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भगवंत मान सरकार का बड़ा फैसला: फिनलैंड मॉडल पर होगा जल प्रबंधन

चंडीगढ़  पिछले वर्ष मानसून के दौरान पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने इस बार सुरक्षा प्रबंधों को समय से पहले ही पुख्ता करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए बाढ़ रोकथाम और राहत ढांचे को मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक 'एम्फीबियस मशीनों' की खरीद को हरी झंडी दे दी। ये मशीनें जल और थल दोनों जगह काम करने में सक्षम हैं, जिससे ड्रेनों और नहरों की सफाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरों की गहराई से सफाई के लिए इन मशीनों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि ये मशीनें बहते पानी में भी काम कर सकती हैं और गहराई तक गाद निकालने में सक्षम हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्य सुचारू रूप से किए जा सकेंगे। उन्होंने जल संसाधन विभाग को इन मशीनों की खरीद के लिए तुरंत विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। फिनलैंड की तर्ज पर होगा जल प्रबंधन मुख्यमंत्री ने बैठक में साझा किया कि हाल ही में अपनी फिनलैंड यात्रा के दौरान उन्होंने इन मशीनों की कार्यक्षमता को स्वयं देखा था, जहां इनका उपयोग जल निकायों के रखरखाव के लिए बहुत प्रभावी ढंग से किया जाता है। पंजाब में भी अब इनका इस्तेमाल नहरों, ड्रेनों और तालाबों की सफाई के लिए किया जाएगा। पानी के प्रबंधन पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 26 अप्रैल को भाखड़ा बांध का जल स्तर 1594 फीट दर्ज किया गया है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 1680 फीट है। 1 जून से शुरू होने वाली धान की बुवाई को देखते हुए मानसून से पहले जल प्रबंधन की सटीक रणनीति बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 मई तक राज्य की सभी नई और पुरानी नहरों के पुनरुद्धार का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। रोपड़ के संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से रोपड़ जिले के उन 20 गांवों का जिक्र किया जो पिछले साल बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में स्टड और स्पर जैसे सुरक्षा ढांचे बनाने का काम प्राथमिकता पर किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को स्वां नदी के चैनलाइजेशन की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए भी कहा, ताकि इसका उपयोग सिंचाई के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी किया जा सके। बैठक में कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, बरिंदर कुमार गोयल, सांसद मालविंदर सिंह कंग और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

CGBSE Result 2026: 29 अप्रैल को आएंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, ऐसे देखें अपना स्कोर

 रायपुर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजे बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को घोषित किए जाएंगे। परिणाम दोपहर 2:30 बजे जारी होगा। इस वर्ष 10वीं बोर्ड परीक्षा में करीब 3.21 लाख और 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 2.45 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। सभी परीक्षार्थी अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दोपहर 2:30 बजे होगा परिणाम घोषित हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम का औपचारिक ऐलान दोपहर 2:30 बजे किया जाएगा। छात्र-छात्रा परिणाम को आसानी से देख सकते हैं। परीक्षा का परिणाम कैसे चेक कर सकते हैं हम उसकी जानकारी आपको दे रहे हैं। ऐसे चेक करें छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट 2026 छात्र अपना रिजल्ट छत्तीसगढ़ बोर्ड (Chhattisgarh Board Result 2026) की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in (इस लिंक को क्लिक कर सीधे वेबसाइट पर जा सकते हैं) पर जाकर देख सकते हैं। इसके लिए रोल नंबर की आवश्यकता होगी। रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जाएं।     होमपेज पर CGBSE 10वीं रिजल्ट 2026 या CGBSE 12वीं रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें।     अब अपना रोल नंबर दर्ज कर सबमिट करें।     आपकी मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई देगी।     भविष्य के लिए रिजल्ट डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक होने की स्थिति में धैर्य बनाए रखें और कुछ समय बाद दोबारा प्रयास करें।  

