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‘खेला’ बनाम ‘कमल’: पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर डिप्टी CM साव का जोरदार दावा

रायपुर. पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की उलटी गिनती शुरू हो गई है. 4 मई को  पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर डिप्टी सीएम अरुण साव ने बड़ा दवा किया है. उन्होंने कहा कि 4 मई का पूरा देश प्रतीक्षा कर रहा है, 5 राज्यों के चुनाव के परिणाम आने वाले हैं. चुनाव परिणामों में जनता का रुझान स्पष्ट रूप से बीजेपी को बड़ी सफलता का संकेत दे रहा है. TMC के साथ खेला होगा और बंगाल में कमल खिलेगा. डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि असम और पांडुचेरी में बीजेपी की सरकार बनेगी. निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी की सरकार बनने वाली है. पश्चिम बंगाल की जनता ने TMC के साथ खेला कर दिया है. पश्चिम बंगाल की जनता की जगह घुसपैठियों के साथ खड़े होने का काम ममता बनर्जी ने किया है.  कांग्रेस के महंगाई पर प्रदर्शन डिप्टी सीएम ने बोला हमला प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में आज कांग्रेस महंगाई को लेकर प्रदर्शन करने जा रही है. इसे लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का पाकिस्तान के लिए प्रेम उजागर होता है. पाकिस्तान में कांग्रेस नेता हीरो बनते हैं. महंगाई की बात कर रहे हैं तो अपने पसंदीदा देश पाकिस्तान से पूछ लें. उन्होंने कहा मोदी के नेतृत्व में दुनिया की तुलना में देश में महंगाई कम है.

75 साल के अरबपति की ₹2.70 लाख करोड़ की संपत्ति, जिन्होंने राजस्थान रॉयल्स खरीदी

जयपुर  आईपीएल (IPL 2026) चल रहा है, क्रिकेट के मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश देखने को मिल रही है. वहीं दूसरी ओर इसमें हिस्सा लेने वाली टीमों की खरीद-बिक्री भी जोर शोर पर है. राजस्थान रॉयल्स टीम को नया मालिक मिला है. भारतीय मूल के अरबपति और स्टील किंग के नाम से पहचाने जाने वाले लक्ष्मी मित्तल परिवार ने Rajsthan Royals को खरीद लिया है. इसके लिए लिए डील 15,660 करोड़ रुपये में डन हुई है।  अरबपति Lakshmi Mittal के परिवार ने देश में वैक्सीन किंग कहे जाने वाले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के साथ मिलकर ये डील की है. रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीएल टीम का सौदा पूरा होने के बाद, मित्तल फैमिली के पास राजस्थान रॉयल्स का लगभग 75% मैजोरिटी स्टेक होगा, जबकि Adar Poonawalla के पास करीब 18% हिस्सा रहेगा. बाकी की हिस्सा अन्य निवेशकों के पास होगा।  मित्तल-पूनावाला ने मिलकर की डील डन  स्टील किंग अरबपति लक्ष्मी मित्तल आर्सेलरमित्तल के फाउंडर हैं. उनकी फैमिली ने ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर राजस्थान रॉयल्स में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने पर सहमति जताई, और फिर मनोज बदले व उनके ग्रुप से राजस्थान रॉयल्स का अधिग्रहण किया है. इस सौदे की वैल्यू करीब 1.65 अरब डॉलर ( लगभग 15,660 करोड़ रुपये) बताई गई है।  