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एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये किए गए सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश ने शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2014 के 52 प्रति 1000 जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 35 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। पिछले एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को सशक्त बनाया है। यह उपलब्धि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, प्रभावी रणनीतियों एवं लक्षित हस्तक्षेपों की सफलता को प्रतिबिंबित करती है। प्रदेश में नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये 62 विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) तथा मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) का विस्तार किया गया है, जहाँ "ज़ीरो सेपरेशन" मॉडल के माध्यम से माँ एवं नवजात की संयुक्त देखभाल, शीघ्र स्तनपान एवं कंगारू मदर केयर (केएमसी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। डिजिटल नवाचारों के अंतर्गत ई-शिशु (ई-शिशु) पहल के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों की नवजात इकाइयों को विशेषज्ञ टेली-मेंटोरिंग से जोड़ा गया है। इस पहल को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, दिल्ली एवं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, रायपुर का तकनीकी एवं क्लिनिकल मेंटरिंग सहयोग प्राप्त हो रहा है। साथ ही अनमोल 2.0, एमपीसीडीएसआर, डीएसएस एवं एफबीएनसी सॉफ़्टवेयर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्च जोखिम मामलों की पहचान, नवजात निगरानी एवं डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया गया है।  

26 मई को मतदान, मोहाली निगम चुनाव को लेकर तैयारियां तेज

मोहाली  नगर निगम मोहाली के 50 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर पूरा शहर चुनावी रंग में रंग गया है। इस बार कुल 1,75,323 मतदाता 26 मई को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 90,484 पुरुष मतदाता, 84,831 महिला मतदाता तथा 8 अन्य मतदाता शामिल हैं। चुनावी माहौल जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे वैसे और अधिक गरमाता जा रहा है। इस बार चुनाव के लिए प्रशासन ने पूरे शहर में 184 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं, जहां मतदाता अपने अपने वार्डों के प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी बूथों पर आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मतदान दिवस पर सभी वार्डों में स्थानीय प्रतिनिधियों के भाग्य का फैसला जनता के हाथों में होगा। 50 में 25 वार्ड महिलाओं के आरक्षित नगर निगम के 50 वार्डों में इस बार 25 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं, जिससे स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा। आरक्षण व्यवस्था के चलते कई वार्डों में नए चेहरों को राजनीति में अवसर मिला है और विभिन्न दलों ने महिला उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने पर विशेष फोकस किया है। 227 उम्मीदवारों में से 45 निर्दलीय भी मैदान में चुनाव मैदान में इस बार कुल 227 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें 45 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने कई वार्डों में मुकाबले को बेहद रोचक और त्रिकोणीय बना दिया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कई स्थानों पर सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। वार्ड 42 में इस बार हाई-प्रोफाइल मुकाबला इस पूरे चुनाव में सबसे अधिक चर्चा वार्ड नंबर 42 की हो रही है, जो इस बार हाई प्रोफाइल मुकाबले के रूप में उभरकर सामने आया है। यह वार्ड इसलिए भी खास है क्योंकि यहां मतदाताओं की संख्या केवल 979 है, जो पूरे नगर निगम क्षेत्र में सबसे कम है। कम मतदाता संख्या के कारण यहां हर वोट का महत्व और भी बढ़ जाता है और चुनाव परिणाम बेहद करीबी रहने की संभावना जताई जा रही है। वार्ड 42 में इस बार राजनीतिक समीकरण भी खासे दिलचस्प हैं, क्योंकि यहां से आम आदमी पार्टी के सबसे अमीर विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह चुनाव मैदान में हैं, जिससे यह मुकाबला राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील और चर्चित हो गया है। इस वार्ड में भाजपा के मनजींदर सिंह, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अमित कुमार और कांग्रेस के जगदीप सिंह शेरगिल भी चुनावी मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला बहुकोणीय बन गया है और हर दल अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। पूरे मोहाली शहर में चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और हर वार्ड में उम्मीदवार डोर टू डोर प्रचार में जुटे हैं। विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, सड़कें, पानी और बुनियादी सुविधाएं इस चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार जनसभाएं और जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।  

