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गर्मी से मिलेगी राहत! 2500 KM चौड़े बादलों की एंट्री, कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली भीषण गर्मी का सामना कर रहे उत्तर पश्चिम भारत को मौसम जल्द ही गुड न्यूज दे सकता है। खबर है कि भारत की ओर 2500 किलोमीटर चौड़े बादलों का समूह बढ़ रहा है। भारत के इनसैट-3डीएस उपग्रह ने ये तस्वीरें कैद की हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम सैटेलाइट द्वारा ली गई यह तस्वीर इस उपमहाद्वीप के ऊपर बारिश लाने वाले सिस्टम के सक्रिय होने का संकेत है। बादलों का यह समूह उत्तरी भारत में 2000 से 2500 किमी से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। मौसम विभाग ने इन तस्वीरों को शेयर किया है। तस्वीरों में उत्तर और मध्य भारत में फैला हुआ बादलों का विशाल झुंड दिख रहा है। बादलों का जमावड़ा आने वाले तूफानों व भीषण गर्मी के बाद राहत का संकेत है। बादलों का यह घना झुंड पाकिस्तान व उत्तर-पश्चिमी भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक फैला है। दिल्ली में झमाझम बारिश शुरू दिल्ली के कई हिस्सों में गुरुवार शाम को तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने से शहर में जारी भीषण गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी आई, जिस दौरान पालम में हवा की अधिकतम गति 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। गुरुवार को दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। गिरा राजधानी का तापमान मौसम में यह बदलाव कई दिनों की भीषण गर्मी के बाद आया है, जिसके दौरान दिल्ली के विभिन्न केंद्रों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में गुरुवार को शहर भर में अधिकतम तापमान में करीब तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। 31 मई तक होती रहेगी बारिश मौसम कार्यालय ने कहा कि शहर में बारिश और गरज-चमक की यह मौजूदा गतिविधि 31 मई तक जारी रहने की उम्मीद है। स्काईमेट वेदर के महेश पालावत ने कहा, 'राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही गरज के साथ बारिश शुरू हो चुकी है और शाम तक इस मौसम प्रणाली के दिल्ली तक पहुंचने और रात भर जारी रहने की संभावना है।' उन्होंने कहा कि शुक्रवार को तूफान की तीव्रता बढ़ने की संभावना है और यह सिलसिला 30 मई तक जारी रहने के आसार हैं। इसके बाद मौसम प्रणाली के 30 और 31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है। पालावत ने कहा, 'मॉनसून पूर्व वर्षा के इस दौर के दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में और अप्रैल में हुई मॉनसून पूर्व वर्षा से अधिक तीव्र रहने की संभावना है, जिससे पूरे शहर में व्यापक वर्षा होगी।' उन्होंने मौसम में आए इन बदलावों का कारण पर्वतों के ऊपर मौजूद पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को बताया, जिनसे शहर में नमी का स्तर बढ़ गया है।

योगी सरकार के प्रयास रंग लाए, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट

योगी सरकार के प्रयासों का असर, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई कमी एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मौत के आंकड़ों के सुधार कंगारू मदर केयर, सीपैप मशीन, मिल्क बैंक व नियमित टीकाकरण बने बड़े सहायक आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण करने का भी मिला फायदा लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में नवजात से पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। आंकड़ों में आया यह सुधार हजारों बच्चों के सुरक्षित जीवन, लाखों परिवारों की उम्मीदों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास की कहानी दर्शाता है। साथ ही जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने की चुनौती भी पेश करता है।  नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से 25, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 37 से 35 और पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्युदर 42 से 41 रह गई है। यह सर्वे प्रति 1000 बच्चों के हिसाब से किया गया है।      बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी पर उत्तर प्रदेश का उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होना, जहाँ बच्चों की मृत्यु दर में सभी आयु वर्गों में कमी आई है, सबके सामूहिक समर्पण, अथक परिश्रम और जमीनी स्तर पर निरंतर किए गए प्रयासों का प्रमाण है। यह रुझान उत्साहजनक हैं तो हमें यह भी याद दिलाते हैं कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी की रफ़्तार अभी भी उम्मीद से धीमी है और जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में खास बदलाव नहीं आया है। इससे साफ़ पता चलता है कि बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी और जीवन के पहले 48 घंटों के दौरान दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करेगा। स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ शालिनी त्रिपाठी के अनुसार प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई है। बीते तीन-चार सालों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को लगातार प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर लगाई जाने वाली सीपैप मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाओं व नियमित टीकाकरण भी शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में सहायक साबित हुए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में शुरू हुए मदर न्यूबार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू), जिसमें प्रसव के बाद मां-बच्चे को एक साथ वार्ड में ठहराया जाता है, से भी बड़ा लाभ हो रहा है।  रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने से जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मिली मजबूती वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स डेजी रानी ने बताया कि नर्सों को नवजात शिशु की देखभाल पर नियमित रूप से साप्ताहिक वर्चुअल लर्निंग सेशन और समय-समय पर आमने-सामने रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है। इन ट्रेनिंग से उन्हें नवजात शिशु के खतरे के लक्षणों को पहचानने, समय पर रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने और जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मजबूत करने में काफी मदद मिली है। वीरांगना अवंती बाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान ने बताया कि बहुत से बच्चों की मौत संक्रमण व अस्वच्छता के कारण भी हो जाती थी। अब अस्पतालों में स्वच्छता व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है कि शिशु के पास आने से पहले डाक्टर, नर्स के हाथ साफ हों, प्रसूता का डिलिवरी क्षेत्र साफ हो, बच्चे को लपेटने वाला कपड़ा साफ हो, बच्चे की नाल काटने वाला उपकरण व नाल में बांधी जाने वाली क्लिप स्वच्छ हो। अस्पतालों में स्वच्छता व संक्रमण कम होना भी शिशु मृत्यु दर कम होने की एक वजह है।

