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पीएम मोदी और RSS पर अध्ययन करने के लिए नया कोर्स, इस यूनिवर्सिटी ने किया शुरुआत

वडोदरा  वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है.विश्वविद्यालय ने ऐलान किया है कि राष्ट्रीय संघ (RSS) के इतिहास और वर्तमान प्रशासन के मूल सिध्दांतों पर कोर्स शुरू किया गया है. अब छात्र क्लासरूम में मोदी तत्व और RSS की विचारधारा के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे. इस विषय के तहत विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी विभाग के छात्र राष्ट्रीय सेवक संघ के जन्म, इतिहास और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान में इसके योगदान को समझेंगे. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और स्वतंत्रता संग्राम में संघ की क्या भूमिका रही, इस पर विशेष सत्र होंगे. साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन मैनेजमेंट के लिए संघ की कार्यशैली को समझना क्यों जरूरी है।  पीएम मोदी पर होगी पढ़ाई  इस विषय के तहत छात्र अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर आधारित मोदी तत्व विषय भी शामिल किया गया है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के गुण, उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके काम करने के तरीकों की पढ़ाई होगी. समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से यह देखा जाएगा कि मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने समाज पर क्या प्रभाव डाला है।  4 नए कोर्स को मिली मंजूरी  MS यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ स्टडीज में कुल 4 नए कोर्स को मंजूरी दी है. इस पाठ्यक्रम में देश के महान नायकों को भी जगह दी गई है. इसमें वीर सावरकर,महर्षि अरविंद और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों को शामिल किया गया है. इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के शासन और उनके सामाजिक सुधारों को गहराई से पढ़ाया जाएगा. इस अभ्यास क्रम में राष्ट्रवाद की समझ को लेकर चौथा विषय राष्ट्रवाद पर केंद्रित है. इसमें राष्ट्र और राज्य की परिभाषा के साथ-साथ भारतीय समाजशास्त्रियों के राष्ट्रवाद पर क्या विचार थे इस पर चर्चा की जाएगी।  क्या बोली प्रशासन?  विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इन विषयों से छात्र वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से की गई हालिया शोध परियोजनाओं में छात्रों को सरकारी पहलों के साथ गहराई से जुड़ते हुए देखा गया है और इन विषयों को औपचारिक रूप से शामिल करना एक स्वाभाविक प्रगति के रूप में देखा जाता है।   

