samacharsecretary.com

हर दो दिन में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश से आम की फसलें होंगी प्रभावित, पैदावार में गिरावट

शहडोल   मध्य प्रदेश में पिछले दो तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी व बूंदाबांदी से मौसम तेजी से बदला है. शहडोल में भी पिछले दो दिनों से मौसम इसी तरह बदल रहा है, जिसने आम की फसलों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है।  शहडोल में दो दिन से आंधी बारिश शहडोल जिले के किसान भोलू गुप्ता बताते हैं, '' पिछले दो दिन से तेज गर्मी से राहत मिली हुई है, जिस तरह से सूर्य देव का पारा चढ़ा हुआ था, उससे हालत खराब थी लेकिन पिछले दो दिन से मौसम ऐसा बदला है, कि शाम को ठंडक महसूस हो रही है. आंधी और बारिश से मौसम ठंडा हो गया है पर कई फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।  बदलते मौसम से आम को बड़ा नुकसान मौसम के इस बदलते मिजाज से किस तरह का नुकसान हो सकता है? इसे लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' जो आंधी तूफान आया है इससे जो पेड़ वर्गीय फसल है जैसे आम, केला आदि तो इनके गिरने से तो निश्चित ही नुकसान होता है लेकिन अन्य कई वजहों से भी फल प्रभावित होते हैं. तूफान में आम की कमजोर डगालें व फूल टूटने से आने वाले आमों की संख्या कम हो जाती है, इससे सबसे ज्यागदा नुकसान होता है।  सब्जी व अन्य फसलों का क्या होगा? कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' इसके अलावा सब्जी वर्गीय फसलों की बात करें या गर्मी की फसल मूंग-उड़द की बात करें तो जब तक ओले नहीं गिरेंगे तब तक ज्यादा नुकसान नहीं है. बारिश हो रही है, मौसम ठंडा है तो इसका फायदा ही इन फसलों को मिलेगा. बस जिस तरह से तेज आंधी चल रही है उसका असर आम की फसल पर जरुर पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल वक्त से पहले ही झड़ रही है।  तूफानी आंधी न मचाई तबाही  तेज आंधी ने शहडोल में कई स्थानों पर जमकर नुकसान किया, कहीं शादी का टैंट उड़ा दिया, तो कहीं बिजली के खंबे और पेड़. बिजली की तारों पर पेड़ गिरने से कई इलाकों में ब्लैक आउट हो गया और बिजली कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे. इसके अलावा कई गांव में कई घंटे तक ब्लैकआउट रहा, शुक्रवार को पूरे दिन लाइट अप एंड डाउन चलती रही, क्योंकि लगातार मेंटेनेंस का कार्य चलता रहा। 

आम आदमी पार्टी से जुड़े पूर्व मंत्रियों व कुमार विश्वास को कोर्ट का समन, 15 मई तय

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और जाने-माने कवि कुमार विश्वास के साथ- साथ दिल्ली सरकार के दो पूर्व मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती को समन भेजा है। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इन सभी नेताओं को 15 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। क्या है 12 साल पुराना मामला? सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र के अनुसार, यह घटना 6 मई 2014 की है, जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उस समय कुमार विश्वास अमेठी से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव आयोग के नियमानुसार, वोटिंग शुरू होने से 48 घंटे पहले जो लोग उस क्षेत्र के वोटर नहीं होते हैं, उन्हें वहां से जाना होता है। उस समय पुलिस ने कुमार विश्वास और उनके साथियों को अमेठी छोड़ने को कहा था, क्योंकि वे वहां के वोटर नहीं थे। आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कुमार विश्वास, तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती ने अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र नहीं छोड़ा। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया था।   कोर्ट का सख्त रुख और आगे की प्रक्रिया यह मामला पहले एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा था। लेकिन हाल ही में इसे स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है और सभी आरोपियों को समन भेजा है। वहीं अगली सुनवाई 15 मई को होगी, जिसमें सभी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। काफी चर्चा में था 2014 का अमेठी चुनाव साल 2014 का अमेठी लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक था। इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी और वहीं कुमार विश्वास का सीधा- सीधा मुकाबला कांग्रेस मंत्री राहुल गांधी और बीजेपी मंत्री स्मृति ईरानी से था। अब इतने साल बाद, कोर्ट के इस कदम से यह पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

