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पटना में गैस संकट का असर, लिट्टी-चाय से लेकर समोसा तक हुआ महंगा

 पटना व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी का असर अब राजधानी के बाजार में साफ दिखने लगा है। होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ते की दुकानों और स्ट्रीट फूड तक, हर जगह लागत बढ़ने का दबाव महसूस किया जा रहा है। स्थिति यह है कि लिट्टी, चाय एवं समोसा के कीमत भी बढ़े है। गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल ने कारोबारियों को वैकल्पिक ईंधन कोयला और लकड़ी की ओर धकेल दिया है, इससे खान-पान की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगे है। स्ट्रीट फूड की कीमतों में पांच से 10 रुपये तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 40-45 रुपये मिलने वाला एग राल 50-60 रुपये, 12 रुपये का समोसा 15-18 रुपये मिलने लगा है। 10 रुपये ग्लास वाली चाय की कीमत 12 से 15 रुपये तक पहुंच गई है। बाजार में मार्च के पहले सप्ताह से ही व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित है। पहले जहां शहर में हर दिन करीब पांच हजार सिलेंडर आपूर्ति दिए जाते थे, यह आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंची है। अभी लग्न या कार्यक्रम को लेकर कार्ड के साथ आवेदन देने पड़ रहे है। कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति में करीब 30 प्रतिशत की कमी के चलते होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी-कोयले की भट्टी या इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं। लेकिन यह विकल्प भी सस्ता नहीं पड़ रहा। कोयला का दाम 20 रुपये बढ़ा कोयले की कीमतों में अचानक उछाल आया है। पहले 18 से 20 रुपये किलो मिलने वाला कोयला अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले के दाम इससे भी ज्यादा हैं। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। राजीवनगर के दुकानदार संजय ने बताया कि अब कोयला का आर्डर भी पहले देना पड़ रहा है। इसके बाद थोक व्यापारियों की ओर से आपूर्ति किया जाता है। कैटरिंग कारोबारी जैनेंद्र सिंह बताते है कि पहले कोयला वाला चूल्हा का उपयोग शाही या अन्य कार्यक्रम में नहीं होते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता अब बढ़ी है। इसके दाम भी बढ़ने से आयोजन का बजट भी बढ़ने लगा है। एक सप्ताह में कीमतों को तेजी से दिखेगी वृद्धि बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल गैस में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी बीते वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसका सीधा असर खान-पान की वस्तुओं पर पड़ेगा। आने वाले एक सप्ताह में खाद्य सामग्री की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगा। खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यह इजाफा खासकर मिठाइयों, रेस्टोरेंट के मेन्यू, हास्टल मेस और स्ट्रीट फूड हर जगह कीमतों में इजाफा दिख सकता है। हालांकि कई कारोबारियों ने फिलहाल कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन वे भी मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा। इसका असर सभी सेक्टर पर देखने को मिलेगा।

इंडिया-ए महिला T-20 टीम की कप्तान बनीं अनुष्का, इंग्लैंड-ए के खिलाफ अपनी कप्तानी में खेलेंगी 3 मैच

