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महिला सम्मेलन और विकास परियोजनाओं पर फोकस, वाराणसी दौरा बना राजनीतिक रूप से अहम

वाराणसी   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 28-29 अप्रैल को वाराणसी दौरा केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक संकेत भी देखे जा रहे हैं। अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस यात्रा के दौरान विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के साथ-साथ जनसंपर्क गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है, जिससे यह दौरा रणनीतिक रूप से अहम बन गया है। महिला सम्मेलन बना दौरे का केंद्र बिंदु इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ को माना जा रहा है, जिसमें लगभग 50 हजार महिलाओं की भागीदारी का अनुमान है। इस आयोजन को महिला सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर केंद्रित मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम का संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था भी महिला पुलिस कर्मियों के जिम्मे होगी, जिससे महिला सशक्तिकरण का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है। राजनीतिक संदर्भ में बढ़ी अहमियत विश्लेषकों के अनुसार, यह आयोजन (PM Modi) ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम बंगाल सहित अन्य क्षेत्रों में चुनावी माहौल बना हुआ है। साथ ही संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रयासों को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। ऐसे में महिला सम्मेलन के जरिए व्यापक स्तर पर संदेश देने की रणनीति साफ नजर आती है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 6300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की 163 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, रेलवे ओवरब्रिज, पेयजल योजनाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और शहरी विकास से जुड़े काम शामिल हैं। वाराणसी-आजमगढ़ सड़क के चौड़ीकरण, कज्जाकपुरा में रेलवे ओवरब्रिज, जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाएं और भगवानपुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विकास और सामाजिक संदेश का संतुलन यह दौरा एक ओर जहां बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के जरिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दों को भी प्रमुखता देता है। इस संतुलन के जरिए सरकार विकास और सामाजिक भागीदारी दोनों क्षेत्रों में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर रही है, जिससे वाराणसी दौरा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

CGBSE 10वीं-12वीं के नतीजे कल जारी, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का ऐलान

रायपुर. छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर थी। शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2.30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं। बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई। लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। बेहतर रहा था पिछले साल का रिजल्ट पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके। इंतज़ार की घड़ियाँ अब समाप्ति की ओर हैं। कल दोपहर 02:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है।… — Gajendra Yadav (@GajendraYdvBJP) April 28, 2026

रांची में जीईएल चर्च चुनाव: मार्शल केरकेट्टा लगातार दूसरी बार मॉडरेटर निर्वाचित

रांची झारखंड और असम के प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक, गोस्सनर इवेंजिलिकल चर्च छोटानागपुर एंड असम (जीइएल चर्च) को अपना नया नेतृत्व मिल गया है. मंगलवार को रांची के गोस्सनर कंपाउंड स्थित एचआरडीसी (HRDC) सभागार में आयोजित सेंट्रल काउंसिल की बेहद महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई. इस चुनाव में बिशप मार्शल केरकेट्टा ने एक बार फिर बाजी मारी और उन्हें लगातार दूसरी बार जीइएल चर्च के ‘मॉडरेटर’ के पद पर चुन लिया गया. खबर लिखे जाने तक डिप्टी मॉडरेटर के पद के लिए वोटों की गिनती और चुनावी प्रक्रिया जारी थी, जिसे लेकर चर्च के सदस्यों के बीच भारी उत्सुकता देखी गई. छह दिग्गज उम्मीदवारों के बीच था कड़ा मुकाबला जीइएल चर्च के इस लोकतांत्रिक चुनाव में चर्च के छह अनुभवी बिशप उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे. इनमें निवर्तमान मॉडरेटर बिशप मार्शल केरकेट्टा के अलावा, पूर्व डिप्टी मॉडरेटर बिशप मुरेल बिलुंग, बिशप सीमांत तिर्की, बिशप मोहन लाल सिंह मंजर, बिशप दीपक केरकेट्टा और बिशप पावेल लुगुन शामिल थे. चुनावी मैदान में इन कद्दावर नामों की मौजूदगी ने मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया था. मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेंट्रल काउंसिल के कुल 44 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. महासचिव ने की परिणामों की घोषणा वोटों की गिनती पूरी होने के बाद जीइएल चर्च के महासचिव ईश्वर दत्त कंडुलना ने आधिकारिक तौर पर परिणामों की घोषणा की. बिशप मार्शल केरकेट्टा के नाम की घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. चर्च के पदाधिकारियों और परिषद के सदस्यों ने इसे चर्च की स्थिरता और विकास के लिए एक सकारात्मक कदम बताया. चुनाव परिणाम आने के बाद नवनिर्वाचित मॉडरेटर को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई देने वालों का तांता लग गया. बुधवार को क्राइस्ट चर्च में होगा भव्य पद ग्रहण समारोह चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें बुधवार को होने वाले औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं. नवनिर्वाचित मॉडरेटर और डिप्टी मॉडरेटर का पद ग्रहण समारोह बुधवार, 29 अप्रैल को सुबह सात बजे मेन रोड स्थित ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च में आयोजित किया जाएगा. इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विशेष प्रार्थना सभा होगी, जिसमें चर्च के विभिन्न अंचलों से आए पादरी, प्रचारक और मसीही समुदाय के लोग शामिल होंगे.

