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RBI देगा सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड; रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये के ट्रांसफर को बोर्ड की मंजूरी

नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा । दरअसल, RBI की ओर से इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक डिविडेंड दिए जाने की दी मंजूरी । ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस हफ्ते रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये रुपये का सरप्लस ट्रांसफरमिलेगा । RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दी । बता दें कि RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। बहुत से लोगों को लगता है कि आरबीआई किसी निजी कंपनी की तरह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. आरबीआई पूरी तरह देश का केंद्रीय बैंक है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 47 के तहत यह तय है कि अपने खर्च और जरूरी रिजर्व फंड अलग रखने के बाद जो अतिरिक्त पैसा बचेगा, उसे केंद्र सरकार को ट्रांसफर किया जाएगा. इसी अतिरिक्त रकम को सरप्लस ट्रांसफर या डिविडेंड कहा जाता है. सरकार के लिए यह गैर कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. इस पैसे का इस्तेमाल वित्तीय घाटा कम करने, सड़क, रेलवे और हाईवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के लिए किया जाता है।  RBI आखिर कमाई कैसे करता है आरबीआई आम बैंकों की तरह लोगों को लोन नहीं देता, लेकिन उसके पास कमाई के कई बड़े स्रोत होते हैं।      सबसे बड़ा जरिया विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व है. आरबीआई अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगहों पर निवेश करता है, जिससे उसे ब्याज के रूप में भारी कमाई होती है।      इसके अलावा डॉलर और रुपये की खरीद-बिक्री से भी केंद्रीय बैंक को फायदा होता है. जब बाजार में रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब आरबीआई डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर करने की कोशिश करता है. इसी तरह के फॉरेक्स ऑपरेशंस से भी मुनाफा कमाया जाता है।      सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज और नोट छापने की लागत और उसकी वास्तविक वैल्यू के बीच का अंतर भी आरबीआई की कमाई का हिस्सा होता है।  इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड की वजह क्या है वित्त वर्ष 2026 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 10 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली. इससे आरबीआई की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ा और उसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया. इससे भी आरबीआई को अच्छा फायदा हुआ. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर करीब 688 अरब डॉलर तक पहुंच गया. निवेश से बेहतर रिटर्न और फॉरेक्स ऑपरेशंस की मजबूत कमाई ने केंद्रीय बैंक के सरप्लस को और बढ़ाने में मदद की।  सरकार के लिए क्यों अहम है यह रकम पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड तेजी से बढ़ा है और यह सरकार के लिए बेहद अहम राजस्व स्रोत बन चुका है. पिछले तीन वित्त वर्षों में यह रकम तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. अगर इस बार सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये तक का डिविडेंड मिलता है, तो इससे सरकार को उधारी कम लेने में मदद मिल सकती है. साथ ही वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च जारी रखने में भी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी आरबीआई की ओर से सरकार को ऊंचे स्तर का डिविडेंड मिलता रह सकता है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने अभी तक आधिकारिक तौर पर संभावित भुगतान पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  रिजर्व बैंक केैसे करता है कमाई? RBI अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड निवेश और करेंसी छपाई से होने वाली आय के जरिए यह सरप्लस कमाता है। बहरहाल, यह सरप्लस ऐसे समय में मिलने जा रहा है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे पर दबाव बनने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने की आशंका है। इसी दबाव के बीच RBI का यह बड़ा भुगतान सरकार के लिए राहत का काम करेगा। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? PGIM इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख पुनीत पाल के मुताबिक बॉन्ड मार्केट पहले से ही RBI से मिलने वाले लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान को अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा डिविडेंड राजकोषीय प्रबंधन में मदद कर सकता है लेकिन इसका तब तक कोई खास असर नहीं पड़ेगा जब तक कि यह काफी ज्यादा न हो।

