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शनि जयंती 2026: इस बार बन रहा है दुर्लभ संयोग, जानें तिथि और पूजा मुहूर्त

शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है, जिनकी पूजा विशेष रूप से जीवन में अनुशासन, धैर्य और कर्मों के फल से जुड़ी होती है। मान्यता है कि शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हुआ था, इसलिए हर वर्ष इसी दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनि जयंती पर तीन अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे यह पर्व और भी अधिक महत्वपूर्ण और फलदायी माना जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा और व्रत करने से जीवन के कष्टों में कमी आती है, साथ ही साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभाव भी कम होते हैं। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार इस वर्ष शनि जयंती की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व क्या है। शनि जयंती तिथि ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि आरंभ: 16 मई, शनिवार, प्रातः 05:11 से ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि समाप्त:  17 मई , देर रात  01:30 तक शनि जयंती के शुभ योग     पंचांग के अनुसार 16 मई को शनि जयंती के साथ शनिश्चरी अमावस्या का भी योग बन रहा है, जिससे यह दिन दोगुना फलदायी हो गया है। शनि अमावस्या पर व्रत और शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस बार का संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।     इसके अलावा इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग भी बन रहे हैं। सौभाग्य योग 15 मई दोपहर 2:21 बजे से 16 मई सुबह 10:26 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग शुरू होगा और यह 17 मई सुबह 6:15 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन दोनों योगों को शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। शनि जयंती के दिन भरणी नक्षत्र प्रातःकाल से लेकर शाम 5:30 बजे तक रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र और देवता यमराज माने जाते हैं, जबकि कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। इन सभी संयोगों के कारण इस वर्ष शनि जयंती का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। शनि जयंती पूजा मुहूर्त     शुभ-उत्तम मुहूर्त: प्रातः  07:12 से प्रातः  08:54 तक     चर-सामान्य मुहूर्त:  दोपहर 12:18 से दोपहर 02:00 तक     लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 02:00 से दोपहर 03:42 तक     अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 03:42 से सायं  05:23 तक     शनि जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त:  प्रातः 04:07 से  04:48  तक       अभिजीत मुहूर्त: 11:50 से दोपहर 12:45 तक शनि जयंती महत्व शनि जयंती का महत्व अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक माना जाता है। इस दिन भक्त विशेष रूप से शनि देव की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करके उनसे कृपा और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव अपनी माता छाया के साथ हुए अपमान से क्रोधित होकर अपने पिता सूर्य देव से विरक्त हो गए थे। बाद में उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान शिव से न्याय के देवता का स्थान प्राप्त किया और ग्रहों में विशेष स्थान एवं कर्मफल दाता का वरदान पाया। इसी कारण शनि देव को जीवन में अनुशासन, न्याय और कर्मों के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि शनि जयंती के दिन विधिवत पूजा करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।   शनि जयंती पूजा विधि     सुबह जल्दी उठकर हनुमान जी की पूजा करें और दिन की शुरुआत व्रत के साथ करें।     पूरे दिन उपवास रखने का विधान है, जिससे मन और शरीर शुद्ध रहता है।     शाम के समय शनि मंदिर जाकर शनि देव को तिल, उड़द दाल, काली मिर्च, सरसों का तेल और लौंग अर्पित करें।     “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करते हुए शनि देव को प्रसन्न करने का प्रयास करें।     शनि देव से संबंधित वस्तुएं जैसे लोहे का सामान, काला तिल, जामुन, काले जूते और सरसों का तेल दान करना शुभ माना जाता है।     पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि स्तोत्र का पाठ करें।  

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने लिया अहम निर्णय, छात्रों और अभिभावकों को होगी राहत

मोहाली  पंजाब में स्कूल शिक्षा प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 2026-27 एकेडमिक सेशन से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) स्कूलों के पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सीधे किताबें मुहैया कराएगा। इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बोर्ड ने एक डेडिकेटेड ई-कॉमर्स पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसके जरिए किताबों की खरीद और बांट पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी। नई प्रणाली के तहत विद्यार्थी और माता-पिता घर बैठे मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जरूरत के हिसाब से किताबें ऑर्डर कर सकेंगे। इसके साथ ही स्कूलों को क्लास और सब्जेक्ट के हिसाब से अपनी डिमांड डिजिटल तौर पर अपलोड करनी होगी। हर विद्यार्थी को एक अलग लॉग-इन क्रेडेंशियल दिया जाएगा, जिसके जरिए माता-पिता सीधे पोर्टल पर जाकर ऑर्डर कर सकते हैं और पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रख सकते हैं। इस पहल का मुख्य मकसद किताबों की सप्लाई में बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना, लागत कम करना और किताबों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। नए सिस्टम में स्कूल सिर्फ डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जिम्मेदार होंगे और कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ले पाएंगे। साफ निर्देश दिए गए हैं कि छूट वाली छपी कीमत से अधिक कोई रकम की वसूली नहीं होगी, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ घटेगा। बोर्ड के चेयरमैन अमरपाल सिंह ने कहा कि इस पोर्टल को एक सिक्योर ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है, जिससे ट्रांजेक्शन पूरी तरह ट्रांसपेरेंट और सिक्योर होगा। उन्होंने कहा कि सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ओवरचार्जिंग की कोई गुंजाइश न रहे और हर लेवल पर अकाउंटेबिलिटी पक्की की जा सके। 

