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हरियाणा में बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता, NCRB आंकड़ों के बाद मानवाधिकार आयोग का बड़ा कदम

चंडीगढ़. हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने राज्य में बच्चों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराधों पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की “क्राइम इन इंडिया-2024” रिपोर्ट का स्वत संज्ञान लेते हुए कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हरियाणा में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक है और मौजूदा तंत्र अपेक्षित परिणाम देने में विफल साबित हो रहा है।आयोग की पूर्ण पीठ, जिसमें अध्यक्ष सेवानिवृत जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल हैं, ने अपने आदेश में कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट के आंकड़े राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के 7547 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 की तुलना में करीब 17.9 प्रतिशत अधिक हैं। प्रति एक लाख बाल आबादी पर 82.8 अपराध दर के साथ हरियाणा देश में सबसे ऊपर है। आयोग ने क्या कहा? आयोग ने कहा कि इन मामलों में हत्या, दुष्कर्म, पोक्सो अधिनियम के तहत यौन अपराध, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या और बाल उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। विशेष रूप से बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते पोक्सो मामलों को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और मानसिक विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। आयोग ने यह भी कहा कि लापता बच्चों और अपहरण के मामलों में वृद्धि नाबालिगों की तस्करी और शोषण की आशंकाओं को और बढ़ाती है।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि संवैधानिक और वैधानिक संरक्षण होने के बावजूद बच्चों के खिलाफ हिंसा, उपेक्षा और शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आयोग ने माना कि स्कूलों, छात्रावासों, बाल देखभाल संस्थानों और अन्य सामाजिक संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए निगरानी तंत्र, शिकायत निवारण प्रणाली और परामर्श सेवाएं प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं।आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इन रिपोर्टों में पोक्सो मामलों की जांच, दोषसिद्धि दर, बाल संरक्षण उपाय, पुनर्वास सेवाएं, स्कूल सुरक्षा व्यवस्था और जिला स्तर पर अपराधों की स्थिति का ब्यौरा शामिल होगा। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमृतसर में पकड़ा गया दुबई कनेक्शन वाला ड्रग मॉड्यूल

अमृतसर. अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस को नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग स्मगलिंग मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 किलो ICE (मेथामफेटामाइन) और 4 किलो हेरोइन बरामद की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई और अबू धाबी में बैठे एक ड्रग तस्कर के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर पंजाब तथा दिल्ली में नशे की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से एक हाल ही में दुबई से वापस लौटा था, जहां उसे कथित तौर पर नशा तस्करी की ट्रेनिंग दी गई थी। उसे हेरोइन और ICE की खेपों को पंजाब पहुंचाने और आगे सप्लाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी माजहा और दोआबा क्षेत्रों में बड़े स्तर पर नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच में जुटी हुई है। इस संबंध में थाना छेहरटा, अमृतसर में NDPS एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी और अतिरिक्त बरामदगी होने की संभावना है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी उजागर, पैसा लेने के बाद मकान नहीं बनाने वालों पर कार्रवाई

तखतपुर/रायपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर वर्षों तक मकान निर्माण नहीं करने वाले हितग्राहियों पर अब नगर पालिका प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. योजना की पहली किस्त हड़पकर बैठे 455 हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने या सरकारी राशि वापस जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है. आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-22 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सैकड़ों हितग्राहियों को मकान निर्माण के लिए लगभग 55 से 56 हजार रुपये की प्रथम किस्त जारी की गई थी. लेकिन चार से पांच साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने न तो मकान निर्माण शुरू किया और न ही राशि लौटाई. इस कारण योजना की करोड़ों रुपये की राशि फंस गई है. नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक ऐसे 455 हितग्राहियों के पास करीब ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि अटकी हुई है. अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस मिलते ही एक हितग्राही ने पूरी राशि वापस जमा कर दी, जबकि दो अन्य ने किस्तों में राशि लौटाने की अनुमति मांगी है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरेश सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिन हितग्राहियों ने शासन की राशि लेने के बाद भी आवास निर्माण नहीं किया है, उनके खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी. 24 घंटे के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं करने अथवा राशि वापस नहीं करने पर एसडीएम कोर्ट में रिकवरी प्रकरण दर्ज किया जाएगा और संबंधित लोगों पर एफआईआर भी कराई जाएगी.