निवेशकों को मिलेगा अटका पैसा, उपभोक्ता आयोग ने सहारा पर कसा शिकंजा

बोकारो  जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सहारा क्रेडिट को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मामले में फैसला सुनाते हुए निवेशकों को परिपक्व राशि भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण पांडेय व सदस्य बेबी कुमारी ने यह दिया है। जरीडीह बाजार निवासी राज कुमार प्रसाद एवं उनकी पुत्री रजनी कुमारी ने गोल्डन ए डबल एंड ग्लोबल योजना में राशि निवेश की थी। निवेश के एवज में में बांड और प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को भुगतान नहीं किया गया। परिवादियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कर 34 लाख 27 हजार 982 रुपये की परिपक्वता राशि, 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का अनुरोध किया। एक लाख रुपये मुआवजा एवं 10 हजार रुपये वाद खर्च की मांग की थी। विपक्षी पक्ष की ओर से कहा गया कि मामला मल्टी स्टेट को-आपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत आता है तथा भुगतान केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना है। दूसरा मामला चीरा चास निवासी मोहम्मद अलीमुद्दीन व इनके पुत्र दानिश हसन ने किया था। सहारा ई शाइन योजना के तहत पचास हजार रुपये जमा किया था। इसी परिपवक्ता राशि एक लाख 13 हजार और अलीमुद्दीन की पत्नी स्वर्गीय फहमिया बानो ने साठ हजार रुपये निवेश किया था। समय पूरा होने पर भुगतान नहीं हुआ। इसमें भी राशि को भुगतान का आदेश आयोग ने दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि निवेश, परिपक्वता अवधि तथा देय राशि संबंधी तथ्यों को विपक्षी पक्ष ने विवादित नहीं किया। भुगतान नहीं करना सेवा में कमी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता आयोग को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार है तथा भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है। आयोग ने आदेश दिया कि राज कुमार प्रसाद को 19 लाख 92 हजार रुपये तथा रजनी कुमारी को दो लाख 90 हजार 684 रुपये 31 दिसंबर 2026 तक केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से भुगतान किया जाए। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाए नजर के चश्मे

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को अपने हाथों से पहनाया नजर का चश्मा सुशासन तिहार शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल का किया निरीक्षण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं और सेवाओं की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 76 वर्षीय श्री गोवर्धन ध्रुव, 65 वर्षीय श्रीमती अनुपकुंवर पाल तथा कक्षा छठवीं के छात्र संजय चक्रधारी एवं जयसेन को अपने हाथों से नजर का चश्मा पहनाया। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब पढ़ने-लिखने और दैनिक कार्यों में काफी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।

आरक्षण व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, अफसरों के बच्चों को लाभ देने पर उठे सवाल

नई दिल्ली ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया है कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं, तो उन्हें आरक्षण का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की है. न्यायालय ने कहा कि ऐसे बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और क्रीमी लेयर के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया. अदालत ने जोर दिया कि EWS आरक्षण केवल आर्थिक आधार पर दिया जाता है, जबकि क्रीमी लेयर सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से सक्षम लोगों को पहचानता है।  ओबीसी आरक्षण और क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी सामने आई है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर किसी उम्मीदवार के दोनों माता-पिता IAS अधिकारी हैं, तो उसे आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए? कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर क्रीमी लेयर और आरक्षण की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है।  मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आरक्षण का असली मकसद समाज के उन लोगों तक फायदा पहुंचाना है, जो वास्तव में पिछड़े और वंचित हैं. उन्होंने पूछा कि जब किसी परिवार के माता-पिता देश की सबसे ऊंची प्रशासनिक सेवाओं में पहुंच चुके हैं, तब उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ देने की जरूरत क्यों होनी चाहिए? शोषित और वंचितों को मिले रिजर्वेशन सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा- जिनके माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आरक्षण का असली मकसद उन लोगों तक फायदा पहुंचाना है, जो वास्तविक रूप से शोषित और वंचित हैं। 'मां-बाप के पास अच्छी जॉब, उन्हें रिजर्वेशन से निकल जाना चाहिए' सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एजुकेशनल और इकोनॉमिक प्रोग्रेस से सोशल मोबिलिटी आती है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा-  बच्चों के माता-पिता अच्छी जॉब में है, अच्छा कमा रहे हैं, और उनके बच्चे फिर से रिजर्वेशन चाहते हैं। देखिये उन्हें रिजर्वेशन से बाहर आना चाहिए। EWS में आर्थिक पिछड़ापन सुप्रीम कोर्ट ने इकोनॉमिक वीक सेक्सशन (EWS) और सोशली बैकवार्ड कम्युनिटी के बीच रिजर्वेशन के अंतर को स्पष्ट किया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा- EWS में सामाजिक पिछड़ापन नहीं है, लेकिन आर्थिक पिछड़ापन है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। सुनवाई के दौरान वकील शशांक रत्नू ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें वेतन के कारण नहीं, बल्कि उनकी स्थिति के कारण बर्खास्त किया गया था. वे ग्रुप ए के कर्मचारी हैं और इसलिए उन्हें बर्खास्त किया गया है. ग्रुप बी के कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया जाता है. कर्मचारियों को सिर्फ वेतन के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर क्रीमी लेयर में रखा गया है।  उन्होंने कहा कि ग्रुप ए के कर्मचारियों को इसी वजह से क्रीमी लेयर के दायरे में रखा जाता है. वकील शशांक रत्‍नू ने यह भी कहा कि केवल ग्रुप ए ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में ग्रुप बी कर्मचारियों को भी क्रीमी लेयर के तहत बाहर किया जाता है. इस दौरान कोर्ट ने यह समझने की कोशिश की कि आखिर आरक्षण का लाभ किन लोगों तक सीमित होना चाहिए और किन्हें इससे बाहर रखा जाना चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा और उसके मानकों को लेकर बहस चल रही है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण का फायदा समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक पहुंचना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखते हैं। 