कैबिनेट ने 53 हजार करोड़ की योजनाओं को जारी रखने का लिया फैसला, PWD की 26,311 करोड़ की परियोजनाएं रहेंगी सक्रिय

भोपाल  मोहन कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां और संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010 को वापस लेने का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही बैठक में खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से शेष बची 7.73 लाख मीट्रिक टन धान के ई-ऑक्शन के निराकरण पर चर्चा कर स्वीकृति दी गई। साथ ही भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी मिली है। कैबिनेट ने कुल 53 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में कुल 21 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग की 26,311 करोड़ रुपए की पांच परियोजनाओं को जारी रखने पर सहमति बनी है। साथ ही शाजापुर जिले की लखुंदर सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और शाजापुर जिले में 9 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। कैबिनेट के अन्य फैसलों में कर्मचारियों और अधिकारियों को कोर्ट के निर्णय के बाद पेंशन व वेतनमान देने, साथ ही सोलहवें वित्त आयोग से कराए जाने वाले कार्यों की मंजूरी भी शामिल है। कैबिनेट में इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी     लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति।     लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में 134 पीजी सीट वृद्धि योजना के अंतर्गत 80 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति।     श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के अंतर्गत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार की 174 करोड़ रुपए पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति। लोक निर्माण विभाग की इन योजनाओं को जारी रखने की स्वीकृति     लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मरम्मत और सुधार कार्य समेत अन्य योजनाओं के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि तक काम जारी रखने का प्रस्ताव।     केंद्रीय सड़क अधोसंरचना निधि की योजनाओं को 16वें वित्त आयोग में जारी रखने का प्रस्ताव।     पीडब्ल्यूडी के एफ टाइप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास और गैर आवासीय भवनों की मरम्मत का काम 16वें वित्त आयोग से जारी रखने का प्रस्ताव।     16वें वित्त आयोग के अंतर्गत ही लोक निर्माण विभाग की भू अर्जन मुआवजा संबंधी योजा, भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन का भुगतान, मुख्य जिला मार्ग, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण का काम जारी रखने का प्रस्ताव।     उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के समक्ष दायर याचिका शकूर खान विरुद्ध एमपी शासन और अन्य में दायर अवमानना याचिका में शकूर खान को पेंशन देने का प्रस्ताव। इसी तरह संजय कुमार गुप्ता और अन्य 8 रिट याचिका के मामले में अमीन पद का वेतनमान स्वीकृत करने की अनुमति का प्रस्ताव भी हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मंजूर किया जाएगा। ये प्रस्ताव भी हुए मंजूर     पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2005 में संचालित दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले एमपी के ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रगृह योजना जारी रखने का प्रस्ताव। इसमें अब 10 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे।     आंगनबाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था के लिए 38901 आंगवनबाड़ी भवनों को मंजूरी। 80 करोड़ रुपए सरकार ने मंजूर किए।     खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से शेष बची धान 7.73 लाख मीट्रिक टन के ई-ऑक्शन के निराकरण पर चर्चा।     मध्य प्रदेश आतंकवादी और उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 को वापस लेने के प्रस्ताव का अनुमोदन।     भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी।

श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में तेज़ कदम, ई-श्रम साथी एप से मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस, “ई-श्रम साथी” एप लॉन्च श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में तेज़ कदम, “ई-श्रम साथी” एप से मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी :  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के कार्यों और योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमला पूरी प्रतिबद्धता के साथ श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने  कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। इस अवसर पर श्रम मंत्री लखन देवांगन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिकों के हित में व्यापक पहल हुई है और चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों को घर बैठे रोजगार की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मेहनत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, इसलिए उनके योगदान का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में श्रम विभाग की संरचना, श्रमायुक्त संगठन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा तीनों प्रमुख मंडलों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रदेश के सभी जिलों में श्रम कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ दोनों सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, सियान सहायता, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता, आवास सहायता योजना, निःशुल्क कोचिंग सहायता तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना प्रमुख हैं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6वीं में हर वर्ष 100 बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 31 जिलों के 95 विद्यार्थी 8 जिलों के 14 विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिसे इस शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल द्वारा भी विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।  श्रम कल्याण मंडल के तहत 14 योजनाएं संचालित हैं और वर्ष 2025-26 में 5.21 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना, श्रम सम्मेलन कार्यक्रम और मोबाइल कैंप के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री साय ने ई-केवाईसी के माध्यम से हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 55 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया।  इस अवसर पर मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, श्रम विभाग सचिव हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।

