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मैपकॉस्ट में हुई दो दिवसीय

भोपाल  मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकॉस्ट) भोपाल के अंतर्गत संचालित “सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग” में दो दिवसीय “एयरोमॉडेलिंग : डिजाइन, बिल्ड एंड फ्लाई” कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों से आए लगभग 32 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विमान मॉडल के डिजाइन, निर्माण और उड़ान से जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यवहारिक एवं गतिविधि आधारित तरीके से समझा। विद्यार्थियों ने विभिन्न एयरोमॉडल तैयार किए और उनके उड़ान परीक्षण भी किए। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि और अधिक विकसित हुई। मैपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें जिज्ञासु बनने, प्रश्न पूछने की आदत विकसित करने और रचनात्मक चिंतन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने ज्ञान एवं अनुभवों के माध्यम से एक-दूसरे की सहायता करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और टीमवर्क की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक एवं उसके विभिन्न भागों की कार्यप्रणाली की जानकारी भी दी गई। साथ ही उन्हें आधुनिक एयरोस्पेस तकनीकों से परिचित कराया गया। प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को एयरोडायनामिक्स, संतुलन, नियंत्रण एवं उड़ान के मूलभूत सिद्धांत सरल और रोचक गतिविधियों के माध्यम से समझाए। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता एवं वैज्ञानिक सोच का विकास करना था। समापन अवसर पर प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मैपकॉस्ट के कार्यकारी संचालक डॉ. विवेक कटारे और संयुक्त परियोजना संचालक डॉ. मनोज राठौर उपस्थित रहे।  

भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रो क्षेत्र को नई सड़कों की सौगात, CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान

भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र नई सड़कों से होगा समृद्ध : मुख्यमंत्री डॉ.यादव सिंहस्थ के पहले सड़कों के निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश रिंग रोड्स निर्माण के कार्य समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में तेजी से निर्मित हो रही सड़कें नागरिकों को विकास का पूरा लाभ दिलवाने में सहयोगी हैं। इनसे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों भोपाल और इंदौर-उज्जैन की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। भविष्य में जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी अधोसंरचना विकास के प्रयासों से लाभान्वित होंगे। इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई वे फोर लेन, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे फोर लेन बन जाने से यह सम्पूर्ण क्षेत्र विकास के नए आयामों को स्पर्श करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुरुवार को मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिंहस्थ : 2028 के कुछ माह पूर्व ही सड़कों के निर्माण कार्य पूरे किए जाएं। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अमूल्य जिंदगियां बचाने के प्रयास सराहनीय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के निर्माण, नवाचारों के उपयोग और विभिन्न विधियों से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयासों में मिली सफलता सराहनीय है। लोक निर्माण विभाग अन्य विभागों के सहयोग से किसान कल्याण वर्ष में गांव से शहरों तक सब्जियां और फल लेकर आने वाले कृषकों को हेलमेट वितरण के कार्य में भी शामिल हो जिससे सड़कों पर दो पहिया वाहनों की दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। प्रदेश में मूल्यवान जिंदगियां बचाने के लिए लोक निर्माण और अन्य विभाग मिलकर कार्य करें। दुर्घटना की आशंका वाले मार्गों को चिन्हित कर निकट ही प्राथमिक उपचार केंद्र भी संचालित किए जाएं। यह कार्य विभागीय समन्वय से किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्तमान में 481 ब्लैक स्पॉटस चिन्हित हैं। दुर्घटनाओं में कमी लाने की दृष्टि से लोक निर्माण विभाग ने निरंतर कार्य किया है। ब्लैक स्पॉटस का समाधान करते हुए रोड सेफ्टी के अंतर्गत स्कूल जोन में वाहनों की गति सीमित करने, विशेष चेतावनी संकेत लगाने, वाहनों की आवाजाही को स्पष्ट दिशा संकेतक देने, लेन अनुशासन मार्किंग, रोड मार्किंग जैसे उपाय किए गए। निर्माण कार्यों की मंजूरी में भी नवाचार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया में किए गए नवाचार की जानकारी प्राप्त की। कार्य स्वीकृति से पूर्व संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा तकनीकी उपयुक्तता और आवश्यकता का प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इसी तरह परियोजना की वास्तविक आवश्यकता, यातायात घनत्व, भविष्य की मांग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के स्थल विश्लेषण, पीएम गति शक्ति पोर्टल से मार्ग अलाइनमेंट, मल्टी- मॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर समन्वय और इंटर कनेक्टिविटी का परीक्षण, जीआईएस आधारित प्लानिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाने और नए मार्गों के लिए नेटवर्क प्लानिंग और अलाइमेंट परीक्षण के कार्य मुख्य अभियंता स्तर से अनिवार्य किए जाने से अच्छे परिणाम मिले हैं। पुल- पुलियों के सुधार, बसाहट की जगहों पर वीसी मार्ग के निर्माण और कार्यपालन यंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण को भी अनिवार्य किया गया है। रिंग रोड्स के निर्माण के कार्यों में तेजी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के बड़े नगरों में निर्मित किए जा रहे रिंग रोड्स के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि भोपाल पश्चिमी बायपास जिसकी लंबाई 35.6 किमी है आगामी ढाई वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन का रिंग रोड आगामी डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगा। प्रदेश के अन्य मध्यम छोटे शहरों जैसे रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जहां यातायात का दबाव बढ़ रहा है, वहां नये रिंग रोड के निर्माण की पहल की गई है। नगर निगम और अन्य एजेंसियों से समन्वय कर विद्यमान बायपास को रिंग रोड में परिवर्तित करने की योजना पर कार्य हो रहा है।  रेल्वे ओवर ब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। भारत सरकार की पहल के अंतर्गत असुरक्षित रेल्वे क्रांसिंग को समाप्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग रेल्वे ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण कर रहा है। इससे यातायात जाम और दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ समय की बचत करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश में पीडब्ल्यूडी सड़कों पर 105 आरओबी बनाए गए हैं। सड़क विकास निगम के अंतर्गत 16 और एनएचएआई के अंतर्गत 25 आरओबी एवं आरयूबी मंजूर किए गए हैं। प्रदेश में एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से शहरी कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। जबलपुर में यह कार्य पूरा हो चुका है। ग्वालियर और भोपाल में तीन चौथाई कार्य पूर्ण हो चुका है। इंदौर और उज्जैन में कॉरिडोर के कार्य प्रारंभ हुए हैं। प्रगति पथ प्रदेश की तीव्र प्रगति में होंगे सहायक प्रदेश में छह प्रगति पथ निर्माणाधीन हैं। इनमें नर्मदा प्रगति पथ और मालवा-निमाड़ विकास पथ के कार्य क्रमश: 68 और 92 प्रतिशत पूर्ण हो चुके हैं। मध्यभारत विकास पथ का कार्य 61 प्रतिशत, बुंदेलखण्ड विकास पथ का कार्य 33 प्रतिशत पूर्ण हुआ है। विंध्य एक्सप्रेस-वे का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। अटल प्रगति पथ के निर्माण के लिए आवश्यक प्रकिया प्रचलन में है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभाग द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि  केपेसिटी बिल्डिंग सहित विभिन्न एप का प्रयोग और नए मार्गों के लिए कृषक पथ, आस्था पथ, विकास पथ जैसे अभिनव नामकरण किए जा रहे हैं। प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखवीर सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कार्यों की प्रगति से अवगत करवाया। विशेष रूप से इंदौर- उज्जैन स्टेट हाईवे 59 के 6लेन बनने और उज्जैन- जावरा हाईवे 4 लेन और इंदौर-उज्जैन हाइवे फोरलेन, वेस्टर्न भोपाल बायपास, स्टेट हाइवे 67 के नर्मदापुरम- टिमरनी खंड और सिवनी मालवा बायपास टू लेन, सागर- दमोह फोर लेन और बड़वाह- धामनोद फोर लेन सड़क परियोजनाओं की जानकारी दी गई। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव सहित अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।  