जबलपुर-इटारसी के बीच रेलवे की तीसरी लाइन पूरी, दिल्ली तक तेज़ी से दौड़ेंगी ट्रेनें

नर्मदापुरम   जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है. अब विभिन्न स्तरों पर इसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है. परीक्षण पूरा होने के बाद काम शुरू होगा. तीसरी लाइन बनने से जबलपुर-नर्मदापुरम के बीच ट्रेनों का आवागमन तेज हो जाएगा. इसका असर ये होगा कि राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो जाएगी. क्रॉसिंग के लिए हॉल्ट की समस्या भी खत्म होगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन के बीच तीसरी लाइन की योजना के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी को जानकारी दी. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का इसके लिए आभार जताते हुए कहा "यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है. तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी. समयबद्धता में सुधार आएगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. नर्मदापुरम, नरसिंहपुर समेत आसपास के जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।  ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी तीसरा ट्रैक बिछने से इस बिजी रूट पर ट्रेनें सनसनाती हुई निकलेंगी. अभी इस रेल लाइन पर ट्रैफिक का प्रेशर रहता है. इस कारण क्रॉसिंग कर सुपरफास्ट ट्रेनों को पहले निकाला जाता है. अब एक और ट्रैक बनने से ये समस्या खत्म हो दाएगी. जाहिर है इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगा. तीसरा ट्रैक बनने से जबलपुर और इटारसी के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. माना जा रहा है कि डीपीआर की परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे बजट आवंटित करेगा. इसके बाद टेंडर होगा।  इटारसी से मानिकपुर तक प्लानिंग भी शामिल इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे की प्लानिंग के अनुसार इटारसी रेलवे जंक्शन से जबलपुर होकर मानिकपुर तक जाने वाले रेलवे लाइन का विस्तार करने की है. यहां पर तीसरा ट्रैक बिछाने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन की भी स्वीकृति की मांग रेलवे बोर्ड की गई है. ये तीसरी लाइन डलने के बाद इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर रेल लाइन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। 

