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छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक, ड्रम-जेरीकेन में बिक्री पर रोक

रायपुर पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग के अनुसार प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों पर 22 मई 2026 की स्थिति में 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है। राज्य को प्रतिदिन आपूर्ति जारी है। 21 मई को ही 32.52 लाख लीटर पेट्रोल और 57.60 लाख लीटर डीजल की प्राप्ति हुई है। लखौली, मंदिर हसौद और गोपालपुर स्थित ऑयल कंपनी डिपो से जिलों को मांग के अनुसार सप्लाई की जा रही है। रबी फसल कटाई और खरीफ की तैयारी के कारण डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे ध्यान में रखकर आपूर्ति बढ़ाई गई है। ड्रम-जेरीकेन में बिक्री प्रतिबंधित, किसानों को छूट   राज्य शासन ने 22 मई को जारी आदेश में सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर ड्रम, बोतल और जेरीकेन में ईंधन की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। उल्लंघन पर मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल आदेश 2005 के तहत ‘अप्राधिकृत विक्रय’ मानकर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई होगी। हालांकि रबी-खरीफ सीजन के लिए किसानों, कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित शासकीय निर्माण कार्यों और अस्पताल, मोबाइल टावर जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके लिए अनुविभागीय अधिकारी के परीक्षण के बाद सुरक्षा मानकों के अनुरूप बिक्री की अनुमति होगी। पैनिक खरीदारी से बचने की अपील   सचिव खाद्य ने 20 मई को सभी ऑयल कंपनियों के साथ समीक्षा बैठक कर ड्राई आउट होने वाले पंपों को तत्काल स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों से प्रभावित होकर पैनिक खरीदारी या संग्रहण न करें। राज्य में ईंधन की आपूर्ति सुगम बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

जनजातीय विकास में एआई और नई तकनीकों की भूमिका पर हुआ मंथन

रायपुर जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 अंतर्गत आदिम जाति विकास विभाग अंतर्गत आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आज राज्य स्तरीय एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आदिम जाति विकास विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने कहा कि प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग से पारदर्शिता, समय की बचत एवं घर बैठे समस्या का शीघ्र निदान संभव हुआ है। छत्तीसगढ़ जनजाति संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक के प्रयोग में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है।                प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि एआई का प्रयोग पारंपरिक ज्ञान को संजोने, रिमोट एरिया में स्वास्थ्य सुधार, लघु वनोपजों एवं कृषि मंडियों के डिजिटलीकरण, स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं की अधिक सुगमता से जानकारी एवं लाभ इत्यादि में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनजातीय विकास में एआई का प्रयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। परन्तु एआई मनुष्य की संवेदनशील मानसिकता की प्रतिकृती नहीं कर सकती है। अतः आवश्यकता एवं उपयोगिता के आधार पर जनजातीय क्षेत्र में एआई का प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सबसे दूर, सबसे पहले के ध्येय वाक्य को सार्थक करना है।                 संगोष्ठी में पद्म  अजय मंडावी ने कांकेर जेल मे बंद नक्सल आदिवासियों पर किए जा रहे उनके कौशल विकास के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनमें से 08 कैदियों द्वारा वंदे मातरम पर किए गए कार्य को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। उन्होंने सरकार को इनकी प्रतिभा पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि यदि ईमानदारी के साथ कार्य किया जाए तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी से जनजातीय विकास के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।                 टीआरटीआई के संचालक मती हीना अनिमेष नेताम ने कार्यशाला के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर अपर संचालक  संजय गौढ़, संयुक्त संचालक मती गायत्री नेताम मौजूद रही। वहीं वीडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास तथा परियोजना प्रशासक जुड़े थे।  एनआईसी डायरेक्टर के  सत्येश शर्मा ने संगोष्ठी में बताया कि यूज ऑफ टेक्नेलॉजी और सर्विस डिलवरी देना दोनों अलग-अलग तथ्य है और चुनौती भी है। उन्होंने बताया कि टेक्नेलॉजी के क्ष़्ोत्र में गुणवत्तायुक्त डाटा संग्रहण प्रमुख पहलु है। उन्होंने डेटा का वेरिफिकेशन करने के साथ-साथ डेटा की कमी को पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा का सलेक्शन सही नहीं होने पर सर्विस डिलवरी में भी समस्या आएगी। उन्होंने बताया कि अगर डेटा का इनपुट सही नहीं होने से परिणाम बायस्ड् आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि एआई मशीन में आएगा तो सारा डिसीजन मशीन ही लेने लगेगा और हमें रिप्लेस करने की कोशिश करना होगा।                 आईआईएम के  अमित कुमार जनजातीय उद्यमिता एवं र्स्टाटअप में एआई का उपयोग करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने एआई के प्रयोग में स्थानीय लेग्वेंज को सबसे बढ़ी बाधा बताया। उन्होंने वास्तविक परिणाम के लिए बोली-भाषा के ज्ञान पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों में टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक तथा अनेक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपलब्धता हेतु शासकीय स्तर पर भी अभियान चलाने के सुझाव दिए।  