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सादगी का संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बस में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ पहुंचे उज्जैन

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सादगी, मितव्ययिता और सुशासन के मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रशासनिक खर्चों में संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने काफिले में वाहनों की संख्या सीमित रखते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ एक ही बस में सवार होकर इंदौर से उज्जैन तक की यात्रा की। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिये केवल तीन अन्य वाहन ही साथ रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल सादगीपूर्ण प्रशासन, ईंधन बचत और अनावश्यक खर्चों में कमी की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जल गंगा संवर्धन अभियान सहित विभिन्न विकास कार्यों एवं जनहित योजनाओं पर चर्चा भी की।  

अब PNG और LPG दोनों रख सकेंगे उपभोक्ता, गैस सिलेंडर पर नया अपडेट

नई दिल्ली शहर बदलते हैं, तो सामान तो पैक हो जाता है, लेकिन रसोई की गैस वाली मुसीबत कई लोगों के लिए 'गले की हड्डी' बन जाती थी. अक्सर लोग पीएनजी यानी पाइप वाली गैस लेने से कतराते थे, क्योंकि डर यही रहता था कि अगर कल को कहीं और शिफ्ट होना पड़ा, तो फिर से नए कनेक्शन के चक्कर में कौन धक्के खाएगा. अब दिल्ली सरकार और केंद्र के नए आदेश के बाद इस मामले में भी राहत मिल रही है. दरअसल, सरकार ने एलपीजी नियमों में गजब के बदलाव किए हैं, जिसके बाद अब आपका पुराना कनेक्शन 'डेड' नहीं होगा, बल्कि उसे 'पॉज' माना जाएगा। अगर आपके घर में भी नया पीएनजी कनेक्शन लगा है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है. HPCL ने ग्राहकों को बताया है कि जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन एक्टिव हो चुका है, उनके पास अब 2 रास्ते हैं. या तो वे पीएनजी लगने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर करके हमेशा के लिए खत्म कर दें, या फिर एक खास ट्रांसफर वाउचर ले लें. इस ट्रांसफर वाउचर का फायदा यह है कि अगर आप भविष्य में किसी ऐसे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की पाइपलाइन मौजूद नहीं है, तो आप इसी वाउचर की मदद से अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन फिर से चालू करवा सकते हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूशन को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सरकार इस दिशा में काफी तेजी से कदम उठा रही है. HPCL ने कहा है कि ये नई गाइडलाइंस 25 मई 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं. नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बदले हुए नियम के बारे में खुद को अपडेट रखें और बिना किसी गड़बड़ी के सुचारू रूप से गैस सप्लाई का लाभ उठाने के लिए इन नए नियमों का पालन करें. यह पूरा फैसला असल में सरकार के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस अमेंडमेंट ऑर्डर 2026 के तहत लिया गया है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने नोटिफाई किया है। इस समय इस तरह के कड़े और सूझबूझ वाले नियमों की जरूरत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर गैस और ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. मध्य पूर्व में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे भारी तनाव और संकट की वजह से दुनिया भर में गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस रास्ते में पैदा हुई रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में गैस की किल्लत की स्थिति बन गई है, जिससे कच्चे माल और गैस के दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत की एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर हमारे देश की घरेलू गैस सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कैसे मिलेगी गैस की सुविधा नियम ये है कि पीएनजी लगवाने के 30 दिनों के भीतर आपको अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन बंद करने की अर्जी देनी होगी, लेकिन इसका फायदा 'ट्रांसफर वाउचर' में है. अगर आप कल किसी ऐसे शहर या इलाके में शिफ्ट होते हैं, जहां पाइप वाली गैस नहीं है, तो बस ये वाउचर दिखाइए और अपना सिलेंडर वाला कनेक्शन फिर से चालू करवा लीजिए. यानी कि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेपरवर्क की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। किसके लिए है ये काम की खबर? खासकर उन लोगों के लिए जो काम के सिलसिले में शहर-दर-शहर भटकते हैं, या फिर वो छात्र जो रेंट पर रहते हैं. अब आप बेफिक्र होकर पीएनजी अपनाएं, क्योंकि सुरक्षा और सुविधा के बीच अब आपको किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सरकार का यह कदम वाकई में आम आदमी की 'किचन लाइफ' को बहुत सहूलियत देने वाला है। कुल मिलाकर, यह नियम उन लोगों के लिए किसी 'वरदान' से कम नहीं है जो बार-बार घर बदलते हैं. अब 'ट्रांसफर वाउचर' के जरिए आपकी गैस की गाड़ी कभी नहीं रुकेगी. बस अपने पेपर संभाल कर रखिए और बेफिक्र होकर अपनी रसोई को स्मार्ट बनाइए।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज संकट के कारण पैदा हुई गैस की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार के लिए अपने घरेलू संसाधनों का सही और सटीक इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है. यही वजह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह नया संशोधन उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है जिनकी नौकरियां ट्रांसफरेबल हैं या जो अक्सर घर बदलते रहते हैं. सरकार ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किरायेदारों और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले छात्रों को भविष्य में कोई दिक्कत न हो. मान लीजिए आज आप किसी ऐसे फ्लैट में रह रहे हैं जहां पीएनजी लगी है, लेकिन कल को किसी कारण से आपको किसी ऐसी जगह जाना पड़े जहां अभी पाइपलाइन नहीं बिछी है, तो आपके पास मौजूद ट्रांसफर वाउचर सिस्टम ही आपके काम आएगा। यह नया नियम असल में केंद्र सरकार के 'एक घर, एक गैस कनेक्शन' वाले बड़े अभियान का एक अहम हिस्सा है. सरकार का मुख्य उद्देश्य डुप्लिकेट एलपीजी कनेक्शनों के इस्तेमाल पर लगाम लगाना, सब्सिडी का फायदा सीधे सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और होर्मुज संकट जैसी वैश्विक दिक्कतों के बीच एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी बाजारों में से एक है, जहां एचपीसीएल, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले और मार्केट रेट वाले सिलेंडरों की डिलीवरी करती हैं, इसलिए इस पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और व्यवस्थित करना बेहद जरूरी हो गया था।

छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने लाना हमारा उद्देश्य: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

ASDDF फॉर्मूला के तहत वोटर एब्सेंट, शिफ्ट, डेथ, डुप्लीकेट या फॉरेन नेशनल मतदाताओं की सूची अपडेट की जाएगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बुधवार को कहा कि 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर तय नियमों के अनुसार यहां SIR की प्रक्रिया शुरू करेंगे। एक महीने के अंदर इसे पूरा किया जाएगा। इसके लिए आयोग ने ASDDF फॉर्मूला तैयार किया है। बीएलओ मौके पर जाकर देखेंगे कि क्या कोई वोटर एब्सेंट है, कहीं और शिफ्ट हो गया है, डेथ हो गई या डुप्लीकेट मतदाता है या फॉरेन नेशनल है। ऐसे कारण अगर आस-पड़ोस से पूछताछ और लिस्ट की चेकिंग के बाद मिलते हैं तो वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाएगा। अशोक कुमार ने बताया कि BLO जब लोगों के घर आएंगे, तो वे दो कॉपियों वाला एक एन्यूमरेशन फॉर्म देंगे। इसकी एक कॉपी भरकर वापस बीएलओ को देनी होगी। अगर आपका घर बंद मिलता है या आप बीएलओ से नहीं मिल पाते हैं, तो वे आपके घर में फॉर्म छोड़कर चले जाएंगे। नियम के मुताबिक, बीएलओ को एक घर में कम से कम तीन बार चक्कर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। तब ASDDF के तहत उनका नाम काटा जाएगा। ऑनलाइन फॉर्म भरने का विकल्प भी खुला रखा गया है। वेबसाइट पर मौजूद है पुराना रिकॉर्ड जनता को अपने पुराने रिकॉर्ड ढूंढने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए वेबसाइट voters.eci.gov.in पर साल 2002 की वोटर लिस्ट अपलोड कर दी गई है। जो लोग 2002 से दिल्ली में स्थायी रूप से रह रहे हैं, वे वहां अपना ब्योरा देख सकते हैं। फॉर्म पर BLO का नाम और नंबर अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। फॉर्म भरने में समस्या आने पर या 2002 की लिस्ट नाम न मिलने पर बीएलओ से जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए दिल्ली में 13,033 बीएलओ की ड्यूटी लगाई जाएगी। क्या है ASDDF? वोटर एब्सेंट (A) है, कहीं और शिफ्ट (S) हो गया है, डेथ (D) हो गई है या डुप्लीकेट (D) मतदाता है या फॉरेन नेशनल (F) है। अशोक कुमार ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म पर संबंधित बूथ के बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। जिन्हें फॉर्म भरने में समस्या आ रही है या 2002 की सूची में उनका नाम नहीं मिल रहा है, तो सीधे बीएलओ को फोन करके जानकारी ले सकते हैं। इसके लिए राजधानी में 13,033 बीएलओ को जमीन पर उतारा जा रहा है। सरकारी अमले के साथ-साथ इस काम में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए 6 प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए 29,758 बूथ लेवल एजेंट भी फील्ड में सक्रिय रहेंगे दिल्ली से बाहर से आने वाले कैसे खोजें अपना नाम अगर 2002 के बाद दिल्ली में आकर बस गए हैं, तो आपका नाम जिस राज्य से आप आए हैं, वहां की 2002 से 2005 की SIR सूची में दिखेगा। इसके लिए आपको ईसीआई की वेबसाइट voters.eci.gov.in में जाना होगा। यहां 'सर्च योर नेम लास्ट एसआई' पर क्लिक करें। फिर 'सर्च बाय इलेक्टर डिटेल्स' में अपनी जानकारी भरकर डिटेल्स प्राप्त करें। दिल्ली के लोग ऐसे खोजें अपना नाम www.ceo.delhi.gov.in पर जाएं। जहां आपको सर्च बार में EPIC नंबर इलेक्टर डिटेल और पोलिंग स्टेशन के विकल्प दिखाई देंगे। इनसे आप 2002 की मतदाता सूची की डिटेल्स निकाल सकते हैं। यदि 2002 का EPIC नंबर मालूम है तो अपना नंबर और कैप्चा एंटर करें। अगर इलेक्टर डिटेल से सर्च करना चाहते हैं तो इसके ऑप्शन में जाकर AC नंबर भरें।  