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही आम आदमी पर डबल मार, एक्सपर्ट बोले- अब और बढ़ेगी महंगाई

भोपाल  पांच दिन के अंदर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गईं। इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने मध्य प्रदेश में माल भाड़ा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में माल भाड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले ही दूध, खाना और LPG महंगे हो चुके हैं। अब भाड़े में बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट गड़बड़ाना तय है। भोपाल के बड़े ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही ऑक्सीजन पर है। अब डीजल के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि भोपाल से इंदौर के बीच का भाड़ा 10 हजार रुपए है तो यह बढ़कर 11 हजार रुपए हो सकता है। एमपी में 8 से 10 लाख ट्रक चलते हैं, जो ऑल इंडिया परमिट वाले होते हैं, यानी ये पूरे देश में कहीं भी माल लाने-ले जाने का काम करते हैं। माल भाड़ा बढ़ा तो महंगा होगा सामान ट्रक व लोडिंग वाहनों से पूरे प्रदेश में किराना, सोयाबीन, कपास, गेहूं, सीमेंट, चूना पत्थर, दवाएं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर पैनल, खाद आदि की सप्लाई की जाती है। माल भाड़ा बढ़ने से इन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि भाड़ा बढ़ने का असर आखिरकार जनता पर ही होगा। खाना महंगा, होटल और रेस्टॉरेंट में 10 से 15% तक बढ़ोतरी भोपाल होटल एवं रेस्टॉरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली बताते हैं कि होटल इंडस्ट्री पहले ही LPG संकट से जूझ रही है। 2 महीने के अंदर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। अब यह करीब 3 हजार रुपए में मिल रहा है। LPG संकट के बाद भोपाल में भोजन 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। दूध के रेट 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं। इस वजह से पनीर और दही भी महंगे हो गए, जिसका असर सीधे खाने के मेन्यू पर पड़ा है। किचन से जुड़ा सामान महंगा हो चुका किराना कारोबारी विवेक साहू कहते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद बाजार में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ी हैं। इससे जनता के बजट पर असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ता है तो तय है कि कीमतें और भी बढ़ जाएंगी। टैक्सी संगठन की बैठक अगले सप्ताह ऑल इंडिया टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन ने बताया कि संगठन और टैक्सी चालकों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। अगले एक सप्ताह में बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें 10 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक के बाद ही तय होगा कि किराया कितना बढ़ाया जाए। पंपों की स्टॉक लीमिट तय पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो जाएगी। बता दें ​कि बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है। तेल कंपनियां ऐसी कैपिंग से इनकार किया है। एचपीसीएल के सीजीएम अश्विन के सिन्हा व इंडियन ऑयल के सीजीएम नवनीत मेहता ने ने कहा कि ऐसी कोई कैपिंग नहीं की है।

छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव, दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नरेट सिस्टम की तैयारी

दुर्ग. छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया. कमिश्नरेट प्रणाली क्या है कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है. रायपुर के बाद दो बड़े शहर राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है. पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

शरद पवार ने विपक्ष को दिया संदेश, बोले- देश की छवि के मुद्दे पर राजनीति ठीक नहीं

 मुंबई NCP (SP) चीफ शरद पवार अक्सर सियासी मतभेद के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने कहा है कि जब वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा की बात आती है तो इस पर राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए. राष्ट्रीय सम्मान सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है।  उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं. राजनीतिक मुद्दों पर हमारी उनसे अलग राय हो सकती है. हालांकि जब देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को विदेश में कम करने या उससे समझौता करने की बात आती है तो इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे. राष्ट्र के गौरव और सम्मान के मामले में कोई सियासी मतभेद या विवाद नहीं होना चाहिए।  एनसीपी चीफ ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. शाम मुंबई में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए. साथ ही देश की प्रतिष्ठा को मजबूत करने में योगदान देना चाहिए।  इंदिरा गांधी-नरसिम्हा राव का जिक्र पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन जैसे नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा।  पवार ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं. जब राष्ट्र के सम्मान की बात हो, तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए. कुछ लोग आज अलग-अलग पार्टियों में हो सकते हैं, लेकिन आप सभी आम लोगों के बीच जुड़े हुए हैं और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।  शुरुआती सियासी सफर को किया याद अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद करते हुए पवार ने कहा कि 1958 में जब उनकी उम्र 18 वर्ष थी, वह बारामती से पुणे आए थे. उस समय उनके गृह नगर में कोई कॉलेज नहीं था. वह युवा आंदोलन से जुड़े. चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के प्रमुख बने. बाद में महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस का नेतृत्व किया, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर काम किया।  शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन सोवियत संघ की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया. पूर्व पीएम इंद्रकुमार गुजराल के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था कि वह 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके सम्मान का अपमान वह कभी स्वीकार नहीं करेंगी।  उन्होंने पूर्व सहयोगियों से अपील करते हुए कहा, यदि राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तो आप सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ भाग लेना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। 

