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सपनों को मिले पहिए: भीमा मारकंडे की ‘बैसाखी’ से ‘आत्मनिर्भरता’ तक की प्रेरक यात्रा

रायपुर  कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक बाधाएं केवल एक पड़ाव मात्र रह जाती हैं, मंजिल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम 'हरदी' के रहने वाले भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक मिशाल बन गई है। ​  जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा भीमा की जिंदगी तब बदल गई जब हैदराबाद में निर्माण कार्य (मजदूरी) के दौरान वे ऊंचाई से गिर गए। कमर में आई गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की शक्ति छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना पहाड़ तोड़ने जैसा था। बैसाखी ही उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन मंजिल अभी दूर थी। उम्मीद की नई किरण:समाज कल्याण विभाग की पहल भीमा ने हार मानने के बजाय स्वावलंबन का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से 'बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल' के लिए आवेदन किया। राजनांदगांव के मोतीपुर में 4 मई 2026 को आयोजित सुशासन तिहार मे मिला यह आधुनिक उपकरण उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी आजादी साबित हुआ। मजबूरी बनी मजबूती: भीमा की कहानी, आत्मनिर्भरता की जुबानी अब बाधाएं नहीं रोकेंगी रास्ता विभाग द्वारा प्रदान की गई बैटरी चलित ट्राइसाइकिल और बैसाखी से भीमा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव का रास्ता मजबूत होगा। भीमा अब रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक बिना किसी मदद के जा सकेंगे। दूसरों पर निर्भरता खत्म होने से भीमा अब समाज की मुख्यधारा में एक सक्रिय नागरिक की भूमिका निभा सकेगा। अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए अब वे शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ चुके हैं। भीमा शासन द्वारा दिए गए मदद की प्रशंसा करते हुए कहते है कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने आमजनों की समस्याओं का निराकरण सुशासन तिहार के माध्यम से कर रहे है। मैं मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद करता हूँ। ​ ​भीमा की कहानी के साथ-साथ जिले के अन्य दिव्यांगों के लिए भी अच्छी खबर है समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक सुश्री वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की विशेष योजना के तहत नवाचार करते हुए 40 से 79% तक के दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। इसके लिए ​ ऑलिम्को (ALIMCO) CSR मद से जिले के 109 पात्र दिव्यांगों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी।   ​भीमा मारकंडे के हस्ताक्षर आज उनके अटूट संकल्प की गवाही देते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मन का दृढ़ निश्चय मिलकर किसी भी अंधेरी राह को रोशन कर सकता है। भीमा अब रुकने वाले नहीं हैं, वे उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

2 अगस्त 2027: इस सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? जानिए पूरी सच्चाई

आसमान में होने वाली कुछ घटनाएं सिर्फ खगोलीय नहीं होतीं, वे इंसान को ठहरकर देखने पर मजबूर कर देती हैं. ऐसा ही एक अद्भुत नजारा आने वाले समय में दिखाई देने वाला है, जब दिन के उजाले के बीच अचानक अंधेरा छा जाएगा. यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि 21वीं सदी का सबसे लंबा और दुर्लभ सूर्य ग्रहण होगा, जिसे लेकर वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक में उत्साह बना हुआ है. 2 अगस्त 2027: इतिहास रचने वाला दिन 2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण कई मायनों में खास होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इस सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच ऐसी स्थिति बनेगी कि चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा. इस ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत इसकी अवधि है, करीब 6 मिनट 20 से 23 सेकंड तक पूर्ण अंधकार छाया रहेगा. सामान्यतः पूर्ण सूर्य ग्रहण 2 से 3 मिनट तक ही रहता है, लेकिन इस बार यह समय दोगुने से भी अधिक होगा. यही वजह है कि इसे सदी का सबसे लंबा ग्रहण कहा जा रहा है. किन-किन जगहों पर दिखेगा यह अद्भुत नजारा यह ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में साफ दिखाई देगा, खासतौर पर दक्षिणी यूरोप (स्पेन, पुर्तगाल), उत्तरी अफ्रीका (मिस्र, लीबिया), मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई) में यह नजारा दिखेगा. इन क्षेत्रों में लोग कुछ मिनटों के लिए दिन में रात जैसा अनुभव करेंगे. आसमान में तारे भी नजर आ सकते हैं और तापमान में हल्की गिरावट महसूस हो सकती है. भारत की बात करें तो यहां यह ग्रहण पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा. इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिल सकता है, लेकिन वह अनुभव उतना प्रभावशाली नहीं होगा जितना पूर्ण ग्रहण वाले क्षेत्रों में होगा. 2026 में भी दिखेगा शानदार नजारा इससे पहले 12 अगस्त 2026 को भी एक लंबा सूर्य ग्रहण लगेगा. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में इसे देखने का मौका मिलेगा. आखिर क्यों लगता है सूर्य ग्रहण? सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है. पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. आंशिक सूर्य ग्रहण: जब सूर्य का केवल एक हिस्सा ढकता है. 2027 का ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, इसलिए इसका प्रभाव ज्यादा रोमांचक और दुर्लभ होगा. ग्रहण देखते समय रखें सावधानी सूर्य ग्रहण को सीधे नंगी आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है. इससे आंखों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए हमेशा सोलर फिल्टर या स्पेशल चश्मे का उपयोग करें.कैमरा या दूरबीन में भी प्रोटेक्टिव फिल्टर लगाएं.  