बिहार टाउनशिप योजना: किसानों को चार गुना मुआवजा और विकास में साझेदारी

पटना बिहार की 11 नई सेटेलाइट टाउनशिप के दायरे में जो जमीन आयेगी, उसके मालिक किसान इसमें भागीदार होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टाउनशिप क्षेत्र में जिस किसान की जमीन आयेगी, उसमें कोई भी भूमिहीन नहीं होगा। सरकार किसानों को 55 फीसदी जमीन विकसित कर वापस देगी। टाउनशिप के लिए खाता-खेसरा के साथ प्रारूप का प्रकाशन अक्तूबर-नवंबर तक होगा। इसके बाद प्रारूप पर लोगों से आपत्ति और सुझाव लिये जायेंगे। यह जानकारी नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि जो किसान टाउनशिप के लिए जमीन नहीं देना चाहेंगे, सरकार उनसे बाजार दर से चार गुना अधिक कीमत पर खरीदेगी। जमीन अधिग्रहण डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी। विवाद का निपटारा ट्रिब्यूनल करेगा। जमीन मालिकों के साथ बैठक में सहमति के आधार पर सब तय होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव राजीव कुमार श्रीवास्तव, अपर सचिव मनोज कुमार भी उपस्थित थे। प्रस्तावित टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में भूमि के लेनदेन पर अस्थायी प्रतिबंध जमीन भू-मालिकों के कल्याण के लिए है। विकास की सुगबुगाहट होते ही बिचौलिए किसानों को उनकी जमीन कम कीमत पर खरीद लेते हैं। यह रोक सुनिश्चित करती है कि भू-मालिक बेशकीमती जमीन कम कीमत पर न बेचे। योजना पूरी होने पर जब ढांचा तैयार हो जाएगा, तब वही भू-मालिक संपत्ति अच्छे दरों पर बेचने या विकसित करने के हकदार होंगे। यह कदम उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है। यह योजना पूरी तरह पारदर्शी है। ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक, हर चरण में भू-मालिकों या सार्वजनिक परामर्श लिया जाएगा। सड़क व बुनियादी ढांचा के लिए 22 फीसदी क्षेत्र टाउनशिप में 22 प्रतिशत क्षेत्र सड़क और बुनियादी ढांचा के लिए होगा। पांच प्रतिशत जमीन में पार्क, खेल मैदान, उद्यान, खुला क्षेत्र, स्कूल, औषधालय, अग्निशमन जैसी सुविधाएं होंगी। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास के लिए तीन फीसदी भूखंड का उपयोग होगा। मूलभूत संरचना यथा-सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर आदि के विकास के लिए 15 फीसदी भूमि प्राधिकार के द्वारा लागत वसूली के लिए रखी जाएगी। प्रारूप पर सहमति के बाद हटेगी भूमि निबंधन पर रोक सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चिह्नित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक है। पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर के लिए 31 मार्च 2027 और मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी के लिए 30 जून 2027 तक रोक है। प्रारूप पर किसानों की सहमति बनते ही जमीन खरीद-बिक्री पर रोक हट जायेगी

23 निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का एडमिशन, 580 में से 279 चयनित

