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राजा लालबहादुर की प्रतिमा हटाकर बसाई कॉलोनी, चिल्ड्रन पार्क जमीन घोटाले का खुलासा

खैरागढ़. शहर में नजूल और मेंटेनेंस खसरा की जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग का मामला अब बड़े खुलासे में बदलता जा रहा है। सरकारी दस्तावेज, जांच प्रतिवेदन और पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि जिस जमीन पर कभी बच्चों का पार्क हुआ करता था, उसी जमीन को धीरे-धीरे टुकड़ों में बांटकर बेच दिया गया और वहां पूरी कॉलोनी और बड़े कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए। मामला राजनांदगांव-कवर्धा मेन रोड पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने स्थित प्लॉट नंबर 114 और 115 का है। पुराने सरकारी रिकॉर्ड में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को पार्क की बाड़ी के रूप में दर्ज बताया गया है। आजादी से पहले इस क्षेत्र को “अल्फ्रेड पार्क” कहा जाता था। स्वतंत्रता के बाद यह स्थान राजा लालबहादुर सिंह के नाम से पहचाना जाने लगा और वहां उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार बाद में राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा को वहां से हटाकर डोंगरगढ़ स्थित “लाल निवास” में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे पूरी जमीन निजी हाथों में जाती चली गई और छोटे-छोटे हिस्सों में बिकने लगी। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पहले यह जमीन राजा बहादुर वीरेंद्र बहादुर सिंह के नाम दर्ज थी। वर्ष 1974 में यह जमीन उनकी अवयस्क नातिन स्मृति देवी सिंह के नाम चढ़ गई। इसके बाद वर्षों तक जमीन के हिस्से अलग-अलग लोगों को बेचे जाते रहे। जांच प्रतिवेदन के अनुसार करीब एक लाख वर्गफीट से अधिक भूमि को लगभग 22 टुकड़ों में बांटा गया और 17 लोगों के नाम पर दर्ज कर दिया गया। बाद में इनमें से कई हिस्सों की दोबारा बिक्री भी हुई। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में नजूल और मेंटेनेंस खसरा की भूमि बताया गया है, उसे आखिर निजी प्लॉटिंग में कैसे बदल दिया गया। जांच रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि जमीन का वैधानिक उपविभाजन नहीं कराया गया था और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से किसी प्रकार का ले-आउट भी स्वीकृत नहीं हुआ था। यानी कॉलोनी काटने की कानूनी अनुमति ही नहीं ली गई थी। इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और निर्माण कार्य लगातार चलते रहे। जांच दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि करीब 85 हजार वर्गफीट से ज्यादा जमीन बिक चुकी है और वहां बड़े मकान, कॉम्प्लेक्स और अन्य निर्माण खड़े हो चुके हैं। कुछ हिस्सों में अब भी निर्माण कार्य जारी है। सार्वजनिक जमीन की अनुमति किसने दी? मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर अवैध प्लाटिंग की जानकारी पहले से मौजूद थी। जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि संबंधित विभागों को इस जमीन के संबंध में जानकारी दी गई थी, फिर भी पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रिया नहीं रुकी। अब खैरागढ़ में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों के पार्क और सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी कॉलोनी में बदलने की अनुमति किसने दी? और जब जमीन मेंटेनेंस खसरा में दर्ज थी, तब वर्षों तक उसकी खरीदी-बिक्री और निर्माण कैसे चलता रहा? यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और संगठित भू-कारोबार की बड़ी जांच का विषय बन चुका है।