सविता स्मृति स्वरोज फाउंडेशन का आयोजन; विशेषज्ञों ने कहा—बच्चों का व्यक्तित्व माता-पिता के व्यवहार का प्रतिबिंब

बिलासपुर, छत्तीसगढ़  श्रीकांत वर्मा मार्ग स्थित साईं परिसर हाउसिंग सोसायटी में “जीवन की समझ” विषय पर एक विचारोत्तेजक कार्यशाला का आयोजन सविता स्मृति स्वरोज फाउंडेशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सोसायटी के सदस्यों, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यशाला की मुख्य अतिथि सत्यभामा अवस्थी (पूर्व शिक्षिका, पूर्व सदस्य फेमिली कोर्ट एवं समाजसेविका) ने बच्चों की सोच और जीवन के प्रति उनकी समझ पर संवाद करते हुए कहा कि बड़ों और बच्चों की जीवन दृष्टि में स्पष्ट अंतर होता है। उन्होंने वर्तमान समय में मोबाइल और एआई के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी, ताकि बच्चे वास्तविक और कृत्रिम के बीच अंतर समझ सकें। विशेष अतिथि केनेथ कॉलिन्स (पूर्व अंग्रेजी शिक्षक एवं समाजसेवी) ने कहा कि बच्चों में सामाजिक व्यवहार और जीवन मूल्यों का विकास माता-पिता के आचरण पर निर्भर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि घर और बाहर का व्यवहार अलग-अलग होगा तो इसका नकारात्मक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। अच्छे नागरिक बनाने के लिए पहले स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है। कार्यक्रम की शुरुआत  रितु सिंह ने फाउंडेशन की प्रणेता स्वर्गीय सविता प्रथमेश के प्रेरक प्रसंगों से की। फाउंडेशन के निदेशक प्रथमेश सविता ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी तथा स्वर्गीय सविता प्रथमेश के विचारों का वाचन किया। सोसायटी के अध्यक्ष एन. के. शर्मा ने इस सार्थक परिचर्चा के लिए फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। अंत में फाउंडेशन की निदेशक  शिवा मिश्रा ने सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया, विशेष रूप से  स्वाति सिंह के प्रयासों को सराहा, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हो सका। कार्यक्रम में एन. के. शर्मा, रितु सिंह, स्वाति सिंह, सरोज अग्रवाल, कंचन शर्मा, शोभा अग्रवाल, मुस्कान व महक संतानी, पूजा झा, सुनीता साहू, काव्या सचदेव, विभा महंत, स्मिता जैन, सुनीता डोडवानी, निधि जैन, निधि साहा, श्रीमती गुप्ता, ताविश सचदेव, तेजस गुप्ता सहित अनेक पालक एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा के मुख्‍य आतिथ्‍य में NSG के सहयोग से कॉम्प्रिहेन्सिव कैपेसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का समापन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़, तकनीकी रूप से सक्षम तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के सहयोग से आयोजित कॉम्प्रिहेन्सिव कैपेसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का आज रवीन्‍द्र भवन में समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 07 अप्रैल से 04 मई 2026 तक स्पेशल ब्रांच ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश की विभिन्न विशेष इकाइयों के चयनित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन हमलों सहित नई प्रकार की आतंरिक सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए इस प्रकार का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि माननीय केंद्रीय गृह मंत्री की पहल पर एनएसजी एवं मध्यप्रदेश पुलिस के मध्य एमओयू संपादित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में एटीएस, सीटीजी, बीडीएस, विशेष सशस्त्र बल एवं वीआईपी सुरक्षा से जुड़े कुल 432 अधिकारियों/कर्मचारियों ने सहभागिता की। इस दौरान 8 प्रमुख विषयों—क्लोज प्रोटेक्शन, काउंटर टेररिज्म, टैक्टिकल ड्राइविंग, बॉम्ब डिस्पोजल, एंटी ड्रोन, स्नाइपर, के-9 एवं पीएसओ पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। डीजीपी ने एटीएस एवं अन्य इकाइयों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर चुका है। साथ ही भोपाल में एक आधुनिक सिटीजी ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने हेतु प्रयास जारी हैं, जो भविष्य में पुलिस बल के क्षमता विकास में सहायक होगा। डीजीपी श्री मकवाणा ने आगामी सिंहस्थ 2028 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विशाल आयोजन के दौरान आंतरिक सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन एवं ट्रैफिक नियंत्रण में प्रशिक्षित बल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने एनएसजी के प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल का उपयोग राष्ट्र एवं समाज की सुरक्षा में प्रभावी रूप से किया जाए। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि NSG के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया गया यह प्रशिक्षण अत्यंत उच्च स्तर का, व्यावहारिक एवं आधुनिक तकनीकों पर आधारित रहा। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से न केवल उनकी व्यक्तिगत दक्षता एवं आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है, बल्कि टीम आधारित ऑपरेशन में समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी सुदृढ़ हुई है। इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आदर्श कटियार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए.साईं मनोहर, श्री चंचल शेखर, श्री सोलोमन मिंज, श्री डी श्रीनिवास वर्मा, पुलिस आयुक्त श्री संजय कुमार, पुलिस महानिरीक्षक डॉ आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक श्री तरुण नायक सहित पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं एनएसजी की ओर से ब्रिगेडियर शंकर तिवारी (ऑपरेशंस एवं ट्रेनिंग प्रभारी) एवं कर्नल अभिषेक सिंह (ग्रुप कमांडर, स्पेशल ऑपरेशंस, मुंबई) सहित अन्य प्रशिक्षक दल के सदस्य उपस्थित रहे। 