27,746 करोड़ के पैकेज से आय बढ़ेगी और घटेगी लागत

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मिशन मोड में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस पूरे वर्ष किसानों को उनका वैभव लौटाने का संकल्प लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, कृषि लागत को कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके लिए 16 विभाग एक साथ समन्वय से काम कर रहे हैं। विगत दिनों बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट में 27,746 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी गई है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के 4 बड़े लक्ष्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। आय में वृद्धि के लिए दूध, फल, सब्जी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ अन्य स्रोतों से भी कमाई के अवसर मिलेंगे। लागत में कमी लाने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया जाएगा और मिट्टी परीक्षण के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर अनावश्यक खर्च घटाया जाएगा। तकनीक और विपणन के क्षेत्र में किसानों को अंकीय सेवा, कृषि प्रसंस्करण, कृषि-तकनीक, ड्रोन सेवा और किसान उत्पादक संगठन प्रबंधन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए जल-कृषि जैसे आधुनिक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। सिंचाई क्षमता को विस्तार देने के लिए वर्तमान में 65 लाख हेक्टेयर के सिंचित क्षेत्र को वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। 16 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषि विभाग 3,502.48 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाओं को 31 मार्च 2031 तक चलाएगा। इसके तहत उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और फसल प्रदर्शन योजनाएं संचालित होंगी। मूंग की जगह उड़द उत्पादन पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा और सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाएगा। रोटावेटर आधी कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग 9,508 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से दूध संकलन 25 प्रतिशत तक बढ़ाएगा। पशुपालकों को मोबाइल ऐप से सेवाएं मिलेंगी और पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610.51 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग 4,263.94 करोड़ रुपये की 3 योजनाओं पर काम करेगा। राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन के लिए 1150 करोड़ रुपये और पौधशाला उ‌द्यान के लिए 1,739 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता की पौध और बीज रियायती दरों पर मिलेंगे। सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रुपये से नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां लगाई जाएंगी। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग 218.50 करोड़ रुपये की 2 योजनाएं चलाएगा। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से 3 वर्षों में 3 हजार करोड़ का निवेश और 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। एक लाख पिंजरे स्थापित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सहकारिता विभाग 8,186 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं से किसानों को मजबूती देगा। सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता योजना के लिए 1,975 करोड़ रुपये और अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3,909 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे 3 लाख तक शून्य प्रतिशत दर पर फसल ऋण मिलेगा। नर्मदा घाटी विकास विभाग 2,067.97 करोड़ रुपये के 2 प्रस्तावों पर काम करेगा। बरला उद्वहन सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से 33 गांव के 15,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। जल संसाधन विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल में 2400 करोड़ रुपये से ड्रिप और फव्वारा सिंचाई पर अनुदान देगा। नई सिंचाई परियोजनाओं से खेती का रकबा बढ़ेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी सुनिश्चित करेगा। चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन एवं मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का प्रस्ताव है। तुअर के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। किसानों को खाद की घर पहुंच सेवा दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2010 करोड़ रुपये से ग्रामीण स्तर पर समूह आधारित विकास को बढ़ावा देगा, जिससे खेती के साथ जुड़े अन्य संसाधनों से भी आय के अवसर मिलेंगे। वन विभाग कृषि वानिकी पर उप-मिशन चलाएगा। “हर मेढ़ पर पेड़” के तहत फसलों के साथ वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। ऊर्जा विभाग अगले तीन साल में 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा पम्प देगा। हर साल 10 लाख किसानों को सौर पम्प देकर अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाया जाएगा। उद्योग विभाग कृषि आधारित उद्योगों में किसानों की भागीदारी बढ़ाएगा। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार अनुदान देगी और आलू, टमाटर जैसी फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की जाएंगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंकीय कृषि मिशन लागू करेगा। कृषि ढांचा पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पैकेज को एकीकृत किया जाएगा और कृषि पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ेगा। बीज की गुणवत्ता के लिए नई प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी। ग्रामीण आजीविका मिशन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए 1010 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह 15,000 ग्राम पंचायत समूहों में लागू होगा और 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगा। 10,000 जैव-निवेश संसाधन केंद्र स्थापित होंगे। बीज प्रमाणीकरण विभाग प्रमाणित बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। कोदो-कुटकी और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस और प्रोत्साहन दिया जाएगा। राजस्व विभाग जिला स्तर पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी को मजबूत करेगा। फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिससे पानी की अधिक खपत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आता है। किसानों को नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी देने के लिए विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करेंगे। इसके लिए प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। सरकार का संकल्प है कि ‘समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047’ के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।  