किसान आंदोलन पोस्ट विवाद: कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि केस में सुनवाई आगे बढ़ी

बठिंडा बठिंडा अदालत में मानहानि के एक मामले में सांसद कंगना रनोट पेशी हुईं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की है। इस दौरान कंगना के पासपोर्ट जब्त करने के मुद्दे पर भी बहस हो सकती है। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना को आज बठिंडा हालांकि, सुरजीत सिंह फूल खराब सेहत के कारण कोर्ट में पेश नहीं हो सके। माता महिंदर कौर के वकील रघुवीर सिंह बहनीवाल ने बताया कि कंगना रनोट के वकील ने पहले सुरजीत सिंह की गवाही कराने की बात कही थी। सुरजीत सिंह की अनुपस्थिति के कारण, कंगना रनोट के वकील ने माता महिंदर कौर और एक अन्य गवाह से सवाल-जवाब के लिए अगली तारीख मांगी। किसान आंदोलन से जुड़ा है मामला यह मामला किसान आंदोलन से जुड़ा है। दिल्ली में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के दौरान, बठिंडा के गांव बहादुरगढ़ जंडिया निवासी बेबे महिंदर कौर ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर महिंदर कौर के खिलाफ एक पोस्ट डाली थी। महिलाएं धरने पर 100-100 रुपये लेकर आती हैं इस पोस्ट में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि ऐसी महिलाएं धरने पर 100-100 रुपये लेकर आती हैं। इसके बाद से महिंदर कौर ने कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। कुछ समय पहले कंगना रनौत ने सुप्रीम कोर्ट में इस केस को खत्म करने की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए उन्हें बठिंडा कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था।  

भगवंत मान सरकार का बड़ा प्लान: फिनलैंड-नीदरलैंड मॉडल से बदलेगा पंजाब

 चंडीगढ़  वैश्विक स्तर की तकनीक और नीतियों को अपनाकर पंजाब को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। हाल ही में यूरोपीय देशों के दौरे से लौटे प्रतिनिधिमंडल के अनुभवों के आधार पर सरकार अब खेती, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्रों में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस का मकसद कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर शिक्षा गुणवत्ता और राज्य में निवेश को आकर्षित करना। मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार पत्रकारों से बातचीत में बताया कि फिनलैंड और नीदरलैंड में आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को पूरी तरह बदल दिया गया है। पालीहाउस और ग्लास हाउस जैसी तकनीकों से एक स्क्वेयर मीटर में उत्पादन 5-6 किलो से बढ़कर 80-100 किलो तक पहुंच गया है, जबकि पानी की खपत बेहद कम और केमिकल का इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है। सरकार अब इस मॉडल को पंजाब में भी बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है। शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी पाया गया, जहां शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी तर्ज पर पंजाब में भी टीचर ट्रेनिंग और स्कूल सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने जानकारी दी कि जिन विद्यार्थियों ने हाल ही में ‘जेईई मेन’ (जेईई) परीक्षा पास की है, उन्हें बुधवार को मोहाली स्थित विकास भवन में सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद रहेंगे और छात्रों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाएंगे। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि दौरे के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के साथ सार्थक बातचीत हुई है। एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं बनी हैं। कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार तेज मंजूरी प्रक्रियाऔर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इसके अलावा 18 मई को अगला डेलिगेशन विदेश भेजा जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। अब तक 200 से अधिक लोग ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से पंजाब में आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