गुजरात की शानदार जीत ने तोड़ा CSK का सपना, प्लेऑफ से लगभग बाहर

 अहमदाबाद  शुभमन गिल की अगुवाई वाली गुजरात टाइटंस ने गुरुवार, 21 मई की रात चेन्नई सुपर किंग्स पर 89 रनों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीटी की आईपीएल की सबसे बड़ी जीत है, वहीं सीएसके की आईपीएल इतिहास में रनों के मामले में सबसे बड़ी हार। इस जीत के बाद गुजरात टाइटंस के 14 मैचों में 18 अंक हो गए हैं और वह आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल में दूसरे पायदान पर है। हालांकि उन पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद उन्हें टॉप-2 से अभी भी बाहर कर सकती है। एसआरएच 13 मैचों में 16 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर है। आज उनका लीग स्टेज का आखिरी मुकाबला टेबल टॉपर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ है। आईए जानते हैं सनराइजर्स हैदराबाद टॉप-2 में कैसे जगह बना सकती है। IPL 2026 पॉइंट्स टेबल में आरसीबी नंबर-1 डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 18 पॉइंट्स और +1.065 के शानदार नेट रन रेट के साथ आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल में पहले पायदान पर है। आरसीबी की सीट टॉप-2 में कन्फर्म है। टॉप-2 में जगह पक्की करने वाली दूसरी टीम कौन सी होगी उसका फैसला आज SRH vs RCB मैच के बाद हो जाएगा। गुजरात टाइटंस ने अपनी पूरी कोशिश कर ली है। 14 मैचों में 9 जीत और 18 अंकों के साथ फिलहाल जीटी दूसरे पायदान पर है। उनका नेट रन रेट +0.695 का है। जबकि सनराइजर्स हैदराबाद 16 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर बनी हुई है। उन्हें भी प्लेऑफ का टिकट मिल गया है, मगर आज उनकी नजरें आरसीबी को हराकर टॉप-2 में जगह बनाने पर होगी। टॉप-2 में जगह बनाने का फायदा यह है कि फाइनल में पहुंचने के लिए टीम को दो चांस मिलेंगे। अगर क्वालीफायर-1 में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ता है तो उन्हें फाइनल में पहुंचने के लिए क्वालीफायर-2 खेलने का मौका मिलेगा। तीसरे और चौथे पायदान पर रहने वाली टीमों का प्लेऑफ में एक मैच हारते ही ट्रॉफी जीतने का सपना टूट जाएगा। गुजरात के बल्लेबाजों ने मचाया धमाल टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस की शुरुआत बेहद शानदार रही। कप्तान शुभमन गिल और साईं सुदर्शन ने पहले विकेट के लिए तेज साझेदारी करते हुए चेन्नई के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। शुभमन गिल ने 37 गेंदों में 64 रन की कप्तानी पारी खेली, जिसमें कई आकर्षक चौके और छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर साईं सुदर्शन ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 84 रन बनाए। जब गिल आउट हुए तब भी गुजरात की रनगति पर कोई असर नहीं पड़ा। जोस बटलर ने आखिर में तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में नाबाद 57 रन ठोक दिए। उनकी पारी की बदौलत गुजरात टाइटंस ने 20 ओवर में 229 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। बड़े लक्ष्य के दबाव में बिखरी चेन्नई 230 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहली ही गेंद पर विकेट गंवा दिया, जिससे दबाव और बढ़ गया। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने टीम को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन उनका साथ दूसरे बल्लेबाज ज्यादा देर तक नहीं दे सके। मैथ्यू शॉर्ट ने कुछ अच्छे शॉट लगाए, मगर बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। चेन्नई की बल्लेबाजी लगातार अंतराल पर विकेट गिरने की वजह से संभल नहीं पाई। एक समय टीम ने सिर्फ 63 रन तक अपने पांच विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद शिवम दुबे ने तेज बल्लेबाजी कर मैच में थोड़ी उम्मीद जगाई। दुबे ने सिर्फ 17 गेंदों में 47 रन की विस्फोटक पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला। पूरी टीम 13.4 ओवर में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। गुजरात के गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने भी मैच में शानदार काम किया। मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और राशिद खान ने तीन-तीन विकेट लेकर चेन्नई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। तेज गेंदबाजों ने शुरुआती झटके दिए, जबकि स्पिन विभाग में राशिद खान ने बीच के ओवरों में रन रोकने के साथ विकेट भी निकाले। चेन्नई के बल्लेबाज किसी भी समय मैच में वापसी करते नजर नहीं आए। प्लेऑफ की तस्वीर हुई साफ इस जीत के साथ गुजरात टाइटंस ने अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम अब 18 अंकों के साथ शीर्ष टीमों में बनी हुई है। वहीं चेन्नई सुपर किंग्स की बात करें तो टीम इस सीजन उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत के साथ चेन्नई की टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई। इससे पहले मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स भी बाहर हो चुकी हैं।   गुजरात टाइटंस या सनराइजर्स हैदराबाद टॉप-2 में कौन बनाएगा जगह? ईएसपीएनक्रिकइन्फो के अनुसार अगर सनराइजर्स हैदराबाद आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में पहले बैटिंग करते हुए 220 रन बोर्ड पर लगाती है तो उन्हें 88 रनों से जीत दर्ज करनी होगी। वहीं अगर वह 200 रन डिफेंड कर रहे हैं तो उन्हें 87 रनों से जीतना होगा। अगर सनराइजर्स हैदराबाद को आरसीबी 150 रन का टारगेट देती है तो एसआरएच को यह टारगेट लगभग 11.1 से 11.3 ओवर में चेज करना होगा। सीधा-सीधा मतलब यह है कि सनराइजर्स हैदराबाद को जीटी की तरह आरसीबी पर बड़ी जीत दर्ज करनी होगी। तभी वह नेट रन रेट के मामले में गुजरात टाइटंस को पछाड़ पाएगी। जीटी का नेट रन रेट +0.695 का है, जबकि एसआरएच का +0.350 का। अगर आज सनराइजर्स हैदराबाद हार जाती है तो गुजरात टाइटंस की जगह टॉप-2 में पक्की हो जाएगी। वहीं अगर उन्हें जीत मिलती है तो मामला नेट रन रेट पर फंसेगा।