लक्ष्मी मित्तल, आदित्य मित्तल, वनीशा मित्तल-भाटिया, आदर पूनावाला और मनोज बदले राजस्थान रॉयल्स के बोर्ड में शामिल होंगे. आदित्य मित्तल लक्ष्मी मित्तल के बेटे हैं, जबकि वनीशा मित्तल-भाटिया उनकी बेटी हैं।  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल और अन्य रेग्युलेटर्स से अनुमोदन मिलने के बाद 2026 की तीसरी तिमाही में यह सौदा पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।  लक्ष्मी मित्तल बोले- मैं बहुत उत्साहित राजस्थान रॉयल्स आईपीएल की शुरुआती टीमों में से एक है और इसने साल 2008 में पहला आईपीएल सीजन अपने नाम किया था. इस डील को लेकर अरबपति लक्ष्मी मित्तल ने कहा है कि इस इन्वेस्टमेंट के साथ उनका व्यक्तिगत जुड़ाव है।  मित्तल के मुताबिक, 'मुझे क्रिकेट से प्यार है और मेरा परिवार राजस्थान से ही है, इसलिए राजस्थान रॉयल्स के अलावा मैं किसी और IPL Team का हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा. कई महान खिलाड़ियों ने राजस्थान रॉयल्स की जर्सी पहनी है और मैं इस शानदार टीम का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हूं.' वहीं सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि वे इस सौदे से खुश हैं, राजस्थान रॉयल्स एक मजबूत विरासत वाली प्रमुख आईपीएल फ्रेंचाइजी है।  स्टील किंग की इतनी है नेटवर्थ लक्ष्मी मित्तल का जन्म और पालन-पोषण उत्तरी राजस्थान के सादुलपुर में हुआ था और उन्हें देश में Steel King के तौर पर पहचाना जाता है. भारतीय मूल के स्टील टाइकून अरबपति Lakshmi Mittal अब तक ब्रिटेन के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल रहे थे. बीते कुछ समय पहले ही उन्होंने ब्रिटेन (UK) छोड़ने का फैसला लेते हुए सबको चौंका दिया था।  फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर्स इंडेक्स के आंकड़ों को देखें, तो लक्ष्मी मित्तल भारतीय अमीरों की लिस्ट में चौथे पायदान पर शामिल हैं. उनकी नेटवर्थ (Lakshmi MIttal Networth) 28.4 अरब डॉलर है।  1995 में लंदन शिफ्ट हुए थे मित्तल लक्ष्मी मित्तल साल 1995 में लंदन गए थे और वे जल्द ही ब्रिटेन के सबसे प्रमुख भारतीय कारोबारियों में से एक बन गए.  उन्होंने अपनी संपत्ति आर्सेलर मित्तल के माध्यम से बनाई, जो विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी है. इसमें Lakshmi Mittal और उनके परिवार के पास लगभग 40% की हिस्सेदारी है. 2021 में लक्ष्मी मित्तल ने सीईओ की भूमिका अपने बेटे आदित्य मित्तल को सौंप दी थी, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम करना जारी रखा है।  ब्रिटेन में संपत्ति के अलावा अरबपति लक्ष्मी मित्तल के पास दुबई में एक हवेली है और अब उन्होंने यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में पास नाया आइलैंड पर एक डेवलपमेंट प्रोजेक्स में बड़े हिस्से खरीदे हैं. इसके अलावा बिलियनेयर्स-रो कहे जाने वाले केंसिंग्टन पैलेस गार्डन्स में उनकी संपत्तियां देश के सबसे महंगे घरों में शामिल हैं। 