शिक्षा कैलेंडर अपडेट: राजस्थान में 35 दिन की गर्मी छुट्टी, पढ़ाई के दिन बढ़े

 जयपुर अगर आप राजस्थान के स्कूलों में पढ़ते हैं या पढ़ाते हैं, और गर्मियों की लंबी छुट्टियों में नानी के घर जाने या पहाड़ों पर घूमने की लंबी प्लानिंग कर रहे हैं… तो थोड़ा रुक जाइए. क्योंकि इस बार आपकी छुट्टियों पर सरकार ने थोड़ी 'कैंची' चला दी है. हाल ही में शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-2027 के लिए शिविरा पंचांग (Academic Calendar 2026-27) जारी कर दिया है. सबसे बड़ी अपडेट यह है कि इस बार ग्रीष्मावकाश यानी गर्मियों की छुट्टियां 17 मई, 2026 से शुरू होकर 20 जून, 2026 तक ही रहेंगी. यानी, जहां पहले 40 से 45 दिनों तक (30 जून तक) की लंबी छुट्टियां मिलती थीं, वहीं अब बच्चों को चिलचिलाती गर्मी में महज 35 दिन ही घर पर एंजॉय करने को मिलेंगे. आखिर सरकार ने छुट्टियां कम क्यों कीं? इसके पीछे दो बहुत बड़े और दिलचस्प कारण हैं. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने हाल ही में जयपुर के शिक्षा संकुल में शिक्षक संगठनों के साथ एक अहम बैठक की. फोकस एक ही था- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बच्चों की सुरक्षा. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार शिक्षण दिवसों (Teaching Days) को बढ़ाकर 214 दिन कर दिया गया है. जब पढ़ाई के दिन बढ़ेंगे, तो जाहिर सी बात है कि छुट्टियों के दिन तो कम होंगे ही. दूसरा कारण 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को माना जा रहा है जो हर साल 21 जून को मनाया जाता है. पहले होता यह था कि स्कूल 30 जून तक बंद रहते थे, और योग दिवस के लिए टीचर्स और स्टूडेंट्स को छुट्टियों के बीच में एक दिन के लिए स्कूल आना पड़ता था. यह किसी सिरदर्द से कम नहीं था. लेकिन अब मास्टरस्ट्रोक देखिए. छुट्टियां 20 जून को ही खत्म हो रही हैं. यानी 21 जून को स्कूल खुलेंगे और सभी लोग एक साथ मिलकर बिना किसी छुट्टी कैंसल होने की टेंशन के, आराम से योगाभ्यास कर सकेंगे. 46 डिग्री के पार पहुंचा पारा, जैसलमेर सबसे गर्म राजस्थान के टेम्परेचर की बात करें तो इस वक्त जैसलमेर सबसे गर्म है. यहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है. इसी तरह बाड़मेर में 46.0 डिग्री, कोटा में 45.7 डिग्री और चूरू में तापमान 45.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. IMD जयपुर के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों तक पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) चलने की चेतावनी जारी की गई है, जिसके चलते उत्तर-पश्चिमी जिलों में कुछ स्थानों पर पारा 44 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है. हालांकि पश्चिमी और उत्तरी भागों में आज दोपहर बाद मेघगर्जन के साथ धूलभरी आंधी चल सकती है और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी होने के आसार हैं, जिससे यहां गर्मी से मामूली राहत मिल सकती है. सरकार ने बदला स्कूलों का बदला समय इस भीषण गर्मी को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है. जयपुर, कोटा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर और दौसा में बच्चों को राहत देने के लिए सुबह की शिफ्ट में कक्षाएं चलाई जा रही हैं. कोटा में 12वीं कक्षा तक का समय सुबह 7:30 से 12:30 बजे तक कर दिया गया है. वहीं, दौसा में 8वीं कक्षा तक के लिए 24 अप्रैल से 2 मई तक समय सुबह 7:30 से 12:00 बजे रहेगा. जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ में भी 8वीं तक के बच्चों का समय सुबह 7:30 से 12:00 बजे तक तय किया गया है. लू से बचने के लिए राजस्थान सरकार की गाइडलाइन राजस्थान सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस भीषण लू में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है. लू से बचाव के लिए आमजन से कहा गया है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें. जरूरी होने पर हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें, और सिर को हमेशा छाते या कपड़े से ढककर रखें. पर्याप्त पानी पिएं. ओआरएस (ORS), लस्सी, छाछ और नींबू पानी का सेवन बढ़ाएं. शराब, चाय, कॉफी और सोडा जैसे पेय पदार्थों से परहेज करें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं. बच्चों और पालतू जानवरों को भूलकर भी बंद खड़ी गाड़ी में अकेला न छोड़ें, अंदर का तापमान तेजी से बढ़ना जानलेवा साबित हो सकता है. चक्कर आने, कमजोरी या बेहोशी (हीट स्ट्रोक) की स्थिति में मरीज के शरीर को गीले कपड़े से पोंछें और तुरंत टोल-फ्री नंबर 108 या 112 पर कॉल करें.

