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महिला आरक्षण पर कांग्रेस का वादा अधूरा, मायावती ने सपा को भी घेरा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है. मायावती का कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस अब जो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वो महज एक दिखावा है. उन्होंने कांग्रेस को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार देते हुए साफ कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने कभी SC, ST और OBC के आरक्षण का कोटा पूरा करने की कोशिश नहीं की. मायावती का यह वार सीधे तौर पर कांग्रेस के उस दावे पर है जिसमें वो अब इन वर्गों के हक की बात कर रही है।  मायावती ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब केंद्र की सरकार चला रही थी, तब उसने कभी भी पिछड़ों या दलितों के कोटे को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज वही पार्टी महिला आरक्षण के बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है।  यही नहीं, मायावती ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मंडल कमीशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिला, उसे भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह बीएसपी की मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा था कि उस समय की वी.पी. सिंह सरकार ने इसे आखिरकार लागू किया. मायावती ने साफ संदेश दिया कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई, उसे BSP ने लड़कर करवाया।  जब सरकार में होती है सपा, तो भूल जाती है पिछड़ों का हक मायावती के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं थी, उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी जमकर घेरा. उन्होंने यूपी का एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1994 में जब पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का फायदा देने की रिपोर्ट आई थी, तो उस वक्त की सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन जब 1995 में बीएसपी की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया. मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है, तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सरकार में आते ही इनका रवैया पूरी तरह बदल जाता है।  मायावती ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलती हैं. सत्ता में रहते हुए इनका रवैया जातिवादी और तिरस्कार से भरा होता है, लेकिन चुनाव आते ही ये लोग छलावा करने लगते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का भला नहीं चाहतीं।  महिला आरक्षण को लेकर चल रही देरी पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना चाहती है, तो उसे जल्दी करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी बीजेपी की तरह ही कदम उठाती. यानी घुमा-फिराकर बात वही है कि बड़ी पार्टियों के लिए इन वर्गों का कल्याण कभी प्राथमिकता नहीं रहा।  आखिर में मायावती ने एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है उसे स्वीकार करें, लेकिन असली मजबूती तभी आएगी जब यह समाज खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अपने समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। 

पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, भारत और रूस के रिश्तों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एक बार फिर से भारत का दौरा करेंगे। बता दें कि इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था। ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य देशों) के नेताओं की यह वार्षिक बैठक आर्थिक सहयोग, व्यापार, वैश्विक शासन और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की जाती है। यह बैठक सितंबर के महीने में हो सकती है। रूस की समाचार एजेंसी टास ने बुधवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में निश्चित रूप से भाग लेंगे। अभी तक शिखर सम्मेलन की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन TASS ने पहले भारतीय सरकार के एक सूत्र के हवाले से बताया था कि यह 12-13 सितंबर को होने वाला है। ब्रिक्स में अब 11 देश हो गए शामिल ब्रिक्स वर्तमान में 11 सदस्य देशों का एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी शुरुआत 2006 में चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) के साथ हुई थी, जिसे तब 'ब्रिक' (BRIC) कहा जाता था। लेकिन 2010 में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हो गया जिसके बाद इसे ब्रिक्स कहा जाने लगा। लेकिन अब कुछ और देशों को इससे जोड़ा गया है जिनमें मिश्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। चौथी बार भारत कर रहा ब्रिक्स की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन सितंबर में (संभावित रूप से 12-13 सितंबर) आयोजित होगा। भारत BRICS की चौथी बार मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी मेजबानी कर चुका है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन "निश्चित रूप से" सम्मेलन में शामिल होंगे। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने भी इस खबर की पुष्टि की है। भारत ने पुतिन को आधिकारिक निमंत्रण भेजा है और दोनों देशों के बीच कोई बाधा नहीं है। ब्रिक्स में शामिल हैं ये देश BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरते अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार हुआ है और नए सदस्य भी जुड़े हैं। यह मंच वैश्विक आर्थिक सहयोग, व्यापार वृद्धि, बहुपक्षीय सुधारों, ग्लोबल गवर्नेंस और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में विश्व स्तर पर अनिश्चितता, ऊर्जा संकट, व्यापार युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है।  भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग पहले से ही मजबूत है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी पुतिन भारत यात्रा की थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने वार्षिक शिखर सम्मेलन में शिरकत की थी। अब BRICS सम्मेलन में पुतिन की उपस्थिति से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूती मिलेगी। यह बैठक उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर देगी। इससे पहले दिसंबर में भारत आए थे पुतिन इससे पहले, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका जोरदार स्वागत किया था। इस यात्रा के दौरान आर्थिक संबंधों, ऊर्जा सहयोग और रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा की गई थी। नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की थी।  