समर्थन संस्था से  देवीदास निम्जे ने कहा कि यदि हम स्थानीय स्तर पर एक गांव की बात करें तो किसान को खेती के संबंध में सब कुछ पता होता है, किन्तु नई तकनीकी की जानकारी के अभाव में गांव के दो-तीन लोगों पर ही केन्द्रित होना पड़ता है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के लोगों विशेषकर टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करते हुए नेटवर्क बढ़ने पर बल दिया।               एनआईटी के डॉ. राकेश त्रिपाठी ने संगोष्ठी में एआई से स्थानीय ज्ञान को बढ़ाने, ज्ञान सैद्धान्तिक इस्तेमाल करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा ज्ञान को सुदृढ़ कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एआई के माध्यम से अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।                आईआईआईटी नवा रायपुर के डॉ. रामाकृष्ण ने ड्रॉपआउट और पास पर्सनल, क्वालिटी ऑफ टीचिंग और लर्निंग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा मेनटेन करने साथ-साथ आम आदमी तक टेक्नोलॉजी की पहंुच पर जोर दिया। उन्होंने एआई युजर को प्रोटेक्ट करने बायस्ड् इंफॉरमेशन न मिले इस पर भी अपना विचार व्यक्त किया।                 जनजातीय विशेषज्ञ  अश्वनी कांगे ने “जनजातीय नेतृत्व आधारित सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर अपना वक्तव्य दिया गया।  कांगे अंदरूनी क्षेत्रों में भी टेक्नोलॉजी की पहुंच पर जोर दिया उन्होंने कहा कि जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को एक टूल में बाधंना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग के हर पहलु जैसे बीजा पण्डुम, कृषि रस्मों-रिवाज में ज्ञान समाहित है, जिस पर वृहद रूप से चर्चा करने की आवश्कता है।                  संगोष्ठी अंतर्गत विशेषज्ञों के द्वारा मुख्य रूप से गुणवत्तायुक्त डॉटा के संकलन पर जोर दिया। विशेषज्ञों को मानना है कि किसी विषय पर जितना ज्यादा डेटा उपलब्ध होगा, उतनी ही विश्वसनीयता और सहजता के साथ एआई को डाटा विश्लेषण कर सही प्रमाण देने में ज्यादा सक्षम होगा।                   साथ ही एआई की मदद से जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास तथा स्वास्थ्यगत समस्याओं के निवारण में बेहतर कार्य होगा। क्योंकि अंतिम छोर में माने जाने वाले जनजातीय समुदाय से विकास की गति को प्रारंभ करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में उनके ज्ञान को मूल रूप में सहेजते हुए उनकेे विचारों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि उनके सामाजिक मूल्यों और आधुनिक तकनीकों में सामंजस्य बना रहे। संगोष्ठी में शामिल अन्य विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

बुजुर्ग रोगियों के लिए वयोमित्र कार्यक्रम एक आदर्श मॉडल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानों पर आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा व्यवस्था और वेलनेस केन्द्र स्थापित करने की पहल सराहनीय है। अन्य प्रदेशों में हुए ऐसे सफल प्रयोगों और नवाचारों का अध्ययन कर बेहतर कार्य करते हुए उन्होंने जन-जन तक इनकी जानकारी और इनका लाभ पहुंचाने के आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वृद्ध नागरिकों की डोर टू डोर आयुष देखभाल के लिए वयोमित्र कार्यक्रम उपयोगी है। इसी तरह कारूण्य के अंतर्गत असाध्य रोगों का कष्ट झेल रहे रोगियों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने का कार्य भी प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयुष विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के साथ किए गए एमओयू के अंतर्गत प्रदेश में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें विश्व धरोहर स्थल खजुराहो जिला छतरपुर के साथ ही ओंकारेश्वर जिला खण्डवा, चंदेरी जिला अशोकनगर, चित्रकूट जिला सतना, पचमढ़ी जिला नर्मदापुरम, ओरछा जिला निवाड़ी के अलावा उज्जैन, दतिया, मंदसौर, आलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी के साथ ही ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का प्रोत्साहन आवश्यक है जो भारतीय परम्परा से जुड़ी हैं। प्रदेश के अनेक स्थानों पर प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य कार्यरत हैं। इनकी सेवाओं से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित होते हैं। उज्जैन सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ लेकर शल्य चिकित्सा के बिना रोगियों को लाभान्वित करने के उदाहरण मिलते हैं। सामान्य प्रसव करवाने वाले अस्पताल भी प्रदेश में संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजीवन आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ लेने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहन कार्यक्रमों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुक्रम में प्रदेश के जिला स्तरीय चिकित्सालयों में विकल्प के रूप में आयुष चिकित्सा के लिए पृथक विंग स्थापित करने का कार्य चल रहा है। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यों की गति बढ़ाई जाए। बैठक में बताया गया कि जिलों में आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के व्यापक संचालन के अंतर्गत सुप्रजा, आयुर्विद्या, वयोमित्र, मस्कुलर-स्केलेटल प्रिवेंटिव कार्यक्रम और कारूण्य का लाभ नागरिकों को दिलवाया जा रहा है। जनजातीय बहुल और सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जिलों में आयुर्वेद औषधियों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 22 जिलों के एलोपैथी चिकित्सालयों में आयुष विंग की स्थापना की कार्यवाही चल रही है। पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित करने और 12 जिलों में 50 बिस्तर क्षमता के आयुष अस्पताल प्रारंभ करने का कार्य चल रहा है। भारत सरकार से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत गत दो वर्ष में नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर जिला शाजापुर में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय के निर्माण की मंजूरी मिली है। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के परिसर में 29 करोड़ की लागत से प्रशासनिक और अकादमिक भवन का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 6 जिला आयुष कार्यालय बन कर तैयार हो गए हैं। इसी तरह 80 आयुष औषधालयों के भवन बनाए जाने थे, जिनमें से 53 का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। आयुष विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेश के सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को फर्स्ट रेफेरल यूनिट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सभी 9 आयुष महाविद्यालयों में हॉस्टल बनाने, सीट क्षमता का 100 तक उन्नयन करने, यूनानी पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध करवाने, आयुष महाविद्यालयों में शोध कार्य बढ़ाने और बालाघाट में आयुष शोध केन्द्र का संचालन प्रारंभ करने का भी लक्ष्य है। श्रम विभाग से समन्वय कर प्रदेश के लगभग 13 लाख कर्मचारी राज्य बीमा में पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा पद्धति की कैशलेस सुविधा दिलवाने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य बीमा में आयुष को शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 7 आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी विभाग स्थापित करने, आयुष विश्वविद्यालय की पहल और एक प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय स्थापित करने तथा ऐसे जिलों जहां आयुष चिकित्सा सुविधा नहीं है, वहां 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ करने के कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। बैठक में आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

राजधानी में विकास को रफ्तार, जाम से निजात दिलाने की बड़ी तैयारी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में कचना रेलवे ओवरब्रिज का लोकार्पण कर इसे आम जनता को समर्पित किया। साथ ही 22.79 करोड़ रुपये की लागत से बने शंकर नगर-खम्हारडीह-कचना मार्ग के चौड़ीकरण कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह ओवरब्रिज उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कचना रेलवे फाटक में लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई थी, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ओवरब्रिज के शुरू होने से अब लोगों को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुविधा मिलेगी। इससे विशेष रूप से कचना, खम्हारडीह एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की केंद्रीय सड़क निधि योजना के अंतर्गत इस परियोजना को स्वीकृति मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कचना, खम्हारडीह और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए खुशी का दिन है। जनता की वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। अब यहां ट्रैफिक जाम और वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिलेगी। इससे कार्यालय, स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापारी एवं व्यवसायियों को भी बड़ी सुविधा होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए क्षेत्रवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त निधि के माध्यम से इस ओवरब्रिज का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूर्ण करने के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि इस ब्रिज की लंबाई 787 मीटर एवं चौड़ाई 13 मीटर है तथा 48.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस ओवरब्रिज के बनने से रायपुर शहर की यातायात व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा समय की बचत भी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क, पुल और अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने निर्माण कार्य में जुड़े अधिकारियों एवं एजेंसियों को बधाई देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार अपने कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने के साथ ही सीधे लोगों के बीच जाकर योजनाओं और विकास कार्यों का फीडबैक भी ले रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाकर वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है। वे स्वयं अचानक गांवों में पहुंचकर पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि लोग शासन की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं और राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर क्षेत्र विकास से वंचित रहा, लेकिन अब नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। नियद नेल्लानार 2.0 के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। अब तक 20 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है तथा 55 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है और उसी के अनुरूप सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने कहा कि कचना क्षेत्र में लगभग 25 बड़ी कॉलोनियां स्थित हैं और यह रेलवे ओवरब्रिज इन सभी कॉलोनियों को रायपुर शहर से बेहतर तरीके से जोड़ने में अत्यंत प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि कचना का यह ओवरब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि रायपुर और कचना को जोड़ने वाली जीवनरेखा है। इससे न केवल कचना और आसपास के रहवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बिलासपुर और बलौदाबाजार की ओर आने-जाने वाले लोगों को भी यातायात में बड़ी सुविधा प्राप्त होगी।  