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सफलता की मिसाल: ड्रोन के साथ हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा

सफलता की कहानी: ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं और आजीविका मिशन से मिली पहचान भोपाल सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी श्रीमती सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं सरूपी मीणा श्रीमती सरूपी मीणा ने बताया कि वे 10वीं तक शिक्षित थीं। उनके पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं, जबकि उनकी इच्छा पढ़ाई जारी रखने की थी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने गांव में भ्रमण कर महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उस समय सरूपी मीणा बेरोजगार थीं और आगे बढ़ने के अवसर तलाश रही थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। साथ ही, उन्होंने समूह निर्माण और सर्वे कार्य सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा। समूह से प्राप्त ऋण और मानदेय के सहयोग से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारंभ की। इसके अलावा, उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके समूह का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) भी स्वीकृत हुआ। इन सभी कार्यों से उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। बाद में उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई। निरंतर मेहनत और लगन के चलते श्रीमती सरूपी मीणा ने अपनी शिक्षा जारी रखते हुए स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण कर ली। आजीविका मिशन से मिली पहचान, ड्रोन तकनीक से बढ़ी आय श्रीमती सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त श्रीमती सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। श्रीमती सरूपी मीणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।  

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल गुना आज गुना अल्पप्रवास पर पधारे मध्यप्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग जी का गुना बायपास पर भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता श्री विश्वनाथ सिंह सिकरवार के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने गर्मजोशी के साथ उनका अभिनंदन किया। मंत्री  सारंग जी के आगमन पर कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा एवं जयकारों के साथ उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। इस स्वागत कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  मनीष कृष्णानी, शेरा राजावत, देवकीनंदन सोनी, सरदार रंजीत सिंह, सतेंद्र सिकरवार, मुनेश धाकड़, विकास राठौर, अमित जाट, जगदीश नामदेव, भूपेंद्र सोलंकी, रोहन सेन, प्रदीप कुशवाह सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान  सारंग जी ने सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह स्नेह और समर्थन उन्हें प्रदेश के विकास के लिए और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज 6 घंटे में, PM मोदी इस दिन कर सकते हैं उद्घाटन

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेरठ से प्रयागराज तक का सफर करने की सोच रहे हैं, तो मेरठवासियों का यह सपना इसी महीने पूरा होने होनी की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर आम जनता के लिए इसे सौंप दिया जाए, जिसको लेकर अब अंतिम तैयारी का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में लोकल 18 टीम की ओर से भी मेरठ के बिजौली मार्ग पर गंगा एक्सप्रेस पर ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लिया।  गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत की बात की जाए, तो मेरठ से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि वर्तमान समय में मेरठ से प्रयागराज जाने मे लगभग 12 घंटे का समय लग जाता है, जिस कारण उन्हें काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है. ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत होने के बाद मात्र 6 से 7 घंटे में ही प्रयागराज तक की दूरी को तय कर सकते हैं।  इन जिलों से होकर गुजरेगा हाइवे आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से इस हाइवे को तैयार किया गया है, जहां आधुनिक स्पीड के माध्यम से सफर करते हुए यात्री प्रयागराज तक पहुंच पाएंगे. खास बात यह है कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से अन्य जनपदों की दूरी भी कम होगी. इस नेशनल हाइवे के माध्यम से लगभग 12 जिले जुड़ते हुए नजर आएंगे. इसमें मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेंगे।  औद्योगिक क्रांति को भी मिलेगी उड़ान उन्होंने बताया कि इस हाइवे के माध्यम से सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र को भी एक नई उड़ान मिलेगी. गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही औद्योगिक क्षेत्र भी डेवलप किया जाएगा, जिसको लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही विभिन्न ऐसी इकाइयों को स्थापित किया जाए, जिसके माध्यम से युवाओं को भी रोजगार मिल सके।  6 से 7 घंटे में पहुचेंगे प्रयागराज बताते चलें कि मेरठवासी इसके शुभारंभ का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अभी उन्हें प्रयागराज जाने के लिए नौचंदी ट्रेन या फिर बस का ही सहारा लेना पड़ता है, जिसमें लगभग 12 घंटे से अधिक का समय लगता है. वहीं अगर अपनी गाड़ी से भी जाते हैं, तो उसमें भी काफी समय लग जाता है, लेकिन 594 किलोमीटर के इस गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से सफर को मात्र 6 से 7 घंटे में ही पूरा कर पाएंगे।  दरअसल मेरठवासी इस बात का स्वागत भी कर रहे हैं. मेरठ के रहने वाले हिमांशु कहते हैं कि उन्हें प्रयागराज जाने के लिए अभी अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वह अपनी गाड़ी से भी जब इसका शुभारंभ हो जाएगा, तो सफर करेगे. इसी तरीके से स्टूडेंट सुजीत ने बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है, लेकिन अब राहत मिलेगी। 