Meta में बड़े पैमाने पर layoffs, कर्मचारियों की नींद खुली तो इनबॉक्स में था नौकरी खत्म होने का ईमेल

 नई दिल्ली मेटा ने बड़े स्तर पर छंटनी की शुरुआत कर दी है, जिसके लिए कंपनी ने 20 मई की सुबह 4 बजे कई लोगों को ईमेल नौकरी से निकालने का ईमेल किया. इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स मिली है. पुरानी रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा चुका था कि 20 मई को कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी करेगी।  मेटा अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स में से 10 परसेंट यानी करीब 8 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ते दिखाएगी. कंपनी ने इसकी शुरुआत सिंगापुर बेस्ड टीम के साथ की है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि सिंगापुर के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 4 बजे लोगों को ईमेल आया है।  मार्क जकरबर्ग का प्लान आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) में बड़ी इनवेस्टमेंट का है और इस साल भी वह अरबों डॉलर्स की रकम इनवेस्ट करने जा रहे हैं. मेटा ने बताया है कि दुनियाभर में उसके करीब 78 हजार कर्मचारी हैं।  7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है मेटा के चीफ पीपुल ऑफिसर जेनेला गाले ने एक इनहाउस मेमो में कहा है कि 8 हजार नौकरी खत्म करने के अलावा कंपनी करीब 7 हजार कर्मचारियों को न्यू AI टीम में डालने जा रही है. कंपनी का फोकस अब छोटी टीम्स तैयार करना है।  छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या 16,000 तक पहुंच सकती है इन प्रस्तावित छंटनियों से अकेले शुरुआती चरण में ही मेटा के वैश्विक कर्मचारियों में से लगभग 10 प्रतिशत कमचारियों के प्रभावित होने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने छंटनी की पूरी सीमा की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 2026 में बाद में और भी नौकरियां कम होने की संभावना है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 16,000 तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के अधिकारी अभी भी कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी और AI में हुई प्रोग्रेस के आधार पर छंटनी से जुड़ी जानकारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि, ये छंटनी अचानक नहीं की जा रही है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पिछले एक साल में कई बार इस बात पर जोर दिया है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में लीडर बनना चाहती है, जेनरेटिव टूल्स से लेकर उस इंफ्रास्ट्रक्चर तक, जो बड़े पैमाने पर मशीन लर्निंग सिस्टम को चलाता है। इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, मेटा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा खर्च की योजना बना रही है, जिसका अनुमान इस साल के लिए लगभग $135 बिलियन है; इसमें से ज्यादातर हिस्सा AI से जुड़े निवेशों, जैसे डेटा सेंटर, चिप और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, के लिए रखा गया है। मेटा ने महामारी के दौर में 21,000 लोगों को निकाला था अगर Meta छंटनी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो यह पिछले कुछ सालों में कंपनी में हुई नौकरियों की कटौती की एक और कड़ी होगी। यह मेटा में 2022 और 2023 में हुई छंटनी के पिछले दौर जैसा ही है, जब कंपनी ने धीमी ग्रोथ और महामारी के दौर में हुए जरूरत से ज्यादा विस्तार के नतीजों के चलते लगभग 21,000 नौकरियां खत्म कर दी थीं। उस दौर को, जिसे जकरबर्ग नें year of efficiency नाम दिया था, ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करने, मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने के लिए किए गए ठोस प्रयासों के लिए जाना जाता है। हालांकि, अब होने वाली छंटनी एक ज्यादा सुगठित संगठन बनाने की बड़ी मुहिम का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि कंपनी अधिकारी मैनेजमेंट के स्तरों को कम करने और AI-बेस्ड प्रोसेस पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। अंदरूनी तौर पर, मेटा ने अपनी AI प्राथमिकताओं के हिसाब से टीमों को फिर से व्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। इंजीनियरों को ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए फिर से नियुक्त किया गया है जो कोड लिखने और मुश्किल कामों को संभालने में सक्षम ऑटोनॉमस सिस्टम बनाने पर केंद्रित हैं, जबकि AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स को तेजी से बाजार में लाने के लिए नई यूनिट्स बनाई गई हैं। 2026 में बड़े पैमाने पर छंटनी, अब तक 73,000 की नौकरी गई इस बदलाव में Meta अकेली नहीं है। इन बदलावों का असर पूरी टेक इंडस्ट्री में महसूस किया जा रहा है, जहां बड़ी कंपनियां एक तरफ नौकरियों में कटौती कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ AI में अपना निवेश बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Amazon ने हाल के महीनों में कथित तौर पर लगभग 30,000 कॉर्पोरेट पदों को खत्म कर दिया है, जो उसके व्हाइट-कॉलर वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है। इसी तरह, फिनटेक कंपनी Block ने भी अपने वर्कफोर्स में काफी कटौती की है। Layoffs.fyi के आंकड़ों से इस बदलाव के पैमाने का पता चलता है। इस प्लेटफॉर्म के अनुसार, इस साल अब तक दुनिया भर की 95 कंपनियों में 73,000 से ज्यादा टेक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। मेटा ने बीते महीने कर दिया था कंफर्म छंटनी की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद बीते महीने ही मेटा ने कंफर्म कर दिया था कि वह करीब 8 हजार लोगों की छंटनी करने जा रहे हैं. इसके बाद कर्मचारियों को मनोबल गिर गया।  मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने AI को कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता पर ला दिया है. दरअसल, Meta, Google और OpenAI जैसी कंपनियों की बराबरी करने के लिए AI लेवल पर नए इनोवेशन करना जरूरी है. मेटा बीते महीने ही कह चुका है कि वह इस साल 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच AI पर इनवेस्टमेंट का प्लान बना रहे हैं।  दूसरी कंपनियां भी छंटनी की तैयारी में बीते सप्ताह Cisco ने पिछले हफ्ते 4 हजार लोगों को बाहर निकालने की जानकारी दी थी. वहीं माइक्रोसॉफ्ट, ऐमेजॉन और अन्य कंपनियां भी हाल ही में छंटनी की जानकारी दे चुकी हैं। 

