samacharsecretary.com

साइबर अटैक से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और वेतन व्यवस्था प्रभावित

कानपूर कानपुर नगर निगम की मुख्य आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर अचानक हैक हो गई। इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले के बाद कानपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के प्रशासनिक गलियारों और आईटी (IT) महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकारी वेबसाइट के हैक होते ही नगर निगम से जुड़ी तमाम ऑनलाइन जनहित सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनआईसी के इंजीनियरों में खलबली जैसे ही वेबसाइट के हैकिंग की भनक लगी, सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन और रखरखाव करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियरों की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। दिल्ली और लखनऊ के वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञों व इंजीनियरों की फौज इस तकनीकी सेंधमारी को ठीक करने और वेबसाइट को दोबारा बहाल करने में जुट गई है। हालांकि, साइबर हमला इतना तगड़ा है कि खबर लिखे जाने तक वेबसाइट को पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका था। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर कर्मचारियों का वेतन तक अटका नगर निगम की मुख्य वेबसाइट हैक होने के कारण इसका सबसे बड़ा और सीधा असर आम जनता से जुड़ी बुनियादी डिजिटल सेवाओं पर पड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, वेबसाइट ठप होने से सबसे ज्यादा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सैकड़ों लोग अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। नगर निगम के महत्वपूर्ण टेंडर विकास कार्यों के ऑनलाइन प्रस्ताव और नगर निगम से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं भी पूरी तरह ब्लॉक हो गई हैं। इतना ही नहीं, इस साइबर सेंधमारी की वजह से नगर निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और ऑनलाइन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? इस पूरे साइबर संकट और तकनीकी खामी को लेकर जब नगर निगम के आईटी विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। नगर निगम आईटी विभाग के नोडल अधिकारी राहुल सबबरवाल के अनुसार,वेबसाइट के सर्वर में कुछ गंभीर दिक्कतें आई हैं और हैकिंग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। एनआईसी के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है और इसे ठीक करने में जुटी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी ऑनलाइन सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए ताकि जनता को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े।  

प्रेग्नेंसी में तम्बाकू बना जानलेवा, PGI विशेषज्ञों ने दी गंभीर बीमारियों की चेतावनी

चंडीगढ़. गुटखा, खैनी और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू को लोग अक्सर सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं पर PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने इस संबंध में गंभीर चेतावनी दी है। PGI के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन न सिर्फ मां के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इससे बच्चे का वजन कम होना, समय से पहले जन्म और यहां तक ​​कि मृत बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। PGI के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला और नसवार जैसे उत्पाद सीधे शरीर में निकोटीन और जहरीले केमिकल पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। PGI स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. सोनू गोयल ने बताया कि लोग अभी भी गुटखा और खैनी को सुरक्षित या 'नेचुरल' मानते हैं, जबकि यह पूरी तरह से गलत सोच है। उन्होंने कहा कि तंबाकू के पत्तों में निकोटीन, नाइट्रोसामाइन और कई ऐसे केमिकल होते हैं जो सीधे कैंसर से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकलेस तंबाकू खाने से बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई पर असर पड़ता है। इससे बच्चा कमजोर हो सकता है या समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में स्टिलबर्थ की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू भारत में ओरल कैंसर के मामलों का एक बड़ा कारण बन गया है। एक इंटरनेशनल स्टडी के मुताबिक दुनिया में स्मोकलेस तंबाकू और सुपारी से जुड़े ओरल कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामले भारत में होते हैं। धुआं रहित तंबाकू में करीब 4000 केमिकल पी.जी.आई. के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू सिर्फ मुंह को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि पूरे शरीर पर असर डालता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि कई लोग वजन बढ़ने के डर से तंबाकू नहीं छोड़ते, लेकिन यह डर काफी हद तक गलत है। रिसर्च के मुताबिक तंबाकू छोड़ने के बाद वजन में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, जबकि तंबाकू का इस्तेमाल जारी रखने से कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। PGI के एक्सपर्ट्स ने भी युवाओं और महिलाओं में बढ़ती तंबाकू की लत पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि छोटे पैक में मिलने वाले फ्लेवर्ड पान मसाला और गुटखा प्रोडक्ट्स तेजी से टीनएजर्स और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू में करीब 4000 केमिकल्स पाए जाते हैं, जिनमें से कई सीधे कैंसर का कारण बनते हैं। इनमें आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, फॉर्मेल्डिहाइड और रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 जैसे खतरनाक एलिमेंट्स शामिल हैं। PGI ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी हेल्पलाइन और तंबाकू छोड़ने की सर्विस का इस्तेमाल करने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर तंबाकू छोड़ना कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