लुधियाना नगर निगम कर्मचारियों के लिए नए ड्यूटी आदेश, पढ़ें ताजातरीन निर्देश

लुधियाना  नगर निगम मुलाजिमों को अब डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके तहत कमिश्नर ने नए इंस्पैक्टरों को जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है। यहां बताना उचित होगा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा जनगणना सर्वे का कार्य एक साथ शुरू हो गया है। इस काम के लिए नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कई मुलाजिमों को डबल ड्यूटी दे दी गई है जिससे नगर निगम के रूटीन काम न होने कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा मुलाजिमों की डबल ड्यूटी लगाने के फैसले से चुनाव आयोग के ऑर्डर का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि स्टेट इलैक्शन कमिश्नर द्वारा 7 अप्रैल को पत्र जारी किया गया है कि वोटर लिस्ट अपडेट करने के काम में लगाए गए मुलाजिमों को उसके अलावा जनगणना सर्वे या किसी अन्य कार्य पर न लगाया जाए। इस संबंध में पंजाब केसरी द्वारा खुलासा करने के बाद नगर निगम मुलाजिमों को डबल ड्यूटी नहीं करनी होगी जिसके लिए कमिश्नर ने सरकार द्वारा नए लगाए गए इंस्पैक्टरों को चारों जोनों में बांटकर जनगणना की जिम्मेदारी सौंप दी है जिससे नगर निगम में खाली पड़ी रहने वाली कुर्सियों पर मुलाजिमों के वापस लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया जाएगा आधार चुनाव आयोग द्वारा वोटिंग के दौरान फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वोटर लिस्ट अपडेट करने की जो प्रक्रिया शुरू की गई है, उसके लिए 23 साल पुराने रिकार्ड को बनाया आधार जाएगा। मिली जानकारी के मुताबिक बी.एल.ओ. डोर-टू-डोर जाकर 2003 की वोटर लिस्ट के हिसाब से क्रॉस चैकिंग कर रहे हैं। इस दौरान जिन लोगों की मौत या कहीं दूसरी जगह शिफ्टिंग हो गई है, उनके बारे में अलग से रिपोर्ट की जाती है। इसके अलावा शहर में से ही किसी और जगह से शिफ्ट होकर आए लोगों का पुराना वोटर कार्ड मांगा जा रहा है जिसके आधार पर ही आने वाले समय के दौरान वोटर लिस्ट अपडेट करने के अलावा नए वोट बनाने का फैसला किया जाएगा। टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की रुक सकती है सैलरी वोटर लिस्ट अपडेट करने के मामले में शहरी एरिया के लिए 65 फीसदी तक का टारगेट दिया गया है। यह टार्गेट पूरा न करने वाले स्टाफ की सैलरी रुक सकती है। जहां तक लोगों द्वारा पुराने वोटर कार्ड न दिखाने या अन्य जानकारी देने में सहयोग न करने का हवाला दिया जा रहा है, उसके मद्देनजर समस्याओं का समाधान करने के लिए मास्टर ट्रेनर्ज की ड्यूटी अलग से लगाई गई है।

रेल यात्रियों को झटका: बिलासपुर जोन में 18 ट्रेनें कैंसिल, 20 शॉर्ट टर्मिनेट, 2 का रूट डायवर्ट