MP राज्यसभा चुनाव: 1 जून से नामांकन, 18 जून को वोटिंग; BJP-कांग्रेस ने बनाई रणनीति

भोपाल  मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज गया है. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव के संबंध में कार्यक्रम जारी कर दिया है. 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. 18 जून को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने राज्यसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर कांग्रेस की उस एक सीट पर टिकी है, जिसे बचाए रखना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से मना करने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।  तीन सीटों पर मुकाबला, सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस की वरिष्ठ पत्रकार अजय द्विवेदी के अनुसार "प्रदेश में खाली हो रही 3 सीटों में 2 सीटें भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन की हैं, जबकि तीसरी सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास है. भाजपा अपनी दोनों सीटों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस की एकमात्र सीट को लेकर अंदरखाने चिंता बढ़ गई है।  दिग्विजय सिंह ने बनाई दूरी, नए चेहरों की लॉबिंग शुरू पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि अब किसी नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने यह भी इच्छा जताई है कि उनकी जगह अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को अवसर दिया जाए. इसके बाद कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है. कई वरिष्ठ और युवा नेता दिल्ली तक सक्रिय हो गए हैं।  कांग्रेस को सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस अपनी एक सीट निकाल सकती है, लेकिन पार्टी को क्रॉस वोटिंग का बड़ा खतरा दिखाई दे रहा है. भाजपा यदि तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है. कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं या मतदान के दौरान रणनीतिक गच्चा हो सकता है।  2020 और 2022 का इतिहास बढ़ा रहा बेचैनी वरिष्ठ पत्रकार खिलावन चंद्राकर बताते हैं "राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार समीकरण अचानक बदले हैं. साल 2020 के राज्यसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे से पूरा गणित बदल गया था. वहीं 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को झटका दिया था. ऐसे में इस बार पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही।  चुनाव का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है     नामांकन शुरू – 01 जून 2026     नामांकन की अंतिम तारीख – 08 जून 2026     नामांकन पत्रों की जांच – 09 जून 2026     नाम वापसी की आखिरी तारीख – 11 जून 2026     मतदान – 18 जून 2026, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक     मतगणना – 18 जून 2026, शाम 5 बजे से

जैसलमेर-अहमदाबाद नई रेल सेवा का शुभारंभ, स्वर्णनगरी में बढ़ी कनेक्टिविटी

 जैसलमेर राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर को रेलवे की ओर से बड़ी दोहरी सौगात मिली है. जिसमें एक है कि स्वर्णनगरी में रेलवे स्टेशन पर करीब 67 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक 'कोच केयर कॉम्प्लेक्स' का उद्घाटन किया गया है और साथ ही जैसलमेर-अहमदाबाद नई रेल सेवा की भी शुरुआत हुई है. जैसलमेर में ही होगा ट्रेनों का रखरखाव अब तक तकनीकी रखरखाव और सफाई के लिए ट्रेनों को अन्य बड़े स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन अब जैसलमेर में ही अत्याधुनिक 'कोच केयर कॉम्प्लेक्स' के शुरू होने से ट्रेनों का रखरखाव, तकनीकी जांच और सफाई जैसलमेर में ही संभव हो सकेगी. इससे न केवल ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी. अहमदाबाद तक अब सीधी रेल सेवा इसके अलावा जैसलमेर को अहमदाबाद से जोड़ने वाली नई रेल सेवा का भी शुभारंभ किया गया है. स्थानीय विधायक छोटूसिंह भाटी ने हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन को रवाना किया. कार्यक्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने वर्चुअली हिस्सा लिया. इस नई रेल सेवा से सीमावर्ती जिले के लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी. अब गुजरात आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा. इस सौगात से जैसलमेर के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है. विधायक छोटूसिंह भाटी ने कहा कि यह सुविधा हर तबके के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे.