भोजशाला में अखंड पूजा और महाआरती, 721 साल बाद दिखा ऐतिहासिक नजारा

धार  भोजशाला को लेकर आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजन का आयोजन किया जाएगा। 721 सालों के लंबे संघर्ष के बाद यह पहला अवसर होगा, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर मां वाग्देवी के जयकारों से गूंज उठेगा। पूरे धार अंचल में इसे लेकर उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। हिंदू पक्ष को हाई कोर्ट से 721 सालों के बाद निर्बाध पूजा-अर्चना का अधिकार मिलने पर यह पहला शुक्रवार बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है। शहर में लोग एक-दूसरे को महाआरती में शामिल होने के निमंत्रण दे रहे हैं और धार्मिक उत्साह चरम पर है। सुबह महाआरती, दोपहर में निकलेगा श्रद्धालुओं का जत्था निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हिंदू पक्ष सुबह 9 बजे भोजशाला में महाआरती करेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु ज्योति मंदिर से भोजशाला दर्शन के लिए रवाना होंगे भोजशाला मुक्ति यज्ञ आंदोलन के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह पहला मौका है, जब शुक्रवार को महाआरती आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि परिसर में मां वाग्देवी का प्रतीकात्मक स्वरूप और अखंड ज्योति विराजित है तथा नियमित पूजा-अर्चना पूर्व की तरह जारी रहेगी। सुबह होगी महाआरती निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, हिंदू पक्ष सुबह नौ बजे भोजशाला में महाआरती करेगा, जबकि दोपहर 12 बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु ज्योति मंदिर से भोजशाला दर्शन के लिए रवाना होंगे। बता दें कि 721 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद यह पहला अवसर होगा, जब शुक्रवार को भोजशाला परिसर मां वाग्देवी के जयकारों से गूंजेगा। अब तक प्रत्येक शुक्रवार को यहां मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति थी। मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट इधर, हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में शुक्रवार दोपहर से पहले सुनवाई होने की संभावना है। प्रशासन अलर्ट, 1500 से ज्यादा जवान तैनात वहीं, धार में जिला व पुलिस प्रशासन ने शहर में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था कर ली है। आसपास के शहरों से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया है। धार के एसपी सचिन शर्मा का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करवाया जाएगा। शहर में 1500 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। कमाल मौलाना का उर्स, लंगर की भी रहेगी व्यवस्था भोजशाला परिसर से सटे कमाल मौलाना दरगाह क्षेत्र में शुक्रवार को उर्स का आयोजन होगा। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों के अनुसार, उर्स को लेकर प्रशासन को पूर्व में सूचना दे दी गई है। सोसायटी की ओर से दरगाह परिसर में जियारत के साथ लंगर की व्यवस्था भी की जाएगी। मस्जिद पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट इधर, हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में शुक्रवार दोपहर से पहले सुनवाई की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा और शुक्रवार को समाजजन अपने-अपने मोहल्लों की मस्जिदों तथा घरों में नमाज अदा करेंगे। विरोध स्वरूप कुछ स्थानों पर दुकानें बंद रखने और काली पट्टी बांधने की बात भी कही गई है। उर्स और लंगर की भी तैयारी भोजशाला परिसर से सटे कमाल मौलाना दरगाह क्षेत्र में शुक्रवार को उर्स का आयोजन भी होगा। सोसायटी पदाधिकारियों के अनुसार दरगाह परिसर में जियारत और लंगर की व्यवस्था की गई है। प्रशासन को पहले ही इसकी सूचना दे दी गई थी। धार बना छावनी, 1500 जवान तैनात स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए धार पुलिस और जिला प्रशासन ने शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। सचिन शर्मा ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1500 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। महासत्याग्रह के बाद मना महाविजय महोत्सव हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला समर्थकों ने परिसर के बाहर महासत्याग्रह और “महाविजय महोत्सव” भी मनाया। देर रात तक आतिशबाजी और धार्मिक आयोजन चलते रहे।

