बाघ के संरक्षण, संवर्धन का काम बढ़ाया था। इसलिए कान्हा किसली के बाघ आ रहे हैं यहां, पर्यटक भी बढ़े कान्हा किसली के जंगलों में बाघों की संख्या ज्यादा हो गई है। इस बीच पर्यटक बढ़े हैं। वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार बाघों को वहां से ज्यादा बेहतर और सुरक्षित वातावरण यहां भोरमदेव में मिल रहा है। यहां हिरण और चीतल जैसे जानवर बड़ी संख्या में है। इसी वजह से यहां बाघ आ रहे हैं। थंवरझोल के 37 परिवारों को शिफ्ट करने की बन चुकी थी योजना टाइगर रिजर्व के लिए कवर्धा परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत चौरा के आश्रित गांव थवरझोल में 37 परिवारों को उनकी अचल संपत्ति की कीमत देकर विस्थापन करने की योजना बन चुकी थी। वन विभाग ने गांव का सर्वे करा लिया था। इनके विस्थापन के आदेश भी जारी हो चुके थे। इन परिवारों को 3.70 करोड़ रुपए में जंगल से बाहर शिफ्ट किया जाता। भू- अर्जन के बदले में उन्हें 10-10 लाख रुपए दिए जाते। ताकि उनके जाने पर गांव में बाघों के रहवास के लिए सुविधाएं डेवलप कर सकें।  

अगले 36 घंटों में लू का कहर, इन इलाकों में बढ़ेगी गर्मी, दिल्ली-NCR का भी रहेगा असर

नईदिल्ली  अप्रैल माह की सर्द शुरुआत के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास में अब पारा तेजी से चढ़ने लगा है। सफदरजंग मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक था, जबकि पालम में 37.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक था। बुधवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री रहने के आसार हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जल्द ही पारा 40 डिग्री के पार हो सकता है। IMD के मुताबिक दिल्ली-NCR में इस सप्ताहांत पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर प्रचंड गर्मी का अहसास करा सकता है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 48 घंटों में देश के कई हिस्सों में लू चलने की संभावना है। IMD द्वारा जारी पूर्वानुमानों के विस्तृत विश्लेषण से यह अनुमान लगाया गया है कि अगले 36  घंटों के अंदर मध्य और पूर्वी भारत में तापमान बढ़ने के साथ-साथ हालात सबसे ज़्यादा खराब होंगे। वहां लू के थपेड़े चलने की संभावना है। IMD ने कहा है कि अप्रैल 2026 के मध्य से मध्य और पूर्वी भारत के अलग-अलग इलाकों में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने इसके लिए आधिकारिक चेतावनी भी जारी की है। कहां-कहां और कब से लू? IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली-NCR में इस मौसम में पहली बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा पार कर सकता है, जबकि उससे सटे उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। मौसम विभाग ने कहा है कि महाराष्ट्र के विदर्भ और उससे सटे कुछ इलाकों में 15 से 18 अप्रैल तक, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 15 से 17 अप्रैल तक और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 16 से 18 अप्रैल तक लू चलने की प्रबल संभावना है। ओडिशा- मध्यप्रदेश का क्या हाल? मौसम विभाग के मुताबिक, ओडिशा के अंदरूनी और कुछ तटीय इलाकों में भी 15 से 18 अप्रैल तक लू का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में 16 से 19 अप्रैल तक लू चलने का अनुमान है। इसी तरह महाराष्ट्र के नागपुर, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती और ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर जैसे शहरों में भी 16 अप्रैल तक तापमान बढ़कर 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। IMD ने कहा है कि कुछ इलाकों में पारा इससे भी ऊपर जा सकता है। यानी अप्रैल में ही जून का अहसास होने वाला है। और किन शहरों में प्रचंड गर्मी के आसार मौसम विभाग द्वारा संभावित तापमान का जो मानचित्र जारी किया गया है, उसके मुताबिक आने वाले दिनों में ओडिशा, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में पारा 40 से 42 डिग्री तक पहुंच सकता है। इनमें गया, पटना, रांची, राउरकेला, संभलपुर, भुवनेश्वर, कटक, पुरी, खड़गपुर, जमशेदपुर, धनबाद, आसनसोल, बोकारो, दुर्गापुर, कोलकाता, भागलपुर और सिल्लीगुड़ी भी शामिल है। इन शहरों में पारा @42 के पार इनके अलावा उज्जैन, इंदौर, भोपाल, सागर, जबलपुर, अकोला, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर, भिलाई, सतना, बिलासपुर, कोरबा में तापमान 42 डिग्री को पार सकता है। तेलंगाना के भी कई इलाकों में तापमान 43 डिग्री पार कर चुका है। इसके अलाला मौसम विभाग ने 17 और 18 अप्रैल को झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। इनमें खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा और सरायकेला-खरसांवा जैसे जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर के समय तेज और गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। हालांकि 17 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में आंशिक बादल छाने और कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने के आसार नहीं हैं। 19 अप्रैल से पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने और आसमान साफ रहने का अनुमान है, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है।