देवरिया-कसया फोरलेन से बदलेगी तस्वीर, कुशीनगर तक यात्रा होगी आसान

रामपुर कारखाना मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने शुक्रवार को 292 करोड़ 6 लाख 66 हजार की लागत से देवरिया-कसया मार्ग फोरलेन निर्माण लिए भव्य समारोह के बीच आधारशिला रखी। इसको लेकर लोगों में काफी उत्साह रहा। ग्रामीणों का कहना है कि देवरिया-कसया मार्ग फोरलेन बनने से नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। अंतर्राष्ट्रीय स्थल कुशीनगर को जोड़ने वाला देवरिया कसया मार्ग काफी दिनों से सिंगल मार्ग के रूप में था। जिस पर रोज हजारों की संख्या में दो पहिया चार पहिया वाहन चलते हैं। सिंगल मार्ग होने के चलते इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती थी। जिसको लेकर शासन ने इस मार्ग को फोरलेन में बदलने का निर्णय लिया। इसके निर्माण होने से जहां विकास को आयाम मिलेगा वहीं आसपास के लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने का अवसर मिलेगा। शासन ने प्रथम किस्त के रूप में 102 .22 करोड़ रूपया अवमुक्त कर दिया है ।फोरलेन निर्माण होने पर इसकी चौड़ाई 15 मी होगी। जिसमें प्रत्येक लेने की चौड़ाई 7.50 मी होगी तथा बीच में दो मी चौड़ाई में डिवाइडर बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके संपूर्ण निर्माण के लिए 292 करोड़ 06 लाख 66हजार की स्वीकृति प्रदान की गई है। नदी पर 106.88 मीटर लंबा तथा 11.50 मीटर चौड़ाई का पुल टू लेन में तैयार किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड को नामित किया गया है। क्षेत्रीय लोगों में फोर लेन निर्माण से यातायात सुगम होगा। जिसका सपना मुख्यमंत्री ने निर्माण की आधारशिला रख कर साकार कर दिया। फोर लेन निर्माण से व्यापार के दिशा में व्यवसाईयों को बहुत लाभ मिलेगा तथा आम जनमानस को गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर की दूरी तय करने में कम समय के साथ-साथ कम ईंधन भी लगेगा। अजीत सिंह, भाजपा नेता, बैकुंठपुर, रामपुर कारखाना फोर लेन पर चलना हम लोगों के लिए सपना जैसा था। मगर मुख्यमंत्री ने इस सपने को साकार करने का कार्य किया है।- पंकज सिंह,  ग्राम प्रधान, भगौतीपुर, रामपुर कारखाना देवरिया कसया फोर लेन मार्ग का निर्माण विकसित भारत की दिशा में एक अहम प्रयास है। जो भाजपा के शासन में पूरा होने जा रहा है।- रविंद्र सिंह, ग्रामीण, मुंडेरा बाबू तरकुलवा फोर लेन का निर्माण किसान, मजदूर, व्यापारी तथा आम लोगों के लिए हित में है। जिससे विकास को गति मिलेगी। बिहार तक की यात्रा सुगम होगी।- राजू सिंह, ग्राम प्रधान, रामपुर चंद्रभान, रामपुर कारखाना  

दंतेवाड़ा में एनएमडीसी के समर कैंप को मिल रहा शानदार प्रतिसाद

दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा जिले के जिन गांवों में एनएमडीसी द्वारा समर कैंप शुरू किए गए हैं, वहां बच्चों, अभिभावकों और स्थानीय हितधारकों की ओर से बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इन कैंपों के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों, खेल, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक माहौल बन रहा है। समर कैंप के प्रति बढ़ती रुचि के चलते सामुदायिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। स्थानीय लोग भी बच्चों के विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए इस पहल में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। कैंपों में बच्चों की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह पहल ग्रामीण समाज में नई ऊर्जा और उत्साह भर रही है। एनएमडीसी ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में इस पहल का और अधिक विस्तार किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा गांवों के बच्चे इसका लाभ उठा सकें। संस्था ने एनएमडीसी परिवारों और समुदाय के सदस्यों से अपील की है कि वे दंतेवाड़ा के बच्चों के लिए इस गर्मी को और अधिक आनंददायक, रचनात्मक और यादगार बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