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी लहरों पर विहार करने के साथ मुख्यमंत्री ने ताल की साफ-सफाई का लिया जायजा गोरखपुर जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के समापन पर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार शाम जनप्रतिनिधियों के साथ नैसर्गिक रामगढ़ताल में लेक क्वीन क्रूज की सवारी की। करीब 25 मिनट तक क्रूज पर सवार होकर मुख्यमंत्री निखरे ताल की लहरों के स्पंदन की आनंदानुभूति करने के साथ गोरखपुर की नई विकसित पहचान को ताल के किनारे उमड़ी भीड़ से महसूस करते रहे। ताल की लहरों पर विहार करने के दौरान सीएम ने इस विशाल प्राकृतिक झील की साफ-सफाई का भी जायजा लिया।  रामगढ़ताल के कायाकल्प का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। उनके विजन से निखरा-संवरा रामगढ़ताल न केवल नए गोरखपुर की नई पहचान बन चुका है बल्कि इसकी गिनती अब इस अंचल के खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में भी होती है। पर्यटन विकास के साथ यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। इस ताल में बड़े महानगरों की तर्ज पर क्रूज और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का भी संचालन हो रहा है। साथ ही ताल में वाटर स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं ने इसे नेशनल फेम दिला दिया है।  जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में पुरस्कार वितरण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेक क्वीन क्रूज पर पहुंचे। यहां उन्होंने क्रूज की सवारी के बीच ताल की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया। उनके साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

मध्य पूर्व तनाव से UAE को बड़ा झटका, पैसा छापने वाला कारोबार दूसरे देशों में शिफ्ट