साव ने कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। पहली बार लोक निर्माण विभाग को 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मिली है। राज्य सरकार के गठन के बाद रिकॉर्ड संख्या में पुलों का निर्माण किया गया है। यातायात को सुगम बनाने और प्रदेशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार द्रुतगामी सड़कों का निर्माण कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे गांवों तक भी सड़क पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, जहां आज तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, महापौर मती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, पार्षद मती पुष्पा साहू, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश बंसल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त  संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कांग्रेस की टिप्पणी पर सीएम योगी का तीखा प्रहार, प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी को बताया कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों का प्रमाण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विषय में की गई अभद्र, असंसदीय और अक्षम्य टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को उजागर करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की भाषा और व्यवहार लगातार लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले कांग्रेस के “युवराज” भी अपनी टिप्पणियों के जरिए अपने कुसंस्कारों का परिचय दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस आज हताशा, निराशा, कुंठा और मानसिक दिवालियेपन के शीर्ष स्तर पर पहुंच चुकी है। जनता का समर्थन लगातार घटने के कारण कांग्रेस के नेताओं में राजनीतिक संयम और शालीनता भी समाप्त होती जा रही है।  उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग कांग्रेस नेताओं द्वारा किया जा रहा है, वह भारतीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थिति अब ऐसी हो चुकी है कि वह देशवासियों से क्षमा मांगने की नैतिक स्थिति में भी नहीं बची है।

महिला वर्ग में मध्यप्रदेश बना ओवरऑल चैंपियन

भोपाल  उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में 17 से 21 मई तक आयोजित 48वीं जूनियर राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश रोइंग दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 7 पदक अर्जित किए, जिनमें 2 स्वर्ण, 2 रजत एवं 3 कांस्य पदक शामिल हैं। विशेष उपलब्धि के रूप में मध्यप्रदेश की महिला टीम ने निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन, बेहतर तालमेल और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के दम पर महिला वर्ग की ओवरऑल चैंपियनशिप अपने नाम की। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के लिए गौरव का विषय है, बल्कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रही खेल संस्कृति और रोइंग खेल के बढ़ते स्तर को भी दर्शाती है। खेल मंत्री  सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने 48वीं जूनियर राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन और महिला वर्ग में ओवरऑल चैंपियनशिप हासिल करने पर मध्यप्रदेश रोइंग दल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश की खेल पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। खिलाड़ियों की यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगी। महिला खिलाड़ियों ने दिलाया ओवरऑल चैंपियनशिप का गौरव महिला वर्ग में मध्यप्रदेश की खिलाड़ियों ने पूरे प्रतियोगिता के दौरान प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता दिलाई। सिंगल स्कल्स स्पर्धा में संतोष यादव ने उत्कृष्ट तकनीक, संतुलन और शानदार प्रदर्शन का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया। वहीं कॉक्सलेस पेयर स्पर्धा में जिज्ञासा रेगर एवं स्नेहा कालमे की जोड़ी ने बेहतरीन समन्वय और दमदार प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश को दूसरी स्वर्णिम सफलता दिलाई। इसी क्रम में डबल स्कल्स स्पर्धा में प्रियंका एवं वंशिका साहू की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। वहीं कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में पूनम, प्रतीक्षा, मेघा लवारिस एवं प्रतिज्ञा चिकाने की टीम ने कांस्य पदक जीतकर प्रदेश की पदक तालिका को और मजबूत बनाया। महिला खिलाड़ियों के सामूहिक प्रदर्शन और लगातार बेहतर परिणामों के आधार पर मध्यप्रदेश ने महिला वर्ग में ओवरऑल चैंपियनशिप हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित की। पुरुष वर्ग में भी खिलाड़ियों ने किया प्रभावशाली प्रदर्शन पुरुष वर्ग में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबल स्कल्स स्पर्धा में तनिष एवं ऋषभ जोशी की जोड़ी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया और अपनी क्षमता का परिचय दिया। वहीं कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में राज कारिया, श्लोक डांगी, हरिओम वर्मा एवं अरुण गुर्जर की टीम ने बेहतरीन समन्वय और प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन के आधार पर कांस्य पदक हासिल किया। इसके अतिरिक्त कॉक्सलेस पेयर स्पर्धा में अयान एवं अनुराग ने भी कांस्य पदक जीतकर प्रदेश