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एमपी कैडर की IAS अनुग्रह पी को मिली अहम जिम्मेदारी, चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में CVO नियुक्त

भोपाल भारत की प्रशासनिक सेवा में एक अहम बदलाव के तहत मध्य प्रदेश कैडर से आने वाली 2011 बैच की आईएएस अधिकारी अनुग्रह पी (Anugraha P IAS) ने चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी में चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) का पदभार संभाल लिया है। यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के प्रमुख बंदरगाहों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय निकाय Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा लिया गया है, जो वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार होता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुकीं अनुग्रह पी का यह पदभार पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी वे विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और केंद्रीय विभागों में सेवाएं दे चुकी हैं। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी का महत्व Chennai Port Authority देश के सबसे पुराने और व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। यह दक्षिण भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र है। चेन्नई पोर्ट का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मुख्य विशेषताएं     भारत के प्रमुख आयात-निर्यात केंद्रों में शामिल     ऑटोमोबाइल, कंटेनर और बल्क कार्गो का बड़ा हब     हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करता है     अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका ऐसे महत्वपूर्ण संस्थान में CVO की भूमिका बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण होती है। क्या होता है CVO? चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO) किसी भी सरकारी संस्था में भ्रष्टाचार की रोकथाम और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाता है। CVO का मुख्य उद्देश्य संस्थान में कार्यरत अधिकारियों के आचरण की निगरानी करना और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना होता है। मुख्य जिम्मेदारियां     भ्रष्टाचार के मामलों की जांच     कर्मचारियों की गतिविधियों पर निगरानी     शिकायतों का निवारण     नियमों के पालन को सुनिश्चित करना नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल अनुग्रह पी की नियुक्ति Appointments Committee of the Cabinet (ACC) द्वारा अनुमोदित की गई है। आमतौर पर CVO का कार्यकाल 3 से 5 वर्षों का होता है, जिसमें अधिकारी को संस्थान में सतर्कता तंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जाती है। यह नियुक्ति सरकार की “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” (Minimum Government, Maximum Governance) नीति के तहत की गई है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाता है। IAS अनुग्रह पी की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। नई भूमिका में प्रमुख चुनौतियां 1. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पोर्ट जैसे बड़े संस्थान में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। बड़ी मात्रा में आने-जाने वाला माल और संबंधित प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 2. डिजिटल ट्रांसपेरेंसी ई-गवर्नेंस और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निगरानी को मजबूत बनाना, ताकि हर लेन-देन और गतिविधि पारदर्शी और ट्रैक की जा सके। 3. शिकायत निवारण तंत्र कर्मचारियों और हितधारकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना ताकि संस्थान में कार्यक्षमता बनी रहे।

लखनऊ का 160 रन का लक्ष्य असंभव, राजस्थान ने 40 रनों से की शानदार जीत

लखनऊ लखनऊ सुपर जॉयंट्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल 2026 का 32वां मुकाबला बुधवार को खेला गया. जिसमें राजस्थान ने 40 रनों से जीत हासिल की और अंक तालिका में दूसरे पायदान पर कब्जा जमा लिया. ये मैच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हुआ. जहां टॉस जीतकर लखनऊ ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. राजस्थान की टीम ने जडेजा के नाबाद 43 रनों के दम पर 159 रन बनाए थे. इसके जवाब में लखनऊ की टीम 119 के स्कोर पर सिमट गई।  फ्लॉप रही दिग्गजों से सजी लखनऊ की टीम 160 के जवाब में उतरी लखनऊ की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ही ओवर में आयुष बदोनी रन आउट हो गए. इसके बाद ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए आए और बिना खाता खोले ही आउट हो गए. इसके बाद एडन मारक्रम भी खाता नहीं खोल सके. यानी लखनऊ के टॉप ऑर्डर के 3 बैटर खाता भी नहीं खोल सके. इसके बाद मिचेल मार्श ने फिफ्टी लगाई. लेकिन उनका विकेट गिरते ही लखनऊ बैकफुट पर आ गई. लखनऊ की पूरी टीम 119 पर ढेर हो गई. इस हार से लखनऊ अंक तालिका में 9वें स्थान पर आ गई है।  ऐसे रही राजस्थान की बैटिंग पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान के लिए पारी का आगाज वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल ने किया. दोनों ने ताबड़तोड़ अंदाज में बैटिंग शुरू की. तीसरे ओवर में शमी ने यशस्वी का विकेट झटका. ऋषभ पंत ने विकेट के पीछे हैरतअंगेज कैच लपका. यशस्वी ने 22 रन बनाए. इसी ओवर में शमी ने जुरेल का भी विकेट झटका. जुरेल खाता भी नहीं खोल सके. चौथे ओवर में मोहसिन ने राजस्थान को उस वक्त बड़ा झटका दिया जब उन्होंने वैभव सूर्यवंशी का विकेट लिया. वैभव ने इस मैच में केवल 8 रन बनाए. लेकिन इसके बाद रियान पराग ने पारी को संभाला और 7 ओवर के बाद टीम का स्कोर 50 के पार पहुंचाया।  लेकिन 9वें ओवर में प्रिंस यादव ने राजस्थान को चौथा झटका दिया जब रियान पराग 20 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद जडेजा ने 43 रनों की नाबाद पारी खेली और फरेरा ने भी पारी को संभालने की कोशिश जरूर की. जिसके दम पर राजस्थान की टीम 159 रन बना सकी. लखनऊ की ओर से शमी ने 4 ओवर में दो विकेट झटके. वगीं, प्रिंस यादव, मोहसिन खान को भी 2-2 विकेट मिले। 