यूपी में कैबिनेट और बीजेपी संगठन में बदलाव की तैयारी, योगी की टीम में होंगे बड़े बदलाव

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े फेरबदल की तैयारी कर ली है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद यूपी के राजनीतिक  कॉरिडोर में योगी के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है।  बिहार के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी संगठन और मंत्रिमंडल विस्तार कीप्लानिंग कर ली गई है. गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महमंत्री धर्मपाल सिंह ने पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष के साथ बैठक की और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात की।   पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह की दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात को उत्तर प्रदेश में सियासी बदलावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. इस बार कैबिनेट विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है. ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ की पसंदीदा नेताओं की लॉटरी लग सकती है?  यूपी में होने जा रहा कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश में कैबिनिट विस्तार को लेकर काफी समय से कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते में यूपी बीजेपी की ओर से एक बड़ी एक्सरसाइज देखने को मिली है. पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का बीजेपी के टॉप लीडरशिप के साथ गुरुवार को हुई बैठक में यूपी में बड़े सांगठनिक बदलाव के साथ-साथ मंत्रिमंडल विस्तार पर यह चर्चा हुई है।  यूपी में माना जा रहा है कि जल्द ही संगठन के नए स्वरूप के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार भी हो जाएगा. बीजेपी अपने प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को निगम आयोग और बोर्ड में समायोजन करना चाहती है ताकि मंत्रिमंडल विस्तार के पहले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट किया जा सके. पिछले दिनों यूपी के कई नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं, जिनके शपथ ग्रहण भी करा दिए गए हैं।  मंत्रियों की खंगाली जा रही कुंडली यूपी में अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कयास तेज हो गए हैं. माना जा रहा है कि योगी मंत्रिमंडल में दर्जन भर फेर बदल हो सकता है. योगी सरकार के कई मंत्रियों के चार साल के कामकाज की सियासी कुंडली खंगाली गई है, जिसमें मंत्री के काम काज का भी आकलन किया गया है. ऐसे में कई पुराने मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जाए सकता है।  योगी की पसंद का रखा जाएगा ख्याल माना जा रहा है कि बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी पसंद और नापसंद से अवगत करा दिया है. इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पसंद के चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है. यूपी में अभी  6 मंत्रियों की जगह खाली है जबकि आधे दर्जन लोगों को बदला जा सकता है. इस तरह करीब एक दर्जन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसके जरिए बीजेपी 2027 के सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है।  UP में एक महीने से हो रही एक्सरसाइज उत्तर प्रदेश में बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगातर इतिहास रचना चाहती है. इसके लिए पिछले एक महीने में उत्तर प्रदेश बीजेपी में मंथन के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं. संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुख्यमंत्री और दोनों मुख्यमंत्री की मुलाकात के अलावा विनोद तावड़े चार दिन पहले लखनऊ आकर सभी भाजपा के पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।  विनोद तावड़े की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हो चुकी है. यही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी कई बैठके हो चुकी है.दिल्ली में बैठे प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात को अब आखिरी दौर की चर्चा चल रही है. ऐसे में यूपी में यह बदलाव कभी भी हो सकते हैं।  क्षेत्रीय और जातीय बैलेंस बनाने का प्लान संगठन में रहे कुछ अन्य मजबूत चेहरों को भी योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. कुछ राज्यमंत्रियों का कद बढ़ाकर स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया जा सकता है. बोर्ड और निगमों में भी कई चेहरों का समायोजन हो सकता है. माना जा रहा है कि पश्चिम की भागीदारी बढ़ सकती है, क्योंकि पूरब से ही मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष हैं।  यूपी में ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी को देखते हुए, उन्हें सत्ता और संगठन में मौका दिया जा सकता है. ऐसे में ये हो सकता है कि कुछ ब्राह्मण चेहरों को भी सरकार स संगठन तक जगह दी जाए. 2027 के यूपी चुनाव को देखते हुए भी सरकार से संगठन तक बदलाव में सामाजिक समीकरणों और जातीय गणित साधने की रणनीति भी देखने को मिल सकती है।  सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली कैबिनेट में फिलहाल अभी 54 मंत्री हैं जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इस तरह योगी सरकार में 6 मंत्री के पद खाली है. 2027 के विधानसभा चुनाव के देखते हुए पार्टी योगी कैबिनेट विस्तार कर सियासी समीकरण को साधने की कवायद करना चाहती है।    योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी यूपी में अपने सियासी समीकरण को साधने का दांव चल सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बिगड़े जातीय समीकरण को दुरुस्त करने के लिए बीजेपी ने संगठन की कमान ओबीसी की कुर्मी जाति से आने वाले केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को सौंपी. अब उन्हें यूपी में अपनी टीम गठित करनी है. ऐसे में 2027 के लिहाज से टीम बनानी है ताकि सत्ता की हैट्रिक लग गए। 

