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चीन द्वारा ईरान को हथियार भेजने का शक, रहस्यमय विमान पहुंचे तेहरान – क्या ले आए?

तेहरान  मध्य एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे। अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो। चीन का क्या कहना है? रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को साफ कहा कि सैटेलाइट जानकारी देने का दावा ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ हैं और अगर अमेरिका ने इन आधारहीन आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई की, तो जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर कोई देश ईरान की सैन्य मदद करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रांसपोंडर बंद करना क्या संकेत है? विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना असामान्य जरूर है, लेकिन हमेशा गलत इरादे का संकेत नहीं होता. कभी-कभी यह सुरक्षा या तकनीकी कारणों से भी हो सकता है. लेकिन यहां एक साथ कई विमानों का ऐसा करना और वह भी कम समय में संदेह को बढ़ाता है. इस बीच, जमीन पर कूटनीति भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के संकेत हैं और लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से खुल चुका है।  जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी। वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

फिल्म में कटे रोल पर एक्ट्रेस का बयान: ‘बॉलीवुड को फर्क नहीं पड़ता, साउथ है बेहतर’

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस एली अवराम ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दस साल पूरे कर लिए हैं. ऐसे में उन्होंने अपने लंबे सफर के बारे में खुलकर बात की. एक्ट्रेस ने बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में बढ़िया काम किया है. दोनों फिल्म इंडस्ट्री के वर्किंग कल्चर के बीच होने वाली तुलना पर एली ने अपने विचार रखे. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एली अवराम ने अपने एक्सपीरिएंस को ईमानदारी से शेयर करते हुए बताया कि उन्हें साउथ फिल्म सेट्स ज्यादा शांतिभरे लगते हैं।  बॉलीवुड बबल के साथ बातचीत में एली अवराम ने कहा कि उन्हें दोनों इंडस्ट्रीज में अच्छा अनुभव मिला है. लेकिन साउथ में काम करने का उनका एक्सपीरिएंस ज्यादा बेहतर रहा. उन्होंने कहा, 'मुझे साउथ के सेट पर ज्यादा शांतिपूर्ण माहौल मिला है. बॉलीवुड से ज्यादा…' इससे उनका इशारा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भागदौड़ और हलचल भरे माहौल की तरफ था. उन्होंने आगे कहा, 'साउथ फिल्म क्रू शांत माहौल बनाए रखना पसंद करते हैं. वे चीखने-चिल्लाने की बजाय वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं.' एली के अनुसार, अंतर सिर्फ रफ्तार का नहीं है, बल्कि पूरे सेट के मैनेजमेंट का भी है।  बॉलीवुड को नहीं परवाह एक्ट्रेस ने बॉलीवुड के कुछ खराब अनुभवों के बारे में भी खुलकर बताया. हिंदी फिल्म सेट्स पर कभी-कभी मिलने वाली बेपरवाही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा बॉलीवुड अनुभव ज्यादातर ऐसा रहा है कि अगर आप खाना खा भी रहे हों, फिर भी आपको बताया जाता है कि आपका शॉट तैयार है. हमें इसकी परवाह नहीं कि आपने खाना खाया है या नहीं, भले ही आप बेहोश हो जाएं, लेकिन शॉट तैयार है।  हालांकि उन्होंने साफ किया कि हर जगह ऐसा नहीं होता, यह काफी हद तक टीम पर निर्भर करता है. एली अवराम ने अपने एक नेटफ्लिक्स प्रोजेक्ट का जिक्र भी किया जहां फिल्ममेकर और क्रू ने सभी का अच्छा ख्याल रखा और मेहमाननवाजी भी की।  