की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पुरुष खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भी यह साबित किया कि मध्यप्रदेश रोइंग के क्षेत्र में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। प्रदेश की खेल प्रतिभा और प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण 48वीं जूनियर राष्ट्रीय रोइंग चैंपियनशिप में प्राप्त यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभा, व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रणाली और खिलाड़ियों के निरंतर परिश्रम का परिणाम है। प्रदेश में खिलाड़ियों को आधुनिक खेल अधोसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धति, तकनीकी मार्गदर्शन और उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देखने को मिल रहे हैं। खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और खेल प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था ने इस सफलता को संभव बनाया है।  

देवरिया में सीएम योगी ने ₹655 करोड़ की 19 परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास

देवरिया  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को देवरिया में ₹655 करोड़ की लागत से 19 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करते हुए कहा कि उनकी सरकार समस्याओं को टालने वाली नहीं, बल्कि समाधान देने वाली सरकार है। हम समस्याएं नहीं, समाधान देते हैं, तभी जनता जनार्दन हमें चुनती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति पकड़ी है और अब विकास की यह यात्रा रुकने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद देश ने नए भारत का दर्शन किया है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी, क्योंकि गति जितनी तेज होगी, विकास का लाभ उतनी ही तेजी से आम जनता तक पहुंचेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से कहा कि कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और नए सत्र से इसे शुरू करने की तैयारी की जाए। यह विश्वविद्यालय किसानों को आधुनिक तकनीक, कम लागत और अधिक उत्पादन की दिशा में नई राह दिखाएगा।  देवरिया अब फोर लेन कनेक्टिविटी से जुड़ चुका मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह गोरखपुर से सांसद थे, तब उन्हें अक्सर देवरिया आना पड़ता था। उस समय प्रदेश में अराजकता, उत्पीड़न और तुष्टीकरण की राजनीति थी। गोरखपुर से देवरिया तक सड़कें बदहाल थीं, कई हिस्सों में सिंगल लेन मार्ग था और चौरी-चौरा रेलवे क्रॉसिंग पर घंटों जाम लगता था। लेकिन आज वही देवरिया फोर लेन कनेक्टिविटी से जुड़ चुका है। यहां से गोरखपुर पहुंचने का समय घट गया है। देवरिया से बलिया तक सड़क परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। देवरिया-कसया फोर लेन मार्ग और बाईपास बनने से न केवल यातायात आसान होगा, बल्कि यह नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी का बड़ा हिस्सा बनेगा। यह मार्ग देवरिया को मऊ, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, वाराणसी व लखनऊ से जोड़ेगा और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से भी लिंक होगा। इससे पूर्वांचल की कनेक्टिविटी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी। बिना बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास संभव नहीं सीएम योगी ने कहा कि अच्छी सड़कें, फ्लाईओवर, पुल और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही रोजगार व निवेश की नींव होते हैं। इसी सोच के तहत देवरिया से कसया, बरहज मार्ग, फ्लाईओवर और अन्य पुलों के लिए सरकार ने धनराशि स्वीकृत की है। यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं। देवरिया में बाईपास निर्माण तेजी से चल रहा है और सभी विकास परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। जनता से जुड़े हर प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जा रही है। हाल में पीडब्ल्यूडी की कार्ययोजना को लेकर सांसदों-विधायकों के साथ बैठक में सभी आवश्यक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज, आईटीआई और स्किल डेवलपमेंट पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि देवरिया में मेडिकल कॉलेज बनेगा, लेकिन आज महर्षि देवरहा बाबा के नाम पर सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहा है। जल्द ही नए जिला अस्पताल के निर्माण की दिशा में भी कार्य होगा। आईटीआई सिर्फ तकनीकी संस्थान नहीं, बल्कि इसे स्किल डेवलपमेंट का केंद्र बनाया गया है। युवाओं को प्रशिक्षित कर उद्योगों से जोड़ा जाएगा। इससे रोजगार बढ़ेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ से ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज’ मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि उस समय हर जिले में माफिया सक्रिय थे। त्योहारों पर उपद्रव, गरीबों की जमीनों पर कब्जा, बेटियों और व्यापारियों में भय का माहौल था। शाम होते ही बेटियों को घरों में रहना पड़ता था और व्यापारी दुकानें बंद कर देते थे। आज उत्तर प्रदेश की पहचान बदल चुकी है। “वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” की जगह “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज” और “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” ने ले ली है। अब प्रदेश में बेटियां सुरक्षित हैं, व्यापारी बेखौफ व्यापार कर रहे हैं और कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता। प्रदेश की बेटियां नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं और यदि कोई शोहदा छेड़छाड़ का दुस्साहस करता है तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने के लिए तैयार बैठे रहते हैं। किसानों, गरीबों