बिहार में राजद को बड़ा झटका, ‘मुखिया दीदी’ BJP में शामिल

पटना. बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को झटका देते हुए पार्टी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और ‘मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल भी मौके पर मौजूद रहे। राजद से लंबे समय तक जुड़ी रहीं रितु जायसवाल पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। 2025 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुलकर बगावत कर दी थी। टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन करीब 64 हजार वोट हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का संकेत दिया था। भाजपा में शामिल होने से पहले 24 मई को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले के संकेत दे दिए थे। पोस्ट में उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बताते हुए जनहित में काम जारी रखने की बात कही थी। पंचायत राजनीति से प्रदेश स्तर तक बनाया प्रभाव सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी पंचायत से राजनीति की शुरुआत करने वाली रितु जायसवाल ने बहुत कम समय में बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2016 में वह मुखिया चुनी गईं और पंचायत स्तर पर किए गए कार्यों की वजह से तेजी से चर्चाओं में आईं। उन्हें 2017 में एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा ‘आदर्श युवा सरपंच सम्मान’ दिया गया। इसके बाद 2018 में उपराष्ट्रपति के हाथों ‘चैंपियंस ऑफ चेंज’ पुरस्कार भी मिला। वर्ष 2019 में उनकी पंचायत को दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान से नवाजा गया। राजद में तेजी से बढ़ा कद राष्ट्रीय जनता दल ने 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता और फिर महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने करीब 4.74 लाख वोट हासिल किए, लेकिन लगभग 29 हजार मतों से हार गईं। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनाधार चर्चा में रहा। हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद राजद ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। भाजपा के लिए क्यों अहम हैं रितु जायसवाल राजनीतिक जानकारों की मानें तो महिला वोट बैंक, पंचायत स्तर की मजबूत पकड़ और मिथिलांचल क्षेत्र में सक्रियता को देखते हुए भाजपा के लिए रितु जायसवाल का शामिल होना अहम माना जा रहा है।  अब तक का राजनीतिक सफर 2016 : सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया बनीं 2017 : आदर्श युवा सरपंच सम्मान प्राप्त 2018 : चैंपियंस ऑफ चेंज पुरस्कार मिला 2019 : पंचायत को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान 2020 : राजद में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़ा 2021 : राजद की प्रदेश प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनीं 2024 : शिवहर लोकसभा चुनाव लड़ा 2025 : निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा और अब भाजपा में शामिल हुईं

कपिल शर्मा हाउस फायरिंग मामला फर्जी! पुलिस बोली- अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

अमृतसर. मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के घर के बाहर दिन दिहाड़े फायरिंग और फिरौती की मांग की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने घर के मुख्य द्वार पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद परिवार में भारी दहशत फैल गई। अफवाह यह भी थी कि घटना से कुछ दिन पहले ही कथित तौर पर परिवार से फिरौती की मांग की गई थी, जिसके बाद यह कथित हमला हुआ। इलाके के निवासियों ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर लोग घरों में दुबक गए और पूरे इलाके में डर का साया छा गया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के सी.सी.टी.वी. फुटेज खंगाले जा रहे थे। हालांकि अमृतसर पुलिस ने इन सभी खबरों को पूरी तरह अफवाह बताते हुए साफ इनकार कर दिया है। डी.सी.पी. रविंद्रपाल सिंह संधू सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मौके पर गहन जांच के बाद कोई फायरिंग या गोली चलने का कोई सबूत नहीं मिला। पुलिस कमिश्नरेट ने सोशल मीडिया पर अधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक "कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर अफवाहें फैला रहे हैं। हमने पूरी तरह जांच कर ली है, ऐसी कोई घटना नहीं हुई।" कपिल शर्मा के नाम से जुड़ी ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कनाडा में उनके कैफे पर फायरिंग की घटना हुई थी, जिसे कुछ गैंग वार से जोड़ा जा रहा था। अमृतसर में भी पहले टायर फटने जैसी घटनाओं को बाद में फायरिंग बताकर अफवाहें फैलाई जा चुकी हैं।

रेलवे सुरक्षा अलर्ट! जगदलपुर स्टेशन पर ‘शेरा’ संग ट्रेनों की सघन जांच

जगदलपुर. जगदलपुर रेलवे स्टेशन पर इस बार सिर्फ चेकिंग नहीं हुई, बल्कि सुरक्षा का ऐसा लाइव ट्रायल दिखा जिसने यात्रियों को भी चौकन्ना कर दिया। आरपीएफ ने स्टेशन और ट्रेनों में सघन एंटी-सैबोटॉज व नारकोटिक्स अभियान चलाया, जिसकी कमान निरीक्षक प्रवीण कुमार ने संभाली। ऑपरेशन का सबसे बड़ा चेहरा बना स्नीफर डॉग ‘शेरा’, जिसने स्टेशन के हर संवेदनशील हिस्से को सूंघकर खंगाला। ट्रेन नंबर 58502, 18107 और 18447 में डिब्बों के भीतर तक तलाशी ली गई। वेटिंग हॉल, पार्सल एरिया और सर्कुलेटिंग एरिया में संदिग्ध सामानों की जांच की गई। यात्रियों के बैग और लावारिस वस्तुओं पर विशेष नजर रखी गई। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि पहले भी ऐसे अभियानों में गांजा और अवैध सामान पकड़े जा चुके हैं। इसी वजह से स्टेशन को लगातार हाई अलर्ट मोड में रखा गया है। हालांकि, इस बार कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन अभियान ने असामाजिक तत्वों में डर जरूर पैदा किया। रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि अचानक होने वाले ऐसे ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे। ‘शेरा’ जैसे प्रशिक्षित श्वान अब रेलवे सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। उद्देश्य साफ है… सफर सुरक्षित रहे और स्टेशन अपराधियों के लिए असुरक्षित बने।

नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने से कतरा रहे TMC नेता, ममता के सामने नई चुनौती

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं हैं। अब खबर है कि पार्टी को नंदीग्राम में होने वाले उप चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। फिलहाल, सीट पर उप चुनाव का भी ऐलान नहीं हुआ है। अटकलें हैं कि टीएमसी नेता यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के साथ नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी, लेकिन अंत में उन्होंने यह सीट छोड़ने का फैसला किया। खास बात है कि अधिकारी 2021 में भी तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा चुके हैं। 2 नेता कर चुके मना पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उप चुनाव की तारीख का ऐलान कभी भी हो सकता है। अब अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि यहां टीएमसी ने उम्मीदवार की तलाश शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यहां से टीएमसी को उम्मीदवार खोजने में मुश्किल हो रही है। साथ ही दो नेताओं ने तो यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। 2026 विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराया है। नंदीग्राम से लड़ने नेता मना क्यों कर रहे अधिकारी के कभी करीबी रहे पवित्र कर भी नंदीग्राम से नहीं लड़ना चाहते। खास बात है कि शुभेंदु ने उन्हें ही इस सीट से हराया है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, वह कहते हैं, 'कुछ लोग मुझसे बात करने आए थे, लेकिन मैं दोबारा नंदीग्राम से नहीं लड़ सकता। इसका सवाल ही पैदा नहीं होता है।' चुनाव से कुछ समय पहले ही कर भारतीय जनता पार्टी छोड़ टीएमसी में गए थे। 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के इलेक्शन एजेंट रहे शेख सूफियान भी यहां से चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने 2006 में नंदीग्राम का चुनाव लड़ा था। उसके बाद टीएमसी में से किसी ने भी मुझसे चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा। मुझे अब चुनावों में दिलचस्पी नहीं है। मैं मेरे परिवार की सलाह मानकर राजनीति से रिटायर हो रहा हूं।' टीएमसी का क्या है प्लान रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'उम्मीदवार का चुनाव ममता बनर्जी करेंगी और इस पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी। चुनावों का ऐलान होने दीजिए।' फलता जैसा लक्ष्य रखा मुख्यमंत्री बनने के बाद नंदीग्राम के अपने पहले दौरे पर अधिकारी ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि सीट खाली करने के बावजूद उनका अपने राजनीतिक गढ़ से जुड़ाव पूरी तरह मजबूत बना हुआ है। उन्होंने अभिनंदन रैली को संबोधित करते हुए अपने समर्थकों से पूछा कि क्या वे नंदीग्राम में भी फाल्टा जैसी जीत का अंतर दोहरा सकते हैं, जहां भाजपा ने एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की है।

नायब सैनी बोले- पंजाब में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा चुनाव