IMD का बड़ा अलर्ट: मई में होगी सामान्य से ज्यादा बारिश, हीटवेव से मिलेगी राहत

नई दिल्ली भारत में इस साल मई का महीना असामान्य रूप से गीला होने वाला है. भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि पूरे देश में मई 2026 में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी. बारिश सामान्य स्तर से 110 फीसदी अधिक हो सकती है।  इसका मतलब है कि जहां आमतौर पर कम बारिश होती है वहां भी इस बार खूब पानी बरसेगा. लेकिन इसके साथ गरज के साथ बादल, बिजली गिरना और तेज हवाएं भी चलेंगी जिनकी रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का भी खतरा है।  भारतीय मौसम विभाग के पास 1971 से 2020 तक का डेटा है. इस डेटा के अनुसार मई महीने में आमतौर पर उत्तर भारत और पूरे देश में 64.1 मिलीमीटर बारिश होती है. इस साल की पूर्वानुमान यह है कि बारिश इस सामान्य स्तर से 110 फीसदी ज्यादा हो सकती है. यानी करीब 70-71 मिलीमीटर या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  ये असामान्य है क्योंकि मई का महीना आमतौर पर गरमी का होता है, बारिश का नहीं. मई में तो लू यानी गर्म हवाएं चलती हैं. लेकिन इस बार ये पैटर्न बदलने वाला है।  बारिश का असर क्या होगा? अच्छी खबर ये है कि इतनी बारिश से तापमान में कमी आएगी. जो भयंकर गर्मी आ रही थी उसमें से थोड़ी राहत मिलेगी. मिट्टी में नमी आएगी जिससे खेतों को फायदा होगा. जल स्रोतों में पानी भर जाएगा। लेकिन बुरी खबर ये है कि बारिश समान रूप से नहीं होगी. कुछ इलाकों में कम बारिश होगी जबकि कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा होगी. पूर्व और उत्तरपूर्व भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहेगी।  किन इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश? सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम को सबसे ज्यादा बारिश मिलेगी. यहां 5 मई तक बहुत भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवाएं चलेंगी. पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसा ही होगा।  पश्चिमी हिमालय, उत्तर भारत के मैदान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में 3 से 6 मई के बीच अलग-अलग जगहों पर गरज और बिजली आएगी. पूर्वी भारत और पूर्वी तट पर भी ऐसी हालत होगी।  खतरे क्या हैं? अगर कम समय में बहुत सारी बारिश एक साथ हो जाए तो कई शहरों में बाढ़ आ सकती है. खेतों में फसलें खराब हो सकती हैं. तेज हवाएं बिजली के खंभे और पेड़ों को गिरा सकती हैं. बिजली गिरने से लोगों को जान का खतरा हो सकता है।  ये मौसम क्यों अजीब है? मई वसंत और मानसून के बीच का महीना होता है. इस समय कुछ असामान्य मौसम की घटनाएं होती हैं. लेकिन इस बार गरज और बादलों की गतिविधि सामान्य से बहुत ज्यादा होने वाली है।  लोगों को क्या करना चाहिए? मौसम विभाग ने कहा है कि सभी राज्यों के अधिकारियों और लोगों को अपने इलाके की मौसम सूचना पर नजर रखनी चाहिए. विशेषकर उन इलाकों में जहां भारी बारिश और गरज के खतरे हैं. घरों में पानी निकास के रास्ते साफ रखें ताकि बाढ़ न आए. किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए। 

April 2026 Car Sales: Hyundai, Tata और Mahindra की बिक्री में उछाल, Kia ने भी बढ़ाया ग्राफ

