samacharsecretary.com

श्रमिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा दायित्व-मंत्री पटेल

भोपाल  मध्यप्रदेश में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों को कैशलेस आयुष चिकित्सा का लाभ दिया जायेगा। यह श्रमिकों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार की गरिमामयी उपस्थिति में श्रम विभाग और आयुष विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। इस एमओयू पर आयुष विभाग की ओर से आयुक्त डॉ. संजय मिश्र और श्रम विभाग (ईएसआईसी) की ओर से संचालक डॉ. सी. एस. जायसवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आयुष विभाग के प्रमुख सचिव  शोभित जैन एवं श्रम विभाग के सचिव  रघुराज एम आर सहित दोनों ही विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है और यह पहल भारतीय चिकित्सा पद्धति को आमजन में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के अवसर पर प्रदेश के श्रमिक सामूहिक रूप से योग कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश देंगे। मंत्री  परमार ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को विश्वसनीयता के साथ आमजन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस एमओयू के तहत की जा रही गतिविधियों की हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार सुविधाओं का विस्तार भी किया जायेगा। इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमिक वर्ग में योग और सूर्य नमस्कार से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए श्रम विभाग द्वारा आयुष विभाग के सहयोग से तैयार किए गए एक विशेष 'लोगो' का भी विमोचन किया गया। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी राज्य बीमा योजना के लाभार्थियों को राज्य के शासकीय आयुष संस्थानों, जैसे चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, एलोपैथिक अस्पतालों में संचालित आयुष विंग्स और औषधालयों के माध्यम से समग्र, सुलभ और पूरी तरह से कैशलेस चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इसके तहत पंजीकृत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी पद्धतियों पर आधारित वैकल्पिक उपचार के बहुआयामी विकल्प प्राप्त हो सकेंगे। इस योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिसके प्रथम चरण में इसे प्रदेश के 9 शासकीय आयुष चिकित्सा महाविद्यालयों में शुरू किया जाएगा और इसके बाद दोनों विभागों की आपसी सहमति से इसका विस्तार जिला स्तरीय आयुष चिकित्सालयों, आयुष विंग और डिस्पेंसरीज़ में किया जाएगा। इस पहल से जहाँ एक ओर दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर एलोपैथिक स्वास्थ्य संस्थानों पर मरीजों का बढ़ता दबाव भी कम होगा। एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, श्रम विभाग द्वारा ईएसआईसी के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक और उनके आश्रित परिवार के सदस्य (जैसे जीवनसाथी, आश्रित माता-पिता एवं पात्र संतान) इस योजना में लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे। लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन ई-पहचान पत्र, बीमा संख्या अथवा अन्य वैध माध्यमों से किया जाएगा। इन संस्थानों में पात्र मरीजों को चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क ओपीडी परामर्श देने के साथ आवश्यक आयुष औषधियों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान में उपलब्धता के आधार पर पंचकर्म व अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएँ, योग व जीवनशैली परामर्श तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया और मोटापा जैसे दीर्घकालिक रोगों का समग्र प्रबंधन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उपचार के लिये सीजीएचएस अथवा राज्य शासन द्वारा निर्धारित दरों को लागू किया जाएगा और ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध प्रतिपूर्ति की जाएगी।

