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भूसा दान आदेश नहीं, लोक कल्याण का पुनीत अभियान

बरेली  निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा दान को लेकर जारी किए गए पत्र पर बरेली की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. विनीता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह किसी प्रकार का आदेश या दबाव नहीं, बल्कि लोकहित और जीव सेवा का स्वैच्छिक अभियान है। प्रदेश सरकार गो संरक्षण और निराश्रित गोवंश के पालन-पोषण को लेकर लगातार बड़े कदम उठा रही है। सनातन संस्कृति, लोक कल्याण और जनभागीदारी की भावना को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे इस अभियान को अब समाज का भी व्यापक समर्थन मिलने लगा है। बीएसए ने कहा कि इसी कड़ी में बीएसए कार्यालय की ओर से 22 मई 2026 को जारी पत्र में निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए भूसा दान की अपील की गई थी। यह कदम जीव-कल्याण के प्रति मानवीय संवेदना के तहत उठाया गया था, इसे किसी प्रकार के दबाव या आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए था। मीडिया में इसे भावना के विपरीत दृष्टिकोण से पेश किया गया। इस पत्र में अब आंशिक संशोधन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक सहयोग है। इसमें किसी भी शिक्षक या अन्य स्टाफ पर किसी प्रकार की बाध्यता या दबाव नहीं है। डॉ. विनीता ने मीडिया से अपील की कि इसे आदेश के रूप में न देखा जाए, बल्कि यह समाज और संस्कृति के संरक्षण से जुड़ा एक पुण्य कार्य है। हमारा मानना है कि गो-संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याण का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदेशभर में गोशालाओं के निर्माण, निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, चिकित्सा, चारा व आश्रय की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसमें सरकार के साथ आमजन भी स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। उद्देश्य यही है कि कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। बीएसए डॉ. विनीता ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) से कहा गया है कि इस अभियान में समाजसेवियों, युवाओं, जागरूक किसानों, ग्राम प्रधानों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाए। जब प्रशासन व समाज मिलकर काम करते हैं तो लोक कल्याण के बड़े लक्ष्य आसानी से पूरे होते हैं। भारतीय संस्कृति में गोसेवा को सदियों से पुण्य और धर्म का कार्य माना गया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का प्रयास है। निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा दान जैसी पहल केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत करती है। बीएसए ने कहा कि प्रदेशभर में गो संरक्षण अभियान के तहत गांवों और कस्बों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतें और सामाजिक संगठन भी इस मिशन में भागीदारी निभा रहे हैं। प्रयास है कि जन-सहयोग से गोवंश के लिए बेहतर आश्रय, भोजन और देखभाल की स्थायी व्यवस्था विकसित हो सके। यह अभियान किसी दबाव का नहीं, बल्कि संवेदना, संस्कृति और लोकहित का है, जिसमें समाज का हर वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार भागीदारी निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विनायक दामोदर सावरकर को किया याद, देशभक्ति और त्याग को बताया प्रेरणा

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वीर सावरकर केवल स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी ही नहीं बल्कि राष्ट्रचेतना, साहस और सामाजिक जागरण के प्रखर प्रतीक थे। उन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना संपूर्ण जीवन संघर्ष और तपस्या में समर्पित किया। कठिन परिस्थितियों और यातनाओं के बावजूद उनका राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत संकल्प कभी डगमगाया नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर ने समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी मुखर होकर आवाज उठाई और सामाजिक समरसता तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का सतत प्रयास किया। उनकी लेखनी, विचार और कर्म आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित, आत्मगौरव और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर अपने विचारों से आज भी हमारी युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें उनके आदर्श पथ पर अग्रसर होते हुए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। इस अवसर पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा भी उपस्थित थे।

