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बिरसिंगपुर 500 मेगावाट यूनिट ने बिना रूके किया 150 दिन तक विद्युत उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए 150 दिनों तक निरंतर व निर्बाध विद्युत उत्पादन कर लगातार विद्युत उत्पादन करने की शृंखला में एक कड़ी और जोड़ दी। यह इकाई दिनांक 16 नवम्बर 2025 से सतत् संचालन में है, जो कि संयंत्र की विश्वसनीयता, संचालन क्षमता व उच्च स्तरीय रखरखाव का जीता जागता प्रमाण है। विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक मानदंड में श्रेष्ठ प्रदर्शन 150 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने के दौरान 500 मेगावाट की यूनिट ने न केवल सतत् उत्पादन का कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि विभिन्न परिचालन व तकनीकी मानकों पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यूनिट ने 98.64 प्रतिशत का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (Plant Availability Factor) बनाए रखा, जो विद्युत उत्पादनके लिये यूनिट की स्थ‍िरता एवं उपलब्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त यूनिट ने 98.45 प्रतिशत का प्लांट लोड फैक्टर (Plant Load Factor) दर्ज किया, जो कि उत्पादन क्षमता के अधिकतम उपयोग को इंगित करता है। यूनिट नंबर 5 ने सहायक विद्युत खपत (Auxiliary Power Consumption) को मात्र 5.52 प्रतिशत तक सीमित रखा गया, जो कि ऊर्जा दक्षता एवं संसाधनों के समुचित उपयोग का परिचायक है। मशीन के साथ ‘मेन’ का कमाल यूनिट नंबर 5 ने जहां मशीन के संदर्भ में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया, वहीं इस यूनिट से संलग्न अभियंताओं, तकनीकी कार्मिकों एवं ठेका श्रमिकों की समर्पित कार्यशैली, सतत निगरानी व समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण रखरखाव के कारण यूनिट नंबर 5 श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल हुई है। कठिन परिस्थितियों में भी संयंत्र की मशीनरी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना टीम की उच्च पेशेवर दक्षता को परिलक्षित करता है। यूनिट नंबर 5 ने तीसरी बार बनाया रिकार्ड वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल 13 विद्युत यूनिट ने 100 दिन से ऊपर निर्बाध विद्युत उत्पादन का कीर्तिमान बनाया था। जिसमें संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 3 ने एक बार और यूनिट नंबर 4 व 5 ने 2-2 बार यह उपलब्धि हासिल की थी। इस तरह यूनिट नंबर 5 ने अपने इस कीर्तिमान की दूसरी पारी को आगे बढ़ते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 का आग़ाज़ 150 दिन निर्बाध विद्युत उत्पादन कर किया।  

WhatsApp ने लॉन्च किया नया सेक्शन, बिजनेस मैसेज अब होंगे और भी आसान

नई दिल्ली इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप एक नया फीचर पर काम कर रहा है, जिसका काम बिजनेस चैट को ऑर्गनाइज करने का है. इस फीचर का नाम ऑटो ऑर्गनाइज बिजनेस चैट है. वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाले पोर्टल Wabetainfo ने इस फीचर की जानकारी दी है।  वॉट्सऐप के लेटेस्ट फीचर की मदद से यूजर्स अपने बिज़नेस अकाउंट्स के साथ होने वाली बातचीत को आसानी से ढूंढ सकेंगे. एक डेडिकेटेड लिस्ट के जरिए WhatsApp अपने आप सभी बिजनेस अकाउंट्स के चैट्स को बिना किसी मैनुअली सेटअप के फिल्टर कर लेगा. न्यू अपडेट के बाद यूजर्स को एक ही जगह पर बिजनेस चैट्स एक्सेस करना आसान हो जाएगा।  रिपोर्ट के मुताबिक, अभी यह फीचर डेवलमेंट स्टेज में है, जिसको अभी बेहतर बनाने की दिशा काम हो रहा है. इस बीच, WhatsApp बिज़नेस मैनेजमेंट को और आसान बनाने के नए तरीके भी तलाश रहा है।  Wabetainfo ने किया है पोस्ट  एंड्रॉयड 2.26.15.9 बीटा अपडेट के बाद यह सामने आया है कि WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जो बिजनेस चैट्स को ऑटोमेटिक ऑर्गनाइज़ करेगा और स्पैम को कम करेगा।  मौजूदा समय में यूजर्स को उनके बिजनेस अकाउंट्स के मैसेज नॉर्मल चैट लिस्ट में नजर आते हैं. हालांकि जब बिजनेस मैसेज की संख्या ज्यादा हो जाती है तो जरूरी चैट्स को को खोजना मुश्किल हो जाता है।  कैसे काम करेगा नया बिज़नेस चैट मैनेजमेंट फीचर न्यू फीचर के आने के बाद यूजर्स तय कर सकेंगे कि कौन से बिज़नेस चैट्स मुख्य चैट लिस्ट में रहें और कौन से नहीं. बिज़नेस मैसेज मिलने के 24 घंटे बाद उन्हें नए बिज़नेस सेक्शन में मूव किया जा सकेगा।  बिज़नेस सेक्शन क्या है WhatsApp का बिजनेस सेक्शन किस रूप में नजर आएगा, उसको लेकर अभी कोई क्लियर जानकारी नहीं है. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एक अलग चैट लिस्ट हो सकती है. यह WhatsApp एक नया इनबॉक्स पेश करे, जैसा कि Archived Chats या थर्ड-पार्टी चैट्स के लिए होता है। 