चंडीगढ़  पंजाब में भाजपा के प्रचार अभियान की अगुवाई कर रहे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिया है कि पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ेगी। राज्य में बड़े चेहरे की कमी को लेकर भाजपा के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती के बारे में 'ट्रिब्यून' के एक सवाल का जवाब देते हुए सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही पार्टी का 'पंजाब में सबसे बड़ा चेहरा' हैं। सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे सैनी ने कहा, 'हम सभी पार्टी के चेहरे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी सबसे बड़ा चेहरा हैं। राज्य में हमारे पास कई नेता हैं।' हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल और पंजाब की तुलना करते हुए कहा, 'पश्चिम बंगाल में हमने पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा। हमारे पास एक मजबूत मुख्यमंत्री है, ऐसा मुख्यमंत्री जो राज्य को नयी ऊंचाइयों तक ले जाएगा।' भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में शामिल सैनी को पंजाब में प्रचार के लिए आगे किया गया है, जहां लगभग 30 प्रतिशत आबादी ओबीसी और 32 प्रतिशत अनुसूचित जातियों की है। पंजाब में भाजपा ओबीसी और एससी समुदायों का व्यापक गठबंधन बनाने का प्रयोग कर रही है, साथ ही हिंदू एकजुटता पर भी जोर दे रही है, जिसका लाभ उसे बंगाल में मिला था। पंजाब की राजनीति में 'जट सिख' समुदाय के वर्चस्व के मुद्दे पर सैनी ने कहा, 'जट सिखों का पंजाब के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास करती है।' क्या भाजपा पंजाब में गंभीर दावेदार है? इस सवाल पर सैनी ने कहा, 'पंजाब ने भाजपा को चुनने का मन बना लिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों को धोखा दिया है। लोग अब चुनाव की तारीखों का इंतजार कर रहे हैं।' इस सवाल पर कि पंजाब भाजपा पर क्यों भरोसा करेगा, जबकि अब तक पार्टी वहां हाशिये पर रही है, सैनी ने कहा, 'क्योंकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में भाजपा सरकार ने अपने सभी चुनावी वादे पूरे किए, खासकर महिलाओं से जुड़े वादे, जबकि पंजाब की आप सरकार ऐसा नहीं कर सकी।' सैनी ने पंजाब के अपने दौरों को सही ठहराते हुए कहा कि दोनों राज्य पहले एक ही थे। उन्होंने कहा, 'कुछ दलों ने अपने स्वार्थ के लिए मतभेद पैदा किए हैं। पंजाब एक था। मेरे अधिकतर रिश्तेदार पंजाब में हैं।' चिनाब का पानी मोड़कर सुलझ सकता है एसवाईएल विवाद सैनी ने कहा कि चिनाब नदी के पानी को पंजाब की ओर मोड़ा जा सकता है, ताकि उसे आगे हरियाणा के साथ साझा किया जा सके और सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद सुलझाया जा सके। सिंधु प्रणाली की तीन पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब, 1961 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित की गई थीं, जिसे भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दिया था। इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी एसवाईएल विवाद सुलझाने के लिए चिनाब का पानी मोड़ने का सुझाव दे चुके हैं।

बरगी क्रूज हादसे में बड़ा मोड़, बिना जांच क्रूज नष्ट करने का आरोप; आयोग ने जताई चिंता

