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आरक्षण तय करने की प्रक्रिया बदली, राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किया संशोधित

 मधुबनी बिहार में प्रस्तावित पंचायत आम निर्वाचन 2026 की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए ‘प्रपत्र-1’ के प्रारूप प्रकाशन की तिथि में बदलाव कर दिया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रकाशन 27 अप्रैल 2026 को होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से अब इसे 4 मई 2026 को जारी किया जाएगा। आयोग ने इसके साथ ही आरक्षण निर्धारण से संबंधित पूरी संशोधित समय-सारणी भी जारी कर दी है। आरक्षण तय करने का आधार: क्या है ‘प्रपत्र-1’? ‘प्रपत्र-1’ पंचायत चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राजस्व ग्रामवार आबादी का विस्तृत ब्योरा शामिल रहता है। इसी के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाता है। अर्थात किस वार्ड या पंचायत की सीट महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी, यह पूरी तरह इसी प्रपत्र पर निर्भर करता है। ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों के लिए यह दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभाता है। संशोधित कार्यक्रम एवं प्रमुख तिथियां: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ेगी-     4 मई 2026: ‘प्रपत्र-1’ का प्रारूप प्रकाशन     4 मई से 18 मई 2026: दावा और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि     4 मई से 22 मई 2026: प्राप्त आपत्तियों का निपटारा     11 मई से 29 मई 2026: अपील वादों की सुनवाई     5 जून 2026: ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन     9 जून 2026: जिला गजट में अंतिम आंकड़ों का प्रकाशन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां केवल जनसंख्या संबंधी तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी प्रकार की आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। कहां उपलब्ध होगा प्रपत्र-1: आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रकाशन के स्थान भी निर्धारित किए हैं। यथा ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए संबंधित ग्राम पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय, जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड, अनुमंडल तथा जिला पदाधिकारी कार्यालय साथ ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा अधिकारियों को सख्त निर्देश: राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि डाटा प्रविष्टि और सत्यापन कार्य को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। संशोधित कार्यक्रम के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर ‘प्रपत्र-1’ का प्रकाशन सुनिश्चित करने तथा पूरी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है। संभावित उम्मीदवारों में बढ़ी सक्रियता: तिथि में बदलाव के बावजूद जिले में चुनावी तैयारियों के लिए जुटे संभावित उम्मीदवारों की नजर अब 4 मई पर टिक गई है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी पंचायत या वार्ड की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। जिले से लेकर प्रखंड व पंचायत के राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव के बाद सरगर्मी तेज हो गई है। कई संभावित दावेदार अब अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। बता दें कि बिहार में वर्ष 2026 के अंत तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। ऐसे में ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन होते ही आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और इसके साथ ही चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।  

पंजाब के बरनाला में हाई अलर्ट, ट्राइडेंट प्लांट के नजदीक संदिग्ध चाइनीज ड्रोन गिरा

बरनाला. जिले के ट्राइडेंट ग्रुप के धौला प्लांट में मंगलवार की सुबह एक रहस्यमयी ड्रोन गिरने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सुबह करीब साढ़े पांच बजे हुई इस घटना ने न केवल प्लांट प्रबंधन को चौकन्ना कर दिया बल्कि जिला पुलिस भी तत्काल हरकत में आ गई। इस घटना को इसलिए भी अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इससे महज कुछ दिन पहले ही ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक राजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी का दामन छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। मंगलवार सुबह लगभग 5:30 बजे ट्राइडेंट ग्रुप के धौला प्लांट की पेपर डिवीजन के वुड फाइबर लाइन क्षेत्र में कर्मचारी अपनी नियमित ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी नजर आसमान से नीचे गिरती एक अनजान वस्तु पर पड़ी। कर्मचारियों ने फौरन अपने शिफ्ट इंचार्ज को इसकी सूचना दी। शिफ्ट इंचार्ज ने प्लांट के एडमिन हेड रूपिंदर गुप्ता ने तुरंत मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना एसएसपी मोहम्मद सरफराज आलम को दी। डीएसपी तपा जसकरण सिंह और थाना रूड़ेके के प्रभारी इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह सहित साइबर क्राइम की विशेष टीम जांच में जुट गई हैं। चाइनीज ड्रोन होने का शक, फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा एसएसपी मोहम्मद सरफराज आलम ने बताया कि पहली नजर में यह ड्रोन चाइनीज निर्मित प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इस किस्म के साधारण ड्रोन आमतौर पर अमेजॉन जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दो से तीन हजार रुपये में आसानी से उपलब्ध होते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस इस मामले को पूरी गंभीरता और सतर्कता से ले रही है। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन को ड्रोन फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा जहां इसकी विस्तृत तकनीकी जांच होगी। फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्रोन में कैमरा या कोई अन्य उपकरण लगा था या नहीं और इसे किस उद्देश्य के लिए उड़ाया जा रहा था। राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ कर देखा जा रहा है मामला ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक राजेंद्र गुप्ता ने महज कुछ दिन पहले ही आम आदमी पार्टी को छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इस राजनीतिक पाला बदल के ठीक दो दिन बाद उनकी फैक्ट्री परिसर में एक अज्ञात ड्रोन का मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।