TRE-4 को लेकर पटना में बवाल, प्रदर्शन कर रहे कई छात्र पुलिस हिरासत में लिए गए

पटना. बीपीएससी टीआरई-4 का विज्ञापन जारी करने को लेकर बुधवार को कई छात्रों को प्रदर्शन करने से पहले पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पटना काॅलेज पहुंचे विद्यार्थियों को पुलिस बारी-बारी से वाहन में बिठाकर ले गई। विज्ञापन जारी करने के साथ अभ्यर्थी गिरफ्तार किए गए छात्र नेता दिलीप कुमार व अन्य की रिहाई की मांग कर रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बल प्रयोग किया। इस दौरान रिंकल यादव और खुशबू पाठक सहित अन्य छात्रों को हिरासत में लिया।  प्रदर्शन की घोषणा पर अलर्ट थी पुलिस बीपीएससी टीआरई-4 के विज्ञापन और गिरफ्तार छात्र नेताओं की रिहाई के लिए होने वाले प्रदर्शन को देखते ही बुधवार की सुबह आठ बजे से ही पुलिस बल पटना कालेज गेट के बाहर तैनात कर दिया गया था। तय कार्यक्रम के तहत सुबह नौ बजे से छात्र कालेज पहुंचने लगे। इसके पहले विद्यार्थी की संख्या अधिक होती, पटना कालेज का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। TRE 1 जैसे-जैसे छात्र पटना कालेज पहुंचे, पुलिस उन्हें हिरासत में लेती रही। इस दौरान हिरासत में लिए जाने के डर से कई छात्र इधर-उधर भागने लगे। प्रदर्शन के लिए आरा से आ रहीं छात्र नेता खुशबू पाठक को पुलिस ने बिहटा से हिरासत में ले लिया। टीआरई-4 के विज्ञापन की मांग कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में उतरे पटना विश्वविद्यालय के छात्र नेता रिंकल यादव को पुलिस ने पटना कॉलेज गेट से हिरासत में लिया। TRE 2 इस दौरान छात्रों ने कहा कि उन्हें सरकार के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। विज्ञापन जारी करने को लेकर साल भर से आए दिन नई-नई तिथि घोषित की जाती है। अगर जल्द से जल्द छात्र नेताओं की रिहाई और विज्ञापन जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा। पटना कॉलेज के गेट के बाहर छह थानों की पुलिस तैनात है। प्रदर्शन अब नहीं हो रहा है। बीच-बीच में कोई छात्र हंगामा करता है, तो पुलिस उसे हिरासत में ले रही है। एसडीपीओ टाउन 1 राजेश रंजन ने बताया कि कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है। कॉलेज गेट पर परिचय पत्र दिखाकर ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।