ग्वालियर  बीसीसीआई ने इंग्लैंड टूर के लिए भारतीय महिला ए क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया है. इस बार इंग्लैंड के खिलाफ T20 सीरीज की कप्तानी के लिए ग्वालियर की बेटी अनुष्का शर्मा पर भरोसा जताया है. अनुष्का शर्मा की कप्तानी में वुमन इंडियन ए क्रिकेट टीम टी20 क्रिकेट के 3 मुकाबले इंग्लैंड के खिलाफ खेलेगी।  बीसीसीआई ने घोषित की इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम भारतीय क्रिकेट में ग्वालियर का बोलबाला होने जा रहा है. ये शायद पहली बार होगा जब भारतीय क्रिकेट टीम को ग्वालियर की बेटी कप्तानी संभालेगी. ग्वालियर की अनुष्का शर्मा को टी20 मुकाबलों के लिए इंडिया-ए स्क्वाड की घोषणा के साथ इंग्लैंड टूर का टीम कप्तान बनाया है. इंग्लैंड दौरे से पहले वन डे और टी20 दोनों ही क्रिकेट फॉर्मेट के लिए बीसीसीआई ने वुमेंस इंडिया-ए स्क्वॉड्स का ऐलान कर दिया है।  अनुष्का शर्मा टी20, हरलीन देओल वन-डे की कैप्टन अनुष्का शर्मा को जहां इंग्लैंड के लिए टीम कैप्टेंसी सौंपी गई है वहीं इसी स्क्वाड में ग्वालियर की वैष्णवी शर्मा को भी टीम में शामिल किया गया. दोनों ही खिलाड़ियों के खेल में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए बीसीसीआई ने दोनों पर भरोसा जताया है. इंडिया ए महिला टीम का इंग्लैंड टूर आगामी 20 जून से शुरू होगा. इस सीरीज के टी20 मुकाबले नॉर्थम्पटन और चेल्सफोर्ड में खेले जाएंगे. वहीं वन-डे मैचेस के लिए घोषत स्क्वॉड की कैप्टन की जिम्मेदारी एक बार फिर हरलीन देओल के कंधों पर है।  पहले लग चुके हैं चकिंग के आरोप ग्वालियर और अनुष्का शर्मा के लिए ये बड़ी ऑपर्च्युनिटी है. इससे पहले अप्रैल में साउथ अफ्रीका सीरीज में भारतीय महिला सीनियर टीम में उन्होंने अपना डेब्यू किया था और अब टीम की जिम्मेदारी संभालने का मौका उन्हें बीसीसीआई ने दिया है. ये इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि, साल 2024 में अनुष्का शर्मा पर चकिंग के आरोप लगे थे. जिस पर बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी पर बैन लगा दिया था, और अब उन्हें टीम कप्तान बना दिया है।  डेब्यू के तुरंत बाद मिली इंडिया ए की कप्तानी अनुष्का शर्मा की बात करें तो उन्होंने हाल ही में साउथ अफ्रीका दौरे पर भारत के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया था। अब कुछ ही दिनों के अंतराल में उन्होंने इंडिया ए की कप्तानी मिल गई है। इस खिलाड़ी ने WPL 2026 में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। इंडिया ए वुमेंस टी20 टीम की उपकप्तान वृन्दा दिनेश को बनाया गया है। जबकि प्रतिका रावल वनडे टीम की उपकप्तान हैं। यह टीम उस वक्त इंग्लैंड दौरे पर ए टीम का सामना करेगी, जिस वक्त सीनियर टीम टी20 वर्ल्ड कप खेल रही होगी। इंडिया ए बनाम इंग्लैंड ए सीरीज का शेड्यूल     पहला टी20: 20 जून 2026, नॉर्थैम्पटन काउंटी ग्राउंड     दूसरा टी20: 23 जून 2026, नॉर्थैम्पटन काउंटी ग्राउंड     तीसरा टी20: 25 जून 2026, Chelmsford काउंटी ग्राउंड     पहला वनडे: 28 जून 2026, Hove काउंटी ग्राउंड     दूसरा वनडे: 1 जुलाई 2026, टॉन्टन     तीसरा वनडे: 4 जुलाई 2026, टॉन्टन इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय महिला ए टीम के स्क्वाड     टी20 इंडिया ए स्क्वाड: अनुष्का शर्मा (कप्तान), वृन्दा दिनेश (उपकप्तान), जी कमालिनी (विकेटकीपर), उमा छेत्री, वैष्णवी शर्मा, प्रेमा रावत, पूर्वजा वेर्लेकर, जिंतीमनी कलिता, साइमा ठाकुर, सिमरन शर्मा, श्वेता सेहरावत, दीया यादव, मिन्नू मनी, शबनम शकील, तनुजा कंवर।     वनडे इंडिया ए स्क्वाड: हरलीन देओल (कप्तान), प्रतिका रावल (उपकप्तान), प्रिया पूनिया, तनिषा सिंह, जी कमालिनी (विकेटकीपर), उमा छेत्री (विकेटकीपर), तेजल हसबनीस, निकी प्रसाद, प्रेमा रावत, तनुजा कंवर, वैष्णवी शर्मा, शबनम शकील, सयाली सतघरे, जिंतीमनी कलिता, साइमा ठाकुर। हरमनप्रीत कप्तान, स्मृति मंधाना उपकप्तान: T20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान, WPL के 2 नए नाम शामिल 12 जून से शुरू होने वाले महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड की घोषणा कर दी गई है। हरमनप्रीत कौर को इस टीम की कमान सौंपी गई है और स्मृति मंधाना उपकप्तान हैं ये है इंडिया-ए (महिला) टी20 स्क्वाड अनुष्का शर्मा (कप्तान), वृंदा दिनेश (उप कप्तान), जी कमलिनी (विकेट कीपर), उमा चेट्री, वैष्णवी शर्मा, प्रेमा रावत, पूर्वाजा वर्लेकर, जिन्तिमणि कलिता, साइमा ठाकुर, सिमरन बहादुर, श्वेता सहरावत, दीया यादव, मीनू मणि, शबनम शकील, तनुजा कंवर  