Inflation Bomb: 21 देशों में महंगाई का खतरा बढ़ा, US-ईरान युद्ध से आर्थिक संकट गहरा

  नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) में भले ही सीजफायर चल रहा है, लेकिन दुनिया में इसका असर देखने को मिल रहा है. इस जंग से तेल-गैस की कीमतों में लगी आग के  चलते यूरोप में महंगाई का बम फूटा है. यहां के 21 देशों में महंगाई अप्रैल महीने में बढ़ (Inflation Attack) गई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह एनर्जी प्राइस हाइक बना है. ऊर्जा की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिली है. पहले से ही ये युद्ध ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था और इसके सबूत भी सामने आने लगे हैं।  होर्मुज ने बिगड़ा यूरोप का खेल  US-Iran War के चलते दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद होने (Hormuz Strait Closure) के चलते फ्यूल सप्लाई पर गहरा असर हुआ. पाकिस्तान, ब्रिटेन से लेकर श्रीलंका, भारत और साउथ कोरिया तक में इसका असर देखने को मिला. इन देशों में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में तगड़ा इजाफा (LPG Price Hike) देखने को मिला।  वहीं अप्रैल में यूरोप में महंगाई दर (Inflation In Europe) भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ग्रोथ रेट लगातार कमजोर हो रहा है. इस तरह से Inflation Rate Rise न सिर्फ कंज्यूमर्स और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के पॉलिसीमेकर्स दोनों के लिए चिंता की बात है।  महंगाई से सहमे 21 देश 21 देश, जो शेयर्ड यूरो करेंसी का इस्तेमाल करते हैं, वो महंगाई बढ़ने से सहमे हुए हैं. इनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस (France), जर्मनी (Germany), इटली (Italy), नीदरलैंड्स (Netherlands), स्पेन (Spain) जैसे नाम शामिल हैं.  एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई. इसकी बड़ी वजह एनर्जी की कीमतों में 10.9% की तगड़ी बढ़ोतरी रही।  यूरोपियन यूनियन की स्टैटिस्टिकल एजेंसी यूरोस्टैट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत (Crude Price Hike) 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करने से ये खराब हालात बने, जो कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध (US-Israel Vs Iran War) शुरू होने से पहले करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही था।   ग्रोथ रेट ने किया निराश न सिर्फ महंगाई, बल्कि यूरोजन की ग्रोथ रेट ने भी निराश किया है. साल के पहले तीन महीनों में यूरोज़ोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में इकोनॉमिक आउटपुट में 0.1% की मामूली बढ़त में रही. इन आंकड़ों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि वेस्ट एशिया का युद्ध ग्लोबल इकॉनमी (Global Economy) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।  सबसे खराब हालात ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने से बने हैं, जो कि वह समुद्री रास्ता है जिससे पहले दुनिया का लगभग 20% तेल फारस की खाड़ी के जरिए प्रोड्यूसर्स से कस्टमर्स तक जाता था. तेल की कीमतों में उछाल का असर गैस स्टेशनों और जेट फ्यूल की कीमतों पर तुरंत दिखा है।  बढ़ती महंगाई ने चिंता जताई है कि यह धीमी या न के बराबर ग्रोथ के साथ इकॉनमी में शामिल हो सकती है, जो कि पॉलिसीमेकर्स के लिए एक बड़ी उलझन है और इसे स्टैगफ्लेशन कहा जाता है. इससे ECB जैसे सेंट्रल बैंकों के पास कुछ ही अच्छे ऑप्शन बचते हैं. महंगाई को कंट्रोल करने का सबसे आम तरीका यह है कि सेंट्रल बैंक अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा (Policy Rate Hike) दे, लेकिन इससे चीजें खरीदने के लिए क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो सकती है। 

Negligence Rises During Boating at Jharkhand’s Dams; Failure to Wear Life Jackets Emerges as a Leading Cause of Accidents

 रांची  डैम और जलाशयों में बोटिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद भी लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन और बोट संचालकों द्वारा लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है, लेकिन पर्यटक बीच पानी में पहुंचते ही सेल्फी लेने के लिए जैकेट उतार देते हैं। यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। रांची में भी ऐसे हादसों का इतिहास रहा है। करीब 12 वर्ष पहले बाड़ा तालाब में नाव डूबने से दो लोगों की मौत हो गई थी, जहां कई लोग लाइफ जैकेट नहीं पहने हुए थे। इसी तरह धुर्वा डैम में भी वर्षों पहले लोग डूबे थे, हालांकि उस घटना में जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। इन घटनाओं के बावजूद लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं। 17 जुलाई 2022 को पंचखेरो डैम में नाव पलटने से एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई थी। कई पर्यटक केवल दिखावे के लिए जैकेट पहनते हैं या उसे ठीक से बांधते भी नहीं हैं, जिससे दुर्घटना के समय वह बेकार साबित हो सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। लाइफ जैकेट की गुणवत्ता और जांच पर भी सवाल डैमों पर उपलब्ध लाइफ जैकेट की नियमित जांच नहीं होती। यह भी सुनिश्चित नहीं किया जाता कि किस व्यक्ति के वजन के अनुसार कौन-सी जैकेट दी जानी चाहिए। कई जैकेट खराब हालत में हैं, लेकिन उनकी समय पर जांच और रखरखाव नहीं हो रहा है। लोगों को सही तरीके से जैकेट पहनने की जानकारी भी नहीं दी जाती, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। बरगी हादसे के बाद पलामू में सख्ती, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बरगी डैम हादसे के बाद पलामू जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भीम बैराज डैम, काशी सोत डैम और मुरमा मलय डैम पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अब बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को बोटिंग की अनुमति नहीं दी जा रही। बोट संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें। कोडरमा में 8 मौतों के बाद भी ढिलाई, नियमों की उड़ रही धज्जियां जबलपुर हादसे के बाद कोडरमा जिले के तिलैया और पंचखेरो डैम में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 17 जुलाई 2022 को पंचखेरो डैम में नाव पलटने से एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे में भी किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। आज भी आम दिनों में लाइफ जैकेट का उपयोग बेहद कम देखने को मिलता है। निरीक्षण के दौरान ही नियमों का पालन होता है, जबकि सामान्य दिनों में लापरवाही जारी रहती है। पतरातू डैम में सख्त नियम, बिना लाइफ जैकेट नहीं मिलेगी एंट्री रांची के पास स्थित पतरातू डैम में सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। नाविक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को बोटिंग नहीं कराई जाएगी। नाविकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें गोताखोरी और लाइफ सेविंग तकनीक शामिल है। टिकट काउंटर से लेकर बोट तक हर जगह लाइफ जैकेट के उपयोग को लेकर जागरूकता संदेश लगाए गए हैं। डैम और जलाशयों में सुरक्षा के लिए नियम तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनका पालन तभी संभव है जब पर्यटक खुद जिम्मेदारी दिखाएं।