तपती गर्मी के बीच पंजाब स्कूलों में छुट्टियों की तैयारी, सरकार जल्द कर सकती है ऐलान

पटियाला. पंजाब में गर्मी और लू का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे तापमान कई इलाकों में 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है जबकि बठिंडा में ये 46 डिग्री को पार कर गया है। तेज धूप और भयानक हीट वीव के कहर का सबसे घातक असर स्कूली विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। इस स्थिती को देखते हुए बच्चों के माता-पिता द्वारा स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां जल्द करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। विद्यार्थियों के माता-पिता ने बताया कि पिछले 3-4 दिनों में तापमान में अचानक 4 से 5 डिग्री की वृ्द्धि हुई है। दोपहर के समय जब स्कूलों में छुट्टी होती है तो सूरज देवता अपने पूरे जोश पर होते हैं। इस तीखी धूप में बच्चों द्वारा लाया जाता पानी भी गर्म हो जाता है और उन्हें घर लौटते समय भारी परेशानी होती है। भीषण गर्मी की वजह से दोपहर में सड़कें सुनसान हो जाती हैं, लेकिन विद्यार्थियों को इस मौसम में सफर करना पड़ता है। माता-पिता ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए गर्मी की छुट्टियां जल्दी कर दी जाएं ताकि वे घर पर सुरक्षित रहकर पढ़ाई कर सकें। बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही स्कूलों में छुट्टियां (इसी हफ्ते तक) घोषित की जा सकती हैं। पंजाब में और बिगड़ेंगे हालात पंजाब में लू की स्थिती बनी रह सकती है। अधिकतम तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि कुछ जिलों में पारा 47 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर सकता है। इस स्थिती को देखते हुए मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है और लोगों को धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है, खासकर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच। बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि चल रही गर्म हवाओं के कारण लोगों को गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। 