शिक्षकों के लिए खुशखबरी! SC ने बढ़ाई TET क्वालिफाई करने की डेडलाइन

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी की पात्रता हासिल करने की समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है। शीर्ष अदालत ने कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए अब 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। पहले यह डेडलाइन 31 अगस्त 2027 थी। कोर्ट ने यह फैसला कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया है। हालांकि अदालत ने उन याचिकाओं को फिर से खारिज कर दिया है जिसमें 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी टीचर्स को अनिवार्य टीईटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि देश में काम कर रहे सभी टीचरों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। ऐसे में टीईटी अनिवार्यता मामले में देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा अभी भी कायम है। कुछ दिन पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने राहत की मांग कर रहे शिक्षकों को दो टूक कहा था कि वे स्वार्थी न बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें, बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें जिन्हें क्वालिटी वाली एजुकेशन की आवश्यकता है। अदालत ने यह कड़ी टिप्पणी तब की जब वह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा पश्चिम बंगाल व केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई कईं टीईटी अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सर्वोच्छ न्यायालय के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का निर्देश दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। क्या है पूरा मामला आपको बता दें कि टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 3 साल ( सितंबर 2025 कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। यानी इन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु, यूपी, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे कुछ दिन पहले सुनावाई के दौरान तमिलनाडु ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अकेले उस राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। राज्य ने यह भी कहा था कि यदि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया गया, तो राज्य को शिक्षकों के बिना कक्षाएं चलानी पड़ेंगी। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता ने कहा, 'बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) बच्चों के लिए बनाया गया है। केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में सोचकर मतलबी मत बनिए और यह मत कहिए कि मुझे केवल अदालत से अपनी नौकरी की सुरक्षा के आदेश चाहिए और मैं बच्चों के बारे में नहीं सोचूंगा।'वे न्यायमूर्ति मनमोहन के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे और समीक्षा याचिकाकर्ताओं पर जवाब दे रहे थे। जस्टिस दत्ता ने याद दिलाई टीईटी वाली धारा जस्टिस दत्ता ने शिक्षा का अधिकार 2009 अधिनियम की धारा 23(2) का जिक्र किया था, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और शिक्षक शिक्षा संस्थानों की अपर्याप्तता के मामलों में शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। इसके बाद न्यायाधीश ने धारा 23(2) के दूसरे प्रावधान की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे 2017 में अधिनियम में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था। इसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत उन शिक्षकों को अतिरिक्त राहत दी गई थी, जिनके पास न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। उन्हें यह योग्यता प्राप्त करने के लिए चार वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया था।

छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि: मंत्री रामविचार नेताम ठोस रसायनिक उर्वरक के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया-डीएपी को दे रहे हैं बढ़ावा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री रामविचार नेताम रायपुर धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज इस आशय की जानकारी दी।          कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है। हमारी सरकार ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत जिसमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि हमारा किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वहीं खरीफ 2026 में हम अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है।              राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं। राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है। हम डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।           कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तिलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों के क्षेत्र में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है। वहीं क्लस्टर विकास, बागवानी के क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है। टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के तहत् 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है, जिसमें 461 क्लस्टर्स और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है। सॉइल हेल्थ के तहत् वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए। साथ ही, नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए राज्य के 126 पीएम स्कूलों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉइल टेस्टिंग लैब्स) स्थापित की जा चुकी हैं।             स्मार्ट इरिगेशन के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप‘ के तहत सूक्ष्म सिंचाई और लागत कम करने के लिए ड्रोन तकनीक व ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ (फसल + पशुपालन + मत्स्य + केंटकी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को इंटीग्रेट करके जून से जुलाई 2026 तक विशेष केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है। वहीं पीएम आशा योजना के अंतर्गत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी है।                    कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कृषि विकास की गति को और तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव और अपेक्षाएं भी रखी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धान प्रधान राज्य होने के कारण, फसल विविधीकरण को गति देने के लिए केंद्र से एक पृथक प्रोत्साहन नीति की मांग की गई है। साथ ही प्राकृतिक उत्पादों का एमएसपी प्राकृतिक और जैविक खेती के उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जाए।            मंत्री नेताम ने सम्मेलन में सप्लाई प्लान और खाद सब्सिडी उर्वरकों की समय पर उपलब्धता के लिए माहवार सप्लाई प्लान के अनुसार खाद प्रदाय की मांग के साथ ही डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अनुदान का प्रावधान किया जाए। वहीं उर्वरकों की अत्यधिक खपत और बर्बादी को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों की 25 किलोग्राम की छोटी बोरी तैयार की जानी अपेक्षित है। साथ ही राज्य के आदिवासी बाहुल्य और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज तथा डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तकनीकी व आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान की जाए।                  इस अवसर पर संचालक कृषि राहुल … Read more

मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात

माफिया अब खुली जीप में पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकताः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात  धार्मिक आयोजन में व्यवधान डालने वाले की रावण व कंस जैसी दुर्गति तयः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने कहा, माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सपा सरकार, देखकर छूटता था पसीना सीएम योगी ने जन प्रतिनिधियों की मांग पर घोसी चीनी मिल के विस्तारीकरण के लिए मांगा प्रस्ताव  मऊ/लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ की धरती से माफिया को फिर खुली चुनौती दी। उन्होंने दो टूक कहा कि अब किसी माफिया व गुंडे में दुस्साहस नहीं है कि त्योहारों में उपद्रव कर दे। यदि किसी ने रामलीला, यज्ञ-कथा, जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, रक्षाबंधन आदि धार्मिक आयोजनों में व्यवधान डाला तो उसकी रावण व कंस जैसी दुर्गति तय है। किसी ने बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो उसका इंतजार यमराज ही करेंगे। अब कोई माफिया खुली जीप में चलकर पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ के गांधी मैदान में 392 करोड़ से अधिक लागत वाली 114 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने मऊ को क्रांतिधरा बताते हुए साहित्यकार श्याम नारायण पांडेय, समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती, मऊ को नई पहचान दिलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने पूर्व राज्यपाल फागू चौहान का भी जिक्र किया और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया।   अच्छी सरकारी देती है विकास, गलत लोग चुनने पर लगती है सुरक्षा में सेंध  मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकार विकास लेकर आती है। यह विकास बिना भेदभाव नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने का माध्यम होता है। सड़क या पुल जाति पूछकर नहीं चलने देते, स्वास्थ्य केंद्र जाति पूछकर उपचार और बाढ़ सुरक्षा के कार्य जाति पूछकर बचाव नहीं करते। जब अच्छे लोग चुने जाते हैं तो अच्छी सरकार आती है। जब गलत लोग चुने जाते हैं तो सुरक्षा में सेंध लगती है, जन विकास में लगने वाले पैसे में डकैती और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा होता है।  धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा किया जाता था मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश का यही हाल था। जिन लोगों की आयु 30-35 वर्ष से ऊपर है, वे भूले नहीं होंगे कि 21 वर्ष पहले 2005 में भरत-मिलाप कार्यक्रम पर दंगा कर मऊ को जलाने का प्रयास हुआ था। सत्ता के संरक्षण में माफिया रामलीला आयोजन में व्यवधान पैदा कर निर्दोष हिंदुओं का कत्लेआम कर रहे थे। माफिया को देखकर सपा का पसीना छूटता था, इनके मुंह से आवाज नहीं निकलती थी। माफिया के सामने नतमस्तक व नाक रगड़ने वाली सरकार मौन थी और यहां की सुरक्षा खतरे में थी। अराजकता का तांडव था। जनता यदि चंदा जुटाकर रामलीला, रामनवमी, यज्ञ, जन्माष्टमी, शिवरात्रि का आयोजन करती थी तो उसमें व्यवधान पैदा किया जाता था। शोहदे बेटियों का अपहरण करते थे, व्यापारी सूर्यास्त से पहले प्रतिष्ठान बंद करने को मजबूर थे। गरीब, युवा, नारी व किसान का उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लगता है  सीएम योगी ने कहा कि 2014 में जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपी तो सभी ने 12 वर्ष में बदलते भारत को देखा। मोदी जी कहते हैं कि हमारे लिए केवल चार जातियां (गरीब, युवा, नारी व किसान) हैं। इनका उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लग जाएगा और भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने दिल्ली में योजनाएं बनाईं, भाजपा शासित राज्यों ने इसे लागू भी किया, लेकिन 2014 से 2017 तक सपा सरकार ने यूपी में उन योजनाओं को लागू नहीं होने दिया। सपा ने गरीबों के लिए शौचालय, आवास, राशन, सड़क नहीं बनने दी।  चार बार सरकार के बावजूद सपा शासन में गरीबों को नहीं मिलीं सुविधाएं  सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में 65 लाख गरीबों को आवास, पौने तीन करोड़ गरीबों के घरों में शौचालय, 16 करोड़ गरीबों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। उपदेश देने वाले सपाइयों से पूछिए कि चार बार शासन करने के बाद भी उन्होंने और लगभग 50 वर्ष तक शासन करने वाली कांग्रेस ने यह कार्य क्यों नहीं किया। कांग्रेस-सपा सरकार में उनके गुंडे गरीब का राशन खा जाते थे और गरीब टकटकी लगाकर देखता था। 24 घंटे के भीतर मिलती है 5 लाख की सहायता  सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई है। किसान परिवार या बटाईदार यदि आपदा की चपेट में आ जाता है तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत 24 घंटे के अंदर जनप्रतिनिधि पांच लाख रुपये की सहायता राशि उसके घर जाकर देते हैं।  बिना रुके, झुके, थके चल रहे विकास अभियान सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में विकास अभियान बिना रुके, बिना झुके, बिना डिगे, बिना थके चल रहे हैं। हर गरीब के लिए आवास, पानी, सड़क, पुल, बाढ़ से बचाव आदि के प्रयास हो रहे हैं। सड़कें, पर्यटन केंद्र संवर रहे हैं, पुल-पुलिया बन रही हैं। बिजली परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। सुरक्षा का माहौल है, नौजवान के लिए नौकरी-रोजगार, बेटी के स्वावलंबन, अन्नदाता किसान के सम्मान के लिए योजनाएं चल रही हैं। विकास का पैसा विकास में और गरीब का पैसा गरीब के पास जा रहा है। सीएम ने नागरिकों से कहा कि वर्तमान को सजाने व संवारने का दायित्व आपके ऊपर है। आपने डबल इंजन सरकार को जिताने में योगदान दिया तो पीएम मोदी के नेतृत्व, मार्गदर्शन में सरकार सफल हुई और इसका श्रेय आपको जाता है।  सीएम ने बताई एक-एक वोट की ताकत सीएम योगी ने एक-एक वोट की ताकत बताई और कहा कि जब किसी देवस्थल का पुनरुद्धार व अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इसका पुण्य भी आपके खाते में जाता है। आपका एक वोट 500 वर्ष की गुलामी के कलंक को धोकर राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण करता है तो बेटी-व्यापारी की सुरक्षा, माफिया को मिट्टी में मिलाकर कर्फ्यू, उपद्रव मुक्त प्रदेश बनाने में योगदान देता है। विकास की यात्रा अनवरत आगे बढ़नी … Read more