10,000 स्टेप्स का नियम हर किसी के लिए जरूरी नहीं, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

 आज के समय में फिटनेस फ्रीक और फिटनेस के लिए अवेयर रहने वाले लोग अक्सर पैदल चलने को भी महत्व देते हैं. अगर किसी से भी पूछो कि वह दिन में कितने स्टेप्स चलता है तो हर किसी का जवाब होता है, 10 हजार कदम. ऐसे में हर कोई अपनी स्मार्टवॉच में 10,000 कदम का आंकड़ा ही सिलेक्ट करता है और दिनभर उसके मुताबिक ही चलता है. डॉक्टर्स की मानें तो यह 'जादुई नंबर' हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना अपनी शारीरिक क्षमता को समझे इतना ज्यादा पैदल चलना आपके जोड़ों के लिए मुसीबत बन सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही किसी फिजिकल समस्या से जूझ रहे हैं. 10,000 स्टेप्स का चलना कितना जरूरी? पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल और एमआरसी सेंटर के ऑर्थोपेडिक्स डॉ. प्रदीप मूनोट का कहना है, अधिकतर लोग मानते हैं कि जितना अधिक चलेंगे, उतने फिट रहेंगे. लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, 10,000 कदम का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि यह केवल एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी के तौर पर शुरू हुआ था कि सबको 10 हजार कदम चलना चाहिए. ओवरवेट लोगों या बुजुर्गों के लिए अचानक से इतने कदम चलने से एक्स्ट्रा लोड पड़ सकता है जिससे घुटने के कार्टिलेज (हड्डियों के बीच की कुशनिंग) घिसने लगती है.   जोड़ों पर कैसे पड़ता है असर? डॉ. प्रदीम का कहना है, जब हम चलते हैं तो हमारे शरीर के वजन का पूरा भार घुटनों पर आता है. अगर कोई व्यक्ति गलत जूतों में या कठोर जगह पर 10 हजार कदम चलता है तो उसे ओवरयूज़ इंजरी हो सकती है. यदि आपको वॉक के समय घुटनों में सूजन, दर्द या कटकट की आवाज आने लगे तो समझ लीजिए कि आपके जोड़ों पर लोड आ रहा है और और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. जबरदस्ती 10 हजार कदम चलने का गोलपूरा करना ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. वॉकिंग का क्या है सही तरीका? फिट रहने के लिए केवल कदमों की गिनती काफी नहीं है. डॉक्टरों का सुझाव है कि 7,000 से 8,000 कदम भी सेहत के लिए पर्याप्त होते हैं. पैदल चलने के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी है ताकि मसल्स भी मजबूत बने रहें और जोड़ों पर अधिक लोड न पड़े. चलने के लिए हमेशा अच्छे कुशन वाले जूतों का चुनाव करें और कंक्रीट की जगह घास या नरम सतह पर टहलें.  

जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी ने

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मिलने आए लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए, सरकार हर समस्या का प्रभावी समाधान कराएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र लिए तथा समीप खड़े अफसरों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध और निष्पक्ष होना चाहिए।  जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कहा यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्चस्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। एस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को दुलारा और चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।   गोशाला में गोवंश को दुलारकर खिलाया गुड़ गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में मुख्यमंत्री ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

घर की सीलन और वास्तु दोष: जानिए कैसे प्रभावित होती है आर्थिक स्थिति

 घर की सीलन (नमी) को अक्सर लोग छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीलन सिर्फ दीवारों के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है. माना जाता है कि घर में बढ़ती नमी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है, जिससे धन हानि, खर्चों में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस घर में लगातार सीलन रहती है, वहां मां लक्ष्मी का वास नहीं होता है. खासतौर पर घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) और उत्तर दिशा में सीलन आना शुभ नहीं माना जाता है. यह दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां सीलन आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है. सीलन का वास्तु में महत्व वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सीलन की वजह से घर में बदबू, फंगस और गंदगी भी बढ़ती है, जो सकारात्मक ऊर्जा को कम करती है. इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और काम में मन नहीं लगता है. धीरे-धीरे यह स्थिति आर्थिक नुकसान को न्योता देने लगती है. अगर आपके घर में कहीं भी दीवारें गीली रहती हैं या पेंट उखड़ने लगा है, तो इसे तुरंत ठीक कराना चाहिए. घर में अच्छी धूप और हवा का आना जरूरी है, क्योंकि इससे नमी कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इसके अलावा, पानी के लीकेज को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर घर की सफाई और मरम्मत करते रहें. नमक या कपूर का उपयोग भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मददगार माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि सीलन आने से घर को कौन से वास्तु दोष लगते हैं. 1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) का दोष अगर घर के उत्तर-पूर्व हिस्से में सीलन रहती है, तो इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यह दिशा देवताओं और धन-दौलत की मानी जाती है. यहां सीलन होने से धन रुकावट, मानसिक तनाव और निर्णय लेने में कमजोरी आ सकती है. 2. उत्तर दिशा में नमी (धन दोष) उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा कहा जाता है. इस जगह सीलन आने से आर्थिक नुकसान, बचत में कमी और अचानक खर्च बढ़ सकते हैं. 3. दीवारों का गीला और खराब होना (ऊर्जा दोष) घर की दीवारों पर फंगस, पपड़ी या बदबू आना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. इससे घर में कलह, आलस्य और काम में रुकावट आने लगती है. 4. दक्षिण-पश्चिम में सीलन (स्थिरता दोष) यह दिशा स्थिरता और रिश्तों से जुड़ी होती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में नमी होने से रिश्तों में अस्थिरता और करियर में उतार-चढ़ाव आ सकता है. घर में सीलन आने से कौन से ग्रह होते हैं प्रभावित? वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सीलन का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा और शुक्र ग्रह से माना जाता है. चंद्रमा (Moon) – चंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. घर में सीलन आने से चंद्रमा कमजोर हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव, बेचैनी और नींद की समस्या बढ़ सकती है. शुक्र (Venus)- शुक्र देवता सुख-सुविधा, वैभव और सुंदरता का कारक है. सीलन से शुक्र प्रभावित होता है, जिससे आर्थिक परेशानी, घर की रौनक कम होना और वैवाहिक जीवन में तनाव की समस्याएं आ सकती हैं. क्या करें उपाय? – घर में जहां भी लीकेज या सीलन है, उसे तुरंत ठीक कराएं. – घर में धूप और हवा का सही इंतजाम रखें. – नमक या कपूर रखकर नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम करें. – उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ और सूखा रखें.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली दौरे के बाद पटना में नीतीश कुमार से की मुलाकात, गठबंधन में समन्वय पर चर्चा