मुंबई  अप्रैल 2026 के खत्म होने के साथ ही कार बनाने वाली कंपनियों ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ बिक्री में एक पॉज़िटिव नोट हासिल किया है. बीते माह के दौरान, लगभग सभी कार ब्रांड्स ने वित्त वर्ष 2026 की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल अच्छी बढ़त दर्ज की है. घरेलू बाज़ार में Tata Motors और Mahindra दूसरे और तीसरे स्थान पर मज़बूती से बने रहे।  हालांकि Hyundai ने इस महीने अपने अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन के साथ Mahindra के साथ का फ़ासला कम कर दिया. वहीं Kia India की बात करें तो दूसरी जनरेस की Kia Seltos और Sonet की ज़बरदस्त मांग के चलते अप्रैल महीने में कंपनी ने अपने अब तक के सबसे अच्छे होलसेल आंकड़े को छू लिया. यहां हम टॉप-6 कार निर्माताओं की बिक्री के बारे में बता रहे हैं।  1. Maruti Suzuki की बिक्री सबसे पहले Maruti Suzuki की बात करें तो अप्रैल 2026 में कंपनी ने 1,87,704 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो इसकी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक बिक्री है. यह कार निर्माता कंपनी हैचबैक, सेडान और SUV के विस्तृत मिश्रण की बदौलत बिक्री के मामले में बाज़ार में काफ़ी बड़े अंतर से अपनी बढ़त बनाए हुए है।  कंपनी के कॉम्पैक्ट और मिड-साइज़ सेगमेंट की बिक्री 80,659 यूनिट्स की रही, जबकि Maruti Alto K10, WagonR और S-Presso जैसी छोटी कारों का योगदान 16,066 यूनिट्स का रहा. वहीं, इस महीने Maruti eVitara का योगदान भी 2,006 यूनिट्स का रहा, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत बिक्री इसकी बड़ी 61kWh बैटरी वाले वेरिएंट से हुई।  2. Tata Motors की बिक्री स्वदेशी कार निर्माता Tata Motors की बात करें तो अप्रैल 2026 में यह कंपनी दूसरे स्थान पर बनी रही. इस दौरान कंपनी के वाहनों की बिक्री में साल-दर-साल 30.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह अप्रैल 2025 के 45,199 यूनिट्स से बढ़कर लगभग 59,000 यूनिट्स तक पहुंच गई।  Tata Motors की बिक्री को Nexon और Punch जैसे मॉडल्स की मज़बूत मांग के साथ लगातार समर्थन मिल रहा है, जो इसकी बिक्री में अहम योगदान दे रहे हैं. इसके अलावा, कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें साल-दर-साल 72.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  3. Mahindra & Mahindra की बिक्री Mahindra & Mahindra ने अप्रैल 2026 में 56,331 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो अप्रैल 2025 की 52,330 यूनिट्स की तुलना में साल-दर-साल 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, मार्च 2026 की 60,272 यूनिट्स की तुलना में कंपनी की बिक्री में 6.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।  बीते माह भी कार निर्माता कंपनी ने अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है, और Tata Motors के साथ उसका अंतर कम बना हुआ है, जिससे हाल के महीनों में देखने को मिली कड़ी टक्कर जारी है. कंपनी की बिक्री मुख्य रूप से उसकी SUV लाइन-अप से ही बढ़ रही है, जिसमें Mahindra Scorpio, Thar और XUV रेंज जैसे मॉडल्स बिक्री को आगे बढ़ा रहे हैं।  4. Hyundai Motors की बिक्री साउथ कोरियन कार निर्माता कंपनी Hyundai ने अप्रैल 2026 में 51,902 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और चौथे स्थान पर बनी रही. कंपनी की इस बिक्री में मुख्य योगदान Hyundai Creta, Venue और Exter जैसे मुख्य मॉडल्स का रहा. इसके साथ ही Hyundai Grand i10 Nios और i20 जैसी हैचबैक कारों की मांग भी लगातार बनी रही।  बाते माह Hyundai Venue का प्रदर्शन खास तौर पर अच्छा रहा, और कंपनी ने 12,420 यूनिट्स की बिक्री के साथ अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक घरेलू बिक्री दर्ज की. Hyundai Motor ने इस बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय काफी हद तक इस मॉडल को हाल ही में मिली पांच-स्टार Bharat NCAP सुरक्षा रेटिंग को दिया है।  5. Toyota Kirloskar Motor की बिक्री Toyota की बिक्री पर नजर डालें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 में 30,159 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जिससे यह पांचवें स्थान पर रही. अप्रैल 2025 में 24,833 यूनिट्स की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसकी मुख्य वजह Innova HyCross, Urban Cruiser Hyryder और Fortuner जैसे मॉडल्स की लगातार बनी रही मांग थी।  इस महीने की एक अहम उपलब्धि कंपनी की Innova HyCross का 2 लाख यूनिट्स की कुल बिक्री का आंकड़ा पार करना रही. Toyota Kirloskar ने भारत के लिए अपनी पहली EV, Urban Cruiser EBella से भी पर्दा उठा दिया है, और इसकी कीमत की घोषणा जल्द ही की जा सकती है।  6. Kia India की बिक्री Hyundai के स्मामित्व वाली कंपनी Kia India ने अप्रैल 2026 में 27,286 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और Toyota के बाद अपनी दूसरी जगह बनाए रखी. कार बनाने वाली इस कंपनी ने अप्रैल महीने में अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा बिक्री भी दर्ज की, जिसमें उसके मुख्य मॉडल्स की ज़बरदस्त मांग का अहम योगदान रहा।  कंपनी की Kia Seltos और Sonet इस बिक्री में मुख्य योगदान देने वाले मॉडल्स रहे. इस महीने के दौरान दोनों ही मॉडल्स ने 10,000 यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि Kia Carens Clavis ने भी कुल बिक्री को बढ़ाने में अपना योगदान जारी रखा। 