रायपुर : लोक निर्माण विभाग के सचिव ने अधिकारियों की ली बैठक

रायपुर. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज बिलासपुर में नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बन रहे 10 किमी फोरलेन सड़क के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार को कार्यों में तेजी लाते हुए इसे जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर बिलासपुर जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और भवनों के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों से कहा कि हर कार्य के विभिन्न चरणों के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लाएं। कार्यों की रोज मॉनिटरिंग कर तथा ठेकेदारों से समन्वय बनाकर समय-सीमा में काम पूरा कराएं। उन्होंने निविदा स्वीकृति के एक माह के भीतर हर हाल में काम प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। बिलासपुर के कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे और अधीक्षण अभियंता के.पी. संत भी बैठक में मौजूद थे। बंसल ने कहा कि विभाग के कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा सुनिश्चित करना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बैठक में कोनी-मोपका बायपास, जयरामनगर रेलवे ओवरब्रिज, जयरामनगर-सीपत रोड बायपास, उच्च न्यायालय में ऑडिटोरियम, नए जेल भवन और बोदरी में न्यायालयीन प्रकरणों में ओआईसी के लिए बनने वाले विश्राम भवन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की भी जानकारी ली। विभागीय सचिव ने नेहरू चौक से दर्रीघाट सड़क के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को सड़कों को साफ, सुंदर और सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने डिवाइडर्स के दीवारों और ग्रिल्स का रंग-रोगन कराने को कहा।

त्विषा मर्डर केस: CBI के शिकंजे में सास गिरिबाला, अस्पताल ले जाकर होगा मेडिकल; आज कोर्ट में पेशी

नई दिल्ली.  त्विषा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। त्विषा की सास गिरबाला सिंह को गुरुवार को सीबीआई ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही है।  यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद किए जाने और 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई राहत को खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई है। बता दें आज ही सिंह को कोर्ट ने सामने पेशा किया जाएगा।  एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने क्या कहा? इस मामले में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा, 'हाई कोर्ट ने इस मामले में कुछ बातों को गंभीरता से लिया है, जैसे त्विषा शर्मा के शरीर पर मौत से पहले की सात चोटें, जो एक गंभीर अपराध की ओर इशारा करती हैं। इसके साथ ही कई नोटिसों के बावजूद गिरिबाला सिंह का जांच में मदद न करना और WhatsApp चैट, जो त्विषा के मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती हैं। इन सभी बातों को देखते हुए, हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब यह CBI को तय करना है कि हिरासत में पूछताछ की जानी चाहिए या नहीं।' बेटे ने 10 दिन बाद किया था सरेंडर इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने उन आरोपों का भी गंभीरता से संज्ञान लिया कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए किया हो सकता है। पिछले हफ्ते, गिरिबाला के बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने 10 दिनों तक फरार रहने के बाद एक अदालत के सामने सरेंडर किया था। बता दें गिरिबाला सिंह की सास रिटायर्ड जज हैं और उनके वकील बेटे समर्थ पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोप हैं। CBI ने सोमवार को औपचारिक रूप से 12 मई को हुई त्विषा शर्मा की मौत की जांच अपने हाथ में ले ली। सीबीआई ने दर्ज की थी FIR सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले से दर्ज की गई FIR को फिर से दर्ज किया था। CBI की FIR के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने विदाई के समय त्विषा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे पीड़िता के परिवार ने उनके जोर देने पर दे दिया था। सुनवाई के दौरान, त्विषा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता कथित तौर पर मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी। हाई कोर्ट ने पाया कि त्विषा के माता-पिता और रिश्तेदारों के दर्ज बयानों में जांच के पहले ही दिन से लगातार यह आरोप लगाया गया है कि समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह, दोनों ही त्विषा का उत्पीड़न कर रहे थे।

छात्रों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान सख्त, कहा- हर शिकायत का होगा समाधान

