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इतिहास रचा सुनेत्रा पवार ने, भारी मतों से जीत; उपचुनाव में BJP और कांग्रेस का हाल

मुंबई  देश के 5 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। महाराष्ट्र के बारामती सीट से NCP उम्मीदवार सुनेत्रा पवार ने 2 लाख 18 हजार वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जीत का यह अंतर भारत में किसी विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा है। सुनेत्रा पूर्व डिप्टी CM अजित पवार की पत्नी हैं, जिनका 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में निधन हो गया था। बारामती अजित पवार की पारंपरिक सीट रही है। यहां से सुनेत्रा की जीत पहले से लगभग तय थी। उनके खिलाफ 22 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। महाराष्ट्र की राहुरी सीट से भाजपा के अक्षय कार्डिले जीत गए हैं। भाजपा ने गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा की 1-1 सीट भी जीत ली है। कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ सीट पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। उपचुनाव वालीं सभी 7 सीटें पूर्व विधायकों की मौत के कारण खाली हुई थीं। कर्नाटक, नगालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। गुजरात की लिमखेड़ा और महाराष्ट्र के बारामती और राहुरी सीट पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। बारामती में मिली जीत के बाद सुनेत्रा पवार ने जनता का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह जीत लोगों के भरोसे, प्यार और समर्थन का नतीजा है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने अजित पवार को याद करते हुए कहा कि यह जीत उनके काम और यादों को समर्पित है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों का आभार जताया और भरोसा दिलाया कि वे सभी वर्गों के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे और जनता के विश्वास पर खरा उतरेंगे।

सरकार की तैयारी: हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम से ‘दो संतान’ की बाध्यता खत्म करने पर विचार

भोपाल. मध्य प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए सरकार जल्द ही दो बड़े फैसले लेने जा रही है। स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने और सरकारी नौकरी में दो संतान की बाध्यता समाप्त करने के प्रस्ताव अंतिम चरण में हैं। सामान्य प्रशासन विभाग इन दोनों प्रस्तावों को जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए पेश करेगा। कर्मचारी और पेंशनरों के लिए लंबे समय से स्वास्थ्य बीमा की मांग की जा रही थी। अब इस दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार इस योजना को कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद लागू किया जाएगा, जिससे लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। दो संतान नियम खत्म करने की तैयारी सरकारी नौकरी में दो संतान की बाध्यता को समाप्त करने पर भी सरकार सहमत हो गई है। इस नियम को हटाने के लिए सभी स्तरों पर सहमति बन चुकी है और सामान्य प्रशासन विभाग जल्द ही इसे कैबिनेट में पेश करेगा। इससे कई कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों की मांग पर कार्रवाई राज्य कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद दोनों मुद्दों पर तेजी से काम किया जा रहा है। 15 अप्रैल को हुई बैठक में कर्मचारियों के हित में कई अहम निर्णय लिए गए थे। कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष ने संभाला कार्यभार इधर, राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने मंत्रालय में पदभार ग्रहण किया। इस मौके पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और भाजपा नेताओं के दौरों से उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति हुई सक्रिय

