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बैंकिंग सेक्टर में TVS Motor की एंट्री, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश से शेयरों पर नजर

 नई दिल्ली  टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड 193.32 करोड़ रुपये में जन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड में 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह अधिग्रहण ‘टीवीएस वेणु’ के एक सौदे का हिस्सा है इसके तहत वॉरंट जारी करने और द्वितीयक बाजार से खरीद के जरिये जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में पूर्ण रूप से चुकता आधार पर 9.9 प्रतिशत तक की अल्पांश हिस्सेदारी हासिल की जाएगी। इसमें से 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी टीवीएस मोटर कंपनी के पास होगी। हो गया शेयर खरीद समझौता टीवीएस मोटर कंपनी के निदेशक मंडल ने सोमवार को हुई बैठक में जन होल्डिंग्स लिमिटेड के साथ शेयर खरीद समझौते (एसपीए) को मंजूरी दी। इसके तहत कंपनी 51,60,903 इक्विटी शेयरों की खरीद करेगी, जो 18 मई, 2026 तक जन स्मॉल फाइनेंस बैंक की चुकता पूंजी का 4.90 प्रतिशत है। कितने में हुई है डील? टीवीएस मोटर ने बताया कि इस सौदे की कुल लागत 193.32 करोड़ रुपये होगी। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेंकटरमन ने कहा कि जन में यह निवेश टीवीएस वेंचर्स की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत भारत की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने वाली उच्च गुणवत्ता वाली इकाइयों का समर्थन किया जाता है। कितने पर हैं शेयर? आज सवा 3 बजे जन स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर 5.53 फीसदी की गिरावट के साथ 462 रुपये पर है। वहीं टीवीएस मोटर कंपनी का शेयर भी 5.32 फीसदी गिरकर 3,282.55 रुपये पर है।

2029 की जंग से पहले दक्षिण में कांग्रेस मजबूत, क्या BJP की राह होगी मुश्किल?

नई दिल्ली केरल की सत्ता में वापसी के साथ कांग्रेस पार्टी के अरमानों को नए फंख लग गए हैं. इसके साथ ही कांग्रेस दक्षिण के पांच में से तीन राज्यों में सीधे और एक में परोक्ष रूप से सत्ता में भागीदार हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में उसकी हालत ठीक है. वहीं उत्तर में पार्टी की एक मात्र राज्य हिमाचल प्रदेश में सरकार है. लेकिन, दक्षिण में मिली सफलता के बाद राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इस बात की चर्चा करने लगा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कहां खड़ी होती दिख रही है।  दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज पूरी तरह अलग है. हर एक मानक पर देश के दोनों क्षेत्र बिल्कुल अलग है. देश भर में एकछत्र सफलता हासिल कर चुकी भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते अपनी रफ्तार खो देती है. मौजूदा वक्त में केवल आंध्र प्रदेश में वह चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार में वह भागीदार है. हालांकि पुड्डुचेरी में भी उसी सरकार है. मगर पांचों बड़ों राज्यों यानी तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में से केवल कर्नाटक में ही पार्टी अपना एक ठोस जनाधार बना पाई है. वह कर्नाटक की सत्ता तक पहुंची है लेकिन बाकी के चारों राज्यों में उसकी मौजूदगी काफी कम है।  पूरे दक्षिण की बात करें तो यहां लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं. इसमें से 39 तमिलनाडु, 28 कर्नाटक, 25 आंध्र प्रदेश, 20 केरल, 17 तेलंगाना और एक सीट पुड्डुचेरी में हैं. इसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. यानी कुल 106 सीटों पर कांग्रेस सीधी टक्कर में है. कांग्रेस ने बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों में भी इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा. ऐसे में गठबंधन को कुल 74 और भाजपा की एनडीए को 49 सीटों पर जीत मिली थी. केवल कांग्रेस की बात करें तो उसने अपने दम पर तमिलनाडु में नौ, कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में शून्य, तेलंगाना में आठ और केरल में 14 सीटों पर जीत हासिल की. इस तरह उसे कुल 40 सीटों पर जीत मिली. वहीं भाजपा को अपने दम पर तमिलनाडु में शून्य, कर्नाटक में 17, आंध्र प्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और केरल में एक सीट पर जीत मिली. उसे कुल 29 सीटें मिलीं. इस तरह पूरे इलाके में अकेले और बतौर गठबंधन दोनों स्थितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।  तमिलनाडु में बदल चुकी है स्थिति तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है. ऐसे में लोकसभा चुनाव में उसको इसका और अधिक फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ पार्टी केरलम में वापस सत्ता में आई है. तेलंगाना और कर्नाटक में उसकी सरकार है और वहां भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. ऐसी स्थिति में दक्षिण में भाजपा के लिए चुनौती देखी जा रही है।  थोड़ी बात उत्तर की अब थोड़ी उत्तर भारत की भी बात कर लेते हैं. उत्तर भारत में वैसे तो कांग्रेस करीब-करीब पूरी तरह सत्ता से बाहर है लेकिन कुछ राज्यों में उसके मजबूत मौजूदगी को खारिज नहीं किया जा सकता. इसमें सबसे पहला नाम पंजाब का है. पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं. इसमें से सात पर कांग्रेस और तीन पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी. यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है. राज्य में आम आदमी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है. ऐसे में यहां पर भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इस राज्य में भाजपा की शून्य सीटें मिली थी।  इस कड़ी में दूसरा राज्य हरियाणा है. यहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. भाजपा और कांग्रेस यहां बराबरी पर हैं और दोनों को पांच-पांच सीटों पर जीत मिली थी. उत्तर भारत में तीसरा सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जहां कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है. राज्य में लोकसभा की 26 सीटें हैं और बीते चुनाव में वह आठ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी. भाजपा को यहां 14 सीटों पर जीत मिली थी. कहने का मतलब है कि इन कुछ राज्यों से कांग्रेस को उम्मीद है. राजनीति के जानकार और आंकड़ों भी बताते हैं कि यहां अपने दम पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इस तरह से देखें तो दक्षिण की 130 और उत्तर भारत की 49 सीटों पर वह सीधे टक्कर में है. यानी कुल 179 सीटों पर वह टक्कर में है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की ठीकठाक मौजूदगी है। 

