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किंग कोहली ने फिर रचा इतिहास! RCB-KKR मैच में बने कई महारिकॉर्ड

 रायपुर  आईपीएल 2026 में बुधवार (13 मई) को रायपुर के मैदान पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) और कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) के बीच खेले गए मुकाबले में व‍िराट कोहली ने मैदान पर उतरते ही इतिहास रच दिया. स्टार बल्लेबाज अब आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए।  देखा जाए तो विराट कोहली ने मैच में शानदार बल्लेबाजी की. कोहली ने 11 चौके और 3 छक्के की मदद से 60 बॉल पर नाबाद 105 रनों की पारी खेली. कोहली के आईपीएल करियर का ये 9वां शतक रहा. ओवरऑल कोहली के टी20 करियर की ये 10वीं सेंचुरी रही. कोहली के शतक की बदौलत आरसीबी ने इस मैच में 6 विकेट से जीत हासिल की।  टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक शतक 22- क्रिस गेल 13- बाबर आजम 10- डेविड वॉर्नर 10- विराट कोहली 9- रिली रोसो/साहिबजादा फरहान 9 – क्विंटन डिकॉक/अभिषेक शर्मा सर्वाधिक आईपीएल शतक 9- विराट कोहली* 7- जोस बटलर 6- क्रिस गेल 6- केएल राहुल 5- संजू सैमसन केकेआर के खिलाफ यह मुकाबला कोहली के IPL करियर का 279वां मैच रहा. इसी के साथ उन्होंने एमएस धोनी और रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पहले तीनों खिलाड़ी 278-278 मैचों के साथ संयुक्त रूप से टॉप पर थे।  धोनी ने 2025 सीजन के आखिरी लीग मुकाबले में यह आंकड़ा छुआ था, जबकि रोहित और विराट रविवार को मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच के दौरान बराबरी पर पहुंचे थे. अब विराट अकेले इस सूची में नंबर-1 बन गए हैं।  IPL में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी     विराट कोहली – 279     एमएस धोनी – 278     रोहित शर्मा – 278     रवींद्र जडेजा – 265     द‍िनेश कार्त‍िक- 257     विराट के नाम एक और खास रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. वह IPL इतिहास में एक ही फ्रेंचाइजी के लिए सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने वाले खिलाड़ी भी हैं. उन्होंने अपने पूरे IPL करियर में सिर्फ आरसीबी के लिए खेला है. इस मामले में धोनी दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 248 मुकाबले खेले हैं. वहीं रोहित शर्मा ने मुंबई इंड‍ियंस के लिए 233 मैच खेले हैं।  इतना ही नहीं, विराट ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की. वह IPL इतिहास में 12 अलग-अलग सीजन में 400 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं।  IPL में सबसे ज्यादा सीजन में 400+ रन     विराट कोहली – 12     डेव‍िड वॉर्नर – 9     सुरेश रैना – 9     शिखर धवन – 9     रोहित शर्मा – 9 कोहली ने इस दौरान मैच में अपने 14000 रन भी पूर किए और एक नया कीर्त‍िमान भी बनाया, उन्होंने ये रन बनाने के ल‍िए सबसे कम पार‍ियां भी लीं।  14000 T20 रन बनाने के लिए सबसे कम पारियां     409 – विराट कोहली*     423 – क्रिस गेल     431 – डेविड वार्नर     468 – जोस बटलर     505 – एलेक्स हेल्स     633 – कीरोन पोलार्ड अब नजर इस बात पर रहेगी कि विराट इस सीजन में अपने रिकॉर्ड को और कितना आगे ले जाते हैं. आरसीबी प्लेऑफ की रेस में मजबूत स्थिति में है और अगर टीम आगे बढ़ती है तो कोहली का रिकॉर्ड और भी बड़ा हो सकता है। 

BJP को लगा बड़ा झटका: CM नायब सैनी समेत दिग्गजों के प्रचार के बावजूद 23 वर्षीय रीमा ने मारी बाजी