बिलासपुर. बिलासपुर (SECR) जोन की 18 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। इनमें रायपुर मंडल की 8 पैसेंजर ट्रेनें और नागपुर मंडल की 10 ट्रेनें शामिल है। ये ट्रेनें 3 मई से 22 मई के बीच अलग-अलग तारीखों में नहीं चलेंगी। वहीं, 2 गाड़ियों के रूट बदले गए हैं, जबकि 20 ट्रेनों को रद्द किया गया है। इनमें बिलासपुर और रायपुर से गुजरने वाली कई ट्रेनें हैं। इस वजह से टाटानगर, इतवारी, बालाघाट के अलावा रायगढ़, कोरबा, गेवरा रोड से बिलासपुर और रायपुर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। गोंदिया के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर होगा काम रेलवे ने बताया कि, नागपुर मंडल के गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर मेंटनेंस का काम किया जाना है। इस काम के चलते गोंदिया के प्लेटफॉर्म नंबर-4 (डाउन मेन लाइन) करीब 20 दिनों तक बंद रहेगी। इसी वजह से 10 एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया गया है। वहीं रायपुर मंडल के निपनिया-भाटापारा सेक्शन में भी रोड अंडरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए वहां ब्लॉक लिया जा रहा है। इससे 8 पैसेंजर ट्रेनें कैंसिल की गई है। बदले हुए रूट से चलने वाली ट्रेनें 11754 रीवा-इतवारी एक्सप्रेस 2, 4, 6, 9, 11, 13, 16 और 18 मई 2026 को अपने पुराने रास्ते (जबलपुर-नैनपुर-बालाघाट-गोंदिया-इतवारी) से नहीं चलेगी। यह ट्रेन अब नए रास्ते (जबलपुर-नैनपुर-छिंदवाड़ा-इतवारी) से चलेगी। 11753 इतवारी-रीवा एक्सप्रेस 3, 5, 7, 10, 12, 14, 17 और 19 मई 2026 को भी अपने पुराने मार्ग से नहीं चलेगी। यह ट्रेन अब नए रास्ते (इतवारी-छिंदवाड़ा-नैनपुर-जबलपुर) से चलाई जाएगी। बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस 2 मई से 22 मई 2026 तक दुर्ग तक ही चलेगी। बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस 2 मई से 22 मई 2026 तक दुर्ग तक ही चलेगी। बीच में समाप्त होने वाली ट्रेनें     15231 बरौनी–गोंदिया एक्सप्रेस 2 मई से 22 मई 2026 तक दुर्ग तक ही चलेगी। दुर्ग से आगे गोंदिया तक नहीं जाएगी।     15232 गोंदिया–बरौनी एक्सप्रेस 3 मई से 23 मई 2026 तक गोंदिया से नहीं चलेगी, यह दुर्ग से शुरू होगी और गोंदिया–दुर्ग के बीच नहीं चलेगी।     12105 छ. शिवाजी महाराज टर्मिनल–गोंदिया विदर्भ एक्सप्रेस 2 मई से 22 मई तक अजनी तक ही चलेगी। अजनी से गोंदिया के बीच सेवा बंद रहेगी।     12106 गोंदिया–छ. शिवाजी महाराज टर्मिनल विदर्भ एक्सप्रेस 3 मई से 23 मई तक गोंदिया से नहीं चलेगी, यह अजनी से शुरू होगी और गोंदिया तक नहीं जाएगी।     51707 जबलपुर–गोंदिया पैसेंजर 3 मई से 22 मई तक ब्रह्मपुरी तक ही चलेगी। ब्रह्मपुरी से गोंदिया तक सेवा बंद रहेगी।     51708 गोंदिया–जबलपुर पैसेंजर भी ब्रह्मपुरी से शुरू होगी, गोंदिया से ब्रह्मपुरी के बीच नहीं चलेगी।     68813, 68809 और 78803 गोंदिया–तिरोड़ी/कटंगी पैसेंजर ट्रेनें ब्रह्मपुरी तक ही चलेंगी। आगे गोंदिया से ब्रह्मपुरी के बीच सेवा बंद रहेगी।     68814, 68810, 78804 और 78806 तिरोड़ी/कटंगी–गोंदिया पैसेंजर ट्रेनें ब्रह्मपुरी से शुरू होंगी और गोंदिया तक नहीं जाएंगी।     68811 और 78805 गोंदिया–कटंगी पैसेंजर ट्रेनें भी ब्रह्मपुरी तक सीमित रहेंगी, आगे सेवा बंद रहेगी।     68812 कटंगी–गोंदिया पैसेंजर ब्रह्मपुरी से शुरू होगी और गोंदिया तक नहीं चलेगी। बीच में समाप्त होने वाली ट्रेनें     3 और 6 मई 2026 को झारसुगुड़ा से चलने वाली 68862 झारसुगुड़ा-गोंदिया मेमू पैसेंजर ट्रेन गोंदिया तक नहीं जाएगी। यह ट्रेन बिलासपुर में ही समाप्त हो जाएगी और बिलासपुर से आगे गोंदिया तक नहीं चलेगी।     इसी तरह 3 और 6 मई 2026 को गोंदिया से चलने वाली 68861 गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू पैसेंजर ट्रेन गोंदिया से नहीं चलेगी। यह ट्रेन बिलासपुर से शुरू होगी और गोंदिया तक नहीं जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं’