सूरजपुर में खराब सोलर पम्प हुए दुरुस्त, ग्रामीणों के चेहरे पर फिर आई मुस्कान

रायपुर. शासन की संवेदनशील पहल और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सूरजपुर जिले के अत्यंत दूरस्थ वनांचल ग्राम बेलामी, पंचायत घुईडीह, विकासखंड ओड़गी में देखने को मिला, जहां लंबे समय से प्रभावित सोलर पम्प का सुधार कार्य मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर त्वरित रूप से पूरा कराया गया। वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए पेयजल और दैनिक उपयोग के पानी की समस्या किसी चुनौती से कम नहीं थी। ऐसे में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल क्रेडा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सोलर पम्प का सुधार कार्य पूर्ण किया, जिससे गांव में फिर से पानी की सुविधा सुचारु हो गई। सोलर पम्प के चालू होते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। गांव के लोगों ने इसे केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि संवेदनशील जनप्रतिनिधित्व और ग्रामीण हितों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। क्रेडा विभाग के जिला प्रभारी सुजीत श्रीवास्तव की उपस्थिति में सुधार कार्य सम्पन्न हुआ। इस दौरान विजय प्रजापति सहित अन्य मोहल्लेवासियों ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए उनका लगातार सक्रिय रहना ग्रामीणों में विश्वास और नई उम्मीद जगा रहा है।

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? सरकार दे सकती है पुरानी पेंशन योजना चुनने का मौका

 नई दिल्‍ली देशभर में 8वें वेतन आयोग को लेकर बैठक चल रही है. इस बीच, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन स्‍ट्रक्‍चर को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रिटायरमेंट सिस्‍टम के तहत सरकारी कर्मचारियों को अपनी पेंशन विकल्‍प चुनने में ज्‍यादा लचीलापन देने के संबंध में चर्चा चल रही है। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी संघ के एक सदस्य ने बताया कि अगर बातचीत सकारात्मक तौर पर जारी रहती है, तो अगले दो से चार महीनों के भीतर प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई हो सकती है. हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अपनी पसंद की पेंशन सेलेक्‍ट करने का विकल्‍प पेंशन में लचीलेपन और कर्मचारियों की पसंद को लेकर पॉजिटिव बातचीत हो रही है. कर्मचारी रिटायरमेंट बेनिफिट्स के संबंध में ज्‍यादा क्लियरटी और सुरक्षा चाहते हैं. अगर बातचीत सही रहती है और प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो आगे कर्मचारियों को अपनी पसंद का पेंशन मिल सकता है। पुराने पेंशन बहाली की मांग यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि चल रहे 8वें वेतन आयोग के परामर्शों के दौरान NPS वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन संबंधी चिंताएं सबसे बड़े मुद्दों में से एक के रूप में उभरी हैं. इनमें से ज्‍यादातर कर्मचारी पुराने पेंशन बहाली को लेकर आयोग से मांग कर रहे हैं। अभी NPS के जरिए मिलता है पेंशन अभी 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती किए गए ज्‍यादातर केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्‍टम के तहत आते हैं, जो कंट्रीब्‍यूशन बेस्‍ड है और मार्केट के प्रदर्शन पर रिटर्न मिलता है. NPS के तहत कर्मचारी अपने सैलरी का एक हिस्‍सा पेंशन में योगदान देता है, जबकि सरकार भी अलग से योगदान देती है। इसके बाद, मार्केट रिटर्न और जमा फंड पर निर्भर करता है कि आपको कितना पेंशन मिलेगा. जबकि पुरानी पेंशन योजना (OPS) अंतिम प्राप्त वेतन और महंगाई भत्ता (DA) से जुड़ी गारंटीकृत पेंशन देती थी। यूपीएस का भी है विकल्‍प हाल ही में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन योजना (UPS) शुरू की है, जो कंट्रीब्‍यूश्‍न बेस्‍ड पेशन को कुछ तय पेंशन सुरक्षा देती है. चर्चाओं में शामिल कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, नए प्रस्‍ताव से कर्मचारियों को पेंशन सिस्‍टम के भीतर अलग-अलग पेंशन विकल्‍पों में से चुनने की अनुमति मिल सकती है।