टेस्ला की भारत में असफलता: 10% टारगेट भी पूरा नहीं हुआ, क्या 6-सीटर से बदल पाएगा हालात?

मुंबई  दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी भारत आई, धमाका करने की कोशिश की, लेकिन हकीकत की जमीन पर उसे तगड़ा झटका लगता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की. आज 22 अप्रैल 2026 को टेस्ला ने अपनी नई Model Y L (6-सीटर, लॉन्ग व्हीलबेस) को भारत के बाजार में उतारा है, जिसकी कीमत 62 लाख रुपये तय की गई है. यह सिर्फ एक नई लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि एक तरह का 'डैमेज कंट्रोल' है, क्योंकि भारत में टेस्ला का अब तक का सफर काफी संघर्ष भरा और उम्मीद से कहीं ज्यादा फीका रहा है।   टेस्ला के भारत में संघर्ष की सबसे बड़ी वजह इसकी आसमान छूती कीमतें रही हैं. भारत में बाहर से आने वाली गाड़ियों पर सरकार 70% से 110% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि Model Y की कीमत 60 लाख से 68 लाख रुपये के बीच पहुंच गई. इतनी महंगी होने के कारण यह आम आदमी की पहुंच से दूर होकर Mercedes EQB, BMW iX1 और Volvo EC40 जैसी लग्जरी गाड़ियों की कैटेगरी में खड़ी हो गई. भारत जैसे देश में, जहां लोग गाड़ी खरीदने से पहले उसकी कीमत और वैल्यू पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, टेस्ला कभी भी 'मास मार्केट' को आकर्षित नहीं कर पाई।  आंकड़ों की बात करें तो टेस्ला का प्रदर्शन काफी बुरा रहा है. साल 2025 में कंपनी ने पूरे साल के दौरान सिर्फ 227 गाड़ियां ही बेचीं, जबकि उनका लक्ष्य कम से कम 2,500 यूनिट्स का था. स्थिति इतनी खराब हो गई कि कंपनी को अपने स्टॉक को निकालने के लिए 2 लाख रुपये तक का डिस्काउंट देना पड़ा. यह दिखाता है कि सिर्फ ब्रांड नाम के भरोसे भारतीय बाजार को जीतना इतना आसान नहीं है, खासकर तब जब ग्राहक को हर कदम पर पैसे की कीमत वसूलनी हो।  कीमत के अलावा चार्जिंग की समस्या ने भी टेस्ला की राह मुश्किल की है. भारत में फिलहाल केवल 25,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जो जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं. कई बार तो ऐसा होता है कि जो स्टेशन मैप पर दिखते हैं, वे असल में खराब मिलते हैं. टेस्ला की सबसे बड़ी ताकत उसका 'सुपरचार्जर नेटवर्क' माना जाता है, जिसने अमेरिका और यूरोप में धूम मचा रखी है, लेकिन भारत में यह नेटवर्क अभी नाममात्र का ही है. बिना मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई भी EV यूजर लंबी दूरी के सफर पर निकलने से कतराता है।  भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों का दबदबा भी टेस्ला के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. टाटा की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी है, जिसके बाद महिंद्रा और JSW MG मोटर्स का नंबर आता है. ये कंपनियां भारतीय ग्राहकों की नब्ज पहचानती हैं. टाटा नेक्सन EV और महिंद्रा की नई गाड़ियां टेस्ला के मुकाबले बहुत सस्ती हैं और भारतीय परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. ऐसे में टेस्ला के लिए इन दिग्गजों के बीच अपनी जगह बनाना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है।  एक और कड़वा सच यह है कि भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार बहुत ही छोटा है. 16.5 लाख रुपये यानी करीब 20,000 डॉलर से ऊपर की गाड़ियों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी सिर्फ 6.6% है. इस छोटे से हिस्से में भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, किआ और ऑडी जैसे पुराने और जमे-जमाए खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं. टेस्ला को न सिर्फ इन ब्रांड्स से लड़ना पड़ रहा है, बल्कि भारतीय सड़कों की चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है. टेस्ला की गाड़ियों का ग्राउंड क्लीयरेंस कम है, जो भारत के बड़े स्पीड ब्रेकर्स और गड्ढों के लिए सही नहीं बैठता. इसे ठीक करने के लिए गाड़ी के डिजाइन में बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें काफी खर्च आता है।  सर्विस नेटवर्क के मामले में भी टेस्ला काफी पीछे छूट गई है. टेस्ला के शोरूम और सर्विस सेंटर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित हैं, जबकि टाटा और महिंद्रा का नेटवर्क गांव-कस्बों तक फैला है. अगर किसी छोटे शहर के ग्राहक को गाड़ी में कोई दिक्कत आए, तो उसके पास कोई आसान रास्ता नहीं होता. इसके अलावा एलन मस्क की अपनी वैश्विक छवि और उनकी राजनीतिक गतिविधियों का असर भी कहीं न कहीं कंपनी की सेल्स पर पड़ा है, जिसे पूरी दुनिया में महसूस किया गया है।  अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा? नई 6-सीटर Model Y L के जरिए टेस्ला भारत के उस प्रीमियम सेगमेंट को लुभाना चाहती है जो बड़ी और आरामदायक SUVs पसंद करता है. यह एक अच्छी कोशिश तो है, लेकिन जानकारों का मानना है कि जब तक टेस्ला भारत में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाती और यहीं पर गाड़ियां बनाना शुरू नहीं करती, तब तक ऊंची कीमतों का यह सिलसिला नहीं थमेगा. लोकल मैन्युफैक्चरिंग ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे टेस्ला भारतीय बाजार में लंबी रेस का घोड़ा बन सकती है।   