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भी नहीं आए थे और भारतीय जनता पार्टी ने साल 2027 में होने वाले चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके संकेत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई पार्टी दिग्गजों के दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिल रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा को यूपी में भी असम की तरह हैट्रिक की उम्मीद है। UP में जुटे भाजपा के टॉप नेता 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण का मतदान हुआ है। इससे एक दिन पहले ही भाजपा चीफ और पीएम मोदी 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पहुंच गए थे। वहीं, जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने दल बदल किया, तो बंगाल में चुनावी ड्यूटी निभा रहे कई भाजपा नेता दिल्ली पहुंच गए थे। बंगाल के नतीजों के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था क्यों अहम है उत्तर प्रदेश साल 2014 में जब भाजपा ने कुल 282 लोकसभा सीटें जीती थीं, तो इसमें यूपी की 71 सीटें भी शामिल थीं। खास बात है कि 80 सीटों वाला यूपी लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, 2024 के चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा था और पार्टी घटकर महज 33 सीटों पर आ गई थी। इससे पहले 2019 में भाजपा को यूपी में 62 लोकसभा सीटें मिली थीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वहीं, भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकसभा चुनाव में उनसे छिटक गए थे। अब बीजेपी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकती है ताकि यादव और जाटव वोटों के अलावा अन्य जातियों में अपनी पकड़ फिर से बनाई जा सके। बंगाल का जीत बनेगी भाजपा का इंश्योरेंस बंगाल में जीत के साथ ही भाजपा ने उत्तर और पश्चिम की तरह पूर्व में भी मजबूती हासिल कर ली है। हालांकि, दक्षिण में कर्नाटक को छोड़ दिया जाए, तो भाजपा को लोकसभा में खास समर्थन नहीं मिलता है। साथ ही बंगाल की जीत को भाजपा इंश्योरेंस की तरह भी देख सकती है, जहां अगर उसे किसी मजबूत राज्य में लोकसभा चुनाव में झटका लगता है, तो बंगाल से भरपाई की जा सके। यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। पंजाब पर भी नजरें कहा जा रहा है कि पंजाब को हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी सरकार चुनावी रूप से अहम मानती रही है। सिख बहुल राज्य में भाजपा लगातार समुदाय को अपनी ओर लाने के प्रयास करती रही है। वही, दल सत्तारूढ़ आप को भी कुर्सी से बेदखल करने की कोशिश में है। 7 राज्यसभा सांसदों का आना भाजपा को कुछ हद तक चुनावी रूप से मददगार साबित हो सकता है। चुनाव के नतीजे बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, असम में शतक लगाकर चुनावी जीत की हैट्रिक पूरी की। इधर, केरल में भी भाजपा की सीटों का ग्राफ बढ़ा है। जबकि, तमिलनाडु में एक्टर विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी। पुडुचेरी में एनडीए ने जीत हासिल की।

तीन दिग्गज परिवारों के वारिस हारे: असम चुनाव में कांग्रेस का नया रिकॉर्ड, बदला सियासी मूड

असम असम में बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाई है। बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए ने 102 सीटों पर जीत हासिल की। जबकि कांग्रेस सिर्फ 19 सीट पर सिमट गई है। असम में ऐसा देश में पहली बार हुआ कि भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। असम में लगातार तीसरी बार सत्ता से महरूम रहने वाली कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। असम के तीन पूर्व सीएम के बोटों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। इनमें से एक तो वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भी हैं। असम के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों की हार के साथ ही कांग्रेस ने नया रिकॉर्ड भी बना डाला है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 15 साल तक कांग्रेस की सरकार चलाई। पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को असम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। गौरव असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और जोरहाट से तीन बार के सांसद हैं। असम विधानसभा चुनाव में गौरव गोगोई जोरहाट सीट से लड़े। हालांकि उन्हें बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। भाजपा कैंडिडेट हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23,182 वोटों से मात दी। वहीं पूर्व सीएम हितेश्वर सैकिया दो बार असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हितेश्वर सैकिया के बेटे देबब्रत सैकिया को भी असम विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। अपने पिता के परंपरागत सीट नजीरा विधानसभा सीट से खड़े देबब्रत सैकिया को बीजेपी प्रत्याशी मयूर बोरगोहाईं ने 46,000 से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी। देबब्रत खुद 2011 से लगातार इसी सीट से जीतते आ रहे थे। 2016 से विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। असम के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके दिवंगत भूमिधर बर्मन के बेटे दिगंता बर्मन (Diganta Barman) को भी असम चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। हितेश्वर सैकिया पद पर रहते हुए गुजर गए थे। तब भूमिधर बर्मन ने थोड़े समय के लिए मुख्यमंत्री का काम संभाला था। दिगंता बारखेत्री सीट से लड़े लेकिन BJP के नारायण डेका से 84,000 से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त देकर कांग्रेस के गहरी चोट दी। CM हिमंता बिस्वा सरमा बोले- जनता ने वंशवादी राजनीति को नकारा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन तीनों की हार पर कहा कि किसी की हार में खुश होना ठीक नहीं, खासकर जब वो हितेश्वर सैकिया के बेटे हों। उन्होंने साफ कहा कि जनता ने ‘खानदानी राजनीति’ यानी सिर्फ बाप-दादा के नाम पर चुनाव लड़ने की सोच को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने तीन-चार बार चुनाव जीते, उनके पास अपनी अलग पहचान बनाने का पूरा मौका था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए। यहां एक दिलचस्प बात यह है कि हिमंत सरमा खुद लगभग 20 साल तक कांग्रेस में रहे और उन्हें पार्टी में लाने वाले हितेश्वर सैकिया ही थे. 2014 में वो BJP में आ गए।

शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक कृत्य, ASP नेता के स्कूल में शराब बिक्री का वीडियो वायरल