टाइपकास्टिंग हुई थीं एली एली अवराम ने यह भी बताया कि साउथ इंडस्ट्री महिलाओं को कंटेंट-ड्रिवन भूमिकाओं में बेहतर मौके देती है. जबकि बॉलीवुड अक्सर एक्टर्स को टाइपकास्ट कर देता है. उन्होंने समझाया, 'जैसे अगर आपको प्रिटी गर्ल रोल्स में कास्ट कर दिया जाए, तो आप उसी में अटक जाते हैं.' उन्होंने बताया कि लोगों की पहले से बनी हुई सोच एक्टर्स को मिलने वाले रोल्स की रेंज को कैसे सीमित कर देती हैं।  एली अवराम को आदित्य रॉय कपूर की फिल्म 'मलंग' में एकदम अलग रोल में देखा गया था. अपने उस रोल को याद करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने पिक्चर में सीरियस और इंटेंस किरदार निभाया, तो इंडस्ट्री में कई लोग हैरान रह गए थे. उन्होंने कहा, 'जब मुझे मलंग में कास्ट किया गया और मुझे अलग तरीके से दिखाया गया, तो किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि मैं ऐसा रोल करूंगी. मुझे बताया गया कि फिल्ममेकर्स शॉक हो गए थे कि एली एक सीरियस एक्टर भी है।  सीन्स हटा दिए गए सिनेमा के सफर में आगे निकल चुकीं एली अवराम ने मुश्किल दिन भी देखे हैं. उन्होंने याद किया कि एक फिल्म की एडिटिंग के दौरान उनके ज्यादातर सीन्स, यहां तक कि उनका इंट्रोडक्शन भी काट दिया गया था. ये उनके लिए झटके की बात थी. ऐसे में एक्ट्रेस ने फिल्म में खुद को 'प्रॉप' जैसा महसूस किया. अपने करियर के सबसे अपमानजनक पलों में से एक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो एक 'बहुत बड़ी फिल्म’ थी, जो अंत में फ्लॉप हो गई. हालांकि उन्होंने इसका नाम नहीं बताया।  उन्होंने कहा, 'एक फिल्म थी जिसमें मुझे सेकंड लीड रोल मिला था. वो फिल्म हीरो और दो लीड एक्ट्रेस के साथ बननी थी. मैं सिर्फ इसलिए वो फिल्म कर रही थी, क्योंकि मुझे सेकंड लीड रोल दिया गया था. वरना मैं कभी साइन नहीं करती.' एली के अनुसार, फाइनल कट से पहले उनके कई सीन्स हटा दिए गए. डबिंग के समय उन्हें लगा कि उनकी भूमिका अभी भी कुछ महत्व रखती है, लेकिन बाद में पता चला कि वो हिस्से भी एडिट कर दिए गए. फिल्म रिलीज होने तक उनका रोल इतना कम हो गया था कि वो खुद को एक किरदार के बजाए 'प्रॉप' जैसा समझने लगीं।  उन्होंने कहा, 'मेरा पूरा इंट्रोडक्शन हटा दिया गया, मतलब मैं उस फिल्म में जैसे एक प्रॉप बन गई. लग रहा था कि एली अवराम इस फिल्म में है ही क्यों? अपने पूरे करियर में मैंने कभी इतना अपमान महसूस नहीं किया. बहुत बुरा लगा. वो बहुत बड़ी फिल्म थी. और फिल्म भी डिजास्टर रही, बड़ी फ्लॉप. वो फिल्म बैठकर देखने की कोशिश करना भी बेतुका था. क्योंकि अब वो पूरी तरह अलग कहानी बन गई थी. ये बिल्कुल बेतुका था।  उन्होंने आगे बताया कि डायरेक्टर का भी पिक्चर के फाइनल आउटकम पर ज्यादा नियंत्रण नहीं था. बड़े फैसले प्रोड्यूसर्स के करीब बैठे लोगों के हाथ में थे, जिससे स्थिति और भी निराशाजनक हो गई. उन्होंने कहा, 'डायरेक्टर का भी कोई कहना नहीं था. जो प्रोड्यूसर्स के करीब बैठे थे, उनका कहना मान्य था. डायरेक्टर के लिए भी ये दिल तोड़ने वाला होता है।  एली अवराम ने अपना करियर साल 2013 में 'बिग बॉस 7' से शुरू किया था. उसी साल उन्होंने 'मिकी वायरस' नाम की फिल्म के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया. समय के साथ उन्होंने 'गुडबाय' और 'गणपथ' जैसी फिल्मों में काम किया. साथ ही तमिल सिनेमा में भी प्रोजेक्ट्स किए, जिसमें 'नाने वरुवेन' और 'कॉन्ज्यूरिंग कन्नप्पन' शामिल हैं. उन्होंने 'द वर्डिक्ट स्टेट वर्सेज नानावटी' और 'इनसाइड एज 2' जैसी वेब सीरीज में भी काम किया है। 