नई दिल्ली CBSE की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और छात्रों के हित में बनाई गई है. उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि किस तरह पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन कर छात्रों को भरोसेमंद और निष्पक्ष परिणाम देने की कोशिश की गई है. CBSE OSM में गड़बड़ियों पर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत अनसुलझी नहीं रहेगी। 40 करोड़ पेज स्कैन:पहली बार हुआ इतना बड़ा डिजिटल मूल्यांकन धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी. इन परीक्षाओं में लगभग 98 लाख आंसर शीट्स को सुरक्षित रखा गया. हर आंसर शीट औसतन 40 पन्नों की थी यानी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए.उन्होंने कहा कि CBSE ने पहली बार OSM यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए मूल्यांकन किया जो दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज और संस्थानों में तेजी से अपनाई जा रही आधुनिक प्रणाली है। छात्रों के लिए फायदेमंद केंद्रीय मंत्री के मुताबिक OSM पूरी तरह स्टूडेंट फ्रेंडली सिस्टम है. इससे छात्रों को अपने अंकों की जानकारी पारदर्शी तरीके से मिलती है और मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बढ़ता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में छात्र इस व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। आंकड़े खुद बता रहे हैं छात्रों का भरोसा बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक कुल 18.57 लाख पंजीकृत छात्रों में से केवल 4.06 लाख छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया.OSM के तहत कुल 98.66 लाख आंसर बुक्स स्कैन की गईं, जबकि 11.38 लाख आंसर बुक्स ही देखने के लिए मांगी गईं. इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया से संतुष्ट हैं। अफवाहों से निपटने के लिए CBSE की सख्त रणनीति OSM एक तकनीक आधारित सुधार है इसलिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अफवाहों से बचने के लिए मजबूत कम्युनिकेशन रणनीति अपनाई.CBSE ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स @cbseindia29 के जरिए लगातार जानकारी दी, ताकि गलत या भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जा सके और सिस्टम की संरचना व सुरक्षा उपायों को समझाया जा सके। केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर छात्रों, अभिभावकों और मीडिया से अपील की है कि वे असत्यापित और सनसनीखेज सोशल मीडिया दावों से बचें और केवल CBSE वेबसाइट पर जारी आधिकारिक सर्कुलर पर ही भरोसा करें. इस पूरे माहौल में कई छात्र, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल सामने आए हैं और उन्होंने OSM के जरिए हुई मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं.CBSE ने साफ किया है कि बोर्ड ने न तो कोई लिखित आदेश जारी किया है और न ही किसी पर दबाव डाला गया है कि वे इस प्रक्रिया के समर्थन में बयान दें।

भोजशाला मामले में कानूनी लड़ाई तेज, SC में दाखिल हुई तीसरी याचिका

धार धार भोजशाला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका लगी है। सुप्रीम कोर्ट अब भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। तीसरी याचिका जिब्रान अंसारी ने प्रस्तुत की है। तीनों याचिकाओं पर अब तक कोर्ट ने सुनवाई शुरू नहीं की है। उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके। भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। पिछली याचिकाओं पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात साढ़े आठ बजे कोर्ट में याचिका लगाई थी। आधी रात दाखिल हुई नई याचिका भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार “Jebran Ansari Vs Union of India” नाम से यह याचिका डायरी नंबर 33643/2026 के तहत दर्ज की गई है। बताया गया कि याचिका 26 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे दाखिल की गई, जिससे यह स्पष्ट माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में कानूनी तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती नई याचिका में इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने भोजशाला विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया था। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मामले की एंट्री सुप्रीम कोर्ट में होते ही दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई है। धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में नई याचिका के बाद धार्मिक संगठनों और विभिन्न पक्षों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ सकती है। विवाद को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश का माहौल फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं। कानूनी लड़ाई अब नए चरण में सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब यह विवाद नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ अदालत में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकरण की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। संवेदनशील मामले पर बढ़ी निगरानी भोजशाला विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने धार सहित प्रदेश की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को फिर केंद्र में ला दिया है। कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण हैं, जिनके आधार पर हम सुप्रीम कोर्ट में साबित करेंगे कि धार का परिसर मंदिर नहीं, मस्जिद है। हाईकोर्ट ने एएसआई की जिस रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर बताया, वही पूर्व की रिपोर्ट में भोजशाला को मस्जिद बताती रही है।

कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत: बिहार में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलेगी पीरियड लीव