किराया नहीं चुकाने वालों पर प्रशासन का एक्शन, हजारीबाग में दुकानें होंगी सील

हजारीबाग. नगर निगम की दुकानों का वर्षों से किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है। करोड़ों रुपये बकाया रहने के बाद नगर निगम प्रशासन सख्त मूड में आ गया है। बुधवार को सहायक नगर आयुक्त विपिन कुमार ने राजस्व संग्रह को लेकर समीक्षा बैठक कर साफ शब्दों में कहा कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि जमा नहीं करने वाले दुकानदारों की दुकानों को सील कर नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर निगम क्षेत्र के राजस्व संग्रह की समीक्षा बैठक में बताया गया कि शहर के में 21 स्थानों पर लगभग एक हजार से अधिक म्युनिसिपल शॉप संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन दुकानों पर कुल बकाया राशि लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये पहुंच चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 400 से अधिक ऐसे दुकानदार हैं जिनका किराया दो वर्षों से अधिक समय से लंबित है और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये से अधिक बकाया है। सहायक नगर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि नगर पालिका अधिनियम 2013 के तहत कार्रवाई करते हुए लंबे समय से बकायेदार दुकानों को सील किया जाएगा। इसके साथ ही उन दुकानों का नया आवंटन करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। निगम प्रशासन के इस सख्त रुख से बकायेदारों में हड़कंप मच गया है। बैठक में विशेष रूप से मटवारी स्थित म्युनिसिपल शॉप की स्थिति पर चिंता जताई गई। यहां लगभग 158 दुकानों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 51 लाख से अधिक बकाया है। चलेगा राजस्व वसूली अभियान सहायक नगर आयुक्त ने आज शुक्रवार से विशेष राजस्व वसूली अभियान चलाने का निर्देश देते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही कहा कि निगम की संपत्तियों का उपयोग कर व्यापार करने वाले दुकानदार यदि समय पर किराया नहीं देंगे तो अब सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नगर प्रबंधक सह नोडल पदाधिकारी उपेंद्र कुमार, राजस्व निरीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार सूरज कुमार समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