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची टीएमसी को अदालत से झटका लगा है. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहुंची ममता बनर्जी की पार्टी से शीर्ष अदालत ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे और इसपर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि ईसी को अपना अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम उनके काम में कोई दखल नहीं देंगे. बता दें कि टीएसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ एक राज्य सरकार के कर्मचारी की भी तैनाती की जाएगी।  पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल और गरमा गया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राहत नहीं मिली। अदालत ने उस याचिका पर कोई दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें Election Commission of India के फैसले को चुनौती दी गई थी। मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती को लेकर था। टीएमसी चाहती थी कि इस व्यवस्था पर रोक लगे, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कोर्ट का साफ संदेश, नियमों के खिलाफ नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के दायरे में आती है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। यानी चुनाव आयोग का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। कोर्ट ने आयोग के उस भरोसे को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया था कि जारी सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा। सिब्बल ने उठाए सवाल इससे पहले टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।  जब कपिल सिब्बल ने हर टेबल पर एक केंद्रीय कर्मचारी की अनिवार्यता पर सवाल उठाए, तो बेंच ने नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की. अदालत ने कहा, “आइए, हम इस प्रावधान को दोबारा पढ़ते हैं. यदि हम यह मान लें कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और सहायक केंद्र सरकार के कर्मचारी होंगे, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रावधान में स्पष्ट है कि इनकी नियुक्ति राज्य या केंद्र, किसी भी पूल से की जा सकती है।  कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ऐसा नहीं है जैसा आप बता रहे हैं.” सिब्बल ने अदालत के सामने चार मुख्य मुद्दे उठाए: सूचना का अभाव: सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बैठकें कर रहा है लेकिन उनके बारे में जानकारी साझा नहीं की जा रही है।  अतिरिक्त पर्यवेक्षक पर सवाल: उन्होंने कहा कि पहले से ही केंद्र सरकार का नामांकित माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद है, तो अब हर टेबल पर एक और केंद्रीय कर्मचारी की क्या आवश्यकता है? नियमों की अनदेखी: सिब्बल ने दलील दी कि सर्कुलर के अनुसार राज्य सरकार का नामांकित व्यक्ति होना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग अपनी मर्जी से नियुक्तियां कर रहा है।  क्या है पूरा विवाद? चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था जिसके अनुसार मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर (PSU) का होना अनिवार्य है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को वैध बताया था।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ पहुंची टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश की जरूरत नहीं है. सर्कुलर का पूरी तरह से पालन होगा. इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का हक है. चुनाव आयोग अपने कर्मचारी पर खुद नियंत्रण कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ इस मामले पर दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती नियमों के खिलाफ नहीं है. चुनाव आयोग का सर्कुलर ही लागू होगा।  जस्टिस जे. बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एक ही पूल से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि चयन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से होना चाहिए. तब जस्टिस बागची ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. कपिल सिब्बल ने तब कहा कि तो फिर दूसरा राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन यहां तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यहां एक और गलतफहमी यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग‑अलग माने जा रहे हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं।  वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास ओवरऑल अधिकार होते हैं और वह राज्य सरकार कैडर से होता है.प्रत्येक उम्मीदवार के पास अपना अलग काउंटिंग एजेंट भी होगा इसलिए इसको लेकर जताई जा रही आशंका पूरी तरह गलत और निराधार है. अदालत ने कहा कि किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि नायडू के बयान को दोहराते हुए 13 अप्रैल 2026 का सर्कुलर पूरी तरह लागू किया जाएगा।  'चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई?' चुनाव आयोग के PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी की ओर से कपिल सिब्बल ने ममता सरकार का पक्ष रखा. तृणमूल कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी चीजें पहले नहीं हुईं. चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई? कपिल सिब्बल ने कहा कि सर्कुलर में खुद ही कहा गया है कि राज्य सरकार के नोमिनी होने चाहिए,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सिब्बल ने कहा कि इस बात की आशंका है कि आयोग के इस कदम से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी. 'डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी….' कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सर्कुलर DEO को जारी किया गया है और हमें … Read more

वाटर स्पोर्ट्स में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा ऑडिट एवं सतत मॉनिटरिंग के दिए निर्देश वाटर स्पोर्ट्स में सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई क्रूज हादसे की दुखद घटना के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में संचालित सभी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ता से पालन  करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जन सुरक्षा के विषय में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धमतरी और कोरबा सहित अन्य सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिन स्थलों पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां सुरक्षा मानकों का तत्काल परीक्षण (सुरक्षा ऑडिट) सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः पालन कराया जाए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित वाटर स्पोर्ट्स स्थलों पर उपयोग में लाए जा रहे उपकरणों का नियमित तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन की तैनाती की जाए, तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु समुचित आपातकालीन प्रबंधन तंत्र सक्रिय रखा जाए। इसके साथ ही रेस्क्यू उपकरणों, लाइफ जैकेट एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता एवं कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने कलेक्टरों को यह भी निर्देशित किया कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें तथा किसी भी स्तर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/संचालकों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन नागरिकों एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करता है। इस दृष्टि से यह आवश्यक है कि वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं मानक अनुरूप संचालित हों, जिससे संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए ही हम जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

रितेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’ ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाका

रितेश देशमुख की फिल्म राजा शिवाजी ने आते ही धमाका कर दिया है. राजा शिवाजी ने मराठी सिनेमा के इतिहास में सबसे बड़ी ओपनिंग की है. फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभा रहे रितेश ने ही इसे प्रोड्यूस और डायरेक्ट भी किया है. लेकिन राजा शिवाजी में इतनी जिम्मेदारियां निभाते हुए भी रितेश ने फिल्म को दमदार बनाया है जिसकी चर्चा दर्शकों में खूब हो रही है. शुक्रवार सुबह से ही राजा शिवाजी के रिव्यू पॉजिटिव रहे और जनता का वर्ड ऑफ माउथ इस फिल्म के लिए बहुत दमदार रहा. राजा शिवाजी ने महाराष्ट्र के इलाकों में जमकर भीड़ जुटाई. हिंदी वर्जन में भी रितेश की फिल्म ने शुरुआत तो सॉलिड की लेकिन ये अक्षय कुमार की दो हफ्ते पुरानी फिल्म भूत बंगला के आगे स्लो नजर आई. राजा शिवाजी की धमाकेदार ओपनिंग रितेश की फिल्म के लिए एडवांस बुकिंग ही इतनी तगड़ी थी कि ट्रेड को इससे पहले दिन रिकॉर्डतोड़ कमाई की उम्मीद होनी लगी. इन उम्मीदों पर खरा उतारते हुए राजा शिवाजी ने सुबह से ही थिएटर्स में दमदार भीड़ जुटानी शुरू कर दी. सैकनिल्क की रिपोर्ट बताती है कि पहले दिन राजा शिवाजी ने बॉक्स ऑफिस पर 11.35 करोड़ की शानदार ओपनिंग की है. इसमें हिंदी वर्जन का कलेक्शन 3.35 करोड़ है और मराठी वर्जन से फिल्म ने 8 करोड़ रुपये कमाए हैं. डेटा बताता है कि राजा शिवाजी ने मराठी में 8 करोड़ करीब 2000 स्क्रीन्स से कमाए हैं. जबकि हिंदी कलेक्शन करीब 4200 से ज्यादा स्क्रीन्स के साथ आया है. मराठी सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनिंग अभी तक मराठी सिनेमा के इतिहास में किसी भी फिल्म ने ओपनिंग पर 5 करोड़ का आंकड़ा पार नहीं किया था. सैराट और टाइमपास 2, 3.6 करोड़ कलेक्शन के साथ अभी तक मराठी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्में थीं. अब राजा शिवाजी के साथ रितेश देशमुख सिनेमा को पहली बार डबल डिजिट्स में ओपनिंग कलेक्शन मिला है. करीब 100 करोड़ के रिपोर्टेड बजट में बनी राजा शिवाजी, मराठी सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्म भी है. हिंदी में दो हफ्ते पुरानी फिल्म से स्लो रही राजा शिवाजी अक्षय कुमार की दो हफ्ते पुरानी फिल्म भूत बंगला अभी भी बॉक्स ऑफिस पर सॉलिड बनी हुई है. तीसरे शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी का फायदा उठाते हुए अक्षय की फिल्म ने एक बार फिर से तगड़ी भीड़ जुटाई. और 15वां दिन बॉक्स ऑफिस पर इसके लिए एक अच्छा जंप लेकर आया. गुरुवार को 3.75 करोड़ का कलेक्शन करने वाली भूत बंगला ने, शुक्रवार को 4.50 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है. अक्षय की फिल्म ने 15वें दिन, नई रिलीज राजा शिवाजी से भी ज्यादा कलेक्शन किया है. ये सबूत है कि अक्षय की फिल्म के लिए जनता में कितनी डिमांड है. दूसरे हफ्ते के अंत तक करीब 136 करोड़ रुपये कमा चुकी भूत बंगला ने तीसरे हफ्ते की शुरुआत भी दमदार की है. 15 दिन में इसका टोटल नेट कलेक्शन 140 करोड़ से ज्यादा हो चुका है. रितेश देशमुख की राजा शिवाजी ने शुरुआत तो दमदार की है. अब देखना है कि शनिवार-रविवार को जनता इस फिल्म के लिए कितनी क्रेजी रहती है. ये देखना भी दिलचस्प होगा कि राजा शिवाजी, हिंदी में भूत बंगला को टक्कर दे पाएगी या नहीं.