‘गाय-बकरे-ऊंट और दुम्बा की कुर्बानी होगी’, हुमायूं कबीर के बयान से बढ़ा विवाद

मुर्शिदाबाद  बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के बयान ने राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. हुमायूं कबीर ने गाय की कुर्बानी को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि कुर्बानी की परंपरा 1400 साल पुरानी है और इसे कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया रहेगी, तब तक कुर्बानी भी होती रहेगी।  बातचीत में हुमायूं कबीर ने बंगाल सरकार और सत्ता पक्ष पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार कभी कुछ बोलती है और अगले दिन कुछ और कहती है. उनके मुताबिक, सरकार मुसलमानों को गाय खाने से रोकने की बात कर सकती है, क्योंकि सरकार के पास सत्ता है, लेकिन कुर्बानी तो होगा ही।  पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार की ओर से जनता के लिए जारी नोटिस पर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने कहा- ‘सरकार मुसलमानों से बीफ न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक कुर्बानी (क़ुर्बानी) जारी रहेगी. हम किसी भी आपत्ति को नहीं मानेंगे. यह एक ऐसी परंपरा है जो 1400 सालों से चली आ रही है और जब तक यह दुनिया रहेगी, तब तक जारी रहेगी.’ ‘सुवेंदु अधिकारी सरकार चलाएं, धार्मिक परंपराओं में दखल ना दें।  AJUP चीफ ने कहा कि अगर कोई कुर्बानी रोकने की कोशिश भी करेगा तो लोग उसकी बात नहीं सुनेंगे. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनी है, लोगों ने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है, इसलिए सरकार चलाना उनका अधिकार है. लेकिन धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं दिया जा सकता।  ‘इस्लाम में गाय, बकरी, ऊंट की कुर्बानी जायज’ हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि गाय, बकरी, ऊंट और दुम्बा समेत सभी जानवर, जिनकी कुर्बानी इस्लाम में जायज मानी गई है, उनकी कुर्बानी होती रहेगी. उन्होंने दावा किया कि इसे रोकने की ताकत किसी के पास नहीं है।  हुमायूं कबीर का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है. दिसंबर 2025 में उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने का ऐलान किया था. उस समय उनकी ही पार्टी TMC ने इस बयान पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।  इसके बाद हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई. नई पार्टी बनाने के बाद उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया और दो सीटों पर जीत दर्ज की. हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नवदा सीट से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की. अब बकरीद से पहले दिया गया उनका नया बयान बंगाल की राजनीति में एक और बड़े विवाद की वजह बन सकता है।  फुरफुरा शरीफ के वरिष्ठ पीरजादा बोले- गोहत्या रोकने के लिए कानून बने वहीं पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस पर फुरफुरा शरीफ के वरिष्ठ पीरजादा तोहा सिद्दीकी का कुछ और ही कहना है. उन्होंने कहा- ‘सभी को गोहत्या के खिलाफ बने कानून का पालन करना चाहिए. कुर्बानी के दौरान गायों का वध नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, कानून हर जगह एक जैसा होना चाहिए. जहां एक ओर कुर्बानी के दौरान गोहत्या प्रतिबंधित है, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों में गायों का वध किया जा रहा है और उनके मांस का बड़ी मात्रा में विदेशों में निर्यात किया जा रहा है. बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में भी गोहत्या हो रही है. इसे भी रोका जाना चाहिए. क्योंकि देश में कानून एक ही है; यह बंगाल या पूरे भारत में अलग नहीं है. हमने बीफ़ खाना छोड़ दिया है. अगर हम बीफ़ नहीं खाएंगे तो क्या हम मर जाएंगे?’ हम केवल 1950 का कानून लागू कर रहे हैं: मंत्री अग्निमित्रा पॉल हुमायूं कबीर के बयान पर पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा- ‘हमारे राज्य में 1950 से नियम है. हम यह नहीं कह रहे हैं कि बीफ बिजनेस को बंद करना है. 1950 के नियम में सख्ती से लिखा है कि 14 साल से कम उम्र के मवेशी को काटा नहीं जा सकता है. जो मवेशी बिल्कुल ही अस्वस्थ है या अपाहिज है या ज्यादा उम्र का है उसको काटने के लिए संबंधित अधिकारी से सर्टिफिकेट लेना होगा. ये अलग बात है कि 1950 के कानून को यहां सख्ती से लागू नहीं किया गया था, क्योंकि पिछली सरकार वोटबैंक के चक्कर में ढिलाई बरते हुए थे. इस सरकार में ऐसा नहीं चलेगा, क्योंकि हम गाय को माता मानते हैं। 

एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये किए गए सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश ने शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2014 के 52 प्रति 1000 जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 35 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। पिछले एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को सशक्त बनाया है। यह उपलब्धि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, प्रभावी रणनीतियों एवं लक्षित हस्तक्षेपों की सफलता को प्रतिबिंबित करती है। प्रदेश में नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये 62 विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) तथा मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) का विस्तार किया गया है, जहाँ "ज़ीरो सेपरेशन" मॉडल के माध्यम से माँ एवं नवजात की संयुक्त देखभाल, शीघ्र स्तनपान एवं कंगारू मदर केयर (केएमसी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। डिजिटल नवाचारों के अंतर्गत ई-शिशु (ई-शिशु) पहल के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों की नवजात इकाइयों को विशेषज्ञ टेली-मेंटोरिंग से जोड़ा गया है। इस पहल को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, दिल्ली एवं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, रायपुर का तकनीकी एवं क्लिनिकल मेंटरिंग सहयोग प्राप्त हो रहा है। साथ ही अनमोल 2.0, एमपीसीडीएसआर, डीएसएस एवं एफबीएनसी सॉफ़्टवेयर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्च जोखिम मामलों की पहचान, नवजात निगरानी एवं डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया गया है।  

26 मई को मतदान, मोहाली निगम चुनाव को लेकर तैयारियां तेज

मोहाली  नगर निगम मोहाली के 50 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर पूरा शहर चुनावी रंग में रंग गया है। इस बार कुल 1,75,323 मतदाता 26 मई को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 90,484 पुरुष मतदाता, 84,831 महिला मतदाता तथा 8 अन्य मतदाता शामिल हैं। चुनावी माहौल जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे वैसे और अधिक गरमाता जा रहा है। इस बार चुनाव के लिए प्रशासन ने पूरे शहर में 184 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं, जहां मतदाता अपने अपने वार्डों के प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी बूथों पर आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मतदान दिवस पर सभी वार्डों में स्थानीय प्रतिनिधियों के भाग्य का फैसला जनता के हाथों में होगा। 50 में 25 वार्ड महिलाओं के आरक्षित नगर निगम के 50 वार्डों में इस बार 25 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं, जिससे स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा। आरक्षण व्यवस्था के चलते कई वार्डों में नए चेहरों को राजनीति में अवसर मिला है और विभिन्न दलों ने महिला उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने पर विशेष फोकस किया है। 227 उम्मीदवारों में से 45 निर्दलीय भी मैदान में चुनाव मैदान में इस बार कुल 227 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें 45 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने कई वार्डों में मुकाबले को बेहद रोचक और त्रिकोणीय बना दिया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कई स्थानों पर सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। वार्ड 42 में इस बार हाई-प्रोफाइल मुकाबला इस पूरे चुनाव में सबसे अधिक चर्चा वार्ड नंबर 42 की हो रही है, जो इस बार हाई प्रोफाइल मुकाबले के रूप में उभरकर सामने आया है। यह वार्ड इसलिए भी खास है क्योंकि यहां मतदाताओं की संख्या केवल 979 है, जो पूरे नगर निगम क्षेत्र में सबसे कम है। कम मतदाता संख्या के कारण यहां हर वोट का महत्व और भी बढ़ जाता है और चुनाव परिणाम बेहद करीबी रहने की संभावना जताई जा रही है। वार्ड 42 में इस बार राजनीतिक समीकरण भी खासे दिलचस्प हैं, क्योंकि यहां से आम आदमी पार्टी के सबसे अमीर विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह चुनाव मैदान में हैं, जिससे यह मुकाबला राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील और चर्चित हो गया है। इस वार्ड में भाजपा के मनजींदर सिंह, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अमित कुमार और कांग्रेस के जगदीप सिंह शेरगिल भी चुनावी मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला बहुकोणीय बन गया है और हर दल अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। पूरे मोहाली शहर में चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और हर वार्ड में उम्मीदवार डोर टू डोर प्रचार में जुटे हैं। विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, सड़कें, पानी और बुनियादी सुविधाएं इस चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार जनसभाएं और जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।  