कोसी नदी के कटाव से खगड़िया का पीपापुल बंद, आवागमन ठप होने से बढ़ी परेशानी

खगड़िया. पसराहा थाना क्षेत्र के पैकात पंचायत को बिरवास के पास जोड़ने वाला कपसिया-बीरवास पीपापुल का एक जेटी मधेपुरा जिला के रतवारा थाना क्षेत्र के कपासिया की ओर से कोशी नदी बढ़ते जलस्तर और कटाव के कारण एप्रोच पथ से बीते गुरुवार को नीचे चला गया जिसके कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के परियोजना अभियंता बबलू कुमार शुक्रवार को इसे चालू करने के लिए पहुंचे किंतु वर्ष के कारण समाचार परेशान तक यह चालू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि एक हाइड्रा मंगाया गया था उससे ऊपर नहीं हुआ दो हाइड्रा मंगा कर इसे ऊपर कर दिया जाएगा। जेटी को खोलकर बीच में एक 12 मीटर का पीपा लगाया जाएगा। इसके बाद जेटी को जोड़ देने से यह चालू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जेटी नीचे गया था जिसमें पांच गीडर है वह नीचे चला गया है जो करीब 20 मीटर लंबा है। कोसी में कटवा के कारण ऐसा हुआ है। वह मरमती कार्य को लेकर स्थल पर बने हुए हैं। विभाग की ओर से इस पीपापुल को दुरुस्त कर आगामी 15 जून तक चालू रखने का आदेश दिया है, क्योंकि मानसून की तैयारियों के तहत हर साल 15 जून को इस अस्थायी पुल को हटा लिया जाता है। पैकात पंचायत के मुखिया शिकू पासवान देवठा पंचायत के मुखिया आलोक कुमार ने कि इस पीपा पुल से मधेपुरा खगड़िया भागलपुर की करीब 2 लाख की आबादी का आवागमन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां खगड़िया जिला के गोगरी सर्किल नंबर एक पैकात पंचायत की 15 हजार की आबादी देवठा पंचायत के 10 हजार की आबादी कोयला पंचायत के 15 हजार की आबादी के अतिरिक्त परबत्ता प्रखण्ड के सौर उतरी पंचायत सौर दक्षिणी पंचायत की आबादी तथा भागलपुर जिला के रायपुर आशा टोला आदि के साथ-साथ मधेपुरा जिला की बड़ी आबादी का आवागमन इस मार्ग से होता था जो इस पुल को धसने के बाद से बंद हो गया है। अब उन्हें लंबी दूरी तय करनी होगी गौरतलब है कि इस पीपापुल का उद्घाटन इस वर्ष बीते 28 जनवरी को हुआ था और महज कुछ महीनों के भीतर ही इसके बंद होने से लोगों के सामने आवाजाही का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसकी गुणवत्ता की पोल खोलने लगी है समाचार परेशान तक बिहार राज्य फूल निर्माण विभाग के परियोजना अभियंता बबलू कुमार स्थल पर बने हुए थे उन्होंने कहा कि हाइड्रा मंगाया जा रहा है इसे शीघ्र जोड़कर चालू किया जाएगा

हरियाणा को जल्द मिलेगा नया मुख्य सचिव, अनुराग रस्तोगी के उत्तराधिकारी की दौड़ में 10 IAS