झारखंड सरकार ने जारी की 30 नई क्लाइमेट-फ्रेंडली फसलें

 रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 30 नई फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक (10 साल) तक लगातार किए गए कड़े अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इन किस्मों को विकसित किया गया है। ये सभी फसलें उच्च उत्पादकता देने वाली, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील और पूरी तरह से जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट फ्रेंडली) हैं। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित राज्य वेरायटी रिलीज कमेटी (एसवीआरसी) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में विभाग के विशेष सचिव गोपाल तिवारी, बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के कुलपति डाॅ. एससी दुबे, अनुसंधान निदेशक डाॅ. पीके सिंह, विभिन्न संस्थानों के निदेशक और प्रगतिशील किसान नकुल महतो व मीनू महतो सहित कई विज्ञानी उपस्थित थे। किस संस्थान की कितनी किस्मों को मिली स्वीकृति? इस बैठक में राज्य के अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा तैयार की गई फसलों को हरी झंडी दिखाई गई: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू): वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सबसे अधिक 10 किस्में शामिल हैं। इनमें सोयाबीन और गेहूं की दो-दो तथा मक्का, फलारू (एरियल याम), अरहर, चारा जई, चारा घास और सरसों की एक-एक किस्म है। पलांडू केंद्र (ICAR-RCER): फार्मिंग सिस्टम रिसर्च सेंटर फॉर हिल एंड प्लेटो रीजन, पलांडू द्वारा विकसित 8 बागवानी और सब्जी किस्मों को मंजूरी मिली। आईआईएबी रांची: भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) की 4 आधुनिक धान किस्मों को विमोचन की स्वीकृति मिली। आईएआरआई हजारीबाग: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) हजारीबाग की 1 अरहर और 3 मक्का किस्मों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही क्षेत्र विस्तार के लिए 2 अन्य फसलों को भी स्वीकृति मिली। केंद्रीय वर्षा आधारित ऊपराऊं धान अनुसंधान केंद्र हजारीबाग: इस संस्थान द्वारा विकसित 2 विशेष धान किस्मों को भी हरी झंडी दिखाई गई। जारी की गई प्रमुख फसलों की पूरी सूची मंजूरी पाने वाली प्रमुख किस्मों के नाम इस प्रकार हैं: धान: सीआर धान 110, सीआर धान 215, स्वर्ण मोहन धान, आईआईएबी धान 1, आईआईएबी धान 2, आईआईएबी धान 3 और आईआईएबी धान 4। मक्का: बिरसा मक्का हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 2, भद्रिका क्वालिटी मेज हाइब्रिड 1 और शालीमार मेज हाइब्रिड 5। गेहूं व सरसों: बिरसा गेहूं 5, बिरसा गेहूं 6 और बिरसा भारत सरसों 1। दालें: बिरसा अरहर 3, वंशिका (अरहर) और पूसा अवंतिका (मसूर)। सब्जियां व अन्य: स्वर्ण रत्न (टमाटर), स्वर्ण प्रफुल्य (मिर्च), स्वर्ण अतुल्य (शिमला मिर्च), स्वर्ण यामिनी (करेला), स्वर्ण सुगंधा (सब्जी सोयाबीन), स्वर्ण सुपर्णा (चौलाई साग), स्वर्ण निधि (सेम) और बिरसा कोंकण फलारू 1 (हवाई रतालू)। चारा फसलें: बिरसा सोयाबीन 5, बिरसा सोयाबीन 6, बिरसा ओट 1 (चारा जई) और बिरसा दीनानाथ 1 (घास)। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) की 10 खास किस्में और उनकी खासियत बीएयू के विज्ञानियों द्वारा तैयार की गई ये 10 किस्में झारखंड की मिट्टी और मौसम के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं: 1. बिरसा मक्का हाइब्रिड 1 (डेवलपर: डाॅ. मणिगोपा चक्रवर्ती) इस किस्म की उत्पादन क्षमता 70 से 73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 10 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह फसल खरीफ के मौसम में 93 दिनों में और रबी में 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह तनाव सहनशील है और इससे 376 क्विंटल हरा चारा व 103 क्विंटल सूखा चारा भी प्राप्त होता है। 2. बिरसा कोंकन फलारू (डेवलपर: डाॅ. शुभ्रांशु सेनगुप्ता) यह झारखंड की पहली हवाई रतालू किस्म है जो 150 से 165 दिनों में तैयार होती है। इसकी बुलबिल उपज क्षमता 10 टन प्रति हेक्टेयर तक है। 3. बिरसा सोयाबीन 5 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) इस किस्म में 41.5 प्रतिशत प्रोटीन और 17 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। यह 115 से 118 दिनों में तैयार होती है और इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो मानक किस्मों से 28 प्रतिशत अधिक है। 4. बिरसा सोयाबीन 6 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) यह किस्म मात्र 105 से 108 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 39 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। 5. बिरसा अरहर 3 (डेवलपर: डाॅ. नीरज कुमार) यह मध्यम अवधि (178 से 180 दिन) में तैयार होने वाली अरहर की बेहतरीन किस्म है। इसकी उपज क्षमता 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो पुरानी मानक किस्मों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन देती है। 6. बिरसा ओट 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) पशुपालकों के लिए विकसित यह चारा किस्म प्रति हेक्टेयर 420 क्विंटल हरा चारा और करीब 25.7 क्विंटल दाना उत्पादन देती है। बहु-कट (मल्टी-कट) प्रणाली के लिए उपयुक्त इस चारे में 10.8 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन होता है। 7. बिरसा दीनानाथ 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) यह एकल कट प्रणाली के लिए उपयुक्त चारा घास है, जिसकी उपज क्षमता 468 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 8.4 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है। 8. बिरसा गेहूं 5 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) इस गेहूं की उत्पादन क्षमता 53 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह 106 से 109 दिनों में पक जाती. है। कुपोषण से लड़ने के लिए इसमें आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.6 पीपीएम) की मात्रा काफी अधिक रखी गई है। 9. बिरसा गेहूं 6 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) समय पर बुआई और सिंचित क्षेत्रों के लिए यह बेहद शानदार किस्म है, जिसकी उपज क्षमता लगभग 69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 120 दिनों में पकती है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.8 पीपीएम) प्रचुर मात्रा में मौजूद है। 10. बिरसा भारत सरसों 1 (डेवलपर: डाॅ. अरुण कुमार) कम पानी या वर्षा आधारित मध्यम भूमि के लिए यह किस्म सर्वोत्तम है। यह 108 से 111 दिनों में तैयार होती है और इसमें 40.1 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। इसकी संभावित पैदावार 26.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।  