पूर्वी राजस्थान में बारिश की संभावना, पश्चिमी हिस्सों में गर्मी बरकरार

जयपुर राजस्थान में मौसम का मिजाज फिर बदल रहा है. राज्य के पूर्वी हिस्सों में बारिश और आंधी की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं. पश्चिमी राजस्थान में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा, लेकिन कुछ इलाकों में आंशिक बादल छा सकते हैं. हालांकि, कुछ जगहों पर हल्के बादल छाए रह सकते हैं. इसके चलते, भीषण गर्मी के बीच तापमान में गिरावट से कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन यह राहत ज्यादा घंटो तक बरकरार नहीं रहेगी. अगले 3-4 दिनों में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी भी संभव है. रेगिस्तानी इलाकों में 43 डिग्री तापमान जाने की संभावना है. इन जिलों में बरसेंगे बादल कमजोर विक्षोभ के प्रभाव से जयपुर, भरतपुर, बीकानेर संभाग और आसपास के क्षेत्र में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है. अलवर, डीग, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली-बहरोड़, सीकर, चूरू और हनुमानगढ़ के लिए अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में मेघगर्जन/वज्रपात और झोकेदार तेज हवाएं चल सकती हैं. जबकि बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर जैसे क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा. कई इलाकों में पारा 1 से 2 डिग्री गिरा बीते दिन (16 अप्रैल) को अधिकतम तापमान बाड़मेर में 42.9 डिग्री और चित्तौड़गढ़ में 41.4 डिग्री दर्ज किया गया. कई स्थानों पर तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट देखी गई. 17 अप्रैल को भी अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट संभव है, जबकि न्यूनतम तापमान में मामूली बदलाव रह सकता है. फतेहपुर में सबसे कम तापमान 11.8 डिग्री दर्ज किया गया था. आगामी दिनों का अलर्ट 18 और 19 अप्रैल को राज्य के अधिकांश भागों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. 20 अप्रैल के आसपास एक नया कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे कुछ इलाकों में फिर मेघगर्जन और हल्की बारिश हो सकती है.

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जल्द शुरू, 45 मिनट में पूरा होगा सफर

लखनऊ  दिल्‍ली-देहरादून एक्‍सप्रेसवे के बाद अब बहुत जल्‍द लखनऊ-कानपुर एक्‍सप्रेसवे का शुभारंभ हो सकता है। करीब 3700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे 6 लेन एक्‍सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है। इसके खुल जाने से लखनऊ के अमौसी से कानपुर के आजाद चौक तक का सफर मात्र 35 से 45 मिनट में संभव हो जाएगा। जब लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे गाड़ियों के लिए खुल जाएगा, तो कार चालकों को 63 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए एक तरफ से 275 रुपये का टोल लगेगा। अगर 24 घंटे में वापसी हो जाती है तो 415 रुपये टोल लगेगा। जो लोग नियमित रूप से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करते हैं, उनके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा सालाना पास सेवा का विकल्प दिया जाएगा। इसका शुल्‍क 3,075 रुपये होगा। इस एक्सप्रेसवे पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों को फर्राटा भरने की अनुमति नहीं होगी। हमने कानपुर रिंग रोड पर काम पहले ही तेजी से शुरू कर दिया है। यह रिंग रोड कादर पटारी में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ेगी। इससे गाड़ी मालिकों को अपनी मंजिल तक पहुंचने का एक और विकल्प मिल जाएगा और उन्हें शहर के ट्रैफिक से बिल्कुल भी जूझना नहीं पड़ेगा। सालाना पास से 200 बार टोल से गुजर सकेंगे वाहन सालाना पास की मदद से एक वाहन मालिक इस एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से 100 बार आना-जाना कर सकेगा। NHAI के अधिकारियों ने बताया कि सालाना पास के ज़रिए, एक वाहन को पास जारी होने के समय से एक साल के अंदर एक टोल प्लाजा से 200 बार गुजरने की अनुमति होती है। रोजाना सफर करने वालों का लगेगा मात्र 15.30 रुपये टोल हाईवे अथॉरिटी के कानपुर रीजनल ऑफिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कई लोग एक्सप्रेसवे की लागत पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें लगता है कि इसके चार्ज बहुत ज्‍यादा है। मैं बताना चाहता हूं सालाना पास एक्सप्रेसवे के साथ-साथ इस इलाके के दूसरे नेशनल हाईवे पर भी काम करेगा। इस पास से लोग एक साल में 200 बार टोल से गुजर सकेंगे या एक ही प्लाजा से 100 बार आना-जाना कर सकेंगे। ऐसे में, रोजाना सफर करने वालों के लिए एक ट्रिप की लागत 275 रुपये के बजाय घटकर 15.30 रुपये हो जाएगी। 120 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन दूसरी ओर, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब ट्रैफिक संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि इस छह-लेन वाले स्पीड कॉरिडोर को खोलने की तारीख तय की जा सके। इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से गाड़ियां चल सकें। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 3,700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसमें से 3,000 करोड़ रुपये सिविल कंस्ट्रक्शन के कामों पर खर्च किए गए हैं, जबकि बाकी रकम निजी जमीन खरीदने पर खर्च हुई है। दो साल में पूरा होगा कानपुर रिंग रोड का काम यह एक्सप्रेसवे सरोजिनी नगर के मीरानपुर पिनवट गांव से शुरू होगा और उन्नाव के कादर पटारी गांव में खत्म होगा। यह मौजूदा लखनऊ-कानपुर नेशनल हाईवे पर, जाजमऊ गंगा पुल से 5.5 किलोमीटर आगे स्थित है। कानपुर रिंग रोड को पूरा होने में लगभग दो साल लगेंगे।

विरोध के बाद कम हुई बढ़ोतर,अब 21% हाउस टैक्स, कई राहतें लागू

गाजियाबाद  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गृह कर (हाउस टैक्स) को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नई दरों के ऐलान के साथ काफी हद तक स्पष्ट हो गया है। नगर निगम ने पुराने रेट के मुकाबले 21 प्रतिशत वृद्धि लागू करने का फैसला किया है, जबकि पहले 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को लेकर भारी विरोध दर्ज किया गया था। नई व्यवस्था में जहां एक ओर करदाताओं को राहत देने के लिए कई तरह की छूटों का प्रावधान किया गया है, वहीं कुछ शर्तें और प्रक्रियाएं अब भी लोगों के बीच चर्चा और असंतोष का विषय बनी हुई हैं। पहले के भारी विरोध के बाद घटाई गई वृद्धि दर नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्पष्ट किया कि पूर्व में हाउस टैक्स में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रस्तावित थी, जिस पर पार्षदों, आरडब्ल्यूए और जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई थी। अब संशोधित व्यवस्था में केवल 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नगर निगम का दावा है कि यह निर्णय संतुलन बनाकर लिया गया है ताकि राजस्व भी प्रभावित न हो और जनता पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े। करदाताओं को कई तरह की छूटों का लाभ नई व्यवस्था के तहत गाजियाबाद नगर निगम ने टैक्स भुगतान में कई राहतें दी हैं। ऑनलाइन टैक्स जमा करने पर 2 प्रतिशत की छूट, समय पर भुगतान करने पर 20 प्रतिशत की छूट और गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग देने पर 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया गया है। निगम का कहना है कि इन सुविधाओं का उद्देश्य करदाताओं को डिजिटल भुगतान और स्वच्छता व्यवस्था से जोड़ना है। 10 साल तक पुराने मकानों पर 25% छूट नई नीति के अनुसार 0 से 10 वर्ष पुराने मकानों पर 25 प्रतिशत तक की छूट स्वतः लागू होगी। इसके लिए किसी प्रकार का प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह छूट सीधे हाउस टैक्स बिल में जुड़कर दिखाई देगी, जिससे करदाताओं को अलग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। 10 से 40 साल पुराने मकानों के लिए अलग-अलग स्लैब 10 से 20 साल पुराने मकानों पर 32.5 प्रतिशत और 20 से 40 साल पुराने मकानों पर 40 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। हालांकि इन दोनों श्रेणियों में मकान की उम्र का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। इसके लिए रजिस्ट्री की कॉपी, पुराना बिजली बिल, भवन का नक्शा या पुराना हाउस टैक्स बिल मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किए जाएंगे। कमर्शियल संपत्तियों पर भी राहत नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल संपत्तियों पर टैक्स दर घरेलू संपत्तियों की तुलना में 3 से 6 गुना तक बनी रहेगी, लेकिन कुल मिलाकर विभिन्न श्रेणियों में लगभग 32 प्रतिशत तक राहत का लाभ मिल सकता है। निगम का कहना है कि टैक्स कैलकुलेशन घरेलू दरों के आधार पर ही किया जाएगा, जिससे कुछ वर्गों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। कूड़ा अलग देने पर 10% छूट सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली व्यवस्था गीला और सूखा कूड़ा अलग देने पर मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट है। इसके लिए करदाताओं को रोजाना कूड़ा गाड़ी पर लगे QR कोड को मोबाइल ऐप से स्कैन करना होगा, जिससे यह दर्ज किया जाएगा कि कचरा अलग-अलग दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया जटिल है और आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से इसका पालन करना मुश्किल हो सकता है। टैक्स विवाद समाधान के लिए बनेगी कमेटी नगर निगम ने यह भी घोषणा की है कि हाउस टैक्स से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें निगम अधिकारी और पार्षद दोनों शामिल होंगे। यह कमेटी समय-समय पर कैंप आयोजित कर लोगों की समस्याओं का समाधान करेगी और टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम करेगी। नई व्यवस्था से राहत और असमंजस दोनों बरकरार नई दरों के लागू होने के बाद जहां एक ओर करदाताओं को पहले की तुलना में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कुछ शर्तों और डिजिटल प्रक्रियाओं को लेकर असमंजस भी बना हुआ है। नगर निगम का दावा है कि यह व्यवस्था लंबे समय में पारदर्शिता और राजस्व दोनों को मजबूत करेगी।  

कैटरर ने शादी में रसगुल्ला खाने पर 11 साल के चमन को तंदूर में फेंका, हुआ फरार

बस्ती  यूपी के बस्ती का छावनी थाना क्षेत्र, जहां गुरुवार शाम मलौली गोसाई गांव में एक शादी का कार्यक्रम चल रहा था. शादी के जश्न में बाराती, नाते-रिश्तेदार मौजूद थे. सब कुछ सामान्य था. इस बीच अपनी नानी के साथ पहुंचा 11 साल का चमन बार-बार काउंटर पर जाकर रसगुल्ले मांग रहा था. रसगुल्ला खाने की उसकी चाहत उसकी जान पर बन आएगी शायद उसने सोचा नहीं था. चमन के बार-बार रसगुल्ला मांगने पर नाराज कैटरर ने उसे जलती तंदूर पर बैठा दिया। लेकिन चमन फिसलकर तंदूर के अंदर गिर गया. उसकी चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग पहुंचे, चमन बुरी तरह झुलस गया था. इस बीच आरोपी कैटरर मौके से फरार हो गया. अब सवाल यह उठता है कि शादी में शामिल सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में कैसे यह घटना हुई और आरोपी कैसे फरार हो गया।  गोंडा जिले के नवाबगंज थाना दुर्जनपुर गांव का रहने वाला मासूम चमन अपनी मां के निधन के बाद से ही अपने ननिहाल बस्ती के बाघानाला में रह रहा है. गुरुवार को रिश्तेदारी में एक शादी के कार्यक्रम में वह नानी के साथ मलौली गोसाई गांव गया था. चारों तरफ ख़ुशी का माहौल था और लोग शादी के जष्न में मग्न थे.  11 साल का मासूम बार-बार काउंटर पर जाकर रसगुल्ला मांग रहा था. पहले तो कैटरर ठेकेदार ने उसे डराया फिर उसे जलती तंदूर पर बैठा दिया। जिसके बाद चमन फिसलकर तंदूर में जा गिरा. चमन की चीख पुकार सुनकर लोग जब तक पहुंचे वह बुरी तरह झुलस गया था।  गंभीर हालत में लखनऊ रेफर परिजनों ने उसे आनन-फानन में अयोध्या मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया. इन सब के बीच किसी की नजर कैटरर पर नहीं गई जिसने यह जघन्य अपराध किया था. वह मौके से फरार हो गया. इस मामले में चमन के मां देवीदीन निषाद की तरफ से मुकदमा दर्ज करवाया गया है. जिसके बाद से पुलिस आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है. एक रसगुल्ले के लिए मासूम अब जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।   

कनाडा में डिपोर्टेशन का अलर्ट, खालिस्तानी समर्थकों पर कार्रवाई की तैयारी

टोरंटो कनाडा में इमिग्रेंट्स और शरणार्थियों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है. सरकार ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें संकेत दिया गया है कि वे अब देश में रहने के पात्र नहीं हो सकते और उन्हें वापस लौटने की तैयारी करनी पड़ सकती है. इस कार्रवाई का असर खालिस्तान समर्थक आधार पर किए गए कुछ दावों पर भी पड़ सकता है।  पहले जहां कनाडा ऐसे मामलों में खतरे के आधार पर आसानी से शरण दे देता था, वहीं अब सरकार का रुख सख्त होता दिखाई दे रहा है. दरअसल, Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) ने करीब 30,000 शरणार्थी आवेदकों को “प्रोसीजरल फेयरनेस लेटर्स” भेजे हैं. इन नोटिसों में कहा गया है कि उनके दावे शरण के तय मानकों पर खरे नहीं उतर सकते. साथ ही आवेदकों को सीमित समय में अतिरिक्त जानकारी और सबूत पेश करने का मौका दिया गया है।  हालांकि सरकार ने साफ किया है कि ये “डिपोर्टेशन ऑर्डर” नहीं हैं, लेकिन कई मामलों में चेतावनी दी गई है कि अगर आवेदक अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द कनाडा छोड़ना पड़ सकता है, अन्यथा उनके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई हो सकती है।  इस पूरी कार्रवाई के पीछे नया कानून Bill C-12 है, जिसने शरण आवेदन के नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बना दिया है. इसके तहत, जो लोग कनाडा आने के एक साल के भीतर शरण के लिए आवेदन नहीं करते, उनके केस को Immigration and Refugee Board of Canada (IRB) तक नहीं भेजा जाएगा।  इसके अलावा, जो लोग अमेरिका से अनियमित तरीके से सीमा पार कर कनाडा पहुंचे और 14 दिनों के भीतर दावा नहीं किया, वे भी अपात्र माने जा सकते हैं।  इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई का असर भारतीय आवेदकों पर भी पड़ सकता है. कनाडा के इस नए नियम से जो इस तरह के मूवमेंट से जुड़े हैं उनपर कैंची चल सकती है. भारत के संदर्भ में कनाडा की ये पॉलिसी अहम साबित हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक भारत से भागकर कनाडा में छिपे हुए हैं।  विशेषज्ञों और वकीलों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि कई मामलों में आवेदकों को आमने-सामने सुनवाई का मौका नहीं मिल रहा और उन्हें अपना पक्ष कागजों के जरिए ही रखना पड़ रहा है. इससे उनकी स्थिति और जोखिम को ठीक से समझ पाना मुश्किल हो जाता है और गलत फैसलों की संभावना बढ़ सकती है।  कुल मिलाकर, कनाडा की यह सख्ती उसकी शरणार्थी नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. भले ही सरकार इसे मास डिपोर्टेशन नहीं मान रही, लेकिन जमीनी स्तर पर हजारों लोग अब अनिश्चितता में हैं और उन्हें अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता सता रही है। 

ED की रेड: पंजाब में संजीव अरोड़ा के घर और दफ्तर पर कार्रवाई, AAP ने BJP पर उठाए सवाल

लुधियाना पंजाब में आज सुबह-सुबह बड़ा एक्शन हुआ है. पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पर ईडी की रेड हुई है. जी हां, मान सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर और अन्य ठिकानों पर ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय का सर्च ऑपरेशन चल रहा है. FEMA के तहत गुरुग्राम, चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर में कुल 13 जगहों पर छापेमारी की गई. मंत्री संजीव अरोड़ा के सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि उनके कुछ अन्य ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी ली गई. इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा को घेरा है।  दरअसल, ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की टीम आज सुबह लुधियाना में उनके घर में ईडी की टीम पहुंची और बाहर केंद्रीय पुलिस बल को तैनात किया गया है. मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास और अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी. ED सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक पुराने मामले और जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं को लेकर की जा रही है।  सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पुराने मामले और कुछ जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं के शक के आधार पर की जा रही है. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक ईडी की तरफ से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच को लेकर कई तरह की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं।  इस पर आम आदमी पार्टी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. ‘आप’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘ईडी ने अब पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के यहां छापा मारा है. यह एक साफ पैटर्न है. भाजपा किसी भी राज्य चुनाव की तैयारी इसी तरह शुरू करती है।  वहीं पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘तीन दिन में पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ ईडी की ये दूसरी रेड है. अब पंजाब केबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के यहां ईडी ने रेड की है. केंद्र सरकार ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं. अब ये लोकतांत्रिक व्यवस्था का दिखावा भी नहीं कर रहे, तानाशाही डिक्लेयर कर दी है. पश्चिम बंगाल में जो ईडी के साथ होता है वो सही ही होता है फिर तो।  इससे पहले 15 अप्रैल को भी ईडी ने आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और उनके परिवार से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस दौरान गुरुग्राम, पंजाब और जालंधर समेत कई जगहों पर एक साथ कार्रवाई की गई थी. जांच कथित तौर पर फंड से जुड़े मामलों और यूनिवर्सिटी से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की जा रही थी।  खुलासे होने की संभावना इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अटकलों का बाजार और भी गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल, ईडी की टीम द्वारा की जा रही यह कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे जुड़े कोई बड़े तथ्य सामने आते हैं या नहीं। कौन हैं संजीव अरोड़ा और कहां-कहां रेड? ईडी अभी पंजाब के मंत्री श्री संजीव अरोड़ा, उनके बि नेस पार्टनर लुधियाना के श्री हेमंत सूद और जालंधर के चंद्रशेखर अग्रवाल के घरों और बिज़नेस की जगहों पर तलाशी ले रही है. संजीव अरोड़ा M/s Hampton Sky Realty Ltd (पहले M/s Ritesh Properties and Industries Ltd) कंपनी के प्रमोटर हैं, जो पंजाब में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का काम करती है. उनके बेटे काव्य अरोड़ा अभी कंपनी के MD हैं और उनके यहां भी तलाशी ली जा रही है।  • संजीव अरोड़ा की कंपनी पर कई तरह की गड़बड़ियों का शक है. जैसे पंजाब में ज़मीन के इस्तेमाल में गैर-कानूनी बदलाव करना, शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिक्री दिखाना, शेयर बाज़ार में इनसाइडर ट्रेडिंग के घोटाले करना, UAE से भारत में गलत तरीके से कमाए गए पैसों और गैर-कानूनी सट्टेबाजी के पैसों की राउंडट्रिपिंग करना, वगैरह।

संभल में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर

 संभल संभल के असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में जिला प्रशासन ने अवैध रूप से बनी मस्जिद, गौसुल मदरसा और पांच दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम ने खाद के गड्ढे और खेल के मैदान के लिए आरक्षित 700 वर्गमीटर सरकारी भूमि को चिन्हित किया था।  पैमाइश के बाद अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसके बाद मदरसे को ध्वस्त कर दिया गया. अब मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने के लिए बुलडोजर पहुंचा है. ग्रामीणों और मस्जिद कमेटी ने खुद ही प्रशासन से अवैध निर्माण हटाने में मदद मांगी थी।  भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण मस्जिद पर बुलडोजर चलने से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. सीओ कुलदीप सिंह के साथ दो थानों की पुलिस और आरपीएफ (RRF) के जवान मौके पर तैनात रहे. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह निर्माण खेल के मैदान और खाद के गड्ढे की जमीन पर किया गया था. 31 मार्च से ही कमेटी के लोगों ने खुद दुकानों और मदरसे को हटाना शुरू कर दिया था, लेकिन मस्जिद का हिस्सा बाकी रहने पर अब प्रशासन ने इसे पूरी तरह ध्वस्त करने की कमान संभाली है।  प्रशासन का लैंड बैंक प्लान संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने साफ किया है कि सरकारी भूमि पर हुए सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे. जिले में सवा सौ हेक्टेयर भूमि को अब तक कब्जा मुक्त कराया जा चुका है. प्रशासन अब इन जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए एक 'लैंड बैंक' बना रहा है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके. डीएम ने चेतावनी दी है कि अवैध अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण मौके पर शांति बनी हुई है. यह कार्रवाई संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है. पूरा मामला अब तहसील स्तर पर निगरानी में है. गौरतलब है कि संभल जिला प्रशासन लगातार अवैध कब्जे पर बुलडोजर की कार्रवाई कर रहा है. जिलाधिकारी ने खुद कहा है कि जिले में किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 31 जनवरी को बेदखली का आदेश मामले में लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने 18 जनवरी, 2026 को तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत वाद दायर किया। इसके बाद 31 जनवरी को सार्वजनिक नोटिस जारी कर अखबार में प्रकाशन कराया गया। ताकि संबंधित पक्ष सामने आकर अपना दावा पेश कर सके। हालांकि तय समय सीमा में कोई भी व्यक्ति स्वामित्व का दावा करने या अपत्ति दर्ज करने के लिए नहीं आया। अदालत ने इसके बाद अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए, लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो 31 जनवरी को ही बेदखली का आदेश पारित कर दिया गया। पर्याप्‍त समय दिए जाने के बाद भी नहीं हटाया गया अवैध निर्माण उल्लेखनीय है कि इस आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई आपत्ति सामने नहीं आई। इससे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। गुरुवार को एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसलिए अब बुलडोजर कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।  

Netflix के सह-संस्थापक का इस्तीफा, 1997 में शुरू हुआ था इस प्लेटफॉर्म का सफर

 नई दिल्ली ओवर द टॉप (OTT) इंडस्ट्री के दिग्गज प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के को-फाउंडर रीड हेस्टिंग्स ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. आने वाले जूम महीने में उनके चेयरमैन पद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके बाद वह कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से भी इस्तीफा दे देंगे. इसकी जानकारी खुद कंपनी की तरफ से दी गई है।  को-फाउंडर इस्तीफे के बाद लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहते हैं. हालांकि वह क्या काम होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. साल 2023 में भी उन्होंने सीईओ पद से इस्तीफा दिया था, जो काफी चर्चा में रह चुका है।  रीड हेस्टिंग ने 1997 में अपने दोस्त और सह-संस्थापक मार्क रैंडोल्फ के साथ इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी. इसके बाद साल 2023 तक यानी करीब 20 साल तक उन्होंने नेटफ्लिक्स की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद हेस्टिंग ने सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया।  रीड हेस्टिंग ने कहा रीड हेस्टिंग ने कहा कि Netflix में मेरा असली योगदान कोई एक फैसला नहीं था. असल में यह मेंबर्स की खुशी पर फोकस करना और एस ऐसे कल्चर को बनाना, जिसे लोग आगे बेहतर बना सकें।  नेटफ्लिक्स क्या है?  नेटफ्लिक्स, असल में एक वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है. अब यह इंटरनेट के माध्यम से काम करता है, जबकि शुरुआत DVD के जरिए हुई थी. अब नेटफ्लिक्स वेब सीरीज, टीवी शो और डॉक्यूमेंट्रीज आदि उपलब्ध कराता है और यह प्लेटफॉर्म दुनियाभर में पॉपुलर है।  कंपनी अपने इस प्लेटफॉर्म को सब्सक्रिप्शन बेस्ड सर्विस के रूप में देती है. भारत समेत दुनियाभर में इसके करोड़ों यूजर्स हैं. भारत में टीवी के लिए शुरुआती वर्जन 199 रुपये का है, जो विज्ञापन के साथ आता है. आज यह 190 से अधिक देशों में उपलब्ध है।  OTT प्लेटफॉर्म क्या होते हैं?  ओवर द टॉप (OTT), असल में वे प्लेटफॉर्म होते हैं, जो इंटरनेट के जरिए सीधे स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और टैबलेट आदि पर वीडियो कंटेंट स्ट्रीमिंग की सुविधा देते हैं. इसमें नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, जियो हॉटस्टार, जी5 आदि का नाम शामिल है।