दुबई ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाजार या मिडिल ईस्ट की राजनीति को ही नहीं हिलाया, बल्कि दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब की बुनियाद तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जिस UAE को पिछले कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेंटर माना जाने लगा था, वहां अब शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई विदेशी प्रोफेशनल्स दूसरे देशों में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।  मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में काम कर रहे कई वेस्टर्न एक्सपैट्स अब ग्रीस की राजधानी एथेंस और साइप्रस जैसे देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इसकी वजह यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरा, जहाजों की आवाजाही में रुकावट और युद्ध के लंबे खिंचने का डर बना हुआ है।  दरअसल, फरवरी में ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग जाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी तरह से समुद्री नियंत्रण लागू कर रहे हैं, जिसकी वजह से करीब 2000 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंस गए. हालांकि इससे ग्लोबल शिपिंग रेट्स में भारी उछाल आया है और कई टैंकर कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन UAE की अर्थव्यवस्था पर इसका उल्टा असर पड़ रहा है।  जेबेल अली पोर्ट पर कारोबार की रफ्तार धीमी दुबई का जेबेल अली पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब्स में गिना जाता है, जहां एक जहाज से सामान दूसरे जहाज में ट्रांसफर होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाता है. लेकिन युद्ध और ब्लॉकेड के कारण यहां कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूरे खाड़ी में ये पोर्ट 60% से भी ज्यादा के कार्गो को मैनेज करता है।  UAE का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट यानी तेल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शिप ओनर ने कहा कि समस्या सिर्फ बिजनेस की नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है. उनका कहना था, "अगर युद्ध बढ़ता है तो क्या दुबई से परिवार को सुरक्षित तरीके से लंदन या पेरिस भेज पाना आसान होगा? यही चिंता लोगों को परेशान कर रही है।  दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी जंग की मार युद्ध का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले महीनों में दुबई की हजारों प्रॉपर्टी एजेंसियां बंद हो सकती हैं. कई छोटी कंपनियां, जो तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट और सट्टेबाजी वाले निवेश पर निर्भर थीं, अब टिक नहीं पा रही हैं।  कोविड के बाद दुबई ने दुनिया भर के निवेशकों, क्रिप्टो कारोबारियों और अमीर प्रोफेशनल्स को आकर्षित किया था. टैक्स में छूट, आसान नियम और तेज ग्रोथ ने इसे ग्लोबल फाइनेंस हब बना दिया था. लेकिन अब ईरान जंग ने पहली बार इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है।  हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE के पास अभी भी मजबूत आर्थिक संसाधन हैं और दुबई पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, लेकिन यह साफ हो गया है कि होर्मुज संकट और क्षेत्रीय युद्ध ने खाड़ी की सबसे चमकदार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 

जैव विविधता, जल संरक्षण और जनभागीदारी का अनूठा संगम

रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल कोपरा जलाशय आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय वास्तविक रूप में साकार कर रहा है।         सुबह के शांत वातावरण में प्रवासी पक्षियों की मधुर आवाजें और जलाशय के आसपास आजीविका से जुड़े ग्रामीणों की गतिविधियां प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कोपरा जलाशय वर्षों से क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण कार्यों को मिली नई गति मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीव सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कई अभियान प्रदेश में संचालित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव कोपरा जलाशय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। स्थानीय समुदाय निभा रहे अहम भूमिका वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय यह संदेश देता है कि जब शासन और समाज मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तब पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होता है। प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय कोपरा जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हर वर्ष विभिन्न देशों और राज्यों से आने वाले पक्षी यहां भोजन और विश्राम प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही यह जलाशय जलीय जीवों, मछलियों, वनस्पतियों और अनेक सूक्ष्म जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। इसी विशेषता के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है। स्वच्छता, वृक्षारोपण और बायो-फेंसिंग पर विशेष जोर स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षी संरक्षण और बायो-फेंसिंग जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्रभूमियां प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। वे बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कोपरा जलाशय का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। सतत विकास का बन रहा राष्ट्रीय मॉडल कोपरा जलाशय आज यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला रामसर स्थल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सहभागिता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।           मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और इसके वैश्विक महत्व पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य के नागरिकों और संरक्षण टीम की सराहना करते हुए अपना संदेश दिया है।             मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।

दुनिया के सबसे बड़े App Scam पर Apple का शिकंजा, अरबों डॉलर की धोखाधड़ी रोकी

 नई दिल्ली ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है।  ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है।  हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं  ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं।   2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन  ऐपल ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं।  रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम  कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है।  कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर  ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया।  लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद  अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है।  बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं। 