रेखा सरकार की योजना फेल? ‘पिंक सहेली कार्ड’ से महिलाओं ने बनाई दूरी

नई दिल्ली दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ योजना फिलहाल उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 5.56 लाख कार्ड जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 से 6 प्रतिशत यानी करीब 6,000 से 8,000 महिलाएं ही इनका इस्तेमाल कर रही हैं। पुरानी व्यवस्था से नए सिस्टम में बदलाव बना चुनौती इस योजना की शुरुआत 2 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की थी। इसका उद्देश्य पिछली आप सरकार द्वारा 2019 में शुरू किए गए पिंक टिकट सिस्टम को खत्म कर केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ (NCMC) प्रणाली लागू करना था। इसके जरिए यह सुनिश्चित करना भी मकसद था कि केवल दिल्ली में रहने वाली 12 साल से ऊपर की महिलाएं ही मुफ्त यात्रा का लाभ ले सकें। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं पुराने पिंक टिकट का ही इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित रह गया है। रोजाना 6-7 लाख महिला यात्री, फिर भी कार्ड का कम उपयोग दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के अनुसार, राजधानी में रोजाना करीब 23 लाख लोग बसों में सफर करते हैं, जिनमें 6 से 7 लाख महिलाएं शामिल होती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से आधी से भी कम महिलाएं पिंक स्मार्ट कार्ड का उपयोग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी टिकट सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा। अब होगा सर्वे और फिर सख्ती DTC अब इस कम उपयोग के पीछे के कारणों को समझने के लिए सर्वे कराने की तैयारी में है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या महिलाओं के पास कार्ड नहीं है, क्या वे अन्य राज्यों से हैं या फिर बस कंडक्टर कार्ड इस्तेमाल के लिए प्रेरित नहीं कर रहे है। इसके अलावा, बसों में औचक निरीक्षण भी की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि कार्ड का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा। जुलाई से अनिवार्य हो सकता है कार्ड अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई से पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य किया जा सकता है, और धीरे-धीरे पिंक टिकट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले मई-जून में बसों के अंदर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। 450 करोड़ का है बजट महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना पहली बार 2019 में लागू की गई थी, जिसके तहत अब तक 150 करोड़ से ज्यादा पिंक टिकट जारी किए जा चुके हैं। वहीं, मौजूदा सरकार ने इस योजना को जारी रखते हुए 2026-27 बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे यह साफ है कि सरकार इस सुविधा को और मजबूत करना चाहती है। कैसे बनता है पिंक सहेली कार्ड? फिलहाल यह कार्ड दिल्ली के 58 केंद्रों पर जारी किया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली का आधार कार्ड जरूरी है, आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए, 12 साल या उससे अधिक उम्र की कोई भी महिला आवेदन कर सकती है।

नई जल नीति से गांवों को ताकत, पंचायतें संभालेंगी पानी सप्लाई और बिलिंग

फतेहाबाद  ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिले की 233 ग्राम पंचायतों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई आपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के तहत अब पंचायतें खुद पानी के बिल की वसूली, जल आपूर्ति प्रबंधन और रख-रखाव का काम संभालेंगी। खास बात यह है कि पंचायत जितना राजस्व बिल के रूप में एकत्रित करेगी, सरकार भी उतनी ही अतिरिक्त राशि पंचायत के खाते में देगी। इससे पंचायतों को जल सुविधाओं के सुधार और विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे। जिले में 258 पंचायतें है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा। इस योजना के तहत चयनित पंचायतों के बैंक खाते खोले जा रहे हैं, जिन्हें मुख्यालय स्तर के सिंगल खाते से जोड़ा जाएगा। पंचायतों द्वारा एकत्रित राजस्व पहले मुख्य खाते में जमा होगा, जिसके बाद सरकार उसी राशि को जोड़कर दोगुनी रकम पंचायत को वापस देगी। इस राशि का उपयोग जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें पंचायतों को मिली व्यापक जिम्मेदारी नई नीति के तहत पंचायतें अब पानी के कनेक्शन जारी करने, बिल वसूली, शिकायत निवारण, मीटरिंग और जल गुणवत्ता की निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके अलावा पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, पंप और अन्य संसाधनों की मरम्मत व रख-रखाव भी पंचायतों के जिम्मे होगा। अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई और जल हानि को कम करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। पानी के बिलों की वसूली में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को जोड़ा गया है। उपभोक्ताओं से प्राप्त जल शुल्क का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में इन समूहों को दिया जाएगा। इससे न केवल वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी। पंचायतें बिस्वास पोर्टल के माध्यम से नए कनेक्शन जारी करने, कनेक्शन काटने, मीटर लगाने और शिकायतों का आनलाइन समाधान कर सकेंगी। इसके साथ ही बिल वितरण, भुगतान की निगरानी और उपभोक्ताओं को एसएमएस के जरिए सूचना देने की जिम्मेदारी भी पंचायतों को दी गई है। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी। योजना के तहत प्रत्येक उपभोक्ता को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल गुणवत्ता की नियमित जांच फील्ड टेस्ट किट से की जाएगी और वितरण के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करेगा। विभाग द्वारा जल आपूर्ति योजनाओं को अपग्रेड कर 24 घंटे जल उपलब्धता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण जल आपूर्ति अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी। साथ ही पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में जिले की सभी पंचायतों को इस योजना के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है।

भवानीपुर में भाजपा की बढ़त, ममता बनर्जी की राजनीति को क्या होगी चुनौती?