जनगणना में गलत नाम भरने पर नहीं मिलेगा सुधार का मौका, सावधानी से भरें फार्म

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत गुरुवार से स्वगणना का पोर्टल एसईडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन se.census.gov.in खुल गया है। यहां स्वगणना के प्रति खासा उत्साह रहा, लेकिन ऑनलाइन फार्म में तकनीकी दिक्कतें आने से लोगों को परेशान होते भी देखा गया। तीसरे पेज पर जैसे ही घर की लोकेशन जियो टैगिंग से करने का बॉक्स आया, फार्म अटक गया। यहां दर्ज किए पते के आधार पर खुद ही जियो टैगिंग के लिए मैप खुलता है। इसमें लोग बार- बार सटीक लोकेशन को लेकर प्रयास करते रहे। स्व गणना में नाम भरने में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है अन्यथा गलत नाम ही जुड़ जाएगा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि नाम सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। लोकेशन को लैटिट्यूड- लॉन्गिट्यूड में बताकर कंफर्म करने का पूछा जा रहा है। इसमें लोग भ्रमित हो रहे हैं। अरेरा कॉलोनी में रहने वाले अवधेश सिंह ने बताया कि आधे से पौन घंटे तक टैगिंग की कोशिश की। लोकेशन में दिक्कत आई। काम पर जाना था, इसलिए फिर नहीं किया। अब शुक्रवार को फिर कोशिश करेंगे। ऐसे समझें जनगणना की टाइम लाइन स्व गणना के लिए 30 अप्रैल 2026 तक पार्टल खुला रहेगा। प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम 1 मई से शुरु करेंगे। यह कार्य 30 मई 2026 तक होगा। पोर्टल पर राज्य का चयन कर परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। यहां ऑनलाइन मैप पर घर की जियो टैंगिंग होगी। स्व गणना के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर खुद की डिटेल जमा करेंगे तो आखिर में 11 अंकों की एक विशिष्ट स्व गणना पहचान संख्या बनेगी। ये मोबाइल और ई-मेल पर भी प्राप्त होगी। जनगणना के दौरान इसकी जरूरत पड़ेगी। किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा स्व गणना में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। गलत नाम ही जनगणना में जुड़ जाएगा। सुबह फार्म खुल रहा था, लेकिन दोपहर बाद इसमें बाधा आने लगी। बताया जा रहा है देशभर से लोग इसे ओपन करने की प्रक्रिया करने लगे, जिससे ये अटकता रहा। जिला प्रशासन के संबंधित अफसरों के अनुसार एक बैठक में 20 से 22 मिनट में फार्म भरा जा सकता है। थोड़े धैर्य के साथ काम करेंगे तो दिक्कत नहीं होगी। एक बार लोकेशन को सर्च करने के बाद उसे पुख्ता करने के लिए पूछा जाता है।

5 हजार करोड़ की योजना से प्रदेश के शहरों में आएगा बदलाव, फंड का हुआ इंतजाम

भोपाल   केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) की गाइडलाइन जारी होने के बाद अब प्रदेश के सभी नगरीय निकाय अपने यहां विकास कार्यों को गति देने करोड़ों की योजनाएं बना सकते हैं। प्रदेश के बड़े चारों नगर निगम जहां 2 हजार करोड़ तक की परियोजना बना सकते हैं, वहीं छोटी नगर परिषद 50 करोड़ की योजना बनाकर अपने यहां बदलाव ला सकती है। नगरीय विकास विभाग ने यूसीएफ में अपने हिस्से की राशि देने के लिए द्वारका योजना के 5 हजार करोड़ का फंड सुरक्षित रखा है। निकायों को केवल 10 से 15 प्रतिशत राशि देना पड़ेगी। 25 प्रतिशत केन्द्र, 50 प्रतिशत राशि बाजार से लेना जरूरी है और शेष 25 प्रतिशत में कुछ सहयोग राज्य सरकार करेगी और कुछ निकाय मिलाएंगे। भोपाल में शहरी सुधार कार्यशाला में यह जानकारी दी। प्रदेश के नगरीय निकायों में इसके लिए जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने का काम गुरुवार को शुरू हुआ। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरी सुधार कार्यशाला का आयोजन किया है। राजधानी में आयोजित यह कार्यशाला दो दिन चलेगी। "शहरी सुधार कार्यशाला" का प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। राजस्व वृद्धि पर विशेष बल शहरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि अधिकारी पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नए कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष साथ देगी। अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावना अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।