रीवा में एयरबस जैसे बड़े विमान की लैंडिंग, 2300 मीटर रनवे बनाने के लिए 140 एकड़ भूमि का अधिग्रहण, 340 करोड़ मुआवजा

रीवा रीवा एयरपोर्ट पर भविष्य में एयरबस (Airbus A320) जैसे 150 से 180 सीटर बड़े विमानों की लैंडिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर 2300 मीटर की जाएगी और 140 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।  140 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण, रिपोर्ट भोपाल भेजी रीवा एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिसके बाद इसे 'हवाई हब' के रूप में विकसित करने की योजना है। एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 140 एकड़ अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा जमीन के सीमांकन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट भोपाल भेज दी गई है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस परियोजना से लगभग 830 किसान प्रभावित होंगे, जिन्हें सरकार द्वारा 340 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की प्रक्रिया चल रही है। नियमित विमान सेवा शुरू होने के बाद पांच माह में रीवा में 20,000 लोगों ने हवाई सफर किया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई है कि रीवा में हवाई यात्रा को लेकर काफी पोटेंशियल है। जिस वजह से सरकार ने भी रीवा एयरपोर्ट का विस्तार करने पर सहमति जताई है। 2300 मीटर होगा रनवे, अभी सिर्फ ATR-72 की होती है लैंडिंग वर्तमान में रीवा एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1800 मीटर लंबा है। यह रनवे अभी केवल ATR-72 जैसे छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है और अब तक यहां ऐसे ही विमान संचालित होते रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत रनवे की लंबाई 1800 मीटर से बढ़ाकर करीब 2300 मीटर की जाएगी। रनवे के इस विस्तार के बाद Airbus A320 जैसे 150 से 180 सीट क्षमता वाले बड़े विमान भी रीवा एयरपोर्ट पर आसानी से उतर सकेंगे। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए शुरू होंगी सीधी उड़ानें एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार होने और बड़े विमानों की लैंडिंग की सुविधा मिलने के बाद रीवा से देश के प्रमुख शहरों के लिए सीधी हवाई सेवाएं शुरू होने की संभावना है। भविष्य में यहां से मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जा सकती हैं। इन महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी होने से न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की यातायात सुविधा मजबूत होगी। साथ ही इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।

बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर, लखनऊ से इंदौर तक बनेगा

सागर  लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है।  ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा।  एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा।  बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।  330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है। बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

UP बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के 53 लाख छात्रों का रिजल्ट आज शाम 4 बजे घोषित होगा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट आज 23 अप्रैल को शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट घोषित होने के बाद परीक्षा में शामिल छात्र आधिकारिक वेबसाइट – upsmp.edu और upresults.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख और मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए छात्रों को अपने लॉगिन डिटेल्स जैसे रोल नंबर आदि दर्ज करने होंगे।  आज खत्म हो जाएगा 53 लाख छात्रों का इंतजार एशिया के सबसे बड़े बोर्ड में शामिल यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आज , शाम 4 बजे जारी करेगा. रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय से घोषित किया जाएगा. इस साल बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच कराई गई थीं और इन्हें केवल 15 कार्य दिवसों में पूरा कर लिया गया. इस साल कक्षा 10वीं-12वीं की परीक्षा में कुल 53 लाख 37 हजार 778 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें हाईस्कूल के 27 लाख 61 हजार 696 और इंटरमीडिएट के 25 लाख 76 हजार 82 विद्यार्थी थे. वहीं, परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बोर्ड ने सख्त इंतजाम किए थे. इसके अलावा, इस बार पूरे प्रदेश में 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।  52 लाख छात्रों का आज  होगा इंतजार खत्म  यूपी बोर्ड के 52 लाख से ज्यादा छात्र रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. पहले ऐसे कहा जा रहा था कि  रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी होगा, लेकिन बोर्ड की ओर से आधिकारिक तारीख का ऐलान कर दिया गया है. रिजल्ट के साथ ही बोर्ड टॉपर्स की लिस्ट भी जारी कर सकता है. सचिव भगवती सिंह की तरफ से रिजल्ट की तारीख बताई गई है. पिछले साल के रिजल्ट की बात करें तो हाई स्कूल में 90.11 प्रतिशत छात्र पास हुए, वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 81.15 फीसदी छात्रों ने बाजी मारी।  फेल होने पर परेशान न हो छात्र  यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. यूपी बोर्ड ऐसे छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन करेगा. इसकी सूचना रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद दी जाएगी. इसके अलावा, छात्र अपनी कॉपियों की स्क्रूटनी के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  डिजीलॉकर पर मिलेगा रिजल्ट  यूपी बोर्ड इस साल भी छात्रों को डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट उपलब्ध कराएगा. छात्र अपना आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर उपयोग कर डिजिलॉकर अकाउंट बना सकते हैं. रिजल्ट के कुछ घंटों बाद ही डिजिटल मार्कशीट वहां अपलोड कर दी जाएगी, जो कि भविष्य के एडमिशन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए पूरी तरह से वैध मानी जाएगी।  UP Board 10th-12th Result 2026: कहां देख सकेंगे यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं रिजल्ट? यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे जारी होने के बाद छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन आसानी से देख सकेंगे. इसके लिए बोर्ड ने कई आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध कराई हैं, जहां से छात्र बिना किसी परेशानी के अपना परिणाम चेक कर सकते हैं. रिजल्ट देखने के लिए छात्र इन वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं: – upmsp.edu.in – upresults.nic.in – results.upmsp.edu.in – results.digilocker.gov.in UP Board 10th-12th Result 2026: कैसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट 2026? UP Board 10th-12th Result 2026 LIVE: अगर आप यूपी बोर्ड का रिजल्ट देखना चाहते हैं, तो ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।  2. वेबसाइट के होमपेज पर आपको 10वीं (हाईस्कूल) और 12वीं (इंटरमीडिएट) रिजल्ट 2026 का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।  3. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना रोल नंबर भरना होगा. रोल नंबर डालने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।  4. जैसे ही आप सबमिट करेंगे, आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा।  5. अब आप अपनी मार्कशीट को ध्यान से देख सकते हैं, उसे डाउनलोड कर लें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट भी निकालकर रख लें। 

अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

भोपाल  इस बार अमरनाथ यात्रा की शुरुआत तीन जुलाई से होगी। हिमालय की गुफा में विराजमान बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्तों के अपार उत्साह है। इसके कारण 20 जुलाई तक की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फुल हो चुके हैं। कोई ओंकारेश्वर तो कोई खंडवा पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया। इस बार तो हालात ये बने की ग्रुप के सभी सदस्यों को दर्शन के लिए एक समान तारीख तक नहीं मिल रही है। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लोग कैसे भी करके रजिस्ट्रेशन कराना चाह रहे है। 26 जुलाई तक फुल रजिस्ट्रेशन अमरनाथ यात्री मनोज शंखपाल व जयंत मुंशी ने बताया कि इस बार भक्तों में उत्साह ज्यादा है। बुरहानपुर से 3 हजार से अधिक भक्त इस बार यात्रा पर जा रहे हैं, जबकि यह आंकड़ा प्रति वर्ष 1500 के करीब रहता है। इस बार रजिस्ट्रेंशन संˆख्या अधिक हो गई। ऑनलाइन में बालटाल से 20 जुलाई और पहलगाम से 26 जुलाई तक फुल चल रहा है। हमने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 200 से अधिक भक्तों की डाक जšम्मू श्रीनगर श्राइन बोर्ड ऑफिस भेजी है। कई भक्त भी मनचाही तिथि के लिए जšम्मू या श्रीनगर पहुंचकर तत्काल पंजीयन का विकल्प चुन रहे हैं। पहलगाम और बालटाल के मार्ग से होने वाली इस यात्रा के लिए आएफआइडी कार्ड अनिवार्य है। कैसे कराएं अमरनाथ यात्रा का रजिस्ट्रेशन तरीका: आप ऑनलाइन (वेबसाइट/ऐप) और ऑफलाइन (बैंक शाखाएं) दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। फीस: लगभग 150 से 220 प्रति व्यक्ति। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड, वैध मेडिकल सर्टिफिकेट (CHC – अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र), और फोटो। ऐज लिमिट: 13 साल से कम और 70 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति, और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को अनुमति नहीं है। यात्रा मार्ग: बालटाल (Baltal) और पहलगाम (Pahalgam)। ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन -SASB की वेबसाइट jksasb.nic.in पर जाएं। -'Online Services' > 'Register' पर क्लिक करें। -फॉर्म भरें, रूट और तारीख चुनें। -फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट अपलोड करें। -फीस का भुगतान करें और परमिट डाउनलोड करें। केदारनाथ यात्रा भी शुरू 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ धाम व देश के चारधाम में शामिल बद्रीनाथ धाम के लिए भी उत्साह है। यहां पर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन का भी महत्व है। अक्षय तृतीय से यात्रा की शुरुआत हो गई। आंकड़े एक नजर में -15 अप्रेल से शुरू हुए रजिस्ट्रेशन -28 अगस्त को राखी पर होगा समापन -03 हजार के करीब संभावित यात्री जाएंगे अमरनाथ यात्रा पर

भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज

भोपाल   भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 80 एकड़ जमीन तुरंत चाहिए। इसके लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा तत्काल आदेश जारी करते हुए एक्सचेंज स्टेशन के लिए आरा मशीरों को शिफ्ट करने को कहा है। साथ ही भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरणों को तेजी से निराकृत करने के भी निर्देश दिए। धारा 19 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एमआइडीसी, वन एवं राजस्व विभाग केअधिकारियों को भी निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण से प्रभावित आरा मशीनो के स्थानांतरण की कार्रवाई जल्द पूरी करें। सभी एसडीएम को मिशन मोड में काम करने का कहा गया। उन्होंने चिन्हित भूमि का सीमांकन कर कंपनी को सौंपने के भी निर्देश दिए। जहां कहीं मेट्रो में भूमि संबंधी विवाद उत्पन्न हो, वहां प्रकरण को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर उसका त्वरित समाधान कराने का कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर भूमि संबंधी कोई विवाद नहीं है, वहां मेट्रो कंपनी काम शुरू करे। ऑरेंज लाइन का चल रहा काम गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो परियोजना के अंतर्गत ऑरेंज लाइन (प्रायोरिटी कॉरिडोर) सुभाष नगर से केन्द्रीय विद्यालय बोर्ड ऑफिस चौराहा होते हुए एम्स तक विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त ब्लू लाइन रूट भदभदा डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, लाल परेड मैदान, पुल बोगदा, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित है। बैठक में अपर कलेक्टर सुमित पांडे, मेट्रो मंडल प्रबंधक, नगर निगम के अपर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं एसडीएम उपस्थित थे। 3.36 किमी की अंडरग्राउंड लाइन वहीं दूसरी ओर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत 3.36 किमी लंबाई की अंडरग्राउंड लाइन बनाना तय है। ऐशबाग से डीआइजी बंगला, सिंधी कॉलोनी तक भोपाल स्टेशन व नादरा बस स्टैंड होते हुए काम होगा। इसे पूरा करने शुरुआत में तीन से चार माह का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए तीन मशीनों से काम शुरू करना था, लेकिन अभी एक मशीन ही उतारी गई। दो अन्य उतारनी बाकी है। इस कॉरिडोर में दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। टीबीएम से बनी सुरंग 3.39 किमी तक जाएगी। इसके बाद बड़ा बाग के पास नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी। तेज होगा काम प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर्स के अनुसार, जून से मानसूनी हलचल शुरू होने के बाद गहराई में काम करना कठिन होगा। इस दौरान अन्य काम पूरे किए जाएंगे। टनल का काम फिर अक्टूबर से ही शुरू होगा। यानी तीन माह में पूरा होने वाला काम 8 से 9 माह में पूरा होगा।