नई दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नतीजों की घड़ी आ गई है. वोटों की गिनती के साथ ही रुझान आने शुरू हो गए हैं. बंगाल के रुझानों में टीएमसी-बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं असम में बीजेपी आगे चल रही है जबिक केरलम में यूडीएफ को बढ़त दिख रही है. वहीं तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अपनी बढ़त को कायम किए हुए है.  जिन पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज आ रहे हैं, उनमें पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही केरल और तमिलनाडु भी शामिल हैं. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में रंगास्वामी राज जारी रहेगा या सत्ता बदलेगी, इसका फैसला भी आज आएगा।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. जिन पर वोट डाले गए थे. पहले चरण में 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले गए थे. एक सीट पर पुनर्मतदान होना है, जिसकी वजह से आज 293 सीटों के नतीजे आ रहे हैं. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच टाइट फाइट नजर आ रही है।  बंगाल में बीजेपी 129 सीटों पर आगे पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने फिर से लीड ले ली है. बीजेपी के उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में 129  सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, टीएमसी 110 सीटों पर आगे है. कांग्रेस एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. लेफ्ट का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है।  असम में बहुमत से आगे निकली बीजेपी असम के रुझानों में बीजेपी बहुमत के आंकड़े से आगे निकल गई है. बीजेपी 66 सीटों पर आगे निकल गई है. कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन 19 सीटों पर आगे चल रहा है. अन्य का खाता अब तक खुलता नहीं नजर आ रहा है।   बंगाल के रुझानों में टाइट फाइट पश्चिम बंगाल के शुरुआती रुझानों में फाइट टाइट दिख रही है. कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. फिलहाल, बीजेपी ने 122 विधानसभा सीटों पर लीड ले ली है. टीएमसी भी अधिक पीछे नहीं है. ममता बनर्जी की पार्टी 105 सीटों पर आगे चल रही है।  बंगाल और असमें बीजेपी को बढ़त, केरलमें यूडीएफ आगे बंगाल में 162 सीटों के रुझान आ गए ङैं जिसमें बीजेपी 88 सीटों पर आगे है जबकि टीएमसी72 सीटों पर आगे है. वहीं असम में 126 में से 54 सीटों के रुझान आ गए हैं जिसमें बीजेपी 44 सीटों पर आगे हैं जबकि कांग्रेस 10 सीटों पर आगे है.  केरलम में 140 सीटों में से 27 के रुझान आए हैं जिसमें यूडीएफ 15 और एलडीएफ और बीजेपी 5-5 सीटों पर आगे चल रहे हैं।  कभी बीजेपी, तो कभी टीएमसी आगे निकल रही है. शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी, दोनों दलों की लीड का आंकड़ा सौ के पार पहुंच चुका है. सत्ताधारी टीएमसी ममता बनर्जी की अगुवाई में जीत का चौका लगाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी को कमल खिलने की पुरजोर उम्मीद है., पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद से अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया है. सूबे में 92 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सूबे की विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।  एक्टर विजय का प्रचंड उलटफेर, असम में बीजेपी की जीत तय पश्चिम बंगाल : बैलट पेपर के शुरुआती रुझानों के मुताबिक बीजेपी आगे चल रही है. हालांकि टीएमसी ज्यादा पीछे नहीं है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में 294 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 148 है. एक सीट फालटा में वोटों की गिनती नहीं हो रही है. बीजेपी की पैठ इस बार दमदार है. अब तक भद्रलोक बीजेपी के साथ नहीं था. इस बार कोलकाता, हावड़ा, आसनसोल जैसे शहरी इलाकों में 2021 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई. इसका असर रुझानों में है. इन शहरी सीटों पर बीजेपी आगे है।  तमिलनाडु : डीएमके पर जनता फिर भरोसा जताती दिख रही है. एक्टर विजय के टीवीके से भी पिछड़ गई है एआईएडीएमके. तमिलनाडु विधानसभा में 324 सीटें हैं और बहुमत के लिए 173 सीटें चाहिए।   तमिलनाडु में टीवीके बड़ी ताकत के तौर पर उभर रही है असम : कांग्रेस से अलग होने के बाद इसी की हस्ती मिटाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा भगवा झंडा फिर फहराने की तैयारी में है. असम विधानसभा में 126 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है।  केरलम : अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा लेफ्ट फ्रंट कठिन दौर से गुजर रहा है. हालांकि पिनरई विजयन की पार्टी कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को कड़ी टक्कर दे रही है. अगर एलडीएफ की हार होती है तो पूरे देश से कम्युनिस्टों का सफाया हो जाएगा. ताजा डेटा के मुताबिक 76 सीटों पर यूडीएफ आगे है. केरलम विधानसभा में 140 सीटें हैं और बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है. रुझान अगर परिणाम में तब्दील हो गए तो कांग्रेस का सीएम बनना तय है।  असम में विधानसभा की कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. प्रदेश की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने का भरोसा है. वहीं, सूबे की सत्ता से 10 साल लंबा वनवास समाप्त कराने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस को भी जीत की उम्मीद है. प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड 85 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है।  तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों हैं. इन सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था. सूबे में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया और मतदान का आंकड़ा सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए 85.14 फीसदी तक पहुंच गया. सूबे में डीएमके की अगुवाई वाली मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार है. विपक्षी एनडीए की अगुवाई सूबे में एआईएडीएमके कर रही है. थलापति विजय की अगुवाई वाली नई नवेली टीवीके मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है।  केरलम की बात करें तो इस तटीय प्रदेश की 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे. इस बार सूबे में 78.27 फीसदी मतदान हुआ है. वहीं, केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए भी 9 अप्रैल को ही वोट डाले … Read more