संबल योजना में आयु संशोधन पर सख्ती, मृत्यु के बाद बदलाव अब पूरी तरह प्रतिबंधित

भोपाल मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत श्रमिकों की आयु संबंधी प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि समग्र पोर्टल में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही संबल पोर्टल पर श्रमिक की आयु की गणना की जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु के बाद उसकी आयु (जन्म तिथि) में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। अपर सचिव श्रम विभाग संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियम संबल योजना में भी सख्ती से लागू रहेगा। उन्‍होंने बताया है कि  समग्र पोर्टल पर मृत्यु प्रविष्टि दर्ज करने से पहले संबंधित हितग्राही की जन्म तिथि का गहन परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। एक बार मृत्यु दर्ज हो जाने के बाद किसी भी परिस्थिति में आयु परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी श्रमिक की आयु पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण पायी जाती है, तो उसके सुधार के लिए आवेदन केवल आईटी विभाग के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अन्य किसी माध्यम से आयु संशोधन मान्य नहीं होगा।  

मध्यप्रदेश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 91% लक्ष्य पूरा

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिला-नेतृत्व विकास की दिशा में लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत राज्य ने 91 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भुरिया ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध प्रयासों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। योजना के माध्यम से न केवल मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा रहा है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना भारत सरकार द्वारा 01 जनवरी 2017 से लागू की गई है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित है। योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को आंशिक वेतन हानि की भरपाई हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा विशेष रूप से दूसरी संतान के रूप में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रथम प्रसव पर महिलाओं को 5,000 रुपये की राशि दो किश्तों में प्रदान की जाती है, जबकि दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रुपये की राशि एकमुश्त दी जाती है। उल्लेखनीय उपलब्धियां प्रदेश में योजना की शुरुआत से अब तक 52.5 लाख से अधिक हितग्राही पंजीकृत किए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6.61 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 6.01 लाख हितग्राहियों का पंजीयन किया गया, जो कि 91 प्रतिशत उपलब्धि को दर्शाता है।  

नारी शक्ति वंदन: मध्यप्रदेश में लखपति दीदी पहल के जरिए महिलाओं का हुआ आर्थिक सशक्तिकरण

नारी शक्ति वंदन: लखपति दीदी पहल से मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिली आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “लखपति दीदी” पहल उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का लक्ष्य स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। राज्य सरकार ने आगामी दो वर्षों में 16.41 लाख परिवारों को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 526 मास्टर ट्रेनर और 20 हजार 517 लखपति सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित कर्मी महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षण देने के साथ उनकी आय-व्यय योजना तैयार करने और वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। योजना के तहत महिलाओं को कम से कम दो या अधिक आय स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो और आय में स्थिरता बनी रहे। कृषि क्षेत्र में पहल महिलाओं को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन, मसाला खेती (हल्दी, धनिया, मिर्च आदि) और फलदार वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई, पॉली मल्चिंग और पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और कीटनाशक निर्माण को भी बढ़ावा मिल रहा है। “ड्रोन दीदी” पहल के माध्यम से महिलाएं फसलों पर छिड़काव कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। गैर-कृषि क्षेत्र में विस्तार स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम, माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक उत्पाद जैसे हैंडलूम, टेराकोटा, जरी-जरदोजी और स्थानीय अनाज (कोदो, कुटकी, रागी) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालन में सशक्तिकरण पशुपालन क्षेत्र में “पशुसखी” तैयार की जा रही हैं, जिन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। क्लस्टर आधारित विकास और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित किया जा रहा है। समग्र विकास की दिशा में कदम यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, वित्तीय प्रबंधन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है। विभिन्न विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। “लखपति दीदी” पहल मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी। महिलाओं की आर्थिक उड़ान: 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 59 लाख परिवार सशक्त प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह (SHG) एक मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर करीब 59 लाख परिवार आज आजीविका से सशक्त हो रहे हैं। डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक “लखपति दीदी” योजना के तहत अब तक करीब 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ाया है। छोटे-छोटे बचत समूह अब बड़े आर्थिक नेटवर्क में बदलते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। महिलाएं अब कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह आधारित गतिविधियों ने उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है, जिससे वे ऋण लेकर अपने कार्यों का विस्तार कर पा रही हैं। सरकारी योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लाभ मिल रहा है। DAR में हो रही नियमित एंट्री से यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।  

8वें वेतन आयोग का प्रस्ताव: ₹69,000 सैलरी, छुट्टी के बदले पैसा, 3x DA और क्या-क्या लाभ होंगे?

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़ी हलचल है और अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council– Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपना विस्तृत मेमोरेंडम सरकार और वेतन आयोग को सौंप दिया है, जिसमें सैलरी, भत्तों, छुट्टियों और पे स्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। अगर ये मांगें लागू होती हैं, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है। न्यूनतम वेतन ₹69,000 और ग्रेच्युटी में ढील सबसे बड़ी और चर्चा में रहने वाली डिमांड है, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने की। इसके साथ ही हर साल 6% की वृद्धि और प्रमोशन के समय कम से कम ₹10,000 की बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। संगठन ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों को 30 दिन का न्यूनतम बोनस गारंटी के साथ दिया जाए और ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील दी जाए। छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव 45 दिन करने औरअर्न्ड लीव (EL) को बिना सीमा के जमा करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, 600 दिन तक लीव इनकैशमेंट और 20 साल की सेवा के बाद 50% इनकैशमेंट की सुविधा देने की बात भी कही गई है। महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव भी प्रस्ताव में शामिल है। बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस (CEA) को ₹10,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और इसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल सब्सिडी को ₹35,000 प्रति माह तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों पर शिक्षा का खर्च कम हो सके। भत्तों (Allowances) में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। NC-JCM चाहता है कि सभी भत्तों को तीन गुना किया जाए और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए। इसके अलावा रिस्क अलाउंस ₹10,000 प्रति माह, नाइट ड्यूटी अलाउंस बेसिक सैलरी के आधार पर और सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस अलाउंस की मांग भी की गई है। फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने की डिमांड भी अहम है, क्योंकि इसी के आधार पर नई सैलरी तय होती है। साथ ही पे लेवल्स को मर्ज और अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और संतुलित बनाया जा सके। ये मेमोरेंडम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं में कितना बदलाव आता है।

28 हजार कर्मचारियों से हर घर का सर्वे, जानें मान सरकार के इस बड़े कदम के पीछे की रणनीति

चंडीगढ़  पंजाब की सियासत और सामाजिक ताने-बाने में 1 अप्रैल 2026 से एक ऐसी हलचल शुरू हो चुकी है, जो आने वाले दशकों तक अपना असर छोड़ेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वे का बिगुल फूंक दिया गया है। करीब 250 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट और 28 हजार प्रगणकों की फौज के साथ पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों का दरवाजा खटखटाने की यह कवायद जारी है। सरकार का लक्ष्य साफ है कि अगले तीन महीनों में पंजाब के हर घर का कच्चा चिट्ठा सरकारी फाइलों में दर्ज हो जाए।  हम समझेंगे कि क्या यह सिर्फ एक सरकारी गिनती है या फिर पंजाब की रवायतों और हकीकतों को बदलने वाला कोई बड़ा मास्टरप्लान। आखिर क्यों पड़ी इस भारी भरकम सर्वे की जरूरत ? हकीकत यह है कि पंजाब में अनुसूचित जाति आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन यहां एक बड़ा पेंच है। यह आबादी कोई एकजुट समूह नहीं है। इस वर्ग में वाल्मीकि, रविदासिया, अधर्मी और मजहबी सिख जैसी कई जातियां शामिल हैं। इन सभी जातियों के बीच अपनी-अपनी अलग चुनौतियां और दूरियां हैं। अब तक सरकारों के पास कोई ठोस डाटा नहीं था कि विकास का पैसा वाकई किस घर की दहलीज तक पहुंचा है और कौन सा वर्ग आज भी पीछे छूटा हुआ है। यह सर्वे इसी बड़े डाटा गैप को भरने की एक गंभीर कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और कानूनी पेच इस सर्वे का एक बहुत गहरा कानूनी कनेक्शन भी है। अगस्त 2024 का वह ऐतिहासिक दिन याद कीजिए जब सुप्रीम कोर्ट ने द स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह केस में एक अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने साफ कहा था कि राज्य सरकारें आरक्षण के अंदर उप-वर्गीकरण कर सकती हैं। यानी आरक्षण के भीतर भी उन जातियों को प्राथमिकता दे सकती हैं जो सबसे ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक सख्त शर्त भी थी। कोर्ट का कहना था कि सरकारों के पास ऐसा करने के लिए मात्रात्मक और विश्वसनीय डाटा होना चाहिए। एक अप्रैल से शुरू हुआ यह सर्वे असल में वही डाटा जुटाने की कानूनी कवायद है, जिससे कल को सरकार के किसी भी फैसले को अदालत में चुनौती ना दी जा सके। सियासत की बिसात और 2027 के चुनाव का कनेक्शन जाहिर है जहां डाटा है, वहां राजनीति भी होगी। पंजाब की राजनीतिक पिच पर फिलहाल सभी दल इस सर्वे के साथ खड़े दिख रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उनके निरंतर दबाव की जीत बता रही है, वहीं भाजपा के दिग्गज नेता भी इसे सामाजिक न्याय के लिए एक क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए यह अपना चुनावी वादा पूरा करने और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े वोट बैंक को साधने का सीधा मौका है। निजता का डर: क्या सुरक्षित रहेगी आपकी निजी जानकारी ? इस बड़े कदम के साथ सबसे बड़ी चिंता निजता की उठ रही है। जब 28 हजार सरकारी कर्मचारी आपके घर आकर आपकी जाति, आपकी कमाई और आपकी निजी जिंदगी के सवाल पूछेंगे, तो डर लगना लाजमी है। क्या यह डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा? क्या डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के इस दौर में सरकार लोगों की प्रोफाइलिंग होने से रोक पाएगी? हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्ण गोपनीयता का भरोसा दिया है, लेकिन डिजिटल दौर में भरोसे और हकीकत के बीच हमेशा एक बारीक लकीर होती है। अंत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह डाटा वाकई पंजाब की सदियों पुरानी असमानता को खत्म करने का औजार बनेगा या फिर यह जातियों की दीवारें और ऊंची कर देगा। सर्वे के नतीजे ही भविष्य के इस पंजाब की असली तस्वीर साफ करेंगे।

गर्मी और लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी, हीटस्ट्रोक से कैसे करें बचाव जानें

 नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में तेज गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ रहा है. भारत मौसम विभाग (IMD) ने मध्य और पूर्वी भारत में लू (हीटवेव) की चेतावनी जारी की है. अप्रैल के मध्य से ही कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में 18 अप्रैल तक लू चलने की संभावना है. वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक (उत्तर आंतरिक) और गुजरात (सौराष्ट्र-कच्छ) में बढ़ते तापमान के बीच हीटवेव का अलर्ट है।  इसके अलावा राजस्थान, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा. IMD के मुताबिक, अप्रैल-जून के बीच इन इलाकों में लू के दिन सामान्य से ज्यादा हो सकते हैं. बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण देशभर में हीट वेव (लू) की अवधि लंबी हो रही है. जिसे देखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है।  हीटस्ट्रोक क्या है और क्यों खतरनाक है? हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104°F से ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. यह स्थिति बहुत गंभीर होती है. हीटस्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है। कब और कैसे हो सकता है हीटस्ट्रोक? स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, गर्मी के मौसम में अगर पर्याप्त पानी न पिया जाए तो शरीर की ठंडक बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है. इससे तापमान बहुत बढ़ जाता है और हीटस्ट्रोक हो सकता है. हीटस्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है।  हीटस्ट्रोक से कैसे बचें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए कुछ आसान उपाय बताए हैं:-     गर्मी में शरीर से पानी की कमी बहुत तेजी से होती है. इसलिए दिन में बार-बार पानी पीते रहें. प्यान नहीं लगने पर भी खूब पानी पिएं.      दोपहर में 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर ना निकलें और ज्यादा मेहनत का काम ना करें.     ज्यादा कैफीन (जैसे चाय-कॉफी) से बचें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं.     हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें.     अगर बाहर काम करना जरूरी है तो थोड़ी-थोड़ी देर में छांव में बैठकर आराम करें. हीटस्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें?     अगर किसी व्यक्ति को हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखें (जैसे तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी, ज्यादा पसीना या पसीना बंद हो जाना) तो तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं और लिटा दें.     ठंडे पानी के कपड़े से शरीर को पोछें या ठंडी सिकाई करें.     होश में हो तो छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पिलाएं.     जब व्यक्ति बेहतर महसूस करने लगे तो खीरा, नारियल पानी जैसी नमी से भरपूर चीजें दें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी में सावधानी बरतने की अपील की है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर हीटस्ट्रोक के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं. ऐसे में इनपर खास नजर रखने की जरूरत है. गर्मी के मौसम में बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ जरूर रखें।   

महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला

आधी कीमत में महिलाओं के नाम होगी प्रॉपर्टी, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का फैसला, प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला कदम महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: महिलाओं को मिलेगी आधी कीमत पर प्रॉपर्टी, प्रदेश की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम रायपुर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने एक ही झटके में प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक दिशा बदलने वाले दो बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। बुधवार को रायपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए हाई-लेवल कमेटी के गठन और महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क में 50% कटौती का ऐलान किया। इसका उद्देश्य राज्य में कानूनों में एकरूपता लाना और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार दिलाने में मदद करना है, जिसे ड्राफ्ट तैयार कर विधानसभा में पेश किया जाएगा। UCC के लिए रंजना देसाई फॉर्मूला छत्तीसगढ़ सरकार ने वही रास्ता चुना है जो उत्तराखंड ने अपनाया था। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और संस्थाओं से सीधा संवाद करेगी। एक समर्पित वेब पोर्टल के जरिए जनता की राय ली जाएगी। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को खत्म कर एक समान कानून लाना है। खजाने पर 153 करोड़ की चोट कैबिनेट ने महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट को मंजूरी दी है। हालांकि, इससे सरकारी खजाने पर 153 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि निवेश मान रही है। प्रशासन का तर्क है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति का स्वामित्व बढ़ेगा, जो लंबे समय में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 2026 के बड़े मिशन की तैयारी UCC का मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक महत्व रखता है। रंजना प्रकाश देसाई वही जस्टिस हैं जिन्होंने उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना यह साफ करता है कि सरकार बिना किसी देरी के एक सटीक और कानूनी रूप से मजबूत मॉडल चाहती है। वहीं, रजिस्ट्री में छूट देना एक चतुर आर्थिक दांव है, जो मध्यम वर्ग की महिलाओं को सीधे तौर पर सरकार से जोड़ता है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए महिला कार्ड और सांप्रदायिक कार्ड दोनों को एक साथ फेल करने की रणनीति जैसा है।     छत्तीसगढ़ में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित।     जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में जनता और विशेषज्ञों से ली जाएगी राय।     महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री फीस अब आधी होगी, जिससे मालिकाना हक बढ़ेगा।     राजस्व में ₹153 करोड़ की कमी के बावजूद इसे सामाजिक निवेश बताया गया।     कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी के बाद विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।  

IMF की चेतावनी: 2029 में द्वितीय विश्वयुद्ध जैसा माहौल, भारत की स्थिति क्या होगी?

 नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच एक और टेंशन बढ़ाने वाली खबर आई है. ये खबर दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर को एक बड़ी चेतावनी भी है. दरअसल, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने एक रिपोर्ट जारी की है।  आईएमएफ की 'फिस्कल मॉनिटर' रिपोर्ट के अनुसार दुनिया पर कर्ज का बोझ इतना बढ़ता जा रहा है कि साल 2029 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 100 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह एक ऐसी स्थिति है जो सामान्य समय में नहीं देखी जाती है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनियाभर में संकट का माहौल जारी रहा, तो साल 2029 तक वैश्विक सरकारी कर्ज (Global Debt) दुनिया की कुल GDP के 100% तक पहुंच सकता है. चिंता की बात ये है कि इस तरह का डेटा आखिरी बार दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखने को मिला था।  द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी स्थिति की आहट IMF की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल 2025 में वैश्विक कर्ज करीब 94% GDP तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार बढ़ोतरी की आशंका है. इसका सीधा मतलब है कि दुनिया जितना एक साल में कमाती है, उतना ही पैसा कर्ज के रूप में बकाया हो सकता है।  रिपोर्ट की मानें तो दुनिया आखिरी बार कर्ज के इस स्तर पर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहुंची थी. उस समय युद्ध की विभीषिका और युद्ध के बाद इंफ्रा पर बेतहाशा खर्चों ने देशों को कर्ज के जाल में धकेल दिया था. करीब 80 साल के बाद दुनिया फिर से उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है. एक तरह के उस समय के मुकाबले अभी स्थिति ज्यादा गंभीर है. क्योंकि उस समय केवल युद्ध की वजह से ऐसी स्थिति आई थी, जबकि मौजूदा समय में केवल युद्ध नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव भी हैं।  IMF की इस रिपोर्ट कर्ज बढ़ने के कई बड़े कारण बताए गए हैं.  1. ग्लोबल तनाव बड़ी वजह सबसे प्रमुख वजह है दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव. खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे सरकारों का खर्च बढ़ गया है. कई देशों में जनता पर बोझ न पड़े इसके लिए अतिरिक्त सब्सिडी की दी जा रही है, इसके लिए सरकारों को कर्ज लेना पड़ रहा है।  2. महंगाई बढ़ने का खतरा इसके अलावा महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी बड़ी वजह है. जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सरकारों के लिए पुराने कर्ज को चुकाना और नया कर्ज लेना दोनों महंगा हो जाता है. इससे कुल कर्ज का बोझ और तेजी से बढ़ता है. पिछले कुछ वर्षों में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं. इस कारण सरकारों के लिए पुराना कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना, दोनों ही महंगा हो गया है. वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% हो गया है।  3. आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया  IMF ने यह भी कहा है कि कई देश लगातार बजट घाटे (Fiscal Deficit) में चल रहे हैं, यानी उनकी आमदनी कम और खर्च ज्यादा है. इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें उधार ले रही हैं, जिससे कर्ज का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है.  यही नहीं, सबसे ज्यादा चोट विकासशील और गरीब देशों पर पड़ने वाला है. खासकर जिन देशों की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है या जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. ऐसे देशों में कर्ज चुकाने की क्षमता सीमित होती है, जिससे आर्थिक संकट का खतरा बढ़ जाता है।  इस चुनौती से निपटने के लिए IMF ने देशों को सलाह दी है कि वे अपने खर्च पर काबू रखें, सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही वित्तीय सहायता दें और लंबी अवधि में कर्ज कम करने की ठोस योजना बनाएं।  भारत के लिए क्या है संकेत? दुनिया भर की खराब स्थिति के बीच आईएमएफ ने भारत को एक 'ब्राइट स्पॉट' बताया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने प्राथमिक खर्चों पर नियंत्रण रखकर अपनी राजकोषीय स्थिति में सुधार किया है. भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ के कारण आने वाले समय में इसके कर्ज के अनुपात में स्थिरता या कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात 84% के करीब है. जबकि अमेरिका का कर्ज 2031 तक उसकी जीडीपी का 142% होने का अनुमान है, जबकि चीन का कर्ज 127% तक पहुंच सकता है।