88.16 प्रतिशत कर्मचारियों ने चार से अधिक मॉड्यूल पूरे किए, डिजिटल दक्षता बढ़ाने पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यकुशलता, डिजिटल दक्षता और प्रशासनिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। मिशन कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने तेज रफ्तार पकड़ते हुए बड़ा प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 5.41 लाख से अधिक कर्मचारियों ने चार से अधिक प्रशिक्षण मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह कुल पंजीकृत कर्मचारियों का 88.16 प्रतिशत है। प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और परिणाममुखी बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कर्मचारियों को डिजिटल कार्यप्रणाली, ई-गवर्नेंस और आधुनिक प्रशासनिक दक्षता से जोड़ा जा रहा है, जिससे विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। इस प्रशिक्षण अभियान से कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ने के साथ मॉनिटरिंग व्यवस्था, योजनाओं के क्रियान्वयन और सेवा वितरण प्रणाली को भी नई मजबूती मिली है। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़ाकर डिजिटल, दक्ष और परिणाम आधारित प्रणाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। तकनीक आधारित मॉडल को प्राथमिकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक कार्यप्रणाली, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रभावी सेवा प्रणाली से जोड़ना है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से जमीनी स्तर तक पहुंच सके। प्रदेश सरकार अब शिक्षा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में तकनीक आधारित मॉडल को प्राथमिकता दे रही है। 6,14,245 कर्मचारियों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कुल 7,00,000 कर्मचारियों में से 6,14,245 कर्मचारियों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। इनमें से 5,41,512 कर्मचारी चार से अधिक प्रशिक्षण कोर्स पूरे कर चुके हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में केवल 0.50 प्रतिशत कर्मचारी ही ऐसे हैं, जिनकी लर्निंग शून्य है, जबकि अधिकांश कर्मचारी लगातार प्रशिक्षण मॉड्यूल पूरे कर रहे हैं। अनेक जनपदों का उत्कृष्ट प्रदर्शन मिशन कर्मयोगी प्रशिक्षण में अनेक जनपदों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। बागपत में 97.24 प्रतिशत कर्मचारियों ने चार से अधिक कोर्स पूरे किए हैं, जबकि संतकबीरनगर में यह आंकड़ा 97.13 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा मथुरा और बस्ती में 95.68 प्रतिशत, बाराबंकी में 94.95 प्रतिशत, श्रावस्ती में 94.21 प्रतिशत और सिद्धार्थनगर में 92.94 प्रतिशत कर्मचारियों ने चार से अधिक प्रशिक्षण मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। अलीगढ़ में 94.22 प्रतिशत, वाराणसी में 91.09 प्रतिशत, लखनऊ में 89.70 प्रतिशत और प्रयागराज में 87.09 प्रतिशत कर्मचारियों ने प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है। डिजिटल और कार्यकुशल प्रशासन पर जोर योगी सरकार पहले ही डिजिटल मॉनिटरिंग, ई-ऑफिस व्यवस्था, तकनीक आधारित शिक्षा प्रबंधन और ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रणाली को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अब मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि और कार्य संस्कृति को और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वामित्व योजना के पट्टे वितरित कर ग्रामीणों को दिया वैधानिक अधिकार, बिहान समूह की महिलाओं से आजीविका गतिविधियों की ली जानकारी

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत आरंग विकासखंड के ग्राम कोसरंगी पहुंचकर ग्रामीण विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने चौपाल कार्यक्रम में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को  पट्टे वितरित कर उन्हें वैधानिक अधिकार प्रदान किए, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित आजीविका सेवा केंद्र का निरीक्षण कर महिलाओं की आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने चौपाल को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीणों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से आबादी भूमि और संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को अपनी जमीन और मकान पर कानूनी अधिकार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल पट्टा वितरण नहीं, बल्कि ग्रामीणों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिलने से ग्रामीणों को बैंक से ऋण लेने में सुविधा होगी तथा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज सहजता से उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत छह हितग्राहियों को पट्टे वितरित किए। पट्टा प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें अपनी संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिला है, जिससे भविष्य अधिक सुरक्षित हुआ है और योजनाओं का लाभ प्राप्त करना आसान होगा। मुख्यमंत्री  साय ने इसके बाद ग्राम कोसरंगी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत संचालित आजीविका सेवा केंद्र का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने बिहान समूह से जुड़ी महिलाओं से आत्मीय संवाद करते हुए केंद्र की गतिविधियों, आय-व्यय तथा रोजगार सृजन से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली। समूह की अध्यक्ष  गीता वर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि केंद्र में हल्दी-मिर्ची प्रसंस्करण, गेहूं पिसाई, धान बीज क्रय-विक्रय सहित विभिन्न ग्रामीण आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे समूहों को नियमित आय प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बिहान जैसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही हैं। उन्होंने समूह की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए आजीविका गतिविधियों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहा है और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि सरकार जनता के हित और समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संभागायुक्त  श्याम धावड़े, कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

सोलर उपकरणों की उपलब्धता बढ़ायें

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे। नवाचारों की प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है। 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है। समाधान योजना 2025-26 समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई। प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग  नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं। ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ यादव के प्रमुख निर्देश     सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

लखनऊ विश्वविद्यालय में लगेगा विशाल रोजगार मेला, 35 से अधिक कंपनियां करेंगी चयन

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से शनिवार को यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ के मालवीय सभागार में विशाल रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस रोजगार मेले के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। रोजगार मेले में 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं का चयन करेंगी। मेले के माध्यम से 2500 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां करेंगी भर्ती रोजगार मेले में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी, मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस तथा परिधान उद्योग सहित कई क्षेत्रों की कंपनियां भाग लेंगी। भाग लेने वाली प्रमुख कंपनियों में बारबेक्यू नेशन,पेटीएम हिटैची, शाही इंडस्ट्रीज, स्विफ्ट ट्रक, जीएम मॉडयूलर्स सहित कई बड़ी कंपनियां शामिल होंगी। हर वर्ग के युवाओं को मिलेगा अवसर इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें 8वीं पास से लेकर आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, बीटेक और एमबीए तक की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे। सामान्यतः अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अधिकारियों के अनुसार यह रोजगार मेला “समावेशी रोजगार” की अवधारणा पर आधारित है, ताकि विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। कौशल और रोजगार पर योगी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कौशल विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। यही कारण है कि प्रदेशभर में लगातार रोजगार मेले, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

माँ की जान बचाने में आगे बढ़ा भारत, मध्यप्रदेश की प्रगति राष्ट्रीय औसत से दोगुनी एमएमआर में 38 अंकों की गिरावट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है। तकनीक आधारित निगरानी से प्राप्त हुए सकारात्मक परिणाम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एएनएमओएल 2.0 एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम पंजीयन, जांच और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन 24×7 उपलब्ध कराया जा रहा है। सुमन पहल के अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और प्राथमिकता आधारित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुँच के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाने के लक्ष्य की दिशा में सुगठित प्रयास जारी रहेंगे।  

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि को वैश्विक मानचित्र पर मिलेगी विशिष्ट पहचान

आगरा  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि और 101 प्राचीन शिव मंदिरों की श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध आगरा के 'बटेश्वर धाम' को आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। भारत सरकार की एसएएससीआई (SASCI) योजना के अंतर्गत 71.50 करोड़ रुपये की लागत से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 56.11 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बटेश्वर धाम में विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधाओं का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है और इस पूरी परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। विज़िटर सपोर्ट और आधुनिक आवास क्षेत्र का निर्माण श्रद्धालुओं और देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस परिसर को बेहद आधुनिक रूप दिया जा रहा है। विज़िटर सपोर्ट एवं आवास क्षेत्र के तहत यहाँ विशाल पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय और महिला व पुरुष आगंतुकों के लिए करीब 20 कमरों की क्षमता वाले अलग- अलग सर्वसुविधायुक्त डॉरमेट्री का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए आधुनिक कैफेटेरिया, फूड कियोस्क, सोवेनियर शॉप और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक विशेष इंटरैक्टिव जोन तैयार किया जा रहा है। पर्यटक यहां के शांत और रमणीय वातावरण का आनंद ले सकें, इसके लिए ओपन सीटिंग एरिया सहित एक आधुनिक पर्यटन सुविधा केंद्र भी बनाया जाएगा। शिव पुराण, समुद्र मंथन और डिजिटल गैलरी का आकर्षण आध्यात्मिकता और संस्कृति के इस अनूठे संगम में पर्यटकों को आधुनिक तकनीक से जुड़ा एक बेहद अद्भुत अनुभव मिलेगा। यहां विकसित की जा रही इंटरैक्टिव गैलरी और थीम आधारित आकर्षण श्रद्धालुओं को भारतीय आध्यात्मिक विरासत के करीब लाएंगे। म्यूजियम गैलरी-1: इसमें चारों वेदों और शिव पुराण की पावन कथाओं को अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। म्यूजियम गैलरी-2: यहाँ मुख्य रूप से 'चार धाम गैलरी' और 'समुद्र मंथन गैलरी' बनाई जा रही हैं, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी। शिव सहस्रनाम खंड: भगवान शिव के विविध स्वरूपों और उनकी महिमा को प्रदर्शित करने के लिए विशेष थीम आधारित इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। 'ध्यान पथ' और 'शिव प्रांगण' से मिलेगी असीम शांति परियोजना का सबसे मुख्य और खूबसूरत आकर्षण इसका 'सेंट्रल लैंडस्केप क्षेत्र' होगा, जिसे अनुभवात्मक पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में आकार दिया जा रहा है। यहां एक विशाल वटवृक्ष (बरगद के पेड़) के समीप भगवान शिव की ध्यानमग्न मुद्रा में एक भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस दिव्य प्रतिमा के चारों ओर एक आकर्षक 'ध्यान पथ' और भव्य 'शिव प्रांगण' विकसित किया जाएगा, जो यहाँ आने वाले लोगों के लिए श्रद्धा, शांति और गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष केंद्र बनेगा। पंचभूत शिव स्कल्पचर गार्डन और शिवलिंगम पार्क धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता को नया विस्तार देते हुए इस परियोजना के अंतर्गत पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को समर्पित एक भव्य 'पंचभूत शिव स्कल्पचर गार्डन' विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही देश के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों की सुंदर प्रतिकृतियों से सुसज्जित 'शिवलिंगम पार्क' और यमुना नदी व भगवान शिव के प्राचीन आध्यात्मिक संबंध को दर्शाने वाला मनमोहक 'कालिंदी वनम' भी तैयार किया जा रहा है। इस परिसर की भव्यता को संपूर्णता देने के लिए सेवा के प्रतीक भगवान नंदी की एक विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा यूपी बटेश्वर धाम के इस कायाकल्प और सरकार के विजन को साझा करते हुए उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा है। हमारी सरकार बटेश्वर धाम के समेकित विकास के जरिए इसकी प्राचीन विरासत को सहेजने के साथ- साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आगरा देशी- विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरा है, जहां वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 1.83 करोड़ पर्यटकों ने भ्रमण किया है। उन्होंने कहा कि बटेश्वर धाम का यह समेकित विकास उत्तर प्रदेश को वैश्विक आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगा। 