धर्म प्रचार पर बवाल: बस्तर में पास्टर के साथ मारपीट, बाहरी परिवार को लेकर तनाव

जगदलपुर. बस्तर थाना क्षेत्र के रेटावंड गांव में एक परिवार को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा है कि ओडिशा से आया यह परिवार कुछ समय से गांव में रह रहा था। ग्रामीणों ने परिवार के गांव में रहने के साथ पास्टर पर धर्म प्रचार करने का आरोप लगाया, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों और पास्टर पक्ष के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट की नौबत आ गई। घटना के बाद मामला बस्तर थाना पहुंचा, जहां विशेष समुदाय के लोगों ने आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई। समुदाय की ओर से परिवार के साथ मारपीट, गाली-गलौज और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी व्यक्ति गांव में स्थायी रूप से न रहे और गांव में धर्म प्रचार जैसी गतिविधियां बंद हों, इसी मांग को लेकर विरोध किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गांव के प्रमुखों, सरपंच, कोटवार और दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश दी। बैठक में सहमति बनी कि संबंधित परिवार के बच्चों की परीक्षा समाप्त होने के बाद परिवार गांव छोड़ देगा। फिलहाल मामला शांत हो गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की हिदायत दी है।  

सुकमा: जहाँ सड़कों का अंत होता है, वहीं से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण

सुकमा जहाँ सड़कें खत्म होती हैं, वहाँ से शुरू होती है उम्मीद की नई किरण मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है रायपुर छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है। दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार            इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर              हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया। आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो। आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम             छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।  जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव            अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।             पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता का किया बहिष्कार, केजरीवाल की तरह खत लिखकर किया ऐलान

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया भी अरविंद केजरीवाल की राह पर चल पड़े हैं. दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता का अब मनीष सिसोदिया ने भी बहिष्कार कर दिया है. मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अब वह उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे. न ही उनकी तरफ से कोई वकील पेश होगा. इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिख बताया था कि वह अब कभी उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।  मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी और उसमें कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथों में है. मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है. अब मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.’ यहां ध्यान देने वाली बात है कि अरविंद केजरीवाल ने भी अपनी चिट्ठी में कहा था कि उन्हें अब न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वे न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे।  अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में क्या कहा था? अपने पत्र में अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है. उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला देते हुए कहा कि अब वे कानूनी लड़ाई के बजाय नैतिक और वैचारिक विरोध का रास्ता अपनाएंगे. अरविंद केजरीवाल ने यह भी संकेत दिया कि उनका यह कदम न्याय व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों के समर्थन में है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यदि जस्टिस स्वर्णकांता कोई फैसला सुनाती हैं, तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार वे अपने पास सुरक्षित रखेंगे।  जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में क्या हुआ था गौरतलब है कि इससे पहले 20 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति को खुद को अलग करने की मांग की थी. अपना निर्णय सुनाते हुए जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि याचिका पर विचार किए बिना सुनवाई से पीछे हट जाना एक आसान विकल्प होता, किंतु उन्होंने संस्थागत शुचिता और गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा।  जस्टिस स्वर्णकांता ने क्या कहा था? जस्टिस स्वर्णकांता ने उल्लेख किया कि जब उन्होंने अपना फैसला पढ़ना शुरू किया, तो न्यायालय कक्ष में पूर्ण निस्तब्धता (सन्नाटा) छा गई थी. न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि उनके समक्ष यह केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं था, बल्कि एक ऐसी चुनौती थी जिसने न्यायाधीश और न्यायिक संस्था, दोनों को ‘परीक्षण’ की कसौटी पर खड़ा कर दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात को दोहराते हुए कहा था कि जब तक ठोस सबूतों से खंडन न हो जाए, न्यायाधीश की निष्पक्षता को मान लिया जाता है और किसी वादी की महज आशंका या व्यक्तिगत धारणा के आधार पर न्यायाधीश को मामले से अलग नहीं किया जा सकता है।  न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी वादी को ऐसी स्थिति उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे न्यायिक प्रक्रिया का स्तर गिरे. झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर, हजार बार दोहराया जाए, सच नहीं बनता. अरविं केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पक्षपात के दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है, जिनमें अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी या उनके परिवार के सदस्यों की पेशेवर व्यस्तता से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।   

