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महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की तलाश में केरल में छापा, एमपी पुलिस कर रही है जांच

 खरगोन मध्य प्रदेश की रहने वाली महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की शादी देशभर में चर्चा में बनी हुई है। वायरल गर्ल नाबालिग होने की खबरों के बाद एमपी पुलिस एक्टिव है। बताया जा रहा है कि पीड़िता और आरोपी फरमान गायब हैं। पुलिस उन्हें ढूंढ़ती हुई केरल पहुंच गई है। वहां जगह-जगह छापामारी कर दोनों को तलाशा जा रहा है। केरल में सबूत जुटा रही पुलिस ​महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की शादी के मामले में खरगोन एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। यही टीम जांच के लिए आज केरल पहुंच गई है। 4 सदस्यीय इस टीम में एक थाना प्रभारी, एक सब-इंस्पेक्टर, एक महिला सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल शामिल हैं। जानकारी मिल रही है कि टीम ने कई जगह छापामारी की है। जहां से पुलिस सबूत जुटा रही है। केरल के स्थानीय थाने की पुलिस के साथ मिलकर मध्य प्रदेश पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। शादी के बाद हुई थी नाबालिग होने की पुष्टि बता दें कि​ शादी के बाद वायरल गर्ल के नाबालिग होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद ही एमपी पुलिस के पास खरगोन थाने में आरोपी फरमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। FIR दर्ज होने के बाद से ही केरल की स्थानीय पुलिस के साथ ही एमपी पुलिस भी पूरी तरह सक्रिय हो गई। लेकिन अब तक वायरल गर्ल और फरमान नहीं मिल सके हैं। एमपी पुलिस का कहना है कि आरोपी फरमान की तलाश और पीड़िता की बरामदगी के लिए विभाग ने अब हर स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। पिता के खिलाफ जाकर मुस्लिम बॉयफ्रेंड से की थी शादी बता दें कि वायरल गर्ल केरल में एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। इसी दौरान उसकी मुलाकात फरमान खान से हुई थी। इस बीच दोनों दोनों करीब आए और यह करीबी प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। बता दें कि दोनों की शादी को लेकर पिता ने भी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वे दोनों के रिश्ते से नाराज थे और शादी के सख्त खिलाफ थे। उनका कहना था कि उसने अपने बॉयफ्रेंड से शादी उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर की थी। फरमान ने शेयर किया वीडियो, भाग गई वायरल गर्ल, बड़ा खुलासा बता दें कि इन दिनों फरमान खान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पोस्ट में फरमान नजर आ रहा है। वह वीडियो में कह रहा है कि शादी के कुछ दिन बाद ही वायरल गर्ल उसे छोड़कर भाग गई। वह कह रहा है कि वह राजस्थान के पुष्कर में आया हूं, उसे ढूंढ़ रहा हूं।

चिन्हारी योजना से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को मिल रही है नई शक्ति

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित चिन्हारी योजना राज्य की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाकारों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि कलाकारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से भी सशक्त किया जा रहा है। चिन्हारी योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोक कलाकारों, शिल्पकारों, गायकों और नर्तकों की पहचान कर उनका पंजीयन किया जा रहा है। इससे एक व्यापक सांस्कृतिक डेटाबेस तैयार हो रहा है, जो भविष्य में कला के संरक्षण और संवर्धन में सहायक सिद्ध होगा। योजना के अंतर्गत चयनित कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा उन्हें राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर भी दिए जाते हैं। इसके साथ ही मेलों, उत्सवों और शासकीय कार्यक्रमों में इन कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिल रही है। चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृतिनई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देते हुए अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन में युवाओं को पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चिन्हारी योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विलुप्त होती लोक परंपराओं का संरक्षण और पुनर्जीवन है। इसके तहत लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की जा रही है। साथ ही, डिजिटल माध्यमों के जरिए इन कलाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, स्थानीय कला को पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। चिन्हारी योजना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और कलाकारों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

मध्यप्रदेश: पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत 3% बढ़ी, नया आदेश जारी