रांची होटल कारोबार पर महंगाई की मार, गैस सिलेंडर महंगा होने से मेन्यू तक हुआ महंगा

 रांची  कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार हो रही भारी वृद्धि ने रांची के होटल और रेस्टूरेंट कारोबार को संकट में डाल दिया है। बढ़ती लागत के कारण संचालकों ने अब गैस की जगह कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि गैस सिलिंडर का उपयोग अब केवल छौंक लगाने तक सीमित रह गया है। शहर में 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमत (Commercial Gas Cylinder Price) बढ़कर 3250.50 रुपये पहुंच गई है। एक मई को केंद्र सरकार द्वारा कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी (LPG Price Hike May 2026) की गई, जिससे होटल व्यवसायियों की चिंता और बढ़ गई। जनवरी 2026 में यह कीमत 1733 रुपये थी, जो महज चार महीनों में दोगुनी हो गई है। कमर्शियल गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों ने होटल उद्योग की कमर तोड़ दी है। यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो इसका असर न सिर्फ कारोबार, बल्कि आम ग्राहकों की जेब पर भी लगातार पड़ता रहेगा। वहीं कुछ होटल व रेस्टूरेंट संचालकों ने बताया कि स्थिति में अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो होटल व रेस्टूरेंट बंद करना भी पड़ सकता है। हर महीने बढ़ती रहीं कीमतें गैस सिलिंडर की कीमतों में हर महीने इजाफा हुआ है। जनवरी और फरवरी में 111.50 रुपये, मार्च में 144 रुपये, अप्रैल में 218.50 रुपये और मई में अचानक 994 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह 47.5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत भी बढ़कर 8120 रुपये हो गई है। कोयले पर बढ़ी निर्भरता गैस की बढ़ती कीमतों के चलते होटल संचालकों ने अब कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। रांची के बाजार में 20 किलो कोयले की बोरी 260 से 300 रुपये (Coal Price in Ranchi) में मिल रही है। रेस्टूरेंट व होटल संचालकों ने बताया कि एक सप्ताह में लगभग 1500 रुपये और महीने में 4000 से 5000 रुपये तक का कोयला जलाया जा रहा है। मेन्यू महंगा, ग्राहकों पर बोझ बढ़ती लागत का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ रहा है। होटल और रेस्टूरेंट संचालकों ने खाने के हर आइटम पर 20 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना मजबूरी बन गया है। होटल संचालकों का आरोप है कि पहले से ही कमर्शियल गैस सिलिंडर की उपलब्धता एक बड़ी समस्या थी। कई बार उन्हें ब्लैक में महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदना पड़ता था। अब कीमतों में बढ़ोतरी के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है। बड़े होटल अभी कर रहे मंथन शहर के बड़े होटलों ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। उनका कहना है कि उनके पास अभी पुराना स्टाक मौजूद है। स्टाक खत्म होने के बाद ही मेन्यू की कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, कई शहर के बड़े होटल संचालकों ने बताया कि उनके पास पीएनजी की सर्विस है, जिसके कारण उन्हें एजपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।     गैस सिलिंडर महंगा होने के बाद लोग कोयला पर निर्भर हो गए है। लेकिन अगर कोयला की कीमत में भी इजाफा हुआ तो लोग दुकान बंद करने पर मजबूर होंगे। मध्य दर्जे के रेस्टूरेंट गैस सिलिंडर की संकट से जूझ रहे हैं। – प्रसंजीत मंडल, मैनेजर, बिरियानी बाय ब्रोस, बहुबाजार  