चंडीगढ़  भाजपा ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव और पंचायतों में परचम लहराने के बाद स्थानीय निकाय के चुनावों में भी जीत हासिल की है। पंचकूला, हिसार, अंबाला और सोनीपत समेत कुल 6 जिलों में भाजपा ने बड़ी जीत पाई। फिर भी एक नतीजे ने भाजपा को ही नहीं बल्कि सभी को चौंका दिया है। हिसार के उकलाना में भाजपा कैंडिडेट निकिता गोयल को 23 साल की लड़की रीमा सोनी ने हरा दिया। इस नतीजे की पूरे हरियाणा में चर्चा हो रही है कि आखिर रीमा सोनी ने कैसे भाजपा के विजय रथ को रोक दिया। उकलाना में वैश्य समुदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी है, फिर भी भाजपा कैंडिडेट का यहां हार जाना उल्लेखनीय है। यही नहीं यह हार इसलिए भी अहम है क्योंकि उकलाना के चेयरमैन पद के लिए भाजपा से वरिष्ठ नेता श्रीनिवास गोयल की बहू निकिता गोयल को उम्मीदवार बनाया गया था। उन्हें रीमा सोनी ने 2,806 वोटों से हरा दिया। सोनी को कुल 7078 वोट मिले हैं, जबकि गोयल को 4272 वोट हासिल हुए। इस नतीजे से भाजपा के वरिष्ठ नेता भी हैरान हैं और तय माना जा रहा है कि पार्टी इसकी समीक्षा करेगी। इसकी वजह यह है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी यहां प्रचार के लिए पहुंचे थे। इस चुनाव में कुल 15,507 पंजीकरण वोटर थे, जबकि 11,744 वोटरों ने मतदान किया। इस तरह यहां कुल 75 फीसदी वोटिंग हुई। इस चुनाव में सीएम नायब सिंह सैनी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली, कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा और कृष्ण बेदी भी प्रचार में उतरे थे। इसके अलावा राज्यसभा के मेंबर सुभाष बराला और संजय भाटिया भी पहुंचे थे। ऐसे में इतने दिग्गज नेताओं के प्रचार के बाद भी निकिता गोयल को 4 हजार वोट मिलना पार्टी के लिए झटके की तरह है। सीएम सैनी ने खुद इलाके में 4 जनसभाओं को संबोधित किया था। वहीं रीमा सोनी के पक्ष में स्थानीय विधायक नरेश सेलवाल प्रचार में थे। रीमा सोनी निर्दलीय उतरी थीं, लेकिन सेलवाल के समर्थन के साथ ही कांग्रेस के वोटर उनके पक्ष में आ गए थे। फिर बाकी कसर इनेलो के समर्थन ने पूरी कर दी। बनिया बनाम गैर बनिया हुआ चुनाव और बदले समीकरण इसके अलावा भाजपा सूत्रों का कहना है कि यह चुनाव बनिया बनाम गैर बनिया हो गया था। इसका असर हुआ कि वैश्य समुदाय से इतर अन्य मतदाताओं का रुझान रीमा सोनी की ओर हो गया। इसके कारण रीमा ने कुल 16 में से 14 वार्डों में गोयल को हरा दिया। यही नहीं गोयल परिवार का घर उकलाना मंडी में है और इस वार्ड में भी निकिता को हार मिली। वोटों की गिनती कुल 4 राउंड में हुई, लेकिन निकिता गोयल ने मैदान तभी छोड़ दिया जब वह शुरुआती दो राउंड में पिछड़ती हुई दिखीं। सूत्रों का कहना है कि ग्रैजुएशन पूरी करने के बाद रीमा सोनी सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं। उनके पिता महेंदर सोनी एक सुनार हैं और 2006 से पार्षद भी हैं। रीमा के प्रचार में उनका भी अहम योगदान रहा।

मुंबई हमले का आरोपी, फिर भी नागरिकता बरकरार! कनाडा क्यों नहीं ले पा रहा बड़ा एक्शन?