बाढ़ से बचाव की तैयारी तेज: पंजाब में नदियों-नालों से गाद निकालने की मंजूरी

चंडीगढ. मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने दरियाओं, चोओं और सेम नालों से गाद निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से जमीन मालिकों को अपनी लागत पर सफाई की अनुमति दे दी है। साथ ही, खुदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल गाद निकालने के काम में तेजी आएगी, बल्कि दरियाओं के पानी के प्रवाह में भी सुधार होगा। इससे संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह निर्णय सतलुज, ब्यास और सिसवां समेत अन्य दरियाओं और नालों की सफाई के लिए लिया गया है। लंबे समय से इन जल स्रोतों में जमा गाद के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बन जाती थी। सरकार ने ऐसे 9 संवेदनशील स्थानों की पहचान भी की है, जहां मानसून से पहले गाद निकालना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में सफाई नहीं की गई, तो पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसको देखते हुए संबंधित जमीन मालिकों को आगे आकर इस कार्य में सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने पंचायत स्तर पर आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए भी अहम निर्णय लिया है। सरपंचों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पदों के लिए आरक्षण नियम-6 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है। नई व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति, महिलाओं और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का रोस्टर पुनः निर्धारित किया जाएगा, ताकि हर वर्ग को बराबर अवसर मिल सके। कैबिनेट के फैसले जमीन मालिकों को आप सरकार ने दी सफाई की अनुमति। खोदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग का भी अधिकार।

कानून का कड़ा शिकंजा: बस्तर में बाल विवाह मामले में 5 आरोपी, दोनों पक्षों पर FIR

बस्तर. बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है. नगर कोतवाली में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई. मामला जगदलपुर ब्लॉक के 21 मार्च 2026 को हुए विवाह समारोह से जुड़ा है. शुरुआत में यह सामान्य शादी लगी, लेकिन शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी. सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कानूनी कार्रवाई की. वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिले में चार वर्षों में 15 मामले सामने आने की जानकारी मिली है. पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ने की परंपरा रही. अब प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से समझौता नहीं होगा. 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के की शादी अपराध है. दोषियों को 2 साल सजा या 1 लाख जुर्माना हो सकता है. यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

ग्रामीण कनेक्टिविटी को बूस्ट: 250 करोड़ से बनेंगी 235.45 किमी सड़कें

बस्तर. बस्तर जिले में विकास को नई गति देने वाली बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस-4 के तहत 86 कार्यों की आधारशिला रखी गई. इन सड़कों की कुल लंबाई 235.45 किलोमीटर बताई गई है परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 250 करोड़ रुपये है. कार्यक्रम का प्रसारण कुम्हरावंड सभागार में किया गया. ग्रामीण अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर दिया गया. लोहंडीगुड़ा, दरभा, बास्तानार और तोकापाल को बड़ा लाभ मिलेगा. दशकों पुरानी आवागमन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है. जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की नई लकीर बताया. स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी. सड़कें गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगी. अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा करने निर्देश दिए गए. बस्तर के दूरस्थ इलाकों में अब विकास की रफ्तार और तेज होगी. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नई तकनीक की एंट्री जगदलपुर. बस्तर संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी तकनीकी सौगात मिली है. शहर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक स्टेरलाइजर मशीन लगी है. यह सुविधा संभाग के सरकारी या निजी अस्पतालों में पहली बताई जा रही है. अब संवेदनशील उपकरणों को बाहर भेजने की जरूरत कम होगी. रायपुर या विशाखापत्तनम पर निर्भरता घटेगी. इलाज की लागत और समय दोनों में राहत मिलेगी. कैथेटर, ट्यूब, ग्लव्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित होंगे. गर्मी से खराब होने वाले उपकरण अब सुरक्षित तरीके से साफ होंगे. 250 लीटर क्षमता वाली मशीन अस्पताल में स्थापित की गई है. क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा कम होने की उम्मीद है. आपातकालीन सर्जरी में भी तेज तैयारी संभव होगी. स्थानीय मरीजों को अब उच्च स्तरीय सुविधा घर के पास मिलेगी. यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है.

डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा: जनकल्याण कार्यों में तेजी लाकर गांवों में करें रात्रि विश्राम

जनकल्याण के कामों में तेज़ी लायें, निरीक्षण करें, गांवों में करें रात्रि विश्राम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव छोटे किसानों का गेहूं उपार्जन पहले करायें, उपार्जन केन्द्रों में हों सभी जरूरी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ वीसी से की विभिन्न अभियानों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय से प्रदेश में चलाये जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर समुचित दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर्स से कहा कि प्रदेश और समाज की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महती प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार के इन सभी प्रयासों एवं अभियानों में जन जुड़ाव एवं सहभागिता बेहद जरूरी है। इन सभी अभियानों की सार्थकता और सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब इनमें अधिकाधिक जनसहयोग एवं जन भागीदारी भी हो। इसके लिए सभी समर्पित और फोकस्ड होकर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे जनता के कल्याण के कामों को तेजी से पूर्ण करायें। सरकार की योजनाओं का फील्ड में पूर्णतया क्षमता और दक्षता के साथ व्यापक स्तर पर सुचारु एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर, उनकी जरुरतों और सुझावों पर अमल करते हुए जनोन्मुखी प्रशासन से खुद की और सरकार की साख बढ़ायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स लगातार जिले में भ्रमण करें, लोगों से चर्चा करें, उनकी समस्या सुनकर समाधान करें और गांवों में रात्रि विश्राम करें, इससे सरकारी योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च तक 2026 तक "संकल्प से समाधान अभियान" चलाया गया। इस अभियान से सरकार की 106 प्रकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता और जरुरतमंदों तक पहुंचाया गया। सभी कलेक्टर्स इस अभियान के मूल लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा क्रियाशील रहें और जनता को अधिकतम लाभ दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ हुआ है। यह 30 जून 2026 तक चलेगा। विगत 2 सालों में अभियान के अंतर्गत हुए जल संचयन के कार्यों से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। अब आवश्यकता है कि इस साल भी जल संरक्षण और सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के भरसक प्रयास किये जायें। गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चल रही गेहूं उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाये। उन्हें समय पर भुगतान भी करायें। सभी कलेक्टर्स गेहूं उपार्जन केन्द्रों का सघन निरीक्षण करें और यह देखें कि खरीदी केंद्र पर समुचित छाया-पानी, बारदाना, तेज गर्मी के चलते ओआरएस घोल, पावडर आदि सभी जरूरी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें। किसानों को किसी भी तरह की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत परेशानी नही हो। अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया निर्बाध रूप में से जारी है।अब तक 1 लाख 13 हज़ार से अधिक किसानों से 4 लाख 96 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इन किसानों को करीब 355 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ऐसा पहली बार हुआ है कि पहले दिन तुलाई वाले किसानों को दूसरे दिन ही भुगतान भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास एवं प्रशासन विभाग से कहा कि वे अपने विभागीय स्वच्छता अभियान को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ लें। जनसहयोग से जगह-जगह पर प्याऊ लगवायें। इनकी साफ़-सफाई पर भी विशेष ध्यान दें।तकनीक से जुड़कर नवाचार भी करें। सांदीपनि विद्यालयों में करें रैन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के कारण बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में आये उल्लेखनीय परिणामों को राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आई गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों को लेकर अभिभावकों की धारणा इस कदर परिवर्तित हुई है कि वे अपने बच्चों के दाखिले निजी विद्यालयों से निकालकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में भर्ती करा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवायें। जून में जब स्कूल पुनः खुलेंगे, तब अधिकाधिक लोगों को सांदीपनि विद्यालयों का अवलोकन करायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बड़ी उपलब्धि है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण हमारा स्कूल ड्रॉप आउट रेशियो जीरो हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी बड़े धार्मिक स्थलों पर कम से कम 50 बेडेड हास्पिटल होने चाहिए। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में बर्न यूनिट्स स्थापित की जाये। ग्रीष्मकालीन स्थायी निर्देशों (मेडिकल प्रोटोकॉल्स) का कढ़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी अस्पतालों में जरूरी दवाएं उपलब्ध रहें। सभी कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी पूरी कर लें। पेयजल आपूर्ति में न रहे कोई कमी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाएं ताकि ग्रीष्मकाल में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था हर हाल में निर्बाध रहे। आवश्यकतानुसार टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जाये। पेयजल संरचनाओं के संरक्षण एवं संधारण पर विशेष ध्यान दें। किसी को भी पेयजल संबंधी परेशानी न होने पाये। ज्ञान भारतम ऐप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक "ज्ञान भारतम ऐप" तैयार किया गया है। कोई भी नागरिक पुरानी साहित्यिक या धार्मिक पांडुलिपियों को इस ऐप में अपलोड कर सकता है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि 17 अप्रैल 26 तक इस ऐप में साढ़े 6 लाख से अधिक पांडुलिपियां अपलोड की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को इस विषय के … Read more