मुरैना मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जौरा रोड, सोलंकी पेट्रोल पंप के सामने आजाद समाज पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज सेमिल का मकान है। स्कूल का नाम है सम्राट पब्लिक स्कूल इस मकान की पहली मंजिल पर मनोज सेमिल का निजी विद्यालय चलता है, जिसका नाम सम्राट पब्लिक स्कूल है। इस स्कूल में अवैध शराब का कारोबार जमकर हो रहा है। मंगलवार की सुबह एक वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें स्कूल के अंदर देशी शराब की पेटियां रखी हुई दिख रही हैं हैं। शराब बेचने खरीदने और पीने वाले लोग कमरे में मौजूद है। शराब पीने के लिए टेबल कुर्सी डाली गयी है। वीडियो में दिख रहा है कि अवैध शराब का यह कारोबार सम्राट स्कूल में हो रहा है वीडियो बनाने वाला कह भी रहा है कि यह मनोज सेमिल का स्कूल है, वह दूसरे लोगों की शिकायत करता है और ख़ुद अवैध शराब का कारोबार करता है। हेडक्वार्टर डीएसपी विजय भदौरिया ने कहा कि मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।  

मौजमपुर (भोजपुर) में सबसे लंबा 1034 मीटर का पीपा पुल, निविदा प्रक्रिया शुरू

पटना बिहार के तीन जिलों में पीपा पुल बनाया जाएगा। इसकी तैयारी परिवहन विभाग के जल परिवहन द्वारा की जा रही है। स्थानीय स्तर पर छोटे व्यापार आदि को बढ़ावा देने के लिए पटना, भोजपुर, वैशाली जिला में गंगा नदी पर पीपा पुल बनाया जाएगा। इसके लिए जल परिवहन विभाग ने जगह चिह्नित कर ली है। इसमें पटना में चार, भोजपुर और वैशाली जिला में एक-एक पीपा पुल का निर्माण शामिल है। जल परिवहन विभाग ने मौजमपुर भोजपुर के लिए निविदा यानी टेंडर निकाल कर कार्य प्रारंभ कर दिया है। चकौशन वैशाली के साथ पटना में गंगा नदी पर बनने वाले तीन पीपा पुल के लिए निविदा का कार्य प्रगति पर है। कच्ची दरगाह पटना में 943.3 मीटर में बनने वाले पीपा पुल के लिए निविदा जल्द शुरू होगी। जिन जगहों के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गयी है, वहां निर्माण जल्द शुरू होगा। गंगा पर बनने वाले पीपा पुल के लंबाई का निर्धारण भी कर दिया गया है। मौजमपुर भोजपुर में सबसे लंबा 1034 मीटर में पीपा पुल बनाया जाएगा। इन जगहों पर गंगा नदी में पीपा पुल बनेगा जगह – कुल लंबाई मौजमपुर (भोजपुर) – 1034 मीटर चकौशन (वैशाली) – 935 मीटर दानापुर (पटना) – 972 मीटर ग्यासपुर (पटना) – 924 मीटर कच्ची दरगाह (पटना) – 943 मीटर कच्ची दरगाह (पटना) – 943.3 मीटर पीपा पुल बनाने का मकसद ● गंगा के दोनों ओर बसे लोगों को जोड़ता है, इससे नाव के सहारे निर्भरता कम होती है ● गंगा के बाढ़ क्षेत्र में किसान पुल से खाद, बीच और ट्रैक्टर लेकर खेतों तक जा सकते हैं ● बड़े पुल पर जाम की स्थिति में पीपा पुल छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक रास्ता होता है ● स्थानीय लोगों को व्यापाार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाता है