गुजरात की शानदार जीत ने तोड़ा CSK का सपना, प्लेऑफ से लगभग बाहर

 अहमदाबाद  शुभमन गिल की अगुवाई वाली गुजरात टाइटंस ने गुरुवार, 21 मई की रात चेन्नई सुपर किंग्स पर 89 रनों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीटी की आईपीएल की सबसे बड़ी जीत है, वहीं सीएसके की आईपीएल इतिहास में रनों के मामले में सबसे बड़ी हार। इस जीत के बाद गुजरात टाइटंस के 14 मैचों में 18 अंक हो गए हैं और वह आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल में दूसरे पायदान पर है। हालांकि उन पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद उन्हें टॉप-2 से अभी भी बाहर कर सकती है। एसआरएच 13 मैचों में 16 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर है। आज उनका लीग स्टेज का आखिरी मुकाबला टेबल टॉपर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ है। आईए जानते हैं सनराइजर्स हैदराबाद टॉप-2 में कैसे जगह बना सकती है। IPL 2026 पॉइंट्स टेबल में आरसीबी नंबर-1 डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 18 पॉइंट्स और +1.065 के शानदार नेट रन रेट के साथ आईपीएल 2026 पॉइंट्स टेबल में पहले पायदान पर है। आरसीबी की सीट टॉप-2 में कन्फर्म है। टॉप-2 में जगह पक्की करने वाली दूसरी टीम कौन सी होगी उसका फैसला आज SRH vs RCB मैच के बाद हो जाएगा। गुजरात टाइटंस ने अपनी पूरी कोशिश कर ली है। 14 मैचों में 9 जीत और 18 अंकों के साथ फिलहाल जीटी दूसरे पायदान पर है। उनका नेट रन रेट +0.695 का है। जबकि सनराइजर्स हैदराबाद 16 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर बनी हुई है। उन्हें भी प्लेऑफ का टिकट मिल गया है, मगर आज उनकी नजरें आरसीबी को हराकर टॉप-2 में जगह बनाने पर होगी। टॉप-2 में जगह बनाने का फायदा यह है कि फाइनल में पहुंचने के लिए टीम को दो चांस मिलेंगे। अगर क्वालीफायर-1 में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ता है तो उन्हें फाइनल में पहुंचने के लिए क्वालीफायर-2 खेलने का मौका मिलेगा। तीसरे और चौथे पायदान पर रहने वाली टीमों का प्लेऑफ में एक मैच हारते ही ट्रॉफी जीतने का सपना टूट जाएगा। गुजरात के बल्लेबाजों ने मचाया धमाल टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस की शुरुआत बेहद शानदार रही। कप्तान शुभमन गिल और साईं सुदर्शन ने पहले विकेट के लिए तेज साझेदारी करते हुए चेन्नई के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। शुभमन गिल ने 37 गेंदों में 64 रन की कप्तानी पारी खेली, जिसमें कई आकर्षक चौके और छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर साईं सुदर्शन ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 84 रन बनाए। जब गिल आउट हुए तब भी गुजरात की रनगति पर कोई असर नहीं पड़ा। जोस बटलर ने आखिर में तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में नाबाद 57 रन ठोक दिए। उनकी पारी की बदौलत गुजरात टाइटंस ने 20 ओवर में 229 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। बड़े लक्ष्य के दबाव में बिखरी चेन्नई 230 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहली ही गेंद पर विकेट गंवा दिया, जिससे दबाव और बढ़ गया। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने टीम को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन उनका साथ दूसरे बल्लेबाज ज्यादा देर तक नहीं दे सके। मैथ्यू शॉर्ट ने कुछ अच्छे शॉट लगाए, मगर बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। चेन्नई की बल्लेबाजी लगातार अंतराल पर विकेट गिरने की वजह से संभल नहीं पाई। एक समय टीम ने सिर्फ 63 रन तक अपने पांच विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद शिवम दुबे ने तेज बल्लेबाजी कर मैच में थोड़ी उम्मीद जगाई। दुबे ने सिर्फ 17 गेंदों में 47 रन की विस्फोटक पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला। पूरी टीम 13.4 ओवर में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। गुजरात के गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने भी मैच में शानदार काम किया। मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और राशिद खान ने तीन-तीन विकेट लेकर चेन्नई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। तेज गेंदबाजों ने शुरुआती झटके दिए, जबकि स्पिन विभाग में राशिद खान ने बीच के ओवरों में रन रोकने के साथ विकेट भी निकाले। चेन्नई के बल्लेबाज किसी भी समय मैच में वापसी करते नजर नहीं आए। प्लेऑफ की तस्वीर हुई साफ इस जीत के साथ गुजरात टाइटंस ने अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम अब 18 अंकों के साथ शीर्ष टीमों में बनी हुई है। वहीं चेन्नई सुपर किंग्स की बात करें तो टीम इस सीजन उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत के साथ चेन्नई की टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई। इससे पहले मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स भी बाहर हो चुकी हैं।   गुजरात टाइटंस या सनराइजर्स हैदराबाद टॉप-2 में कौन बनाएगा जगह? ईएसपीएनक्रिकइन्फो के अनुसार अगर सनराइजर्स हैदराबाद आज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में पहले बैटिंग करते हुए 220 रन बोर्ड पर लगाती है तो उन्हें 88 रनों से जीत दर्ज करनी होगी। वहीं अगर वह 200 रन डिफेंड कर रहे हैं तो उन्हें 87 रनों से जीतना होगा। अगर सनराइजर्स हैदराबाद को आरसीबी 150 रन का टारगेट देती है तो एसआरएच को यह टारगेट लगभग 11.1 से 11.3 ओवर में चेज करना होगा। सीधा-सीधा मतलब यह है कि सनराइजर्स हैदराबाद को जीटी की तरह आरसीबी पर बड़ी जीत दर्ज करनी होगी। तभी वह नेट रन रेट के मामले में गुजरात टाइटंस को पछाड़ पाएगी। जीटी का नेट रन रेट +0.695 का है, जबकि एसआरएच का +0.350 का। अगर आज सनराइजर्स हैदराबाद हार जाती है तो गुजरात टाइटंस की जगह टॉप-2 में पक्की हो जाएगी। वहीं अगर उन्हें जीत मिलती है तो मामला नेट रन रेट पर फंसेगा।