BJP का देशव्यापी प्रदर्शन: महिला आरक्षण बिल के खिलाफ आज से सड़कों पर उतरेंगे कार्यकर्ता

नई दिल्ली लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा। बिल को पारित करने के लिए जरूरी बहुमत से यह 54 वोट पीछे रह गया। कुल 352 सदस्यों की मौजूदगी में 230 वोट इसके खिलाफ पड़े, जिसके चलते विधेयक गिर गया। सरकार ने इस पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। अमित शाह ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे “महिला विरोधी रुख” करार दिया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए संविधान संशोधन बिल पारित नहीं हो सका. ऐसे में बीजेपी की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए संविधान संशोधन बिल की हार के विरोध में बाद बीजेपी बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी में है।  बीजेपी महिला सांसदों ने शुक्रवार को मकर द्वार पर 'कांग्रेस पार्टी हाय-हाय के नारे' लगाए. वहीं, अब बीजेपी शनिवार 18 अप्रैल से देशभर में कई प्रदर्शन आयोजित करेगी. इन प्रदर्शनों में एनडीए के सहयोगी दल भी हिस्सा लेंगे।  बता दें कि महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. इस बिल पर कुल 528 वोट पड़े. बिल पारित कराने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में 298 वोट ही पड़े।  संसद के निचले सदन में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास नहीं हो पाया। बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े। पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। विपक्षी दल इसे मोदी सरकार की हार के तौर पर देख रही है। वहीं, इस बिल के सदन में पारित न होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा,"देश की आधी आबादी, 70 करोड़ महिलाओं को धोखा देने और उनका विश्वास खोने के बाद कोई कैसे विजय का जश्न मना सकता है?" उन्होंने आगे लिखा,"विपक्ष का यह जश्न हर उस महिला का अपमान है, जो दशकों से अपने अधिकार का इंतजार कर रही है। कांग्रेस और उसके सहयोगी कितनी बार महिलाओं के साथ विश्वासघात करेंगे? कई बार विजय जैसी प्रतीत होने वाली अहंकार की खुशी, असलियत में छिपी हुई एक बड़ी पराजय होती है, जिसे कुछ लोग समझ नहीं पाते।" सोशल मीडिया से भड़के जेपी नड्डा पूर्व बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस बिल के पारित न होने पर निराशा जाहिर की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 का पारित नहीं होना कांग्रेस, TMC, DMK, समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन की महिला विरोधी मानसिकता को दिखाता है।  जेपी नड्डा ने दावा किया कि नारी शक्ति का अपमान विपक्ष को बहुत भारी पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'ये आक्रोश अब रुकने वाला नहीं है. 2029 के लोकसभा चुनाव से लेकर हर छोटे-बड़े चुनाव तक, देश की बहनें अपने सपनों को रौंदने वालों को कड़ा सबक सिखाएंगी. याद रखिए, शक्ति का ये क्रोध आपके राजनीतिक अंत की शुरुआत है।  अमिता शाह ने विपक्ष को चेताया वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि शुक्रवार को लोकसभा में बहुत अजीब मंजर दिखा. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।  अमित शाह ने लिखा, 'मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति के अपमान की ये बात यहां नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी. विपक्ष को महिलाओं का आक्रोश न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।  देवेंद्र फडणवीस ने भी पोस्ट में लिखा, 'पूरे देश ने विपक्ष का पाखंड देखा. उनके पास हमारी ना रीशक्ति के साथ खड़े होने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन वो इसमें असफल रहे. उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों और नारों तक ही सीमित है. उन्होंने प्रगति की जगह राजनीति को चुना. नारी शक्ति वंदन विधेयक के प्रति उनके विरोध ने ये उजागर कर दिया है कि वो वाकई में किसके हितों की सेवा करते हैं. भारत की महिलाएं देख रही हैं और वो इसे नहीं भूलेंगी।  नितिन नवीन ने क्या कहा? वहीं, इस बिल के पारित न होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों की कड़ी आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि इन दलों ने ’’महिला विरोधी रुख’’ अपनाया और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत में नवीन ने कहा कि यह दिन ’’सुनहरे अक्षरों में लिखा जा सकता था’’ लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों के ’’घोर विश्वासघात’’ ने सब बेकार कर दिया। उन्होंने कहा,"कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी तथा उनकी टीम के नेतृत्व वाले उसके महिला विरोधी गठबंधन ने देश की आधी आबादी के साथ घोर विश्वासघात किया है।" नवीन ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं की अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हो सकता था, लेकिन समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित विपक्षी दलों ने महिलाओं को उनके ’’उचित अधिकारों एवं हिस्सेदारी’’ से वंचित कर दिया। उन्होंने कहा, ’’इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस गठबंधन का महिला विरोधी चरित्र पूरी तरह से उजागर हो गया है।’’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी और प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह ’’श्रेय की लड़ाई नहीं’’ बल्कि महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने की लड़ाई है। लोकतंत्र के लिए 'काला दिन’: शिवराज सिंह चौहान वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर हमला करते हुए 17 अप्रैल को देश की महिलाओं और लोकतंत्र के लिए ’’काला दिन’’ करार दिया। इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी देने से संबंधित इस विधेयक को न सिर्फ खारिज किया गया, बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि इस … Read more