राजस्थान रॉयल्स डील में अड़चन: अमीर निवेशक के बावजूद पैसे का इंतजाम नहीं

नई दिल्ली आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स की 1.63 अरब डॉलर की बिक्री में पेच फंस गया है। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख इनवेस्टर ग्रुप में फंडिंग की दिक्कत, रेगुलेटरी पचड़ों और खरीदारों के कंसोर्टियम के जटिल ढांचे के कारण इस डील में देरी हो रही है। सोमानी ग्रुप की अगुवाई वाले कंसोर्टियम में रॉब वॉल्टन, शीला फोर्ड हैंप और उनके पुत्र माइकल हैंप जैसे ग्लोबल इनवेस्टर शामिल हैं। रॉब वॉल्टन का ताल्लुक दुनिया के सबसे अमीर परिवारों में से एक वॉल्टन फैमिली से है। वह एनएफएल की टीम डेनवर ब्रोंकोस के भी प्रिंसिपल ओनर हैं। शीला फोर्ड हैंप एनएफएल फ्रेंचाइजी डेट्रॉयट लॉयंस की प्रिंसिपल ओनर हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान रॉयल्स के को-फाउंडर मनोज बदले के निवेश वाली कंपनी रॉयल्स स्पोर्ट्स ग्रुप ने कहा कि काल सोमानी के साथ चर्चा चल रही है और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि फ्रेंचाइजी के लिए अच्छा परिणाम आए। हालांकि यह साफ नहीं है कि कंसोर्टियम में किसके हिस्से कितनी पूंजी आएगी लेकिन माना जा रहा है कि सोमानी ग्रुप मैज्योरिटी स्टेक मांग रहा है। बदले के अलावा राजस्थान रॉयल्स के मौजूदा स्टेकहोल्डर्स में रेडबर्ड कैपिटल और लाचलान मर्डोक शामिल हैं। सोमानी की राजस्थान रॉयल्स में इस समय भी हिस्सेदारी है। देरी के कारण सूत्रों के मुताबिक सोमानी इस डील को फंडिंग करने के लिए कैपिटल जुटाने की प्रोसेस में है और इसके लिए उसने कई बड़ी निवेश कंपनियों को अप्रोच किया है। लेकिन अब तक किसी ने कमिटमेंट नहीं किया है। इस कारण डील में देरी हो रही है। साथ ही ट्रांजैक्शन की कुछ शर्तों को लेकर कंसोर्टियम के मेंबर्स में चिंता है। बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी में सेकेंडरी ओनरशिप ट्रांजैक्शन की फीस पर सवाल उठाए हैं। इससे भी डील प्रभावित हुई है। इसमें मॉरीशस की कंपनी ईएम स्पोर्टिंग होल्डिंग्स के ट्रांजैक्शंस भी शामिल हैं। यह कंपनी रॉयल मल्टीस्पोर्ट्स को कंट्रोल करती है जो राजस्थान रॉयल्स की ओनर है। डील में पेच     आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स की बिक्री से जुड़ी डील में देरी हो रही है     टीम को खरीदने के लिए सोमानी के कंसोर्टियम ने सबसे बड़ी बोली लगाई थी     कंसोर्टियम में रॉब वॉल्टन और शीला फोर्ड हैंप जैसे ग्लोबल इनवेस्टर शामिल हैं     सूत्रों के मुताबिक इनवेस्टर ग्रुप फंडिंग जुटाने के लिए संघर्ष कर रहा है     बीसीसीआई ने भी पहले किए गए सेकेंडरी ट्रांजैक्शन पर सवाल उठाए हैं मित्तल से भी बातचीत इस बीच माना जा रहा है कि फ्रेंचाइजी के प्रमोटर्स ने दूसरे संभावित निवेशकों के साथ बातचीत की है। इनमें लक्ष्मी मित्तल भी शामिल हैं। उनके परिवार ने टीम के लिए बोली लगाई थी लेकिन उसकी बोली सबसे बड़ी नहीं थी। इस बारे में सोमानी और मित्तल को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। सूत्रों का कहना है कि मित्तल ने 1.5 अरब डॉलर की बोली लगाई थी। राज कुंद्रा का मामला उधर टीम में माइनोरिटी स्टेक रखने वाले राज कुंद्रा भी कानूनी लड़ाई में फंसे हैं। कुंद्रा ने अपनी निवेश कंपनी कुकी इनवेस्टमेंट्सस के जरिए एनसीएलटी को अप्रोच किया है। उन्होंने फ्रेंचाइजी पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए अपनी 11.7 फीसदी हिस्सेदारी बहाल करने की मांग की है। इस बीच यूके की एक अदालत ने कुंद्रा की कुछ प्रॉसीडिंग्स पर रोक लगाई है। इसे बंबई हाई कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।