 पटना बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की कामकाजी महिलाओं के हित में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार की इस नई पहल के बाद अब राज्य की संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को एक बहुत बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार ने इन महिलाओं के लिए एक विशेष नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत इन्हें हर महीने 'स्पेशल लीव' की सौगात दी जाएगी। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य की लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिला कर्मियों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। हर महीने मिलेगी 2 दिनों की स्पेशल लीव, बिहार बना देश का पहला राज्य इस नई नीति के लागू होने के बाद अब बिहार की तमाम संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को हर महीने 2 दिनों की स्पेशल लीव दी जाएगी। गौरतलब है कि नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों की तरह ही इन संविदा कर्मियों को भी लंबे समय से इस सुविधा की दरकार थी। अब बिहार पूरे देश में ऐसा पहला और इकलौता राज्य बन गया है, जिसने संविदा और आउटसोर्सिंग स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को प्रति माह 2 दिनों की विशेष छुट्टी देने की घोषणा की है। पीरियड लीव का पुराना इतिहास और अन्य राज्यों की स्थिति क्या है? बिहार में महिला कर्मचारियों को मिलने वाली यह विशेष छुट्टी असल में 'पीरियड लीव' के तौर पर जानी जाती है। इस व्यवस्था की सबसे पहली शुरुआत 34 साल पहले साल 1992 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान की गई थी, जब नियमित महिला कर्मियों के लिए 2 दिनों की विशेष छुट्टी का प्रावधान लागू हुआ था। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी अपने राज्य में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर्स की महिलाओं के लिए पीरियड लीव की नीति घोषित की है, लेकिन वहां केवल एक ही दिन की छुट्टी का प्रावधान है। वहीं बिहार अब संविदा और आउटसोर्सिंग महिलाओं के लिए भी पूरे 2 दिनों की छुट्टी लागू कर देश में सबसे आगे निकल गया है। ड्यूटी टाइमिंग के विवाद के बीच महिला कर्मियों के लिए बड़ी राहत बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मुख्य सचिव के एक पत्र को लेकर काफी घमासान मचा हुआ था। दरअसल, नए आदेश के मुताबिक नियमित महिला कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक तय है, जबकि संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को शाम 6 बजे तक यानी एक घंटा अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इस टाइमिंग को लेकर भले ही अभी थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन इसी बीच बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ट्वीट कर इस 2 दिनों की 'स्पेशल लीव' की घोषणा ने महिलाओं के चेहरे पर बड़ी खुशी ला दी है। महिला संगठनों का कहना है कि यह नई व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगी।

पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे कनेक्टिविटी, 33 लाख का सर्वे स्वीकृत

बालोतरा राजस्थान में बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. रेलवे ने बालोतरा से पचपदरा को जोड़ने वाली नई लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी के लिए बालोतरा से पचदरा तक 11 किमी नई लाइन के सर्वे के लिए 33 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी. साथ ही क्षेत्र का जोधपुर और अहमदाबाद व दिल्ली-जयपुर की ओर भी सम्पर्क स्थापित होगा. सर्वे काम पूरा होने के बाद बनेगी DPR बालोतरा से पचपदरा तक प्रस्तावित रेल रूट इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस नई रेल लाइन के निर्माण से पचपदरा स्थित रिफ़ाइनरी तक रेल मार्ग के माध्यम से पहुंच और सुगम होगी. साथ ही रोज़गार, व्यापार, कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए नए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा. 11 किलोमीटर नई लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद परियोजना की वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर DPR तैयार कर कार्य स्वीकृत रेलवे बोर्ड स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी. 35 साल पहले इस मार्ग पर चलती थी ट्रेन इस मार्ग पर लगभग 35 साल पहले ट्रेन चला करती थी, जिसे 1992 में बंद कर दिया गया था और बाद में रेलवे ट्रैक भी हटा लिया गया था. इस पुरानी ट्रेन की कहानी पचपदरा के नमक उद्योग से जुड़ी है. सैकड़ों सालों से नमक उत्पादन का केंद्र रहे पचपदरा में, स्थानीय नगर सेठ गुलाब चंद के आग्रह पर तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार ने 1939 में बालोतरा से पचपदरा साल्ट तक एक रेलवे ट्रैक बिछाया था. इस ट्रेन में नमक लदान के लिए वैगन के साथ दो यात्री कोच भी जोड़े गए थे. पचपदरा साल्ट की नमक खदानों से हज़ारों टन नमक रोज़ाना इसी ट्रेन से ढोया जाता था.1990 की बाढ़ में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ट्रेन बंद कर दी गई थी.