शनि जयंती 2026: 16 मई को बन रहा दुर्लभ संयोग, इन राशियों की चमकेगी किस्मत

 इस साल शनि जयंती 16 मई 2026 को मनाई जाएगी. इसे शनि अमावस्या या शनैश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है. मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए यह दिन हर वर्ष विशेष रूप से मनाया जाता है. इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है, जो कि बहुत ही दुर्लभ संयोग माना जा रहा है. ज्योतिष के अनुसार, ऐसा संयोग करीब 13 साल बाद बन रहा है. इस विशेष दिन का प्रभाव कुछ राशियों पर काफी शुभ माना जा रहा है और इनके जीवन में अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं. वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि जयंती काफी अच्छे परिणाम लेकर आ सकती है. नौकरी में तरक्की और सैलरी बढ़ने के योग बन रहे हैं. नई नौकरी लग सकती है. करियर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की संभावना है. कामकाज में सुधार दिखेगा. मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए यह संयोग भाग्यशाली साबित हो सकता है. व्यापार में लाभ मिलने के योग बन रहे हैं. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति मिल सकती है. आय में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. तुला राशि तुला राशि के जातकों पर शनि देव की विशेष कृपा रह सकती है. करियर में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है. विदेश से नौकरी के ऑफर भी मिल सकते हैं. घर और परिवार में खुशियों का माहौल बनेगा. जीवन में स्थिरता बढ़ेगी. धनु राशि शनि जयंती से धनु राशि वालों के काम की सराहना हो सकती है. वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा. कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं. रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं. आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य में पहले से सुधार देखने को मिल सकता है. कुंभ राशि कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए यह दिन इनके लिए बेहद खास माना जा रहा है. सबसे बड़ी खुशखबरी होगी कि साढ़ेसाती का प्रभाव इस दिन कुंभ राशि वालों के लिए काफी हल्का हो जाएगा. इस समय जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. करियर में सफलता मिलने के योग हैं. नौकरी की तलाश पूरी हो सकती है. समाज में मान-सम्मान भी बढ़ने की संभावना है.

वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन और जल परियोजनाओं को नई रफ्तार, बिहार की कनेक्टिविटी और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

 पटना पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने से इसका सीधा और सकारात्मक असर पड़ोसी राज्य बिहार पर देखने को मिलेगा। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बंगाल फतह को केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि बिहार के दूरगामी हितों की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। बिहार में एनडीए की सरकार है और अब बंगाल में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री होने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादित मुद्दों पर आसानी से सहमति बन सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलेगा। घुसपैठ और तस्करी पर लगेगी रोक बंगाल की ममता सरकार के दौरान बिहार को घुसपैठ के मुद्दे पर सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इसी के कारण सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या लगातार गंभीर हो रही थी। लेकिन अब केंद्र, बिहार और बंगाल- तीनों जगह समान विचारधारा वाली सरकार होने से घुसपैठियों के खिलाफ ठोस और संयुक्त कार्रवाई की जा सकेगी। इससे न केवल अवैध रूप से आने वाले लोगों पर नकेल कसेगी, बल्कि सीमा पर होने वाली तस्करी पर भी पूर्ण रूप से रोक लगेगी। वाराणसी-कोलकाता सिक्स लेन परियोजना पकड़ेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता तक बनने वाले महत्वाकांक्षी 'सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग' को भी अब नई गति मिलेगी। ममता सरकार के कारण बंगाल की लगभग 285 किलोमीटर की इस परियोजना पर कोई ठोस काम नहीं हो सका था, जबकि यूपी, बिहार और झारखंड में प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। नई सरकार के आने से यह बाधा दूर होगी, जिसके बाद सड़क बनने पर बिहार से बंगाल का सफर सिर्फ 7 घंटे में तय किया जा सकेगा। अपर महानंदा सिंचाई और फरक्का बराज पर सकारात्मक पहल इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा जल बंटवारे के मामले में भी बिहार को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। 1978 के समझौते के तहत 'अपर महानंदा सिंचाई परियोजना' से जुड़ी 8 किलोमीटर लंबी नहर का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। इससे 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिल सकेगा। वहीं, 1996 के समझौते के तहत फरक्का बराज से बांग्लादेश को पानी देने की बाध्यता पर भी राज्य सरकार ने पुनर्विचार का अनुरोध किया था। अब इस दिशा में अच्छी पहल होने की उम्मीद है, जिससे गंगा के पानी में बिहार की भागीदारी बढ़ सकेगी।