Census 2027: ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल, जानें पूरी जानकारी

भोपाल  देश की डिजिटल कुंडली यानी जनगणना 2027 का आगाज गुरुवार से हो गया है। इस बार आपको प्रगणक के घर आने और घंटों पूछताछ का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। स्व-गणना के जरिए अब नागरिक खुद पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी अपडेट कर सकते हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक यूनिक एसई आईडी सबसे अहम कड़ी होगी, जिसे संभालकर रखना आपकी जिम्मेदारी होगी। 34 सवालों के जवाब और लोकेशन का मैप ऑनलाइन जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे तकनीक से जोड़ा गया है। इसमें मोबाइल नंबर और ईमेल पर ओटीपी वेरिफिकेशन के साथ ही गूगल मैप के जरिए घर की सटीक लोकेशन भी दर्ज करनी होगी। परिवार के सदस्यों की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े करीब 34 सवालों के जवाब देने होंगे। डिजिटल जनगणना: ऐसे करें खुद का पंजीकरण चरण प्रकिया स्टेप 1-2 पोर्टल पर मोबाइल नंबर/ईमेल दर्ज कर ओटीपी से वेरिफिकेशन। स्टेप 3-4 परिवार के मुखिया का विवरण और गूगल मैप पर घर की लोकेशन। स्टेप 5-6 सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार और आय से जुड़े 34 सवालों के जवाब। स्टेप 7-8 जानकारी का प्रीव्यू कर फाइनल सबमिट और 'एसई आइडी' सुरक्षित करना। क्यों जरूरी है आइडी: मई माह में जब प्रगणक आपके घर सत्यापन के लिए आएगा, तो आपको बस यह आइडी दिखानी होगी। भूल गए तो क्या होगा: यदि आप आइडी गुम कर देते हैं या नहीं दिखा पाते, तो आपकी ऑनलाइन मेहनत बेकार जाएगी। प्रगणक को दोबारा शुरुआत से आपका डेटा मैनुअल भरना पड़ेगा। ग्राउंड जीरो पर तैयारी: प्रगणकों को मिल रही ट्रेनिंग एक तरफ नागरिक ऑनलाइन डेटा भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सत्यापन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की फौज तैयार कर ली है। शहर में आइआइटीटीएम और शिक्षा महाविद्यालय हजीरा में सघन प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में तहसील और विकासखंड स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को डिजिटल डेटा हैंडलिंग के गुर सिखा रहे हैं। 30 अप्रैल तक चलेगी स्व-गणना की प्रक्रिया मध्यप्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक ऑनलाईन स्व-गणना का कार्य होगा। एक से 30 मई तक मकान सूचीकरण होगा। यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in पर प्रारंभिक पंजीकरण कर प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे हम जान सकेंगे कि विकास की धारा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच रही है या नहीं। यह जनगणना हमारी अगली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए है।