सस्ती हुई Tata Tiago EV, कम कीमत और लाइफटाइम बैटरी वारंटी के साथ मचा सकती है धूम

 नई दिल्ली Tata ने अपनी एंट्री लेवल कार Tiago का अपडेट जारी किया कर दिया है. कंपनी ने इस कार को पेट्रोल, सीएनजी और ईवी तीनों ही अवतार में लॉन्च किया है. टाटा टियागो ईवी (Tata Tiago EV) की कीमतें 6.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत इस लिए खास है क्योंकि कंपनी ने कार की कीमत को पहले से कम किया है। पहले ये कार 7.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर आती थी. इतना ही नहीं टाटा ने इस कार को BaaS (बैटरी एज सर्विस) के तहत भी लॉन्च किया है, जिसके बाद ये कार और भी सस्ती हो जाती है। अगर आप इस कार को बैटरी एज सर्विस के तहत खरीदते हैं, तो कीमत पेट्रोल वेरिएंट के बराबर पहुंच जाती है. यानी Tata Tiago EV BaaS की कीमतें 4.69 लाख रुपये से शुरू होती है. टियागो ईवी में कंपनी ने कई बदलाव किए हैं. कार डुअल टोन इंटीरियर, बेहतर सेफ्टी और अपडेटेड चार्जिंग क्षमता के साथ आती है। रेंज और चार्जिंग टाटा टियागो ईवी दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है. कार में 19.2kWh और 24kWh की बैटरी मिलती है. छोटी बैटरी वाला वर्जन 62 एचपी की पावर और 110 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. वहीं बड़ी बैटरी पैक के साथ 75 एचपी की पावर और 114 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है। 24kWh की क्लेम्ड रेंज 285 किलोमीटर की है. पहले इस बैटरी पैक के साथ कंपनी 293 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती थी. वहीं 19.2kWh बैटरी पैक वाले वेरिएंट की रेंज 226 किलोमीटर है. कंपनी की मानें तो रियल वर्ल्ड में छोटी बैटरी पैक में 160 से 170 किलोमीटर की रेंज मिलेगी, जबकि बड़े बैटरी पैक के साथ 200 से ज्यादा किलोमीटर की रेंज मिलेगी। टाटा की मानें, तो ये कार 40 परसेंट तेजी से चार्ज होगी. सिर्फ 18 मिनट चार्ज करने पर कार 100 किलोमीटर तक चल सकेगी. इसमें डीसी फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा. कार 3.3kW और 7.2kW के एसी चार्जर के साथ आएगी. इसमें जनरेटिव ब्रेकिंग मिलेगी। कंपनी का दावा है कि कार सिर्फ 5.7 सेकंड में 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. 24kWh वाले वेरिएंट पर कंपनी लाइफटाइम वारंटी दे रही है, जबकि 19.2kWh वाले वेरिएंट पर 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक वारंटी मिलेगी। एक्सटीरियर में क्या है नया? कार अब नए लुक के साथ आती है. इसमें आपको नया फ्रंट और रियर फेस मिलता है. हालांकि, साइड से कार अभी भी पहले की तरह ही लगती है. इसमें पतले एलईडी हेडलैम्प्स दिए गए हैं. कार में आई-ब्रो जैसे डीआरएल्स मिलते हैं, जो एलईडी हैं. इसमें 15 इंच के व्हील्स मिलते हैं। रियर में कंपनी ने एलईडी कनेक्टेड टेललैम्प्स दिए हैं. कार डुअल टोन ब्लैक रूफ के साथ आती है. टियागो में शार्क फिन एंटीना और डोर हैंडल पर क्रोम फिनिश दी गई है. कार में सेफ्टी को भी बेहतर किया गया है. अब टियागो ईवी में 6 एयरबैग स्टैंडर्ड मिलते हैं। टाटा टियागो ईवी 2026 में नया डैशबोर्ड मिलेगा. इसमें 10.25 इंच का फ्रीस्टैंड टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. इसका टीएफटी इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर ब्लूटूथ सपोर्ट के साथ आता है. कार में वायरलेस चार्जिंग, वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कारप्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, रियर एसी वेंट समेत कई फीचर्स मिलते हैं।

बोरवेल अनुमति के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, हरियाणा सरकार ने तय की 45 दिन की समयसीमा

चंडीगढ़. हरियाणा में अब 45 दिन के अंदर बोरवेल लगाने की अनुमति दी जाएगी। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण ने भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति देने से जुड़े कार्यों को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पदाभिहित अधिकारी के रूप में मुख्य तकनीकी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित समयावधि में अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति जारी कर दी जाए। 45 दिन में बोरवेल की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी मुख्य जल विज्ञानी के पास अपील की जा सकेगी। अगर फिर भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मामले को निपटाएंगे। वहीं, प्रदेश में अब भी 57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें से 13 हजार 360 किसान पूरा शुल्क जमा करा चुके हैं, जिन्हें अगस्त अंत तक ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। 31 दिसंबर 2023 तक किए गए आवेदनों के लिए मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पूरी लागत राशि जमा करा चुके उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 4241 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 9119 किसानों को छह महीने में बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जाएंगे। 10 बीएचपी तक आवेदन करने वालों को आफ-ग्रिड सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच आवेदन करने वाले 43 हजार 527 किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 16 हजार 323 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 27 हजार 204 किसान शामिल हैं।