गिरते रुपये पर RBI का बड़ा एक्शन संभव, महंगी हो सकती है लोन EMI

नई दिल्‍ली डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गिरावट को थामने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी भी केंद्रीय बैंक कर सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में बैठकें की हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तमाम कड़े विकल्पों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।  इस सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने केंद्रीय बैंक की नींद उड़ा दी है. रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी में खूब काम आ सकती है. केंद्रीय बैंक इस विकल्प पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है. आरबीआई की अगली एमपीसी मीटिंग 5 जून से शुरू होगी, लेकिन संकट की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक तय कार्यक्रम से पहले भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर दरों में बदलाव कर सकता है. इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई तय शेड्यूल से अलग जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ा चुका है।  लोन हो जाएंगे महंगे यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज महंगा मिलेगा. नतीजा यह होगा कि कमर्शियल बैंक भी आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे, जिससे आम आदमी पर मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा।  2013 वाले फॉर्मूले की तैयारी रुपये में गिरावट की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है. हालांकि, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और बैंकिंग प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर है, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते यह मजबूती विनिमय दर (Exchange Rate) में दिखाई नहीं दे रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई साल 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान आजमाए गए फॉर्मूले को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है. उस समय भी रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय बैंकों के माध्यम से एनआरआई (NRI) जमा योजनाएं शुरू की गई थीं।  रुपये की सेहत सुधारने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आरबीआई इस बार बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की प्लानिंग कर रहा है. आरबीआई का अनुमान है कि अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष डिपॉजिट स्कीम लाकर इस बार लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं, जबकि 2013 के संकट के दौरान इसके जरिए 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे।  इन पर भी हो रहा विचार डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अतिरिक्त करेंसी स्वैप एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. संप्रभु डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार की मदद से डॉलर बॉन्ड जारी करने पर भी विचार हो रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार को लेना होगा। 