FSSAI ने जारी किए सख्त निर्देश, केमिकल से फल पकाने पर होगी कड़ी कार्रवाई

 नई दिल्ली FSSAI ने फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. 16 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि खतरनाक केमिकल्स के जरिए फलों को पकाना पूरी तरह गैरकानूनी है और अब इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. खासतौर पर कैल्शियम कार्बाइड जैसे जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है. बता दें कि कई जगहों पर फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जा रहा था, जिस पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है।  भारत सरकार की खाद्य सुरक्षा संस्था (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों, क्षेत्रीय निदेशकों और लाइसेंसिंग अधिकारियों को चेतावनी दी है कि आम, केला, पपीता समेत अन्य फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (जिसे बाजार में 'मसाला' के नाम से जाना जाता है) का इस्तेमाल बिल्कुल वर्जित है।  FSSAI ने अपने पुराने निर्देशों को दोहराते हुए कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इनमें निगलने में तकलीफ, उल्टी, पेट दर्द और त्वचा पर अल्सर (घाव) जैसी शिकायतें शामिल हैं. दरअसल, यह पदार्थ फलों पर लगाने से उनमें जहरीली गैस निकलती है जो इंसान के लिए खतरनाक है।  नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि फलों को सीधे एथेफॉन घोल में डुबोकर पकाना अवैध है. FSSAI की गाइडलाइन के अनुसार, एथिलीन गैस का इस्तेमाल तो किया जा सकता है, लेकिन फलों या सब्जियों के साथ उसका सीधा संपर्क (पाउडर या लिक्विड रूप में) पूरी तरह प्रतिबंधित है।  बाजारों और गोदामों में बढ़ेगी छापेमारी      FSSAI ने सभी राज्यों से कहा है कि फल मंडियों, स्टोरेज गोदामों, थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर नजर रखी जाए.     मौसमी फलों (खासकर आम के मौसम में) जहां 'मसाला' का शक हो, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं.     अगर किसी जगह कैल्शियम कार्बाइड, मोम या नकली रंग मिले तो तुरंत कार्रवाई की जाए.     कैल्शियम कार्बाइड मिलने पर FSS Act की धारा 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.     एसीटिलीन गैस की जांच के लिए स्ट्रिप पेपर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए. FSSAI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अमित शर्मा ने साफ कहा है कि अवैध तरीके से फल पकाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। 

सरकार द्वारा प्रदेश में नई तहसीलें, सीमाओं का नया निर्धारण शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। तहसीलों की सीमाएं नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजधानी भोपाल से इसकी शुरुआत हुई। भोपाल में अभी तीन तहसीलों में 8 नजूल क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों को ही तहसील का दर्जा देते हुए आम जनता की सुविधा के अनुसार इनकी सीमाएं नए सिरे से तय की जाएगी। इसके लिए बाकायदा जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में अगले दो माह तक जनता से सुझाव लिए जाएंगे। 15 जून 2026 तक पुनर्गठन आयोग के पोर्टल पर जाकर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसलिए ये प्रक्रिया सरकार का मानना है कि तहसीलों के पुनर्गठन से राजस्व, नामांतरण, जाति-आय प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों सहित अन्य प्रशासनिक सेवाएं लोगों को आसानी से मिल सकेंगी। आम जनता को अपने राजस्व या प्रशासनिक कार्यों के लिए बहुत दूर न जाना पड़े। सुझाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव तैयार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। भोपाल में पुनर्गठन इसलिए जरूरी भोपाल के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां के निवासियों को तहसील कार्यालय पहुंचने 50-60 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। पुनर्गठन से कार्यालय उनके करीब आएंगे। भोपाल की हुजूर जैसी तहसीलें बहुत बड़ी हैं, जिनका प्रबंधन कठिन है। इन्हें काटकर छोटी और व्यवस्थित इकाइयां बनाना। खसरा, खतौनी और जाति प्रमाण पत्र जैसे कामों के लिए 10-15 किमी के भीतर कार्यालय मिलेगा। बावडिय़ा कलां जैसे क्षेत्रों को हटाकर चंदनपुरा और मेंडोरा जैसे क्षेत्रों को जोडऩे का प्रस्ताव है। एमपी नगर, गोविंदपुरा और बैरागढ़ जैसे नजूल क्षेत्रों की सीमाओं को भी फिर से परिभाषित किया जा रहा है। भोपाल के लिए विशेष प्रस्ताव संभागायुक्त के माध्यम से शासन को भेजे जा चुके हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के मुताबिक शासन की मंशा के अनुसार प्रस्ताव भेजे गए थे। अब इन पर प्रक्रिया बढ़ी है। आमजन को इसमें अपने हिस्सेदारी करना चाहिए। बैरागढ़ नजूल पहुंचे कलेक्टर, फाइल की पेंडेंसी की डिटेल ली भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिले का कामकाज समझने की शुरुआत बैरागढ़ नजूल कार्यालय से की। नजूल पहुंचकर उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से उनके नाम व काम को लेकर पूछताछ की। राजस्व प्रकरण से जुड़ी फाइल भी उठाई। उसकी पेंडेंसी के बारे में पूछा। ऑनलाइन प्रक्रिया में ऑफलाइन फाइल का क्या काम, इस पर भी चर्चा की। पूरी तरह से ई- ऑफिस सिस्टम लागू करने व ऑनलाइन ही काम करने को कहा। वे नजूल शहर वृत्त भी गए। इस दौरान तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, आलोक पारे, प्रेमप्रकाश गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