चंडीगढ़. हरियाणा में एक साल के सेवा विस्तार पर चल रहे मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में कई वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों ने मुख्य सचिव पद के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। वर्ष 1990 बैच के आइएएस अधिकारी अनुराग रस्तोगी को प्रदेश सरकार ने पिछले साल सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले एक साल का सेवा विस्तार दिया था। उनका कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने जा रहा है। मुख्य सचिव बनने की दौड़ में दस आइएएस अधिकारी शामिल हैं। इन दावेदारों में से नौ ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी इसी साल अथवा अगले साल सेवानिवृत्ति है। ऐसे में सरकार को मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी देने के लिए गंभीर मंथन करना पड़ेगा। मुख्य सचिव पद के सबसे अहम दावेदार 1990 बैच के आइएएस सुधीर राजपाल हैं। राजपाल इसी साल नवंबर माह में सेवानिवृत्त होंगे। सुधीर राजपाल वर्तमान में गृह जैसे संवेदनशील विभाग संभाल रहे हैं। कानून-व्यवस्था, जेल प्रशासन और न्यायिक समन्वय जैसे विभाग सीधे सरकार के कोर प्रशासन से जुड़े होते हैं। वरिष्ठता के आधार पर वे सबसे आगे हैं। दावेदारों में शामिल आइएएस सुमिता मिश्रा दूसरी बड़ी दावेदार 1990 बैच की आइएएस सुमिता मिश्रा हैं। मिश्रा जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगी। इस समय वह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वित्त आयुक्त,स्वास्थ्य विभाग,चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी देख रही हैं। वर्ष 1990 बैच के आइएएस राजा शेखर वुंडरू इस समय परिवहन विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं, लेकिन वह जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस पद के लिए दावेदार 1991 बैच के आइएएस विनीत गर्ग सितंबर 2027 में सेवानिवृत्त होंगे और वर्तमान में उनके पास प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी विभाग की जिम्मेदारी है। 1991 बैच के आइएएस अनिल मलिक अप्रैल 2028 में सेवानिवृत्त होंगे। मलिक वर्तमान में केंद्र में सेवाएं दे रहे हैं। इसी बैच की आइएएस अधिकारी जी अनुपमा नवंबर 2027 में सेवानिवृत्त होंगी। वर्तमान में वह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग,नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी देख रही हैं। सेवानिवृत्त की लिस्ट में अपूर्व कुमार शामिल 1991 बैच के ही अपूर्व कुमार सिंह अक्टूबर 2027 में, केंद्र में सेवाएं दे रहे अभिलक्ष लिखी अक्टूबर 2026 में, 1992 बैच के आइएएस अरुण कुमार गुप्ता सितंबर 2026 में तथा 1993 बैच के आइएएस वी उमाशंकर जून 2028 में सेवानिवृत्त होंगे। उमाशंकर वर्तमान में सचिव, सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की जिम्मेदारी देख रहे हैं। उक्त सभी अधिकारी वरिष्ठता के आधार पर मुख्य सचिव पद के लिए प्रबल दावेदार हैं। अब सरकार द्वारा एक पैनल बनाकर बहुत जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निकाय चुनाव में AAP का दबदबा, 700 सीटों पर जीत; निर्दलीयों और कांग्रेस-SAD ने भी दिखाया दम