मोबाइल पर कैसे आएगा इमरजेंसी अलर्ट? जानिए नई सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी

शनिवार को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (Cell Broadcast System) का बड़े पैमाने पर टेस्ट किया गया है. साफ है कि आने वाले समय में यह सर्विस आम लोगों के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल में लाई जाएगी. यानी आगे जब भी कोई बड़ी आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, साइकलोन या कोई सिक्योरिटी थ्रेट का खतरा होगा, तो सरकार सीधे आपके फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट भेज सकेगी. यह कोई सामान्य SMS नहीं होगा, बल्कि टावर से एक साथ पूरे इलाके में ब्रॉडकास्ट होने वाला मैसेज होगा, जिसे पाने के लिए न इंटरनेट की जरूरत होगी और न ही किसी ऐप की. हालांकि कमजोर नेटवर्क में भी काम करेगा, लेकिन एक शर्त है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जा रही है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकता है. यानी जहां कॉल ड्रॉप हो रही हो, इंटरनेट न चल रहा हो, वहां भी अलर्ट आने की संभावना रहेगी, क्योंकि यह SMS की तरह कतार में नहीं फंसता, बल्कि सीधे टावर से पुश होता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी क‍ि अगर आपके फोन में बिल्कुल “No Service” है, यानी टावर का कोई सिग्नल ही नहीं मिल रहा, तो फिर यह सिस्टम भी काम नहीं करेगा. बिना स‍िम के फोन पर भी दिख सकता है अलर्ट आने वाले समय में इस सिस्टम की एक और खास बात लोगों को चौंका सकती है, यह नंबर पर नहीं, बल्कि एरिया पर काम करता है. यानी अगर आपका फोन ऑन है और किसी नेटवर्क का सिग्नल पकड़ रहा है, तो बिना स‍िम के भी इमरजेंसी अलर्ट स्क्रीन पर फ्लैश हो सकता है. यही वजह है कि इसे आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्‍युन‍िकेशन टूल माना जा रहा है. फिर भी कुछ लोग रह जाएंगे ‘आउट ऑफ कवरेज’ हालांकि यह सिस्टम काफी एडवांस्ड है, लेकिन पूरी तरह फूलप्रुफ नहीं है. जिन इलाकों में नेटवर्क कवरेज ही नहीं है, वहां रहने वाले लोग इन अलर्ट से वंचित रह सकते हैं. इसी तरह अगर फोन स्‍व‍िच ऑफ है या बैटरी खत्म है, तो कोई भी चेतावनी नहीं पहुंचेगी. एयरप्‍लेन मोड में भी फोन नेटवर्क से कट जाता है, इसलिए वहां भी अलर्ट नहीं आएगा. इसके अलावा पुराने फीचर फोन्स या ऐसे स्‍मार्टफोन जिनमें यह फीचर सपोर्ट नहीं करता है, वे भी इस सिस्टम के दायरे से बाहर रहेंगे. कई बार यूजर्स खुद सेट‍िंग्‍स में जाकर इमरजेंसी अलर्ट को disable कर देते हैं, ऐसे में भी यह सर्विस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. आने वाले समय की ‘लाइफ-सेवर’ टेक्नोलॉजी आगे चलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को देश के आपदा प्रबंधन ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आपके इलाके में लगा एक ड‍िज‍िटल लाउडस्पीकर. अगर आप उसकी रेंज में हैं और आपका फोन नेटवर्क से जुड़ा है, तो वार्न‍िंग आपको तुरंत मिल जाएगी. लेकिन अगर आप उस रेंज से बाहर हैं या आपने खुद को नेटवर्क से ड‍िसकनेक्‍ट कर रखा है, तो यह अलर्ट आप तक नहीं पहुंचेगा. यानी साफ है क‍ि यह तकनीक तेज, असरदार और कई मामलों में लाइफ सेवर साबित होगी, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं, जिन्हें समझना उतना ही जरूरी है.

मंईयां सम्मान योजना समेत सभी पेंशन लाभुकों का घर-घर सत्यापन शुरू, 25 मई तक चलेगा अभियान