शेयर बाजार घोटाले के आरोपों पर शाकिब अल हसन ने तोड़ी चुप्पी, जांच पर जताया भरोसा

बांग्लादेश बांग्लादेश के दिग्गज ऑलराउंडर शाकिब अल हसन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शेयर बाजार में हेरफेर, भ्रष्टाचार रोधी जांच और चेक-बाउंस मामलों से जुड़े आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि लंबे समय से चल रही जांच में अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. शाकिब अल हसन ने बताया कि जांच के दौरान उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला. शाकिब ने बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट bdnews24.com से कहा, 'मेरा बैंक खाता फ्रीज है, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकता.शायद जांच के लिए ऐसा किया गया,. लेकिन डेढ़ साल से जांच चल रही है और अभी तक कुछ नहीं मिला.' शाकिब अल हसन ने साफ कहा कि अगर जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोई सबूत मिलता है, तो वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं. शाकिब कहते हैं, 'अगर दोष साबित होता है तो कार्रवाई करें। अगर कुछ नहीं मिलता, तो मुझे क्लियरेंस दें और मुक्त करें.' शाकिब पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. शाकिब अल हसन ने कहा कि अब उन्हें कुछ भी असामान्य नहीं लगता, लेकिन अपने देश लौटने पर गिरफ्तारी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. शाकिब ने ही यह भी स्वीकार किया कि वतन वापसी पर उन्हें गिरफ्तारी का डर है. शाकिब अल हसन का अपने देश लौटना फिलहाल मुश्किल है. बांग्लादश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने स्पष्ट कर दिया था कि वह शाकिब को किसी भी प्रकार की सुरक्षा की गारंटी देने की स्थिति में नहीं है. इसी कारण शाकिब पिछले कई महीनों से बांग्लादेश से बाहर हैं. निकट भविष्य में भी उनकी वापसी की संभावना बेहद कम मानी जा रही है. 39 वर्षीय शाकिब अल हसन का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद शानदार रहा है. वह बांग्लादेश के सबसे सफल क्रिकेटर माने जाते हैं. शाकिब ने 71 टेस्ट, 247 ओडीआई और 129 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं. टेस्ट क्रिकेट में शाकिब ने 4609 रन बनाए और 246 विकेट झटके हैं. वहीं वनडे इंटरनेशनल में शाकिब के नाम पर 7570 रन और 317 विकेट दर्ज हैं. टी20 इंटरनेशनल में शाकिब ने 149 विकेट लेने के अलावा 2551 रन बनाए हैं. शाकिब अल हसन के बयान से साफ है कि वह खुद को बेगुनाह मानते हैं और जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताते हैं. अब नजर इस बात पर होगी कि संबंधित एजेंसियां इस मामले में आगे क्या फैसला लेती हैं.

