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पेंच टाइगर रिजर्व में पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम से होगी वन्यजीव संरक्षण की निगरानी

भोपाल पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थापित की गई अत्याधुनिक पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम (PAWS) तकनीक ने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। एआई आधारित कैमरा नेटवर्क की सहायता से रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर मछली पकड़ने आए एक व्यक्ति को त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया है। पेंच टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित PAWS प्रणाली ने 26 मई को कोर क्षेत्र में मानव गतिविधि का अलर्ट जारी किया। यह क्षेत्र बाघों एवं अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की उच्च उपस्थिति वाला प्रतिबंधित इलाका है। अलर्ट प्राप्त होते ही वन विभाग का मैदानी अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और अवैध रूप से मछली पकड़ने आए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय, छिंदवाड़ा में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। इस सफल कार्रवाई ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग को प्रमाणित किया है। समय पर प्राप्त अलर्ट और त्वरित कार्रवाई से न केवल अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया गया, बल्कि संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को भी टालने में सफलता मिली। संबंधित क्षेत्र में बाघों की नियमित आवाजाही रहती है, जिससे किसी भी अनाधिकृत मानव प्रवेश से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली को मैदानी कार्यवाहियों के साथ जोड़कर कोर क्षेत्र की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण तथा मानव सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। पीएडब्ल्यूएस तकनीक भविष्य में भी वन अपराधों की रोकथाम और संरक्षित क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

3,540 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाई-स्पीड कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित करेगा

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री  मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी। आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी। पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे। किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा। मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा। व्यापक अधोसंरचना निर्माण इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी। महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर … Read more

हादसे में दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल, मौके पर मची अफरा-तफरी

उमरिया जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत तिवनी गांव के पास शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पुलिया पर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब दो दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जा रहे थे धार्मिक कार्यक्रम में जानकारी के अनुसार पाली से लगे ग्राम गिंजरी के ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान तिवनी गांव स्थित शनिधाम के पास पुलिया पर ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और ट्रॉली पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना तेज था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। हालांकि संयोग से ट्रैक्टर पुलिया के नीचे नहीं गिरा, अन्यथा दुर्घटना और भी भयावह हो सकती थी।  

जनसुविधा के साथ विकास कार्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मंत्री सारंग

भोपाल सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को निर्माणाधीन 10 लेन करोंद बायपास परियोजना का एनएचएआई, नगर निगम, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, मेट्रो कॉर्पोरेशन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य की प्रगति, यातायात व्यवस्था, जनसुविधाओं एवं निर्माण कार्य के दौरान उत्पन्न हो रही समस्याओं का मौके पर जायजा लेकर संबंधित आधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से करें पानी की व्यवस्था निरीक्षण में मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही के कारण पानी लाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण नागरिकों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिये तत्काल एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि जहां भी पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहां तत्काल अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अव्यवस्थाओं को लेकर की नाराजगी व्यक्त मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत कमियों एवं अव्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि करोंद बायपास परियोजना शहर के यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माण कार्य के कारण नागरिकों को अनावश्यक परेशानियां न उठानी पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात, आवागमन एवं दैनिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें। पानी एवं सीवेज लाइनों को व्यवस्थित रूप से करें शिफ्ट मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण एजेंसियां खुदाई करने से पहले पानी एवं सीवेज लाइनों की स्थिति देख लें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न न हों। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरी योजना एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाए, जिससे परियोजना समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके। ठेकेदार से लिया जाएगा आर्थिक मुआवजा मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही से पाइप-लाइन टूटने की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिये आर्थिक मुआवजा भी वसूला जाएगा। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो तथा निर्माण कार्य में आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।  

आम लोगों के लिए खुशखबरी! केंद्र सरकार लाई नई योजना, पैसे से लेकर बीमा तक मिलेगा फायदा

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी सुविधाओं के लिए स्कीम लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत सरकार एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी में है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने दी है। सरकार ने बढ़ाए कदम पेडनेकर ने बताया कि सरकार गिग वर्कर्स को सुविधाएं देने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स को लागू करने की हरी झंडी दी गई है। यह बोर्ड इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर काम करेगा। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड भी बनाया जा रहा है। इस फंड के जरिए सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद करेगी। इन योजनाओं के स्वरूप को अंतिम रूप देने के लिए सरकार फंड मैनेजर्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। सरकार की ओर से इसके लिए प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने कर्मचारियों का डेटा 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने को कहा गया है। इससे कामगारों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके। कंपनियों के लिए क्या प्लान? सरकार की योजना के तहत एग्रीगेटर कंपनियों का डेटा और ई-श्रम पोर्टल एक-दूसरे से सीधे जुड़ेंगे। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। कामगार मोबाइल ऐप के जरिए अपने अधिकारों और इस्तेमाल की जानकारी भी देख सकेंगे। गिग वर्कर्स कौन हैं? गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो पारंपरिक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से बाहर रहकर तय समय या प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र ठेकेदार और पार्ट-टाइम कर्मचारी आदि शामिल हो सकते हैं। वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे हैं जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे लोगों या कंपनियों को सेवाएं देते हैं। उदाहरण से समझें तो ओला-उबर के ड्राइवर या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी ब्वॉय प्लेटफॉर्म वर्कर की कैटेगरी में आते हैं। भारत में पहली बार नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और सरकार को उम्मीद है कि दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।