 टोरंटो भारतीय समेत दुनियाभर के कई लोग बसने के लिए कनाडा को इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि एक बार यहां की नागरिकता हासिल कर ली जाए तो इस देश से निकाले जाने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है और फिर यहां के मूल निवासियों की तरह यहां के अधिकार भी हासिल किए जा सकते हैं. कुछ मिलाकर कनाडा में नागरिकता छीनी जानी इतनी आसान नहीं है. इसका बड़ा उदाहरण मुंबई 26/11 आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का केस है।  अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद अब उस पर भारत में मुकदमा चलने की तैयारी है लेकिन इसी बीच कनाडा में उससे जुड़ा एक दूसरा बड़ा सवाल भी लगातार उठ रहा है. अगर कनाडाई एजेंसियों को सालों पहले ही शक हो गया था कि राणा ने झूठ बोलकर नागरिकता हासिल की थी, तो उसकी नागरिकता अब तक रद्द क्यों नहीं हुई? यह सवाल केवल राणा तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ सालों में सामने आए मामलों से पता चलता है कि कनाडा में एक बार नागरिकता मिलने के बाद उसे वापस लेना बेहद लंबी, जटिल और धीमी प्रक्रिया बन जाती है. कई मामलों में सरकार को 10 से 20 साल तक लग जाते हैं।  तहव्वुर राणा पर क्या हैं आरोप? तहव्वुर हुसैन राणा पर आरोप है कि उसने 2000 में कनाडाई नागरिकता के लिए आवेदन करते समय गलत जानकारी दी थी. उसने दावा किया था कि वह ओटावा में रह रहा है और कनाडा में लगातार मौजूद था. लेकिन बाद में RCMP और अमेरिकी एजेंसियों की जांच में ऐसे दस्तावेज सामने आए जिनसे पता चला कि वह उस दौरान अमेरिका के शिकागो में रह रहा था. कनाडा में दिए गए उसके पते पर दूसरे लोग रहते थे और पड़ोसियों ने भी कहा कि उन्होंने राणा को वहां कभी नहीं देखा।  जांच में यह भी सामने आया कि राणा शिकागो में कई कारोबार चला रहा था. इसके बावजूद उसे 2001 में कनाडाई नागरिकता और पासपोर्ट दोनों मिल गए. बाद में भारतीय एजेंसियों ने आरोप लगाया कि उसने इसी कनाडाई पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए मुंबई हमले से पहले भारत की यात्रा की थी।  आखिर कनाडा में नागरिकता रद्द करना इतना मुश्किल क्यों? नागरिकता “अधिकार” बन जाती है कनाडा में एक बार नागरिकता मिलने के बाद व्यक्ति को लगभग वही संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा मिलती है जो जन्म से कनाडाई नागरिकों को मिलती है. यही वजह है कि सरकार किसी की नागरिकता बिना मजबूत कानूनी प्रक्रिया के नहीं छीन सकती. अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिले।  इसी वजह से नागरिकता रद्द करने के मामलों में विस्तृत जांच होती है, अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड जुटाए जाते हैं, अदालत में सबूत पेश होते हैं और अपील की कई परतें होती हैं. इन सबमें सालों लग जाते हैं।  बार-बार बदलते रहे कानून यह देरी सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की वजह से नहीं हुई. कनाडा में नागरिकता कानून खुद कई बार बदले गए. 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Stephen Harper की कंजर्वेटिव सरकार ने कानून बदलकर आतंकवाद, जासूसी और राजद्रोह जैसे मामलों में नागरिकता रद्द करना आसान बना दिया था. सरकार का तर्क था कि जो व्यक्ति कनाडा के खिलाफ गंभीर अपराध करे, उसे नागरिकता रखने का अधिकार नहीं होना चाहिए।  लेकिन 2015 चुनाव में जस्टिन ट्रूडो और लिबरल पार्टी ने इसका विरोध किया. उनका प्रसिद्ध नारा था- “A Canadian is a Canadian is a Canadian.” लिबरल सरकार का कहना था कि दोहरी नागरिकता रखने वालों को अलग तरीके से ट्रीट करना गलत है।  इसके बाद 2017-18 में नियम फिर बदले गए. अब कनाडा में नागरिकता केवल इन आधारों पर छीनी जा सकती है:     धोखाधड़ी     गलत जानकारी     तथ्यों को छिपाना यानी आतंकवाद में दोषी ठहराया जाना अपने आप नागरिकता खत्म करने का आधार नहीं रह गया. सरकार के पास सीमित संसाधन इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा के पास ऐसे मामलों को तेजी से निपटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. हर मामले में विदेशों से रिकॉर्ड मंगाने पड़ते हैं, पुराने दस्तावेजों की जांच होती है, गवाहों से पूछताछ होती है और अदालत में लंबी सुनवाई चलती है. राणा केस में जांच 2009 में शुरू हुई थी, लेकिन 2024 में जाकर सरकार ने संघीय अदालत से अंतिम फैसला मांगा।  आरोपी के बचाव का हिस्सा बन जाती है लंबी देरी दिलचस्प बात यह है कि सालों की देरी बाद में आरोपियों के लिए कानूनी बचाव भी बन जाती है. राणा ने भी अदालत में कहा कि इतने पुराने मामलों की घटनाएं अब उसे याद नहीं हैं. कई मामलों में आरोपी यह दलील देते हैं कि सबूत पुराने हो चुके हैं, गवाह उपलब्ध नहीं हैं और सरकार ने कार्रवाई में अत्यधिक देरी की. इससे प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।  सुरक्षा और अधिकारों के बीच फंस गया कनाडा तहव्वुर राणा केस ने कनाडा के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या देश नागरिक अधिकारों की रक्षा करते-करते राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बहुत धीमा हो गया है? मानवाधिकार विशेषज्ञ कहते हैं कि नागरिकता छीनना बेहद गंभीर कदम है और इसमें जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. दूसरी तरफ आलोचकों का तर्क है कि अगर किसी ने धोखे से नागरिकता हासिल की हो, तो कार्रवाई दशकों तक नहीं चलनी चाहिए. यही कारण है कि यह मामला अब केवल एक आतंकी आरोपी का नहीं, बल्कि कनाडा की पूरी इमिग्रेशन और नागरिकता प्रणाली की परीक्षा बन चुका है।  दूसरे देशों से कनाडा कितना अलग?     ब्रिटेन ने 2010 के बाद से 1,500 से ज्यादा लोगों की नागरिकता रद्द की है, जिनमें बड़ी संख्या आतंकवाद और धोखाधड़ी के मामलों की थी।      अमेरिका भी हाल के सालों में ऐसे मामलों में आक्रामक रुख दिखा रहा है. इसके मुकाबले कनाडा में नागरिकता रद्द करने के मामले बेहद कम हैं. 2024 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक-     दो दर्जन मामलों में कार्रवाई हुई     सात मामले अदालत में लंबित हैं     90 से ज्यादा मामलों में सरकार ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई अब आगे क्या होगा? राणा की नागरिकता रद्द करने का मामला अभी भी कनाडा की संघीय अदालत में लंबित है. अगर अदालत सरकार के पक्ष में फैसला देती है, … Read more

रांची की बेटी का देशभर में डंका! भव्या रंजन ने 99.8% लाकर किया टॉप

रांची रांची की छात्रा भव्य रंजन ने CBSE 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. रांची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा भव्या अब तक सामने आए परिणामों के अनुसार नेशनल टॉपर्स की सूची में शामिल मानी जा रही हैं. ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल  की छात्रा आर्ट्स स्ट्रीम की नेशनल टॉपर के रूप में सामने आई हैं. उनकी इस सफलता से स्कूल, परिवार और शहर में खुशी की लहर है. भव्या ने इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पेंटिंग में 100 में 100 नंबर हासिल किए हैं।  भव्या की सफलता ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।  अपनी उपलब्धि पर क्या बोलीं भव्या?  अपनी उपलब्धि के बारे में बताते हुए छात्रा ने कहा कि वह पढ़ाई को घंटों में नहीं बांटती थीं बल्कि प्रोडक्टिव स्टडी पर फोकस करती थीं. उन्होंने कहा कि रोजाना पढ़ाई, सही प्लानिंग और खुद पर भरोसा उनका सफलता बनीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया।  स्कूल से हमेशा मिला सहयोग बात करते हुए भव्या ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों ने उनका हर कदम पर साथ दिया. परीक्षा के समय किसी भी तरह की परेशानी में उनके शिक्षकों ने दूर करने में मदद की. भव्या ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि केवल पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।    भविष्य की योजना  बता दें कि भव्या की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता बिजनेसमैन हैं. परिवार के अनुसार भव्या रोजाना 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं. भव्या का अगला लक्ष्य  UPSC परीक्षा पास कर सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं।  क्या बोले स्कूल के डयरेक्टर?  स्कूल के अकादमिक डयरेक्टर सिम्मी मेहता ने कहा कि भव्या जैसी छात्रा देश के उज्ज्वल भविष्य की पहचान हैं और उनकी सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। 