ED रेड से हड़कंप: 13 ठिकानों पर छापेमारी, कैश-गोल्ड के साथ अहम दस्तावेज बरामद

रायपुर. छत्तीसगढ़ में सामने आए बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. रायपुर जोनल कार्यालय की टीम ने एक साथ कई शहरों में छापेमारी कर करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और अहम दस्तावेज जब्त किए हैं. यह कार्रवाई उस संगठित शराब घोटाले की जांच का हिस्सा है, जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी स्तर पर बड़े नामों के शामिल होने की बात सामने आ चुकी है. ED ने 30 अप्रैल 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत एक साथ तलाशी अभियान चलाया. रायपुर, दुर्ग/भिलाई और बिलासपुर जिलों में कुल 13 परिसरों पर छापे मारे गए. ये ठिकाने शराब व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, व्यवसायियों और कुछ कॉरपोरेट संस्थाओं से जुड़े थे, जिन पर घोटाले की काली कमाई को छिपाने और घुमाने का शक है. नकदी और सोने की बड़ी जब्ती तलाशी के दौरान ED को बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामान हाथ लगा. टीम ने 53 लाख रुपये नकद और करीब 3.234 किलो सोना बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.86 करोड़ रुपये बताई गई है. इस तरह कुल जब्ती करीब 5.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसके अलावा कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डेटा भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है. EOW‑ACB की FIR से शुरू हुई ED जांच छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED ने PMLA के तहत शुरू की है. यह जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर द्वारा दर्ज FIR के आधार पर चल रही है. जांच में सामने आया कि घोटाले की पूरी योजना पहले से तय और व्यवस्थित तरीके से बनाई गई थी. राजनीति, अफसर और शराब कारोबारी शामिल ED की जांच में खुलासा हुआ है कि इस घोटाले में राजनीतिक पदाधिकारी, वरिष्ठ नौकरशाह, शराब निर्माता, FL‑10A लाइसेंसधारी और उनके करीबी लोग शामिल हैं. आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच शराब की खरीद, लाइसेंस और बिक्री के दौरान अवैध कमीशन वसूला गया. EOW/ACB की चार्जशीट के मुताबिक, इस घोटाले से करीब 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई है. अब तक 9 गिरफ्तारियां जांच के दौरान ED अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी, CSMCL के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, तत्कालीन आबकारी आयुक्त, तत्कालीन आबकारी मंत्री, तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र और मुख्यमंत्री के तत्कालीन उप सचिव जैसे बड़े नाम शामिल हैं. एजेंसी कई और कड़ियों की जांच कर रही है. 380 करोड़ की संपत्तियां कुर्क ED ने अब तक PMLA की धारा 5 के तहत छह अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं. इनके जरिए लगभग 380 करोड़ रुपये की चल‑अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं. इनमें मकान, व्यावसायिक संपत्ति, बैंक बैलेंस, वाहन, आभूषण और शेयर शामिल हैं, जो आरोपियों और उनकी बेनामी संस्थाओं के नाम पर दर्ज बताए जा रहे हैं. कई मामलों में PMLA की निर्णायक प्राधिकरण ने कुर्की को मंजूरी भी दे दी है. अदालत में चल रहा मामला ED अब तक रायपुर स्थित PMLA की विशेष अदालत में छह अभियोजन शिकायतें दाखिल कर चुकी है. इनमें 81 आरोपी व्यक्ति और संस्थाएं नामजद हैं. यह मामला विशेष अदालत, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर ईरान का सख्त रुख

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने सोमवार को अमेरिकी सेना को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज में प्रवेश करते हैं, तो उन पर हमला कर दिया जाएगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने कहा, 'हम चेतावनी देते हैं कि किसी भी विदेशी सशस्त्र बल, विशेष रूप से आक्रामक अमेरिकी सेना पर हमला किया जाएगा, यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने का इरादा रखते हैं।' ईरान ने यह भी दावा किया कि इस जलमार्ग की सुरक्षा पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और किसी भी जहाज के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय करना अनिवार्य है। अमेरिका का प्रोजेक्ट फ्रीडम अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ईरान क्यों भड़का हुआ है? दरअसल, सोमवार को अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान चलाने की घोषणा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को प्रोजेक्ट फ्रीडम का नाम दिया। ट्रंप ने कहा कि कई देशों ने अमेरिका से मदद मांगी है क्योंकि उनके व्यापारिक जहाज इस संघर्ष में बिना किसी गलती के फंसे हुए हैं। ट्रंप ने कहा, 'कई जहाजों पर भोजन और आवश्यक सामग्री खत्म हो रही है। ईरान, पश्चिम एशिया और अमेरिका की भलाई के लिए हम इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।' 100 विमान और 15 हजार सैनिकों की तैनाती अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य तैनाती की पुष्टि कर दी है। इस ऑपरेशन में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 सैनिक शामिल किए गए हैं। पेंटागन के नेतृत्व में यह मिशन सोमवार सुबह से शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना है। अमेरिका के इस घोषणा के बाद ईरान ने चेतावनी दी है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में शांति है, लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के एलान ने आग में घी डालने का काम किया है। 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर टिकी दुनिया की नजरें इस बीच यह भी खबर आई है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जो अमेरिका के 9-सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में तैयार किया गया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताया है, लेकिन वे इसकी समीक्षा करने को तैयार हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण संघर्ष के बाद आठ अप्रैल से जारी युद्धविराम ने कूटनीति के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। शांति की आखिरी उम्मीद इस्लामाबाद वार्ता पाकिस्तान ने 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहले दौर की सीधी बातचीत की मेजबानी की थी। हालांकि उस समय कोई ठोस समझौता नहीं हो सका, लेकिन स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए 21 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। इशाक डार और अब्बास अराघची की ताजा बातचीत इसी कड़ी का हिस्सा है, जहां पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता हासिल की जा सकती है।