5 स्पोर्ट्स कॉलेजों में रिकॉर्ड आवेदन, युवाओं का खेलों की ओर बढ़ा रुझान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार की खेलोन्मुख नीतियों और आधुनिक सुविधाओं का ही असर है कि सत्र 2026-27 में स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश के लिए रिकॉर्ड आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस बार प्रदेश के पांच स्पोर्ट्स कॉलेजों की 518 सीटों के लिए करीब 2600 छात्रों ने आवेदन कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश के युवा अब खेलों को केवल शौक नहीं, बल्कि अपने भविष्य और करियर के रूप में देखने लगे हैं। पिछले साल 1800 के करीब आए थे आवेदन लखनऊ, गोरखपुर, सैफई, सहारनपुर और फतेहपुर समेत कुल 5 स्पोर्ट्स कॉलेज में कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस साल 2600 के करीब आवेदन आये हैं। जबकि पिछले साल 1800 के करीब आवेदन आए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदन यह साबित करते हैं कि प्रदेश के युवाओं का भरोसा सरकारी खेल संस्थानों पर तेजी से बढ़ी है। इस बार चयन प्रक्रिया को पूरी तरह मेरिट और प्रदर्शन आधारित बनाया गया है। प्रारंभिक चयन परीक्षा 100 अंकों की रखी गई थी, जिसमें 50 अंक फिजिकल टेस्ट और 50 अंक स्किल एवं गेम टेस्ट के निर्धारित किए गए। दोनों परीक्षाओं में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य किया गया था।  3 से 6 जून के बीच होगी मुख्य चयन परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा में सेलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य चयन परीक्षा में शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में लखनऊ और कानपुर मंडल में पिछले साल 264 खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिसके सापेक्ष में इस वर्ष 393 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया है। मुख्य चयन परीक्षा भी 100 अंकों की होगी, जिसमें खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और खेल कौशल का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। खेलवार एवं कॉलेजवार मुख्य चयन परीक्षा का आयोजन 3-4 जून तथा 5-6 जून को किया जाएगा। इसमें फिजिकल टेस्ट के 50 अंक और गेम व स्किल टेस्ट के 50 अंक निर्धारित किए गए हैं।  परीक्षा में पास अभ्यर्थियों की होगी जैविक आयु जांच फिजिकल टेस्ट में न्यूनतम 40 प्रतिशत यानी 20 अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। खेल विशेषज्ञ मैदान पर अभ्यर्थियों की प्रतिभा का परीक्षण करेंगे। इसमें खेल तकनीक परीक्षा (स्किल टेस्ट) के लिए 30 अंक और गेम टेस्ट के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रदर्शन के आधार पर विशेषज्ञ अंक देंगे। मुख्य चयन परीक्षा का परिणाम खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा और चयन समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। मुख्य चयन परीक्षा के बाद अंतिम श्रेष्ठता सूची तैयार कर कॉलेज वेबसाइट, खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा। मुख्य चयन परीक्षा की श्रेष्ठता सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच केंद्रीय व्यवस्था के तहत कराई जाएगी। विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग जिलों में यह प्रक्रिया होगी। अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा संपन्न अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच अभिभावकों की सहमति से कराई जाएगी। जैविक आयु जांच में उपयुक्त पाए गए अभ्यर्थियों की काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इसमें प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर रिक्त सीटों और कॉलेज वरीयता के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रबंध समिति उत्तर प्रदेश के सचिव एवं स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ के प्रधानाचार्य दीपेंद्र यादव ने बताया कि प्रारंभिक ट्रायल पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया गया है और अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि इस सत्र की तुलना में अगले सत्र 3 से 4 गुना ज्यादा आवेदन आएं।