चंडीगढ़. पंजाब निकाय चुनाव के काउंटिंग जारी है। 115 काउंटिंग सेंटरों से आ रहे परिणामों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) 700 से अधिक सीटें जीतकर सबसे आगे चल रही है। श्रीहरगोबिंदपुर का रिजल्ट वार्ड नंबर एक से कांग्रेस की मनजीत कौर 51 वोटों से विजेता रहीं। वार्ड नंबर दो से कांग्रेस के नवदीप सिंह 222 वोटों से विजेता। वार्ड नंबर तीन से कांग्रेस की बलविंदर कौर 17 वोटों से विजेता।  वार्ड नंबर चार से आप के गौरव भल्ला 52 वोटों से विजेता। वार्ड नंबर पांच से आजाद उम्मीदवार से जीवन ज्योतिका 86 वोटों से विजेता। वार्ड नंबर छह से कांग्रेस की जसविंदर कौर 110 वोटों से विजेता। वार्ड नंबर सात से आप के चेतन कुमार निर्विरोध विजेता। वार्ड नंबर आठ से आजाद कुलवंत सिंह निर्विरोध विजेता। वार्ड नंबर नौ से आप के अमरीक सिंह निर्विरोध विजेता। वार्ड नंबर दस से आजाद उम्मीदवार हरविंदर कौर 330 वोटों से विजेता। वार्ड नंबर 11 से आजाद उम्मीदवार परमिंदर कौर निर्विरोध विजेता रहे। सुजानपुर नगर काउंसिल में कौन आगे? सुजानपुर नगर काउंसिल चुनाव में भाजपा को कर कांग्रेस को चार तथा आम आदमी पार्टी को चार सीट मिली तीन पर आजाद उम्मीदवार जीते सुजानपुर सुजानपुर नगर कौंसिल के हुए चुनाव के नतीजे मैं सभी पार्टियों को झटका लगा है इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को 4, भाजपा को 4, कांग्रेस को चार सीट मिली है। बरनाला में AAP की जीत जिला बरनाला के कस्बा धनौला की नगर कौंसिल के 13 वार्डों में से आम आदमी पार्टी के 8 उम्मीदवार चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं, जबकि 5 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल नगर कौंसिल धनौला में अपना खाता तक नहीं खोल सके। धनौला के वार्ड नंबर एक से आप उम्मीदवार रणजीत कौर चुनाव जीतीं। उन्हें कुल 396 वोट मिले।  पंजाब की जनता का आभार: मनीष सिसोदिया पंजाब नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों पर आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि मैं अरविंद केजरीवाल के प्रति दिखाए गए विश्वास और सम्मान के लिए पंजाब की जनता का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। पूरे पंजाब में लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि वे सुशासन की सराहना करते हैं और पिछले साढ़े चार वर्षों के काम से संतुष्ट हैं। सरकार ने गांवों और शहरों में अच्छा काम किया है और मतदाताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। धनौला फाइनल रिजल्ट: आप को मिला स्पष्ट बहुमत, 13 में से 8 वार्डों पर कब्जा आम आदमी पार्टी (AAP): 08 सीटें (पूर्ण बहुमत) आजाद (निर्दलीय): 05 सीटें कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल: 00 सीट सुजानपुर फाइनल रिजल्ट: भाजपा, कांग्रेस और आप को मिलीं 4-4 सीटें, 3 पर आजाद उम्मीदवार जीते आम आदमी पार्टी (AAP): 04 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP): 04 सीटें कांग्रेस (INC): 04 सीटें आजाद (निर्दलीय): 03 सीटें बठिंडा निगम: घोषित 21 सीटों में से 'आप' 14 पर आगे, पूर्व मेयर पदमजीत मेहता निर्विरोध जीते वार्ड 1: अमनदीप कौर राणा (आप) वार्ड 2: हरवीर सिंह (आप) वार्ड 3: रमनजीत (आजाद) वार्ड 4: उमेश गोगी (आप) वार्ड 6: बेअंत सिंह (आप) वार्ड 7: मंदीप कौर रामगढ़िया (आप) वार्ड 18: कंवलजीत सिंह (कांग्रेस) वार्ड 19: गुरदेव कौर हरजिंदर (आप) वार्ड 20: नरपिंदर सिंह जलाल (आजाद) वार्ड 22: श्याम लाल (आप) वार्ड 23: किरण रानी (कांग्रेस) वार्ड 34: बॉबी (कांग्रेस) वार्ड 35: बेबी (कांग्रेस) वार्ड 36: धर्मेंद्र (आप) वार्ड 37: अनीता गोयल (आप) वार्ड 38: जसपाल सिंह गोरा (आप) वार्ड 39: राज रानी (आप) वार्ड 40: सोनी (आप) वार्ड 41: सुमन शर्मा (आप) वार्ड 42: रितू (बीजेपी) वार्ड 46: पदमजीत मेहता (पूर्व मेयर) – (आप – निर्विरोध विजेता) पट्टी में बड़ा उलटफेर, 'आप' को करारा झटका, 9 सीटें जीतकर कांग्रेस बनी सबसे बड़ी पार्टी पट्टी नगर कौंसिल: अंतिम दलीय स्थिति (सभी 19 सीटें) कांग्रेस: 09 सीटें (बहुमत के आंकड़े से 1 कम) आम आदमी पार्टी (AAP): 06 सीटें केरों गुट (आजाद/निर्दलीय): 04 सीटें टांडा में आप ने 15 में से 10 वार्ड जीतकर हासिल किया शानदार बहुमत, कांग्रेस के खाते में आईं 5 सीटें वार्ड नंबर 1: हिना वैद (कांग्रेस) – 479 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 2: बलदेव राम (कांग्रेस) – 469 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 3: सरोज बाला (आम आदमी पार्टी) – 463 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 4: दविंदर सिंह (कांग्रेस) – 650 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 5: गुरप्रीत कौर (कांग्रेस) – 414 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 6: सेठ राम (आम आदमी पार्टी) – 582 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 7: नरिंदर कौर (आम आदमी पार्टी) – 402 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 8: हरमीत सिंह वड़ैच (आम आदमी पार्टी) – 349 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 9: प्रितपाल कौर (कांग्रेस) – 510 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 10: प्रवीन खन्ना (आम आदमी पार्टी) – 364 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 11: गुरबख्श कौर (आम आदमी पार्टी) – 684 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 12: हरि कृष्ण (आम आदमी पार्टी) – 667 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 13: परमिंदर कौर (आम आदमी पार्टी) – 453 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 14: मनजीत कौर (आम आदमी पार्टी) – 438 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 15: जसवंत कौर (आम आदमी पार्टी) – 382 वोट (विजेता) फाजिल्का में 25 में से 18 वार्डों के नतीजे घोषित; कांग्रेस 9 सीटों के साथ सबसे आगे कांग्रेस (INC): 09 सीटें आम आदमी पार्टी (AAP): 05 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP): 04 सीटें शिरोमणि अकाली दल (SAD): 00 सीट बहुजन समाज पार्टी (BSP): 00 सीट आजाद (निर्दलीय): 00 सीट गढ़दीवाला में 11 में से 7 वार्ड जीतकर आप ने हासिल किया पूर्ण बहुमत, कांग्रेस को मिलीं 3 सीटें वार्ड नंबर 1: सुनीता (कांग्रेस) – 202 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 2: दर्शन बहल (आम आदमी पार्टी) – 275 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 3: रामा रानी (आम आदमी पार्टी) – 220 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 4: हरविंदर कुमार (कांग्रेस) – 192 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 5: मोनिका (आम आदमी पार्टी) – 141 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 6: सोनिका कौंडल (आम आदमी पार्टी) – 129 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 7: मोनिका (आम आदमी पार्टी) – 173 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 8: रछपाल सिंह (आजाद / निर्दलीय) – 115 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 9: परमजीत कौर (आम आदमी पार्टी) – 249 वोट (विजेता) वार्ड नंबर 10: पंकज … Read more