गर्मी में एसी का सही इस्तेमाल,6–8 घंटे चलाना सुरक्षित, 24–26°C तापमान सबसे बेहतर

अप्रैल में ही गर्मी इस बार रिकॉर्डतोड़ रही है. गर्मियों ने अपना ऐसा रंग दिखाया कि ज्यादातर घरों में लगातार एसी चलने लगे हैं. बाहर की तपिश में एसी की ठंडी हवा न केवल सुकून देती है, बल्कि भट्टी जैसे गर्म हो रहे घर को जीने के लायक भी बनाती है. हालांकि, एसी से गर्मी से छुटकारा तो मिल जाता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल बिजली के बिल को भी तेजी से बढ़ाता है. इतना ही नहीं हर समय एसी की हवा खाने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में एसी को समझदारी से चलाना बहुत जरूरी है, ताकि ठंडक भी मिले और नुकसान भी न हो. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या इस भीषण गर्मी में बिना अपनी जेब और सेहत को नुकसान पहुंचाए चैन की नींद ली जा सकती है? इसके साथ ही आखिर दिन में कितने घंटे एसी चलाना सही रहता है? आइए जानते हैं कि एक दिन में कितने घंटे एसी चलाना चाहिए. कितनी देर तक एसी चलाना सही है? अगर आप अपने कमरे को ठंडा करने के लिए लगातार एसी चलाए रखते हैं, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. लंबे समय तक एसी चलाना सही नहीं माना जाता है. क्योंकि एसी की हवा में ज्यादा देर बैठने से स्किन रूखी होती है और इसके साथ ही कई हेल्थ समस्याएं भी हो सकती है. ऐसे में कोशिश करें कि एसी को एक बार में करीब 6–8 घंटे तक ही इस्तेमाल करें. जब कमरा अच्छी तरह ठंडा हो जाए, तो कुछ देर के लिए एसी बंद कर दें या फिर पंखा चला लें. इससे तीन फायदे होते हैं. पहला एसी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और उसके खराब होने के चांस घट जाते हैं, दूसरा आपकी स्किन/ सेहत सही बनी रहती है और साथ ही बिजली की खपत भी कम होती है. इस हिसाब से आप एसी को एक दिन में 12-14 घंटे चला सकते हैं. ज्यादा एसी में रहने के नुकसान हर समय एसी में बैठे रहना भी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. इस पर कई तरह की रिसर्च की गई हैं जिनके अनुसार, जब आप लगातार ठंडी जगह पर रहते हैं तो शरीर कम कैलोरी बर्न करता है, क्योंकि उसे अपने टेंपरेचर को बैलेंस रखने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखने लगता है. इससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है, स्किन सूखने लगती है और सिर दर्द या थकान भी महसूस हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप बीच-बीच में एसी से बाहर निकलें और नेचुरल हवा में रहें. किस टेंपरेचर पर चलाना होता है बेस्ट? अगर आप चाहते हैं कि आपका एसी कमरे को अच्छे से ठंडा भी करे और बिजली का बिल भी ज्यादा न आए, तो इसे सही टेंपरेचर पर चलाना बहुत जरूरी है. एक्स्पर्ट की मानें तो एसी के टेंपरेचर को 24°C से 26°C के बीच रखना सबसे बढ़िया माना जाता है. इस टेंपरेचर पर कमरा ठंडा भी रहता है और बिजली की खपत भी कम होती है. 16°C या 18°C पर एसी चलाने से बिजली की खपत ज्यादा होती है.  

14 मई तक अंतिम मौका: पंजाब में अध्यापकों के लिए शिक्षा विभाग की कड़ी चेतावनी

अमृतसर. पंजाब के शिक्षा विभाग ने अध्यापकों, कंप्यूटर फैकल्टी और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रांसफर प्रक्रिया 2026 को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने निर्धारित समय के भीतर अपना डेटा अपडेट नहीं किया, तो उसे ट्रांसफर प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। 14 मई तक रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य  जारी निर्देशों के अनुसार 4 से 14 मई तक सभी कर्मचारियों को ई-पंजाब स्कूल पोर्टल पर अपनी जनरल डिटेल परिणाम और सर्विस रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही “अप्रूव डेटा” बटन दबाना भी जरूरी है, अन्यथा डेटा अधूरा माना जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी के डेटा में कोई त्रुटि हो, तो वह उसे रिमार्क्स में दर्ज कर सकता है लेकिन अंतिम निर्णय विभाग का ही होगा। एक बार डेटा अप्रूव हो जाने के बाद उसमें कोई संशोधन नहीं किया जा सकेगा।स्पैशल और एग्जेम्प्ट कैटेगरी से संबंधित कर्मचारियों के लिए अपने दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए तो उन्हें इस श्रेणी का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने अपना सख्त रुख स्टेशन चॉइस को लेकर भी विभाग ने सख्त नियम लागू किए हैं। केवल वही कर्मचारी स्टेशन चॉइस भर सकेंगे, जिनका डेटा पूरी तरह अपडेट और अप्रूव होगा। बिना डेटा अपडेट किए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। ए.सी.आर. को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिन कर्मचारियों की 2024-25 की ए.सी.आर. भरी नहीं है, उन्हें पहले उसे पूरा करना होगा, तभी वे आगे की प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथि तक डेटा अपडेट न करने वालों की कोई सुनवाई नहीं होगी और वे ट्रांसफर प्रक्रिया से वंचित रह सकते हैं। कुल मिलाकर शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर नियम पहले, राहत बाद में वाला सख्त संदेश दे दिया है।