सरकार का नया नियम: LPG कनेक्शन बंद होने से बचने के लिए फटाफट करें ये जरूरी काम

 नई दिल्‍ली वेस्‍ट एशिया में जंग के कारण मिडिल ईस्‍ट से गैस और तेल का आयाता पूरे फ्लो के साथ नहीं आ पा रहा है, जिस कारण भारत में गैस के दाम में उछाल और पैनिंग बाइंग जैसी समस्‍याएं देखने को मिली है. ऐसे में सरकार ने एलपीजी बुकिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन को लेकर कुछ नियमों को सख्‍त किया है, जो एक मई से देशभर में लागू हो रहे हैं।  इसी में से एक नियम डबल गैस कनेक्‍शन को लेकर है. सरकार का कहना है कि अगर आपके पास एलपीजी गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन है और आपके घर पर या घर के आसपास पीएनजी पाइपलाइन का भी कनेक्‍शन है, तो आपको अपने LPG सिलेंडर को सरेंडर करना पड़ेगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो भी आपको तेल कंपनियों की ओर से गैस की सप्‍लाई नहीं की जाएगी. साथ ही आपको केवाईसी गाइडलाइन का भी पालन करना होगा, बिना केवाईसी के भी सिलेंडर रिफील करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।  इस कारण कई परिवारों के लिए, 1 मई से सब्सिडी वाले खाना पकाने के गैस सिलेंडरों तक पहुंच खत्‍म हो जाएगाी. तेल कंपनियों द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों का उद्देश्य डुप्लिकेट कनेक्शन, सब्सिडी वाले सिलेंडरों के दुरुपयोग और निष्क्रिय खातों पर अंकुश लगाना है।  ई-केवाईसी वेरिफिकेशन अगर आपके पास भी एलपीजी का कनेक्‍शन है तो आपको आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी वेरिफिकेशन फटाफट करवा लेना चाहिए. जिन उपभोक्ताओं का आधार कार्ड वेरिफिकेशन अधूरा है, उन्हें वेरिफिकेशन पूरा होने तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिल सकती है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अथेंटिफिकेशन पूरा कर लिया है, उन्हें यह प्रक्रिया दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी।  इसके अलावा, कई क्षेत्रों में ओटीपी आधारित डिलीवरी अनिवार्य होता जा रहा है. ग्राहकों को उनके रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर एक डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड प्राप्त होगा, और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद ही सिलेंडर दिया जाएगा. खबरों के मुताबिक, तेल कंपनियां घरेलू सिलेंडरों की जमाखोरी और व्यावसायिक हेराफेरी को कम करने के प्रयास में बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर को भी बढ़ा रही हैं।   जून 2025 से पहले एलपीजी रिफिल करवाने वालों को भी करना होगा वेरिफाई  सबसे बड़ा जोखिम उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनके केवाईसी रिकॉर्ड अधूरे या पुराने हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन परिवारों ने जून 2025 से पहले एलपीजी सिलेंडर रिफिल करवाया था, उन्हें संभावित निष्क्रिय उपयोगकर्ता के रूप में माना जाएगा. ऐसे उपभोक्ता ई-केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा होने तक नए सिलेंडर ऑर्डर नहीं कर पाएंगे।  अब दो कनेक्‍शन नहीं  जांच के दायरे में आने वाली एक अन्य कैटेगरी में वे घर शामिल हैं, जिनके पास पहले से ही PNG का पाइपलाइन कनेक्शन है. अधिकारी दोहरे ईंधन का उपयोग करने वाले घरों की पहचान करने के लिए एलपीजी और पीएनजी डेटाबेस को रजिस्‍टर्ड कर रहे हैं. कई मामलों में, एक्टिव पीएनजी कनेक्शन वाले यूजर्स सब्सिडी वाले एलपीजी रिफिल या यहां तक ​​कि नए एलपीजी कनेक्शन के लिए भी योग्‍यता खो सकते हैं।  यूजर्स को क्‍या करना चाहिए?      अपने एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर के साथ आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी प्रॉसेस पूरा करें.      तय करें कि ओटीपी डिलीवरी के लिए उनका मोबाइल नंबर अपडेट किया गया हो.      सब्सिडी ट्रांसफर के लिए यह जांच लें कि आधार बैंक खातों से ठीक से जुड़ा हुआ है या नहीं.      यह देखें कि इनएक्टिव या डुप्लिकेट कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं.      क्‍या आपका एरिया पीएनजी कनेक्‍शन के तहत आता है या नहीं.   