MP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 19 जिलों के SP होंगे बदले, IPS ट्रांसफर लिस्ट लगभग तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और विभागीय हलचलों के अनुसार राज्य में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के तबादलों की व्यापक सूची लगभग तैयार हो चुकी है, जिसके तहत करीब 25 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें लगभग 19 से 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) में बदलाव प्रस्तावित बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के कार्य प्रदर्शन को लेकर वरिष्ठ स्तर पर असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। वहीं कुछ अधिकारियों के खिलाफ संगठन स्तर पर लगातार शिकायतें भी प्राप्त हो रही थीं। इसके अलावा कुछ जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों के प्रमोशन के चलते भी पद रिक्त होने की स्थिति बन रही है, जिसके कारण यह व्यापक फेरबदल आवश्यक माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षकों के बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं। इसके साथ ही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में भी बदलाव की चर्चा तेज है, हालांकि यहां नए नामों पर अंतिम निर्णय अभी लंबित बताया जा रहा है। इसके अलावा खंडवा के एसपी मनोज राय, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढ़ा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, भिंड के एसपी असित यादव, धार के एसपी मयंक अवस्थी, रीवा के एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, डीसीपी भोपाल विवेक सिंह, डीसीपी इंदौर कुमार प्रतीक तथा झाबुआ के एसपी डॉ. शिवदयाल के प्रमोशन के बाद इन पदों पर भी नए अधिकारियों की तैनाती तय मानी जा रही है। प्रशासनिक हलकों में इस संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि नई सूची जारी होने के बाद कई जिलों में पुलिस नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका सीधा असर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं।

एमपी में 345 विधायक और 45 सांसद, 33% महिला आरक्षण लागू होने से सत्ता के समीकरण में होगा बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में एक ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो अगले कई दशकों की राजनीति को नई दिशा देगा। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन) पेश होने जा रहा है। इस मास्टर प्लान के लागू होने से मध्य प्रदेश में न केवल महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी। विधानसभा में होंगी 114 महिलाएं प्रस्तावित बदलावों के तहत, मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 से बढ़ाकर 345 किए जाने की योजना है। इस विस्तारित सदन में महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में मात्र 27 महिला विधायकों की तुलना में एक बड़ी छलांग है।सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े में भी बदलाव आएगा। अब राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यह बदलाव न केवल छोटे दलों की भूमिका को प्रभावित करेगा, बल्कि बड़े दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा। कैबिनेट का भी होगा विस्तार परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी। लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है। विधानसभा सीटें 230 345 +115 बहुमत का आंकड़ा 116 174 +58 महिला विधायक (आरक्षित) 27 (अनुमानित) 114 ऐतिहासिक वृद्धि लोकसभा सीटें 29 43 +14 मंत्री परिषद की क्षमता 35 52 तक +17