इंदौर के चर्चित मर्डर केस की कहानी अब बड़े पर्दे पर, फर्स्ट लुक ने बढ़ाई उत्सुकता

इंदौर इंदौर से जुड़े चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस (Raja Raghuvanshi Case) की गूंज अब बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया तक पहुंच गई है। इस हाई प्रोफाइल केस से प्रेरित बताई जा रही फिल्म सुंदर पूनम का फर्स्ट लुक सामने आ चुका है। खास बात ये है कि यह फिल्म देश की बड़ी प्रोडक्शन कंपनी Tips Industries के बैनर तले बनाई जा रही है। फिल्म का निर्देशन जाने माने डायरेक्टर पुलकित कर रहे हैं, जो पहले भी सच्ची घटनाओं पर आधारित एक गंभीर फिल्म 'भक्षक' का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म (Sundar Poonam) के फर्स्ट लुक सामने आने के बाद कहानी की शुरुआती डीटेल्स ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। उनके बीच चर्चा है कि सुंदर पूनम फिल्म इंदौर के रौंगटे खड़े कर देने वाले राजा रघुवंशी केस (Raja Raghuvanshi Case) जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में दिखेगी ये कहानी अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक फिल्म सुंदर पूनम में बताया गया है कि एक नवविवाहित कपल कश्मीर में हनीमून मनाने गया था, जो रहस्यमयी तरीके से अचानक लापता हो जाता है। इसके बाद दुल्हन पूनम से जुड़ा एक खौफनाक सच सामने आने लगता है, जो हर किसी को चौंकाकर रख देता (Raja Raghuvanshi Case) है। कहानी में उसके जुनूनी प्रेम, धोखा और अतीत के राज और हत्या जैसे कई सस्पेंस भरे मोड़ दिखाई देंगे, जो उसके आसपास के हर व्यक्ति को एक जानलेवा भंवर में खींच लेते हैं। इंदौर का खौफनाक राजा रघुवंशी केस सुंदर-पूनम फिल्म का प्लॉट सामने आने के बाद चर्चा है कि यह फिल्म इंदौर के खौफनाक राजा रघुवंशी केस पर आधारित है। वह केस जिसने देशभर में सनसनी मचाकर रख दी थी। पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ मेघालय के शिलॉन्ग में हनीमून ट्रिप पर गए इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की संदिग्ध मौत (Raja Raghuvanshi Case) और उसके बाद सामने आए रिश्तों के उलझे सच ने देशभर के लोगों को झकझोर कर रख दिया था। सूत्रों का कहना है कि उसी तरह की घटनाओं से प्रेरणा लेकर इस फिल्म की कहानी तैयार की गई है। बता दें कि राजा रघुवंशी की तरह ही एमपी में अब तक ऐसे नये और कई केस भी सामने आ चुके हैं, जो बार-बार राजा रघुवंशी मर्डर केस से मिलते-जुलते रहे और इसी केस की यादें ताजा करते रहे हैं। क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर मिलता है जबरदस्त रेस्पॉन्स क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर आधारित कंटेट को ओटीटी पर लगातार जबरदस्त रेस्पॉन्स मिल रहा है। यही वजह है कि सुंदर पूनम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। चूंकि अब इसका फर्स्ट लुक सामने आ चुका है, तो सोशल मीडिया पर लोग इसकी रिलीज डेट और स्टारकास्ट के साथ ही ट्रेलर को लेकर भी सवाल करते नजर आ रहे हैं। कब रिलीज होगी फिल्म? हालांकि डायरेक्टर ने अभी सिर्फ इस कहानी की झलक ही शेयर की है। फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) कब रिलीज होगी, ओटीटी पर आएगी या डायरेक्ट थियेटर में इस पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म आने वाले समय की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकती है। सुंदर पूनम स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में सुंदर पूनम फिल्म के स्टार कास्ट की बात करें तो दमदार अभिनय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। उनके साथ अभिनेता आदित्य रावल और विक्रम मल्होत्रा भी फिल्म में अहम भूमिका निभाते फिल्म में नजर आएंगे। बता दें कि डायरेक्टर पुलकित को ट्रू या रियल लाइफ स्टोरी बेस्ड और सेंसिटिव आपराधिक मामलों को पर्दे पर बारीकी और गहराई के साथ उतारने के लिए जाना जाता है। ऐसे में क्राइम थ्रिलर जॉनर के शौकीनों के लिए यह फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) बेहद खास होने वाली है। हनीमून इन शिलॉन्ग भी रही थी चर्चा में बता दें कि इससे पहले भी एक फिल्म हनीमून इन शिलॉन्ग (Raja Raghuvanshi Case) बनाए जाने की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। बताया गया था कि राजा रघुवंशी के परिवार ने इस प्रोजेक्ट को सहमति भी दी थी। बता दें कि तब राजा रघुवंशी के बड़े भाई सचिन का बयान भी सामने आया था, उन्होंने कहा था कि हमने हत्या के इस मामले पर बनने वाली आगामी फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। हमारा मानना ​​है कि अगर हम अपने भाई की हत्या की कहानी बड़े पर्दे पर नहीं लाते, तो लोगों को यह पता नहीं चल पाएगा कि कौन सही था और कौन गलत? इसके बाद सामने यह भी आया था कि फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग इंदौर और मेघालय में की गई थी। हालांकि अब इस बारे में कोई अपडेट नहीं है। अब लोगों को सुंदर पूनम का इंतजार अब चर्चा सुंदर पूनम को लेकर है। Amazon Prime Video पर इसका (Sundar Poonam)फर्स्ट लुक जारी किया गया है।लोगों को इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा, रिलीज डेट और ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म बड़े पर्दे पर भी चर्चा का विषय बनेगी।

हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई टेंशन, शुगर और समयपूर्व प्रसव के केस भी बढ़े

भोपाल भोपाल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक हाल ये है कि पहले जहां कुल गर्भवतियों में 20 से 25 प्रतिशत मामले हाई रिस्क श्रेणी में आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और समय पर जांच नहीं होने से मां और नवजात दोनों की जान पर खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम उम्र में गर्भधारण से मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। एनीमिया इसकी सबसे बड़ी वजह है। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों में तेजी आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हर महीने करीब 3 हजार प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 900 से 1200 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई जा रही हैं। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई बीपी, शुगर, समय से पहले प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामले प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही भोपाल के अस्पतालों में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से गंभीर गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सेवन और हाई बीपी-शुगर की मॉनिटरिंग हो तो इसकी आशंका कम हो जाती है। प्रदेश में एनीमिया सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 54 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यही स्थिति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा कारण बन रही है। बता दें कि राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आने वाली लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन सामान्य से कम पाया जा रहा है। कई मामलों में यह स्तर 7 ग्राम से नीचे पहुंच जाता है। प्रमुख बिंदु भोपाल में बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस हर तीसरी गर्भवती जटिल श्रेणी में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी शुगर के कारण बढ़ी मुश्किलें समय से पहले प्रसव भी अहम वजह कम उम्र में गर्भधारण मुख्य कारण एनीमिया सबसे बड़ी वजह