एमपी में लघु उद्योगों में महिलाएं भी बना रही हैं कमाल, 8.87 लाख में से हर चौथा उद्योग महिला के पास, 6 साल में रोजगार 6 गुना बढ़ा

भोपाल  देश में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के बीच अब महिलाओं की आर्थिक ताकत के आंकड़े भी सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में महिलाओं ने सिर्फ घर तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि कारोबार की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर चौथा लघु उद्योग अब महिलाओं के हाथ में है, जो बदलाव की साफ तस्वीर दिखाता है। यह आंकड़े लोकसभा में पेश किए गए हैं, जिन्हें सांसद विजय सिंह बघेल ने सामने रखा। इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि महिलाएं अब सिर्फ नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि खुद रोजगार देने वाली बन रही हैं। एमपी में 8.87 लाख MSME 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 8,87,087 पंजीकृत MSME इकाइयां हैं। इनमें से 2,28,959 इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। यानी प्रदेश की लगभग हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के हाथ में है, जो आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है। 6 साल में 6 गुना बढ़ा महिला रोजगार महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां MSME क्षेत्र में 1,53,493 महिलाएं कार्यरत थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,07,995 हो गई है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि महिलाएं न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। 6 साल में 10 लाख महिलाओं को मिला काम महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 में MSME सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,53,493 थी। लेकिन 28 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 10,07,995 पहुंच गया। यानी सिर्फ 6 सालों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि महिलाएं न केवल खुद बिजनेस शुरू कर रही हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उद्यम पोर्टल के बाद तेजी से बढ़ी संख्या महिला उद्यमियों की संख्या में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे सरकारी पहल भी बड़ी वजह है। उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपने बिजनेस रजिस्टर कराए। 2020-21 में जहां महिला स्वामित्व वाले MSME की संख्या सिर्फ 14,239 थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 हो गई। 2023-24 में यह संख्या और बढ़कर 7,44,746 तक पहुंच गई। हालांकि ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में 2,28,959 यूनिट्स पंजीकृत हैं, जो अब भी एक मजबूत संख्या मानी जा रही है। देश में भी महिलाओं का बढ़ता दबदबा अगर पूरे देश की बात करें तो महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है। MSME रजिस्ट्रेशन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा यूनिट्स पंजीकृत हैं। वहीं महिला नेतृत्व वाले MSME में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस मामले में मजबूत स्थिति में हैं। देशभर में उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ से ज्यादा महिला उद्यमी MSME पंजीकृत हो चुके हैं, जो महिलाओं के बढ़ते योगदान को दिखाता है। उद्यम पोर्टल से मिली गति वर्ष 2020-21 में उद्यम पोर्टल शुरू होने के बाद महिला उद्यमियों की संख्या में तेजी आई। उस समय 14,239 महिला स्वामित्व वाले MSME थे। 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 और 2023-24 में 7,44,746 तक पहुंच गई। 2025-26 में यह संख्या 2,28,959 पर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा महिलाओं का दबदबा देशभर में भी महिला उद्यमिता तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले MSME पंजीकृत हो चुके हैं। महाराष्ट्र MSME पंजीकरण में अग्रणी है, जबकि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस सूची में मजबूत स्थिति में हैं। आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर एमपी के ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय और उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यह बदलाव नारी शक्ति के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है। एमपी में महिला उद्यमियों की संख्या ऐसे बढ़ी     2020-21: उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद पहले वर्ष में राज्य में महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई की संख्या 14,239 थी ।     2022-23: यह संख्या बढ़कर 2,07,795 तक पहुंच गई ।     2023-24: वर्ष 2023-24 में राज्य में महिला उद्यमियों की संख्या अपने उच्चतम स्तर 7,44,746 पर पहुंच गई ।     2025-26: 28 फरवरी 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में महिला नेतृत्व वाले 2,28,959 एमएसएमई पंजीकृत हैं। देश में सबसे ज्यादा एमएसएमई महाराष्ट्र में एमएसएमई और महिला नेतृत्व में अग्रणी राज्ययदि राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें, तो एमएसएमई पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां कुल पंजीकृत इकाइयों की संख्या सबसे अधिक है । वहीं, महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई (Woman-owned MSMEs) के मामले में आंध्र प्रदेश ने बाजी मारी है, जो देश में सर्वाधिक महिला उद्यमियों वाला राज्य बना हुआ है। इन अग्रणी राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। पूरे देश की बात करें तो उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बढ़ते योगदान को प्रमाणित करते हैं।