सीएम योगी बोले- मातृभूमि के प्रति समर्पण ही असली राष्ट्रभक्ति

जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ जिले के गांव ताजोपुर में ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का किया उद्घाटन सीएम बोले: गांव आत्मनिर्भर बनेंगे तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार ताजोपुर मॉडल को मुख्यमंत्री ने बताया राष्ट्र निर्माण, ग्रामीण स्वावलंबन और “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की जीवंत मिसाल एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है: मुख्यमंत्री मऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ जिले के गांव ताजोपुर स्थित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने भारतीय सेना में 35 वर्षों तक सेवा देने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करने के बाद अपनी जन्मभूमि लौटकर जो कार्य किया है, वह केवल संस्थान निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना और विभिन्न संस्थानों में वर्षों सेवा देने के बाद ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह का अपने गांव लौटकर वहां अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज, आईटीआई और सैनिक पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों की स्थापना करना पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह वही भाव है, जिसे हमारे शास्त्रों में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” कहा गया है। जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण ने स्वर्णमयी लंका की समृद्धि की चर्चा की थी, तब भगवान श्रीराम ने कहा था, “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन है। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसकी जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने इसी आदर्श को अपने जीवन में उतारा है। भारतीय सेना के आर्मी मेडिकल कोर में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने अपनी जन्मभूमि ताजोपुर लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव लौटकर उन्होंने जिस प्रकार स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के केंद्र खड़े किए हैं, वह ग्रामीण भारत के लिए विकास का आदर्श मॉडल है। अस्पताल ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ब्रिगेडियर पी.एन. सिंह से संबंध लगभग 15-16 वर्ष पुराना है। तभी से वे उनके समाजसेवा और राष्ट्रसेवा से जुड़े कार्यों के बारे में सुनते रहे हैं और आज उन्होंने अपनी आंखों से इसे देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ताजोपुर में स्थापित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल केवल एक अस्पताल नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र है। इसी प्रकार सैनिक नर्सिंग कॉलेज के माध्यम से एएनएम, जीएनएम, पोस्ट बेसिक बीएससी और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कराई जा रही है। फार्मेसी कॉलेज के माध्यम से डी.फार्मा और बी.फार्मा की शिक्षा दी जा रही है, जबकि आईटीआई के जरिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सैनिक पब्लिक स्कूल क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये संस्थान केवल भवन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। यहां रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार मिल रहा है और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इन संस्थानों से जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है। सभी को लेने होंगे "पंच प्रण" मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान दिए गए “पंच प्रण” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करे, तब वह विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो। इसके लिए हर भारतीय को पांच प्रण लेने होंगे। पहला प्रण हमारी विरासत पर गर्व करने का है। हम राम, कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई जैसे महानायकों के वंशज हैं। हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। दूसरा प्रण गुलामी की मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करने का है। हमें हर उस सोच और प्रवृत्ति को त्यागना होगा, जिसमें विदेशी मानसिकता या गुलामी की गंध हो। तीसरा प्रण “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” है। जातिवाद, क्षेत्रवाद और छुआछूत जैसी बुराइयों ने देश को कमजोर किया। समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ खड़े होना हर भारतीय का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने चौथे प्रण के रूप में सैनिकों और सुरक्षा बलों के सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि जब देश का सैनिक सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर माइनस तापमान में खड़ा रहता है, जब राजस्थान के रेगिस्तान में 50 डिग्री तापमान में सीमा की रक्षा करता है और जब पुलिसकर्मी दिन-रात अपराधियों से लड़ते हैं, तभी हम चैन से सो पाते हैं। इसलिए हर भारतीय के मन में सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पांचवां प्रण नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है। हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा। प्रदेश विकसित तभी होंगे, जब जनपद विकसित होंगे और जनपद तभी विकसित होंगे, जब ताजोपुर जैसे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल, सैनिक पब्लिक स्कूल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज और आईटीआई जैसे संस्थान आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह पिछले डेढ़ दशक से “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र के साथ लगातार राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में जुटे हुए हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची देशभक्ति अपनी जन्मभूमि और समाज के लिए काम करने से सिद्ध होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे सभी प्रयासों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकार के उत्कृष्ट … Read more