राजनाथ सिंह का बड़ा दावा, ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान घुटनों पर आया

नई दिल्ली  'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने मात्र चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर कर दिया। यह जानकारी शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत की निर्णायक इच्छाशक्ति, आधुनिक सैन्य क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट तालमेल का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत द्वारा अब तक लड़े गए युद्धों और अभियानों की तुलना में ऑपरेशन सिंदूर कई मायनों में अलग और अत्यंत प्रभावशाली रहा। दरअसल देश की सैन्य शक्ति, रणनीतिक क्षमता और सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक बन चुके ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुक्रवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक सैन्य अभियान पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में भारतीय सेनाओं के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूरा वातावरण गर्व, सम्मान तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।  इस दौरान रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास की एक अभूतपूर्व सफलता बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि शुक्रवार को जारी किया गया स्मारक प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी सामने लाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते, बल्कि उनमें नेतृत्व, साहस, मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं को बेहद मानवीय और प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि जब देश के सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तब राष्ट्र के नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें। रक्षा मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस प्रकाशन से प्रेरणा लें और ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनें जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के महत्व को गहराई से समझ सकें। समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक योजना, संयुक्त सैन्य समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर पर सैनिकों के साहसिक प्रदर्शन पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। स्मारक प्रकाशन को सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगा। 

पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना से जगमगा रहे मध्यप्रदेश के करीब 1.30 लाख घर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 'पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना' भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। आत्मनिर्भर ऊर्जा के साथ सशक्त भारत की दिशा में केन्द्र सरकार के बढ़ते कदमों का ही सुपरिणाम है कि आज देश के 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित हो गए हैं। इनमें मध्यप्रदेश के 1 लाख 29 हजार 971 घर शामिल हैं। ये सभी घर-परिवार अब बिजली बिल की चिंता से हमेशा के लिए मुक्त होकर स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा से रौशन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में स्थापित इन सोलर संयंत्रों से 456 मेगावॉट से अधिक स्वच्छ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी हो रहा है। केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के नेशनल पोर्टल के अनुसार इस योजना से अब तक प्रदेश के 1 लाख 34 हजार 436 परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। प्रदेश के पीएम सूर्य घर योजना हितग्राहियों को अब तक 901.92 करोड़ रुपये की अनुदान (सब्सिडी) राशि रिलीज की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदेश में 6 लाख घरों को 'पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना' के तहत सौर ऊर्जा से रौशन करने का लक्ष्य लिया गया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए तेजी से काम जारी है। विभाग को अब तक 2 लाख 4 हजार 601 आवेदन मिल चुके हैं।    

परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय और टीम भावना सर्वोपरि: सिंह

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी (एमपीयूडीसी) की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त प्रबंध संचालक  दिव्यांक सिंह ने परियोजना प्रबंधकों एवं संविदाकारों को निर्देशित किया है कि समस्त जलप्रदाय एवं मलजल योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च तकनीकी गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रबंधन इकाई, क्रियान्वयन इकाई, स्थानीय निकाय और संविदाकार आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें जिससे जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हो सके।  सिंह ने वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए संविदाकारों को कड़ी हिदायत दी कि वे प्राथमिकता के आधार पर सड़कों के जीर्णोद्धार (रोड रेस्टोरेशन) के शेष कार्यों को मानसून पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर जल प्रदाय के देयक वितरित करने और वाटर आईडी को प्रॉपर्टी आईडी से लिंक करने की प्रक्रिया को गति प्रदान करने के निर्देश दिए जिससे राजस्व प्रबंधन सुदृढ़ हो सके। भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगर प्रबंधन संस्थान में आयोजित बैठक में पूर्ण तथा प्रगतिरत कुल 134 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की बिंदुवार एवं सूक्ष्म समीक्षा की गई। अतिरिक्त प्रबंध संचालक ने रेखांकित किया कि परियोजना क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्याओं से वरिष्ठ प्रबंधन को समय रहते अवगत कराया जाए जिससे उनके त्वरित निवारण में कोई विलंब न हो। उन्होंने परियोजना प्रबंधकों को अनुबंधों की शर्तों का गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन करने का परामर्श भी दिया इससे संविदात्मक स्तर पर कोई गतिरोध उत्पन्न न हो। बैठक में विभिन्न बाह्य विभागों जैसे एमपीआरडीसी, एनएचएआई, जल संसाधन तथा एमपीआरडीए से लंबित अनुमतियों और अनापत्ति प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रकरणों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिससे विकास कार्यों की गति निर्बाध बनी रहे। समीक्षा बैठक के तकनीकी सत्र में परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का व्यापक प्रस्तुतीकरण प्रमुख अभियंता  आनंद सिंह एवं मुख्य अभियंता  शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें प्रत्येक परियोजना की अद्यतन स्थिति और आगामी कार्ययोजना को रेखांकित किया गया। बैठक का समन्वय उप परियोजना संचालक प्रशासन  राजीव रंजन पांडे द्वारा निष्पादित किया गया। बैठक में सहभागिता के रूप में एमपीयूडीसी की समस्त 10 क्षेत्रीय इकाइयों के परियोजना प्रबंधक, सहायक परियोजना प्रबंधक, संबंधित संविदाकार तथा परियोजना सलाहकार फर्मों के विषय-विशेषज्ञ एवं तकनीकी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