मुरैना में भय का माहौल: वन आरक्षक की हत्या और पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

मुरैना  मुरैना की जनता लंबे समय से कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित थी। बढ़ते अपराध और वन आरक्षक की हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल बना दिया था।इस समस्या का बड़ा कारण पुलिस अधीक्षक की अनदेखी अनसुनी सुस्त कार्य प्रणाली रही है।  पुलिस अधीक्षक की लापरवाह कार्य प्रणाली के बारे मे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र तिवारी ने निरन्तर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के सामने प्रमुखता से रखा था,आवश्यक होने पर आंदोलन की बात भी कही। माननीय मुख्य मंत्री महोदय अंतत श्री तिवारी की बात को गंभीरता से लिया और आज एसपी का परिवर्तन कर नए एसपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह  मुरैना जिले के हर कार्यकर्ता और आमजन की जीत है। इसके लिए श्री ……………ने श्री नागेंद्र तिवारी को बधाई धन्यवाद देते हुए माननीय मुख्य मंत्री महोदय सरकार और संगठन का हृदय से आभार व्यक्त किया है, व आशा व्यक्त की है कि नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक श्री मीणा जी के निर्देश मे  जिले मे अपराधो पर नियंत्रण होकर शान्ति सुरक्षा कायम होगी।

एम्स का कमाल: 7 माह से पैरालिसिस झेल रही महिला फिर हुई सक्रिय, स्पाइनल ट्रीटमेंट से मिला राहत