नगर निगम की नई पहल, बैंकें करेंगी कुओं का पुनर्जीवन और जल संवर्धन

इंदौर  इंदौर के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शहर के खस्ताहाल और बदहाल हो चुके कुओं को नया जीवन देने और उनके संपूर्ण कायाकल्प के लिए नगर निगम प्रशासन ने छह प्रमुख बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस नई योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित बैंक को शहर के 25 से 30 कुओं को संवारने का जिम्मा उठाना होगा। बैंकों को न केवल इन कुओं की साफ-सफाई और मरम्मत करानी होगी, बल्कि उनका गहरीकरण करने के साथ-साथ नगर निगम द्वारा तय किए गए अन्य सभी आवश्यक कार्य भी पूरे कराने होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी नगर निगम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड के माध्यम से विभिन्न निजी कंपनियों और बैंकों के सहयोग से शहर के कई ऐतिहासिक तालाबों को संवारने का काम बड़े पैमाने पर किया था।  इस वृहद अभियान की पृष्ठभूमि में नगर निगम की विशेष टीमों द्वारा पिछले दिनों शहर के सभी वार्डों और क्षेत्रों में स्थित कुओं का एक विस्तृत सर्वे किया गया था। इस सर्वे के आधार पर निगम ने एक व्यापक सूची तैयार की थी। इसके बाद शुरुआती चरण में निगम ने अपने संसाधनों से कुछ प्रमुख कुओं को संवारने का काम शुरू भी किया था, लेकिन कई स्थानों पर कुओं के आसपास के हिस्सों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण होने के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में भी स्थिति यह है कि शहर के कई पारंपरिक कुएं मकानों और दुकानों के अवैध कब्जों की जद में आकर बेहद दयनीय स्थिति में पड़े हुए हैं। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के प्रबंधन के साथ सिलसिलेवार बैठकों का दौर चला था, जिसमें सर्वसम्मति से शहर के तालाबों और कुओं के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी बैंकों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया। कनाड़िया, बिजासन और मायाखेड़ी सहित कई तालाबों की भी बदलेगी सूरत इस जल संवर्धन अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय बैंक अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। तय कार्ययोजना के अनुसार, कुछ चुनिंदा बैंकों को कनाड़िया क्षेत्र के दो प्रमुख तालाबों के साथ-साथ अरंडिया, मायाखेड़ी, हुकमाखेड़ी और प्रसिद्ध बिजासन तालाब को संवारने का विशेष दायित्व दिया गया है। बैंकों को इन तालाबों के जल भराव क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उनका गहरीकरण करना होगा, साथ ही तालाबों के किनारों पर मजबूत पाल और आकर्षक पाथ-वे का निर्माण भी कराना होगा। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन जलाशयों के आसपास के खाली हिस्सों में बड़े पैमाने पर सघन पौधारोपण के कार्य भी बैंकों के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। विभिन्न बैंकों और निजी कॉर्पोरेट फर्मों द्वारा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत सीएसआर फंड से इन सभी लोक कल्याणकारी कार्यों के खर्च का वहन किया जाता है। पिछले साल भी इंदौर नगर निगम ने इसी रणनीतिक मॉडल पर काम करते हुए बिलावली और लिम्बोदी सहित शहर के कई बड़े तालाबों के आसपास गहरीकरण से लेकर उनके संपूर्ण सौंदर्गीकरण के कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था, जिसके सकारात्मक परिणाम इस बार देखने को मिल रहे हैं। मध्य क्षेत्र के कुओं पर रहेगा विशेष ध्यान, रहवासियों को मिलेगा सीधा लाभ तालाबों के अलावा इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा शहर के कुओं को फिर से जीवित करना है। बैंकों को जो 25 से 30 कुओं को संवारने का काम आवंटित किया गया है, उनमें सबसे अधिक संख्या इंदौर के घने बसे मध्य क्षेत्र के कुओं की है। निगम के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान केवल उन्हीं कुओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जहां पर जीर्णोद्धार और गहरीकरण के बाद भविष्य में पर्याप्त पानी मिलने की पूरी संभावना मौजूद है। इन कुओं के सक्रिय होने से आसपास के रहवासियों को दैनिक उपयोग के लिए आसानी से पानी मिल सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और गर्मियों के दिनों में टैंकरों पर निर्भरता भी काफी कम हो जाएगी। आने वाले कुछ ही दिनों में संबंधित बैंकें निविदाएं आमंत्रित कर या अपने स्तर पर एजेंसियों के माध्यम से इन जमीनी कार्यों की विधिवत शुरुआत कराने जा रही हैं। इस पूरे अभियान के दौरान कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नगर निगम के कुशल अधिकारी और इंजीनियर लगातार साइट्स की मॉनिटरिंग और कड़ा निरीक्षण करेंगे। निगम के अधिकारी समय-समय पर बैंकों की कार्यवाहक टीमों को कार्यों की तकनीकी बारीकियों और आवश्यक सुधारों के बारे में दिशा-निर्देश प्रदान करते रहेंगे ताकि जल संरक्षण का यह व्यापक मिशन पूरी तरह सफल हो सके। 