'हेरिटेज रिवाइवल कॉरिडोर' के रूप में परिकल्पित यह परियोजना बटेश्वर की प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं से जोड़ेगी। इससे न केवल वैश्विक आगंतुकों को एक नया दिव्य अनुभव मिलेगा, बल्कि पर्यटन विभाग द्वारा राज्य के लोकप्रिय स्थलों के साथ-साथ ऐसे अल्पज्ञात ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश बनेगा देश का ब्लू इकॉनमी हब: केज कल्चर के लिए डेढ़ से दो लाख प्रस्ताव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मत्स्योत्पादन को दोगुना करने के विजन को लेकर 'मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026' के सफल क्रियान्वयन की दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय 'हितधारक सम्मेलन' हुआ। इस सम्मेलन में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की उपस्थिति में मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों और निवेशकों ने उत्साह दिखाया। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि प्रदेश में पहले वर्ष 10 हज़ार केज लगाने का लक्ष्य था, लेकिन निवेशकों की ओर से लगभग 2 लाख केज लगाने के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जा रही है। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने कहा कि आज का यह समागम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार पहली बार पारंपरिक मत्स्य पालन की सीमाओं से आगे बढ़कर एकीकृत मत्स्योद्योग (हितग्राही और उद्यमी मॉडल) पर काम कर रही है। इसे केवल एक समाज आधारित योजना के रूप में न देखकर, हर वर्ग को साथ लेकर चलने और रोजगार सृजन की 'स्टार्टअप आधारित ब्लू इकॉनमी' के रूप में देखा जाना चाहिए। केज कल्चर के लिए खत्म हो आवेदन की समय सीमा:  पंवार राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केज कल्चर के प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया को किसी समय-सीमा में न बांधा जाए। इसे एक सतत प्रक्रिया बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी और हितग्राही इससे जुड़ सकें। कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य विकास के लिए 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने, हैचरी निर्माण और फिश फीड के लिए शासन द्वारा पूरी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र के हितधारकों से मत्स्य उत्पादन के आधुनिकीकरण में सहयोग की अपील की। हर निवेशक के साथ जुड़ेंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर: सचिव  सिंह मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश जलाशयों का केंद्र है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए हर निवेशक के साथ सुविधानुसार एक 'कॉन्टैक्ट ऑफिसर' नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी निवेशक के सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण, सब्सिडी और अन्य विभागीय कार्यों को पूर्ण कराने में मदद करेगा। साथ ही, विभाग द्वारा मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यमंत्री  नारायण सिंह पंवार ने केज कल्चर के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिक रूप से चयनित केज कल्चर के हितधारकों को अभिस्वीकृति पत्र वितरित किये गए। मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी ने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में निवेशकों और उद्यमियों के साथ 'राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस' भी आयोजित की गई, जिसमें स्टेक होल्डर्स से प्राप्त प्रस्तावों और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रदेश में 'केज कल्चर' को बढ़ावा देने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सीड, फीड और जाल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विक्रेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के संचालक  मनोज पथरोलिया, मत्स्य महासंघ के महाप्रबंधक  रवि गजभिए समेत प्रदेश भर से आए मत्स्य उद्यमी, निवेशक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। उप संचालक, मत्स्योद्योग  गिरीश मेश्राम ने सभी अतिथियों, निवेशकों और हितधारकों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।  

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला सुरक्षित आशियाना, कच्चे घर से पक्के मकान तक पहुंची जिंदगी

रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है। इस योजना के माध्यम से अनेक परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। सुशासन तिहार के अंतर्गत बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही मती अनीता निषाद से संवाद किया। आवास  मती निषाद की सास मती सुकलहीन निषाद के नाम से स्वीकृत हुआ है। मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश और मौसम की मार के कारण घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें कुछ समय तक आंगनबाड़ी केंद्र में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रहा है। उन्होंने कहा कि अब बारिश और अन्य मौसम की चिंता नहीं रहती तथा बच्चों के लिए भी बेहतर वातावरण मिला है। मती अनीता निषाद ने मुख्यमंत्री  साय एवं सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को नया जीवन और नई उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है ताकि कोई भी परिवार असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर न हो।