ग्रामवासियों के बीच पहुंचे उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मौके पर ही किया समस्याओं का समाधान

रायपुर गांव-गांव पहुंच रही सुशासन की योजनाएं – उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के कवर्धा विकासखंड के ग्राम जेवड़नखुर्द तथा बोड़ला विकासखंड के ग्राम मिनमीनिया में आयोजित सुशासन तिहार में ग्रामीणों के बीच पहुंचे एवं आमजनों से सीधे संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच सादगी और आत्मीयता के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने शिविर में दिव्यांगजनों की मांग पर त्वरित रूप से ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को नए आवास की चाबी भी सौंपी तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत अनेक हितग्राहियों को लाभान्वित किया।            इस दौरान उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सुशासन तिहार में शासन की योजनाएं अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। उन्होंने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि बरपेलाटोला से सिंघनपुरी तक 2.5 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण, मुख्य सड़क पोड़ी से उसलापुर नहर होते हुए बोधईकुंडा तक 4.5 करोड़ रुपए की सड़क, चरडोंगरी – कोठार मार्ग से सारंगपुरखुर्द नहर पार तक 2.6 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण तथा सूरजपुर से मोहगांव तक 3.58 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य किया जाएगा।   गांवों तक पहुंची प्रधानमंत्री आवास, शिविर में मिल रही निःशुल्क दस्तावेज सुविधा             उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए लंबे समय तक आंदोलन चलाया गया था और  सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक के पहले ही प्रस्ताव में प्रधानमंत्री आवास योजना को शामिल किया गया और पहली कैबिनेट में ही 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए। उन्होंने बताया कि ग्राम मिनमीनिया में 21 गांवों और ग्राम जेवड़नखुर्द में 15 गांवों के लिए शिविर आयोजित किया गया है और सभी गांवों में आवास की भी स्वीकृति की जा चुकी है।            उन्होंने बताया कि नए हितग्राहियों को भी जोड़ने के लिए नया सर्वे भी कराया गया है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि सुशासन तिहार शिविर में बी-1, खसरा और ऋण पुस्तिका जैसी आवश्यक दस्तावेज निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे है। अटल डिजिटल सेवा केंद्र, स्मार्ट क्लास, महतारी सदन और मिनी स्टेडियम से गांवों में बढ़ रहीं सुविधाएं            उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के अनेक गांवों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण अपने गांव में ही विभिन्न योजनाओं की राशि निकाल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 27 किस्तों में 27 हजार रुपए महिलाओं के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं, जिनकी राशि अब ग्रामीण अपने गांव में ही निकाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांवों के स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई है, जहां डिजिटल माध्यम और 3डी एनिमेशन से बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है।  दिव्यांगजनों को गतिशील बनाने के लिए स्कूटी प्रदान की जा रही है। महिलाओं की बैठकों के लिए महतारी सदन और युवाओं में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। सिंचाई परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ            उप मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 8.10 करोड़ रुपए की लागत से छीरपानी जलाशय से जुड़ी राम्हेपुर वितरक नहर एवं संबद्ध माइनर नहरों के सीसी लाइनिंग कार्य का भूमिपूजन कर निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने पर 1540 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और मानिकपुर, सिल्हाटी, बघर्रा, सारंगपुर कला, सिंधनुपरी एवं राम्हेपुर कला सहित 6 गांवों के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा छिरपानी नहर विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपए की घोषणा भी की गई है। इसके साथ ही भोरमदेव फीडर, दियाबार जलाशय, नेवारी और कोठार जलाशय में करोड़ों रुपए की लागत से नहर विस्तार और उन्नयन कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना एजेंसी, अधिकारियों और हम सभी की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों से उन्होंने स्वयं निगरानी रखने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तत्काल देने की अपील की। उप मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश          उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सुशासन तिहार शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से हितग्राहियों को मिल रहे लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा निर्देशित किया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल होकर दिया शुभाशीष            सुशासन तिहार शिविर के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने शिशुओं को अन्नप्राशन कराकर उन्हें शुभाशीष प्रदान किया तथा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म संपन्न कराई।            इस दौरान पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य  भगत पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत  कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  विजय पटेल,  मनीराम साहू,  लोकचंद साहू,  नितेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और ग्रामवासी उपस्थित रहे।  