भोपाल भोपाल एम्स में एक महिला को मानो नया जीवन दिया गया है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय यह महिला पिछले सात महीनों से न चैन से बैठ पा रही थी और न ही सो पा रही थी। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' जैसी गंभीर स्थिति का शिकार थीं, जिसमें मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं। वह लकवे जैसी लाचारी और असहनीय पीड़ा जूझ रही थी। ल्बे समय से चल रहे उपचार व दवाओं के हैवी डोज के बावजूद कोई राहत नहीं मिल रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था। ऐसे में एम्स भोपाल दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीमें आगे आईं। डॉक्टर्स ने आइटीबी तकनीक अपनाकर महिला की दिक्कत दूर कर दी। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में लगनेवाला लाखों का खर्च भी बचा दिया। वरदान बनी आइटीबी तकनीक महिला कई माह से परेशान थीं। आखिरकार एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने इस जटिल चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. अनुज जैन और डॉ. सुमित राज के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी' (आइटीबी) अपनाने का निर्णय लिया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन पर सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसमें दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल क्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम खुराक में ही अधिकतम लाभ मिलता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं। उपचार की प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलते ही डॉक्टरों ने त्वचा के नीचे एक छोटा 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्रत्यारोपित कर दिया। यह डिवाइस निरंतर दवा की नियंत्रित मात्रा शरीर को पहुंचाता रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्दमुक्त है और सामान्य नींद ले पा रही है। एम्स में महज 7 लाख रुपए में उपचार: कम से कम 3 लाख रुपए बचाए निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपए से अधिक में होने वाला यह उपचार एम्स में मात्र 7 लाख रुपए में संभव हुआ। डॉ. जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं है। डॉ. सुमित राज ने इसे टीम वर्क की जीत बताया।

बड़ी राहत का ऐलान: आउटसोर्स कर्मचारियों को ₹26 हजार वेतन और स्थायी नौकरी का वादा, तारीख पर सस्पेंस

भोपाल बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।

सोमाली डाकुओं का फिर समुद्र में राज, 10 दिन में दूसरा तेल टैंकर हाईजैक, US नेवी ने किया मूक दर्शक

वॉशिंगटन  अमेरिका और ईरान के तनाव के कारण होर्मुज बंद है. वहीं जो जहाज लाल सागर से गुजर रहे हैं उनके ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है. यमन के तट के पास एक बार फिर समुद्री लुटेरों का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है. सोमालिया के समुद्री डाकुओं ने एक तेल टैंकर को हाईजैक कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर चिंता बढ़ गई है. यह तब हुआ है जब अमेरिकी नेवी अरब सागर में मौजूद है. BBC की रिपोर्ट में कहा गया कि सोमाली सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ‘MT यूरेका’ (MT Eureka) नाम के इस टैंकर को गल्फ ऑफ अदन में हथियारबंद लोगों ने कब्जे में ले लिया. रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 5 बजे हुआ. टैंकर टोगो के झंडे के तहत चल रहा था और यमन के काना पोर्ट के पास समुद्री लुटेरों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया. बताया जा रहा है कि हमलावर सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र के क़ंदाला इलाके से निकले थे और सीधे जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।  जहाज कहां ले जा रहे लुटेरे? सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, हाईजैक के बाद टैंकर अब यमन और सोमालिया के बीच गल्फ ऑफ अदन में आगे बढ़ रहा है और जल्द ही सोमालियाई जलक्षेत्र में लंगर डाल सकता है. इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह पिछले 10 दिनों में दूसरी बड़ी घटना है. इससे पहले 22 अप्रैल को ‘ऑनर 25′ नाम के एक और तेल टैंकर को सोमाली समुद्री डाकुओं ने कब्जे में लिया था, जिसमें 18,500 बैरल तेल था और वह मोगादिशु जा रहा था. उसके क्रू में पाकिस्तानी और एक भारतीय भी थे. लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि समुद्री लुटेरों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।   

CSK से हार के बाद MI की प्लेऑफ में पहुंचने की राह कठिन, हार्दिक पंड्या ब्रिगेड का क्या होगा हाल?