  हजारीबाग झारखंड में हजारीबाग जिले के अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के प्रवेश कक्षा में सत्र 2026-27 के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन संबंधित पहली सूची शिक्षा विभाग ने जारी किया. इसमें मिले 580 आवेदनों में सत्यापन के बाद लगभग 180 आवेदन को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है. शेष आवेदनों के साथ मौजूद कागजात पर अभिभावकों से उनका पक्ष मांगा गया है. आवेदक 28 अप्रैल शाम 4:00 बजे तक अपना पक्ष रख सकते हैं. जिला शिक्षा अधीक्षक सह अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया सत्यापित सभी 580 बच्चों की सूची को हजारीबाग nic.com पर डाला गया है. इसमें 180 आवेदन के आवश्यक कागजात जांच में सही मिलने पर सभी को विचाराधीन (अंडर कंसीडरेशन फॉर रेंडमाइजेशन) की श्रेणी में रखा गया है. क्या है मामला? निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने पोर्टल बनाकर निर्धारित समय सीमा यानी 14 मार्च 2026 तक 580 आवेदन प्राप्त किया है. नियम अनुसार इसमें अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के लिए 279 बच्चों की सूची शिक्षा अधिकारी/कर्मी की एक टीम तैयार करने में जुटी है. अंतिम रूप से तैयार सूची संबंधित स्कूलों को भेजा जाएगा. आरटीई में गरीब बच्चों का नामांकन होना है. इसके लिए आरटीई के संकल्प पत्र में बच्चों के अभिभावकों को 72,000 का इनकम सर्टिफिकेट (आय प्रमाणपत्र) अनिवार्य किया गया है. हजारीबाग में आरटीई के तहत 23 निजी स्कूलों में 279 बच्चों के नामांकन के लिए पहली सूची जारी हुई है. कुल 580 आवेदन मिले थे, जिनमें करीब 180 आवेदन विचाराधीन रखे गए हैं. किस निजी स्कूल में कितना नामांकन बरही- डीएवी पब्लिक स्कूल – नर्सरी – 10 बड़कागांव-डीएवी पब्लिक स्कूल उरीमारी-एलकेजी-08 बरकट्ठा-डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो-वन-20 चौपारण-सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा-वन-20 शहरी क्षेत्र-दिल्ली पब्लिक स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-जैक एंड जिल स्कूल सिंघानी-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-लॉर्ड कृष्णा स्कूल अमृतनगर-वन-10 शहरी क्षेत्र-संत पॉल स्कूल-वन-10 शहरी क्षेत्र-सरस्वती शिशु विद्या मंदिर कुम्हारटोली-वन-10 शहरी क्षेत्र-नेशनल पब्लिक स्कूल-वन-20 शहरी क्षेत्र-संत स्टेफन स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-श्री रामकृष्ण शारदा मठ एंड मिशन-नर्सरी 12 शहरी क्षेत्र-माउंट एग्माउंट स्कूल-एलकेजी- 15 शहरी क्षेत्र-डीएवी पब्लिक स्कूल-नर्सरी-15 शहरी क्षेत्र-नमन विद्या-नर्सरी- 07 शहरी क्षेत्र- रोजबड स्कूल- एलकेजी- 07 शहरी क्षेत्र-ओएसिस स्कूल हजारीबाग-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-न्यू हजारीबाग पब्लिक स्कूल हूपाद- नर्सरी-10 इचाक-चैंपियन बेसिक अकैडमी-वन-20- कटकमदाग-एंजेलस हाई स्कूल सिरसी-एलकेजी-10 कटकमदाग- दिल्ली पब्लिक स्कूल शंकरपुर-एलकेजी-10 कटकमसांडी-संत अगस्टिन हाई स्कूल कंचनपूर-वन-10 डाडी-डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए-नर्सरी-05

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: बाघ बाघिन ‘रानी’ के पांच शावकों का खास जश्न

जयपुर राजधानी जयपुर के आमेर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में इन दिनों जश्न का माहौल है. बाघिन ‘रानी' के पांचों शावकों का मंगलवार (28 अप्रैल) को पहला बर्थडे सेलिब्रेशन हुआ. 27 अप्रैल को जन्मे शावक विजय, शौर्य, सूर्या, अंबे और वृंदा का जन्मदिन पार्क प्रशासन ने उत्साह के साथ मनाया. मौका इसलिए भी खास है क्योंकि पार्क में 2 सफेद बाघों समेत बाघों की कुल संख्या 15 तक पहुंच गई है. यह किसी भी बायोलॉजिकल पार्कों की तुलना में अधिक है, जिससे नाहरगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान मिली है. आकर्षण का केंद्र है 'विजय' नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के एसीएफ देवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पांचों शावकों में ‘विजय' सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. क्योंकि वह एक व्हाइट टाइगर है, जबकि बाकी चार शावक गोल्डन रंग के हैं. ‘विजय' अपनी मां रानी के साथ पार्क में अठखेलियां करता नजर आता है, जिसे देखने के लिए स्टाफ भी उत्साहित रहता है. पहली बार एक साथ जन्मे 5 शावक वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ.अरविंद माथुर ने बताया कि देश में यह पहला मौका था, जब किसी बाघिन ने एक साथ पांच शावकों को जन्म दिया है. सभी शावकों का नियमित टीकाकरण किया गया है और उन्हें प्राकृतिक वातावरण में विकसित करने के लिए रोजाना कुछ समय खुले क्षेत्र में छोड़ा जाता है. इससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है. पर्यटक भी जल्द कर सकेंगे दीदार व्इन पांचों शावकों को पर्यटकों के लिए डिस्प्ले में लाया जाएगा. इससे न केवल पर्यटकों को नया आकर्षण मिलेगा, बल्कि जयपुर में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. 