लक्ष्मी गामड़ की पोस्ट पर बवाल, ‘सामने वाले को थप्पड़ मारने वाला असिस्टेंट’ की मांग से हड़कंप

 भोपाल मध्य प्रदेश अजब है, सबसे गजब है ये बात एक बार फिर सही साबित हो रही है. इस बार गजब खबर राजधानी भोपाल से सामने आई है. भोपाल में पदस्थ मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा की लेडी अधिकारी लक्ष्मी गामड़ का एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रहा है. जिसमें उनको एक ऐसे असिस्टेंट की तलाश है जो उनके इशारे पर जरूरत के हिसाब से सामने वाले को दो चमाट (थप्पड़) रसीद कर सके।  लक्ष्मी गामड़ ने सोशल मीडिया पर इसकी वैकेंसी ओपन बताते हुए संपर्क करने के लिए कहा है. उनकी इस पोस्ट पर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जा रहा है. एक यूजर ने लिखा कि आप प्रशासनिक अधिकारी हैं. आपको ऐसे पोस्ट मीडिया में डालने से बचना चाहिए. हालांकि, वहीं कई यूजर्स बोले बताइए मैडम जी कब से ज्वाइन करना है नौकरी?  बाद में डिलीट कर दिया पोस्ट सोशल मीडिया पर जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई तो महिला अधिकारी ने चुपचाप इसे डिलीट कर दिया. आपको बता दें कि लक्ष्मी अलग-अलग रील बनाकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहती हैं. गामड़ की फेसबुक पोस्ट पर अलग-अलग रील देखने को मिलेगी. जिसमें कई पब्लिक स्पॉट पे रील बनी हैं. लेकिन अभी तक इस पोस्ट को लेकर उनकी सफाई सामने नहीं आई है।  वहीं 1 मई को मजदूर दिवस की बधाई देते हुए उन्होंने पोस्ट किया था. जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. जिसमें उन्होंने लिखा था कि ऐसा बिल्कुल नहीं कि बीवियां सिर्फ खून पीती हैं. हम भी कभी-कभी मजदूरों पर तरस खाकर खून भी दान देते हैं।  कौन है लक्ष्मी गामड़ लक्ष्मी गामड़ राज्य सेवा प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं. नीमच में अपर कलेक्टर रह चुकी हैं. फिलहाल उनकी तैनात भोपाल स्थित एमपी गवर्नमेंट प्रेस में अपर नियंत्रक पद पर है। 

पानी की जिम्मेदारी अब पंचायतों के हाथ: फतेहाबाद में 233 गांवों में लागू होगा नया मॉडल

फतेहाबाद. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिले की 233 ग्राम पंचायतों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई आपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के तहत अब पंचायतें खुद पानी के बिल की वसूली, जल आपूर्ति प्रबंधन और रख-रखाव का काम संभालेंगी। खास बात यह है कि पंचायत जितना राजस्व बिल के रूप में एकत्रित करेगी, सरकार भी उतनी ही अतिरिक्त राशि पंचायत के खाते में देगी। इससे पंचायतों को जल सुविधाओं के सुधार और विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे। जिले में 258 पंचायतें है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा। इस योजना के तहत चयनित पंचायतों के बैंक खाते खोले जा रहे हैं, जिन्हें मुख्यालय स्तर के सिंगल खाते से जोड़ा जाएगा। पंचायतों द्वारा एकत्रित राजस्व पहले मुख्य खाते में जमा होगा, जिसके बाद सरकार उसी राशि को जोड़कर दोगुनी रकम पंचायत को वापस देगी। इस राशि का उपयोग जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। पंचायतों को मिली व्यापक जिम्मेदारी नई नीति के तहत पंचायतें अब पानी के कनेक्शन जारी करने, बिल वसूली, शिकायत निवारण, मीटरिंग और जल गुणवत्ता की निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके अलावा पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, पंप और अन्य संसाधनों की मरम्मत व रख-रखाव भी पंचायतों के जिम्मे होगा। अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जल हानि को कम करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। पानी के बिलों की वसूली में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को जोड़ा गया है। उपभोक्ताओं से प्राप्त जल शुल्क का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में इन समूहों को दिया जाएगा। इससे न केवल वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी। पंचायतें बिस्वास पोर्टल के माध्यम से नए कनेक्शन जारी करने, कनेक्शन काटने, मीटर लगाने और शिकायतों का आनलाइन समाधान कर सकेंगी। इसके साथ ही बिल वितरण, भुगतान की निगरानी और उपभोक्ताओं को एसएमएस के जरिए सूचना देने की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी गई है। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी। योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल गुणवत्ता की नियमित जांच फील्ड टेस्ट किट से की जाएगी और वितरण के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करेगा। विभाग द्वारा जल आपूर्ति योजनाओं को अपग्रेड कर 24 घंटे जल उपलब्धता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण जल आपूर्ति अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। साथ ही पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में जिले की सभी पंचायतों को इसके दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है।