रांची झारखंड के अलग-अलग जिलों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े लाभुकों के भौतिक सत्यापन के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के कोषांगों को कहा है कि वे वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं के सभी लाभुकों तथा मुख्यमंत्री मंईंयां सम्मान योजना के तहत लाभ ले रहे लोगों का व्यापक सत्यापन कराएं। इसे लेकर गुमला जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने आदेश जारी कर दिया है। करीब एक माह तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत प्रत्येक लाभुक का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के दौरान योजना के प्रावधान के अनुरूप अपात्र पाए जाने वाले लाभुकों का नाम हटाने की की कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। साथ ही जनसेवक, रोजगार सेवक एवं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को इस कार्य में सहयोग के लिए लगाया गया है। ग्रामवार-पंचायतवार टीम बनाकर सत्यापन जानकारी के मुताबिक, यह सत्यापन अभियान 25 मई तक डोर-टू-डोर चलाया जाएगा। ग्रामवार एवं पंचायतवार टीम बनाकर लाभुकों के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इस दौरान जिन लाभुकों का आधार एवं मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं है, उनका संग्रहण कर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) पोर्टल पर अपटेड किया जाएगा। निदेशालय ने सभी जिला प्रशासन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि सभी योजनाओं के लाभुकों का सत्यापन करने के बाद आवश्यकतानुसार एनएसएपी पोर्टल एवं झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (जेएमएमएसवाई) पोर्टल पर डेटा अपडेट और विलोपन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने सभी लाभुकों से अपील की है कि वे निर्धारित समयावधि में अपना भौतिक सत्यापन अवश्य कराएं। साथ ही संबंधित आवश्यक दस्तावेज पंचायत सचिव, जनसेवक, रोजगार सेवक या आंगनबाड़ी कर्मियों के पास जमा करें। इससे यह सुनिश्चित हो पाएगा कि योजना के पात्र लाभुकों को समय पर डीबीटी के माध्यम से उनकी पेंशन राशि सीधे बैंक खाते में मिलती रहे। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम योजना आयु वर्ग अनुमानित लाभुक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 60-80 वर्ष से ऊपर 8,30,786 वृद्धावस्था पेंशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 40 वर्ष या उससे ऊपर 3,36,122 विधवा पेंशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 18 वर्ष या उससे ऊपर 24,467 दिव्यांग पेंशन राष्ट्रीय पारिवारिक हित लाभ योजना इसमें मुख्य अर्जन कर्ता की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को एकमुश्त 20,000 रुपए केन्द्रांश के रूप में दी जाती है। योजना के लाभुकों की अनुमानित संख्या 1,152 है। (6 योजनाएं) पेंशन योजना के तहत राज्य सरकार अपनी मद से दो योजनाओं को क्रियान्वित करती है। पहली – झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना। इसमें 18 वर्ष से 50 वर्ष तक की महिला लाभुकों को प्रतिमाह 2500 रुपए दिए जाते हैं। वर्तमान में योजना की लाभार्थियों की संख्या 55,42,601 है। दूसरी योजना झारखंड मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन है। इसके अंतर्गत पांच योजनाएं आती हैं। योजना अनुमानित लाभुक मुख्यमंत्री राज्य वृद्धावस्था 27,01,017 सीएम आदिम जनजाति पेंशन 80,353 सीएम राज्य निराश्रित महिला 5,01,079 सम्मान पेंशन सीएम राज्य एचआईवी पेंशन 8,319 स्वामी विवेकानंद नि:शक्त 3,10,186 स्वावलम्बन प्रोत्साहन सीएम राज्य सामाजिक 49 सुरक्षा पेंशन (ट्रांसजेंडर)

मनीष जायसवाल और रोशन लाल चौधरी ने पत्रकारिता की अहमियत पर जताई अपनी राय, लोकतंत्र में इसकी अनिवार्यता

सरकार के कार्यों के आकलन में पत्रकारों की भूमिका सबसे बड़ी: मनीष जायसवाल  पत्रकारिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं -रोशन लाल चौधरी पतरातू में बीएसपीएस के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न  पतरातू (रामगढ़)  रामगढ़ जिले के पतरातू में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 1 मई को आयोजित की गई। इसमें शामिल हुए हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि आपने जो चार प्रमुख मांग रेलवे में पूर्व की तरह रियायत, रोड टोल में छूट, पत्रकार सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा की मांगे रखी हैं, उसे मेरे स्तर से सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी और कुछ सार्थक परिणाम जरूर निकलेंगे। सांसद मनीष जायसवाल ने BSPS के प्रतिनिधिमंडल के साथ रेलवे एवं सूचना प्रसारण मंत्री से शीघ्र मुलाकात की बात संगठन के संस्थापक शाहनवाज हसन से कही।  उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में खनिज की जितनी चोरी होती है, खनिज पदार्थ की चोरी और लूट की खबर पूरा देश जानता है तो वह पत्रकारों और पत्रकारिता की बदौलत ही है। वहीं बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में यह कार्यक्रम हो रहा है, इसके लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं। मुझे पत्रकारों का हमेशा सहयोग मिला है और पत्रकारिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पतरातू के अलेक्सा रिजोर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय ने की जबकि संचालन महामंत्री नवीन आनंद जोशी और राष्ट्रीय सचिव चंदन मिश्रा ने किया। सबसे पहले बीएसपीएस और जेजेए के संस्थापक शाहनवाज हसन ने सबका स्वागत करते हुए यूनियन के उद्देश्य और अब तक की उपलब्धियां पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम एकजुट रहेंगे तो पत्रकार हित में फैसले भी होंगे और उसका लाभ मिलेगा।   अपनी समस्याओं के लिए हम खुद भी जिम्मेदार: अशोक पांडेय  ढहता चौथा स्तंभ और दम तोड़ता लोकतंत्र पर चर्चा करते हुए वरीय पत्रकार, बीएसपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न अखबारों के संपादक रहे अशोक पांडेय ने कहा कि पत्रकारिता में काफी समस्याएं हैं, पर हमारा संकट है तो लोकतंत्र में भी संकट है। उन्होंने कहा कि सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद हैं, इनमें विज्ञान और धर्म का उल्लेख है तो वहीं पत्रकारिता की भी चर्चा है। आज अपनी समस्याओं के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। पत्रकारिता में कुछ वैसे तत्वों का प्रवेश हो गया है जिसके कारण पत्रकारिता बदनाम हो रही है उन्होंने पत्रकारों से स्वस्थ पत्रकारिता करने और संयमित होकर कार्य करने की अपील की।  सांसद से रखी गई मांगें  कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल से पत्रकारों ने चार मांगे रखी। रेलवे में पूर्व की तरह रियायत, रोड टोल में छूट, पत्रकार सुरक्षा कानून और बीमा योजना को सभी पत्रकारों के लिए लागू किए जाने की मांगे रखी गई। बीएसपीएस की बैठक में कई निर्णय भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पश्चिम बंगाल यूनिट के अध्यक्ष शैलेश्वर पांडा को बीएसपीएस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन और पश्चिम बंगाल यूनिट की नयी कार्यकारिणी की जल्द घोषणा का निर्णय लिया गया। पश्चिम बंगाल के प्रभारी और संगठन सचिव गिरधारी शर्मा के द्वारा एक महीने के भीतर घोषणा की जाएगी। मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अरुण सक्सेना को राजस्थान इकाई के विस्तार के लिए प्रभारी बनाया गया। वे 30 मई तक अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके साथ ही 30 मई तक बिहार इकाई की पूरी कमेटी का विस्तार करने, चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब में संगठन का विस्तार करने के लिए नवीन पांडे और गिरधर शर्मा अधिकृत किए गए। तेलंगाना, कर्नाटक, पुडुचेरी और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए वीरभद्र राव को प्रभारी बनाया गया, जिन्हें शैलेश्वर पांडा सहयोग करेंगे। यह भी तय किया गया कि जुलाई महीने में मध्य प्रदेश के मांडव में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी वहीं सितंबर महीने में लखनऊ में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। विभिन्न राज्यों से आए पत्रकारों ने रखी अपनी बात बीएसपीएस के राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में मध्य प्रदेश अध्यक्ष अरुण सक्सेना, असम के राहुल कर्मकार, बिहार के अजय कुमार, पश्चिम बंगाल के शैलेश्वर पांडा और शुभेंदु चटर्जी, आंध्र प्रदेश के वीर भद्र राव, उत्तर प्रदेश के जायद बाजपेई, उत्तराखंड के नवीन पांडे तथा नेपाल से आए जनमदेव जैसी ने अपनी बातें रखी। मध्य प्रदेश में पत्रकारों को मिल रही सुविधाओं पर चर्चा की गई और बताया गया कि यहां 60 साल से ऊपर के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को 20 हजार प्रति महीना सम्मान राशि की जा रही है। इसे सभी राज्यों में लागू करने की मांग की गई। काफी संख्या में जुटे पत्रकार  कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए काफी संख्या में पत्रकार जुटे। संस्थापक शाहनवाज हसन के अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय, महामंत्री नवीन आनंद जोशी, संगठन सचिव गिरधर शर्मा, कोषाध्यक्ष एस नसरीन, सचिव चंदन मिश्र, जेजेए के प्रदेश अध्यक्ष संपूर्णानंद भारती, मध्य प्रदेश अध्यक्ष अरुण सक्सेना, मीडिया प्रभारी संजीव समीर, असम अध्यक्ष राहुल कर्मकार, बिहार अध्यक्ष अजय कुमार, प बंगाल अध्यक्ष शैलेश्वर पांडा, शुभेंदु चटर्जी, आंध्र प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र राव, उत्तर प्रदेश जायद बाजपेई, उत्तराखंड से नवीन पांडेय, नेपाल से जनमदेव जैसी के अलावा राजस्थान से आरके जोशी, आंध्र प्रदेश से राघवेन्द्र मिश्रा, जगदीश सलूजा, उत्तराखंड से नवीन पांडेय, कृष्णा गुप्ता, पंकज सिंह, जावेद इस्लाम, डीके राठौर, खालिद अनवर, कुमार रमेशम, अनिल सिंह, राहुल कर्मकार, मासूम रजा, आकाश सोनी, सुभाशीष झा, जावेद अली, नईमुल्लाह, सम्पदा बुद्धा, रंजीत पांडेय, श्रीकांत, अर्जुन सोनी, प्रभाकर श्रीवास्तव, राकेश सिंह, मासूम अंसारी, नितिन मिश्रा, विपिन नायक, अंकित सिंह, याकूब अली समेत विभिन्न राज्यों और जिलों से आये पत्रकार मौजूद थे। इस दौरान अतिथियों को स्मृति चिन्ह और बुके देकर सम्मानित भी किया गया।