अब दूध पर भी बढ़ी मार: Amul और Mother Dairy ने बढ़ाए दाम, आज से लागू नए रेट

नई दिल्ली आज से आम आदमी की रसोई का बजट फिर बढ़ गया है. देश की दो बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं. दोनों कंपनियों ने अपने अलग-अलग दूध वैरिएंट्स पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गई हैं. कंपनियों का कहना है कि किसानों से दूध खरीद की लागत बढ़ने और उत्पादन खर्च ज्यादा होने की वजह से कीमतों में बदलाव करना पड़ा है।  Amul Milk Price Hike: अमूल दूध हुआ महंगा गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) ने अमूल दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं. कंपनी के मुताबिक नई कीमतें पूरे भारत में लागू होंगी और सभी प्रमुख वैरिएंट्स महंगे हो जाएंगे.अब अमूल का फुल क्रीम दूध 68 रुपये की जगह 70 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. इसके अलावा कंपनी ने अपने कई दूसरे वैरिएंट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है।  कौन-कौन से Amul Milk Products हुए महंगे? आप इस लिस्ट में देख सकते हैं कि अमूल के किन दूध वैरिएंट्स की कीमत बढ़ी हैं…     अमूल फुल क्रीम मिल्क (Amul Full Cream Milk)     अमूल गोल्ड (Amul Gold)     अमूल स्टैंडर्ड मिल्क (Amul Standard Milk)     अमूल बफेलो मिल्क (Amul Buffalo Milk)     अमूल स्लिम एंड ट्रिम (Amul Slim & Trim)     अमूल ताज़ा (Amul Taaza)     अमूल काउ मिल्क (Amul Cow Milk)     अमूल टी स्पेशल मिल्क (Amul Tea Special Milk) कंपनी ने बताया कि आखिरी बार मई 2025 में दूध की कीमतें बढ़ाई गई थीं. उस समय भी प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी।  Mother Dairy Milk Price Hike: मदर डेयरी ने भी बढ़ाए दूध के दाम अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी अपने लिक्विड मिल्क वैरिएंट्स की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी ने कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीद की कीमत करीब 6% बढ़ी है, जिसकी वजह से लागत बढ़ी है.मदर डेयरी के मुताबिक कंपनी अपनी कुल कमाई का करीब 75-80% हिस्सा किसानों और दूध खरीद पर खर्च करती है. ऐसे में बढ़ी हुई लागत का कुछ असर ग्राहकों पर डालना जरूरी हो गया था।  अब कितना महंगा मिलेगा Mother Dairy दूध? दिल्ली-NCR में मदर डेयरी के नए रेट (Mother Dairy New Price List) इस तरह होंगे…      Token Milk अब 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर हो गया है.     Full Cream Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है.     Toned Milk अब 58 रुपये की जगह 60 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.     Double Toned Milk (Live Lite) की कीमत 52 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो गई है.     Cow Milk अब 60 रुपये की जगह 62 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.     Pro Milk की कीमत 70 रुपये से बढ़कर 72 रुपये प्रति लीटर हो गई है. मदर डेयरी ने बताया कि आखिरी बार अप्रैल 2025 में कीमतों में बदलाव किया गया था. क्यों बढ़ रहे हैं दूध के दाम? दूध कंपनियों के मुताबिक कई वजहों से लागत बढ़ी है…     किसानों से महंगे दाम पर दूध खरीद     पशु चारे की बढ़ती कीमतें     ट्रांसपोर्ट और सप्लाई लागत में इजाफा     गर्मी के मौसम में दूध उत्पादन पर असर इन्हीं वजहों से दूध कंपनियों ने दूध की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है।  आम आदमी के बजट पर कितना पड़ेगा असर? दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के मासिक बजट पर पड़ सकता है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज होने की वजह से अब परिवारों को हर महीने ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर होगा जहां रोजाना 2 से 5 लीटर तक दूध इस्तेमाल होता है.चाय, कॉफी, मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स की लागत भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती है.