महंगाई का नया झटका: कमर्शियल LPG के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ेगा असर

अमृतसर. कमर्शियल एल.पी.जी. गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों ने होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को एक बार फिर बड़े संकट में डाल दिया है। पहले ही गैस सिलेंडरों की कमी के कारण ब्लैक में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर कारोबारियों को अब सरकारी रेट में हुए इजाफे ने दोहरा झटका दिया है। इस समय एल.पी.जी. गैस सिलेंडर कमर्शियल की कीमत 3178 रुपए हो गया है, एकदम से 993 रुपए बढ़ने से इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। बढ़ती लागत के चलते होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को रोजगार का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। लेकिन गैस सिलेंडरों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ौतरी ने इस उद्योग पर भारी दबाव बना दिया है। कारोबारियों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की लागत कई गुना बढ़ गई है, जबकि ग्राहकों की संख्या और आमदनी में उस हिसाब से बढौतरी नहीं हो रही। ऐसे में मुनाफा लगातार घटता जा रहा है और कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। पिछले कुछ समय से कई इलाकों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की शॉर्टेज भी देखने को मिली थी। इस कमी के चलते कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को अपना काम जारी रखने के लिए ब्लैक में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़े। कई बार तो सरकारी रेट से सैंकड़ों रुपए ज्यादा देकर सिलेंडर लेने पड़े ताकि कारोबार बंद न हो। अब जब सरकारी स्तर पर ही कीमतों में बढ़ौतरी कर दी गई है, तो ब्लैक में सिलेंडर खरीदने वालों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं। होटल कारोबारी अनिल सूरी का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो छोटे और मध्यम स्तर के होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। कई छोटे कारोबारी पहले से ही बढ़ते बिजली बिल, कर्मचारियों के खर्च और अन्य महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

CM साय का जमीनी जुड़ाव: चंदागढ़ में निर्माणाधीन घर में ईंट जोड़कर दिया प्रेरणा संदेश

रायपुर. सुशासन तिहार 2026 के तहत सीएम विष्णुदेव साय के प्रदेशव्यापी दौरे की शुरुआत हो चुकी है. अभियान के पहले दिन सीएम साय का हेलीकॉप्टर जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में उतरा. प्रदेश के मुखिया के आगमन पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल बन गया. उन्होंने गमछा पहनाकर स्वागत किया. इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल उपस्थित रहे.  जनसेवा का संदेश, श्रमदान का उदाहरण  चंदागढ़ में उस वक्त मुख्यमंत्री साय की सामने आई जब, उन्होंने पीएम आवास योजना के हितग्राही के निर्माणाधीन घर में स्वंय सिमेंट लगाकर ईंट जोड़ी और हौसला बढ़ाया. वहीं उन्होंने जनता के साथ फोटो भी खिंचवाई. सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं : सीएम साय सीएम साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि हर नागरिक तक समयबद्ध समाधान पहुंचाना है. त्वरित कार्रवाई और त्वरित निदान के संकल्प के साथ सरकार जनविश्वास को और मजबूत कर रही है. पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रदेश सरकार निरंतर ऐसे निर्णय और प्रयास कर रही है, जो सीधे नागरिकों के जीवन को सरल, सुगम और सशक्त बनाते हैं. ‘सुशासन तिहार’ इसी सोच का सशक्त प्रतिबिंब है. एक ऐसा जनआंदोलन, जो जनभागीदारी को बढ़ाते हुए विकास को नई गति और दिशा दे रहा है, तथा शासन और जनता के बीच विश्वास को और प्रगाढ़ बना रहा है. 1 मई से 10 जून तक सुशासन तिहार सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी. पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं.