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फ्यूल सरचार्ज से महंगी हुई बिजली, बढ़कर आएगा बिल

 लखनऊ  बढ़ती महंगाई की मार से परेशान बिजली उपभोक्ताओं को जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिल भी देना होगा। भीषण गर्मी के चलते मई में कहीं अधिक बिजली का उपभोग होने से उपभोक्ताओं का वैसे ही जून में बढ़कर बिल आना था। अब बिजली कंपनियां मार्च माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) के लिए मई के बिल के साथ जून में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं से 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली भी करेंगी। इस संबंध में पावर कारपोरेशन ने आदेश जारी किया है। उपभोक्ताओं को जुलाई में भी जून के बिल के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। चूंकि विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित किया है और पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने 5.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दिखाते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डाला है, इसलिए विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ तथा ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से अधिभार शुल्क के तौर पर बिजली के बिल में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों ने विद्युत उत्पादन कंपनियों से दो वर्ष पुराने बकाए को जोड़ते हुए बिल तैयार कराया है। इसमें पुराने बकाए का 1400 करोड़ रुपये शामिल है। संबंधित आदेश में लिखा है कि अधिभार 20 प्रतिशत वसूला जाना चाहिए, जिससे यह लगता है कि जुलाई में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलना जा सकता है। वर्मा ने आयोग से मांग की है कि ईंधन अधिभार वसूलने पर रोक लगे। उन्होंने कहा है कि मार्च में महंगी बिजली खरीदने की विस्तृत जांच हो। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है। ऐसे में ईंधन अधिभार बढ़ाने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर भार डालने के बजाय उसे सरप्लस से ही समायोजित (एडजस्ट) किया जाए। उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने के मामले को वह जल्द ही आयोग के समक्ष उठाएंगे। वह ईंधन अधिभार निर्धारण संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करेंगे। उल्लेखनीय है कि मई में ईंधन अधिभार के एवज में 1.52 प्रतिशत बिजली का बिल कम हुआ था। इससे पहले अप्रैल में 2.14 प्रतिशत अधिक बिल देना पड़ा था।  

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित “गोरस” मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध, पशुपालक और किसान आसानी से कर सकेंगे डाउनलोड

भोपाल  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं के संतुलित आहार प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में पशुपालन एवं डेयरी विभाग निरंतर नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस ऐप के उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। प्रदेश के पशुपालक एवं किसान गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप विकसित करने का उद्देश्य मध्यप्रदेश में दो करोड़ से अधिक गायों और भैंसों का पालन किया जाता है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से संतुलित पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में 20 से 30% तक की कमी आती हैं। पशुपालकों की इन समस्याओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा "गोरस मोबाइल ऐप" विकसित किया गया है। पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी, जैसे नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, दुग्ध उत्पादन का चरण तथा वर्तमान पशु आहार आदि दर्ज करेंगे, ऐप उनके पशु के लिए संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही ऐप यह भी बताएगा कि आहार प्रबंधन में सुधार करने पर एक ब्यांत के दौरान पशुपालक को कितना आर्थिक लाभ हो सकता है। ऐप वर्तमान में दिए जा रहे आहार के कारण होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित "गोरस" मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है। पशुपालक एवं किसान इसे अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर विभिन्न प्रकार की उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप की प्रमुख विशेषताएं यह ऐप पूरी तरह से हिंदी भाषा में विकसित है, जो गाय एवं भैंसों के लिए संतुलित आहार संबंधी सुझाव प्रदान करता है। साथ ही, उपलब्ध चारे के संयोजन के आधार पर अधिकतम दुग्ध उत्पादन और न्यूनतम लागत का दर्शाता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी यह कार्य करने में सक्षम है। सबसे खास बात यह है कि ये ऐप 28 से अधिक स्थानीय चारे की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। मौसम विशेषकर गर्मी तथा गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार स्वचालित सुझाव देता है। गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इसके अलावा पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ का आकलन प्रदान करता है और अवर्णित गायों एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार संबंधी सलाह देता है। ऐसे करें डाउनलोड "गोरस" मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर पर जाना होगा। वहां "गोरस ऐप" सर्च करें। ऐप दिखाई देने पर उसे डाउनलोड करें। डाउनलोड होने के बाद इंस्टॉलेशन की अनुमति दें और "इंस्टॉल" विकल्प पर क्लिक करें। आवश्यक सुरक्षा अनुमति प्रदान करने के बाद ऐप को खोलकर उपयोग किया जा सकता है। विभाग द्वारा विकसित किया गया ऐप पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने तथा वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग द्वारा "गोरस" मोबाइल ऐप विकसित कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह ऐप सरल एवं सहज हिंदी भाषा में तैयार किया गया है और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। पशुपालक एवं किसान इसे आसानी से डाउनलोड कर इसका लाभ उठा सकते हैं।  

भीषण गर्मी का असर, कई बांध सूखे के कगार पर; दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर

 नई दिल्ली  भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के सामने एक नई और गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, मई महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर बेहद तेजी से नीचे आया है। महज 22 दिनों के भीतर इनमें पानी का स्टॉक 12% तक कम हो गया है, जिसके बाद अब कुल क्षमता का केवल 25% पानी ही शेष बचा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के आखिरी हफ्ते तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर पर सिमट गया है। मई महीने में आई भारी गिरावट मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो इनकी कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा अर्थ यह है कि कड़कती धूप और पानी की भारी मांग के कारण एक महीने के भीतर ही मुख्य जल स्रोतों से लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई है, जिसने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन जिस रफ्तार से बांध खाली हो रहे हैं, वे आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती हैं। संकटग्रस्त बांधों की बढ़ती संख्या मई की शुरुआत में जब गर्मी का असर कम था, तब देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ा, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। अत्यधिक गर्मी के कारण महीने के अंत तक कई जलाशय खाली हो चुके हैं, जिससे गंभीर संकट का सामना कर रहे बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। सतारा का कोयना बांध भी इस समय गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। पानी की किल्लत की सबसे भयावह और डरावनी तस्वीर दक्षिण भारतीय राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर मात्र 17.55% रह गया है। इसके कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गई है। देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे बड़े जलाशय मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया। बिजली उत्पादन पर संकट पानी की इस भारी कमी का सीधा असर देश के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 में मई की शुरुआत में ही पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे चला गया था, और अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57% से घटकर 26.60% और पश्चिमी भारत में 42.36% से कम होकर 28.53% पर आ गया है, जबकि साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में पानी का भारी अकाल साफ देखा जा सकता है। इस भीषण संकट के बीच अब सभी की निगाहें केवल आने वाले मानसून पर टिकी हैं।

गोरखपुर में पर्यटन को नई उड़ान: रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक नया टूरिस्ट स्पॉट तैयार है। सीएम योगी आदित्यनाथ दो जून को इसका लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, 20.39 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए चिलुआताल के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण के काम का लोकार्पण करेंगे। गोरखपुर के दक्षिणी छोर में रामगढ़ताल योगी सरकार द्वारा कराए गए कायाकल्प से गोरखपुर के टूरिज्म का हॉट स्पॉट बना हुआ है तो अब उत्तरी छोर पर चिलुआताल पर्यटकों को लुभा रहा है। चिलुआताल घाट के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के मुताबिक चिलुआताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 20 करोड़ 39 लाख रुपये की परियोजना को मूर्त रूप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि चिलुआताल भी रामगढ़ताल की तरह दशकों से उपेक्षित पड़ा रहा। योगी सरकार ने पहले रामगढ़ताल का कायाकल्प कर उसे वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया तो अब चिलुआताल को संवारा गया है। कार्यदायी संस्था के रूप में यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से कराए गए कार्यों में 570 मीटर पाथवे निर्माण, घाट की सीढ़ियों का निर्माण, ताल किनारे रेलिंग, सोलर लाइट, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, बेंच, 400 मीटर एप्रोच रोड, 500 मीटर साइड वाल एवं नाली निर्माण, गेट के सुपर स्ट्रक्चर का कार्य, कैरेट बोल्डर और स्टोन पिचिंग, दुकान, टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण आदि शामिल है। रामगढ़ताल के नौका विहार की तरफ विकसित होने से चिलुआताल की आभा निखरकर सामने आ रही है। लोग सुबह-शाम टहलने के लिए आना शुरू कर दिए हैं। सीएम योगी के विजन से विकसित चिलुआताल टूरिस्ट स्पॉट मनोरंजन के साथ रोजगार का केंद्र भी बनेगा। सात दुकानें यहां बनकर तैयार हो गईं हैं। घाट पर एक तरफ लोग सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर मनोरंजन करेंगे वहीं लोग यहां लगी दुकानों पर जायके का आनंद भी ले सकेंगे। यही नहीं, चिलुआताल में भी रामगढ़ताल की तर्ज पर लोगों को बोटिंग करने की सुविधा मिलेगी।

ईरान की Maham-3 नेवल माइन पर विवाद, होर्मुज में अमेरिकी तलाशी अभियान तेज

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है. इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है. वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स… जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा. माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है. हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

 सिद्धार्थनगर  बुद्ध की धरती की पहचान बन चुका कालानमक चावल अब वैश्विक बाजार में नई ऊंचाई छूने जा रहा है। अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध कालानमक चावल की जिले से पहली बार एक हजार टन की रिकॉर्ड खेप सिंगापुर भेजी जाएगी। अब तक सिंगापुर समेत अन्य देशों को अधिकतम 50 टन तक ही कालानमक का निर्यात हो सका था। ऐसे में यह न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे कालानमक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और हजारों किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। मधुवापार स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और सिंगापुर की संस्था जेन बुद्धा के बीच इसके लिए सहमति बन चुकी है। समझौते के तहत 20 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक चरणबद्ध तरीके से एक हजार टन कालानमक चावल सिंगापुर भेजा जाएगा। इसके लिए सिद्धार्थनगर के चार और महराजगंज के एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ भी समझौता हो चुका है। कालानमक को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई गति मिली है। बुद्ध की धरती की पहचान बने इस धान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक को सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल भेंट कर इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूती दी थी। जिले में बीते दो वर्षों के दौरान आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, कालानमक महोत्सव और विभिन्न प्रचार कार्यक्रमों ने भी इसकी मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कामन फैसिलिटी सेंटर संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों से 50 से 75 रुपये प्रति किलो तक की दर से धान खरीदा जाएगा। जो किसान चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध करा सकेंगे, उनके घर से सीधे खरीद की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को परिवहन और कुटाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कालानमक की मांग उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से जिले में खरीदारी कर रही हैं। कुशीनगर की प्रविधान कंपनी, टू ब्रदर्स और इंडिया गेट बासमती जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां भी यहां सक्रिय हैं। वर्तमान में 20 से अधिक कंपनियां जिले में कालानमक की खरीद के लिए काम कर रही हैं। ब्लॉकों में भेजे गए 200 क्विंटल बीज उधर कृषि विभाग भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि इस बार जिले के 14 ब्लाकों के बीज गोदामों पर 200 क्विंटल कालानमक बीज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 14 एफपीओ अपने सदस्य किसानों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं। निजी विक्रेताओं ने भी कालानमक बीज की मांग को देखते हुए पर्याप्त भंडारण किया है। जिले में 500 से अधिक किसान अपने संरक्षित बीज का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष कालानमक का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

54 हजार 923 ग्रामों एवं 425 नगरीय निकायों में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण

भोपाल  मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operation-HLO) का फील्ड कार्य 30 मई 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। राज्यभर में 01 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस व्यापक अभियान के दौरान प्रत्येक ग्राम एवं नगरीय क्षेत्र में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर मकानों तथा उनमें निवासरत परिवारों से निर्धारित जानकारी संकलित की गई। इस चरण में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों संबंधी जानकारी मोबाइल एप के जरिए डिजिटल रूप से एकत्रित की गई। जनगणना 2027 की यह प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यमों पर आधारित रही, जिसके अंतर्गत फील्ड कार्य की सतत मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से की गई। इससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित हुई। सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में यह कार्य 55 जिलों, 425 नगरीय निकायों तथा 449 तहसीलों के अंतर्गत 54 हजार 923 ग्रामों में संपादित किया गया। मकान सूचीकरण ब्लॉकों में 1 लाख 44 हजार से अधिक प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा कार्य किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 15 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक रिजर्व के रूप में तैनात किए गए थे। निर्धारित समयसीमा में पूरे प्रदेश में मकानों की गणना का कार्य पूर्ण होना प्रशासनिक समन्वय एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जनगणना के दौरान संकलित की गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रहेंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति-निर्माण, विकास योजनाओं के निर्माण तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित समय पर संबंधित आंकड़े जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण के पूर्व राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की गई थी। इस अवधि में प्रदेश के 7 लाख से अधिक परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की, जो नागरिक सहभागिता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या की गणना (Population Enumeration-PE) का कार्य फरवरी 2027 में संपादित किया जाएगा। इस चरण में परिवारों के सभी सदस्यों से निर्धारित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाएगी। जनगणना अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, प्रगणकों एवं प्रदेशवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया द्वारा जनजागरूकता और प्रचार-प्रसार में निभाई गई सक्रिय भूमिका से जनसहभागिता को व्यापक बल मिला। निदेशक जनगणना कार्य, मध्यप्रदेश  संजीव वास्तव एवं सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य मती शिल्पा गुप्ता ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल एवं समयबद्ध संपादन पर प्रदेश के सभी नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले जनगणना के द्वितीय चरण में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकेगा।  

बिजली चोरी पर सख्ती: ट्रांसफार्मर-स्तरीय डेटा से होगी खपत और बिलिंग की निगरानी

पटना  बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अब अगले एक दशक तक ऊर्जा लेखांकन (इनर्जी अकाउंटिंग) का कार्य भी करना होगा। इसके लिए कंपनियां क्षेत्रवार निगरानी करेंगी और बिजली वितरण तथा खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करेंगी। बिजली कंपनियों ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तकनीकी माध्यमों से बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। कैसे होती है इनर्जी अकाउंटिंग? बिजली कंपनियों ने प्रत्येक क्षेत्र में स्थापित पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर सिम आधारित विशेष उपकरण लगाए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से ट्रांसफार्मर से वितरित होने वाली बिजली की जानकारी सीधे बिजली कंपनी के सर्वर तक पहुंचती है। किसी क्षेत्र में मौजूद सभी ट्रांसफार्मरों से आपूर्ति की जा रही बिजली का नियमित डाटा उपलब्ध रहता है। इसके बाद उपभोक्ताओं की वास्तविक बिजली खपत और बिलिंग के आंकड़ों का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया को इनर्जी अकाउंटिंग कहा जाता है। इससे यह पता लगाया जाता है कि वितरित बिजली और बिलिंग के बीच कितना अंतर है। स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों को मिली जिम्मेदारी जिस क्षेत्र में जिस कंपनी ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए हैं, उसी कंपनी को वहां इनर्जी अकाउंटिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। संबंधित कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी ट्रांसफार्मर से जितनी बिजली वितरित हो रही है, उसके अनुरूप बिलिंग क्यों नहीं हो रही है। कंपनी ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ता के बिल और बिजली खपत का सूक्ष्म विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर वह बिजली कंपनी को रिपोर्ट सौंपेगी कि बिलिंग में कमी या असंगति कहां से उत्पन्न हो रही है। इस प्रक्रिया के जरिए बिजली चोरी में संलिप्त उपभोक्ताओं की पहचान करना आसान होगा। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी उपभोक्ता के यहां स्वीकृत या वास्तविक लोड अधिक होने के बावजूद उसका बिजली बिल अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं है। बिहार में 90 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगे बिहार में वर्तमान में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.22 करोड़ है। इनमें से लगभग 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान लगातार जारी है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों के जिम्मे इनर्जी अकाउंटिंग का दायरा भी लगातार बढ़ता जाएगा। बिजली कंपनियों का मानना है कि इससे बिजली चोरी पर लगाम लगाने के साथ-साथ वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

तबादला नीति के अंतिम दिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, अलीगढ़-वाराणसी समेत कई जिलों में बदले गए CMO

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति के तहत 31 मई यानी आज तक ही विभागीय तबादले होंगे। तबादलों की सूची जारी करने के कारण ही रविवार को भी सरकारी कार्यालय खोले गए हैं और सूची को अंतिम रूप दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी रविवार को लगभग दो दर्जन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का ट्रांसफर किया। कानपुर के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामनाथ सिंह को अलीगढ़ का नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है। अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. नीरज त्यागी को आगरा मंडल का संयुक्त निदेशक बनाया है। इनके साथ ही डॉ. प्रमोद कुमार सीएमओ अंबेडकर नगर, डॉ. मुकेश कुमार को सीएमओ वाराणसी, डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को सीएमओ गाजियाबाद, डॉ. हरिनंदन प्रसाद को सीएमओ जालौन, डॉ. रमेश कुमार मिश्रा को सीएमओ सोनभद्र, डॉ. रंजन गौतम का सीएमओ बाराबंकी, डॉ. अजय कुमार शर्मा को सीएमओ उन्नाव, डॉ. अभय नारायण राय को सीएमओ बलिया, डॉ. अलका शुक्ला को सीएमओ हमीरपुर, डॉ. उदयभान सिंह को सीएमओ फतेहपुर, डॉ. किशोर कुमार आहूजा को सीएमओ हापुड़, डॉ. गंगाराम गौतम को सीएमओ जौनपुर, डॉ. पंकज कुमार को सीएमओ मऊ, डॉ. भुवन चन्द्र पंत को सीएमओ पीलीभीत, डॉ. रमाकांत सागर को सीएमओ अमरोहा, डॉ. रामनाथ सिंह को सीएमओ अलीगढ़, डॉ. विकास चन्द्रा को सीएमओ कन्नौज, डॉ. विनय कुमार को सीएमओ महोबा, डॉ. वेद प्रकाश को सीएमओ हाथरस और डॉ. सुखरंजन समदर को सीएमओ सीतापुर के पद पर तैनात किया गया है  

महाराष्ट्र में बड़ा अपडेट: e-KYC सख्ती के बाद घटकर 1.66 करोड़ हुई लाभार्थियों की संख्या

महाराष्ट्र महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना आगे भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल e-KYC की समयसीमा को आगे बढ़ाने या नए लाभार्थियों को जोड़ने की कोई योजना नहीं है। सरकार द्वारा चलाए गए एक सत्यापन अभियान के बाद लाभार्थियों की सूची में 80 लाख नाम काट दिए गए हैं। योजना के शुरुआती दौर में लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, जो अब घटकर 1.66 करोड़ रह गई है। दस्तावेजों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए चलाई गई e-KYC मुहिम 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जिन महिलाओं की e-KYC अधूरी रह गई थी, उनकी अपीलों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार के पास e-KYC की समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाभार्थियों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके अलावा वर्तमान में नए लाभार्थियों को जोड़ने का भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।" क्यों कटे 80 लाख महिलाओं के नाम? आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं। तय समयसीमा तक e-KYC पूरा न करना या रिकॉर्ड अपडेट न कर पाना, दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना, योजना की तय पात्रता और आय मानदंडों को पूरा न कर पाना और व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी होना। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नवंबर 2025 से दस्तावेज अपडेट करने की समयसीमा को कई बार बढ़ाया था और 30 अप्रैल को अंतिम तारीख घोषित किया गया था। महिलाओं में नाराजगी सूची से नाम हटाए जाने के कारण प्रभावित महिलाओं को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पुणे जिले की रहने वाली माया वाघमारे ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, "मैंने अपने दस्तावेज जमा किए थे और मुझे आश्वासन दिया गया था कि सिस्टम अपडेट हो जाएगा। लेकिन मेरा नाम ही हटा दिया गया। वह मासिक सहायता मेरे घर के खर्चों के लिए बहुत जरूरी थी।" एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई महिलाओं को लग रहा था कि सरकार पहले की तरह इस बार भी तारीख आगे बढ़ा देगी। इस लापरवाही के कारण अब उनकी मासिक किस्तें अचानक रुक गई हैं। विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई यह स्पष्टीकरण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के उन आश्वासनों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस योजना को बंद कर दिया जाएगा। शिंदे ने हाल ही में दोहराया कि सरकार महिलाओं और किसानों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और इस पहल के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। साल 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई 'लाड़की बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। महायुति सरकार की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ आता है।