पंचायत चुनाव की तैयारी तेज: बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या डेटा प्रकाशन 4 मई को किया

पटना बिहार में होने वाले आगामी पंचायत आम निर्वाचन की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार होने वाले प्रपत्र-1 यानी राजस्व ग्रामवार जनसंख्या विवरण के प्रकाशन की पूर्व निर्धारित तिथि में बदलाव कर दिया है। अब इसका प्रारूप प्रकाशन 27 अप्रैल को नहीं बल्कि 04 मई को किया जाएगा। इस कारण से लिया गया निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हए बताया कि किसी अपरिहार्य कारणों से समय-सारणी में संशोधन किया गया है। नए शेड्यूल के तहत अब निर्वाचन क्षेत्रों के लिए जनसंख्या आधारित आंकड़ों का मिलान और सत्यापन नए सिरे से तय समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि डाटा प्रविष्टि और इसके सत्यापन का कार्य चुनावी पारदर्शिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। दावा और आपत्ति के लिए मिलेगा समय राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि प्रपत्र-1 के प्रारूप प्रकाशन के बाद यदि किसी नागरिक या मतदाता को इसके आंकड़ों को लेकर कोई शिकायत है, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्ति दर्ज कराने की तिथि 04 मई से 18 मई तक निर्धारित की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग का स्पष्ट रूप से कहना है कि आपत्ति का आधार केवल वर्ष 2011 की जनसंख्या ही मान्य होगी।  राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्धारित 4 मई की समय-सीमा के भीतर प्रपत्र-1 का प्रकाशन सुनिश्चित करें ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई और विलंब न हो। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: सीएम सम्राट चौधरी कब करेंगे मंत्रिमंडल विस्तार? 'नई विकास टीम' पर मंथन जारी; विजय सिन्हा का क्या होगा? विशेष जानकारी कहाँ से लें? आम जनता की सुविधा के लिए आयोग ने प्रकाशन स्थलों की सूची भी जारी की है। पंचायत एवं पंचायत समिति सदस्य पद के लिए ग्राम पंचायत कार्यालय और प्रखंड (Block) कार्यालय बनाया गया है। वहीं जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि किसी भी तरह की जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.sec.bihar.gov.in से भी जानकारी ली जा सकती है। ऑनलाइन सुविधा और टोल-फ्री नंबर राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाताओं के लिए इस बार तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। नागरिक आयोग की वेबसाइट पर जाकर न केवल प्रपत्र-1 देख सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन दावा या आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की सहायता, सुझाव या शिकायत के लिए आयोग के टोल-फ्री नंबर 1800-3457-243 पर संपर्क किया जा सकता है।  