45000 टन गैस के साथ होर्मुज से रवाना हुआ टैंकर, LPG सिलेंडर की कमी अब नहीं होगी

नई दिल्ली ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने की वजह से देश में एलपीजी गैस की किल्लत साफ नजर आ रही है। बीते दिनों सरकार ने 5 किलो के छोटे गैस सिलेंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर पर 1 हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। लोगों को आशंका यह भी है कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। इसी बीच एक राहत की खबर भी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक सुपरटैंकर कम से कम 45000 टन एलपीजी गैस के साथ होर्मुज को क्रॉस कर रहा है। इसके भारत पहुंचने से बड़ी राहत की उम्मीद है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुपरटैंकर होर्मुज को पार कर गया है या नहीं। जानकारी के मुताबिक सर्व शक्ति टैंकर समुद्री रास्ते से उत्तर की ओर बढ़ा है। शनिवार को यह लारक और केसम आइलैंड के पास था। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ओमान की खाड़ी से होकर यह सुपरटैंकर भारत पहुंच सकता है। बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान के होर्मुज को बंद रखने की वजह से इस रास्ते से टैंकर निकल नहीं पा रहे हैं। 13 अप्रैल से ही अमेरिका की नाकेबंदी जारी है। फारस की खाड़ी में भारत के 14 जहाज रिपोर्ट्स के मुताबिक नाकेबंदी की वजह से भारत के कम से कम 14 जहाज फारस की खाड़ी में ही रुके हुए हैं। दो जहाजों ने होर्मुज से निकलने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें ईरान की चेतावनी के बाद वापसलौटना पड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि समुद्र में वैकल्पिक रास्ते से भी टैंकर निकल रहे हैं। ईरान से कनेक्शन वाले कम से कम 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर निकल चुके हैं। IOC है खरीदार ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ ने ‘ब्‍लूमबर्ग’ का हवाला देते हुए बताया है कि शिपिंग दस्तावेजों के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) है. हालांकि, कंपनी की तरफ से इसपर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि ‘सर्व शक्ति’ नाम का यह टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर लेता है, तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत से जुड़े किसी टैंकर की पहली सफल रवानगी होगी. दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर हालिया नाकेबंदी के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. पिछले महीने एक सप्ताहांत के दौरान यह मार्ग थोड़े समय के लिए खुला था, लेकिन ईरानी सैन्य कार्रवाई के कारण इसे फिर बंद कर दिया गया. इस दौरान कई जहाजों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा. भारत (जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है) इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में LPG की भारी कमी हो गई है, जिससे कई जगहों पर लंबी कतारें और रसोई सेवाओं में कटौती देखने को मिली है।  सरकार ने उठाए हैं कई कदम इस संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं. केंद्र ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि LPG टैंकरों को प्राथमिकता दी जाए. साथ ही घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के अनुसार, देश में LPG उत्पादन को 60% बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि खपत में भी 10,000 टन की कमी आई है. हालांकि, हालात तब और जटिल हो गए जब अप्रैल में ईरान ने पहले मार्ग खोलने का दावा किया, लेकिन बाद में जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं. इस दौरान ‘देश गरिमा’ नामक एक भारतीय टैंकर ने ट्रांसपोंडर बंद कर जोखिम उठाते हुए रास्ता पार किया था।  भारत को मिली है बड़ी सफलता बताया जा रहा है कि भारत ने अब तक कूटनीतिक बातचीत के जरिए आठ LPG टैंकरों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई है और वैकल्पिक मार्गों की भी तलाश जारी है. ‘सर्व शक्ति’ का यह सफर 10 से 14 घंटे में पूरा हो सकता है. हालांकि, क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और सुरक्षा जोखिम अब भी बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सर्व शक्ति’ की यह यात्रा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।  क्या है वैकल्पिक रास्ता नियम के मुताबिक अमेरिका की नौसेना किसी और देश की समुद्री सीमा में किसी जहाज को नहीं रोक सकती है। ऐसे में अगर कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र से होकर चाबहार बंदरगाह पहुंच जाता है और फिर दक्षिण होकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के रास्ते निकलना चाहे तो यह वैकल्पिक रास्ता हो सकता है। इस रास्ते से महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या फिर केरल के पोर्ट पर पहुंचा जा सकता है। दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर गुजरता है।हालांकि इसमें खतरा बहुत है। बढ़ सकते हैं पेट्रोल डीजल के भी दाम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और चार साल से खुदरा कीमतें स्थिर रहने से बढ़ते घाटे के बीच सरकारी सूत्रों ने निकट भविष्य में पेट्रोल एवं डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि बदले हुए हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। हालांकि इसमें हल्की गिरावट आई है, फिर भी कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