EC आंकड़ों ने खोली पोल, अपने वार्ड में भी शुभेंदु से पीछे रहीं ममता

 कोलकाता पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट के 73 नंबर वार्ड में हुए मतदान में बीजेपी ने अपना दबदबा साबित किया है. 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में इस वार्ड के अंतर्गत कुल 14,179 वोट डाले गए थे. आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी को 8,932 वोट मिले, जिनका प्रतिशत 62.99 रहा. दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस को सिर्फ 4,284 वोट यानी 30.21 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. भवानीपुर के इसी वार्ड में ममता बनर्जी का कालीघाट स्थित आवास भी आता है, जिसके कारण यह परिणाम राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला साबित हुआ है।  चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वार्ड 73 के कुल 26 बूथों (पार्ट संख्या 200 से 225) पर मतदान हुआ था. हर बूथ पर बीजेपी की पकड़ मजबूत नजर आई।  अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस और सीपीआई (एम) को बहुत कम वोट हासिल हुए. जहां कांग्रेस को सिर्फ 0.99 फीसदी वोट मिले, वहीं सीपीआई (एम) 4.02 प्रतिशत पर सिमट गई. इस वार्ड में बीजेपी की 32.78 फीसदी की भारी लीड ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार भवानीपुर के स्थानीय निवासियों का रुझान पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में रहा।  15 हजार वोटों से हारीं थीं ममता  बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता के भवानीपुर से ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था. शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15,000 वोटों के अंतर से हराया. कुल 293 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की।  'दिल्ली की सत्ता से बीजेपी को हटाया जाएगा…' हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी को जल्द ही दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा. वहीं, उनके भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह किसी भी तरह की धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।  अपने आवास पर TMC विधायकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बनी बीजेपी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों और सड़क किनारे ठेले लगाने वालों (हॉकर्स) को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है. हॉकर्स के ठेलों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है।  ममता ने सूबे के तमाम हिस्सों में हाल के दिनों में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा की घटनाओं और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा।  सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया, "यह सरकार हमारे संवैधानिक आदर्शों और मूल्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है. आने वाले दिनों में बीजेपी को दिल्ली की सत्ता से हटा दिया जाएगा।  शुभेंदु के रडार पर ममता की पार्टी के कई नेता; देखें लिस्ट  पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कस गया है। राज्यभर में जारी एक अभियान के तहत टीएमसी के कई हाई-प्रोफाइल मंत्रियों, विधायकों, उनके रिश्तेदारों और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इन नेताओं पर वित्तीय हेराफेरी, जबरन वसूली, रंगदारी, अवैध हथियार रखने, चुनाव बाद हुई हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई में सबसे बड़ा नाम पूर्व राज्य मंत्री और टीएमसी नेता सुजीत बोस का है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया है। वहीं, संदेशखाली के निलंबित और विवादित टीएमसी नेता शेख शाहजहां को भी कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। शाहजहां पर बड़े पैमाने पर जमीन हड़पने, महिलाओं के खिलाफ हिंसक अत्याचार करने और ईडी अधिकारियों पर हमला करने का मुख्य आरोप है। वर्तमान में वह पुलिस की गिरफ्त में है और उसके खिलाफ व्यापक स्तर पर मुकदमा चलाया जा रहा है। ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां यह कार्रवाई केवल शीर्ष नेताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जिला और पंचायत स्तर पर भी भारी धरपकड़ जारी है। टीएमसी के एक विधायक के बेटे के पास विदेशी हथियार मिले हैं। दक्षिण 24 परगना जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बिश्नुपुर से टीएमसी विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक विदेशी पिस्तौल और अवैध कारतूस बरामद किए गए हैं। वहीं, मालदा के रतुआ ब्लॉक में टीएमसी द्वारा संचालित बिलाइमारी पंचायत की प्रधान स्मृतिकणा मंडल और उनके पति अनिल मंडल को एक स्थानीय सहकारी बैंक से लगभग 13 करोड़ की धोखाधड़ी और गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हिंसा और रंगदारी के मामले कूचबिहार ब्लॉक नंबर 1 समिति के टीएमसी अध्यक्ष अब्दुल कादर हक को राजनीतिक विरोधियों पर हमले, तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, फाल्टा पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान, सरजीत विश्वास और राजदीप दे को भी रंगदारी और जानलेवा हमले के आरोपों में हिरासत में लिया गया है। लिस्ट में किनके नाम? इस सबके बीच कई प्रमुख टीएमसी नेता गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहे हैं। बिश्नुपुर के टीएमसी विधायक दिलीप मंडल अपने बेटे के हथियार मामले और एक अन्य आपराधिक जांच में नाम आने के बाद से लापता हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। दिनहाटा के पूर्व टीएमसी विधायक उदयन गुहा भी हालिया चुनाव के बाद से ही इलाके से गायब हैं और पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए ढूंढ रही है। इस बड़े एक्शन के बाद बंगाल के कई हिस्सों में सालों से दबा जनता का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। कई पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं और जमीनी हालात इतने बदल चुके हैं कि गुस्से को देखते हुए कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को लोगों से वसूली गई रंगदारी की रकम वापस लौटानी पड़ रही है।