जबलपुर जबलपुर के बरगी डैम में  30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे की न्यायिच जांच औपचारिक रूप से शुरू की गई है। मंगलवार को इस मामले में कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 43 में जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी की मौजूदगी में मामले की सुनवाई शुरू की गई। इस दौरान नागरिक उपभोक्ता मंच ने हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनी और तकनीकि बिंदु आयोग के सामने रखे। क्रूज हादसे में कुल 13 पर्यटकों की मौत हुई थी, मृतकों में अलग- अलग राज्यों के लोग शामिल थे। वैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखकर होगी जांच वहीं मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने आयोग के सामने लगाई दायर याचिका में कहा कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 के अनुसार, प्रणाली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जो जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को नष्ट करने की परमिशन दें। इसके अलावा जिला प्रशासन को भी ऐसे किसी भी हादसे में शिकार हुए क्रूज को जांच से पहले नष्ट करने का कानूनी अधिकार नहीं है। वैधानिक पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा आयोग ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा उठाए गए सभी वैधानिक पहलुओं को जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी सुनवाई में मंच को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। आरोप-एनजीटी के निर्देशों का पालन नहीं किया याचिका में क्रूज संचालन से जुड़ी तकनीकी और पर्यावरणीय अनियमितताओं को भी उजागर किया गया। मंच की ओर से बताया गया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 12 सितंबर 2023 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलाशयों में चलने वाले क्रूज में केवल फोर स्ट्रोक इंजन का उपयोग किया जाए। इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में मात्र 100 एचपी का कमजोर इंजन लगाया गया था और हादसे के दौरान उसका दूसरा इंजन भी पूरी तरह फेल हो गया था। याचिका में यह भी दावा किया गया कि क्रूज संचालकों के पास पर्यावरणीय मानकों से संबंधित कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं था, जबकि एनजीटी के नियमों के अनुसार जल संरचनाओं में संचालित वाहनों के लिए पर्यावरणीय अनुमति और मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके अलावा आयोग ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा उठाए गए सभी वैधानिक पहलुओं को जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इसके अलावा आयोग ने साफ किया कि आगामी सुनवाई में मंच को अपनी बात रखने का पूरा अवसर भी दिया जाएगा। हादसे का शिकार हुए क्रूज का एक इंजन फेल क्रूज हादसे की जांच के बीच मामले में नया मोड़ सामने आया है। जांच आयोग के समक्ष दायर याचिका में दावा किया गया कि हादसे का शिकार हुए क्रूज का एक इंजन फेल हो गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि क्रूज में तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं। NGT के आदेश का दिया गया हवाला याचिका में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 12 सितंबर 2023 के आदेश का हवाला दिया गया। इसमें साफ कहा गया था कि क्रूज संचालन के लिए फोर-स्ट्रोक इंजन होना जरूरी है। लेकिन हादसे में शामिल क्रूज में केवल 100 एचपी क्षमता का इंजन लगाया गया था। इतना ही नहीं, उसका दूसरा इंजन भी कथित तौर पर काम नहीं कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या क्रूज संचालकों के पास पर्यावरणीय नियमों और तकनीकी मानकों के पालन से जुड़े सभी जरूरी प्रमाणपत्र मौजूद थे या नहीं। सवालों के घेरे में क्रूज को नष्ट करने का मुद्दा मामले में सबसे बड़ा सवाल हादसे के बाद क्रूज को नष्ट किए जाने को लेकर उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने आयोग के सामने तर्क रखा कि एनजीटी के आदेश के पैरा-132 में बोट की फिटनेस को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में अगर क्रूज को ही नष्ट कर दिया गया, तो उसकी तकनीकी स्थिति, इंजन क्षमता और फिटनेस की निष्पक्ष जांच कैसे की जा सकेगी? उनका कहना है कि क्रूज के नष्ट होने से कई अहम तकनीकी तथ्यों की पुष्टि मुश्किल हो सकती है। मौजूदा सबूतों के आधार पर होगी जांच- आयोग इन आरोपों और तकनीकी पहलुओं को गंभीर मानते हुए जांच आयोग ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित दस्तावेज, प्रमाण और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। क्रूज की फिटनेस को लेकर तेज हो सकती है जांच आयोग के इस रुख के बाद माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में मामले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। खासकर क्रूज की तकनीकी फिटनेस, इंजन की स्थिति, पर्यावरणीय मंजूरी और संचालन से जुड़े नियमों के पालन को लेकर जांच और गहरी हो सकती है। इससे हादसे की असली वजहों पर भी नई रोशनी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

कर्मी और आश्रितों के अधिकार पर बड़ा फैसला, ग्रेच्युटी से वंचित नहीं किया जा सकता

ग्वालियर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एक कर्मचारी की बर्खास्तगी के बाद ग्रेच्युटी रोकने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट Gwalior Highcourt ने अहम फैसला सुनाया है। सिंगल बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी मात्र से उसकी ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि ग्रेच्युटी कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी की वर्षों की सेवा से अर्जित संपत्ति है। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कंपनी को निर्देश दिए कि मृत कर्मी की पत्नी को सेवा समाप्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान तक ब्याज सहित ग्रेच्युटी Gratuity राशि तीन माह के भीतर दी जाए। आदेश का पालन नहीं करने पर कंपनी को एक लाख रुपए हर्जाना भी देना होगा। न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी भुगतान रोकने स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज कर कहा, कंपनी कार्यालय ग्वालियर और इंदौर दोनों स्थानों पर हैं। साथ ही याची 55 वर्षीय विधवा हैं। आठ वर्ष से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में सिर्फ तकनीकी आधार पर याचिका खारिज नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी Gratuity भुगतान रोकने स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी है। सेवा समाप्ति के आधार पर कर्मी, आश्रितों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। विभागीय जांच के बाद 27 मार्च 2014 को सेवाएं समाप्त कर दी याची मुबीना खान के पति शाजापुर में बिजली कंपनी में भृत्य थे। नियुक्ति 1995 में आकस्मिक कर्मचारी के रूप में हुई थी। 1997 में सेवाएं नियमित कर दी गईं। 2009 में अस्वस्थ होने के कारण वे बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित हो गए। विभागीय जांच के बाद 27 मार्च 2014 को सेवाएं समाप्त कर दी गईं। दिसंबर 2016 में कर्मी का निधन हो गया। इस पर मुबीना ने फंड और अन्य सेवा लाभों के लिए विभाग को नोटिस भेजा। यह कहते हुए ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया कि कर्मी को बर्खास्त किया जा चुका कंपनी ने यह कहते हुए ग्रेच्युटी Gratuity देने से इनकार कर दिया कि कर्मी को बर्खास्त किया जा चुका था। 2018 में उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि विभागीय जांच में कर्मचारी दोषी पाए गए थे, इसलिए वे ग्रेच्युटी के पात्र नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि कर्मचारी शाजापुर में पदस्थ थे और कंपनी का मुख्यालय इंदौर में है, इसलिए ग्वालियर खंडपीठ में याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

बिहार राजनीति में बड़ा उलटफेर, RJD छोड़ BJP में शामिल हुईं रितु जायसवाल

पटना  आरजेडी की पूर्व महिला नेता रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई हैं. बीजेपी प्रदेश संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस मौके पर मंत्री दिलीप जायसवाल भी मौजूद रहे. बता दें कि जायसवाल ने BJP का दामन थामने की औपचारिक घोषणा 24 मई को की थी. आरजेडी छोड़कर रितु जयसवाल के साथ कई अन्य नेता भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें प्रोफेसर राजमणि, सीमा जायसवाल, माया गुप्ता, शकुंतला प्रजापति, संगीता यादव, सुलेखा खातून, पानो देवी, अनिल महतो और शिवशंकर शामिल हैं।  बीजेपी में शामिल होने के बाद ऋतु जयसवाल ने कहा कि आज वह पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पार्टी में शामिल हो रही हैं. उन्होंने कहा कि उनके पुराने वीडियो सामने लाकर उन्हें ट्रोल किया जा सकता है, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं.उन्होंने कहा कि जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब उन्हें बागी कहा गया था। इसके बावजूद उन्होंने करीब 65 हजार वोट हासिल किए थे।  रितु जायसवाल ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रहित की राजनीति करती है और देश से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे राष्ट्रहित और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की बात करते हैं।  RJD से क्यों बढ़ी दूरियां? मुखिया दीदी’ के नाम से पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल पहले आरजेडी की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से चुनाव लड़ा था और बहुत कम अंतर से हार गई थीं. लेकिन बाद में आरजेडी ने उनका टिकट काट दिया था. पार्टी ने उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जिससे नाराज होकर रितु जायसवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था. उन्हें 60 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और आरजेडी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद आरजेडी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।  मुखिया के तौर पर बनाई पहचान रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर काफी खास माना जाता है. मुंबई से सीतामढ़ी आकर उन्होंने सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में काम किया और अपने काम की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिला नेता के रूप में उनकी अच्छी छवि रही है।  वैश्य समाज पर पकड़ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी उन्हें अपने साथ जोड़कर वैश्य समाज और महिला वोटरों के बीच पकड़ मजबूत करना चाहती है. सीतामढ़ी, शिवहर और आसपास के इलाकों में युवाओं और महिलाओं के बीच उनकी अच्छी लोकप्रियता मानी जाती है. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है। 

योग जगत को बड़ा झटका, रूप नारायण सिन्हा का इलाज के दौरान निधन

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ में योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा का निधन होने की खबर सामने आई है. छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था. उनके निधन की खबर लगते ही बीजेपी में शोक की लहर है. समर्थकों का रूपनारायण सिन्हा के घर पर जुटना शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि बीजेपी के प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्हें अचानक से हार्ट अटैक आया है. बिलासपुर सिम्स में कराया था भर्ती रूपनारायण सिन्हा बीजेपी के सीनियर नेता थे. वह तिफरा में चल रहे बीजेपी के 2 दिवसीय प्रशिक्षण महाअभियान कार्यक्रम में शामिल थे. इस प्रशिक्षण अभियान के प्रभारी की जिम्मेदारी रूपनारायण सिन्हा के पास ही थी. लेकिन अचानक उनकी तबियत खराब हुई, जिसके बाद बिलासपुर सिम्स में लाया गया. लेकिन यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था. जिससे भाजपा में शौक की लहर दौड़ गई. रूपनारायण सिन्हा बीजेपी संगठन में सीनियर नेता माने जाते थे. वह भाजपा के सक्रिए नेताओं में शामिल थे.