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी

सीएम योगी ने रामगढ़ताल में की क्रूज की सवारी लहरों पर विहार करने के साथ मुख्यमंत्री ने ताल की साफ-सफाई का लिया जायजा गोरखपुर जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के समापन पर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार शाम जनप्रतिनिधियों के साथ नैसर्गिक रामगढ़ताल में लेक क्वीन क्रूज की सवारी की। करीब 25 मिनट तक क्रूज पर सवार होकर मुख्यमंत्री निखरे ताल की लहरों के स्पंदन की आनंदानुभूति करने के साथ गोरखपुर की नई विकसित पहचान को ताल के किनारे उमड़ी भीड़ से महसूस करते रहे। ताल की लहरों पर विहार करने के दौरान सीएम ने इस विशाल प्राकृतिक झील की साफ-सफाई का भी जायजा लिया।  रामगढ़ताल के कायाकल्प का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। उनके विजन से निखरा-संवरा रामगढ़ताल न केवल नए गोरखपुर की नई पहचान बन चुका है बल्कि इसकी गिनती अब इस अंचल के खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में भी होती है। पर्यटन विकास के साथ यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। इस ताल में बड़े महानगरों की तर्ज पर क्रूज और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट का भी संचालन हो रहा है। साथ ही ताल में वाटर स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं ने इसे नेशनल फेम दिला दिया है।  जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में पुरस्कार वितरण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेक क्वीन क्रूज पर पहुंचे। यहां उन्होंने क्रूज की सवारी के बीच ताल की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया। उनके साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

मध्य पूर्व तनाव से UAE को बड़ा झटका, पैसा छापने वाला कारोबार दूसरे देशों में शिफ्ट