सम्राट सरकार की नई ट्रांसफर लिस्ट जारी, गृह विभाग समेत कई अहम पदों पर बदलाव

पटना बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों का फेरबदल हो रहा है। सम्राट सरकार ने शुक्रवार को एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट निकाल दी। इसके तहत 11 आईएएस का तबादला किया गया है। इसमें कुछ विभागों के अपर मुख्य सचिव भी बदले गए हैं। वरीय आईएएस दीपक कुमार को लोकभवन भेज दिया गया है। वहीं, गृह विभाग के एसीएस अरविंद कुमार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में भेजा गया है। कुंदन कुमार को गृह विभाग का सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आईएएस अधिकारियों की नई पोस्टिंग की अधिसूचना जारी की। इसके तहत 1992 बैच के आईएएस दीपक कुमार को राज्यपाल का प्रधान सचिव बनाया गया है, उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक और मुख्य जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद चौधरी का गृह विभाग से ट्रांसफर 1995 बैच के आईएएस अधिकारी गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी का तबादला कर उन्हें मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का एसीएस नियुक्त किया गया है। उनके पास बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष और बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद के परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार का ट्रांसफर कर गृह विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। 1995 बैच के एक और वरीय अधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी राजेंदर को निगरानी विभाग के एसीएस का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वित्त विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह को सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सीमा त्रिपाठी और निलेश देवरे की नई पोस्टिंग बिहार मानवाधिकार आयोग की सचिव सीमा त्रिपाठी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का सचिव बनाया गया है। सिविल विमानन विभाग के विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे को बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप गया है। 2012 बैच की आईएएस इनायत खान को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड का प्रबंध निदेशक हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा को उद्योग विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक राजीव कुमार श्रीवास्तव का ट्रांसफर कर उन्हें वित्त विभाग का अपर सचिव लगाया गया है। गोपाल मीणा सेंट्रल डेप्युटेशन पर गए राज्यपाल के मौजूदा प्रधान सचिव गोपाल मीणा को बिहार सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए विरमित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। उन्हें केंद्र सरकार ने नोएडा का विकास आयुक्त बनाया है।

हरियाणा: ग्रामीण विकास पर फोकस, फतेहाबाद को मिलेगा करोड़ों का बजट

 फतेहाबाद  जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए शनिवार को जिला विकास एवं निगरानी समिति (डीडीएमसी) की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक की अध्यक्षता सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी करेंगे। बैठक में वर्ष 2026-27 की जिला योजना के तहत तैयार वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी जाएगी। जिला योजना के अंतर्गत जिले के लिए कुल 14.86 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें 8.91करोड़ रुपये सामान्य वर्ग तथा 5.94 करोड़ रुपये अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के लंबित कार्यों के 1.56 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान के बाद शेष 13.29 करोड़ रुपये की राशि जिले में विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। बैठक को जिले की विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस बैठक में प्रस्तुत होने वाले प्रस्तावित बजट के अनुसार इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण इलाकों के लिए 10.33 करोड़ रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए 2.95 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। ब्लाक स्तर पर सबसे अधिक 2.39 करोड़ रुपये फतेहाबाद ब्लाक को मिलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा टोहाना ब्लाक के लिए 1.81 करोड़ रुपये, रतिया के लिए 1.52 करोड़ रुपये, भट्टू कलां के लिए 1.46 करोड़ रुपये, भूना के लिए 1.38 करोड़ रुपये, नागपुर के लिए 1.02 करोड़ रुपये तथा जाखल ब्लाक के लिए 72.53 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। शहरी निकायों में खर्च होगी इतनी राशि वहीं, शहरी निकायों के विकास कार्यों के लिए भी अलग से बजट तय किया गया है। नगर परिषद फतेहाबाद को 99.88 लाख रुपये, टोहाना को 52.43 लाख रुपये, भूना को 42.47 लाख रुपये, रतिया को 39.90 लाख रुपये तथा जाखल को 10.99 लाख रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है। बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। बता दें कि सड़कों, गलियों, पेयजल, सामुदायिक भवनों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को इस बजट से गति मिलेगी। पिछले कार्यों की भी होगी समीक्षा बैठक में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी रखी जाएगी। रिकार्ड के अनुसार पिछले वर्ष भी जिले को 14.86 करोड़ रुपये का बजट मिला था। 31 मार्च 2026 तक 13.54 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इसमें सामान्य वर्ग के कार्यों पर 7.65 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों पर 5.88 करोड़ रुपये व्यय किए गए। पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे भौतिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 80 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 119 कार्य अभी विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश भी मंत्री द्वारा दिए जाएंगे।साथ ही 10 जुलाई 2025 को हुई पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि भी सदन में की जाएगी। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी डीडीएमसी की इस बैठक में शामिल होने के लिए प्रशासन की तरफ से जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि को निमंत्रण भेजा गया है। बैठक में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा, फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, रतिया विधायक जरनैल सिंह तथा टोहाना विधायक परमवीर सिंह, जिप चेयरपर्सन सुमन खिचड़ को आमंत्रित किया गया है।