ताजमहल से लेकर बटेश्वर तक सभी स्मारक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की होगी संख्या अंकन

आगरा  जन-जन की गणना का कार्य गति पकड़ रहा है। प्रगणक प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग करते हुए नंबर आवंटित कर रहे हैं। इसमें ताजमहल, आगरा किला सहित सभी स्मारक, कमिश्नरी, कलक्ट्रेट भी शामिल हैं। जनगणना ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150 और बटेश्वर को 170 नंबर में अंकित किया गया है। जनगणना ठीक तरीके से करने के लिए जिले को 23 जोन में बांटा गया है। जनगणना के लिए 11 हजार प्रगणक लगाए गए हैं। जिले में 16 साल के बाद 22 मई से जनगणना शुरू हुई है जो 20 जून तक चलेगी। प्रत्येक प्रगणक को 180 से 200 मकानों का सर्वे करना होगा। सबसे पहले प्रत्येक मकान की जियो टैगिंग की जाएगी। जिला जनगणना अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि विश्वदाय स्मारक ताजमहल को एक नंबर, आगरा किला को 150, सिकंदरा स्मारक को 47, फतेहपुर सीकरी स्मार को 40, बटेश्वर को 170 नंबर में चिन्हित किया गया है। सभी स्मारकों, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों, स्कूल-कालेजों की जियो टैगिंग होगी। फील्ड में उतरेंगे सुपरवाइजर, लापरवाही पर मुकदमा नगर निगम को चार जोन में बांट जनगणना हो रही है। जनगणना कार्य को गति देने और प्रत्येक वार्ड में प्रगति को लेकर बुधवार को अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार ने बैठक की। बैठक में अपर नगरायुक्त ने कहा कि सभी सुपरवाइजर प्रतिदिन फील्ड में जाकर प्रगणकों से गणना कार्य कराएं और कार्य की नियमित मानीटरिंग करें। जिन प्रगणकों और सुपरवाइजरों द्वारा कार्य में रुचि नहीं दिखाई जा रही है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कई स्थानों पर प्रगणकों द्वारा अभी तक ड्यूटी ज्वाइन नहीं की गई है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे प्रगणकों और सुपरवाइजरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बैठक में उपनगर आयुक्त डा. सरिता सिंह, सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम मौजूद रहे। सही और सटीक दें जानकारी जनगणना प्रमुख मनीष बंसल ने कहा कि प्रगणकों द्वारा मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति से 33 प्रश्नों के उत्तर पूछे जाएंगे। लोगों को प्रश्नों के उत्तर सही और सटीक देने होंगे। प्रश्नों के उत्तर गलत न दें और न ही टालमटोल करें।  