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त

अवैध बोर खनन पर सख्ती : तुरकाडीह में कार्रवाई, बोर मशीन जब्त बिलासपुर जिले के सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम तुरकाडीह में अवैध बोर खनन की सूचना पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोर मशीन वाहन को जब्त कर लिया। तहसीलदार सकरी, थाना प्रभारी सकरी, थाना स्टाफ, हल्का पटवारी तुरकाडीह एवं थाना कोनी की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच के दौरान बोर खनन कार्य में संलग्न व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार की वैध अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर कलेक्टर के 06 अप्रैल 2026 के जारी आदेश के उल्लंघन के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बोर मशीन को जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए 6 अप्रैल 2026 से बोर खनन पर प्रतिबंध लागू किया है। प्रशासन द्वारा इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है तथा अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कोच नवल सिंह पर नीरज चोपड़ा और सुमित अंतिल का गंभीर आरोप: मानसिक उत्पीड़न और परिवार को गालियां

 नई दिल्ली स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा और पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट सुमित अंतिल ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता कोच नवल सिंह पर मानसिक प्रताड़ना और गाली-गलौज के गंभीर आरोप लगाए हैं. सुमित अंतिल ने इस मामले की औपचारिक शिकायत भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से की है. सुमित अंतिल का आरोप है कि कोच नवल सिंह लगातार उन्हें और नीरज चोपड़ा को मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि नवल सिंह ने कई बार दोनों खिलाड़ियों के परिवारों को लेकर भी अपशब्द कहे।  सुमित अंतिल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, 'उन्होंने मुझे और नीरज भाई को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. हमारे परिवारों को लेकर गालियां दीं. वह मानसिक रूप से अस्थिर लगते हैं.' उन्होंने बताया कि नवल सिंह अक्सर अपने गुस्से और गाली-गलौज वाले ऑडियो रिकॉर्ड करते थे और उन्हें खिलाड़ियों के मैनेजरों को भेजते थे, ताकि वह उनके पास पहुंचें. सुमित के मुताबिक यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था, लेकिन जब मामला ज्यादा बढ़ गया तो उन्होंने शिकायत करने का फैसला किया।  सुमित अंतिल ने आगे कहा, 'हमने लंबे समय तक इस मामले को नजरअंदाज किया, लेकिन जब यह बहुत ज्यादा हो गया तो शिकायत करनी पड़ी. मैंने शिकायत दर्ज कराई और नीरज भाई, नवदीप सिंह और संदीप चौधरी ने भी समर्थन किया.' SAI ने पुष्टि की है कि उसे शिकायत मिली है और मामले को संबंधित फेडरेशन के साथ उठाया जा रहा है. हालांकि SAI ने साफ किया कि नवल सिंह उसके कर्मचारी नहीं हैं. वह फिलहाल भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) के राष्ट्रीय शिविर से जुड़े हुए हैं।  सचिन यादव को ट्रेनिंग देते हैं नवल सिंह SAI के एक अधिकारी ने कहा, सुमित अंतिल की ओर से कोच नवल सिंह के खिलाफ शिकायत मिली है. इस शिकायत का समर्थन नीरज चोपड़ा समेत अन्य खिलाड़ियों ने भी किया है.' नवल सिंह को साल 2015 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिला था. वह फिलहाल सचिन यादव को ट्रेनिंग दे रहे हैं. सचिन यादव ने पिछले साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप में चौथा स्थान हासिल किया था, जबकि चोट से जूझ रहे नीरज चोपड़ा आठवें स्थान पर रहे थे।  