ग्वादर प्रोजेक्ट में तनाव: चीनी कंपनी की चेतावनी के बाद पाकिस्तान सरकार ने तुरंत खोली फाइलें

  पाकिस्तान सरकार ने चीन को गधे के मांस और खाल के निर्यात को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह फैसला एक चीनी कंपनी की उस कड़ी चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उसने निर्यात की मंजूरी मिलने में हो रही देरी के कारण पाकिस्तान में अपना कामकाज बंद करने की धमकी दी थी। हालात को बिगड़ता देख पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। क्या है पूरा विवाद? यह विवाद ग्वादर में काम करने वाली 'हनगेंग ट्रेड कंपनी' से जुड़ा है। ग्वादर चीन द्वारा समर्थित परियोजनाओं (CPEC) का एक प्रमुख केंद्र है। यह कंपनी एक बूचड़खाना चलाती है, जहां से गधे का मांस और खाल चीन भेजी जाती है। पिछले कई महीनों से पाकिस्तान के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय और पशु संगरोध विभाग में कंपनी के निर्यात की फाइल अटकी हुई थी। कंपनी का अल्टीमेटम और निवेशकों को चेतावनी परेशान होकर 1 मई को चीनी कंपनी ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया। कंपनी ने कहा: गैर-बाजार कारकों और काम में आ रही सरकारी बाधाओं के कारण वे अपनी फैक्ट्री बंद करने को मजबूर हैं। उन्होंने अपने कर्मचारियों को भी संभावित छंटनी और फैक्ट्री बंद होने की सूचना दे दी थी। कंपनी ने दावा किया कि निर्यात के सभी मानक पूरे करने के बावजूद पिछले 3 महीनों से उनका शिपमेंट फंसा हुआ है और पाकिस्तानी अधिकारियों से कोई मदद नहीं मिल रही है। सबसे बड़ी बात, कंपनी ने अन्य विदेशी व्यवसायों को भी चेतावनी दी कि वे पाकिस्तान में निवेश करने से पहले यहां की नीतियों के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों और संस्थागत अनिश्चितता का सावधानीपूर्वक आकलन कर लें। इस बयान से पाकिस्तान में विदेशी निवेश के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का त्वरित हस्तक्षेप इस बयान के बाद पाकिस्तान सरकार में हड़कंप मच गया। प्रधानमंत्री के सलाहकार तौकीर शाह ने तुरंत इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचाया। शुक्रवार को पीएमओ ने सीधे इस मामले में दखल दिया, जिसके बाद रुकी हुई फाइलों ने अचानक गति पकड़ ली। अगले ही दिन (शनिवार को) पाकिस्तानी कैबिनेट ने गधे के मांस के निर्यात को अपनी मंजूरी दे दी और संबंधित विभाग ने आवश्यक परमिट भी जारी कर दिए। सरकार की यह फुर्ती इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इसी महीने के अंत में एक बड़े निवेश मंच में हिस्सा लेने के लिए चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, और सरकार चीन को नाराज नहीं करना चाहती थी। सरकारी अधिकारियों का क्या कहना है? कैबिनेट डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना बचाव करते हुए कहा कि मंजूरी की प्रक्रिया नियमों के तहत ही चल रही थी और 'आर्थिक समन्वय समिति' (ECC) के फैसलों को अक्सर चरणों में लागू किया जाता है। वहीं, कुछ अन्य सरकारी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि देरी इसलिए हुई क्योंकि चीनी कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के निर्यात के लिए आवश्यक प्रजनन मानकों जैसी कुछ शर्तों को पूरी तरह से नहीं माना था। चीन को क्यों निर्यात किए जाते हैं गधे? चीन में गधे के मांस और खासकर उसकी खाल की भारी मांग है। गधे की खाल का इस्तेमाल चीन में पारंपरिक दवाएं बनाने में किया जाता है। इन दवाओं को मुख्य रूप से ब्लड टॉनिक (खून बढ़ाने वाली दवा) और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के इलाज के रूप में बेचा जाता है। पाकिस्तान के लिए इसका आर्थिक महत्व पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा बाजार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार: पाकिस्तान हर साल मांस और खाल के लिए लगभग 2,16,000 गधों का निर्यात मुख्य रूप से चीन को करता है। सरकार का अनुमान है कि यह क्षेत्र पाकिस्तान के लिए सालाना लगभग 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 30 करोड़ डॉलर) का राजस्व उत्पन्न कर सकता है, जो पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक बड़ी रकम है।