सियासी हलचल तेज: अखिलेश के पहुंचते ही अपर्णा ने की अकेले में मुलाकात

लखनऊ अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन के बाद लखनऊ से लेकर सैफई तक शोक का माहौल है. गुरुवार सुबह उनका अंतिम संस्कार बैकुंठ धाम भैंसाकुंड में किया जाएगा. इससे पहले बुधवार देर शाम तक कालिदास मार्ग स्थित आवास पर नेताओं, रिश्तेदारों और करीबी लोगों का आना-जाना लगा रहा. इसी बीच कई भावुक दृश्य भी सामने आए।  अपर्णा यादव जब असम से लौटकर सीधे लखनऊ पहुंचीं तो घर के भीतर का माहौल बेहद गमगीन था. कुछ ही मिनटों बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर भी एंबुलेंस से आवास पहुंचा. परिवार के लोग लगातार एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान अखिलेश यादव भी घर पहुंचे. जैसे ही अखिलेश ने प्रतीक के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया उसके बाद अपर्णा यादव और अखिलेश यादव के बीच कुछ देर बंद कमरे में बातचीत हुई. बाहर पूरा परिवार और करीबी लोग मौजूद रहे, लेकिन उस कमरे में क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई।  अपर्णा यादव ने खुद दी अंतिम संस्कार की जानकारी प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार को लेकर अपर्णा यादव ने खुद सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा कि अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि पद्म विभूषण और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के सुपुत्र एवं हम सभी के प्रिय प्रतीक यादव जी का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बैकुंठ धाम (भैंसाकुंड) में संपन्न होगा. उन्होंने इस दुःख की घड़ी में लोगों से गरिमामयी उपस्थिति की अपील भी की. पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर संवेदनाओं की बाढ़ आ गई. राजनीतिक दलों के नेताओं से लेकर आम लोगों तक ने परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया।  पोस्टमार्टम हाउस से निकले तो भावुक दिखे अखिलेश इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे. वहां मीडिया से बातचीत के दौरान वह काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद जागरूक थे और हमेशा फिटनेस पर ध्यान देते थे. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक बिजनेस में व्यस्त रहते थे और कई बार व्यापारिक नुकसान मानसिक दबाव भी पैदा कर देता है. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी. उस दौरान उन्होंने प्रतीक से कहा था कि वह अपने बिजनेस पर ध्यान दें. अखिलेश यादव ने कहा, वह बहुत अच्छा लड़का था. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा परिवार इस समय एकजुट होकर खड़ा है और आगे परिवार जो फैसला करेगा, उसी के अनुसार कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।  अपर्णा के पहुंचने का इंतजार करता रहा परिवार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यादव परिवार के कई सदस्य सीधे घर नहीं पहुंचे. परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक पहले अपर्णा यादव के लखनऊ पहुंचने का इंतजार किया गया. अपर्णा असम से फ्लाइट के जरिए सीधे लखनऊ पहुंचीं और एयरपोर्ट से कालिदास मार्ग स्थित आवास चली गईं. उनके पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर भी घर लाया गया. घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात रहे. वहीं अंदर लगातार परिवार और करीबी लोगों का पहुंचना जारी रहा।  सबसे पहले पहुंचे शिवपाल यादव प्रतीक यादव का शव घर पहुंचने के तुरंत बाद सबसे पहले शिवपाल यादव वहां पहुंचे. कुछ ही देर में डिंपल यादव भी घर पहुंच गईं. दोनों ने अपर्णा यादव और उनकी बेटियों को ढांढस बंधाया. घर के भीतर का माहौल बेहद भावुक था. कई बार परिवार के सदस्य खुद को संभालते नजर आए. अखिलेश यादव और डिंपल यादव काफी देर तक प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर के पास रहे. इस दौरान उनकी दोनों बेटियां भी वहीं मौजूद रहीं।  बीजेपी और सपा नेताओं का लगा तांता प्रतीक यादव के निधन के बाद राजनीतिक सीमाएं भी टूटती नजर आईं. समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों दलों के नेता परिवार को सांत्वना देने पहुंचे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी घर पहुंचे. सैफई से यादव परिवार के कई सदस्य लगातार लखनऊ पहुंचते रहे. इसी दौरान मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. शाम तक घर के बाहर नेताओं और समर्थकों की भीड़ बढ़ती चली गई CM योगी भी पहुंचे श्रद्धांजलि देने शाम करीब चार बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की. इससे पहले मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर भी दुख जता चुके थे. उन्होंने कहा था कि प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है और ईश्वर परिवार को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दें।  साक्षी महाराज और अखिलेश की मुलाकात चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने से ठीक पहले एक और तस्वीर चर्चा में आ गई. भाजपा सांसद साक्षी महाराज भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे थे. इसी दौरान बाहर आए अखिलेश यादव सीधे साक्षी महाराज के पास गए और उन्हें गले लगा लिया. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. हाल के दिनों में साक्षी महाराज ने ओबीसी वोट और यूजीसी जैसे मुद्दों पर भाजपा को लेकर बयान दिए थे. ऐसे में इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई. हालांकि उस समय माहौल पूरी तरह शोक का था और दोनों नेताओं ने परिवार के दुख को प्राथमिकता दी।  अंतिम समय में घर पर थीं दोनों बेटियां जानकारी के मुताबिक जिस समय प्रतीक यादव की तबीयत बिगड़ी, उस समय घर में उनकी दोनों बेटियां मौजूद थीं. घरेलू स्टाफ और सुरक्षाकर्मी भी वहीं तैनात थे. उस दौरान अपर्णा यादव असम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई हुई थीं. सूत्रों के अनुसार सुबह करीब पांच बजे घरेलू नौकर ने प्रतीक यादव को कमरे में बेहोशी की हालत में देखा. बताया जा रहा है कि वह कोहनी के बल पड़े हुए थे. नौकर ने तुरंत परिवार और अस्पताल को सूचना दी. इसके बाद सिविल अस्पताल से इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को घर भेजा गया।  अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम चुकी थीं सांसें डॉक्टर जब मौके पर पहुंचे तो शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी. हार्ट फंक्शन भी नहीं कर रहा था. इसके बाद तत्काल अस्पताल में इमरजेंसी तैयारी शुरू की गई और उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान … Read more