टिटहरी के 4 अंडों ने जगाई अच्छी बारिश की उम्मीद

भोपाल  दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में एक झिरिया के पास हाल ही में टिटहरी (रेड-वॉटल्ड लैपविंग) के 4 अंडे पाए गए हैं। सामान्यतः टिटहरी 2 या 3 अंडे देती है, जबकि 4 अंडों का समूह अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह रोचक मान्यता प्रचलित है कि यदि टिटहरी के घोंसले में 2 से अधिक अंडे हों, तो अच्छी और लंबे समय तक वर्षा होने की संभावना रहती है। झिरिया क्षेत्र में 4 अंडों का पाया जाना स्थानीय लोगों और वन अमले के बीच अच्छी बारिश की उम्मीदों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। यद्यपि इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, फिर भी सदियों से संचित लोकज्ञान और प्रकृति अवलोकन की समृद्ध परंपरा पर ग्रामीण अंचलों में आज भी भरोसा किया जाता है। खुले पथरीले और कंकरीले भूभाग पर बिना पारंपरिक घोंसले के दिए गए ये अंडे प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं। अंडों का रंग और बनावट आसपास की मिट्टी एवं पत्थरों में इस प्रकार घुल-मिल जाते हैं कि उन्हें पहचान पाना कठिन हो जाता है, जिससे उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। वन अधिकारियों के अनुसार, ऐसे पारंपरिक दावों का व्यवस्थित अभिलेखन और दीर्घकालीन अध्ययन भविष्य में रोचक निष्कर्ष दे सकता है। दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में झिरियों के संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों से इन क्षेत्रों में पक्षियों एवं अन्य जीवों की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। टिटहरी जैसे संवेदनशील पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि प्राकृतिक आवास और जलस्रोत पुनः जीवंत हो रहे हैं।  

जल संरक्षण अभियान को जनभागीदारी से मिला नया आयाम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्राचीन अहिल्या कुंड के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सभी से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जल बचा कर भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत कबीरदास एवं संत रहीम के दोहों का उल्लेख करते हुए जल की महत्ता को सरल एवं प्रेरणादायी ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को जीवन, संवेदना और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। उन्होंने ग्रामीणों से वर्षा जल संरक्षण, तालाबों और कुंडों के संरक्षण तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जल संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और जल गंगा संवर्धन अभियान से पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास सफल होंगे और आने वाले समय में प्रदेश जल समृद्धि की दिशा में नई पहचान बनाएगा। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, गौरव रणदिवे, श्रवण सिंह चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, आईजी अनुराग, कलेक्टर शिवम वर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, डीआईजी मनोज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राजेंद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।  

दूषित पानी और बाहर का खाना बना बीमारी की वजह, अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें

 भिवानी  लगातार बढ़ रही गर्मी अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। तेज तापमान और दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। वीरवार को पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज की ओपीडी बंद होने के बावजूद के अस्पताल के आपातकालीन विभाग में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। रोजाना 50 से 60 मरीज उल्टी-दस्त और पेट संबंधी समस्याओं को लेकर ओपीडी पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी की छुट्टियों में बच्चे बाहर खेल रहे हैं और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाने से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी और बाहर का तला-भुना खाना पेट संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह बन रहा है। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों को दवा के साथ खानपान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। दूषित पानी भी बढ़ा रहा समस्या अस्पताल में आने वाले मरीजों से बातचीत के दौरान सामने आया कि कालोनियों में सप्लाई हो रहा दूषित पानी भी एक मुख्य समस्या है। असल में शहर की अंदरूनी कॉलोनियों में सबसे अधिक दूषित पानी सप्लाई की समस्या बनी हुई है। सबसे अधिक बिचला बाजार, हालु बाजार, दिनोद गेट, नया बाजार, बर्तन बाजार, बाग कोठी, सराय चौपटा, हालुवास गेट, हनुमान गेट आदि क्षेत्र में समस्या बनी हुई है। डाक्टरों की सलाह, हल्का भोजन करें, धूप से बचें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से गर्मी में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। डाक्टरों का कहना है कि साफ और शुद्ध पानी पीएं, खुले में बिकने वाले कटे फल और फास्ट फूड से दूरी बनाएं। मसालेदार और ज्यादा तैलीय भोजन से परहेज करें तथा हल्का और सुपाच्य भोजन लें। बच्चों को तेज धूप में बाहर न भेजें और जरूरत पड़ने पर सिर ढककर ही बाहर निकलें। साथ ही शरीर को ढकने वाले सूती कपड़े पहनने और नियमित हाथ धोने की सलाह भी दी गई है। विशेषज्ञों ने छह माह तक के बच्चों को मां का दूध पिलाने पर भी जोर दिया है। गर्मी में इन बातों का रखें खास ध्यान     बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं     घर से निकलते समय सिर ढकें और पानी साथ रखें     साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत अपनाएं     खुले खाद्य पदार्थ और फास्ट फूड से दूरी रखें     हल्का और ताजा भोजन करें     पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीएं  

51 लाख किसानों को 45 हजार करोड़ से अधिक का सीधा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में खाद्य तथा रसद विभाग ने किसानों और गरीब परिवारों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का काम किया है। रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में गेहूं खरीद अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। इस दौरान कुल 51,70,117 किसानों को लाभ मिला। योगी सरकार की ओर से किसानों को 45,935.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश में गेहूं खरीद को सुचारु बनाने के लिए 5,837 गेहूं क्रय केंद्र संचालित किए गए, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत मिल रही है।  योगी सरकार की प्राथमिकता रही कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ समय पर मिले और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े। यही वजह रही कि खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। विभिन्न फसलों की खरीद से लाखों किसानों को मिला सीधा फायदा खाद्य तथा रसद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान खरीद के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक धान खरीद से 80,39,539 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। किसानों को इसके बदले 1,03,694.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।इसी प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 एवं 2025-26 के अंतर्गत ज्वार खरीद से 26,972 किसान लाभान्वित हुए हैं, जिन्हें 363.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं बाजरा खरीद से 1,48,718 किसानों को फायदा पहुंचा और उन्हें 1,854 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। किसानों के विश्वास को योगी सरकार ने किया मजबूत   इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य फसलों की खरीद को भी बढ़ावा दिया गया। खाद्य तथा रसद विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली ने प्रदेश में किसानों के विश्वास को मजबूत किया है। समय पर भुगतान, खरीद केंद्रों का विस्तार और पारदर्शी व्यवस्था ने यह साबित किया है कि योगी सरकार किसानों और गरीबों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

29 मई को लुधियाना कोर्ट में कामकाज ठप, बार एसोसिएशन ने किया बहिष्कार का ऐलान

लुधियाना. जिला बार एसोसिएशन लुधियाना ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ASJ) जसपिंदर सिंह हायर के रिटायरमेंट के अवसर पर 29 मई 2026 को “नो वर्क डे” घोषित किया है। यह निर्णय बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी बैठक में प्रधान एडवोकेट विपिन सग्गर की अध्यक्षता में लिया गया। जारी नोटिस के अनुसार, जसपिंदर सिंह हायर 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके सम्मान में जिला बार एसोसिएशन द्वारा 29 मई, शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे बार रूम में विशेष विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। बार एसोसिएशन ने सभी सदस्यों से सामूहिक निर्णय का पालन करने और समारोह में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। इसके साथ ही न्यायिक अधिकारियों, रेवेन्यू कोर्ट, कंज्यूमर कोर्ट, लोक अदालत, जुवेनाइल कोर्ट और लेबर कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि उक्त दिन वकीलों की अनुपस्थिति को देखते हुए किसी भी मामले में प्रतिकूल आदेश जारी न किए जाएं। बार एसोसिएशन के इस फैसले के चलते 29 मई को जिला अदालत परिसर में नियमित न्यायिक कार्य प्रभावित रहने की संभावना है।