पटना बिहार की एनडीए सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को होगा। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए मंत्री शपथ लेंगे। उन्हें राज्यपाल सय्यद अता हसनैन पद व गोपनीयता की शपथ दिलायेंगे। इस मौके के साक्षी बड़ी संख्या में एनडीए के शीर्ष नेता बनेंगे। रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। साथ ही बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दलों के नेता जदयू के राजीव रंजन सिंह ललन, हम के जीतन राम मांझी, लोजपाआर के चिराग पासवान से मिलकर रविवार की दोपहर वे पटना पहुंचे। उनकी वापसी के पहले ही पटना जिला प्रशासन के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां आरंभ कर दीं। बताया जाता है कि इसको लेकर आलाधिकारियों ने एक बैठक कर इसकी रणनीति बनाई। समय और शपथ लेने वाले मंत्रियों की संख्या तय की जा रही है। इधर बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अपने पूर्ववर्ती और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। सम्राट चौधरी नई दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद कुमार के आवास पहुंचे थे। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने जदयू अध्यक्ष के साथ हुई मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने "राजग की शानदार जीत के गौरवपूर्ण क्षण को साझा किया।" यह हालिया विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन का संदर्भ था। इससे पहले, सम्राट चौधरी ने जदयू प्रमुख के एक पोस्ट को भी साझा किया था, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनावों में राजग की सफलता पर खुशी जताई थी। इसी बीच, यह चर्चा तेज है कि चुनाव परिणामों के बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। पिछले महीने शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में फिलहाल केवल दो मंत्री हैं, दोनों ही जदयू से हैं। वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शपथ ली थी और दोनों को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री हो सकते हैं। संभावित विस्तार में भाजपा और जदयू के अलावा राजग के अन्य घटकों-लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो को भी प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। इन दलों का नेतृत्व क्रमशः केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा कर रहे हैं। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से जब सात मई को मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।” इस बीच, शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक बड़ा टेंट लगाया जा रहा है। अधिकारी तैयारियों के बारे में कुछ भी बताने से बच रहे हैं, हालांकि भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कि मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम "भव्य आयोजन" होगा, जो राजभवन में हुए सम्राट चौधरी के सादे शपथ ग्रहण समारोह से अलग होगा।

बाल झड़ने की समस्या का नया समाधान: स्टेम सेल रिसर्च से गंजेपन के इलाज की उम्मीद

 बाल गिरना आज के समय में अधिकतर महिला और पुरुष की समस्या बन चुका है. इसके कारण कई लोग परेशान रहते हैं लेकिन उन्हें अपने हेयर फॉल को रोकने का सही तरीका नहीं मिलता. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि काश उनके झड़े हुए बाल दोबारा आ जाएं. पहले तो ऐसा पॉसिबल नहीं था लेकिन अब ऐसे लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है. हाल ही में हुई एक रिसर्च ने गंजेपन के इलाज के पुराने दावों को चुनौती देते हुए यह साबित किया है कि बालों का झड़ना अब लाइलाज नहीं रहा. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बालों की जड़ें यानी स्टेम सेल्स पूरी तरह खत्म नहीं होतीं. यानी वे सिर्फ सो जाती हैं और सही तकनीक से उन्हें फिर से एक्टिव किया जा सकता है. क्या कहती है यह नई रिसर्च? स्टेम सेल रिव्यूज एंड रिपोर्ट्स (Stem Cell Reviews and Reports) में पब्लिश्ड स्टडी के मुताबिक, बालों के झड़ने का मुख्य कारण केवल हार्मोन या जेनेटिक्स नहीं है. रिसर्चर्स ने पाया कि हमारे सिर की त्वचा का वातावरण यानी एक्सट्रासेलुलर मैट्रिक्स (ECM) जब सख्त हो जाती है तो वहां मौजूद स्टेम सेल्स को बढ़ने का सिग्नल नहीं मिल पाता. इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि जैसे बंजर जमीन पर बीज नहीं पनपते वैसे ही कठोर हुए स्कैल्प में बाल नहीं उग पाते. एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स की राय रिसर्च के को-राइटर और क्लिनिकल साइंटिस्ट डॉ. देबराज शोम (Dr. Debraj Shome) का कहना है, अब तक हम सिर्फ बालों के स्ट्रैंड्स पर ध्यान दे रहे थे लेकिन असली खेल स्कैल्प के इकोसिस्टम का है. दरअसल, हार्मोन और जेनेटिक्स की कहानी हमेशा से अधूरी थी. स्टेम सेल्स के आसपास का भौतिक वातावरण उतना ही मायने रखता है जितना कि खुद कोशिकाएं. दरअसल, माइक्रोनीडलिंग और बायोमटेरियल स्कैफोल्ड्स जैसी तकनीकों से स्कैल्प के सख्त टिश्यूज को फिर से नरम बनाया जा सकता है जिससे बाल दोबारा उगने लगते हैं. कैसे होगा दोबारा हेयर ग्रोथ? स्टडी में पाया गया कि जब स्कैल्प को मैकेनिकल स्टिमुलेशन के जरिए सुधारा जाता है तो शरीर के अंदर 'Wnt' और 'YAP/TAZ' जैसे महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल पाथवे फिर से एक्टिव हो जाते हैं. क्लिनिकल ट्रायल के दौरान देखा गया कि केवल 12 हफ्तों के भीतर बालों की डेंसिटी में 20 से 30 प्रतिशत तक का सुधार हुआ था. यह उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जिन पर मिनोक्सिडिल जैसी दवाएं असर करना बंद कर चुकी हैं.