NHAI ने FASTag के गलत इस्तेमाल पर की कार्रवाई, चालाक यूजर्स को ब्लैकलिस्ट और दोगुना टोल

नई दिल्ली नया गंगा एक्सप्रेस-वे हो या फिर अन्य कोई हाइवे, टोल कलेक्शन के लिए FASTag का यूज होता है. अब भारत सरकार के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक पोस्ट करके कुछ लोगों की चालाकी के बारे में बताया है. साथ ही उनको सलाह दी है कि फास्टैग के साथ गलती ना करें।  NHAI ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम) पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में अथॉरिटी ने बताया है कि फास्टैग को अगर विंड स्क्रीन पर चिकपाया नहीं जाता है तो इसकी वजह से फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो सकता है. फास्टैग को लेकर अथॉरिटी ने कहा है कि इसको विंड स्क्रीन पर पेस्ट करना चाहिए. साथ ही वह क्लियर दिखना भी चाहिए।  फास्टैग के लिए लगा रहे ट्रांस्पेरेंट पॉकेट  बहुत से कार चालक ऐसा नहीं कर रहे हैं. वे विंड स्क्रीन पर एक ट्रांस्पेरेंट पॉकेट लगा देते हैं. इसके बाद जब वह एक्सप्रेस-वे या हाईवे पर पहुंचते हैं तो उस पॉकेट के अंदर फास्टैग को रख देते हैं, जबकि फास्टैग को विंडस्क्रीन पर चिपकाना चाहिए।  सफर के बाद निकाल लेते हैं  बहुत से लोग जब एक्सप्रेसवे या हाइवे पर नहीं जाते हैं तो उस फास्टैग को निकालकर रख लेते हैं. आशंका है कि एक फास्टैग का यूज दूसरे नंबर की कार में भी हो सकता है. अथॉरिटी ने बताया है कि ऐसा करना सरासर गलत है. इसकी वजह से फासल्टैग ब्लैक लिस्ट भी हो सकता है।  फास्टैग ब्लैक लिस्ट होने की वजह से वह टोल गेट पर काम नहीं करेगा. ऐसे में आपको पेमेंट कैश में करनी पड़ सकती है, जिसके लिए डबल टोल टैक्स तक की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  FASTag क्या है?  FASTag, असल में एक इलेक्ट्रोनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है. यह फास्टैग एक वॉलेट अकाउंट से कनेक्ट होता है. जैसे ही कार टोल प्लाजा पर पहुंचती है, सिस्टम विंड स्क्रीन पर लगे फास्टैग को ट्रैक करता है और एक्टिवेट फास्टैग के लिए गेट ओपन कर देता है।  फास्टैग अगर ब्लैक लिस्ट है या फिर उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है तो टोल गेट ओपन नहीं होंगे. ऐसे में आपको दोगुना टोल तक पे करना पड़ सकता है।   