सुमित अंतिल ने कहा कि शिकायत करने के बाद भी उन्हें अधिकारियों की तरफ से उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली. उन्होंने कहा, 'अगर हमारे जैसे खिलाड़ियों की बात नहीं सुनी जाएगी, तो बाकी खिलाड़ी क्या उम्मीद करेंगे. शिकायत के बाद अभी तक कोई औपचारिक जवाब भी नहीं मिला है।  उन्होंने यह भी दावा किया कि पहली सुनवाई के दौरान TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) के अधिकारियों ने समझौता करने की बात कही थी. सुमित के मुताबिक, 'शिकायत किए हुए एक हफ्ता हो गया है. SAI के महानिदेशक और TOPS के CEO को भी बताया गया था, लेकिन पहली सुनवाई में समझौते की बात हुई।  सुमित अंतिल ने नवल सिंह की मंशा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि शायद कोच चाहते हैं कि नीरज चोपड़ा के मुकाबले सचिन यादव से बेहतर प्रदर्शन करें क्योंकि सचिन उन्हीं के साथ ट्रेनिंग करते हैं. इस पूरे मामले ने भारतीय एथलेटिक्स में खिलाड़ियों और कोचों के रिश्ते को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 

संस्थान का अजीब फरमान: ट्रेनिंग के दौरान शादी पर लगी रोक

गोपालगंज बिहार में गोपालगंज के हथुआ में स्थित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ट्रेनिंग के दौरान कोई भी छात्रा शादी नहीं कर सकती. यदि कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।  यह आदेश कॉलेज परिसर में नोटिस के रूप में चस्पा किया गया था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल होते ही इस फरमान को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे छात्राओं की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया जाने लगा।  संस्थान की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस आदेश को लेकर सफाई भी दी है. उनका कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी तरह आवासीय होती है, जहां छात्राएं संस्थान की निगरानी में रहकर प्रशिक्षण लेती हैं।  ऐसे में यदि छात्राएं शादी कर लेती हैं, तो उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह नियम कोई नया नहीं है, बल्कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत पहले से ही लागू है. नामांकन के समय ही छात्राओं से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जिसमें यह शर्त शामिल होती है कि वे प्रशिक्षण के तीन वर्षों के दौरान शादी नहीं करेंगी।  हालांकि, यह तर्क लोगों को रास नहीं आया और मामला तूल पकड़ता चला गया. सोशल मीडिया पर इस आदेश को ‘अजीबोगरीब’ बताते हुए आलोचना की जा रही है. कई लोगों ने इसे छात्राओं के व्यक्तिगत जीवन और अधिकारों में दखल बताया है।  मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है. गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा है कि वायरल नोटिस की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने हथुआ एसडीएम को 24 घंटे के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. डीएम ने साफ किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया गया है. गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. बीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत जांच कराई गई. जांच के बाद प्राचार्य द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया गया है. साथ ही प्राचार्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है. उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी छात्रा के निजी जीवन से जुड़े ऐसे फैसलों पर संस्थान रोक लगा सकता है? क्या इस तरह के नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हैं? फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।