बीजेपी कार्यसमिति में बड़ा बदलाव, 106 सदस्य तय, क्षेत्रीय-जातीय संतुलन बनाने की चुनौती

भोपाल  बीजेपी की प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। इस बार कार्यसमिति का आकार काफी छोटा किया जा रहा है, जिससे नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बैठाना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन गया है। ओरछा में इसी महीने प्रस्तावित बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक से पहले संगठन में सदस्यों के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी संविधान के अनुसार कार्यसमिति को सीमित करते हुए केवल 106 सदस्यों तक रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल का अधिकतम 30 प्रतिशत रखने का फार्मूला तय किया गया है। यानी ऐसे सदस्यों की संख्या 32 से अधिक नहीं होगी। यह बदलाव पिछले कार्यकालों की तुलना में बड़ा माना जा रहा है। दरअसल, पूर्व प्रदेश अध्यक्षों वीडी शर्मा, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह के समय कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। खासकर वीडी शर्मा के कार्यकाल तक आते-आते कार्यसमिति, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित मिलाकर कुल 463 सदस्यों की हो गई थी। जिलों का प्रतिनिधित्व बना मुश्किल प्रदेश में बीजेपी के 62 संगठनात्मक जिले हैं। ऐसे में 106 सदस्यों की सीमा के चलते एक जिले से दो प्रतिनिधि भी शामिल करना संभव नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं को नामों के चयन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। मौजूदा कार्यसमिति की स्थिति:     प्रदेश कार्यसमिति सदस्य: 187     स्थायी आमंत्रित सदस्य: 52     विशेष आमंत्रित सदस्य: 224     कुल सदस्य: 463 क्षेत्रीय, जातीय संतुलन बड़ी चुनौती नई कार्यसमिति में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चयन किया जाएगा। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। बड़े शहरों का दबदबा इस बार कार्यसमिति का आकार छोटा होने से इन जिलों का प्रतिनिधित्व भी घट सकता है, जिससे संगठन में नई राजनीतिक समीकरण बनते नजर आएंगे। मौजूदा कार्यसमिति में बड़े शहरों का प्रभाव ज्यादा है। प्रमुख जिलों में सदस्य संख्या ये है –     भोपाल: 19     इंदौर: 17     ग्वालियर: 15     सागर: 10     जबलपुर: 9     सतना: 8     सिंगरौली: 7     छतरपुर: 6     नरसिंहपुर: 5     बालाघाट: 5 .

AMCA स्टेल्थ फाइटर जेट के निर्माण के लिए आंध्र सरकार ने 600 एकड़ जमीन की मंजूरी दी