ट्विशा केस में पुलिस की चूक कहाँ हुई? बहन के आरोपों ने जांच पर खड़े किए नए सवाल

भोपाल  भोपाल में अपनी ससुराल में मृत पाई गई ट्विशा की बहन ने कहा है कि वह सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसे साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया गया है। उसको सबसे डिसकनेक्ट किया गया। उसे मनोवैज्ञानिक रूप से इतना तोड़ा कि उसे सबसे अलग कर दिया। हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती एक टीवी चैनल से बातचीत में ट्विशा की फुफेरी बहन नैना ने बताया कि वे दोनों अलग-अलग शहर में रहती हैं। हमलोग बचपन से दोस्त हैं। शादी के बाद हम बात नहीं कर पाते थे। उसका पति क्रिमिनल लॉयर है। इसकी पढ़ाई में साइको एनालिसिस होता है। इसने और इसकी मां ने मेरी बहन को पहले साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया और उसके बाद इसकी हत्या की है। यह प्री-मेडिकेटेड मर्डर है। यह एक दिन में किया गया काम नहीं है। हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसका कनेक्शन सिर्फ मां से था। इसकी लास्ट में जो मां से बात हुई है, उसमें लगा है कि कोई एकदम से रूम में आया है। इसके बाद कॉल कट गया और इसके बाद सब कुछ हुआ। इसकी सीडीआर निकलवानी चाहिए। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने माना, ट्विशा मामले में हुई पुलिस से चूक ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि जिस बेल्ट से ट्विशा शर्मा ने कथित तौर पर फांसी लगाई थी, उसे समय पर पोस्टमार्टम टेबल तक नहीं पहुंचाया गया. अब भोपाल पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने इस लापरवाही को स्वीकार किया है।  'पुलिस से हुई है चूक' 'जिस बेल्‍ट से ट्विशा शर्मा ने फांसी लगाई, वो उस दिन भोपाल एम्स नहीं पहुंचा…' इस सवाल पर पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने  कहा, 'हम इसे अपनी टीम की लापरवाही मानते हैं. हालांकि इससे जांच पर कई असर नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि बेल्ट को एफएसएल टीम द्वारा जब्त कर ली गई थी, लेकिन इसे लापरवाही भी कह सकते हैं कि पोस्टमार्टम से पहले उसे अस्पताल नहीं भेजा गया. हालांकि बाद में इसे भोपाल एम्स भेजा गया और इसकी रिपोर्ट भी आ गई है।  भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इस बेल्ट को बाद में अस्पताल भेजकर रिपोर्ट ले ली गई है, इसलिए मुख्य जांच पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस चूक की अलग से जांच की जाएगी।  'गिरिबाला सिंह ने इसे दावे को पुलिस कमिश्नर ने किया खारिज' भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अब तक मिले सबूतों से साफ होता है कि यह हत्या नहीं बल्कि खुदकुशी का मामला है. उनका कहना है कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने के कारण हुई है।  ट्विशा की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि ट्विशा को गांजे की लत थी और ग्लैमर इंडस्ट्री में जाने के बाद उसके परिवार ने उसे छोड़ दिया था. हालांकि पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह के नशीले पदार्थ या ड्रग्स के सेवन की बात सामने नहीं आई है और न ही पुलिस जांच में ऐसा कोई सबूत मिला है।  भोपाल पुलिस कमिश्‍नर ने बताया, 'पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन का कोई जिक्र नहीं है. ट्विशा कोई ड्रग्‍स नहीं ले रही थी… हमारी जांच में भी ट्विशा द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन के दावों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है।  नहीं पता था कि बुरी तरह फंस चुकी है ट्विशा की बहन नैना ने बताया कि मैंने उसकी सारी दोस्तों से बात की, वह किसी के कनेक्शन में नहीं थी। उसने अपनी मां से कहा था कि 15 को नोएडा लौटने के बाद वह मुझसे बात करेगी। हमें बताया जा रहा था कि सब कुछ नॉर्मल है। लेकिन, हमें नहीं पता था कि वह इतनी बुरी तरह फंस चुकी है। वह इतनी बोल्ड थी कि मुझे एनर्जी देती थी। वो हमारे घर की सबसे सुंदर, बोल्ड और बिंदास लड़की थी। इस इंसान ने हमलोगों से क्या छीना है, उसे नहीं पता। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था इस बीच ट्विशा के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के साथ कई तरह का दुर्व्यवहार किया जा रहा था। ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। दहेज के लिए उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था। पिता ने इसके लिए सामाजिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। पिता ने कहा कि हमारी परंपरा की सबसे बड़ी बदकिस्मती यह है कि हर मध्यम-वर्गीय परिवार चाहता है कि शादी सफल हो। सामाजिक दबाव इतना ज्यादा होता है कि कोई भी कभी यह सोचता ही नहीं कि शादी को टूट जाने देना चाहिए। तलाक के बारे में बात कर रही थी पिता ने कहा कि वह तलाक के बारे में बात कर रही थी। कह रही थी कि पापा, अगर बात नहीं बनी तो मैं उसे छोड़ दूंगी। मैं पीछे नहीं हटूंगी। ट्विशा ने अपनी मां से एक बातचीत के दौरान कहा था कि मैं इस तरह नहीं जीना चाहती। वहीं, ट्विशा के भाई हर्षित ने कहा कि परिवार इंसाफ के लिए लड़ेगा। ट्विशा की चचेरी बहन मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि उत्पीड़न तब अपने चरम पर पहुंच गया जब ट्विशा की 'वर्क-फ़्रॉम-होम' वाली नौकरी चली गई और वह गर्भवती हो गई। उसके पति ने उस बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। बता दें कि 2024 में एक डेटिंग ऐप पर ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से हुई थी। एक साल बाद दिसंबर 2025 में दोनों ने शादी कर ली थी।