किराए के मकान में रहने के लिए बतानी होगी वजह, 2027 की जनगणना में गड़बड़ी करने वालों के लिए नया प्रावधान

भोपाल  भोपाल में जनगणना 2027 के तहत अभी पंद्रह दिन स्वगणना की प्रक्रिया की जा रही है। एक मई से हर घर पहुंचकर मकान सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण किराएदारों की डिटेल जुटाना है। किराए के मकान में रहने की वजह भी पूछी जाएगी। किराएदार किस तरह के घर में रह रहे हैं, फार्म में इसकी जानकारी देनी होगी। किराए के मकान के नाम पर गड़बड़ी करनेवालों के लिए जनगणना 2027 में यह बड़ा प्रावधान किया गया है। स्वगणना के साथ ही एक मई से शुरू होने वाली प्रगणकों द्वारा गणना में कोई गलत जानकारी दी तो जुर्माने के साथ सजा भी हो सकती है। प्रशासन के सामने किराएदारों की वास्तविक डिटेल निकालना बड़ी चुनौती है। इसलिए प्रगणकों को किराएदारी वाले मकान को लेकर विशेष सतर्कता के साथ काम करने के लिए कहा गया है। इस बीच स्व गणना की गति बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। प्रशासन की ओर से इसके लिए लोगों को जागरूक करने का कहा गया है। उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास खुद का मकान : मकान सूचीकरण के तहत उन किराएदारों की अलग से लिस्टिंग होगी, जिनके पास शहर में या अन्य कहीं खुद का मकान है और वे यहां किराए से रह रहे हैं। इसकी वजह भी पूछी जाएगी। आगामी समय में इस तरह की स्थितियों को लेकर सरकार कोई योजना बना सकती है। खुद का मकान होने के बाद भी लोग किराए से रह रहे हैं तो कारण पता लगाए जाएंगे। प्रशासन को आशंका, परिवार का घर, किराएदार न दर्ज करवा दें: प्रशासन को ये आशंका है कि एक ही घर में कई परिवार रह रहे हों, वहां कुछ खुद को किराएदार के तौर पर दर्ज न करवा दें। सरकार की आवासीय योजनाओं का लाभ लेने की मंशा इसमें शामिल हो सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पूछताछ करने के लिए कहा जा रहा है। प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा प्रशासन की ओर से स्व गणना की गति बढ़ाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का कहा जा रहा है। अभी स्वगणना में भोपाल प्रदेशभर में तीसरे नंबर पर है। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा उप जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता बताते हैंं कि जनगणना 2027 को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। अब भी प्रगणकों के साथ सुपरवाइजर्स को लगातार अपडेट देकर जनगणना के तौर तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

E85 पेट्रोल आ रहा है भारत में, गाड़ियों में 85% एथेनॉल का होगा इस्तेमाल, तैयारी जोरों पर