ग्रामीण इलाकों में आधुनिक हेल्थकेयर, एक छत के नीचे मिल रहीं सभी सुविधाएं

रांची झारखंड के रांची जिले के अनगड़ा के लोगों के लिए शालिनी अस्पताल अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद बन गया है. यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और नए चिकित्सा उपकरणों से लैस है और लोगों को सुरक्षित, भरोसेमंद और अच्छी इलाज की सुविधा दे रहा है. अब लोगों को इस बात की जरूरत नहीं है कि अच्छा इलाज सिर्फ बड़े शहरों में ही मिलता है. इस अस्पताल की वजह से अब ग्रामीण और आसपास के मरीजों को छोटे-बड़े इलाज के लिए दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा. एक ही छत के नीचे मिल रहीं कई अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में माताओं और बच्चों के इलाज की खास सुविधा है. यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी की जाती है. इसके साथ ही खून की जांच, एक्स-रे, ईसीजी और सामान्य सर्जरी जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मरीजों को मिल रही हैं. नेत्र चिकित्सा में बनाई नई पहचान, फेको विधि से हो रही सर्जरी शालिनी अस्पताल ने आंखों के इलाज में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहां हर साल हजारों मरीजों का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया जाता है. अभी यहां रोजाना आधुनिक ‘फेको’ विधि से सर्जरी हो रही है. यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है, इसमें टांके नहीं लगते, समय कम लगता है और दर्द भी बहुत कम होता है. मरीजों को स्क्रीन पर दिखाई जाती है आंखों की स्थिति नई ओपीडी मशीनों के बाद मरीजों को उनकी आंखों की हालत स्क्रीन पर साफ दिख जाती है. इससे वे खुद समझ पाते हैं कि मोतियाबिंद कैसे बढ़ रहा है और समय पर इलाज क्यों जरूरी है. सर्जरी के दौरान उन्नत लेंस लगाए जाते हैं, जिससे मरीजों की नजर पहले से ज्यादा साफ और बेहतर हो जाती है. मरीजों को मिल रहे हैं बेहतर परिणाम: राणा विकास अस्पताल के प्रबंधक श्री राणा विकास ने बताया कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है. अब मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं और संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को उसके घर के पास ही अच्छी और उच्च गुणवत्ता वाली इलाज सुविधा मिले. अस्पताल की टीम हर मरीज की देखभाल पूरी जिम्मेदारी और ध्यान से करती है.

स्टिल्ट प्लस फोर केस: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक से इनकार

चंडीगढ़ स्टिल्ट प्लस फोर नीति को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला देते हुए लोगों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायधीश जस्टिस शील नागू व जस्टिस संजीव बैरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि रोक का आदेश केवल गुरुग्राम तक सीमित है। अन्य जिलों पर यह लागू नहीं होगा। यानी हरियाणा सरकार की स्टिल्ट प्लस फोर नीति के तहत गुरुग्राम को छोड़कर बाकी हरियाणा में चार मंजिल से ज्यादा के भवन का निर्माण हो सकेगा। साथ ही पीठ ने गुरुग्राम समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में अतिक्रमण और निर्माण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर रोक से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। जस्टिस नागू ने रोक हटाने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर कहा-आप लोग गुरुग्राम में सुधार चाहते हैं या नहीं। हाईकोर्ट ने यह आदेश दो अप्रैल को जारी किए गए अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुरुग्राम की बिगड़ती शहरी स्थिति पर गंभीर चिंता भी जताई। कहा कि फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण के कारण लोगों के पास चलने तक की जगह नहीं बची है। कोर्ट ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए टिप्पणी की कि वहां लोग कॉलोनियां छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें चलने के लिए जगह नहीं मिल रही। गुरुग्राम पहले ही बढ़ती आबादी के दबाव से चरमराने की कगार पर है इसलिए फिलहाल कोई राहत देना संभव नहीं है। सरकार की नीति की न्यायिक समीक्षा होगी हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की व्यापक नीति अभी भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगी और मामले की सुनवाई जारी रहेगी। जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा कोर्ट जनहित याचिका में स्टिल्ट प्लस फोर नीति पर रोक लगाने की मांग की गई है। याची पक्ष ने तर्क दिया है कि विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए चार फ्लोर बनाने की अनुमति दे दी गई। सरकार को पहले विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए थी। कोर्ट ने माना कि बिना पर्याप्त आधारभूत संरचना के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देने से शहर पर बोझ बढ़ेगा। इससे सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक, जलभराव व अन्य नागिरक समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।