राजधानी शर्मसार: बस में महिला के साथ गैंगरेप, आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर पकड़े गए

नई दिल्ली  दिल्ली में फिर निर्भया जैसी गैंगरेप की घटना सामने आई है। घटना दिल्ली के रानीबाग इलाके की है। रानीबाग इलाके में चलती प्राइवेट बस में महिला के साथ गैंगरेप हुआ है। पीड़िता के मुताबिक वह सोमवार रात काम से लौट रही थी। सरस्वती विहार बस स्टैंड पर उसने बस को हाथ दिया। बस धीमी हुई, ड्राइवर और कंडक्टर ने महिला को जबरन अंदर खींच लिया और फिर पूरी रात उसके साथ गैंगरेप किया। बाद में आरोपी महिला को सड़क किनारे फेंककर भाग गए। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज करके बस को कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से आरोपियों की पहचान करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि बस को कब्जा में ले लिया गया है। इसकी फोरेंसिक जांच की जाएगी। पुलिस टीम इस बात की भी पुष्टि कर रही हैं कि क्या इस अपराध में और भी लोग शामिल थे। बहरहाल, महिला ने बताया कि आरोपी वारदात के बाद उसे सुनसान इलाके में फेंककर भाग गए। किसी तरह उसने पुलिस को फोन करके पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही रानीबाग थाना पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और बस की पहचान कर ली। इसके बाद बस को जब्त करके ड्राइवर और कंडक्टर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है। दो आरोपी गिरफ्तार जांच के दौरान पुलिस ने बस ड्राइवर और कंडक्टर को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच को गति दी जा रही है। मेडिकल जांच और एफआईआर दर्ज महिला का मेडिकल जांच कराने के बाद औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों को केस की जांच में शामिल किया जा रहा है ताकि सच्चाई सामने आ सके। तीन बच्चों की मां है पीड़िता जानकारी के मुताबिक पीड़िता एक विवाहित महिला है और उसके तीन बच्चे हैं। पुलिस इस पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ देख रही है और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई जारी दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले की जांच हर एंगल से की जा रही है। अन्य संभावित सबूतों को जुटाया जा रहा है और यह भी देखा जा रहा है कि घटना के पीछे कोई और व्यक्ति या साजिश तो शामिल नहीं है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हुई ऐसी वारदात ऐसा मामला इससे पहले साल 2012 में भी देखा गया था। दिल्ली में हुए निर्भया कांड (Nirbhaya case) ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद सार्वजनिक परिवहन और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सख्त कानून और नीतिगत बदलाव किए गए, लेकिन समय-समय पर इस तरह की घटनाएं यह सवाल फिर से उठाती हैं कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

इन पौधों को जरूर बनाएं अपने किचन गार्डन का हिस्सा

आपका किचन किसी खजाने से कम नहीं। यह वो जगह है जहां हर बीमारी का इलाज मिलता है और हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन। लेकिन अगर आप अपने किचन के गार्डन को और भी इफेक्टिव बनाएं तो आपका किचन भी किसी अलादीन के खजाने से कम भी नहीं होगा। जानिए कुछ ऐसे पौधों के बारे में जिन्हें आपको अपने किचन गार्डन जरूर शामिल करना चाहिए…. तुलसी:– तुलसी एक पारंपरिक पौधा है। तुलसी का महत्व हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा है। इस पौधे की आपको ज्यादा देखभाल नहीं करनी पड़ती। तुलसी एक औषधीय पौधा है जिससे आप ठंड के कारण होने वाली बीमारियों से निजात पा सकते हैं। एलोवेरा:- एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसकी देखभाल करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत-मशक्कत नहीं करनी पड़ती। इसे एक प्रॉपर जगह देकर आप उगा दें और पानी देते रहें। कुछ दिन बाद आप देखेंगी कि पौधा अपने आप अपनी जगह से फैलता जा रहा है धनिया:- धनिया आपके खाने को एक नया स्वाद देता है। लगभग हर खाने में हाउसवाइव्स धनिए का इस्तेमाल जरूर करती हैं। ऐसे में ये साफ और स्वच्छ धनिया होना आपकी जरूरत होनी चाहिए। इसलिए कोशिश करें कि धनिया आप अपने किचन गार्डन में ही उगाएं। पुदीना:- पाचन संबंधी दिक्कतों में पुदीना बहुत कारगर है। इसे एक बड़े गमले में उगाएं क्योंकि यह तेजी से फैलता है। ताजा पुदीना के पत्तों का इस्तेमाल आप चाय में, चटनी के रूप में और सब्जी को एक नया टेस्ट देने के लिए कर सकते हैं।  