व कर्मचारियों को मिल रहा योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को गन्ने का ₹400 प्रति क्विंटल मूल्य दिया जा रहा है, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है और कृषि योजनाओं के जरिए उनकी आय बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। गरीबों को बिना भेदभाव प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, राशन और उज्ज्वला योजना जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। शिक्षकों, अनुदेशकों और रसोइयों को भी कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ा गया है, जिससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा और मजबूत हुआ है। आपके वोट ने बदल दी उत्तर प्रदेश की पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि देवरिया की जनता ने 2022 चुनाव में भाजपा को सातों विधानसभा सीटें जिताकर बड़ा समर्थन दिया। इसलिए सरकार देवरिया की किसी भी विकास परियोजना को रुकने नहीं देगी। उन्होंने सलेमपुर, तमकुही, बरहज, रुद्रपुर, पथरदेवा, रामपुर कारखाना समेत सभी क्षेत्रों के विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने पूर्व सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तब मोहन सिंह सेतु के लिए केवल “टोकन मनी” दी गई थी, जबकि अब सरकार समयबद्ध तरीके से पुल निर्माण पूरा कराएगी और धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। माफिया मिट्टी में मिल गए, उत्तर प्रदेश की पहचान बदल गई मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश की पहचान गुंडों व माफियाओं से होती थी, लेकिन आज पूरे देश में यूपी का नाम सम्मान व गर्व के साथ लिया जाता है। यूपी विरासत और विकास, दोनों का संगम बन चुका है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, नैमिषारण्य, विंध्यधाम, प्रयागराज और कुशीनगर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का पुनर्जागरण हुआ है। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर जनता के वोट की ताकत और डबल इंजन सरकार के संकल्प का परिणाम है। उन्होंने जनता से विकास और सुशासन के लिए भाजपा जनप्रतिनिधियों को लगातार आशीर्वाद देने की अपील भी की। हमारी पहचान राम से, कृष्ण से और बाबा विश्वनाथ से बन गई है मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की पहचान पूरी दुनिया में बदल चुकी है। अरुणाचल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल … Read more

रांची: 30 जून से शुरू होगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण, CEO ने दूर की भ्रांतियां

रांची झारखंड में 30 जून से शुरू होनेवाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) के तहत सूची से नाम कटने को लेकर डरने की कोई बात नहीं है। बीएलओ से लेकर SIR में लगे ऊपर तक कोई पदाधिकारी किसी मतदाता का गलत ढंग से मतदाता सूची से नाम हटा नहीं सकता। SIR को लेकर लागू सिस्टम इतना भरोसेमंद है कि किसी भी स्तर पर गलत ढंग से नाम कटने या जुड़ने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को नोटिस का जवाब देने, यहां तक कि अपील करने का भी पूरा मौका मिलेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को धुर्वा स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में SIR को लेकर उत्पन्न होनेवाली हर भ्रांति को दूर किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, SIR में सबसे महत्वपूर्ण राज्य में इससे पूर्व वर्ष 2003 में हुए SIR के बाद तैयार मतदाता सूची है। जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में है, उन्हें सत्यापन के दौरान कोई दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं है। घर-घर जाएंगे बीएलओ उन्हें सिर्फ गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) भरना होगा, जो बीएलओ के माध्यम से घर तक पहुंचेगा। वर्तमान मतदाताओं में 73 प्रतिशत की इस सूची से मैपिंग हो चुकी है। वैसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें गणना प्रपत्र भरने के साथ-साथ घोषणापत्र और निर्धारित 11 दस्तावेज की सूची में कोई एक दस्तावेज देना होगा। 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को फार्म-6 के साथ घोषणापत्र भी जमा करना होगा। वहीं, दूसरे राज्यों से आनेवाले मतदाताओं को फार्म-8 के साथ घोषणापत्र देना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं, एसआइर में लगे कर्मियों, सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील की ताकि मतदाता सूची अधिक स्वच्छ समावेशी एवं त्रुटिरहित बन सके। इस अवसर पर अपर मुख्यवनिर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनीलकुमार उपस्थित रहे। गणना प्रपत्र लेने न्यूनतम 3 बार आपके घर जाएंगे बीएलओ 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस क्रम में वे सभी को गणना प्रपत्र देंगे, जिन्हें भरकर उन्हें देना है। यह पहले से आंशिक रूप से भरा रहेगा। अगर किसी घर में ताला बंद है तो इस प्रपत्र को बीएलओ अंदर डाल देंगे। गणना प्रपत्र भराने तथा घोषणा पत्र व दस्तावेज लेने बीएलओ न्यूनतम तीन बार आपके घर जाएंगे। गणना प्रपत्र जमा करनेवाले मतदाताओं की सूची प्रारुप मतदाता सूची में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग या बिना मैपिंग के रूप में अलग-अलग शामिल किए जाएंगे। यदि किसी मतदाता का गणना प्रपत्र नहीं मिलता है या उसका नाम अब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट (एएसडीडी) सूची में शामिल है तो उसका नाम प्रारुप मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। गण्ना प्रपत्र भरने में बीएलओ सहयोग करेंगे। एसआइआइ में क्या खास? एक-एक घर में गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से पहुंचेगा। उसमें बीएलओ का नाम तथा मोबाइल नंबर भी होगा। इसे कम से कम भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को जरूर जमा करें। मतदाता सूची से किसी का नाम सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना नहीं हटाया जाएगा। अपील दो स्तर पर की जाएगी। पहली अपील जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त तथा दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पास होगी। आधार कार्ड के आधार पर मतदाता होने का दावा नहीं किया जा सकता। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आधार एक्ट तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आधार सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान है न कि नागरिक होने का। समय पर पूरा होगा SIR , नहीं मांगेंगे अवधि विस्तार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में SIR समय पर पूरा होगा। इसके लिए चुनाव आयोग से अवधि विस्तार नहीं मांगा जाएगा। किसी भी विसंगति को सिस्टम तुरंत पकड़ेगा वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग सही ढंग से हुई है या नहीं, किसी मतदाता का नाम गलत ढंग से सूची से कट गया या जुड़ गया हो तो उसे सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा। इसमें कुल 15 प्रकार की होनेवाली विसंगतियां चिह्नित की गई हैं, जिन्हें सिस्टम बता देगा ताकि उसे दूर किया जा सके। गलत करने पर दंड का भी प्रविधान SIR के क्रम में बीएलओ से लेकर ऊपर तक के कोई पदाधिकारी गलत करता है, तो उसके विरुद्ध दंड का भी प्रविधान है। इसके तहत जुर्माना सहित न्यूनतम तीन माह की जेल हो सकता है, जिसे दो वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इन 11 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा अनिवार्य  केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू द्वारा नियमित कर्मचारी या पेंशनर को जारी प्रमाणपत्र एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, डाकघर, एलआइसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र  पासपोर्ट मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र  ओबीसी, एससी, एसटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई भी जाति प्रमाणपत्र  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी मौजूद है) राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर सरकार द्वारा कोई भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र कब क्या होगा? 23 मई : सभी मतदान केंद्रों पर उन मतदाताओं की सूची का प्रकाशन जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुई है। 20 जून से 29 जून : SIR में संलग्न कर्मियों का प्रशिक्षण 30 जून से 29 जुलाई : बीएलओ द्वारा घर-घर दौरा 29 जुलाई तक : मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 05 अगस्त : प्रारुप मतदाता सूची का प्रकाशन 05 अगस्त से 04 सितंबर : दावा एवं आपत्ति 05 अगस्त से 03 अक्टूबर : दावों और आपत्तियों की 07 अक्टूबर : मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन। बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा आयोग चुनाव आयोग SIR में संलग्न बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि बीएलओ के कार्य में बाधा डालनेवाले के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  

आगामी 15 जून तक सुझाव दिए जा सकेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समान नागरिकता संहिता के संबंध में प्रदेश में प्राप्त सुझावों के संकलन के लिए की गई पहल सराहनीय है। जनता के मत प्राप्त करने के लिए बनाई गई वेबसाइट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी होगी। जिलों में समान नागरिक संहिता समिति के भ्रमण से यह कार्य आसान होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में समान नागरिक संहिता मध्यप्रदेश की वेबसाइट का विमोचन किया। इस तरह की वेबसाइट के निर्माण में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों को वेबसाइट के निर्माण के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर राज्यों में इस संबंध में कार्य प्रारंभ हुआ है। स्वतंत्रता के बाद से ही इस तरह के कार्य की आवश्यकता अनुभव की जा रही थी। नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए पारिवारिक विधि के समग्र अध्ययन की जरूरत है। जन सामान्य, राजनीतिक दल, गैर शासकीय संगठन आदि इस संबंध में अपना मत प्रस्तुत करेंगे, जिनका सम्मान करते हुए विचार मंथन होगा। सभी सुझावों का संकलन भी किया जाएगा। जन परामर्श के उद्देश्य से समिति ने वेबसाइट का निर्माण कर महत्वपूर्ण कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश एक राष्ट्र, एक विधान,एक निशान के महत्व को समझते हुए इसके अलावा "एक विधि" के लिए आवश्यक दायित्व पूर्ण करेगा। निश्चित ही यह जन हितैषी कार्य है। इस नाते गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति बधाई की पात्र है। राज्य शासन द्वारा विवाह, भरण पोषण, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार एवं अन्य परिवार संबंधित कानूनों से संबंधित विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर समान नागरिक संहिता के संबंध में उपयुक्त अनुशंसाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। इस उद्देश्य से ही उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है विस्तृत अध्ययन के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता के संबंध में उपयुक्त अनुसंधान प्रस्तुत करने के लिए यह समिति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस अवसर पर समिति द्वारा जन परामर्श के उद्देश्य से निर्मित की गई वेबसाइट https://ucc.mp.gov.in/ पर जनमानस से सुझाव सुगमता से प्राप्त किए जा सकेंगे। सुझाव देने की अंतिम तिथि 22 मई से आगामी 15 जून 2026 तक निर्धारित की गई है। वेबसाइट लांच किए जाने के अवसर पर समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मती प्रकाश रचना देसाई ने भी वर्चुअली संबोधित किया। समिति के सचिव  अजय कटेसरिया ने समिति के कार्यों का विवरण दिया। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