सभी स्कूलों में शौचालय की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका ने आज दुर्ग जिले के प्रवास के दौरान ब्लॉक स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के प्रांगण में एक पेड़ मां के नाम के तहत वृक्षारोपण भी किया। बैठक के दौरान राज्यपाल ने निर्देश दिए कि अधिकारी हितग्राहियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का फीडबैक ले। सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों का आकलन करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून दोनों अवधियों में भूजल स्तर का नियमित और व्यवस्थित मापन किया जाए। उन्होंने कहा कि इन दोनों समयावधियों के आंकड़ों की तुलना करने से यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि वर्षा के साथ-साथ जिले में चलाए गए जल संवर्धन अभियानों जैसे सोखपीट निर्माण और अन्य संरचनाओं का भूजल स्तर पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि इस प्रक्रिया को नियमित रूप से अपनाया जाता है, तो न केवल जल स्तर में हो रही वास्तविक वृद्धि का सही आंकलन संभव होगा, बल्कि जल संरक्षण के प्रयासों को और बेहतर दिशा भी दी जा सकेगी। राज्यपाल  डेका ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक संख्या में पौधारोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, शासकीय भवनों, सड़कों के किनारे तथा सिविल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराने को कहा, ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके। राज्यपाल ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से आम लोगों की सहभागिता बढ़ेगी और वे वृक्षारोपण के प्रति अधिक जागरूक एवं प्रेरित होंगे।  राज्यपाल ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि राज्य में धान की खेती अधिक मात्रा में होती है, जिससे पानी की खपत भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को अन्य कम पानी वाली फसलों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। इसके साथ ही राज्यपाल ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर बल देते हुए हाइड्रोपोनिक्स खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स एक उन्नत तकनीक है, जिसमें फसलों को बिना मिट्टी के केवल पानी और पोषक तत्वों के घोल के माध्यम से उगाया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। बैठक में कृषि अधिकारी ने जानकारी दी कि “नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग” के तहत जिले में 500 किसानों को जैविक खेती से जोड़ा गया है और वे जैविक फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। राज्यपाल  डेका ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों से स्कूलों में शौचालय की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्कूल में शौचालय की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा वे साफ-सुथरे और उपयोग योग्य स्थिति में हों। उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों के शौचालयों का निरीक्षण करने के लिए कहा। राज्यपाल ने यह भी जोर दिया कि शौचालयों की नियमित सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही राज्यपाल ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि ड्रॉपआउट हुए बच्चों और उनके अभिभावकों की बैठकें आयोजित करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है और वर्तमान में किसी अच्छे संस्थान में कार्य कर रहे हैं या किसी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, उन्हें स्कूलों में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाए। ऐसे कार्यक्रमों से वर्तमान विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे। बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित योग और व्यायाम को बढ़ावा देने पर राज्यपाल ने जोर दिया। जिले के 28 संस्थानों में नियमित रूप से योग का अभ्यास किया जा रहा है, जिसकी उन्होंने सराहना की। राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन संस्थानों में नियमित योग करने वाले प्रतिभागियों की सूची तैयार कर भेजी जाए, ताकि उन्हें राजभवन में आमंत्रित कर सम्मानित किया जा सके। राज्यपाल ने सभी विकासखंड अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने जल संरक्षण के कार्यों, प्रधानमंत्री आवास योजना में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था, स्कूलों में शौचालयों की स्थिति तथा “लखपति दीदी” योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक में किए जा रहे किसी भी नवाचार (इनोवेटिव कार्य) की जानकारी भी ली, ताकि अच्छे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जा सके। राज्यपाल  डेका ने कहा कि स्थानीय उत्पादों के वेल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि हो सके। साथ ही इन उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए। राज्यपाल ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर भी गंभीरता जताई और अधिकारियों को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा। उन्होंने सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक सुधारात्मक उपाय लागू करने पर जोर दिया, जिससे दुर्घटनाओं को कम किया जा सके। इसके साथ ही राज्यपाल ने इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी में अधिक से अधिक सदस्यों को जोड़ने पर जोर दिया। बैठक में जिला कलेक्टर  अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल सहित जिले के सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

शंभू-अंबाला रेलवे ट्रैक ब्लास्ट केस: पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई

पटियाला मंगलवार बाद दोपहर पटियाला के पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डीआईजी पटियाला रेंज कुलदीप सिंह चाहल और एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर हुए बम धमाके की गुत्थी सुलझाने के लिए एसपी (हेडक्वार्टर) वैभव चौधरी, डीएसपी सुखअमृत सिंह रंधावा, सीआईए पटियाला इंचार्ज प्रदीप बाजवा, सीआईए समाना इंचार्ज अंकुरदीप सिंह, थाना कोतवाली पटियाला के एसएचओ इंस्पेक्टर जसप्रीत सिंह काहलो तथा स्पेशल सेल राजपुरा के इंचार्ज एसआई मनप्रीत सिंह की टीमों का गठन किया गया। पुलिस टीमों ने अत्यंत पेशेवर तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपियों प्रदीप सिंह खालसा पुत्र निर्मल सिंह निवासी वार्ड नंबर 1, डॉक्टर निसान सिंह वाली गली, सिद्धू अस्पताल के पीछे, मानसा, कुलविंदर सिंह बग्गा पुत्र सीरा सिंह निवासी बप्पियाना जिला मानसा, सतनाम सिंह सत्ता पुत्र लखविंदर सिंह निवासी पंजवड़ जिला तरनतारन; तथा गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी पुत्र सुखविंदर सिंह निवासी बाबा बिधी चंद नगर, मुरादपुर खुर्द, गोइंदवाल, थाना सिटी तरनतारन को गिरफ्तार किया। डीआईजी ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में युद्धक हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है, जो उन्होंने सीमा पार बैठे अपने आतंकी हैंडलरों की मदद से हासिल किया था। बरामद सामग्री में एक बम, 2 पिस्तौल सहित जिंदा कारतूस, आईईडी बनाने में प्रयुक्त सामग्री तथा मलेशिया में बैठे हैंडलरों से संपर्क के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं। डीआईजी कुलदीप सिंह चाहल ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि इस मॉड्यूल का मुख्य सरगना प्रदीप सिंह खालसा है, जो खालिस्तानी विचारधारा से प्रभावित होकर “चलदा वहीर चक्रवर्ती, अटारिए” नामक संगठन चला रहा था। वह विदेश में मलेशिया स्थित खालिस्तानी उग्रवादी समूहों और पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के संपर्क में था। उन्होंने बताया कि इनका मकसद पंजाब में आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर शांति भंग करना और दहशत का माहौल पैदा करना था, जिसके लिए पाकिस्तान स्थित हैंडलरों द्वारा इन्हें भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार मुहैया कराए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी है और उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। डीआईजी ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि सोमवार की रात करीब 8:55 बजे इनके साथियों ने शंभू-अंबाला रेलवे मार्ग पर बम विस्फोट कर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाया। इस संबंध में थाना जीआरपी पटियाला में मुकदमा नंबर 11 दिनांक 28.04.2026, विस्फोटक अधिनियम की धारा 3 तथा रेलवे अधिनियम की धारा 150 के तहत दर्ज किया गया था। डीआईजी ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मॉड्यूल का सरगना प्रदीप सिंह खालसा अपने साथियों के साथ पंजाब के प्रमुख रेलवे मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर बम धमाके कर राज्य में उग्रवाद को पुनर्जीवित करना चाहता है। इस संबंध में थाना कोतवाली पटियाला में बीएनएस की धारा 111, विस्फोटक अधिनियम की धाराएं 3, 4, 5, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 की धाराएं 13, 16, 18, 20 के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीआईजी ने बताया कि पुलिस टीमों ने प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर सिंह बग्गा, सतनाम सिंह सत्ता और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी को मंगलवार को पटियाला में बड़ी नदी बांध रोड के पास कूड़े के ढेर के निकट से गिरफ्तार किया और उनके पास से हथियार व गोला-बारूद बरामद किया। डीआईजी ने कहा कि आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। उन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड लिया जाएगा, ताकि विदेशों में बैठे खालिस्तानी समर्थकों से उनके संबंधों और विदेशी फंडिंग की गहराई से जांच की जा सके। एसएसपी वरुण शर्मा ने कहा कि इस आतंकी मॉड्यूल की गिरफ्तारी से पंजाब में संभावित बड़ी वारदातों को रोका गया है, जिनसे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था।  