मॉडल स्कूलों में नहीं मिले छात्र, झारखंड सरकार ने स्थानीय स्तर पर सीट भरने का लिया फैसला

रांची. राज्य के माॅडल स्कूलों में नामांकन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रवेश परीक्षा के परिणाम में हुई लंबी देरी और बेहद कम सफलता प्रतिशत के कारण इस बार भी हजारों बच्चों का अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई का सपना अधूरा रह गया। इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रह गई। जिसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने भी पूरी स्थिति पर खेद जताया है। परिषद अब इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत भी दिए हैं। अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा का आयोजन खुद जेईपीसी कराने की तैयारी में जुट गया है। ताकि परिणाम और नामांकन प्रक्रिया सरल कर समय पर पूरी की जा सके। जैक द्वारा जारी परिणाम के अनुसार इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रहने की आशंका पैदा हो गई है। पूरे राज्य में माॅडल स्कूलों में लगभग 3280 सीटें उपलब्ध हैं। ऐसे में अब अधिकांश स्कूलों में नामांकन के बावजूद सीटें रिक्त रह सकती हैं। दूसरी ओर अप्रैल माह तक छात्र-छात्राएं परिणाम का इंतजार करते रहे, जबकि अधिकतर निजी और सरकारी स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी थी। अब जब झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने माॅडल स्कूल परीक्षा 2026 का परिणाम जारी किया है तो स्थिति और चिंताजनक हो गई है। अब स्थानीय स्तर पर भरी जाएंगी सीटें माॅडल स्कूल प्रभाग प्रभारी धीरसेन ए. सोरेंग ने बताया कि खाली सीटों को अब स्थानीय स्तर पर भरने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार भी परिणाम में देरी से सत्र प्रभावित होगा। हालांकि नामांकन पूरा होने के बाद छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराया जा सके। उन्होंने कहा कि माॅडल स्कूल की वर्तमान नामांकन नीति में बदलाव की जरूरत है। यह योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इससे हाथ खींच लिया। अब राज्य सरकार इन स्कूलों का संचालन कर रही है, लेकिन पुरानी नीति ही लागू है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए आनलाइन प्रवेश परीक्षा अभी भी चुनौती बनी हुई है। डिजिटल संसाधनों और अंग्रेजी माध्यम की तैयारी के अभाव में बड़ी संख्या में बच्चे सफल नहीं हो पा रहे हैं। रिजल्ट में देरी से बढ़ी परेशानी प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के बाद महीनों तक परिणाम जारी नहीं होने से अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई अभिभावक इस उम्मीद में बच्चों का अन्य स्कूलों में नामांकन नहीं करा सके कि माडल स्कूल का परिणाम जल्द जारी होगा। लेकिन अप्रैल समाप्त होने के बाद परिणाम आने से अब उनके सामने विकल्प सीमित हो गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों के लिए माडल स्कूल कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सबसे बड़ा विकल्प माने जाते हैं। लेकिन समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अब कई बच्चों को सामान्य सरकारी स्कूलों का रुख करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं सीटें यह पहला अवसर नहीं है जब माडल स्कूलों में नामांकन प्रभावित हुआ हो। पिछले वर्ष भी अगस्त-सितंबर तक नामांकन प्रक्रिया चलती रही थी, जिसके कारण करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह गई थीं। इस बार स्थिति और गंभीर दिखाई दे रही है। राज्य के 82 माडल स्कूलों में नए सत्र की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। कई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पहुंच चुकी हैं और शिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई है। राजधानी रांची में आठ माडल स्कूल संचालित हैं, जहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि कई स्कूल अभी भी आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। क्या है माॅडल स्कूल योजना माॅडल स्कूलों की स्थापना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को छठी कक्षा में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इन स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई थी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा प्राप्त कर सकें। जहां कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा मिलती है।