हैदराबाद  आंध्र प्रदेश सरकार ने भारत के पहले स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट – AMCA  के निर्माण के लिए 600 एकड़ जमीन मंजूर कर दी है. यह फैसला राज्य कैबिनेट ने लिया. यह प्लांट श्री सत्य साई जिले में बनेगा. यहां फाइनल असेंबली, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, ग्राउंड टेस्टिंग, फ्लाइट कॉम्प्लेक्स और वैज्ञानिकों के लिए हाउसिंग की सुविधाएं बनेंगी।  यह हब लगभग 140 AMCA स्टेल्थ जेट्स बनाने का काम करेगा. प्रोजेक्ट से करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है. इसमें प्राइवेट कंपनियां जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां पार्टनरशिप में काम करेंगी. खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) को बायपास किया गया है. इससे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ेगी और काम तेजी से होगा।  क्यों चुना गया श्री सत्य साई जिला? इस जगह को इसलिए चुना गया क्योंकि यह बेंगलुरु में स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के बहुत करीब है. वहां पहले से ही AMCA का डिजाइन और विकास का काम चल रहा है. इलाके में एयरस्ट्रिप भी है, जो टेस्टिंग के लिए बहुत जरूरी है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 2025 में ही इस प्रोजेक्ट के लिए आंध्र प्रदेश को प्राथमिकता देने की पिच दी थी. अब कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है।  AMCA स्टेल्थ फाइटर क्या है? AMCA भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. यह दुश्मन के रडार में आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सुपरक्रूज स्पीड, बेहतरीन एवियोनिक्स और मल्टी-रोल क्षमता होगी. यह राफेल और Su-30 MKI जैसे मौजूदा जेट्स से ज्यादा एडवांस्ड होगा. प्रोटोटाइप 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।  यह प्रोजेक्ट भारत को विदेशी जेट्स पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज होगा और रोजगार भी बढ़ेगा. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए हाउसिंग बनने से टैलेंट यहां आएगा. कुल मिलाकर यह प्लांट भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देगा।  AMCA के 140 जेट्स बनने से भारतीय वायुसेना मजबूत होगी. यह प्रोजेक्ट निर्यात के लिए भी अवसर खोल सकता है. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत रक्षा उपकरणों में बड़ा निर्यातक बने. आंध्र प्रदेश को यह प्रोजेक्ट औद्योगिक विकास और रोजगार दोनों देगा। 

मेधावी विद्यार्थियों को CM साय की सीख: सपनों को लक्ष्य बनाकर करें निरंतर प्रयास, बलरामपुर में सम्मान समारोह

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है। बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्रीकृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

निलंबन और पदोन्नति रोकने के आरोपों पर उबाल, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग तेज

लखनऊ बिजली विभाग में दलित अभियंताओं पर कार्रवाई से उबाल है। पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि अगर एकतरफा कार्रवाई पर दलित अभियंताओं को जल्द न्याय नहीं मिलता तो इस मसले पर आंदोलन होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन की होगी। एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी की आपात बैठक रविवार को फील्ड हॉस्टल में हुर्ह। संगठन ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने कहा कि अगर उच्च स्तरीय कमेटी से जांच करवाई जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि दलित अभियंताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अभियंताओं पर कार्रवाई न केवल सेवा नियमों के विपरीत हैं बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत भी। एसोसिएशन ने अभियंताओं पर निलंबन, पदोन्नति रोके जाने और अनुचित दंड के आरोप लगाए हैं। साथ ही यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में अभियंताओं को राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। बैठक में एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष नेकीराम, पीएम प्रभाकर अतिरिक्त महासचिव , अजय कुमार (ट्रांसको), अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे। इनपर अनुचित कार्रवाई का आरोप -नेकीराम (अधीक्षण अभियंता) को मात्र 6 दिन की तैनाती के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देकर मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति रोक दी गई। -पूरन चंद (अधीक्षण अभियंता) व नरेश कुमार (अधिशासी अभियंता) को लगभग एक वर्ष से निलंबित रखा गया, वह भी घटिया ट्रांसफार्मर जलने के मामले में, जिससे उनकी पदोन्नति बाधित हुई। -अजय कुमार (अधीक्षण अभियंता) को फर्जी शिकायतों, जिनमें बामसेफ व पीडीए लोगों की मदद करने के आरोप में निलंबित किया गया। -निर्भय कुमार (अधिशासी अभियंता) को एक ही मामले में दोहरा दंड दिया गया। -हरिश्चंद्र वर्मा (मुख्य अभियंता, मध्यांचल) को पिछले 6 माह से गलत आरोपों के आधार पर निलंबित रखा गया, जिनकी पत्नी की लगातार डायलिसिस हो रही है। -मुकेश बाबू (अधीक्षण अभियंता) को हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी पदोन्नत नहीं किया गया। -सुनील कुमार, सुधाकर व एनपी सिंह के मामले भी लंबित हैं, जिससे पदोन्नति और टाइम स्केल बाधित। -पवन कुमार अधिशासी अभियंता लंबे समय से निलंबित