बीजेपी का नया कदम, जिला प्रशिक्षण वर्गों में नेताओं के लिए मोबाइल प्रतिबंधित, नीट-यूपीएससी जैसी परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है. इस बीच पार्टी ने नेताओं के लिए एक और टास्क की शुरुआत कर दी है. भाजपा अपने नेताओं की परीक्षा लेगी. जिसका आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा. खास बात यह है कि यह परीक्षा नीट-यूपीएससी एग्जाम की तरह होगी. जिसमें मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिसमें पार्टी की नीति रीति से नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवगत कराया जाएगा. निकाय और पंचायत चुनाव से पहले भाजपा इसी तैयारी में लगी है।  बीजेपी लेगी परीक्षा दरअसल, एमपी में भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है. जिसके लिए सभी जिलों में जिला प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जाना है.  इस दौरान नेताओं का टेस्ट लिया जाएगा. जिसमें नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह मोबाइल फोन पहले ही जमा करा लिए जाएंगे. परीक्षा कक्ष के अंदर किसी तरह की जानकारी नेताओं को लेना बंद रहेगी. इसके लिए एक मोबाइल काउंटर बनाया जाएगा, जहां सभी के मोबाइल जमा होंगे और उसके बाद ही उन्हें टेस्ट देना होगा. इस टेस्ट के जरिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की क्षमता को समझना चाहती है।  नीट-यूपीएससी की तरह मोबाइल रहेगा बैन जिला प्रशिक्षण वर्गों में शामिल होने वाले नेताओं के मोबाइल नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह पहले ही जमा करा लिए जाएंगे। इसके लिए प्रशिक्षण स्थल पर एक मोबाइल काउंटर बना होगा। जहां एक टोकन नंबर देकर मोबाइल जमा करा लिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद होगी परीक्षा प्रशिक्षण वर्ग के बाद नेताओं को पोस्ट टेस्ट देना होगा। यानी प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने क्या सीखा, उनको क्या जानकारी मिली, उन्हें किस सत्र में बताई गई कौन सी बात याद रही। प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा में प्रशिक्षण में बताई गई जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बीजेपी नेताओं को देगी ट्रेनिंग बीजेपी नेताओं की परीक्षा के बाद उन्हें ट्रेनिंग भी देगी. क्योंकि पहले जिला प्रशिक्षण वर्ग होगा, उसके बाद नेताओं को पोस्ट देस्ट देना होगा. प्रशिक्षण में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने क्या सीखा, उन्हें पार्टी से संबंधित क्या जानकारी मिली. किस सत्र में कौन सी बात बताई गई. इससे जुड़े सवाल पूछा जाएंगे. खास बात यह है कि परीक्षा के बाद भी भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दिलाएगी. ताकि भविष्य के हिसाब से नेताओं को तैयार किया जा सके. माना जा रहा है कि बीजेपी इस प्रयोग के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है।  मध्य प्रदेश में अगले साल पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया होने वाली है. ऐसे में भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए एमपी के अलग-अलग जिलों में भाजपा जल्द ही अपने प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां शुरू करने वाली है। 

प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।