भोपाल एमपी में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियोें और पेंशनर्स को सौगातों का सिलसिला लगातार जारी है। अब मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि की है। कंपनी में 1 जून 2005 के बाद सेवानिवृत्त सभी पेंशनरों, परिवार पेंशनरों व 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनरों को महंगाई राहत में वृद्धि दी जा रही है। छठवें वेतनमान के अंतर्गत 257 प्रतिशत एवं सातवें वेतनमान अंतर्गत 58 प्रतिशत मंहगाई राहत देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सेवानिवृत्त और परिवार पेंशनर को छटवें वेतनमान अंतर्गत 01 जनवरी 2026 से 05 प्रतिशत की वृद्धि की गई मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सेवानिवृत्त पेंशनर और परिवार पेंशनर को छटवें वेतनमान अंतर्गत 01 जनवरी 2026 से 05 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सातवें वेतनमान के अंतर्गत पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। आदेश के अनुसार माह जनवरी 2026 से बढ़ी हुई मंहगाई राहत राशि का भुगतान किया जाएगा आदेश के अनुसार माह जनवरी 2026 से बढ़ी हुई मंहगाई राहत राशि का भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सभी पात्र पेंशनर्स को इस संबंध में सूचित किया जा रहा है। छठवें वेतनमान के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर हुआ 257 प्रतिशत, एरियर का भी लाभ इधर राज्य शासन ने छठवें वेतनमान में वेतन प्राप्त कर रहे शासकीय सेवकों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते में वृद्धि का निर्णय लिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा और लंबित एरियर का भी भुगतान सुनिश्चित किया गया है। राज्य शासन द्वारा छठवें वेतनमान अंतर्गत कार्यरत शासकीय सेवकों के महंगाई भत्ते में वृद्धि की गई है। संशोधित दरों के अनुसार महंगाई भत्ता 252 प्रतिशत से बढ़ाकर 257 प्रतिशत कर दिया गया है। यह 1 जुलाई 2025 से प्रभावशील होगा। इस वृद्धि का वास्तविक लाभ कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2026 से (भुगतान माह मई 2026) से मिलना शुरू होगा। इसके साथ ही 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि का एरियर 6 समान किश्तों में मई से अक्टूबर 2026 तक दिया जाएगा। उक्त अवधि के दौरान सेवानिवृत्त या दिवंगत हो चुके कर्मचारियों अथवा उनके नामांकित परिजनों को एरियर की राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि उक्त अवधि के दौरान सेवानिवृत्त या दिवंगत हो चुके कर्मचारियों अथवा उनके नामांकित परिजनों को एरियर की राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। इससे उन्हें तत्काल राहत मिल सकेगी।

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से राहत प्रदान करने का बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में गन्ना किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नए बीज ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और आय को बढ़ाया जा सके। प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार करा रहा है, जिसके जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की किसानों के खेत में पहुंचने तक ट्रैकिंग होगी।  एडिशनल केन कमिश्नर, यूपी, वीके शुक्ला का कहना है कि किसान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं। गन्ने की खेती में यूपी का योगदान बेहद अहम रहा है। ऐसे में विभाग गन्ना किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। नया मोबाइल ऐप गन्ने के बीज वितरण की ट्रैकिंग से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा। इससे गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ऐप लॉचिंग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने बीजों की कालाबाजारी पर पूरी तरह नियंत्रण का प्लान बनाया है। प्लान के तहत गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इन बीजों की सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैकिंग की जाएगी। इससे बीज की ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को काफी लाभ होगा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने के साथ उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से बढ़िया पैदावार होने पर किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। यूपी-गुजरात की मदद से तैयार हो रहा मोबाइल ऐप गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग लखनऊ मुख्यालय के जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक विभाग कई विभागों की मदद से नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) इंस्टिट्यूट मिलकर गन्ना किसानों के लिए सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सबसे अच्छी बात है कि नए डिटिजल ऐप को तैयार करने में एक रूपये भी विभाग का खर्च नहीं हो रहा है। ये सारा काम पीएम गति शक्ति योजना के तहत किया जा रहा है। बीजों की ट्रैकिंग वाली ये मोबाइल ऐप एक से दो महीने में लॉन्च हो जाएगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। ऐप का जमीनी स्तर पर भी परिक्षण किया जाएगा। सीड (बीज) ट्रेस एंड टेस्टिंग ऐप के फायदे गन्ने का बीज तीन से चार चरणों के बाद किसानों तक पहुंचता है। सबसे पहले गन्ने का कोई भी बीज शोध केंद्रों से निकलता है। इसके बाद गन्ना विकास परिषद (आधार बीज उत्पाद केंद्र) तक पहुंचता है। फिर प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी तक जाता है। यहां से किसानों को वितरित होना शुरू होता है। इतने सारे चरणों में बीज की ट्रैकिंग संभंव नहीं हो पाती थी, लेकिन नए मोबाइल ऐप के जरिए यह संभंव हो पाएगा। किसान को मोबाइल ऐप पर ही बीज की उपलब्धता पता चलेगा। यहां से वह विभाग को बीज की मांग (डिमांड) भेज सकता है। फिर गन्ना विकास परिषद में तैनात गन्ना पर्यवेक्षक हर जिले में आने वाली डिमांड की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। मोबाइल ऐप पर गन्ना बीज पाने वाले किसानों का भी डाटा उपलब्ध रहेगा। इससे अगले चरण में उत्पादन की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी। ट्रैकिंग शुरू होने से गन्ने की वैराइटी को पैदावार के हिसाब से आगामी वर्षों में बदलना आसान हो पाएगा। फैक्ट फाइल यूपी में गन्ना किसान – 46.50 लाख (चीनी मीलों को सप्लाई करने वाले) कुल गन्ना उत्पादन – 83.25 टन प्रति हेक्टेयर कुल गन्ना बोआई (पिछले वर्ष) – 28.61 लाख हेक्टेयर

आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक एकता का है सशक्त आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की धरती ने ऐतिहासिक रूप से किया आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सिद्धांतों के अनुरूप समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित "एकात्म पर्व" आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव और सफल प्रयास जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव एकात्म पर्व का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुस्तक "वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र" का किया विमोचन कार्यक्रम में एकात्म धाम पर केन्द्रित वेबसाइट का किया गया लोकार्पण ओंकारेश्वर को बनाया जा रहा है ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस (एकात्मता का केंद्र) 21 अप्रैल तक जारी रहेगा एकात्म पर्व ओंकारेश्वर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय के केन्द्र ओंकारेश्वर की चेतना की अनुभूति आज सबको हो रही है। ज्ञान और ध्यान की धरती मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक रूप से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है। हर युग में इसके प्रमाण विद्यमान हैं। श्रीरामचन्द्र जी वनवास मिलने पर मंदाकिनी माता के किनारे चित्रकूट के धाम पधारें और प्रभु श्रीराम का आगे का जीवन मानव मात्र के लिए पूजनीय हो गया, समाज ने रामराज्य का अनुभव प्राप्त किया। भगवान श्रीराम ने संस्कारों, व्यवहारगत मूल्यों, परस्पर संबंधों सहित शासन के ऐसे सूत्र प्रदान किए जो आज भी महत्वपूर्ण हैं। इसी प्रकार श्रीकृष्ण, कंस वध के बाद शिक्षा ग्रहण करने उज्जयिनी स्थित सांदीपनि आश्रम पधारें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मवाद का संदेश दिया, जो वर्तमान में भी प्रासंगिक है। सनातन काल में कालड़ी केरल से चले 8 वर्षीय बालक शंकर ओंकारेश्वर पधारे, जहां परम पूज्य गुरू गोविंदपाद जी के आशीर्वाद से आदि शंकराचार्य बनकर सनातन धर्म की धारा को अविरल रूप से बहाने का आधार प्रदान किया। आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का आधार बना। हमारी सनातन विरासत, शास्त्र और आध्यात्मिक परम्पराएं यदि आज जीवित एवं जागृत हैं तो यह आदिगुरू शंकराचार्य के प्रयास और आशीर्वाद से ही संभव हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आचार्य शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आयोजित 5 दिवसीय प्रकटोत्सव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मनिवेदिता भिड़े, स्वामी शारदानंद सरस्वती सहित वरिष्ठ संतवृंद उपस्थित थे। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग तथा आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तत्वावधान में 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक एकात्म पर्व मनाया जा रहा है। एकात्म यात्रा तथा अद्वैत पर आधारित लघु फिल्मों का हुआ प्रदर्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के साथ वैशाख शुक्ल पंचमी के उपलक्ष में आयोजित आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव 'एकात्म पर्व' कार्यक्रम का दीप प्रज्ववलित कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अद्वैत लोक एवं अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण किया। साथ ही वे वैदिक अनुष्ठान में भी सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृत सेवा फाउंडेशन पुणे के रोहन अच्युत कुलकर्णी द्वारा लिखित पुस्तक "वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एकात्म धाम की यात्रा, प्रकल्प और भावी स्वरूप पर केंद्रित वेबसाइट https://www.oneness.mp.gov.in/ का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में एकात्म यात्रा तथा अद्वैत पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया। पं.दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत में होती है एकात्मता के भाव की अभिव्यक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सिद्धांतों के अनुरूप समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित है। चिंतक एवं विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में भी एकात्मता के भाव की अभिव्यक्ति होती है। राज्य सरकार अंत्योदय के सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। उदारमना भारतीय सनातन संस्कृति में भक्षण को नहीं अपितु दूसरों के कल्याण को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। पंच दिवसीय एकात्म पर्व में पधारे संत, मनीषी, विद्ववान एकात्मकता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। यह पर्व आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव और सफल प्रयास सिद्ध होगा। व्यक्ति विश्व को जानना चाहता है, लेकिन अपनी आत्मा से साक्षात्कार नहीं करना चाहता द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना को सराहा। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन करने वाला ही एकात्मता सिद्ध कर सकता है। व्यक्ति में एकात्म बोध होना आवश्यक है। ब्रह्म, भगवान और आत्मा तीनों एक हैं। प्राणी मात्र में विद्यमान आत्म तत्व का ज्ञान ही एकता का आधार है। सद्-चित-आनंद का भाव ही एकता है। इस जगत से जगदीश्वर को प्राप्त करना ही हमारा ध्येय है। उन्होंने कहा कि गौमाता, धरती माता और जन्म देने वाली माता का सम्मान होना आवश्यक है। गौमाता की सेवा और रक्षा को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कारों से समृद्ध होती है। व्यक्ति विश्व को जानना चाहता है, लेकिन अपनी आत्मा से साक्षात्कार नहीं करना चाहता है। प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्मान है, वहीं एकात्म है। तत्व को समझते हुए हमें अपने लक्ष्य और उसकी प्राप्ति की जानकारी होनी चाहिए। शरीर केवल भोग-विलास के लिए नहीं है, इस दृश्य जगत से हमें अदृश्य ईश्वर को प्राप्त करना है। एकात्मा को सिद्ध करने के लिए वेदों की आवश्यकता है। वेदों में कही गई बातों का पालन करना चाहिए। सभी के साथ एकात्मता का व्यवहार करना धर्म का आधार है विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष सुनिवेदिता भिड़े ने कहा कि हम सभी की आत्मा एक है, शरीर मात्र एक साधन है। मनुष्य शरीर, एकात्म का सबसे सुंदर उदाहरण है, शरीर में कई अंग है, लेकिन चेतना एक है। संपूर्ण विश्व में हम सभी ईश्वर की कोशिकाओं की तरह हैं, इन कोशिकाओं का प्राण ईश्वर ही है, जो सर्वथा एक है। हमारे वेदों में विद्यमान क्वांटम फिजिक्स और पर्यावरण के सिद्धांतों को विश्व आज समझ रहा है। दुनिया के लोग कहते हैं कि अगर मानव समाज की रक्षा करनी है तो भारत के वेद, उपनिषदों का अध्ययन करना होगा। स्वामी विवेकानंद ने "विजन ऑफ वननेस" की बात कही थी। … Read more

ग्रामीण विकास को नई रफ्तार: 2426 किमी सड़क निर्माण का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया शिलान्यास

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर स्थित रणजीता स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (फेज-04) के अंतर्गत स्वीकृत 774 सड़कों का शिलान्यास एवं शुभारंभ किया। इन सड़कों की कुल लंबाई 2426.875 किलोमीटर है, जिनके निर्माण पर ₹2225.44 करोड़ की लागत आएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिला मुख्यालय स्थित वशिष्ठ कम्यूनिटी हॉल के जीर्णोद्धार के लिए ₹80 लाख की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सड़कों का भूमिपूजन ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इन सड़कों के निर्माण से लगभग 781 बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़क सुविधा प्राप्त होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।  उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई थी, जो उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम है और आज यह योजना ग्रामीण भारत की जीवनरेखा बन चुकी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में सड़क नेटवर्क के विस्तार में अभूतपूर्व तेजी आई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम जनमन योजना के माध्यम से राज्य के अधिकांश गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम तथा रायपुर से जशपुर होते हुए धनबाद तक सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे जशपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने सहकारिता क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि हाल ही में 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया गया है, जिससे प्रदेश में समितियों की संख्या बढ़कर 2573 हो गई है। ये समितियां किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके निकट उपलब्ध कराएंगी तथा धान विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाएंगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और होली से पूर्व 25.28 लाख किसानों के खातों में 10000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरण कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने नागरिकों से आगामी जनगणना में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि सही आंकड़े ही सटीक विकास योजनाओं का आधार बनते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत प्रदेशभर में शिविर आयोजित कर समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है तथा ₹757 करोड़ के बिजली बिल माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य में नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी तेजी से विकास कार्य संभव हो पा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आज जिन 774 सड़कों का शिलान्यास किया गया है, उनका निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।  उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 1300 से अधिक सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में भी सड़क निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिससे ये क्षेत्र भी मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू कर अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती निहारिका बारीक ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेज-04 के अंतर्गत राज्य में 3065 सड़क विहीन बसाहटों का चिन्हांकन किया गया है। बैच-2 में 1000 बसाहटों के लिए 2684 किलोमीटर लंबाई की 975 सड़कों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है, जबकि शेष 1284 बसाहटों के लिए डीपीआर तैयार किए जा रहे हैं।  उन्होंने बताया कि पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के लिए 2902 किलोमीटर लंबाई की 807 सड़कों एवं 123 वृहद पुलों के निर्माण हेतु ₹2477 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनसे 871 बसाहटें लाभान्वित होंगी। अब तक 1735 किलोमीटर लंबाई की 356 सड़कें पूर्ण कर 356 बसाहटों को जोड़ दिया गया है।  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत अब तक कुल 47,847 किलोमीटर लंबाई की 10,119 सड़कों एवं 581 वृहद पुलों को स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनमें से 42,250 किलोमीटर लंबाई की 8713 सड़कें और 444 पुल पूर्ण किए जा चुके हैं। जशपुर जिले में इस योजना के तहत कुल 77 सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी लंबाई 197.26 किलोमीटर तथा लागत ₹196.20 करोड़ है। विभिन्न विकासखंडों में इन सड़कों का निर्माण चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिससे जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा सुदृढ़ होगी और स्थानीय विकास को गति मिलेगी। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

कृषि मंत्री कंषाना का निर्देश: खरीफ सीजन से पहले नवाचार प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए

खरीफ सीजन से पहले ‘नवाचार प्रबंधन’ पर विशेष जोर: कृषि मंत्री कंषाना किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाएगा भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र में ‘नवाचार प्रबंधन’ समय की मांग है। विभाग का लक्ष्य है कि परंपरागत खेती के साथ-साथ नई तकनीक, संसाधन संरक्षण और बाजार से सीधा जुड़ाव बढ़ाकर किसानों की आय दोगुनी की जाए। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि खरीफ 2026 के लिए विभाग ने ‘नवाचार प्रबंधन अभियान’ शुरू किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाएगा। नवाचार प्रबंधन के प्रमुख बिंदु     प्राकृतिक एवं जैविक खेती का विस्तार: 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को रासायनिक मुक्त खेती के अंतर्गत लाने का लक्ष्य। किसानों को निःशुल्क जैविक इनपुट, प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण की सुविधा दी जा रही है।     डिजिटल कृषि सेवा: ‘एमपी किसान ऐप’ और ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ के माध्यम से 15 लाख किसानों को मौसम, मंडी भाव, रोग-कीट प्रबंधन और ड्रोन स्प्रे की रियल-टाइम जानकारी मिल रही है।     जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के तहत 50 हजार हेक्टेयर में ड्रिप-स्प्रिंकलर स्थापित करने का लक्ष्य। खेत तालाब और फार्म पॉन्ड निर्माण पर 90% तक अनुदान।     फसल विविधीकरण: धान-गेहूं के साथ दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और बागवानी फसलों को बढ़ावा। ‘अन्न’ यानी मिलेट्स के लिए विशेष खरीद नीति लागू।     एफपीओ और सीधी मार्केटिंग: 450 नए कृषक उत्पादक संगठन गठित कर किसानों को एग्रीगेशन, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और सीधे निर्यात से जोड़ा जा रहा है। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हम खेती को घाटे से फायदे का सौदा बना रहे हैं। नवाचार प्रबंधन से लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को उपज का सही दाम मिलेगा।” उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में अब तक 90 लाख किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि अंतरित की गई है। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में त्वरित सर्वे और 72 घंटे में क्लेम निपटारे की व्यवस्था की गई है। सभी योजनाओं की जानकारी समय पर किसानों तक पहुंचे, इसके लिए जिला स्तर पर मीडिया और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है। किसान टोल-फ्री नंबर 0755-2558822 और ‘एमपी किसान ऐप’ से योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं।  

मंत्री कुशवाह का आदेश: अभियान चलाकर खाद-बीज विक्रय करने वाली संस्थाओं की जांच करें

अभियान चलाकर करें खाद-बीज विक्रय करने वाली संस्थाओं की जांच : मंत्री कुशवाह निम्न गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने वाली हैदराबाद की कंपनी को किया प्रतिबंधित कंपनी के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण हुआ दर्ज भोपाल  उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायन सिंह कुशवाह ने विशेष अभियान चलाकर प्रदेश में खाद-बीज ‍विक्रय करने वाले संस्थाओं और दुकानों की जांच करने के निर्देश दिये है। उन्होंने बताया कि धार और खरगौन जिले में किसानों को करेला (सब्जी) का निम्न गुणवत्ता का बीज प्रदाय करने से किसानों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसके परिणामस्वरूप निम्न गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने वाली कंपनी नुन्हेम्स इंडिया प्रायवेट लिमिटेड हैदराबाद (तेलंगाना) को प्रतिबंधित कर कंपनी के विरूद्ध आपराधिक दर्ज कराया गया है। मंत्री कुशवाह ने कहा  कि किसानों को उद्यानिकी फसलों का उत्तम गुणवत्ता का बीज उपलब्ध करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिये है कि सभी जिलों में खाद-बीज विक्रय करने वाली संस्थाओं की जांच अभियान चलाकर की जाये। इसके लिये भोपाल स्थित संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी भी जिलों का भ्रमण कर  संस्थाओं का आकस्मिक निरीक्षण करें। मंत्री कुशवाह ने बताया कि तेलगांना राज्य की कंपनी नुन्हेम्स इंडिया प्रा. लि. हैदराबाद द्वारा धार जिले के विकासखंड धरमपुरी, उमरबन, मनावर, डही, कुक्षी एवं निसरपुर तथा खरगौन जिले के महेश्वर, बड़वाह एवं कसरावद विकासखंड के किसानों को करेले की रोबस्टा किस्म की बीज विक्रय किये गये थे। किसानों द्वारा धार जिले में 84 हैक्टेयर तथा खरगौन जिले में 110 हैक्टेयर क्षेत्र में करेले की फसल लगाई गई थी। लेकिन फसल रोपने के  80 से 90 दिन के बाद भी करेले की फसल निम्न गुणवत्ता के साथ पौधो पर आई जो जिसके फल पीले पढ़कर स्वयं ही बेल से टुटकर गिर रहे थे। किसानों की शिकायत पर कलेक्टर धार और खरगौन द्वारा संयुक्त दल गठित कर प्रक्षेत्र की फसलों की जांच कराई गई। जो प्रथम दृष्टया सही पाये जाने पर आवश्यक वस्तु 1955 की धारा 3, बीज अधिनियम 1966, बीज नियंत्रण 1983 के प्रावधानों का उलंघन पाये जाने पर मेसर्स नुन्हेम्स इंडिया प्रा. लि. हैदराबाद (तेलंगाना) द्वारा उत्पादित करेला फसल की निम्न गुणवत्ता की रोबस्टा किस्म को आगामी आदेश तक धार और खरगौन जिले में विक्रय, भंडारण परिवहन को प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही धार जिले में कंपनी के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराया गया है।     

भोजपुरी, अंगिका और मगही विवाद में अटका झारखंड टीईटी 2026 का विज्ञापन

रांची झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन रद्द होगा। भाषाई विवाद (भोजपुरी, अंगिका व मगही) नहीं सुलझने की वजह से विज्ञापन रद्द किया जाएगा। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन की प्रक्रिया के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने पिछले महीने ही विज्ञापन निकाला था। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति की प्रत्याशा में विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन गुरुवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी। क्यों रद्द हुआ विज्ञापन झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की प्रत्याशा में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 की मंजूरी करते हुए अधिसूचना 26 मार्च को ही जारी कर दी थी। इसके साथ संकल्प और आवेदन करने की तिथि भी जारी कर दी गई थी। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन लिये जाने थे। नियमावली में क्षेत्रीय भाषाओं में 10 से ज्यादा जिलों में बोली जाने वाली भोजपुरी, अंगिका और मगही को जगह नहीं दी गई थी, जबकि सिर्फ दो जिलों के कुछ क्षेत्रों में बोली जाने वाली उड़िया को क्षेत्रीय भाषाओं में जगह मिली थी। इसका राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य संगठनों ने विरोध किया। कैबिनेट की बैठक में भी मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपक बिरुआ और दीपिका पांडेय सिंह ने इसका खुल कर विरोध किया। मंथन के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया। संशोधन होने पर भी वापस लेगा होगा विज्ञापन राज्य सरकार अगर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को प्रस्ताव के अनुसार 20 अप्रैल तक लागू कर देती है तो क्षेत्रीय भाषा में भोजपुरी, मगही और अंगिका के बिना आवेदन लिये जाने लगेंगे। अगर इसमें संशोधन होता है और इन तीनों क्षेत्रीय भाषा को जोड़ा जाता है तो विज्ञापन वापस लेना होगा। 2016 के बाद नहीं हुई है टीईटी झारखंड में अब तक 2012 और 2026 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई है। पिछले 10 साल से टीईटी का आयोजन नहीं हुआ है। पूर्व में ही नियम बनाया गया था कि हर साल टीईटी का आयोजन होगा, लेकिन अब तक नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा 2016 के बाद बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को उठाना पड़ रहा है। इससे वे न तो शिक्षक पात्रता परीक्षा दे पा रहे हैं और न ही स्थानीय शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाग ले पा रहे हैं।

भीषण गर्मी के चलते कलेक्टर का आदेश, अब दोपहर 12 बजे तक ही लगेंगी स्कूल

भोपाल.  राजधानी भोपाल में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों के टाइमिंग में बड़ा बदलाव किया गया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी  ने आदेश जारी कर सभी स्कूलों की कक्षाएं अब दोपहर 12 बजे तक सीमित कर दी हैं। भोपाल में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाएं चल रही हैं। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। नया टाइमिंग क्या रहेगा कक्षा 1 से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक लगेंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं भी अधिकतम दोपहर 12 बजे तक ही संचालित होंगी यह नियम सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू होगा। सभी बोर्ड के स्कूल शामिल यह आदेश एमपी बोर्ड, सीबीएसई , आईसीएसई समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू किया गया है। स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार समय तय कर सकते हैं, लेकिन 12 बजे के बाद कक्षाएं नहीं चलेंगी। प्रशासन ने साफ किया है कि पहले से तय परीक्षाएं और जरूरी कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित होंगे। जिला प्रशासन का कहना है कि तेज गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें।