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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, दिहाड़ी मजदूरों के लिए दाल-रोटी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी

नई दिल्ली नोएडा में फैक्‍ट्री कामगारों के उग्र हिंसक प्रदर्शन के बाद अब सरकार न्‍यूनतम दिहाड़ी मजदूरी को दोगुने से भी ज्‍यादा करने पर विचार कर रही है. सबकुछ ठीक रहा तो मजदूरों को जल्‍द ही यह खुशखबरी मिल जाएगी. केंद्र सरकार की तरफ से दिहाड़ी मजदूरी बढ़ाने के बाद राज्‍य सरकारों की तरफ से भी इस दिशा में कदम उठाए जा सकेंगे. बता दें कि दिल्‍ली-एनसीआर के प्रमुख शहर में से एक नोएडा में फैक्‍ट्री में काम करने वालों का गुस्‍सा वेतन को लेकर फूट पड़ा था. इन कामगारों का आरोप है कि उन्‍हें सरकार की ओर से निर्धारित सैलरी भी नहीं दी जा रही है. इस मामले के व्‍यापक प्रभाव को देखते हुए सरकार अब मजदूरों के हित में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है।  केंद्र सरकार देश में न्यूनतम मजदूरी को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. ‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार राष्ट्रीय स्तर पर दैनिक न्यूनतम वेतन को मौजूदा ₹176 से बढ़ाकर करीब ₹450 तक करने पर विचार कर रही है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में मजदूरों के विरोध के बाद वेतन बढ़ाने की मांग तेज हुई है. श्रम मंत्रालय सभी श्रेणियों (कुशल, अर्ध-कुशल (सेमी स्किल्‍ड) और अकुशल) के कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने की दिशा में काम कर रहा है. एक बार राष्ट्रीय फ्लोर वेज (बेस वेज या मजदूरी) तय हो जाने के बाद राज्यों को भी अपने-अपने न्यूनतम वेतन में संशोधन करना होगा. प्रस्तावित ढांचे के अनुसार मासिक वेतन दैनिक मजदूरी के 26 गुना के बराबर होगा।  अंतिम चरण में चर्चा सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर राज्यों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है. गौरतलब है कि मौजूदा राष्ट्रीय फ्लोर वेज वर्ष 2017 में तय किया गया था. यह पहल ऐसे समय में अहम मानी जा रही है जब मजदूरी वृद्धि और कॉर्पोरेट मुनाफे के बीच अंतर बढ़ता दिख रहा है. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कंपनियों का एबिट्डा मार्जिन (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) करीब 22% के आसपास स्थिर रहा है, जबकि वेतन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है. खासकर आईटी सेक्टर के शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के वेतन में ठहराव की समस्या सामने आई है।  आर्थिक असमानता दूर करने में मदद केंद्र सरकार यह बदलाव नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के तहत कर रही है. ‘कोड ऑन वेजेस, 2019’ राष्ट्रीय फ्लोर वेज और समान वेतन परिभाषा प्रदान करता है, जबकि अन्य श्रम कोड श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल की परिस्थितियों में सुधार पर केंद्रित हैं. सरकार का मानना है कि इस कदम से देशभर में मजदूरों की आय में सुधार होगा और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद मिलेगी। 

भारत का बड़ा कदम: अमेरिकी छूट के बाद भी रूसी तेल और LPG की खरीद जारी रखेगा

नईदिल्ली  भारत कहां से और किससे तेल खरीदेगा? यह अमेरिका तय नहीं करेगा. भारत खुद तय करेगा. जी हां, अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिनों की छूट खत्म कर दी. ऐसे में सवाल है कि क्या भारत अब रूसी तेल खरीद पाएगा? तो इसका जवाब है हां. रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी 30 दिन की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूसी तेल खरीदता रहेगा और एलपीजी आयात जारी रखेगा. अमेरिका का यह फैसला उसके अपने लिए है. इससे भारत की रणनीति का कोई लेना-देना नहीं।  दरअसल, ईरान जंग जुड़ी वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों की चिंताओं के बीच अमेरिका ने मार्च की शुरुआत में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी थी. यह ढील उन रूसी तेल पर थी, जो पहले से ही रास्ते में थे. हालांकि, अमेरिका ने रूसी तेल वाली वो छूट खत्म कर दी है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि रूसी तेल पर इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. ईरानी तेल को लेकर भी अमेरिका का यही फैसला है।  रूस से तेल खरीदता रहेगा भारत अंग्रेजी अखबार मिंट ने एक अधिकारी को कोट कर लिखा कि रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट पर अमेरिका का फैसला उसका अपना अधिकार है और यह भारत की आयात रणनीति तय नहीं करेगा. मिंट के अनुसार, उस शख्स ने कहा, ‘रूस से तेल और LPG खरीदने के प्रयास जारी हैं. साथ ही जिन संस्थाओं पर प्रतिबंध नहीं हैं, उनसे कच्चा तेल और एलपीजी दोनों का आयात जारी रहने की संभावना है।  और किससे बात हो रही मिंट ने बताया कि भारतीय रिफाइनर हाल ही में रूस, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से कुल 800000 टन LPG की आपूर्ति हासिल करने के बाद अब भविष्य के कार्गो के लिए बातचीत कर रहे हैं. उसी सूत्र ने आगे कहा कि अब तक रूस से LPG की जितनी मात्रा का सौदा हुआ है, वह अभी भी सीमित है और खेप अभी तक भारत नहीं पहुंची है. मिंट के अनुसार उस व्यक्ति ने कहा, ‘अभी भी, रूस से आयात की जो मात्रा तय हुई है, वह बहुत ज़्यादा नहीं है, और ज़्यादा LPG आपूर्ति के लिए बातचीत जारी है।  अमेरिका ही रहेगा एलपीजी का बड़ा सप्लायर एक और सूत्र ने मिंट को बताया कि मौजूदा माहौल में अमेरिका ही भारत का मुख्य LPG सप्लायर बना रह सकता है. कनाडा से भी भारत को LPG सप्लाई की उम्मीद है, जबकि अतिरिक्त कुकिंग गैस इंपोर्ट के लिए अंगोला के साथ भी बातचीत चल रही है।  कच्चे तेल के मामले में सरकारी अधिकारियों ने मिंट को बताया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले भारत के कुल इंपोर्ट में पश्चिम एशिया का हिस्सा लगभग 60% था. मिंट ने बताया कि फिनलैंड स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (Crea) के डेटा से पता चला है कि अब यह हिस्सा घटकर लगभग 30% रह गया है, जबकि मार्च में रूसी कच्चे तेल का इंपोर्ट महीने-दर-महीने दोगुना हो गया।  मिंट ने CREA के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि मार्च में चीन के बाद भारत रूसी फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने 5.8 बिलियन यूरो मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का इंपोर्ट किया. भारत सरकार ने हमेशा यह कहा है कि वह कमर्शियल फायदे और सप्लायर्स की एक विस्तृत श्रृंखला के आधार पर ऊर्जा प्राप्त करती है. वैसे भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा था कि हम अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीद रहे हैं। 

आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी

आज फिर पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतरेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज कूच बिहार व जलपाईगुड़ी में जनसभाओं को संबोधित करेंगे सीएम योगी बांकुरा में रोड शो के माध्यम से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे मुख्यमंत्री सीएम योगी की सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह लखनऊ पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में शनिवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिलेगी। पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल योगी का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे उत्तर से दक्षिण तक फैले तीन जिलों में लगातार कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल को धार देंगे। दो जनसभाओं को करेंगे संबोधित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कूच बिहार जिले की माथाभांगा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशी निशीथ प्रमाणिक के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीमावर्ती इस क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और मुख्यमंत्री योगी की सभा को इसी दिशा में एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी विधानसभा की ओर रुख करेगा, जहां वे दोपहर 1:20 बजे भाजपा उम्मीदवार नरेश चंद्र राय के पक्ष में जनसभा करेंगे। उत्तर बंगाल की इस बेल्ट में पार्टी ने पिछले चुनावों में जो आधार तैयार किया था, उसे और सुदृढ़ करने पर इस बार खास जोर है। बांकुरा में करेंगे रोड शो दिन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री शाम 4:15 बजे बांकुरा पहुंचेंगे, जहां भाजपा प्रत्याशी नीलाद्री शेखर दाना के समर्थन में उनका रोड शो प्रस्तावित है। बांकुरा, जो कि जंगलमहल क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वहां रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। स्थानीय स्तर पर इसकी व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी भीड़ जुटने के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सभाओं में हाल के दिनों में उमड़ रही भीड़ ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है।  योगी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ से बढ़ा कार्यकर्ताओं का उत्साह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है। सभास्थलों पर हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों में मुख्यमंत्री की एक झलक पाने की जबरदस्त उत्सुकता दिखाई दे रही है। कई जगहों पर भीड़ इतनी अधिक हो रही है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही। सभा शुरू होने से काफी पहले ही लोग पहुंचकर अपनी जगह सुनिश्चित कर रहे हैं और अंत तक डटे रहते हैं। यह नजारा न केवल स्थानीय स्तर पर भाजपा के बढ़ते जनाधार की ओर इशारा करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा दे रहा है।

नेतन्याहू का बयान: सीजफायर के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किमी सुरक्षा जोन बनाए रखेगा

यरूशलम  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा। उनका यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की। यह समझौता नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के बीच हुआ है और इसे अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार शाम 5 बजे से लागू किया जाना है। नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने हिजबुल्लाह की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें इजरायली सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पीछे हटने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना लेबनान के अंदर बनाए गए इस सुरक्षा क्षेत्र में ही तैनात रहेगी। उनका कहना है कि यह सुरक्षा क्षेत्र उत्तरी इजरायल के इलाकों को हमलों और टैंक रोधी हथियारों से बचाने में मदद करेगा। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि लेबनान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता करने का मौका है। उन्होंने बताया कि ट्रंप इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें और लेबनान के राष्ट्रपति को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। नेतन्याहू के अनुसार, यह मौका इसलिए बना है क्योंकि इजरायल ने लेबनान में ताकत का संतुलन अपने पक्ष में बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक महीने में लेबनान की ओर से सीधे शांति वार्ता के संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि इन बातचीतों में इजरायल की दो मुख्य शर्तें होंगी- पहली, हिजबुल्लाह को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे, और दूसरी, एक स्थायी शांति समझौता होना चाहिए। ईरान के मुद्दे पर नेतन्याहू ने दावा किया कि ट्रंप ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे समुद्री नाकेबंदी जारी रखेंगे और ईरान की बची हुई परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। नेतन्याहू ने इन कदमों को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे आने वाले वर्षों में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। इस बीच, ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य तनाव को कुछ समय के लिए कम करना है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू और जोसेफ आउन से बातचीत के बाद दोनों पक्ष 10 दिन के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, जो वाशिंगटन समय के अनुसार शाम 5 बजे से शुरू होगा। यह युद्धविराम उस संघर्ष को रोकने की कोशिश है, जो तब बढ़ गया था जब इजरायल ने ईरान से जुड़े हिजबुल्लाह के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया था। हालांकि लेबनान और इजरायल के बीच औपचारिक युद्ध नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और उसने इज़राइल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की है।