दुबई ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाजार या मिडिल ईस्ट की राजनीति को ही नहीं हिलाया, बल्कि दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब की बुनियाद तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जिस UAE को पिछले कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेंटर माना जाने लगा था, वहां अब शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई विदेशी प्रोफेशनल्स दूसरे देशों में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।  मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में काम कर रहे कई वेस्टर्न एक्सपैट्स अब ग्रीस की राजधानी एथेंस और साइप्रस जैसे देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इसकी वजह यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरा, जहाजों की आवाजाही में रुकावट और युद्ध के लंबे खिंचने का डर बना हुआ है।  दरअसल, फरवरी में ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग जाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी तरह से समुद्री नियंत्रण लागू कर रहे हैं, जिसकी वजह से करीब 2000 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंस गए. हालांकि इससे ग्लोबल शिपिंग रेट्स में भारी उछाल आया है और कई टैंकर कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन UAE की अर्थव्यवस्था पर इसका उल्टा असर पड़ रहा है।  जेबेल अली पोर्ट पर कारोबार की रफ्तार धीमी दुबई का जेबेल अली पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब्स में गिना जाता है, जहां एक जहाज से सामान दूसरे जहाज में ट्रांसफर होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाता है. लेकिन युद्ध और ब्लॉकेड के कारण यहां कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूरे खाड़ी में ये पोर्ट 60% से भी ज्यादा के कार्गो को मैनेज करता है।  UAE का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट यानी तेल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शिप ओनर ने कहा कि समस्या सिर्फ बिजनेस की नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है. उनका कहना था, "अगर युद्ध बढ़ता है तो क्या दुबई से परिवार को सुरक्षित तरीके से लंदन या पेरिस भेज पाना आसान होगा? यही चिंता लोगों को परेशान कर रही है।  दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी जंग की मार युद्ध का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले महीनों में दुबई की हजारों प्रॉपर्टी एजेंसियां बंद हो सकती हैं. कई छोटी कंपनियां, जो तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट और सट्टेबाजी वाले निवेश पर निर्भर थीं, अब टिक नहीं पा रही हैं।  कोविड के बाद दुबई ने दुनिया भर के निवेशकों, क्रिप्टो कारोबारियों और अमीर प्रोफेशनल्स को आकर्षित किया था. टैक्स में छूट, आसान नियम और तेज ग्रोथ ने इसे ग्लोबल फाइनेंस हब बना दिया था. लेकिन अब ईरान जंग ने पहली बार इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है।  हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE के पास अभी भी मजबूत आर्थिक संसाधन हैं और दुबई पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, लेकिन यह साफ हो गया है कि होर्मुज संकट और क्षेत्रीय युद्ध ने खाड़ी की सबसे चमकदार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 

जैव विविधता, जल संरक्षण और जनभागीदारी का अनूठा संगम

रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल कोपरा जलाशय आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय वास्तविक रूप में साकार कर रहा है।         सुबह के शांत वातावरण में प्रवासी पक्षियों की मधुर आवाजें और जलाशय के आसपास आजीविका से जुड़े ग्रामीणों की गतिविधियां प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कोपरा जलाशय वर्षों से क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण कार्यों को मिली नई गति मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीव सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कई अभियान प्रदेश में संचालित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव कोपरा जलाशय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। स्थानीय समुदाय निभा रहे अहम भूमिका वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय यह संदेश देता है कि जब शासन और समाज मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तब पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होता है। प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय कोपरा जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हर वर्ष विभिन्न देशों और राज्यों से आने वाले पक्षी यहां भोजन और विश्राम प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही यह जलाशय जलीय जीवों, मछलियों, वनस्पतियों और अनेक सूक्ष्म जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। इसी विशेषता के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है। स्वच्छता, वृक्षारोपण और बायो-फेंसिंग पर विशेष जोर स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षी संरक्षण और बायो-फेंसिंग जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्रभूमियां प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। वे बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कोपरा जलाशय का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। सतत विकास का बन रहा राष्ट्रीय मॉडल कोपरा जलाशय आज यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला रामसर स्थल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सहभागिता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।           मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और इसके वैश्विक महत्व पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य के नागरिकों और संरक्षण टीम की सराहना करते हुए अपना संदेश दिया है।             मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।