निर्माण कार्यों से आमजन को न हो असुविधा, मानसून से पूर्व पूरे हों आवश्यक कार्य : राज्यमंत्रीगौर

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)कृष्णा गौर ने सोमवार को अयोध्या बायपास पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 10-लेन सड़क परियोजना एवं जल निकासी व्यवस्था को लेकर नगर निगम और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। राज्यमंत्रीगौर ने कहा कि अधिकारी संयुक्त रूप से प्रभावित इलाकों का सघन दौरा करें। उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए बारिश के मौसम से पहले जल निकासी और नाली निर्माण की सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली जाएं। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए इन्हें समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। बैठक में बताया गया कि एनएचएआई द्वारा 52 मीटर चौड़ाई में सड़क का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन नाली का स्तर ऊंचा होने के कारण आसपास की कॉलोनियों में जलभराव की आशंका उत्पन्न हो रही है। राज्यमंत्रीगौर ने समस्या उत्पन्न होने से पहले ही अधिकारियों को संयुक्त रूप से निरीक्षण के लिए निर्देशित किया। अधिकारियों के निरीक्षण के उपरांत पुनः बैठक ली गई। जिसमें उन्होंने बारिश से पूर्व अधिकारियों को सघन जांच और दौरे कर जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री देवांश नवल ने कॉलोनियों में जलभराव रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार करने का आश्वासन दिया है। बैठक में बताया गया कि गीत गणेश कॉलोनी, शीतल पैराडाइस (टनाटन ढाबा), अयोध्या एक्सटेंशन और इन्द्रलोक कॉलोनी जैसे इलाकों में नाले-नालियों का निर्माण किया जाएगा। इससे रहवासियों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, एनएचएआई के प्रोजेक्ट अधिकारी द्वारा यह भी आश्वासन दिया गया कि रत्नागिरी से पीपल्स मॉल तक बारिश के पानी की निकासी करने वाले 5 प्रमुख नालों, पं. अटल बिहारी वाजपेयी सब्जी मंडी नाला, अयोध्या बायपास शिवकल्प नाला, अमृत एन्क्लेव नाला, पिंक सिटी नाला और भानपुर नाला, का चौड़ीकरण कर पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राज्यमंत्रीगौर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कॉलोनियों के स्तर के अनुसार नई नाली प्रस्तावित की जाए और क्रॉस ड्रेन के साथ ही कल्वर्ट की गहराई पर्याप्त रखी जाए ताकि भविष्य में जल निकासी बाधित न हो। इसके अतिरिक्त, दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु रोड क्रॉसिंग का ढलान भी मानकों के अनुरूप रखें। उन्होंने मानसून से पूर्व नालों की साफ-सफाई और मलबा हटाने के भी निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में पार्षदउर्मिला मौर्य,छाया ठाकुर,शिरोमणि शर्मा,ममता विश्वकर्मा सहित नगर निगम और NHAI के अधिकारी मौजूद रहे।