  नई दिल्ली E85 Blended Petrol: पश्चिमी एशिया में युद्ध का तनाव है, तेल महंगा है, दुनिया भर ही निगाहें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हैं. सबको बस एक फिकर है अगले पल क्या होगा. इसी बीच अब देश के पेट्रोल की कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. अभी तक E20 फ्यूल (20% एथेनॉल वाला पेट्रोल) की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सीधा E85 की तैयारी हो रही है. मतलब पेट्रोल में पेट्रोल कम और एथेनॉल ज्यादा. या यूं कहें कि, भारत में अब गाड़ी फ्यूल पर नहीं बल्कि शराब पर दौड़ेगी. सरकार अब ऐसा फ्यूल लाने की तैयारी में है, जो कारों को चलाएगा भी और देश की तेल पर निर्भरता भी घटाएगा. सवाल ये है कि क्या आपकी गाड़ी इस नए बदलाव के लिए तैयार है? आइये विस्तार से जानते हैं पूरा मामला-  सरकार जल्द जारी करेगी ड्राफ्ट  ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बहुत जल्द E85 फ्यूल को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस पर सरकार के भीतर सहमति बन चुकी है और मार्केट लेवल पर भी तैयारी शुरू हो गई है. शुरुआती टेस्टिंग भी की जा चुकी है, जिससे यह साफ है कि योजना अब जमीन पर उतरने के काफी करीब है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक E85 को एक अलग फ्यूल ग्रेड के रूप में पेश किया जाएगा. यह मौजूदा E20 पेट्रोल से अलग होगा. अभी E20 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 27% तक जा सकती है, जबकि E85 में यह सीधे 85% तक होगी।  तेल संकट के बीच बड़ी तैयारी पूरी दुनिया इस समय तेल संकट का सामना कर रही है, खासकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, ऐसे में E85 जैसे फ्यूल से आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि, पिछले एक दशक से एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत करोड़ों बैरल कम तेल मंगा रहा है।  पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च में अपने एक बयान में कहा था कि, "एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है।  एथेनॉल क्यों है खास एथेनॉल देश में ही गन्ना, मक्का और अनाज से बनाया जाता है. यह एक रिन्यूएबल फ्यूल है और पेट्रोल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है. यही वजह है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फ्लेक्स-फ्यूल कार का इस्तेमाल कर चुके हैं और उन्होंने 100% एथेनॉल पर चलने वाली कार को देश को दिखाया था. वो लगातार वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहनों के निर्माण पर जोर देते रहे हैं।  E85 के लिए चाहिए खास इंजन E85 फ्यूल का इस्तेमाल हर गाड़ी में नहीं किया जा सकता. इसके लिए खास तरह के इंजन यानी फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की जरूरत होती है. सामान्य पेट्रोल इंजन में अगर E85 इस्तेमाल किया जाए तो इससे इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं, परफॉर्मेंस गिर सकती है और गाड़ी स्टार्ट होने में भी दिक्कत आ सकती है।  इतना ही नहीं, E85 फ्यूल के लिए पेट्रोल पंप पर अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. इसके लिए अलग नोजल और स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होगी, ताकि E20 और E85 दोनों को अलग-अलग रखा जा सके. क्योंकि E85 फ्यूल के बाजार में आने से पहले इससे चलने वाले वाहनों का बाजार में होना जरूरी है. ऐसे में सरकार E20 फ्यूल की बिक्री तत्काल नहीं बंद करेगी, बल्कि इसे फेज्ड मैनर में हटाया जाएगा।  कब से चल रही है तैयारी भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग की योजना करीब एक दशक से चल रही है. नीति आयोग ने 2021 में अपनी रोडमैप रिपोर्ट में E85 का जिक्र किया था. इसके अलावा 2016 में ही E85 और E100 फ्यूल के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका था. 2022 में सरकार ने E5 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के टेस्ट नियम भी तय किए थे।  E85 फ्यूल से देश को कई फायदे मिल सकते हैं. इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि एथेनॉल की मांग बढ़ेगी. हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की माइलेज थोड़ा कम हो सकता है. वाहन निर्माता कंपनियों को तेजी से नए इंजन तैयार करने होंगे और तेल कंपनियों को नए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना पड़ेगा. साथ ही ग्राहकों को भी सही जानकारी देना जरूरी होगा ताकि वे गलती से E85 फ्यूल को सामान्य गाड़ियों में इस्तेमाल न करें।  कुल मिलाकर, E85 फ्यूल भारत के ऑटो और एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाएगा, लेकिन इसके सफलता पूर्वक लागू होने के लिए सरकार, कंपनियों और आम लोगों सभी की तैयारी जरूरी होगी।