मखाना खेती पर सरकार मेहरबान, अररिया के किसानों को 75 फीसदी तक अनुदान

अररिया. मिथिलांचल की पारंपरिक पहचान और वैश्विक सुपरफूड मखाना अब अररिया के खेतों में अपनी सफेदी बिखेरने को तैयार है। बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना का विस्तार करते हुए अररिया समेत राज्य के 16 जिलों को इसमें शामिल किया है। कोसी और सीमांचल के कुछ जिलों तक यह खेती अब तक मुख्य रूप से सीमित थी, लेकिन अब अररिया के किसान भी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस पहल के तहत मखाना की खेती करने वाले जिले के किसानों को लागत पर 75 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जाएगा। इस निर्णय से जिले के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आने की उम्मीद है। जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि अररिया को मखाना उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में पहचान मिलेगी। एटीएम पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बिहार सरकार ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को भारी सब्सिडी (अनुदान) मिलेगी। साथ ही कौशल विकास के तहत प्रखंड स्तर पर चयनित 10 किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के तहत मखाना विकास योजना 2026-27 के तहत मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण पर 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है। कौशल विकास के तहत, प्रखंड स्तर पर दस किसानों को मखाना की आधुनिक खेती (जैसे स्वर्ण वैदेही, सबोर मखाना) और उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। किसानों को बीज वितरण योजना के तहत रियायती दरों पर बीज मिलेगा। इसके अलावा, मखाना खेती के पारंपरिक उपकरणों के लिए भी 75% की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रखंड क़ृषि पदाधिकारी राजीव कुमार झा ने बताया कि इस योजना से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि आधुनिक तरीकों से मखाना की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

S-400 की चौथी खेप भारत को, रूस ने निभाई दोस्ती; ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान हुआ था पस्त

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की कमर तोड़ने वाला रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 की चौथी यूनिट अगले महीने से भारत को मिलने की उम्मीद है। इस नई खेप से भारत की रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने के लिए 5 अरब डॉलर की डील की थी, जिनमें से तीन यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार हथियार सिस्टम की सप्लाई के लिए तय की गई नई समय-सीमा के तहत मिसाइल की पांचवीं यूनिट नवंबर तक मिल जाएगी। S-400 मिसाइल सिस्टम  S-400 मिसाइल सिस्टम ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। पिछले महीने भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने की मंज़ूरी दी थी, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक, मिसाइल सिस्टम की चौथी यूनिट को रूस से रवाना किया जा चुका है और अगले कुछ दिनों में इसके भारत पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद खरीद  भारत ने सात साल से भी पहले S-400 मिसाइलें खरीदने का सौदा किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट' (CAATSA) के तहत अमेरिका भारत पर बैन लगा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को अमेरिका के प्रतिबंधों से किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं है, क्योंकि यह नई खरीद पिछली खरीद का ही एक 'फॉलो-ऑन' ऑर्डर है। कितना घातक है S-400? पिछले साल 7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने S-400 मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। संघर्ष खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद ही, S-400 मिसाइलों की एक और खेप खरीदने का प्रस्ताव पेश किया गया था। रूस ने इन मिसाइल सिस्टम को चलाने के लिए भारतीय सैनिकों के एक समूह को पहले ही ट्रेनिंग दे दी है। S-400 को रूस का सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल रक्षा सिस्टम माना जाता है।  

ट्रैक ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: आतंकी जगरूप की मौत, पुलिस जांच तेज