बजाज समूह के 100 वर्ष पूरे: प्रधानमंत्री ने की उपलब्धियों और विरासत की तारीफ

प्रधानमंत्री ने बजाज समूह की 100 वर्ष की यात्रा को सराहा मुंबई  देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में शामिल बजाज समूह ने सोमवार को अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूह को बधाई देते हुए राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बजाज समूह ने दशकों से रोजगार सृजन, नवाचार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि समूह की यह 100 वर्षों की यात्रा केवल लंबे समय तक टिके रहने की कहानी नहीं है, बल्कि समय के साथ खुद को ढालने और निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता का भी प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बजाज समूह ने देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने समूह के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा, ”दशकों से बजाज समूह ने रोजगार पैदा करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सामुदायिक विकास का समर्थन करके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 100 साल किसी भी संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण यात्रा है, जो न केवल लंबी अवधि तक टिके रहने, बल्कि समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता को भी दर्शाती है। इस अवसर पर मध्य मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राजनीति और व्यापार जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की। जमनालाल बजाज ने 1926 में मुंबई में इस समूह की स्थापना की थी और आज इसका बाजार पूंजीकरण 148 अरब डॉलर है और इसमें 1.3 लाख लोग काम करते हैं। संस्थापक जमनालाल बजाज स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्हें महात्मा गांधी का बेहद करीबी माना जाता था। घरेलू विनिर्माण पर जोर देते हुए बजाज ऑटो के चेयरमैन नीरज बजाज ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा हाल ही में शुरू नहीं हुई है, बल्कि जमनालाल जैसे अग्रदूतों के कारण एक सदी पहले ही शुरू हो गई थी। दिवंगत राहुल बजाज के पुत्र राजीव बजाज ने कहा, ”हम जो कहते हैं और जो करते हैं, उसमें हमेशा एक समानता होनी चाहिए। शायद इसीलिए बजाज की यात्रा केवल विकास की कहानी नहीं बनी, बल्कि यह विश्वास की कहानी बन गई।” इस अवसर पर बजाज परिवार ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उतरने की अपनी योजना भी सार्वजनिक की। इसकी कमान नीरज बजाज के पुत्र नीरव बजाज संभालेंगे, जो व्यवसाय चलाने वाली परिवार की पांचवीं पीढ़ी का हिस्सा हैं। बजाज इंटीग्रेटेड हेल्थ सिस्टम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीरव बजाज ने कहा, ”हमारा मानना है कि समाज को लाभ से ही लाभ होना चाहिए, ताकि विकास गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचे।”

राज्यमंत्री बागरी ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री से भेंट कर जताया आभार

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं आवास राज्य मंत्री  प्रतिमा बागरी ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला से मुलाकात कर सतना जिले को 50 मेगावाट सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण परियोजना की स्वीकृति मिलने पर आभार व्यक्त किया। यह परियोजना राज्य सरकार के व्यापक ऊर्जा लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत 300 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना (4 घंटे ऊर्जा भंडारण सहित), 300 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना (6 घंटे ऊर्जा भंडारण सहित) तथा 200 मेगावाट 24 घंटे उपलब्धता वाली सौर ऊर्जा परियोजना शामिल हैं। यह परियोजना सतना के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे, उद्योगों एवं निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्रीय विकास एवं आधारभूत सुविधाओं में सुधार आएगा। ऊर्जा भंडारण तकनीक के माध्यम से अधिक स्थिर एवं प्रभावी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तथा हरित एवं सतत विकास को गति मिलेगी। यह परियोजना सतना को देश के उभरते हुए ग्रीन एनर्जी हब के रूप में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।