प्रदेश के 97 हजार गांवों में स्वच्छ जलापूर्ति में अहम भूमिका निभा रही महिलाएं

लखनऊ, 28 मई: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) अभियान को महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन का बड़ा जरिया बना दिया है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाओं के विशेष समूह को इससे जोड़कर न केवल स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाया गया है। गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के बदले मिलने वाले मानदेय से ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुले हैं। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि इस मिशन के तहत प्रदेश के लगभग समस्त ग्राम पंचायतों और राजस्व गांवों में 05-05 महिलाओं के समूह को फील्ड टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गयी है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 97,070 गांवों में इन प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा पूरी सक्रियता के साथ जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य किया जा रहा हैं। यह महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों एवं घरेलू नलों के जल नमूनों की नियमित जांच कर रही हैं। गुणवत्ता जांच की इस निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 63,700 जल गुणवत्ता नमूनों का परीक्षण पूरा किया जा चुका है। पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार खत्म ग्राम स्तर पर यह महिलाएं एफटीके के जरिए पाइप लाइन, ट्यूबवेल समेत अन्य पेयजल स्रोतों में हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया का पता लगा रही हैं। संदिग्ध या दूषित जल स्रोतों की समय पर पहचान होने पर विभाग को तुरंत सूचना देती हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली विभिन्न जलजनित बीमारियों की रोकथाम तुरंत की जा सके। पहले जहां पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से दूषित जल स्रोतों का पता चलते ही उन पर तत्काल कार्रवाई करना संभव हो पा रहा है। अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का माध्यम यह कार्यक्रम न केवल पानी की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का जरिया भी बन रहा है। फील्ड टेस्टिंग कार्य से जुड़ी इन महिलाओं को उनके द्वारा किए जाने वाले परीक्षण कार्य के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान (मानदेय) किया जा रहा है। इन्हें प्रति जांच 20 रुपये की दर से अधिकतम 20 जांच के लिए 400 रुपये का भुगतान मिल रहा है। यह व्यवस्था ग्रामीण परिवेश में रह रही महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय अर्जित करने और स्वरोजगार से जुड़ने का एक बेहतरीन माध्यम बन गई है। महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण महिलाओं को इस कार्य के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन के अंतर्गत 'जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस कार्यक्रम' के तहत विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। 1.    फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) को सही तरीके से संचालित करना। 2.    विभिन्न पेयजल स्रोतों से जल नमूनों का सुरक्षित संग्रहण (कलेक्शन) करना। 3.    पानी में मौजूद विभिन्न प्रकार के पैरामीटर्स की बारीकी से जांच करना। 4.    जांच के बाद तैयार रिपोर्टिंग को मोबाइल ऐप और रजिस्टर में दर्ज करना। 5.    सुरक्षित पेयजल के मानकों एवं स्वच्छता से जुड़ी अन्य आवश्यक जानकारियां प्राप्त करना।

कोविड राहत खत्म, एफआरबीएम एक्ट के तहत झारखंड की ऋण सीमा अब और कड़ी

रांची  केंद्र सरकार ने राज्यों को दी जानेवाली ऋण राशि में अब गैर बजटीय उधारी को भी जोड़ने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना राज्यों को दे भी दी गई है। इस प्रकार नई व्यवस्था में राज्यों के लिए ऋण लेना पहले से कठिन हो जाएगा। झारखंड सरकार के लिए मुसीबत की बात यह है कि इसमें गैर बजटीय उधारी को भी शामिल करने की बात कही गई है। ऐसा हुआ तो राज्यों को एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटि एंड बजट मैनेजमेंट ) एक्ट के तहत मिलनेवाली ऋण राशि पहले से कम हो जाएगी। कोविड काल में राज्यों को एक जीएसडीपी के हिसाब से चार प्रतिशत तक ऋण लेने की छूट दी गई थी और इसके ऊपर एक प्रतिशत ऋण बिना किसी शर्त के लिया जा सकता था। अब राज्यों को कोविड के कारण मिलनेवाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही गैर बजटीय उधारी को शामिल किए जाने से ऋण लेने की सीमा निर्धारित हो जाएगी। झारखंड सरकार पर कुल बकाया कर्ज की राशि 1.10 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी है। देश के कई राज्यों पर इससे भी अधिक कर्ज है। कर्ज लेने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2003 में एफआरबीएम एक्ट को पास कराया था। यह कानून राज्यों को एक निर्धारित सीमा में ऋण लेने को बाध्य करता है। अभी यह सीमा बजट के हिसाब से तीन प्रतिशत पर सीमित है। इसे कोविड काल में दो प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट केंद्र सरकार से मिली थी। इसमें एक प्रतिशत सशर्त छूट थी तो एक प्रतिशत पर कोई शर्त नहीं थोपा गया था। अब राज्यों को मिलनेवाली गैर बजटीय उधारी को भी सम्मिलित करने के केंद्र के निर्देश के आलोक में वित्त विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव भी पारित करा लिया है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए उधारी की सीमा और भी नियंत्रित हो जाएगी। आम तौर पर राज्य सरकार को विभिन्न एजेंसियों से विकास योजनाओं के लिए ऋण की राशि मिलती रहती है। नई व्यवस्था में इसको भी राज्य के ऊपर कुल ऋण में जोड़कर देखा जाएगा। झारखंड पर पहले से ही 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है कर्ज झारखंड सरकार पूर्व में ही विभिन्न एजेंसियों से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उठा चुकी है।अलग-अलग वर्षों में विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उधारी ली गई है। कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी राज्य सरकार बाजार से भी कर्ज उठाती है। चालू वित्तीय वर्ष में भी राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई राज्यों की प्री-बजट बैठक के दौरान मैंने यह मामला उठाया था। एफआरबीएम की सीमा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक करने की मांग की थी। तीन प्रतिशत के दायरे में ही झारखंड को और भी ऋण मिल सकता है। निर्धारित अनुपात को देखें तो राज्य सरकार अभी आठ हजार करोड़ रुपये और ऋण ले सकती है। अच्छी बात यह है कि हमें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ रही है। गैर बजटीय ऋण को जोड़कर हमारे अधिकारों को रोका नहीं जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड।  

भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, अस्पतालों और बिजली व्यवस्था पर सीएम योगी की नजर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव के खतरे को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को सतर्क रहते हुए प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कि आमजन को गर्मी से राहत दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड, दवाएं, आइस पैक, ओआरएस और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। सीएम योगी आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्य पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ संचालित किए जाएं। विशेष रूप से श्रमिकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजदूरों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने इसके साथ ही आमजन से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि लोग दोपहर में तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और हल्के, सूती या खादी के ढीले कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अपील की कि ऐसी किसी भी लापरवाही से बचें, जिससे आग लगने की आशंका पैदा हो सकती है।

हरियाणा को दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे की सौगात, यात्रा समय में होगी बड़ी कटौती

चंडीगढ़. केंद्र सरकार द्वारा हाई-स्पीड दिल्ली-कटरा कारिडोर को मंजूरी दिए जाने से हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इस परियोजना के पूरा होने पर हरियाणा के पांच शहरों में आवागमन सुगम होने का रास्ता साफ हो गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत अधिसूचना जारी कर इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल कर लिया है। इसके बाद अब भूमि अधिग्रहण, रूट तय करने और अन्य विकास कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली में रानीखेड़ा गांव के पास एनएच-344एम से शुरू होगा और जसौर खेरी गांव के पास कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इसके बाद यह हरियाणा और पंजाब के कई शहरों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के कटरा तक पहुंचेगा। हरियाणा में प्रस्तावित मार्ग सोनीपत के खरखौदा, गोहाना, बुटाना, कलायत और बारटा से होकर निकलेगा। वहीं, पंजाब में यह गुलजारपुर, पातड़ां, भवानीगढ़, धूरी, मलेरकोटला, अहमदगढ़, मुल्लांपुर दाखा, नूरमहल, करतारपुर और गुरदासपुर बाइपास जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा। आखिर में यह कटरा के पास एनएच-144 से जुड़ेगा। केंद्र सरकार का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से दिल्ली से कटरा तक यात्रा तेज और आसान होगी। इससे माल ढुलाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सडक़ सुविधा मिल सकेगी। यह परियोजना उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक कारिडोर साबित हो सकती है। इससे छोटे शहरों में निवेश बढ़ने, लाजिस्टिक्स पार्क, होटल और सडक़ किनारे अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। दिल्ली-कटरा एनई-5 एक्सप्रेसवे बनने के बाद हरियाणा से जम्मू-कटरा की यात्रा में काफी समय कम होने की उम्मीद है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यात्रा समय में चार से छह घंटे तक की कमी आ सकती है। अभी हरियाणा के ज्यादातर हिस्सों से कटरा पहुंचने में सडक़ मार्ग से करीब 10 से 14 घंटे तक लग जाते हैं।