तरनतारन. गत रात शंभू बार्डर समीप रेलवे लाइन पर ब्लास्ट हुआ। इस दौरान ट्रैक उड़ाने दौरान एक आतंकी के शरीर के चीथड़े उड़ गए। जिसकी पहचान पंजाब के जिला तरनतारन के गांव पंजवड़ निवासी जगरुप सिंह उर्फ जूपा के तौर पर हुई है। आतंकियों की पुश्तभूमि के तौर पर जाने जाते गांव पंजवड़ के लोग हैरान नजर आए। हालांकि खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने गांव में डेरा डाल लिया है। आटा चक्की चलाने वाले जगरुप सिंह जूपा की आयु करीब 33 वर्ष बताई जाती है। विधानसभा उपचुनाव के दौरान जूपा पर दर्ज हुआ था मामला तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के दौरान जूपा के खिलाफ पोस्टर फाड़ने बाबत एक शिकायत थाना झब्बाल में दर्ज हुई थी। इसके अलावा जूपा के खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। मंगलवार को जब पता चला कि रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट के दौरान जूपा की मौत हुई है तो गांव के लोग हैरान रह गए। दो बेटियों का बाप जूपा अक्सर निहंग वेष में रहता था। ग्रामीण पाल सिंह, मेजर सिंह, सेवक सिंह ने बताया कि विवाहित जगरुप सिंह आतंकियों से जुड़ा होगा, इस बाबत सोचा भी नहीं था। खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के मुखिया परमजीत सिंह पंजवड़ की गत वर्ष पाकिस्तान में बाइक सवारों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गांव पंजवड़ से संबंधित कई और भी आतंकी रह चुके हैं। जगरुप सिंह जूपा के परिवार बाबत पुलिस द्वारा रिकार्ड खंगाला जा रहा है। तरनतारन के एसएसपी सुरिंदर लांबा कहते हैं कि जूपा के परिवार से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। मामले की गहनता से जांच के बाद जो भी रिपोर्ट सामने आएगी, उसे उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। जूपा दो दिन पहले ही गांव में घूमता देखा गया था रेलवे लाइन पर ब्लास्ट के मामले में तरनतारन पुलिस द्वारा खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर पांच संदिग्ध लोगों को राउंडअप कर लिया है। माना जा रहा है कि ब्लास्ट मामले में इन लोगों से आतंकी गुट से संबंधित अहम जानकारी मिल सकती है। जूपा दो दिन पहले ही गांव में घूमता देखा गया था। सब डिवीजन तरनतारन के डीएसपी सुखबीर सिंह के नेतृत्व में उक्त लोगों से पूछताछ की जा रही है। डीजीपी रेलवे शशि प्रभा मौके पर पहुंची शंभू के नजदीक रेलवे लाइन पर बम विस्फोट की घटना के बाद स्पेशल डीजीपी रेलवे शशि प्रभा मौके पर पहुंची है जिन्होंने कहा कि हमला करने वाला आतंकी जगरूप सिंह के संबंधी कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। इस फुटेज में जगरूप सिंह अमृतसर रेलवे स्टेशन पर पार्किंग में अपनी बाइक पार्क करता दिखाई देता है। डीजीपी शशि प्रभा ने माना कि इस आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान के हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। घटना में कई लोग शामिल हो सकते हैं, जांच शुरू कर दी गई है जल्द ही पूरा मामला हल हो जाएगा। शंभू-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर विस्फोटक लगाने वाला धमाके में मारा गया। आरोपित ने यह धमाका सोमवार रात राजपुरा और शंभू रेलवे स्टेशन के बीच गांव बठोनिया के नजदीक डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के रेलवे ट्रैक पर किया था। एसएसपी पटियाला वरुण शर्मा ने बताया कि धमाके में मरने वाला व्यक्ति जगरूप सिंह तरनतारन के गांव पंजवड़ का रहने वाला था। उसके शव के टुकड़े करीब 100 मीटर के दायरे में बिखरे मिले थे। मौके से एक सिम मिला है, जिसकी जांच में धमाके के राज खुल सकते हैं। उधर, आतंकियों की पृष्ठिभूमि के तौर पर जाने जाते गांव पंजवड़ में खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने डेरा डाल लिया है। खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का मुखिया परमजीत सिंह पंजवड़ इसी गांव का था। इस मामले में पांच संदिग्ध लोगों को राउंडअप करने की सूचना है, लेकिन पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। टुकड़ों में मिली लाश वहीं राजपुरा सिविल अस्पताल में टुकड़ों में बंटी डेड बॉडी जीआरपी द्वारा शवगृह में रखवाइ गयी है। इसके संबंध में पूछा गया कि वह डेड बॉडी जगरूप कि हैं तो उन्होंने बताया कि इसपर हम जांच कर रहे हैं कि वह बॉडी किसकी है। लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह खबर मिली है कि राजपुरा मे पड़ी बॉडी जगरूप सिंह की ही है। उसने नीले रंग की पगड़ी पहनी हुई थी जोकि कई टुकड़ों में राजपुरा सिविल अस्पताल में लाई गयी है। ब्लास्ट में टुकड़ों में आयी लाश की राजपुरा सिविल अस्पताल में डेड बॉडी आने की पुष्टि smo द्वारा भी कर दी गई है. परंतु उन्होंने बताया कि हमे इसकी पहचान नहीं पता।