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में मुंबई इंडियंस (MI) का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम एमआई ने 9 में से सिर्फ 2 मुकाबले जीते हैं, जबकि 7 मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा. 2 मई (शनिवार) को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ मुकाबले में मुंबई इंडियंस की बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग प्रभावहीन रही. मुंबई इंडियंस इस मैच में 7 विकेट पर 159 रनों का स्कोर ही बना सकी. मुश्किल हालात में नमन धीर ने 57 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से कोई खास साथ नहीं मिला।  159 जैसे औसत लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने मैच को एकतरफा बना दिया. कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने नाबाद 67 रनों की शानदार पारी खेली और टीम को 18.1 ओवर में ही जीत दिला दी. सीएसके ने यह मुकाबला आठ विकेट से जीतकर अपनी प्लेऑफ की उम्मीदों को पूरी तरह जिंदा रखा. दूसरी ओर सीएसके के खिलाफ एक और हार के साथ मुंबई इंडियंस की स्थिति और गंभीर हो गई है. मुंबई इंडियंस 4 अंकों के साथ अंकतालिका में नौवें स्थान पर है और उसका नेट रनरेट -0.803 है।  मुंबई इंडियंस के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी समस्या उनकी मिडिल ओवरों में बल्लेबाजी रही है. टीम अच्छी शुरुआत के बाद विकेट गंवाकर दबाव में आ जाती है. सीएसके के खिलाफ भी यही देखने को मिला, जहां मजबूत स्थिति के बावजूद टीम अचानक बैकफुट पर आ गई. गेंदबाजी में भी टीम पूरी तरह प्रभावी नहीं रही है. कम स्कोर के कारण गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव रहता है, जिसका फायदा विपक्षी टीम आसानी से उठा रही है।  14 अंक भी नहीं होंगे पर्याप्त? मुंबई इंडियंस यदि अपने बाकी के पांच मैच जीतती है, तो भी वो 14 अंकों तक पहुंच पाएगी. अब मुंबई इंडियंस के लिए आगे का रास्ता बेहद कठिन हो गया है. टीम को अपने बचे सभी मैच तो जीतने ही होंगे, साथ ही नेट रनरेट में भी बड़ा सुधार करना होगा. इसके अलावा, उन्हें अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा. यदि मुंबई एक भी मैच हारी, तो वो लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. गणितीय रूप से भले ही मुंबई अभी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुई हो, लेकिन मौजूदा फॉर्म और लगातार हो रही गलतियों को देखते हुए प्लेऑफ में पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव नजर आ रहा है।  मुंबई इंडियंस के बचे मुकाबले 4 मई: बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स, मुंबई 10 मई: बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, रायपुर 14 मई: बनाम पंजाब किंग्स, धर्मशाला 20 मई: बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, कोलकाता 24 मई: बनाम राजस्थान रॉयल्स, मुंबई आईपीएल 2026 में एक और करारी हार के बाद मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पंड्या का दर्द छलक पड़ा. हार्दिक ने मान लिया कि इस सीजन उनकी टीम कभी ट्रैक पर आई ही नहीं. मैच के बाद हार्दिक पांड्या ने साफ शब्दों में कहा, "यह हमारा सीजन नहीं है. सीएसके हर विभाग में बेहतर रही. उन्होंने बेहतर गेंदबाजी की, बेहतर बल्लेबाजी की और फील्डिंग भी शानदार रही।  हार्दिक पंड्या ने यह भी स्वीकार किया कि अगर उनकी टीम 180-190 रन तक पहुंच पाती, तो मुकाबला अलग हो सकता था. लेकिन मुंबई की बल्लेबाजी कभी लय में नहीं आई और टीम पूरे मैच में दबाव में दिखी. गेंदबाजी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीम के पास जो विकल्प थे, उसी के साथ उन्हें उतरना पड़ा. हार्दिक कहते हैं, "हमें शायद कुछ अलग करना पड़ता, लेकिन सच कहूं तो हमें बल्लेबाजों को आउट करने के लिए 'फायरबॉल' की जरूरत थी।  कुल मिलाकर मुंबई इंडियंस के लिए यह सीजन एक ऐसी कहानी बन गया है, जहां हर मैच में वही गलती दोहराई जा रही है. अगर तुरंत बदलाव नहीं हुआ, तो पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम इस बार प्लेऑफ से बाहर होती नजर आ रही है।