कमरौद में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद, योजनाओं की जमीनी स्थिति का लिया फीडबैक

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा स्थित ग्राम कमरौद पहुंचकर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।  बरगद के पेड़ की छांव में आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर यह सुनिश्चित कर रही है कि लोगों को राशन, बिजली, प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाकर समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे अब तक प्रदेश के 16 जिलों का दौरा कर लोगों से सीधे संवाद कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से महतारी वंदन योजना की जानकारी ली, जिस पर महिलाओं ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से राशि मिल रही है। ग्राम की मती देव कुमारी साहू ने बताया कि वह योजना से मिलने वाली राशि अपनी बेटी के भविष्य के लिए बचा रही हैं।  चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने पांचवीं कक्षा के छात्र पूर्वांश साहू से मुस्कुराते हुए पूछा—“सेल्फी लेंगे क्या?” जिसके बाद छात्र ने उत्साहपूर्वक मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी ली।  यह आत्मीय क्षण चौपाल का विशेष आकर्षण बना। मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा पंचायत स्तर पर संचालित अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और अतिरिक्त 10 लाख आवासों का निर्माण भी प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए अब तक लगभग 6000 अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार शीघ्र ही ऑनलाइन शिकायत समाधान व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से नागरिक घर बैठे मोबाइल फोन से अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए टोल फ्री नंबर भी प्रारंभ किया जाएगा। किसानों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।  सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरपुर बैराज तथा सिकासेर से कोडार परियोजना महासमुंद जिले के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उल्लेखनीय है कि जिले में सिंचाई क्षमता विस्तार के लिए सिकासेर बांध (गरियाबंद) से शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय कोडार तक पानी पहुंचाने की लगभग 3200 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि सरकार गांव-गांव पहुंचकर जनता की बात सुन रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पारदर्शी और जनहित में कार्य करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना और अन्य योजनाओं से प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।  बस्तर जैसे क्षेत्रों में जहां पहले हिंसा का माहौल था, वहां अब खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित हो रही हैं। चौपाल के दौरान ग्राम की मती लता साहिस ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना तथा गैस सिलेंडर का लाभ मिला है। वहीं मती मधु साहू ने मछली पालन से जुड़ाव और गर्मी के दौरान पानी की समस्या बताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने सोलर आधारित बोर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बिहान योजना से जुड़ी परी साहू ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे आत्मनिर्भर बनी हैं और अब फैंसी एवं किराना दुकान संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद वे “लखपति दीदी” कहलाने लगी हैं।  ग्रामीण  मोहन कुलदीप ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिसंबर 2025 में सोलर पैनल लगवाने पर उन्हें एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी मिली और पहले जहां उनका बिजली बिल लगभग 3500 रुपये आता था, अब शून्य हो गया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित ग्रामीणों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। दिव्यांग हितग्राहियों के चेहरे पर खिली मुस्कान चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने तीन दिव्यांग हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए। भारती मारकण्डेय को व्हीलचेयर तथा रवि कुमार पटेल और यादराम साहू को ट्रायसिकल प्रदान की गई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनके दैनिक जीवन और आवागमन में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के जीवन को सहज, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा अधिकारियों को जरूरतमंद हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मातृशक्ति के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण की घोषणा की, जहां सामाजिक, सांस्कृतिक एवं स्व-सहायता समूहों की गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कमरौद से चरोदा तक लगभग चार किलोमीटर सड़क निर्माण तथा ग्राम में मुक्ति धाम निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया और ग्रामीणों ने उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद मती रूपकुमारी चौधरी, विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,  अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।