UP की अर्थव्यवस्था पर मंत्री जयवीर सिंह का बड़ा दावा, बोले- GDP ग्रोथ 11% से ऊपर

सूरज की रोशनी से बदली जिंदगी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना बनी सोनसाय बाकड़े के लिए राहत और बचत का माध्यम 4-5 हजार रुपए का मासिक बिजली बिल घटकर 120 से 500 रुपए तक पहुंचा, केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी रायपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना ग्रामीण परिवारों तथा आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बीजापुर जिले के मांझीगुड़ा निवासी सोनसाय बाकड़े हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने नई रोशनी और आर्थिक राहत लेकर आई है। कभी हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल की चिंता से परेशान रहने वाले बाकड़े आज सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल बिजली खर्च में बड़ी बचत कर रहे हैं, बल्कि निर्बाध बिजली सुविधा का लाभ भी उठा रहे हैं। सोनसाय बाकड़े बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता था। बढ़ते बिजली खर्च के कारण परिवार का मासिक बजट प्रभावित होता था और कई बार बिजली बिल जमा करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। लगातार बढ़ते खर्च के बीच उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना की जानकारी मिली। योजना के लाभ और सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के बारे में जानने के बाद उन्होंने अपने घर में सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया। योजना के तहत बाकड़े को केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहायता से उनके घर में सोलर पैनल स्थापित किए गए। लगभग तीन माह पूर्व लगाए गए इन सोलर पैनलों से अब उनके घर में नियमित और पर्याप्त बिजली की आपूर्ति हो रही है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि जहां पहले हर महीने हजारों रुपए का बिजली बिल आता था, वहीं अब यह घटकर केवल 120 रुपए से 500 रुपए तक सीमित हो गया है। इससे परिवार को आर्थिक रूप से काफी सहारा मिला है। अब घरेलू जरूरतों के लिए बिजली उपयोग करते समय अतिरिक्त खर्च की चिंता नहीं रहती। बाकड़े का कहना है कि सौर ऊर्जा अपनाने से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याओं से भी काफी हद तक छुटकारा मिला है। अब उनका परिवार पंखा, टीवी, मोटर और अन्य घरेलू उपकरणों का उपयोग बिना किसी परेशानी के कर पा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना को आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस योजना का लाभ लेने की अपील की। उनका मानना है कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सोनसाय बाकड़े ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह पहल आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई ऊर्जा भर रही है।

जनभागीदारी का नया अध्याय शुरू, ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान आज से आरंभ

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित भोपाल  जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा। अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

वेटरनरी स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी, सरकार ने बढ़ाया इंटर्नशिप स्टाइपेंड

पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पशु चिकित्सा छात्रों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा और उनका मनोबल भी बढ़ेगा। दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, बड़ी पशुधन संख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण और उन्मूलन तथा उन्नत नस्लों के संवर्धन में पशु चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत पशु चिकित्सा छात्रों को अब बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। सरकार के अनुसार वर्तमान में इन छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस निर्णय से तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित 300 छात्रों को लाभ मिलेगा। पशुपालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिए जाने का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रस्ताव लागू होने पर सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा, जिसकी व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के गैर-वेतन मद से की जाएगी। इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, शिक्षा के प्रति रुचि और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा तथा समानता के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे “समानता के सिद्धांत” के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मध्यप्रदेश सरकार ला रही नई Attendance व्यवस्था, कर्मचारियों की हर मूवमेंट पर रहेगी नजर

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा। अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है। बदलेंगे ये 2 पुराने नियम मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले 'दो ही बच्चे अच्छे' वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा। दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा। गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