दिल्ली में अब बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा फ्यूल

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदुषण बड़ी समस्या बन चुकी है। सालों से इस समस्या पर काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है। दरअसल, अब सरकार ने इसे लेकर एक सख्त कदम उठाया है। दरअसल, गाड़ियों से जुड़ा एक नया सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली के अंदर फ्यूल पंप केवल उन्हीं गाड़ियों को फ्यूल देंगे, जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट होगा जरूरी होगा। जिन गाड़ियों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें न केवल पेट्रोल, डीजल या CNG देने से मना कर दिया जाएगा, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अब किसी भी तरह के फ्यूल के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इस नए कदम को प्रदूषण-रोधी एक स्थायी पहल बना दिया गया है। इसका मतलब है कि ये जांचे पूरे साल चलती रहेंगी। अगर आपका PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो इससे आपको देरी का सामना करना पड़ सकता है या फिर आपके इंश्योरेंस क्लेम को भी खारिज किया जा सकता है। कई इंश्योरेंस कंपनियां प्रदूषण उत्सर्जन के नियमों का पालन करने की उम्मीद करती हैं। इसके बिना क्लेम मिलने में देरी हो या फिर क्लेम को पूरी तरह से खारिज भी किया जा सकता है। परिवहन विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जैसी एजेंसियां इन नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आपकी गाड़ी के पास वैलिड PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं है और आप उसे लेकर पास के पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो इसके नतीजे आम जुर्माने से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' के तहत, अधिकारी मौके पर ही चालान काट देंगे। यह काम या तो कोई ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कर सकता है या फिर किसी ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। जुर्माने की रकम 10,000 रुपए या उससे ज्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे बनवाएं PUC सर्टिफिकेट PUC सर्टिफिकेट की मदद से ये पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना पॉल्युशन कर रही है। दिल्ली-NCR में आपके पास ये सर्टिफिकेट होना बहुत जरूरी है, क्योंकि पॉल्युशन को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस उन गाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखती है जो पॉल्युशन फैलाती हैं। PUC सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाता है जब PUC सेंटर पर चेकिंग के दौरान गाड़ी तय सीमा के दायरे में पाई जाए। अगर आपकी गाड़ी प्रदूषण करती है, तो गाड़ी की रिपेयरिंग या ट्यूनिंग कराने के लिए कहा जाता है। ट्रांसपोर्ट विभाग ने दिल्‍ली के कई पेट्रोल पंप और वर्कशॉप पर पॉल्युशन चेकिंग सेंटर की लिस्ट जारी की है। लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें। PUC सर्टिफिकेट को लेकर कानून एक समय के बाद कार का PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपके पास PUC सर्टिफिकेट नहीं है, या फिर एक्सपायर हो चुका है तो मोटर वीइकल्‍स एक्ट, 1988 की धारा 190(2) के तहत चालान काटा जाता है। इसमें 10,000 रुपए का जुर्माना या 6 महीने की जेल या फिर दोनों हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट विभाग अपनी तरफ से PUC सर्टिफिकेट ना होने पर गाड़ी के ओनर का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड भी कर सकता है। यदि PUC सर्टिफिकेट होने के बाद भी गाड़ी पॉल्युशन ज्यादा कर रही है, तब 7 दिन के अंदर नया PUC सर्टिफिकेट लेना होगा।

टॉपर देने वाला स्कूल भी जांच में कोडरमा में शिक्षा विभाग की सख्ती, शिक्षकों से स्पष्टीकरण