गाड़ियों की रफ्तार से छोटा पड़ रहा चंडीगढ़, पार्किंग के लिए जगह कम पड़ने लगी

चंडीगढ़  फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए ने जब चंडीगढ़ को धरातल पर उतारा तो कुछ लोग इसमें जरूरत से अधिक खाली स्पेस देखकर छोड़कर चले गए। दूर-दूर तक इक्का-दुक्का वाहन ही दिखते थे। लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था कि इतना खुला शहर भी वाहनों के जंजाल में फंसकर हांफने लगेगा। ली कार्बूजिए शायद 60 वर्ष बाद का भविष्य देखते हुए शहर को गढ़ रहे थे लेकिन जनसंख्या और वाहनों का विस्फोट उनके गढ़े मॉडल से कहीं आगे निकल चुका है। चंडीगढ़ देश में सर्वाधिक कारों के घनत्व वाला शहर बन चुका है। यह समृद्धि गौरव का विषय होने के साथ ही गंभीर समस्या भी बन चुकी है। पांच लाख की आबादी के लिए बसाए गए चंडीगढ़ में हर तीन मिनट में एक नई कार सड़क पर उतर रही है। दस हजार नंबरों की नई सीरीज दो महीने में ही खत्म हो रही है। जमीनी हकीकत यह है कि अब पार्किंग के लिए जगह नहीं बची है। ग्रीन बेल्ट हो या साइकिल ट्रैक सभी पार्किंग की भेंट चढ़ चुकी हैं। कड़वी सच्चाई यह है कि इंसाफ के मंदिर कहे जाने वाले हाईकोर्ट हो या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट यहां पर कारों की दोहरी लाइनें लगने लगी हैं। अभी आबादी 12 लाख, 2051 में 23 लाख होगी अभी चंडीगढ़ की आबादी 12 लाख है। 2051 तक यह बढ़कर दो गुना होगी। ट्राइसिटी में 2051 तक आबादी 45 लाख प्रोजेक्टेड है। प्रशासन न तो नई गाड़ियों के सड़क पर उतरने की रफ्तार को कम कर पाया है, न ही कोई योजना पार्किंग स्पेस देने की बना पाया। सड़क, पार्क, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ और खेल के मैदान हर जगह कारें खड़ी दिखाई देती हैं और प्रशासन मूकदर्शक बन इस बिगड़ती स्थिति को देख रहा है। ज्यादातर पार्क बन गए पार्किंग स्थल घनी आबादी वाले इलाकों में पार्किंग की समस्या सबसे ज्यादा है। वहां तेजी से लोग दोपहिया से चारपहिया की तरफ जा रहे हैं। इन इलाकों में पहले ही पार्किंग की जगह नहीं है, ऐसे में लोगों ने कालोनियों के छोटे-छोटे पार्कों में गाड़ियां खड़ी कर उसे पार्किंग बना दिया है। आलम यह है कि अब पार्कों में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में सड़कों पर गाड़ियां खड़ी होने लगी हैं। शहर में बढ़ते वाहन और पार्किंग स्पेस विवरण (Description) आंकड़े / स्थिति (Data / Status) कार घनत्व (Car Density) 731 कारें प्रति 1,000 लोगों पर (पूरे देश में सबसे अधिक) शहर में कुल वाहन 10 लाख से अधिक वाहन मौजूद रोजाना सड़कों पर उतरने वाले नए वाहन 175 से अधिक गाड़ियां प्रतिदिन पड़ोसी शहरों (पंचकूला-मोहाली) से रोजाना आने वाले वाहन 1.5 लाख वाहन प्रतिदिन सरकारी गाड़ियां (पेट्रोल-डीजल) 3,724 वाहन पेड पार्किंग (Paid Parking) की स्थिति 89 स्थल (कुल 22,725 कारों के लिए स्पेस) फ्री पार्किंग (Free Parking) की स्थिति 200 स्थल (इसके बावजूद स्पेस की भारी कमी) पिछले वर्षों का रिकॉर्ड (संभावित 2022/23) 38,659 नई कारें पंजीकृत हुईं    

बंगाल का ‘अग्निक्षेत्र’ बना फलता, ममता के किले को भेदना BJP के लिए क्यों है बड़ी चुनौती?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की सियासत में 'डायमंड हार्बर' का इलाका हमेशा से हाई-वोल्टेज रहा है. इस वक्त सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बना हुआ है इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला फलता विधानसभा क्षेत्र. चुनावी हिंसा के आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर फालता में 21 मई को दोबारा मतदान कराने का फैसला किया।  फलता विधानसभा सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के लिए आखिरी 48 घंटे बचे हैं. फलता की धरती पर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है. इस बार के विधानसभा चुनाव के केंद्र में हैं टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान, जिनके इर्द-गिर्द इस इलाके का पूरा समीकरण घूम रहा है।  बंगाल की सियासत में जहांगीर खान की तूती बोलती थी, लेकिन अब सत्ता बदल चुकी है. ऐसे में फलता सीट जो 15 सालों से टीएमसी का मजबूत गढ़ बना हुआ है, उस पर बीजेपी भी जीत का परचम फहराना चाहती है. ऐसे में क्या जहांगीर खान अपना सियासी प्रभाव जमाए रख सकेंगे या फिर सत्ता के बदलन के साथ ही सियासी गेम भी फालता का बदल जाएगा।  सिंघम' बनाम 'पुष्पा' की  चुनावी जंग  फालता का चुनाव आम सियासी लड़ाई से कहीं आगे निकलकर एक एक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा हो चुका है. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा, जिन्हें यूपी की सियासत में 'सिंघम' के तौर पर देखा जाता है. वहीं, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने एक चुनावी जनसभा में खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था, 'अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं… पुष्पराज, झुकेगा नहीं।  पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन और बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सियासी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान जो कुछ दिन पहले तक गायब (अंडरग्राउंड) बताए जा रहे थे, वे चुनाव आयोग के निर्देश और पुलिस सुरक्षा के साये में वापस फालता लौटे हैं और अपने प्रचार में जुटे हैं।  फलता सीट का सियासी समीकरण फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में आती है. पारंपरिक रूप से यह इलाका टीएमसी और खासकर अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. देश की आजादी के बाद से फलता सीट पर 1952 से लेकर अब तक कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और इस बार 18वीं बार चुनाव हो रहे. इस सीट की खासियत यह रही है कि यहां जब भी जो लहर आई, जनता ने लंबे समय तक उसी पार्टी का साथ दिया।  1952 से लेकर 2006 तक लेफ्ट ने नौ बार फलता सीट पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस ने चार बार इस सीट पर जीत का परचम फहरा चुकी है तो टीएमसी भी 4 बार जीतने में सफल रही है. 2011 से लेकर अभी तक टीएमसी का दबदबा है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने यहां करीब 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. इतिहास गवाह है कि फलता सीट पहले करीब तीन दशक तक वामपंथ का अभेद्य दुर्ग थी, जिसे बाद में टीएमसी ने अपना नया घर बना लिया।  देवांग्शु पांडा और जहांगीर खान में फाइट 2026 फलता सीट पर अभूतपूर्व पुनर्मतदान में चलते दोबारा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के देवांग्शु पांडा और टीएमसी के जहांगीर खान के बीच मुख्य मुकाबला है. फलता का यह किला टीएमसी के पास सुरक्षित गढ़ रहा है, लेकिन बीजेपी अब इस सीट पर हरहाल में जीत का परचम फहराना चाहती है.  बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा, जो पेशे से वकील हैं, वे इस बार टीएमसी के 'खौफ वाले नैरेटिव' को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के कारण इस बार फर्जी वोटिंग या बूथ कैप्चरिंग की गुंजाइश न के बराबर है, जो बीजेपी के पक्ष में जा सकता है।  बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी ने फलता में खुद कमान संभाल ली है. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा के समर्थन में एक बड़ी रैली की और सीधे जहांगीर खान पर निशाना साधा. शुभेंदु ने सरेआम चेतावनी देते हुए कहा था कि वह (जहांगीर खान) खुद को पुष्पा कहता है, अब इस 'पुष्पा' की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बिना किसी खौफ के मतदान कीजिए और बीजेपी को 1 लाख से अधिक वोटों से जिताइए।  फलता सीट पर क्या बीजेपी जीत सकेगी फलता विधानसभा सीट के सियासी समीकरण को देखें तो मुस्लिम और दलित वोटर अहम हैं. इस इलाके में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है, जो अब तक टीएमसी का पारंपरिक वोट बैंक रहे हैं, जहांगीर खान इसी समीकरण के भरोसे अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं तो बीजेपी दलित वोटों और हिंदू वोटों के धार्मिक ध्रुवीकरण पर अपनी जीत की आस लगा रही है।  पश्चिम बंगाल की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस का रुख पूरी तरह बदल चुका है. फलता में पुलिस ने हाल ही में जहांगीर खान के बेहद करीबी और फलता पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान को जानलेवा हमले और हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।  आखिरी 48 घंटे में आर-पार की लड़ाई फलता सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के ये आखिरी 48 घंटे बेहद संवेदनशील हैं. एक तरफ टीएमसी और जहांगीर खान अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें फंसाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी इस पुनर्मतदान को 'आतंक से मुक्ति' के उत्सव के रूप में प्रचारित कर रही है।  बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद 21 मई को होने वाला यह पुनर्मतदान सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का लिटमस टेस्ट है कि क्या केंद्रीय बलों और सख्त प्रशासन की मौजूदगी में डायमंड हार्बर के इस इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. जहांगीर खान का 'पुष्पा' अवतार फाल्टा की जनता को भाता है या शुभेंदु अधिकारी का 'एक्शन' रंग लाता है, इसका फैसला 24 मई को नतीजों के साथ होगा।