कोडरमा  झारखंड बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का रिजल्ट इस बार काफी खराब रहा है. पिछले साल जिला पहले नंबर पर था, लेकिन इस बार 20वें स्थान पर पहुंच गया है. इससे कई सवाल उठ रहे हैं. खासकर सालभर चलाए गए प्रोजेक्ट इम्पैक्ट, प्रोजेक्ट रेल और आवासीय कोचिंग जैसी योजनाएं भी सवालों में हैं. शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसी को गंभीर मानते हुए विभाग ने 40 स्कूलों के प्रिंसिपल, प्रभारी प्रिंसिपल और जिन विषयों में छात्र फेल हुए, उन शिक्षकों से जवाब मांगा है. सभी को दो दिन के अंदर बताना होगा कि उनके स्कूल का रिजल्ट 100% क्यों नहीं रहा. अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा जिला शिक्षा पदाधिकारी अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा गया है कि वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का परीक्षाफल काफी निराशाजनक रहा है. पूर्व में कई बार बैठक और वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उपायुक्त और मेरे स्तर से शत प्रतिशत परिणाम हासिल करने को लेकर कई निर्देश दिया गया था, लेकिन आप लोगों के द्वारा कार्य में शिथिलता बरती गई है जिसके परिणाम स्वरूप कोडरमा जिले में 93़86 प्रतिशत छात्र छात्राएं उतीर्ण हुए हैं. जो राज्य के औसत प्रतिशत से भी कम है. पत्र में आगे कहा गया है कि आखिर किस परिस्थिति में आपके विद्यालय का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शत-प्रतिशत नहीं रहा. अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ तो अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी. बता दें कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में कोडरमा जिले से 12,214 छात्र छात्रायें शामिल हुए थे ,जिसमे से 11,465 सफल रहे ,जबकि 749 असफल रहे़ उतीर्ण करने वालों में प्रथम श्रेणी से 6196, द्वितीय श्रेणी से 4513 और तृतीय श्रेणी से 756 छात्र-छात्राएं शामिल हैं. जिला टॉपर देने वाले स्कूल के प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण बताया जाता है कि शिक्षा विभाग ने जिन 40 स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक-शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा है उसमें इस वर्ष जिला टॉपर देने वाला विद्यालय भी शामिल है़. इस वर्ष के परिणाम में उत्क्रमित उच्च विद्यालय सोनपूरा जयनगर की राजनंदिनी जिला टॉपर बनी थी, जबकि रानी जिले में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस विद्यालय से परीक्षा देने वाले कुल 130 विद्यार्थियों में दो अनुतीर्ण हो गए़. ऐसे में शत प्रतिशत परिणाम नहीं रहने पर विभाग ने प्रधानाध्यापक और अनुतीर्ण विषय के शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है. किसी में एक-दो तो किसी में 25-28 बच्चे हो गए हैं फेल जानकारी सामने आई है कि जिले के कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनके 1 या 2 बच्चे अनुर्तीर्ण हुए हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जहां से परीक्षा देने वाले कुल विद्यार्थियों में 25 से 28 की संख्या में विद्यार्थी अनुतीर्ण हो गए हैं. हालांकि, इन विद्यालयों से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी ज्यादा है. इनसे मांगा गया है स्पष्टीकरण सीएच प्लस टू विद्यालय झुमरीतिलैया, गांधी उच्च विद्यालय झुमरीतिलैया, राजकीयकृत 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गझंडी, खरकोटा, इंदरवा देहाती, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय पथलडीहा, डुमरडीहा, मेघातरी, इंदरवा देहाती, कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय, कोडरमा, सर्वोदय 2 उच्च विद्यालय मरकच्चो, परियोजना 2 उच्च विद्यालय देवीपुर, परियोजना बालिका उच्च विद्यालय मरकच्चो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय जगदीशपुर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय अम्बाडीह, सिमरिया, योगिडीह, राज्य सम्पोषित 2 उच्च विद्यालय बासोडीह, परियोजना 2 उच्च विद्यालय, मीरगंज, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पोखरडीहा, राजाबर, पचाने, उत्क्रमित उच्च विद्यालय ढाब, बच्छेडीह, लक्ष्मीपुर, जानपुर, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय मसमोहना, बेहराडीह, ढुब्बा, रामेश्वर मोदी महादेव मोदी 2 उच्च विद्यालय, चंदवारा, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय ढाब, जयपुर कांको, उत्क्रमित उच्च विद्यालय उरवां, जौंगी, विरसोडीह, हरणो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय बेंदी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गोदखर और सोनपुरा.

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 54 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द, वापस होंगे तैनात

रांची. झारखंड पुलिस के तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में प्रशासनिक दृष्टिकोण से धनबाद से हटाए गए 54 पुलिसकर्मी वापस होंगे। हटाए गए पुलिसकर्मियों की याचिका डब्ल्यूपी (एस) नंबर 1781/2025 में 16 अप्रैल 2026 को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने तत्कालीन स्थानांतरण आदेश को रद करते हुए उक्त आदेश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि उक्त के आलोक में तत्काल कार्रवाई करें। पुलिसकर्मियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि बिना किसी आरोप के प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण गलत है। सामान्य स्थानांतरण व प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण में अंतर होता है। सामान्य स्थानांतरण में जिस जिले से स्थानांतरित हुए, उसी जिले में वापसी संभव है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण मतलब अनुशासनहीनता के आरोप में स्थानांतरण। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण के लिए पुलिस मैनुअल में नियम है कि इसे किसी भी परिस्थिति में निरस्त नहीं किया जा सकता है। जिस पर यह लगता है, उसे दूसरे जिले में ही स्थानांतरित किया जा सकता है। इस स्थिति में उनकी उसी जिले में पुन: वापसी नहीं हो सकती है। हटाने व स्थानांतरण हुआ था आदेश जिन 54 पुलिसकर्मियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाया गया था, उन्हें हटाने संबंधित आदेश 24 फरवरी 2025 को हुआ था। वहीं, 11 मार्च 2025 को उन्हें स्थानांतरित करने संबंधित चिट्ठी जारी हुई थी। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण किए जाने के विरोध में ही इन पुलिसकर्मियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मई 2025 को तत्कालीन एसएसपी धनबाद की अनुशंसा पर कोयला क्षेत्र बोकारो के तत्कालीन डीआइजी सुरेंद्र कुमार झा ने 28 जनवरी को 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण प्रशासनिक दृष्टिकोण से करने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की थी। डीजीपी के आदेश पर सभी 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण हो भी गया था। डीजीपी के आदेश पर डीआइजी कार्मिक ने 24 फरवरी को प्रशासनिक दृष्टिकोण लगाते हुए सभी 54 पुलिसकर्मियों का विभिन्न जिला-इकाइयों में स्थानांतरण-पदस्थापन कर दिया था। इसके बाद एसडीपीओ बाघमारा की पांच मई को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर पर डीजीपी ने उन 54 पुलिसकर्मियों में से दो सिपाही संजय कुमार महतो व गौरव कुमार सिंह के स्थानांतरण को रद करते हुए पुन: धनबाद जिले में वापस कर दिया था। यह प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाने संबंधित पुलिस मैनुअल के विरुद्ध आदेश था। जिसका अन्य पुलिसकर्मियों ने विरोध किया था। स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता: एसोसिएशन झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत से दिए गए निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय उन 54 पुलिसकर्मियों के पक्ष में है, जिन्हें तत्कालीन धनबाद एसएसपी व तत्कालीन डीजीपी ने नियम विरुद्ध तरीके से प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देकर विभिन्न जिलों में स्थानांतरित कर दिया था। यह जीत उन कर्मियों के धैर्य की भी है। सभी मंचों पर संबंधित आग्रह के बावजूद कहीं सुनवाई नहीं हुई तो निराश होकर उक्त पुलिसकर्मियों ने स्थानांतरित जिला बल में योगदान दिया था। न्यायालय ने उनकी बातों को सुना और माना कि उक्त कर्मियों के साथ नियम संगत करवाई की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। पुलिस मुख्यालय से 24 फरवरी 2025 को निर्गत आदेश को निरस्त करते हुए न्यायालय ने सभी पुलिसकर्मियों को पुनः धनबाद जिला बल में योगदान कराने के लिए पुलिस मुख्यालय झारखंड को आदेशित किया है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन की ओर से भी निरंतर यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के नाम पर स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पुलिस हस्तक नियम (पुलिस मैनुअल) के प्रविधानों की अनदेखी कर, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों के पुलिस अधीक्षक तक बिना किसी ठोस आधार के पदाधिकारियों की पसंद-नापसंद के आधार पर स्थानांतरण की अनुशंसा कर देते हैं। सदस्यों को इसका खामियाजा परिवार के साथ-साथ उनके मनोबल पर भी पड़ता है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डीजीपी से मांग की है कि सभी जिलों के सक्षम पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका जारी की जाए, ताकि भविष्य में बिना भेदभाव के ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के तहत होने वाले स्थानांतरणों में ''पुलिस हस्तक नियम'' का कड़ाई से पालन हो सके।

बिल्डिंग नियमों में यू-टर्न, पंजाब सरकार ने 2025 के यूनिफाइड रूल्स किए खत्म

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पंजाब यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स 2025 को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, 15 दिसंबर 2025 को लागू किए गए इन नियमों को अब निरस्त कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद पहले से लागू नियम फिर प्रभावी हो गए हैं। इनमें पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बिल्डिंग रूल्स 2021 और पंजाब म्यूनिसिपल बिल्डिंग बायलाज 2018 शामिल हैं। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि ये नियम ऐसे लागू होंगे जैसे यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स कभी लागू ही नहीं हुए थे। सरकार ने यह भी कहा है कि इस बदलाव को लागू करने में यदि किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो उसे दूर करने के लिए अलग से आदेश जारी किए जा सकेंगे। यह अधिसूचना राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी की गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से शहरी विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स और बिल्डिंग मंजूरियों की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।